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मेरी स्याही के रंग

कई दिनों से खामखा की ज़िद वह श्रृंगार अधूरा सा क्यों है अब क्या और किस बात की जिरह मेरे पास नहीं है वो ज़ेवर जो तुम्हे वर्षों पहले चाहिए थेवह सब मैंने ज़मीं में दफ़न कर दिया है हालात बदल गए हैं तुम उस ख़ज़ाने को ढूंढना चाहते हो और चाहते हो की उसएक एक आभूषण को मैं ध...
मेरी स्याही के रंग...
Tag :आभूषण
  August 3, 2017, 11:55 pm
वह छत के कोने में धूप का टुकड़ा बहुत देर ठहरता है उसे पता हैअब मुझे काफी देर यहीं वक़्त गुज़ारना है क्योंकि वह शाम की ढलती धूप जो होती है उम्र के उस पड़ाव की तरह और मन डर कर ठहर जाता है ठंडी धूप की तरहजब अपने स्वयं के लिए वक़्त ही वक़्त हैअब घोंसले में अकेले ...
मेरी स्याही के रंग...
Tag :उम्र
  July 22, 2017, 2:54 am
वो खाकी शर्ट पर अब भी निशाँ होंगे पिछली होली केवो अबीर का गुब्बार रंग कर चला गया था तुम्हे रंगो का इंद्रधनुष बिखेर गया था ख़ुशी गुलाल का रंग दहकते गालों में खो गया था तुम्हे रंगों की पहचान जो गहराइयों से थी अब के बरस बहुत सारा पानी भर था रंग नहीं ...
मेरी स्याही के रंग...
Tag :इंद्रधनुष
  June 16, 2017, 4:44 pm
ये खामोशियाँ और इनके अन्दर छिपी हुई सिसकियाँ , हिचकियाँ बहुत धीमे धीमे घुटती आवाज़ कानों में उड़ेल जाती हैं ढेर सारा गर्म लावा वो स्लो पॉयजन फैलता जाता है दिमाग की नसों में और वहाँ जा कर कोलाहल बन जाता है मैं भागती रहती हूँ शान्ति की तलाश में कभ...
मेरी स्याही के रंग...
Tag :कोलाहल
  June 9, 2017, 11:50 pm
बाद मुद्दत के मेरे शहर में तू क्या आयाहवा का झोंकातेरे आने का संदेसा लाया यादों में वो तेरा चेहरा उभर आया लबों ने हौले से पुराने नगमों को गुनगुनाया आँखों में आंसू जोमोती बनके थे अटके आज न चाह के भीकहीं वो न जाएँ छलकें जो इंतज़ार था तेरे लिए वो आज भी बर...
मेरी स्याही के रंग...
Tag :इंतज़ार
  June 7, 2017, 12:42 am
वो शाम मैं भूलना चाहता हूँवो पगडंडियाँ जो जाती थी तुम्हारे घर की ओरहर शाम गायों के लौटने की पदचाप, उनके गले की घंटियाँधूल उड़ाती झुण्ड में निकल जाती थी तभी चराग रोशनकरने की वेला उस मद्धिम दिए की रौशनी में तुम्हारा दूधिया चेहरा धूल के गुबार में से कुछ धु...
मेरी स्याही के रंग...
Tag :घर
  December 22, 2016, 11:58 pm
माँ तुझे खोकर तेरी यादों को पाया हैवो चेहरा जो रोज़ नज़र में थाआज दिल में समाया हैढलती सेहत नेतुम्हारी नींद कहीं छुपा दी थीतुम्हें खोकर आजसारा घर जाग रहातुम्हारी नींद बहुत लंबी हैशांत शरीर में बीमारी की थकान नहीं चिंताओं की माथे परकोई शिकन नहींवो जिजीविषा शब्दतुम्हा...
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Tag :ईश्वर
  December 7, 2016, 5:18 pm
कल जब परदेस मेंतनहा बैठा था मैं मेरे देश के चाँद ने हौले से कहा वापस आजा ओ परदेसी तेरे देश में भी मैं चमक रहा उन सिक्को की आबोताब में मत खो जा तेरे अपने बड़े बेसब्री से राह तक रहे हैं जा उनका रुखसार चमका बेजान कागजों के ढेर अपने रिश्तों कोपाने में कर देगा...
मेरी स्याही के रंग...
Tag :आबोताब
  June 11, 2016, 11:53 pm
माँ तुम्हारी परछाई कोधीरे धीरे अपने मेंसमाहित होते देख रही हूँ बचपन का खेलतुम्हारी बिंदी और साड़ी से अपने को सजाना फिर कुछ वर्षों बादतुम्हारी जिम्मेदारियों में तुम जैसा बन्ने कीकोशिश में तुम्हाराहाथ बटानाजब विदा हुई नए परिवेश मेंतब हम तुम एक परछाई के दो हि...
