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Blog: अनुशीलन

Blogger: डॉ.लक्ष्मीकांत शर्मा
रात थी स्वप्न था ~~~~~~~~~~~~~ (डॉ.लक्ष्मी कान्त शर्मा )रात थी और स्वप्न था तुम्हारा अभिसार था !कंपकपाते अधरद्व्य पर कामना का ज्वार था !स्पन्दित सीने ने पाया चिरयौवन उपहार था ,कसमसाते बाजुओं में आलिंगन शतबार था !!आखेटक था कौन और किसे लक्ष्य संधान था !अश्व दौड़ता रात्रि का इन सबसे अ... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   6:50pm 9 Sep 2016 #
Blogger: डॉ.लक्ष्मीकांत शर्मा
तुम्हारे स्मृति वन से ~~~~~~~~~~~~~~~{I}शहर के दूसरे छोर पर जहाँ पेड़ों का घना झुरमुट है एक वीरान सा मंदिर ,एक टूटा सा गुम्बद है वहीँ तुम्हारा “स्मृतिवन”है  {II}यहीं एक दिन “केवलार” के लाल –बैंगनी फूलों वाले झाड तले कहा था तुमने आओ हिसाब करें कितने दिन हम यूँ ही निरुदे... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   5:29pm 24 May 2016 #
Blogger: डॉ.लक्ष्मीकांत शर्मा
फाग-फाग होरी हो गई ~~~~~~~~~~~~( डॉ.लक्ष्मीकांत शर्मा)(1)आज फिर अचानकथम सी गयीं हवाएं ,ठिठक गए पत्तों के पांव !जाग सी उठी घटाएं ,कुनमुनाई पीपल की छाँव !! (2)आज फिर अचानक“सोनजूही” ने बरसा दिए,फूल अंजुरी भर-भर ! सरसों के खेत में उड़ते उड़ते,रुक गए कृष्ण-भ्रमर!! (3)आज फिर अचानकबादलों की ओ... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   8:21am 12 May 2016 #
Blogger: डॉ.लक्ष्मीकांत शर्मा
ऐसे ही आना तुम ~~~~~~~~~~~~~(डॉ.लक्ष्मीकान्त शर्मा )ऐसे ही आना तुम चली आती हैं जैसे सूरज की रश्मियाँ सोनार दुर्ग की प्राचीर से करने रोज अठखेलियाँ !ऐसे ही रुक जाना तुम जैसे थार के  इस आखिरी स्टेशन पर थम जाते हैं रेल के पहिएवापस मुड़ते हैं कल फिर लौटने के लिए !ऐसे गुनगुनाना तुम जैस... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   8:03am 12 May 2016 #
Blogger: डॉ.लक्ष्मीकांत शर्मा
गौरैया ,कभी कभी लगता है ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~(डॉ.लक्ष्मीकान्त शर्मा )कभी कभी लगता है गौरैया ………पूछूँ तुमसे किस अनाम देस से आई हो किस का संदेस लाई हो आखिर तुम हो कौन सूखी डाल पर बैठी इतनी सहज इतनी मौन कभी कभी लगता है गौरैया …….रच डालूँ कुछ नगमात इस अशांत से वक़्त में क... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   7:16am 5 Mar 2016 #
Blogger: डॉ.लक्ष्मीकांत शर्मा
रश्मि शर्मा की कविताओं के विविध आयाम : ‘नदी को सोचने दो’---------------------------------------------------------------------------------------                  नदी को सोचने दोकविता संग्रहलेखिकाः रश्मि शर्मामूल्यः120 रुपएप्रकाशकः बोधि प्रकाशन, जयपुररांची के  काव्यांचल में अपेक्षाकृत युवा व सशक... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   10:06am 27 Feb 2016 #
Blogger: डॉ.लक्ष्मीकांत शर्मा
