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Blog: ~~~~~~~~ मधुला

Blogger: ममता जोशी
मापदंड क्या है ? कि कौन अपने कौन पराये होते  हैं ,आँखों से जो  दिखते हैं ,क्या  बस वही रिश्ते सच्चे होते हैं ..कुछ अपने होकर एहसासहीन, अपनों के  दर्द से आँख मूँद लेते हैं ,कहीं कुछ  बेगाने भी अपना बन हाथ  थाम  लेते है ..कुछ लोग खून के रिश्ते भी भुला देते हैं,कु... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   8:20am 10 Sep 2015 #
Blogger: ममता जोशी
आज यूं ही  मैंने,जिंदगी का हिसाब लगाया,क्या खोया क्या पाया ,एक समीकरण बनाया,यादों की गलियों में एक चक्कर लगाया ,झाड़ पोछ अतीत के पन्नो को पलटाया,बिखरी मिली कुछ ख्वायिशें ,जो रही गयी अधूरी थी ,ख्वाबों की एक बड़ी लिस्ट ,जो हुयी नहीं पूरी थी ,कुछ टूटे हुए सपने थे ,कहीं र... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   11:01am 21 Jul 2015 #
Blogger: ममता जोशी
भेदभाव सदियों से रहा है ,पुरुषों के मन मेंजब बात आती है  औरत की ,वेद हो या पुराण,रामायण या महाभारत,बताती हैं हमारे ग्रंथो की पौराणिक  कहानियां ,कौन नहीं जानता अहिल्या की कहानी ,बलि चढ़ गयी थी इसी क्रूरता की,एक तथाकथित महान संत की ,शालीन , खूबसूरत  पत्नी ,हुयी थी शापित ... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   9:44am 8 Mar 2015 #
Blogger: ममता जोशी
आज मैंने बचपन का पिटारा खोला,बड़ा ही अनमोल था वो खजाना खोला,पुराना कुछ सामान यादों की तह खोलता,मुझको वापस अपने प्यारे बचपन से जोड़ता,गोल गोल छेद वाले कुछ पुराने सिक्के,कुछ पुराने टिकट इक डायरी में चिपके,कुछ फूल पत्ते जो मैंने तब सुखाये थे ,ख़ुशी के वो पल जो बचपन में चुराए थे... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   10:28am 21 Mar 2014 #
Blogger: ममता जोशी
धीरे धीरे जिंदगी के सभी रंग फीके हो गए ,पर यादों के रंग आज भी सजीव हैं जिंदगी की तरह ,वो रंग  जो भरपूर जिए थे तुम्हारे साथ,सब सहेज कर रखे हैं मैंने , लाल रंग तुमने कहा था हमारे दिल का प्रतीक है,ये फीका न पड़े ,उससे मैंने आज तक अपनी यादों की  मांग सजा रखी है ..सुनहरा रं... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   1:01pm 2 Oct 2013 #
Blogger: ममता जोशी
दुआ करते हैं बेटे की और ,हो जाती हैं बेटियां,बड़ी जीवट होती हैं ये,यूं ही पल जाती हैं बेटियां|चौका बर्तन करती,घर में,पढ़ लिख जाती है बेटियां,सु ख सुविधाएँ बेटों को ,पर आगे निकल जाती हैं बेटियां |जन्मदायिनी हैं फिर भी,मारी जाती हैं बेटियां ,कभी लालच कभी वासना की,बलि चढ़ जाती ह... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   7:18am 23 Sep 2013 #
Blogger: ममता जोशी
कैसी कैसी लीला दिखाते हो ,अलग अलग नामों से प्रकट हो जाते हो ,मगर सुनो तो ज़रा प्रभु जी ,हम हैं तुम्हारे तुम जानते हो, फिर ये लुकाछिपी काखेल क्यों दिखाते हो ,सुना है तुम एक पुकार में दौड़े चले आते हो ,फिर हमें अपने दरश क्यों नहीं कराते हो ?अब तुम्हें खुद आना ही पड़ेगा,अपना ब... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   7:02am 12 Sep 2013 #
Blogger: ममता जोशी
कभी कभी सोचती हूँ,पंछी बन जाऊं   ,अनासक्त, तटस्थ,बंधन से मुक्त ,उम्मीदों से दूर,कोई पहचान नहीं,किसी की यादों में भी नहीं, पेड़ों की डालियों में झूलतीशाम की गुनगुनी हवाओं में गोते लगाऊं,खुले आसमान के नीचे, सितारों से बातें करती,इधर से उधर,बस उन्मुक्त उड़ती रहूँ ,में च... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   5:01pm 26 Aug 2013 #
Blogger: ममता जोशी
क्यों चंचल है ये मन..?क्यों भागता है ये मन?क्यों ठहरता  नहीं है तू ,क्यों समझता नहीं है तू...घूमता है यादों में भूत की  ...उड़ता है सपनों में भविष्य के ...रोता है उस पर जो चला गया...पकड़ना चाहता है उसे जो तेरा है ही नहीं....क्यों जीता नहीं इस पल को जो तेरे साथ है?अनदेखी  क... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   10:00pm 3 Aug 2013 #
Blogger: ममता जोशी
मानव मन की चाह, सीमित हो पायेगी कभी ?शायद कभी नहीं!!आकर्षित हो मन ,भागता है किसी की ओर  ,थिरकती है तृष्णा ,जब तक पा न ले उसे ,अधिकार में न ले ले अपने,मिल जाये जिस छण,फिर अतृप्त ,फिर भटकने लगता है ,खोजने  कुछ नया ,जो तृप्त कर सके मन को,सोचो आज मानव कितना सुखी होता,तृष्णा भरे जी... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   8:06am 25 Jul 2013 #
Blogger: ममता जोशी
