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ख़ामोशी

अँधेरों  में  मुँह  छुपा  लो कि इन आँसुओं को कोई देख न ले तन्हाईयों को गले लगा लो कि इस बेबसी को कोई परख न ले - सालिहामंसूरी15 -...
ख़ामोशी...
Tag :
  May 24, 2018, 12:50 pm
आज फिर तन्हा हूँ मैं तुमसे बिछड़कर लेकिन कुछ पल जैसे आज भी जिन्दा हैं कुछ लम्हें जैसे आज भी ठहरे हैं .... - सालिहा मंसूरी14.02.16 ...
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Tag :नज़्म
  December 13, 2017, 3:04 pm
हर रात के साथ – साथ ये दिन भी ढल जाएंगे हवाओं के साथ – साथ ये ग़म भी खो जाएंगे वक़्त के साथ – साथ ये ज़ख्म भी भर जाएंगे ....- सालिहा मंसूरी09.02.16     08.30 pm...
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Tag :
  November 14, 2017, 4:18 pm
इस रात के ख़त्म होते ही ये स्याह अँधेरे भी ख़त्म हो जाएंगे जब इक नई सुबह तुम्हारे घर के आँगन में सुनहरी धूप बनकर बरसेगी - सालिहा मंसूरी 09.02.16     04.10 pm ...
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Tag :
  August 11, 2017, 6:45 pm
किसी की याद दिल से यूँ जुदा नहीं होती साँस रुक जाये लेकिन तन्हाई फ़ना नहीं होती उम्र भर चलती है हर सफ़र में किसी साये की तरह साथ – साथ - सालिहा मंसूरी   22.02.16 ...
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  August 10, 2017, 11:31 am
चलो चलें दोस्त ! इस दुनिया से बहुत दूर कि पीछे छूट जाए , ये सारा ज़माना और खो जाएँ , उस दुनिया की रंगीनी में हम तुमजहाँ ख़त्म हो जाए ये सारा फ़साना ..... - सालिहा मंसूरी 04.02.16   03.49 pm ...
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  June 26, 2017, 12:12 pm
न तुमने अपनाया न दुनिया ने देखो ! फिर भी जिन्दा हूँ मैं    बस ! इक उम्मीद के सहारे .... - सालिहा मंसूरी 29.01.16   04.43 pm ...
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  June 26, 2017, 12:10 pm
मिल जाओ किसी मोड़ पर इक दिन तुम सुनहरी धूप बनकर , तो फिर से जी उठूँ मैं  बस जाओ मेरी आँखों में किसी शब तुम ख़्वाबों की ताबीर बनकर , तो फिर से खिल उठूँ मैं किसी महके हुए फूल की तक़दीर बनकर .... - सालिहा मंसूरी 27.01.16  09.00 pm   ...
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Tag :मोहब्बत
  June 25, 2017, 2:04 pm
मुझे क्या समझोगे दुनिया वालो जब खुद को ही समझा नहीं मुझे क्या संभाल पाओगे जब खुद को ही संभाल पाया नहीं - सालिहा मंसूरी25.01.16 pm ...
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  June 23, 2017, 12:44 pm
कितने बार दिल हारा है कितनी ही बार हारी हूँ मैं फिर भी हर बार संभाला है खुद कोकितनी ही बातों से समझाया है खुद को कितनी उम्मीदें ,कितनी ख्वाहिशें ,कितने ही ख़्वाबबस ! जलते बुझते से जुगनू की तरह दफ्न पड़े हैं आज भी ख़ामोशी की कब्र में ....सालिहा मंसूरी23.01.16  05:58 pm ...
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Tag :मोहब्बत
  June 14, 2017, 10:23 am
तोड़ दो इक दिन आकर इन बंद लबों की ख़ामोशी को तुम और दे दो इक हंसीं मुस्कराहट इन सहमे से लबों पर तुम ....सालिहा मंसूरी21.01.16 pm ...
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Tag :मोहब्बत
  June 14, 2017, 10:18 am
जा रही हूँ तुझसे बहुत दूर तेरी हर याद को दामन में समेटे हुए संजोकर रखूँगी इक इक पल को पलकों की इक इक बूँद में लपेटे हुए ....सालिहा मंसूरी                 20.01.16  08:07 pm ...
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  June 14, 2017, 10:12 am
भीड़ मैं भी तन्हां रहती हूँ आजकल कितने ही चेहरों के साथ भी खोई रहती हूँ आजकल कितने ही सवालों के जवाब मैं उलझी रहती हूँ आजकल लेकिन ख़ामोशी से सब कुछ सह लेती हूँ आजकल सालिहा मंसूरी –19 .01.16  06:55 ...