फाग-फाग होरी हो गई  ~~~~~~~~~~~~~~~~(डॉ.लक्ष्मीकान्त शर्मा )(1)आज फिर अचानकथम सी गयीं हवाएं ,ठिठक गए पत्तों के पांव !जाग सी उठी घटाएं ,कुनमुनाई पीपल की छाँव !!(2)आज फिर अचानक“सोनजूही” ने बरसा दिए,फूल अंजुरी भर-भर ! सरसों के खेत में उड़ते उड़ते,रुक गए कृष्ण-भ्रमर!!(3)आज फिर अचानकबादलों की ओ... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   9:36am 27 Feb 2016 #
Blogger: डॉ.लक्ष्मीकांत शर्मा
फिर से दे मुझे ~~~~~~~~~~~ (लक्ष्य “अंदाज़”)पीले शहर के वो खुशनुमा मंजर फिर से दे मुझे !!रेत से भरे नंगे पांवों  के सफर फिर से दे मुझे  !!रक्से सहरा शबे शामियाना इक और बार बख्श ,उजड़ी नींद कांपते कपड़े का दर फिर से दे मुझे !!किसी सूने गलियारे में तेरा सट के सिमट जाना ,धडकते सीने पे म... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   6:19am 17 Jan 2016 #
Blogger: डॉ.लक्ष्मीकांत शर्मा
गुजरे साल से खुश हैं ~~~~~~~~~~~~~~~ (लक्ष्य “अंदाज़”)हम वो हैं जो के गुजरे साल से खुश हैं !!माछ नहीं न सही हम दाल से खुश हैं !!बिखरी हुई रेत की कहानियाँ कौन कहे ,तेरे गीतों के उड़ते गुलाल  से खुश हैं !!सावन ने धरती की  सूनी गोद भरी है , फूल ले लो हम पातभरी डाल से खुश हैं !!तुम दोस्तों के भ... Read more
clicks 95 View   Vote 0 Like   6:53pm 18 Dec 2015 #
Blogger: डॉ.लक्ष्मीकांत शर्मा
मेरे अदीब रहने दे ~~~~~~~~~~~~~ (लक्ष्य “अंदाज़”)सब झमेले हादिसों के मेरे करीब रहने दे !!हाथ ना रख सीने पे जख्मे-सलीब रहने दे !!  फिर इक बार धूप फिर से वही तन्हाई है ,इस पे गजल ना लिख मेरे अदीब रहने दे !!सर्द सर्द इन रातों की तवील सी तन्हाइयां ,चाँद न सही पहलू में मेरा हबीब रहने दे !!फू... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   8:50am 11 Dec 2015 #
Blogger: डॉ.लक्ष्मीकांत शर्मा
क्यूँ ना चाहूँ    ~~~~~~~~~~(लक्ष्य “अंदाज़”)  दर्द की बारिशों के बाद धनक सा खिला है !!तुझे क्यूँ ना चाहूँ जो अब जा के मिला है !!जूनूँ –ऐ- इश्क नहीं ये सादा सा रिश्ता है ,खुशबू बनकर जो मेरी हवाओं में घुला है !!आजाद ही रहते हैं रंगों -बू चाँद बारिशें ,कौन मिल्कियत बांधे किसका हौसल... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   6:42pm 28 Nov 2015 #
Blogger: डॉ.लक्ष्मीकांत शर्मा
तू  भी समझा होता     ~~~~~~~~~~~~~~(लक्ष्य “अंदाज़”)  बेहतर होता ये शनासाई समझा होता !!उगते सूरज की  तनहाई समझा होता !!बागो-शुबहा में फूलों के खिलने से पहले ,उस वसले-गुल की रानाई समझा होता !!मेरे होठों पे अपना नाम ढूंढने की जगह,मेरी नज्मात की रोशनाई समझा होता !!डूबती साँझों क... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   6:38pm 28 Nov 2015 #
Blogger: डॉ.लक्ष्मीकांत शर्मा
दूरियाँ कम कर दे ~~~~~~~~~~~~ (लक्ष्य “अंदाज़”)  इस से पहले कि देर हो जाए दूरियाँ कम कर दे !!आ गले मिल शिकवों भरी मजबूरियां कम कर दे !!नर्म अल्फाजों की हरारत कुछ इस तरह अता कर ,बदन में सुलगते लहू की चिनगारियाँ कम कर दे !!अपने गीतों में सुनपेड़ की जलती लाशें भी लिख ,बाम पर इठलाते महबूब ... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   8:30am 25 Nov 2015 #
