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Blog: सृजनयात्रा

Blogger: akhilesh soni
पाता हूँ अपने आपको तन्हा जहान मेंघबरा रही है रूह बदन के मकान मेंकिस्मत ने पर कतर के ही फेंका ज़मीन परउड़ना जो चाहा हमने कभीे आसमान मेंभरते थे यूं तो दोस्ती का हर नफ़स ही दमअपने पराये हो गए इक इम्तहान मेंतुमको न भूल पाने का बस है यही सबबइक तुम ही तो मुक़ीम हो दिल के मकान मेंसर ... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   6:44pm 25 Jul 2016 #
Blogger: akhilesh soni
तुम्हारे सामने आते हीदिल कि बातजुबां तक आकररुक जाती है,तुम्हे देखने के लिएझुकी नज़रउठती है तोसारे राज़ कह जाती हैसब जानकर भी तुम,फिर अनजान सेबन जाते होकह दो न...आखिर,क्यों सताते हो...?... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   9:36am 10 Mar 2016 #
Blogger: akhilesh soni
हर अश्क कहता है कहानी देखियेबहते हुए अश्कों के मानी देखियेभूख के कारण चुराई एक रोटीउसके पिटने की कहानी देखिये... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   5:50am 3 Sep 2015 #
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