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Blog: जज़्बात جذبات Jazbaat

Blogger: शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
एक ग़ज़ल ******** हर मसअले का हल निकलेगा आज नहीं तो कल निकलेगा उसकी रज़ा शामिल हो जिसमें उस ठोकर से जल निकलेगा दुःख की गठरी खोल के देखो कोई ख़ुशी का पल निकलेगा दीवानों से पूछ के देखो अहले-ख़िरद पागल निकलेगा शीशे को तोड़ा है उसने पत्थर भी घायल निकलेगा तूने क्या सोचा था शाहिद जल गई रस... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   3:47pm 5 May 2016 #
Blogger: शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
हाज़िर है एक ग़ज़ल- सारी वफ़ाएं सारी जफ़ाएं जाने क्या-क्या भूल गयातुम छेड़ो तो याद आ जाए मैं तो किस्सा भूल गया साथी मुझको लेकर चलना फिर बचपन की गलियों मेंशायद ऐसा कुछ मिल जाए जिसको लाना भूल गया हां मैं ऊंचा बोला था तस्लीम किया मैंने लेकिनमेरी बातें याद रहीं खुद अपना लहजा भूल ... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   10:25pm 21 Feb 2015 #
Blogger: शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
कहीं सब कुछ न हो जाए उजागर चुप रहा था मैं तुम्हारे दिल की चौखट तक भी आकर चुप रहा था मैं अब ऊंचा बोलने का तुम मुझे इल्जाम मत देना तुम्हारे नर्म लहजे तक बराबर चुप रहा था मैं। मेरी सीधी सी बातों के कई मतलब न वो समझें बहुत कुछ कहने की हसरत तो थी पर चुप रहा था मैं ये आसां भी था मु... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   10:35am 10 Nov 2014 #
Blogger: शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
सम्मानित जनो, आज ही दिन पांच साल पहले ब्लागिंग शुरू की थी। इन पांच सालों में कितना अंतर आ गया है। आज ब्लागिंग के बजाय फेसबुक की ओर लोगों का अधिक रुझान रहने लगा है। खैर... आज गांधी जयंती पर एक पुराना कताअ पेश है- अहिंसा के मसायल पर रजा अपनी भी रखते हैं। कोई बुजदिल समझ बैठे द... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   12:06pm 2 Oct 2014 #
Blogger: शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
लौह पुरुष की दहलीज पर दम तोड़ते  गुजरात विकास के दावेशाहिद मिर्जाएक ओर नरेन्द्र मोदी सरदार बल्लभ  भाई पटेल के नाम से नर्मदा पर स्टेच्यू आॅफ यूनिटी बनाने के लिए देश भर से लोहा एकत्र करके अपने प्रेम उमड़ने का ढिंढोरा पीट रहे हैं। दूसरी ओर सरदार पटेल के नाम पर बने स्मारक औ... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   12:50pm 13 Apr 2014 #
Blogger: शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
साहेबान बहुत दिनों बाद आज एक ग़ज़ल हाज़िर है नज़रें करती रहीं कुछ बयां देर तकहम भी पढ़ते रहे सुर्खियां देर तकआओ उल्फ़त की ऐसी कहानी लिखेंज़िक्र करता रहे ये जहां देर तकबज़्म ने लब तो खुलने की मोहलत न दीएक खमोशी रही दरमियां देर तकमैं तो करके सवाल अपना खामोश था तारे गिनता ... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   1:01pm 7 Apr 2014 #
Blogger: शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
नीरज गोस्वामी  इस नाम से ब्लॉग जगत में भला कौन नावाकिफ़ हैं किताबों की दुनिया के नाम से 2008 में शुरू किये गये सिलसिले के तहत आपने शेर-शायरी की अब तक 90 किताबों की समीक्षा इतनी खूबसूरती से की है, कि पढ़ने वाले के दिल में किताब लेने की ख्वाहिश जाग जाती है. शायरी के प्रति ऐसी दीवा... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   12:56pm 5 Mar 2014 #
Blogger: शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
हज़रात,फ़िलहाल काफ़ी कुछ ऐसा है, जो नियमित रूप से नहीं चल रहा है... बहरहाल....करवा चौथ के मौके पर कही गई एक नज़्म हाज़िर है...उम्मीद है पसंद फ़रमाएंगे-नज़्ममेरे सपनों का जहां तुझमें बसा है प्रियतमतेरी खुशियां ही तो सिंगार मेरा है प्रियतमतुमको पाया तो लगा पाया ज़माना जैसेमेरे दामन म... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   4:46am 2 Nov 2012 #
Blogger: शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