Blogger: डॉ.लक्ष्मीकांत शर्मा
सोचो, सुदेष्णा दृश्य यूँ भी बदलते हैं ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~असंख्य शंख मालिका पीत चित्र तालिका !!रास राग गुनती हो सुर की संचालिका !!उद्दीपिनी संदीपिनी दैदीप्य सी दामिनी !!सौष्ठवी तुम सुन्दरी मृदुल सुहासिनी !!दिव्यका देबांगी शुभ्रा  शुभांगी बज्र कठोर मन कमला कोमलांगी !!भाव... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   6:00am 23 Nov 2015 #
Blogger: डॉ.लक्ष्मीकांत शर्मा
सोचो, सुदेष्णा दृश्य यूँ भी बदलते हैं ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~कहो , तुम कौन हो जन्मों से मौन हो झील के पानियों में हंसिनी सी तैरती !!निश्शब्द शब्द टेरतीकालनिशा की झोली से नींद को सकेरती चक्षुओं की चितवन अनेक चित्र उकेरती !!यक्षिणी कि , भैरवी अप्सरा कि , गंधर्वीरक्त वाहिका में क्यूं उत... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   6:59pm 14 Nov 2015 #
Blogger: डॉ.लक्ष्मीकांत शर्मा
द से दवात द से दर्द~~~~~~~~~~~~~~~{“Tumhen Yaad Hoga” }दशहरे वाले दसवें महीने ने ,फिर दी है दस्तक आ रहा है  दबे पाँव दग्ध करती यादों का मौसम सर्दीला सा मौसम  !!दर्दीला सा मौसम  !!औसारे खड़ी सोचूं मैं ,मेरे पास नहीं कोई याद भरा सपनीला सा मौसम  !!देश में ऋतुकाल दिन-दर –दिन बदलता है नहीं बदलता त... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   3:48pm 12 Oct 2015 #
Blogger: डॉ.लक्ष्मीकांत शर्मा
लब सडक के रह गया ~~~~~~~~~~~~~~~(लक्ष्य“अंदाज़”)तू बारिशों में भीगी बंद खिड़की सा अडक के रह गया !!गुस्सैल हवाओं की तड़प सा मैं बस तडक के रह गया !!तू कव्वाली की राग सी गूंजी थी मंदिर से पंडाल तक ,मकई के जल भुन दानों सा मैं बस भडक के रह गया !!उस धनक के सारे रंग लिए तू शाम आसमां पर उतरी , किसी औ... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   5:57pm 10 Oct 2015 #
Blogger: डॉ.लक्ष्मीकांत शर्मा
लौट आए वो बचपन ~~~~~~~~~~~~~~(लक्ष्य“अंदाज़”)सेब की बर्फ लदी शाखें सुर्ख गुलों से भर जाएँ !!बच्चों की बदमाशियाँ घर भर में घर कर जाएँ !!इक आगोश के लम्स में मेरी माँ जैसी नजदीकी हो !खामोश पनाह के साए में नींदें आँखों में भर  जाएँ !!चाँद की मद्दम रौशनी में माँ कागज लिए बैठी सोचे !प्रवास... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   3:26pm 8 Oct 2015 #
Blogger: डॉ.लक्ष्मीकांत शर्मा
ठीक नहीं ये~~~~~~~~~~(लक्ष्य “अंदाज़”)इश्क में इतनी भी ज्यादा मसीहाई ठीक नहीं  IIधडकनें तो नुमायाँ हैं गिनती पढाई ठीक नहीं  IIमेरे कांपते हुए बदन पर बेड़ियों का पहरा है  , तानों की रुई से बुनी झीनी रजाई ठीक नहीं  IIपेशानी पे तेरे करम के निशाँ कम तो ना थे ,यूँ मेरे बिगड़े नक्श की ज... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   5:02pm 7 Oct 2015 #