मेरी स्याही के रंग...
Tag :कोशिश
  May 29, 2016, 12:06 am
वो गर्मी की चांदनी रातें बेवजह की बेमतलब की बातेंकितनी ठंडक थी उन रातों मेंअब भी समाई है कहीं यादों में वो बिछौने और उन पर डले गुलाबी चादर अपने अपने हिस्से  के तारों को गिनने की आदत वो सारे दोस्तों का छत पर हुजूम लगानादेर तक जाग कर बातों में मशरूफ हो जाना&nb...
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Tag :चांदनी
  May 7, 2016, 1:55 pm
तुम मेरी नज़मो के मुसाफ़िर बन गए हो आते जाते चंद मुलाकात होती रहती है पर अब धीरे-धीरे तुमने उस ज़मी को हथिया लिया है और इक खूबसूरत सा मकानबना लिया है नज़मों की गलियों में जब तुम नहीं होते बहुत ख़ामोशी सी छाई रहती है लफ्जों के दरमियाँ अब नज़्म चाहती है तुम्हारी रौनके लगी रहे ये&nb...
मेरी स्याही के रंग...
Tag :मकान
  April 9, 2016, 6:43 pm
ऊँचा पद बढ़ता रौबकुर्सी का रुतबाअधिनस्तोकी फ़ौजजोड़ते हाथ विनती के घुटता दम मरता स्वाभिमान आस और उम्मीद किस चीज कीपेट की आग बुझाने वाली बरसात रोटी और पैसा बहुत नीचे खड़ा है वो पता नहीं दिखेगा भी की नहीं उसकी विनती और लाचारी वाला कद बहुत ही न्यून है कुर्सी से उसे उम्मीद बह...
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Tag :ऊँचा
  April 7, 2016, 12:59 am
एक अरसे सेमेरी तलाश जारी है पर यादों की किरचें जोमेरी राहों पर पड़ी हैउनकी चुभन मुझे शिकस्त दिये जा रही हैंकल तेरी तलाश में मैं पुराने शहर का चक्कर लगा आया तलाश मुक्कमल तो नहीं हुई पर वो पुराने शहर को मैं सालों बाद भी नहीं भुला पाया पुराना पता हाथ में था लिया हस रहा था हर ...
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Tag :तलाश
  March 22, 2016, 1:34 am
मेरे सिरहाने वाली खिड़की तब से मैने ख़ुली ही रख़ी है क्योंकि उसके ठीक सामने चाँद आकर रुकता है एक छोटे तारे के साथ मेरे पास बहुत से सवालोंके नहीं है हिसाबवर्षों से रोज़ रात मेरे सिरहाने बैठ कर बेटी पूछती है "माँ , पापा कभी लौट कर आएंगे क्या ?"मैं खिड़की पर थम...
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Tag :खिड़की
  February 19, 2016, 1:53 pm
ये कहकर गया था जब अबकी बार आउंगामाँ गोद में तेरी सर रख कर जी भरकर सोउँगा ।लाल मेरा तू तो है भारत माता का प्रहरीइसीलिये नींद तेरी रहती थीं आँखों से ओझलकभी न वो तेरी पलकों में ठहरी ।पर माँ का दिल आज अचानक से दरक गयाक्यों आज पूजा का थाल हाथ से सरक गया ।जहां कहीं मेरे जिगर का ट...
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Tag :जंग
  February 13, 2016, 2:36 am
वो माँ का झूठ मूठ में पतीला खनकाना सब भरपेट खाओ बहुत है खाना फटी हुइ साड़ी को शाल से ढक लिया मेरी फीस का सारा जिम्मा अपने सिर कर लिया रात में ठंड से काँपती रहेऔर मुझे दो-दो दुशालें से ढांपती रहे मैं बरस दर बरस बढ़ता गया मेरी भावनाओं, ख़यालातों का दायरा घटता गया&...
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Tag :इंतज़ार
  January 28, 2016, 11:08 pm
तुम इतना तेज मत चलो इतने आगे निकल तो गए हो पर कम से कम पल दो पल तो रुको रुख कर चलने के बीच इतना वक्त तो हो मेरे मीतइंतज़ार जो तुमने किया हो मेरे लिए उसका मुझे अहसास तो हो मेरे प्यार में इतना हो दम मेरे इंतज़ार में थम जाए तुम्हारे कदम तुम्हारी आगे बढ़ने की चाह&...