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  June 10, 2017, 1:30 pm
कितने ज़मानों से वो यारों से बिछड़ा है उसे यारों से मिला दोतो एहसान होगा !तोड़ कर बन्धन की इक इक जंजीर को उसे आसमां की उड़ान दे दो तो एहसान होगा ! बंद पिंजड़े की जंजीरों में कितना सिमटा हुआ है वो उसे आज़ादी की हवा दे दो तो एहसान होगा !सालिहा मंसूरी -16.01.16  08:50 am ...
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  June 4, 2017, 12:33 pm
बेबाक , बेख़ौफ़ होकर इस दुनिया में जीना है तुम्हें न दुनिया से डरना       न लोगों की सुनना बस ! अपने दिल की आवाज़ को सुनना है तुम्हें .... सालिहा मंसूरी -15.01.16 pm...
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  June 4, 2017, 12:27 pm
तुम्हीं ने हँसना सिखाया था तुम्हीं ने रोना सिखा दिया तुम्हीं ने जीना सिखाया था और आज तुम्हीं ने मरना सिखा दिया ..... सालिहा मंसूरी15.01.16 pm ...
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  June 3, 2017, 12:57 pm
प्यार तो प्यार है , कोई सौदा नहीं है प्यार का नाम भी , बस ! प्यार है कोई दूजा नहीं है ..... सालिहा मंसूरी15.01.16  08:55 pm ...
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  June 3, 2017, 12:54 pm
इस दुनिया से रुखसत होते वक़्त भी होठों पे तेरा नाम होगा तू मेरे साथ न सही लेकिन मेरा साया हर वक़्त तेरे साथ होगा .....सालिहा मंसूरी -08:27 pm  15.01.16...
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  June 3, 2017, 12:52 pm
फूल ही फूल हैं , रंगे फिज़ा में फिर भी है ख़ामोश तू ढूंढती है किसको बेख़बर  यूँ अकेली आज तू ...... सालिहा मंसूरी -15.01.16   06.41 pm ...
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  June 2, 2017, 12:23 pm
सोचा था अब जो तुम मिले हो तो आसाँ है हर सफ़र जिंदगी का अपना सोचा न था दो क़दम साथ चलकर यूँ ख़त्म हो जायेगा हर सफ़र जिंदगी का अपना सालिहा मंसूरी -14.01.16    04:49 pm ...
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  June 2, 2017, 12:17 pm
तुम कभी नहीं मिलोगे मुझे अब ये जान चुकी हूँ मैं अपने दिल से हर इक ख्वाब मिटाना होगा मुझे अब ये मान चुकी हूँ मैं मेरी उम्मीदों से भरा हौसला भी अब टूट चूका है मेरा अटल अमर विश्वास भी ज़र्रा – ज़र्रा होकर बिखर चुका है ज़िन्दगी की हर जंग हार चुकी हूँ मैं हाँ ! अब हार चुकी हूँ मैं ... ...
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  May 7, 2017, 1:58 pm
बन्द पलकों के ख्वाब टूटे हैं खुली आँखों का इंतज़ार नहीं टूटा दो क़दम चलकर तेरे हाथ छूटे हैं तेरा जीवन भर का साथ नहीं छूटा तेरे शब्दों की गूँज से दिल टूटा है मेरा अपनी उम्मीदों पर एतवार नहीं टूटा .... सालिहा मंसूरी -12.01.16   10:30 pm ...
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  May 5, 2017, 10:15 pm
उजड़ी हुयी दुनिया को प्यार की महफ़िल समझ बैठे डूबी हुयी कश्ती को प्यार की मंजिल समझ बैठे कितने नादां हैं , ये दुनिया के लोग भी जो टूटे हुए दिल को भी  ज़ख्मों का समन्दर समझ बैठे .......  सालिहा मंसूरी 12.01.16  09:15 pm...
ख़ामोशी...
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  February 10, 2017, 9:00 am
मिले थे तुम अजनबी राहों की तरह और खो गए इक गुजरते राही की तरह मुझे देखकर ठिठके भी नहीं संभालना तो बहुत दूर की बात है ..... सालिहा मंसूरी 09.01.16    04:08 pm...
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  February 9, 2017, 9:00 am
किनारा मिले न मिले फिर भी मैं चलती जाऊँगी मंजिल मिले न मिले फिर भी मैं बढ़ती जाऊँगी राही रुके न रुके फिर भी मैं संभलती जाऊँगी ...... सालिहा मंसूरी 04.01.16   07:45 am...
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  February 8, 2017, 9:00 am
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