Blogger: डॉ.लक्ष्मीकांत शर्मा
सलाम वो सुहाने~~~~~~~~~~~~(लक्ष्य “अंदाज़”) फूल और रंग के सफ़र जब कुहरे की घनी चादर ताने !!फूलों वाली वादी की डगर साथ चलो ना सैर के बहाने !!मेरे अख्तियार में नहीं अब शरारतें सर्द सर्द हवाओं की ,रुई के गोलों सी भाप बनो फिर बुनूँ सांस के ताने बाने !!तेरी छत के नीचे से गुजरती काली सडक का ख... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   2:44pm 27 Sep 2015 #
Blogger: डॉ.लक्ष्मीकांत शर्मा
सिमट कर नहीं रहता ~~~~~~~~~~~~~~~(लक्ष्य “अंदाज़”) वैसे भी मेरे घर की चिलमन में सिमट कर नहीं रहता !!रंग नहीं खुशबू है वो मधुवन में सिमट कर नहीं रहता !!गहरी आँखों के पानी में इक किश्ती कोई डूबी तो क्या ,रूप का दरिया एक ही दरपन में सिमट कर नहीं रहता !!कल जब वो उस जंगल से ज़ख़्मी हुए पाँव लिए ल... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   8:16am 13 Sep 2015 #
Blogger: डॉ.लक्ष्मीकांत शर्मा
एक सहमी सी शाम ~~~~~~~~~~~(डॉ.लक्ष्मीकान्त शर्मा )एक सहमी सी शाम दबे पाँव आएगी हाईवे पर दौड़ते ट्रक्स और हैडलाइट्स की चिंघाड़ती रौशनी मेंदम तोड़ जाएगी मुझे फिर यादों के उसी बियाबान में छोड़ जायेगी हौसला अब तो यह भी कहने का नहीं मेरा वो किसी रोज़ लौट आएगी और… किस... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   4:23pm 10 Sep 2015 #
Blogger: डॉ.लक्ष्मीकांत शर्मा
भानमती के गाँव में ~~~~~~~~~~~~~~~(लक्ष्य “अंदाज़”) अब के जो लोग हाथ में पत्थर उठा के आयेंगे !!तेरे कूचे में हम भी अब ज़ख्म बिछा के जायेंगे !!अंगारों सी रात को रोशन करो और जल जाओ, हम धूनी की राख को पलकों से उठा ले जायेंगे !!भानमती के गाँव में तुम अन्धमति सी फिरती हो,देखना एक दिन तुम्हे... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   11:31am 6 Sep 2015 #
Blogger: डॉ.लक्ष्मीकांत शर्मा
तुम नहीं थे, जीवन में~~~~~~~~~~~~~~~बस तुम नहीं थे जीवन में कोई और थे ,कई ठौर थे !!अधिकार दर्प के मठाधीश कुछ शीशकटे सिरमौर थे !!मैं तुम बिन बहुत अधूरा हूँ !“रैतिल्य-जन्म” का चूरा हूँ !!हरी-भरी इस दुनिया में ,एक टूटा पाँख सुनहरा हूँ !!अब ढलती साँझ का दीप बनूँ !उन आँखों का अंतरीप बनूँ !!म... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   9:37am 5 Sep 2015 #
Blogger: डॉ.लक्ष्मीकांत शर्मा
नहीं है , कुछ याद मुझे -I~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~{“TUMHEN YAAD HOGA “}अब नहीं मुझे याद आते ‘कायलाना’ झील के निर्जन हरे किनारे !!नहीं जगमगाते निगाह में तुम्हारी धानी चूनर के झिलमिल सितारे !!अब नहीं बहता मेरी आँखों में तुम्हारे यौवन का विक्षुब्ध विक्रांत ‘जलधि’ !!फाग की इस दुपहरी में अब ल... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   5:18am 5 Sep 2015 #
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