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अमिताभ

तुम भी न बारिशहो क्या चीज ?बताओ तो !पानी तो नहीं हो तुम ।होती तो कैसे जलाती हॄदय इतनेमन में क्यों आग लगाती?भला पानी भीलौ फूंकता है क्या!(टुकड़ा-टुकड़ा डायरी, ०९-०७-१८ )...
अमिताभ...
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  July 11, 2018, 10:58 am
कभी कभी इश्क़अचानक होता है ..अचानक ।एकदम से।देखते ही।उतर जाता है अंदर ,समा जाता है ।बहने लगता है रक्त की तरह रगों में ..कोई प्रश्न नहीं - किससे हुआ, क्यों हुआ और ये क्या हुआ ?बस होता है ।सच माननाइश्क़ बुरा नहीं होता ।कभी उसे अपनी हथेली पर रखकरआँखों के करीब लाकरग़ौर से देखना ..उस...
अमिताभ...
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  July 2, 2018, 1:15 pm
माथे के उपरभिनभिनाते सत्य को तुममच्छर उड़ाने की भांतिहाथों से झटकते, भगाते ,उड़ाते रहते होकि कहीं डँस न ले ..आहा,जीवन कितना भोला हैनासमझ है , नादान हैकि जैसे मिला तो मिल ही गया।तुम मानो या न मानो प्रिये !अमृत कलश में जरूरछोटा सा छिद्र हैरिसती है जहाँ से उम्र बूँद बूँद ।...
अमिताभ...
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  July 2, 2018, 1:15 pm
हर एक कविता के बादछोड़ देते हो तुमप्रतीक्षा ।हाँ न ...तुम्हे खबर नहीं है मुझे प्रेम हो गया हैतुम्हारी कविताओं से ।मानो या न मानोकिन्तु लिखे शब्द और उनके अर्थजैसे छू कर मुझसेजाते हैंजैसे सिरहन सी दौड़ती है पूरी देह में ।जानते बूझते भी किमेरे लिए नहीं है ये शब्द ,न ये डोली...
अमिताभ...
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  July 2, 2018, 1:13 pm
और मैं आँख बंद कर ट्रैफिक के बीच दौड़ लगाता हूँगाड़ी घोड़े वाले जब मुझे बचाते हुए चलते हैं तोमज़ा आता है।हवलदार की घुड़की कोअपनी सॉरी सॉरी से डिलीट करने कामज़ा कौन क्या जाने।बोलो कूदोगे मेरे संग गहरेख़ौफ़नाक सागर मेंकि तैरना भी नहीं आता मुझेकिसी को बचा तो सकता ही नहीं।सोचकर ...
अमिताभ...
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  July 2, 2018, 1:12 pm
चुपके से जाकर छूट चुकी पिछली पोस्टों को लाइक कर आना उसे दीवार पर फिर से चिपका आना होता है।फिर से जन्म ले लेती हैं वो सारी।जिन्होंने पढी और जिन्होंने नहीं पढ़ीफिर फिर जी लेते हैं उसे।इस तरह अपन हीब्रह्मा हो जाते हैं -लिखे को बिसरने न देनेउसे जिलाने के।...
अमिताभ...
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  July 2, 2018, 1:11 pm
अपने जीवन, प्रेम और संसार मेंकितनी व्यस्त हो तुमबावजूद वक्त निकालती हो मेरे लिए!पता है वो कितना खरा है ?मेरे लिए ठीक ठीक वैसाजैसे समुद्र मंथन से निकला अमृत!ये तो जाना मैंने!किन्तु क्यों न जान सका किमुझे अमृत देकर तुमनेविष का क्या किया ?निकलता तो वो भी है।कभी बताती नहीं ...
अमिताभ...
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  July 2, 2018, 1:11 pm
गर्म रेत में धँसते पैरऔर सिर पर धरे सूरज की तपनसूखा गलाऔर रूंधे गले में फंसी आवाज़किसे पुकार पाती भला।दूर दूर तक सन्नाटाधुंधली, मिचमिचाती आँखों मेंहवा के तांडव से उड़ते रेत कणभनभना रहे इस समय कोइतना सूना बना चुके किकहीं से तितली उड़ कर आ जातीजिसके पीछे चल पड़ते हैं कदम।म...
अमिताभ...
