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सृजनयात्रा

पाता हूँ अपने आपको तन्हा जहान मेंघबरा रही है रूह बदन के मकान मेंकिस्मत ने पर कतर के ही फेंका ज़मीन परउड़ना जो चाहा हमने कभीे आसमान मेंभरते थे यूं तो दोस्ती का हर नफ़स ही दमअपने पराये हो गए इक इम्तहान मेंतुमको न भूल पाने का बस है यही सबबइक तुम ही तो मुक़ीम हो दिल के मकान मेंसर ...
सृजनयात्रा...
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  July 26, 2016, 12:14 am
तुम्हारे सामने आते हीदिल कि बातजुबां तक आकररुक जाती है,तुम्हे देखने के लिएझुकी नज़रउठती है तोसारे राज़ कह जाती हैसब जानकर भी तुम,फिर अनजान सेबन जाते होकह दो न...आखिर,क्यों सताते हो...?...
सृजनयात्रा...
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  March 10, 2016, 3:06 pm
हर अश्क कहता है कहानी देखियेबहते हुए अश्कों के मानी देखियेभूख के कारण चुराई एक रोटीउसके पिटने की कहानी देखिये...
सृजनयात्रा...
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  September 3, 2015, 11:20 am
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