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Blog: मेरी स्याही के रंग

Blogger: मधुलिका पटेल
तेरे आँगन की धूप सुनहरी चमकीली मेरे घर की मसाले वाली चाय अदरक की बस दो छोटे से बहाने थे गुलाबी ठण्ड बिताने के धूप की चमक आँखों में बातों का सिलसिला किताबों में मासूम सी मुलाक़ात बहुत जल्दी में ढलती वो चटकीली धूप मलाल तो रहता है घाटियों सी उदासियाँ ... Read more
clicks 49 View   Vote 0 Like   6:29pm 29 Mar 2021 #गुलाबी
Blogger: मधुलिका पटेल
बेटी पराया धन नहीं माँ - बाप का नायाब हीरा होती है बेटी की विदाई यह एक शब्द है पर क्या हम वाकई बेटी को विदा कर पाते हैं दो बक्सों में सामान रखने से बेटी की विदाई संपूर्ण नहीं होती उसने इतने सालों सेजो उस घर को बिखेर रखा है वो सामान जो हमारे रग रग में ब... Read more
clicks 53 View   Vote 0 Like   6:02pm 7 Mar 2021 #बेटी
Blogger: मधुलिका पटेल
 मैंने अपने हिस्से के कुछ सपने छुपा दिए थे उम्मीदों के आसमान में सोच रही हूँ वहाँ जा कर ले आऊं उन्हें मेरे रोशनदान पर एक बुल बुल रोज दाना चुगने आती है मैंने उससे कहा तुम्हारे पंख मुझे उधार देदो मैं स्त्री हूँ मैं सपने देख भी सकती हूँ सपने चुरा भी सकती... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   3:54pm 17 Feb 2021 #उम्मीद
Blogger: मधुलिका पटेल
दम घुटने के बाद की बची सांसें खर्च तो करनी ही होती हैं एक उम्र उन्हें खींचती रहती है जीने के लिए आस पास आशा निराशा के बीच जो छोटी खुशियाँ बची होती है हर पड़ाव पर मील का पत्थर जर्द है शायद आगे कुछ लिखा होगा मन समझाता है लोग कहते हैं तुम्हारी लेखनी में ... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   12:15pm 7 Jan 2021 #उम्र
Blogger: मधुलिका पटेल
कारखाने से मिली बची तन्खा को लेकर लौटते समय मन ने सोचा, शायद ही अब दोबारा जी पाऊं घर की देहलीज़ पर कांपते कदमों ने अपनी बेबसी सुना दी मेरा काम छूट गया हमें अब पैदल ही अपने गांव जाना होगा पसीने से तर हथेली ने नोटों को कस कर भींच लिया कोई छुड़ा न ले जाए मा... Read more
clicks 237 View   Vote 0 Like   6:28pm 9 May 2020 #गांव
Blogger: मधुलिका पटेल
वर्षो बाद बरसात की रातअजब इत्तेफाक की बातरात के पहर दस्तकदरवाज़े पर था कोई रहवरजैफ ने पनाह मांगीमेरे घर के चरागों मेंरौशनी बहुत कम थीपरफ्यूम की खुशबु जानी पहचानी थीपर उसकी अवारगी और कुछ खोजती निगाहें.. मेज़ पर रखी काॅफी कोजब उसने झुक कर उठायारेनकोट के ऊपर वाले जेब ... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   8:01pm 10 Mar 2020 #तस्वीर
Blogger: मधुलिका पटेल
कभी फादर्स डे कभी मदर्स डेहर साल आते हैं सब कुछ मिलता है बाज़ारों में उपहारों के लिए पर नहीं मिलता तो वो वादों के शब्दजो चाहिए होते हैं हर माता - पिता को क्योंकि वो दुकानों में नहीं दिलों में बिकते हैं और एक आश्वासन और विश्वास कीनज़रों के नर्म गिफ्ट पेपर से लिप... Read more
clicks 266 View   Vote 0 Like   9:14pm 3 Apr 2019 #अहसास
Blogger: मधुलिका पटेल
चाँदनी रात के साये में जागते और भागते लोग आँखों में नींद कहाँ है सपने आँखों से भी बड़े हैं न नींद में समाते न आँखों को आराम पहुँचाते आज की रात खत्म होती नहीं उससे पहले कल का दामन थामने की जल्दी ज़िन्दगी ने तो जैसेजद्दो - जहद की हद कर दी कासिब का हिसाब कदो... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   7:11pm 18 Aug 2018 #उम्र
Blogger: मधुलिका पटेल