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  July 2, 2018, 1:08 pm
वो जब मिटटी गूंथते दीखते हैंतो लगता है किसी मूर्ति को आकार देंगे।वो ऐसा नहीं करते।मूर्ति को नहीं बल्कि जिन्दा लोगो कोजिन्दा रखने के लिए दुनिया गोल की तरहगोल गोल रोटियों को आकार देते हैं।मिट्टी में नमकनमकहलाल की तरह ही तो हैजो मिलाकर पेट की भूख को थापने कीजद्दोजहद ...
अमिताभ...
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  July 2, 2018, 1:07 pm
कितने लोगो के पासकितनी सारी संवेदनाएं हैंजिन्हे बेहिचक व्यक्त की जाती है।कितने लोगो के पास कितनी सारी हिदायतें हैंजिन्हे बे हिचक दी जाती है।कितने लोगो के पासकितने सारे प्यार हैंजिन्हे शब्दाकार दिया जाता है।कितने लोगो के पासकितना अकेलापन हैजिन्हे दूर नहीं किया...
अमिताभ...
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  February 23, 2018, 10:18 am
हुआ प्रेम अकेला होता हैउससे नहीं होता किसीको प्रेम।क्योंकि होने वाले प्रेम मेंकरने वाले जैसे तत्व नहीं होतेन ही होता कोई आकर्षण। न ही ये मन्मथ है , न रतिसखान ही मदन , न ही पुष्पधन्वाऔर न कदर्प , न अनंगये तो निपट बदरंग होता है।असंग होता है।इसलिए नहीं होता अब किसीको प्र...
अमिताभ...
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  February 12, 2018, 10:27 am
सभागृह में गहमागहमी थी।  डायस को सुमित ने संभाल रखा था। मंच पर अतिथि आ चुके थे।  कुछ साहित्यकार, कुछ साहित्यकार टाइप के लोग , कुछ पत्रकार और कुछ दोस्त-यारों से श्रोतागण सज्जित थे। ''ये प्रेम कहानी है।  सिर्फ एक आदमी की कहानी। सिर्फ एक प्रेम की कहानी। ताज्जुब ...
अमिताभ...
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  August 9, 2017, 9:33 pm
चित्र -कैट एम वो हैं इसलिए अहसास नहीं है कि जिनके पास नहीं उनका दुःख कैसा। वो हैं इसलिए है सारा गुस्सा , जिद और इच्छाएं ज़रा पूछ भर लेना जिनके पास नहीं है उनके गुस्से का प्रभाव है भी या नहीं ?उनकी जिदो का अर्थ है भी या नहीं ?उनकी इच्छाएं पूरी होती भी है या नहीं ?...
अमिताभ...
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  July 13, 2017, 4:23 pm
बारिश से मचा कीचड़ मखमली था उन दिनों..उन दिनों फ़िक्र नहीं थी किकीचड से सने कपडे धुलते कैसे हैं यामां नहलाती कैसे हैं ?फ़िक्र नहीं थी कि आसमान भले बरसता होकिन्तु नगर पालिका का नल नहीं बहता है ।उन दिनों पूरा मोहल्ला भीगता था ..लोहे की पतली छड़ जमीन में धंसती थीऔर हमारी किलकारि...
अमिताभ...
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  July 1, 2017, 12:36 pm
कितनी बलियां दे दी इच्छाओं की ,आहूत किया श्रम और स्वेद कितना ,जीवन कुंड इन समिधाओं से धधकता रहा किन्तु भाग्य था जो प्रसन्न नहीं हुआ। ...
अमिताभ...
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  June 26, 2016, 10:39 am
आँगन से लेकर बरामदे तक बिछी नाकामयाबियों की चादर पर बैठ कर उम्मीदों के  सहारे अब रहा नहीं जाता। बहुत कुछ बनाने के फेरे में बहुत कुछ छूट गया। छूट गए साथी , संगी , प्रेमी जो चिपक गया है वह बदकिस्मती और असफलताओं के तमगे है। अब न प्रयास है , न कोई रोशनी की कि...
अमिताभ...
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  April 19, 2016, 6:31 pm
रोज एक आत्महत्या  होती है मेरे अंदर। सूली पर लटक जाते हैं विचार सोच गहरी खाई में कूद पड़ती है ट्रेन की पटरी पर लेट जाती है इच्छाएं कट जाती है कामनाएं महत्वकांक्षाएं पंखे से लटक कर झूलती हैं  और किसीको कानो कान खबर नहीं होती। क्योंकि खबर ही नहीं बनती ...