 हज़रात, एक सादा सी ग़ज़ल हाज़िर है-अजब वफ़ा के उसूलों से ये ”वफ़ाएं” हैंतेरी जफ़ाएं, ”अदाएं”, मेरी ”ख़ताएं” हैं महकती जाती ये जज़्बात से फ़िज़ाएं हैंकोई कहीं मेरे अश’आर गुनगुनाएं हैंवो दादी-नानी के किस्सों की गुम सदाएं हैंपरी कथाएं भी अब तो ”परी कथाएं” हैंज़ेहन में कैसा ये जंगल ... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   2:42pm 20 Sep 2012 #
Blogger: शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
सूखें न भाईचारे के गंगो-जमन कभीअल्लाह मेरे मुल्क में अम्नो-अमां रहे(ऊपर के लिंक पर भी क्लिक कीजिए)सभी हज़रात को ईद मुबारकईद और हमारी संस्कृतिशाहिद मिर्ज़ा शाहिदईद,ये लफ़्ज़ हर किसी के दिल में अपनेपन का अहसास पैदा कर देता है. हर दिल में खुशी की एक खास उमंग जाग जाती है. हो भी क... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   1:16pm 19 Aug 2012 #
Blogger: शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
हज़रात....छह महीने का वक़्त गुज़र गया अपने ही ब्लॉग से दूर हुए...वो जनाब बशीर बद्र साहब ने फ़रमाया है नकुछ तो मजबूरियां रही होंगी....बहरहाल..आप सबसे दुआओं की गुज़ारिश हैआज रक्षा बंधन का पावन पर्व है...इस बार ग़ज़ल से हटकर कुछ अलग लिखा हैये रचना आज के दैनिक प्रभात में प्रकाशित हुई हैउम... Read more
clicks 213 View   Vote 0 Like   6:32pm 1 Aug 2012 #
Blogger: शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
एक क़ता हाज़िर है- हक़ मिले सबको बराबर ऐसा संविधान हैएकता और अम्न ही अहले-वतन की शान है राष्ट्रभक्ति इसलिए भी दौड़ती है खून में मुल्क से जज़्ब-ए-मुहब्बत, हिस्सा-ए-ईमान है शाहिद मिर्ज़ा शाहिद... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   5:49pm 25 Jan 2012 #
Blogger: शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
              ग़ज़लज़िन्दगी इतनी बरहमी मत रखमेरे साग़र में तश्नगी मत रख(बरहमी=नाराज़गी, सागर=पैमाना, तश्नगी=प्यास)वो न बदले हैं और न बदलेंगेकोई उम्मीद आज भी मत रखकर अता ऐ नसीब फ़ुरसत भीहर घड़ी इम्तहान की मत रखदुनियादारी बहुत ज़रूरी हैइतनी लहजे में सादगी मत रखइनको भी मुस्कुराने द... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   6:32pm 4 Dec 2011 #
Blogger: शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
हज़रात, इत्तेफ़ाफ़ है कि इससे पहले पोस्ट की गई ग़ज़ल गांव के सिलसिले से रही, और इसमें भी काफ़ी हद तक वही सब कुछ है...मुलाहिज़ा फ़रमाएं                            ग़ज़ल बूंदें देखीं और खिल उठा जोबन कच्ची मिट्टी काकितना गहरा रिश्ता है ये सावन-कच्ची मिट्टी काशहर में कितनों को मिलता है बचपन ... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   6:36pm 4 Nov 2011 #
Blogger: शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं इस मुबारक मौके़ पर दुआ की शक़्ल में एक क़ता हाज़िर है-हो दीवाली में घर-गली रोशन सांस महके, हो ज़िन्दगी रोशनऐसे दीपक जलाएं हम, जिनसेदिल भी रोशन हो रूह भी रोशनशाहिद मिर्ज़ा शाहिद... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   10:27am 26 Oct 2011 #
Blogger: शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर 2009 से शुरू हुआ ब्लॉगिंग का ये सिलसिला आज दो साल पूरे कर रहा है...एक इतल्ला भी इस मौके पर देना चाहता हूं...मेरे मित्र जनाब केपी सिंह ने नाचीज़ को  संवाद मीडिया की एडिटिंग की ज़िम्मेदारी सौंपी है...ये एक सामाजिक-साहित्यिक मासिक मैग्जीन है...जिसमें आप अप... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   6:32pm 1 Oct 2011 #
Blogger: शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
हज़रात, यहां हमारे शहर में तो नहीं, अलबत्ताटीवी पर खबर है...कि लखनऊ, दिल्ली, पटना समेत मुल्क के कई हिस्सों में ईद का चांद नज़र आ गया हैफिर अपना ये क़ता याद आ गया...वतन की सरज़मीं पर ही किया करते हैं हम सजदेहमें अपने फलक पर नूर-ए-हक़ की दीद होती है.हमारे ही वतन की सरहदों में चांद जब आ... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   2:54pm 30 Aug 2011 #