उसने रोकना नहीं चाहाउसे रुकना नागवार लग रहा थाबहुत दिनों पहले कांच टूट चुका थागाहे बगाहे चुभ जाता गल्‍ती सेपर सोच रही हूंइसे फेंका क्‍यों नहींपर ये किसी कूड़ेदान तकनहीं ले जाया जा सकताक्‍यों ऐसा क्‍या है ?मन के भारीपन सेज्‍यादा भारी तो नहीं होगाये रिश्तों की किरचें&... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   3:01pm 12 Aug 2018 #आंखो
Blogger: मधुलिका पटेल
मीलों दूर तक पसरे हुए ये रास्तेकभी कभी बोझिल हो जाते हैं कदम जाने पहचाने रास्तों को देर नहीं लगती अजनबी बनने में जब सफर होता है तन्हाऔर मंज़िलें होती गुमरौशनी में नहाये हुए बाज़ार रौनकों से सजी हुई दुकाने पर मैं कुछ अलहदा ढूंढ़ रही हूँ खरीदने के वास्ते ढेर स... Read more
clicks 207 View   Vote 0 Like   9:07pm 16 Jun 2018 #खामोशियाँ
Blogger: मधुलिका पटेल
एक उम्र जो गुम हो गई आज बहुत ढूंढा मैंनेअपनी उम्र को पता नहीं कहाँ चली गई नहीं मिलीरेत की तरह मुट्ठी से फिसल गईया रेशा रेशा हो कर हवा में उड़ गईबारिश की बूँद की तरहमिट्टी में गुम हो गईसूरज की किरणों के साथपहाड़ों के पीछे छिप गईवो मुझे जैसे छू करकहीं ठहरी ही नहींग... Read more
clicks 219 View   Vote 0 Like   4:57pm 5 Jun 2018 #जीवन
Blogger: मधुलिका पटेल
यह जीवन जब भीड़ में गुम हो जाने के बाद धीरे - धीरे तन्हा होता है धीरे - धीरे पंखुड़ियों से सूख कर बिखर जाते हैं यह रिश्ते प्यार स्नेह और अपनेपन की टूट जाती है माला धीरे - धीरे हर मन का गिरता जाता है धीरे - धीरे कम हो जाता है अपनों की आवाज़ों का कोलाहल अल्फ़ाज़ ब... Read more
clicks 218 View   Vote 0 Like   7:34am 29 Jan 2018 #इंसान
Blogger: मधुलिका पटेल
ऐ ज़िन्दगी तू इतना क्यों रुलाती है मुझे ये आँखे है मेरी कोई समंदर या दरिया नहीं --- ~ ---गुज़रे हुए कल मैंने तो हद कर दी वक़्त से ही वक़्त की शिकायत कर दी --- ~ ---मेरी मुस्कान गिरवी रखी थी जहाँवो सौदागर ही न जाने कहाँ गुम हो गयान तो मेरी चीज़ लौटाईन ब्याज़ बताया--- ~ ---तुम... Read more
clicks 211 View   Vote 0 Like   5:25pm 26 Dec 2017 #दोस्ती
Blogger: मधुलिका पटेल
इस वर्ष श्राद्ध मेंमैंने तुम्हारी यादों का तर्पण कर दिया जो वर्ष पहलेधीरे धीरे मर रही थी |तुम्हारी याददाश्त में भी मैं ज़िंदा कहाँ थी ?उन बेजान यादों को दिल की ज़मीं से खाली करनामेरा मन बार बारन चाह कर भी उस ज़मीन को टटोलता रहता की शायद कहीं कोई यादखरपतबार ब... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   7:44pm 13 Dec 2017 #तर्पण
Blogger: मधुलिका पटेल
सोचना समझना और चलना उन रास्तों पर पर फिर कभी न निकल पाना उन बंधनो से जो वक़्त के साथ बंधते और कस्ते जाते हैं |एक अजगर की पकड़ की तरह जहाँ दम घुटने के अलावा कुछ नहीं है जो दिन रात आपका सुख चैन निगल रहा है और धीरे - धीरे आपको भी |पर ज़िन्दगी अगर हार कर भी हारती नहीं निकल ... Read more
clicks 258 View   Vote 0 Like   7:51pm 15 Sep 2017 #उम्मीद
Blogger: मधुलिका पटेल
कई दिनों से खामखा की ज़िद वह श्रृंगार अधूरा सा क्यों है अब क्या और किस बात की जिरह मेरे पास नहीं है वो ज़ेवर जो तुम्हे वर्षों पहले चाहिए थेवह सब मैंने ज़मीं में दफ़न कर दिया है हालात बदल गए हैं तुम उस ख़ज़ाने को ढूंढना चाहते हो और चाहते हो की उसएक एक आभूषण को मैं ध... Read more
clicks 246 View   Vote 0 Like   6:25pm 3 Aug 2017 #आभूषण
Blogger: मधुलिका पटेल
वह छत के कोने में धूप का टुकड़ा बहुत देर ठहरता है उसे पता हैअब मुझे काफी देर यहीं वक़्त गुज़ारना है क्योंकि वह शाम की ढलती धूप जो होती है उम्र के उस पड़ाव की तरह और मन डर कर ठहर जाता है ठंडी धूप की तरहजब अपने स्वयं के लिए वक़्त ही वक़्त हैअब घोंसले में अकेले ... Read more