अमिताभ...
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  December 29, 2015, 6:56 pm
मेरे जन्मदिन पर दिया गया उसका ग्रीटिंग देखता हूँ और सोच में डूब जाता हूँ। उसके बालमन ने लिखा या सचमुच उसके लिए मैं दुनिया का सबसे अच्छा पिता हूँ ?क्या वो मेरे पिता होने पर लकी है ?उसकी छोटी छोटी इच्छाओं का गला घोंट दिया करता हूँ अपनी वाकपटुता से ,और वो है कि हर ...
अमिताभ...
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  November 12, 2015, 9:04 pm
जिस गठरी में भर कर लाया था कुछ यौवन , कुछ यादें , कुछ शौक और कुछ आदतें वो बीच सफर में समय के डकैतों ने छीन ली। और अचानक , एकदम से चलते चलते कंगाल हो गया। न यौवन रहा , न यादें रहीं , न कोई शौक और न मसखरी आदतें। कौन पूछता है खाली लटकने वाले जेब को ?जो कभी तलहटी पर ही&n...
अमिताभ...
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  October 21, 2015, 12:11 am
जितनी रेखाएं उभरी हैं आज तक वो स्याही तेरी स्मृतियों की है। कैनवास पर उकेरी गयी तस्वीरें इश्क़ के रंगो में डूबी हैं। यूं तो समय के दरम्यां सालों साल का है खालीपन ये उम्र की सफेदी तो सादगी इश्क की है। ...
अमिताभ...
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  October 11, 2015, 12:10 pm
हाँ तुम जो भी करते हो इसलिये कि प्रेम है ,प्रेम है इसलिये ही तो सारी चीजे सोचने में आती है /तुम हर वक्त , हर मोड पर सही हो किंतु जितना तुम सही हो उतना ही कोई ओर भी है /क्योंकि प्रेम में गलत कुछ भी नहीं होता /सबकी अपनी अपनी जिंदगी है अपनी अपनी परिस्थितियाअपने अपने जंजा...
अमिताभ...
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  July 25, 2015, 9:51 am
मुझे बुलाता है कैलाश मानसरोवरऔर मैं आमंत्रण को हाथ में धरे खड़ा हूँ ,कहाँ से शुरू करू यात्रा ?रास्तो के तमाम नक़्शे हैंयात्रा वृत्तांतों के टेके हैं लुभाती तस्वीरें हैंऔर सारी सुविधाएं हैंकिन्तु सबकुछ होने के बाद भीजरूरी नहीं होता कि सब कुछ हो जाए।जो होता है , वो होने ...
अमिताभ...
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  June 15, 2015, 8:44 pm
उदासी में बोझिल ही हुआ जाता है ऐसा नहीं है। ऐसा नहीं है कि प्रेमी निर्मोही न हो। निराशाएं तोड़ती हों असफलताएँ धैर्य खो देती हों और आदमी किसी काम का न हो ऐसा नहीं है।बहुत कुछ है जो 'ऐसा नहीं है 'फिर क्यों इल्ज़ामातकि तुम ऐसे हो , वैसे हो , कैसे हो ?जैसा है , वह उसके होने ...
अमिताभ...
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  June 4, 2015, 12:16 am
तुम्हे पता हैजिससे प्रेम होता हैवही दूर हो जाता है ?देखो चाँद भी धरा से कितना दूर हैऔर भी दूर होते जा रहा है।कभी धरा के गले लगा थाआज विरह गीत गुनगुनाता है।कितना अजीब है न ये प्रियेकि प्रेम के दुश्मन अरबो वर्ष पहले भी थेकोई साढें चार अरब पूर्व क्यों आया था थिया?धरती से ...
अमिताभ...
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  May 30, 2015, 7:53 pm
सूरज की सिगड़ी पर रात ने लई बनाई और उससे चाँद को आसमान पर चिपका दिया , कुछ तारें टाँके बड़ा सा पंखा तीन की स्पीड से चला दिया....(कभी कभी बच्चे सी सोच भी उधड़ी हुई नींद की सिलाई कर दिया करती है)...
अमिताभ...
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  May 27, 2015, 8:01 pm
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