मनुष्य की लोलुपता और तृष्णा से त्रस्त,शिव और शक्ति दोनों हो गए  हैं, अब अति क्रुद्ध |विकास के नाम पर प्रकृति के सीने पर जो फोड़ा था बारूद ,वही बारूद प्रकृति लौटाएगी,करके सबका विनाश |अपने अंदर के शिव (चेतना) को इंसानों ने ,धीरे-धीरे शव बना दिया,शायद अब धीरे-धीरे शिव,इं... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   9:42am 24 Jun 2013 #
Blogger: ममता जोशी
जिंदगी तो शोर है ,कोलाहल हैमौत तू चिर शांति है ..जिंदगी दौड़ भाग है ,मौत तू तो विश्रांति है...जिंदगी उफनता हुआ सागर है...मौत तू शांत सरिता है'जिंदगी कठोर पाषाण सी है ..मौत तू मां की गोद सी है ....जिंदगी मे तो झूठ भी है फरेब भी, मौत तू तो एक सच्चाई है.....                      &... Read more
clicks 207 View   Vote 0 Like   3:20pm 10 Jun 2013 #
Blogger: ममता जोशी
जिंदगी के कई रूप देखती हूँ  मैं ,अक्सर रास्ते  से गुजरते हुए ....घर की दहलीज में बैठा काम करने वाली बाई का वों बच्चा ,सजे धजे स्कूल जाते बच्चों को अपलक निहारता ,उन में  जिंदगी की  खुशियाँ ढूढते हुए.......सुबह सुबह की धुन्ध में ,गाड़ी साफ़ करते कुछ  लड़के ,अलसाई आँखों ... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   5:30pm 7 Jun 2013 #
Blogger: ममता जोशी
मै भी पकड़ना चाहती हूँ उसे ..दूर क्षितिज मे जैसे सूरज की किरणे करती हैं,धरती को पकड़ने की कोशिश..पर मेरी मजबूरी है ,नहीं पकड़ पाती मै...बस ये सोच कर खुश हूँ कीउसे छू तो लिया पूरा ,भर दिया अपनी गर्माहट से..भले ही शाम होते होते लौट जाउंगी मै भी,अपना अस्तित्व समेट कर वापस चली जाउं... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   1:09pm 5 Jun 2013 #
Blogger: ममता जोशी
गौरैया !!पहले तुम रोज सुबह आया करती थी ,घर के आँगन  में फुदकती चहकती ,तिनका तिनका बीन कर नीढ़ सजाती थी तुम,कभी खिड़की कभी चौखट से झांकती ,घर के हर एक कोने को पहचानती थी तुम ,पर गौरैया अब तुम  नहीं आती,तुम्हारा आना शुभ है गौरेया ,आया करो ,अपना घर भूला नहीं करते ,मैं रास्ता देख... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   12:51pm 5 Jun 2013 #
Blogger: ममता जोशी
माना बलिष्ठ है पुरूष,स्त्री की उससे समानता नहीं है,पर स्त्री पुरूष की दासी नहीं है ,स्त्री को सुरक्षा भरा घेरा चाहिए,पुरूष सुरक्षा देने से करता है इनकार,उलटे करता है उसकी अस्मिता में प्रहार ,क्यूँ??महिला दिवस तब तक है बेकार,जब तक महिलाओ पर होगा अत्याचार ...           ... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   9:31am 4 May 2013 #
Blogger: ममता जोशी
मैने हिन्दू के घर जनम लिया तो हिन्दू हो गयी ,मुसलमान के घर लेती तो मुसलमान हो जाती,आज रामायण है तब हाथ में कुरान आ जाती,मंदिर के घंटो की जगह मुझे अजान की आवाज़ भाती ,जो धर्म सिखाता है इंसान वही बन जाता है ,आत्मा तो वही है बस नाम बदल जाता है... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   9:01am 4 May 2013 #
Blogger: ममता जोशी
OIL PAINTING 'Eternal Love of Radha Krishna'  _इंतज़ार _इंत____________ज़ार___________________________________________________________________________________________________________________उम्मीदों का थामे हाथ, सुबह घर से निकलती हूँ,डूबते सूरज के साथ , थकी सी लौट आती हूँ, रात फिर कराती है मुझे मेरे होने का अहसास,भर जाती हूँ ऊर्जा से,एक और नए दिन का सामना करने को ,हो जाती हू... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   9:30am 12 Apr 2012 #
Blogger: ममता जोशी
                                                       “With each sunrise, we start anew":::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::                     Even the most beautiful days eventually have their sunsets........                        ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::  ... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   5:29pm 11 Mar 2012 #
Blogger: ममता जोशी
सुबह से शाम , शाम से सुबह ,यूँ ही बेवजह सी बीत रही है ज़िन्दगी ...........रोज बस एक ही धूरी पर गोल गोल घूमती,बिना रफ़्तार की गाड़ी  सी चलती जा रही है ज़िन्दगी .......आटा ,दाल ,नमक ,तेल  की चिंता मेंमहीने दर महीने खत्म होती जा  रही है जिंदगी..चलो आज कुछ नया करें ,प्रकृति से उधार ले लें..... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   6:19pm 28 Jan 2012 #
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