clicks 260 View   Vote 0 Like   9:24pm 21 Jul 2017 #उम्र
Blogger: मधुलिका पटेल
वो खाकी शर्ट पर अब भी निशाँ होंगे पिछली होली केवो अबीर का गुब्बार रंग कर चला गया था तुम्हे रंगो का इंद्रधनुष बिखेर गया था ख़ुशी गुलाल का रंग दहकते गालों में खो गया था तुम्हे रंगों की पहचान जो गहराइयों से थी अब के बरस बहुत सारा पानी भर था रंग नहीं ... Read more
clicks 256 View   Vote 0 Like   11:14am 16 Jun 2017 #इंद्रधनुष
Blogger: मधुलिका पटेल
ये खामोशियाँ और इनके अन्दर छिपी हुई सिसकियाँ , हिचकियाँ बहुत धीमे धीमे घुटती आवाज़ कानों में उड़ेल जाती हैं ढेर सारा गर्म लावा वो स्लो पॉयजन फैलता जाता है दिमाग की नसों में और वहाँ जा कर कोलाहल बन जाता है मैं भागती रहती हूँ शान्ति की तलाश में कभ... Read more
clicks 235 View   Vote 0 Like   6:20pm 9 Jun 2017 #कोलाहल
Blogger: मधुलिका पटेल
बाद मुद्दत के मेरे शहर में तू क्या आयाहवा का झोंकातेरे आने का संदेसा लाया यादों में वो तेरा चेहरा उभर आया लबों ने हौले से पुराने नगमों को गुनगुनाया आँखों में आंसू जोमोती बनके थे अटके आज न चाह के भीकहीं वो न जाएँ छलकें जो इंतज़ार था तेरे लिए वो आज भी बर... Read more
clicks 251 View   Vote 0 Like   7:12pm 6 Jun 2017 #इंतज़ार
Blogger: मधुलिका पटेल
वो शाम मैं भूलना चाहता हूँवो पगडंडियाँ जो जाती थी तुम्हारे घर की ओरहर शाम गायों के लौटने की पदचाप, उनके गले की घंटियाँधूल उड़ाती झुण्ड में निकल जाती थी तभी चराग रोशनकरने की वेला उस मद्धिम दिए की रौशनी में तुम्हारा दूधिया चेहरा धूल के गुबार में से कुछ धु... Read more
clicks 281 View   Vote 0 Like   6:28pm 22 Dec 2016 #घर
Blogger: मधुलिका पटेल
माँ तुझे खोकर तेरी यादों को पाया हैवो चेहरा जो रोज़ नज़र में थाआज दिल में समाया हैढलती सेहत नेतुम्हारी नींद कहीं छुपा दी थीतुम्हें खोकर आजसारा घर जाग रहातुम्हारी नींद बहुत लंबी हैशांत शरीर में बीमारी की थकान नहीं चिंताओं की माथे परकोई शिकन नहींवो जिजीविषा शब्दतुम्हा... Read more
clicks 288 View   Vote 0 Like   11:48am 7 Dec 2016 #ईश्वर
Blogger: मधुलिका पटेल
कल जब परदेस मेंतनहा बैठा था मैं मेरे देश के चाँद ने हौले से कहा वापस आजा ओ परदेसी तेरे देश में भी मैं चमक रहा उन सिक्को की आबोताब में मत खो जा तेरे अपने बड़े बेसब्री से राह तक रहे हैं जा उनका रुखसार चमका बेजान कागजों के ढेर अपने रिश्तों कोपाने में कर देगा... Read more
clicks 262 View   Vote 0 Like   6:23pm 11 Jun 2016 #आबोताब
Blogger: मधुलिका पटेल
माँ तुम्हारी परछाई कोधीरे धीरे अपने मेंसमाहित होते देख रही हूँ बचपन का खेलतुम्हारी बिंदी और साड़ी से अपने को सजाना फिर कुछ वर्षों बादतुम्हारी जिम्मेदारियों में तुम जैसा बन्ने कीकोशिश में तुम्हाराहाथ बटानाजब विदा हुई नए परिवेश मेंतब हम तुम एक परछाई के दो हि... Read more
clicks 250 View   Vote 0 Like   6:36pm 28 May 2016 #कोशिश
Blogger: मधुलिका पटेल
वो गर्मी की चांदनी रातें बेवजह की बेमतलब की बातेंकितनी ठंडक थी उन रातों मेंअब भी समाई है कहीं यादों में वो बिछौने और उन पर डले गुलाबी चादर अपने अपने हिस्से  के तारों को गिनने की आदत वो सारे दोस्तों का छत पर हुजूम लगानादेर तक जाग कर बातों में मशरूफ हो जाना&nb... Read more
clicks 235 View   Vote 0 Like   8:25am 7 May 2016 #चांदनी
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