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Tag :कदम
  January 1, 2016, 2:17 am
माँ मुझे आज भी तेरा इंतज़ार है पता नही क्यों ?तू आती है मिल्ती है और प्यार भी बहुत करती है तुझे मेरी फिक्र भी है पर मुझे तेरा इतंज़ार है कल कोइ मुझसे पूछ रहा था अरे पागल कैसा तेरा ये इतंज़ार हैमैं तुम्हें नहीं बता सकतीबात बरसों पुरानी है वो मेरा नन्हा सा मन ...
मेरी स्याही के रंग...
Tag :आँसू
  December 17, 2015, 7:33 pm
तुमने बड़ी खामोशी से लौटाए कदमपर मेरे दिल पर दस्तक हो ही गई मेरे हमदम आते हुए कदमों में एक जोश थालौटता हुआ हर कदम ख़ामोश था वो शिकायतों की गिरह ख़ोल तो देता जो तूने अपने मन में बांधी थीदो लफ़जों में बोल तो देतानासूर जो तूने बिना वजह पालेउसकी दवा मुझसे पूछ तो लेता, ओ ...
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Tag :कदम
  December 4, 2015, 2:32 am
सारी जिंदगी ढूँढती रहीन मंजिल मिली न किनारा न शब्दों का अर्थ  अनवरत चलते कदम कभी थकते हैं कभी रुकते हैं बस झुकना,वो कमबख़्त वक़्त भीनहीं सिखा पाया ये उम्मीद शब्द मैने सुना जरूर है मेरी कलम उसेबहुत अच्छे से लिख लेती हैपर मेरा मस्तिष्क उसका अर्थढूँढ पाने मे...
मेरी स्याही के रंग...
Tag :उम्मीद
  November 24, 2015, 1:02 am
जब तुम गए मैने देख़ा ही नहीं क्या -क्या अपने साथ ले गएअब मेरा बहुत सा सामान नहीं मिला रहा ज़्यादा कुछ नहीं बस दो चार चीज़े हैं मैने तुम्हें हर उस जगह पर तलाशा जहाँ तुम हो सकते थेएक मेरा विश्वास; एक मेरी परछाईमेरी अंतर आत्मा; मेरे शब्द पर तुम कहीं नहीं मिले मेरा स...
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Tag :इतंज़ार
  October 5, 2015, 12:29 pm
परिंदे नहीं होते स्वार्थीख़ुल कर जीते हैंआख़िरि सांस तक निस्वार्थ भाव से सिख़ाते हैंअपने बच्चो को उड़नाख़ुल जाते हैं जब बच्चो के पंख़ नहीं उम्मीद करते कीये मुड़कर लौटेगा भी की नहीं आने वाला कल घोंसला ख़ाली होगा की भरा कैसे रह पाते होंगें उनके अपने जब दूर ...
मेरी स्याही के रंग...
Tag :इतंज़ार
  October 1, 2015, 12:35 am
धीरे -धीरे जिंदगी से शिकायतों की गठरी भर ली उस गठरी से बहुत कुछ अच्छापीछे छूटकार बिख़रता गयाजिसे न बटोर पाए न वक्त से देख़ा गया अब जिंदगी बेतरतीबि से रख़े सामान की तरह हो गई हैमन करता है की काश?जिंदगी रेशम पर पड़ी सिल्वटों सी होती मुट्ठी भर पानी के छीटें मारते प्...
मेरी स्याही के रंग...
Tag :कोशिश
  September 25, 2015, 12:54 am
तेरी यादों को मैं झूठे बहाने बना कर कहीं छोड़ आइ थी पर वो दबे पाँव वापस लौट आइं थी उसने मुझे बहाना ये बतायाकी मेरे ज़हन से अच्छा आशियाना न पायाकलाइ पर जो लिखा था तेरा नामउस पर जब पड़ती है किसी की प्रश्न भरीं नज़र लोगो को बातें बनाने के लिए मिलती होगी नई ख़बर पत्थ...
मेरी स्याही के रंग...
Tag :ज़िंदगी
  September 10, 2015, 12:35 pm
दर्द रिस्ता है मोम की चट्टानों से सुन कर लोग फ़ेर लेते हैं चेहरे इन अफ़सानों से जो निरंतर चले जा रहे हैंकिस्मत की अंधेरी बंद गलियों  में उन्हें देख़ते हैं शरीफ़ लोग ख़िडकियाँ बंद कर मकानों से दर्द की दवाएँ लिख़ी हैं कुर्सी के विज्ञापन में ख़ूबसूरत वादे...
मेरी स्याही के रंग...
Tag :आशियाना
  August 31, 2015, 10:42 am
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