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शमे-अदब Sham-e-adab شمع-ادب

  (खि़राजे-अक़ीदत)                                 जनाब मुज़फ़्फ़र रज़मी‘ये जब्र भी देखा है तारीख की नजरों ने/लम्हों ने खता की थी, सदियों ने सजा पाई’ रज़मी साहब की शख़्सियत उनके कलाम के नज़रिये से देखें, तो शोहरत की बुलंदी को छू लेने वाले इस अज़ीम शायर की सादगी उसमें चार चांद लगाती रही है. ...
शमे-अदब Sham-e-adab شمع-ادب...
शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद''
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  September 20, 2012, 9:05 pm
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