Blogger: शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
 स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं सुनहरे हर्फ़ों से उनकी लिखी कथाएं हैं वो जिनके सदके में आज़ाद ये फ़िज़ाएं हैंजी हां, ठीक एक साल पहले पंकज सुबीर जी के ब्लॉग पर आई ये ग़ज़ल बहुत पसंद की गई...वैसे तो स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान में जितना भी लिखा जाए, कम है, फिर भी...शहीदो... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   6:32pm 14 Aug 2011 #
Blogger: शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
हज़रात, आदाबएक शेर देखिए चलो तकदीर दोनों आज़माकर देख लेते हैंमिलाता है हमें किसका मुक़द्दर देख लेते हैंलीजिए एक ग़ज़ल हाज़िर है-सारी दुनिया की निगाहों से छुपा लेता हूंअपनी नज़रों में तुझे आ मैं बसा लेता हूं जानता हूं कि न आएंगे वो फिर भी घर कोएक वादे के भरोसे पे सजा लेता हूंख़... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   5:51pm 15 Jul 2011 #
Blogger: शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
हज़रात आदाब, एक ग़ज़ल हाज़िर है...मुलाहिज़ा फ़रमाएंछू सका न फितरत का फन ये आज भी मुझकोआईने में तकती है मेरी सादगी मुझकोमैं उसे समझ पाऊं वो मुझे समझ पाएऐ खुदा अता कर दे एक आदमी मुझकोअपनी बात कहने का हौसला न कर पायाउम्र भर रुलाएगी मेरी बुजदिली मुझकोख़ुद पे रख नहीं पाता मैं कभी कभ... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   6:19pm 25 May 2011 #
Blogger: शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
 हज़रात, आदाब 14 फ़रवरी 2011 को लांच हुआ दैनिक जनवाणी, मेरठ का अब तक एक लाख से अधिक सर्कुलेशन हो चुका है. इसी की कतरन बतौर तम्हीद हाज़िर है.मुलाहिज़ा फ़रमाएं, एक ताज़ा ग़ज़लखुशी का कोई बहाना वो ढूंढता होगागमों से मुझको भी खुद को उबारना होगानमी से आंखों की वो रोज़ भीगता होगामुझे यक़ीन है... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   11:58am 17 Apr 2011 #
Blogger: शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
हज़रात, आदाब इन दिनों मसरुफ़ियात कुछ ज़्यादा रही हैं...कोशिश है कि पहले की तरह वक़्त निकाला जाए...आप भी दुआ कीजिएगा.  एक ग़ज़ल हाज़िर है रंज-ओ-ग़म के दरमियां है शादमानी आज भीकर रही है मुझ पे किस्मत मेहरबानी आज भी और तो फुर्सत किसे है, अपनी बरबादी का हालसुन लिया करते हैं ख़ुद अपनी ज़... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   5:40pm 27 Mar 2011 #
Blogger: शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
हज़रात, कोई तम्हीद नहीं...बस एक सादा सी ग़ज़ल हाज़िर है यादों का जब वन देखा हैसांसों में चंदन देखा है तुमने क्या देखा, तुम जानोमैंने तो बस मन देखा है पहले तुमको देखा, और फिरदिल का पागलपन देखा है तुममें खुद को देखा अकसरजब देखा, दरपन देखा है तुम चाहो तो रंग भर जाएंमैंने इक स्वप... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   2:58pm 20 Feb 2011 #
Blogger: शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएंहाज़िर है, एक ग़ज़ल जश्ने-जम्हूरी हमें यूं भी मनाना चाहियेक़ौमी यकजहती का इक सूरज उगाना चाहियेदर्द तेरे ज़ख्म का उभरे मेरे दिल में अगरआंख में तेरी, मेरा आंसू भी आना चाहियेवो जो कल बिस्मिल भगत अशफाक़ के सीनों में थानौजवानों में वही जज़्बा ... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   11:18pm 25 Jan 2011 #
Blogger: शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
साहेबान, मुहब्बत भी ज़िन्दगी का एक खूबसूरत पहलू है. पेश है इसी रंग की एक  ग़ज़लअजायबघरों में सजाएं मुहब्बतकहीं से चलो ढूंढ लाएं मुहब्बततराना दिलों का बनाएं मुहब्बतचलो साथ में गुनगुनाएं मुहब्बतमयस्सर नहीं है ये शै हर किसी कोकि महफ़ूज़ रखें, बचाएं मुहब्बतमिले क़तरा-क़तरा ... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   6:33pm 16 Jan 2011 #
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