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अमिताभ

कितनी बलियां दे दी इच्छाओं की ,आहूत किया श्रम और स्वेद कितना ,जीवन कुंड इन समिधाओं से धधकता रहा किन्तु भाग्य था जो प्रसन्न नहीं हुआ। ...
अमिताभ...
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  June 26, 2016, 10:39 am
आँगन से लेकर बरामदे तक बिछी नाकामयाबियों की चादर पर बैठ कर उम्मीदों के  सहारे अब रहा नहीं जाता। बहुत कुछ बनाने के फेरे में बहुत कुछ छूट गया। छूट गए साथी , संगी , प्रेमी जो चिपक गया है वह बदकिस्मती और असफलताओं के तमगे है। अब न प्रयास है , न कोई रोशनी की कि...
अमिताभ...
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  April 19, 2016, 6:31 pm
रोज एक आत्महत्या  होती है मेरे अंदर। सूली पर लटक जाते हैं विचार सोच गहरी खाई में कूद पड़ती है ट्रेन की पटरी पर लेट जाती है इच्छाएं कट जाती है कामनाएं महत्वकांक्षाएं पंखे से लटक कर झूलती हैं  और किसीको कानो कान खबर नहीं होती। क्योंकि खबर ही नहीं बनती ...
अमिताभ...
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  December 29, 2015, 6:56 pm
मेरे जन्मदिन पर दिया गया उसका ग्रीटिंग देखता हूँ और सोच में डूब जाता हूँ। उसके बालमन ने लिखा या सचमुच उसके लिए मैं दुनिया का सबसे अच्छा पिता हूँ ?क्या वो मेरे पिता होने पर लकी है ?उसकी छोटी छोटी इच्छाओं का गला घोंट दिया करता हूँ अपनी वाकपटुता से ,और वो है कि हर ...
अमिताभ...
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  November 12, 2015, 9:04 pm
जिस गठरी में भर कर लाया था कुछ यौवन , कुछ यादें , कुछ शौक और कुछ आदतें वो बीच सफर में समय के डकैतों ने छीन ली। और अचानक , एकदम से चलते चलते कंगाल हो गया। न यौवन रहा , न यादें रहीं , न कोई शौक और न मसखरी आदतें। कौन पूछता है खाली लटकने वाले जेब को ?जो कभी तलहटी पर ही&n...
अमिताभ...
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  October 21, 2015, 12:11 am
जितनी रेखाएं उभरी हैं आज तक वो स्याही तेरी स्मृतियों की है। कैनवास पर उकेरी गयी तस्वीरें इश्क़ के रंगो में डूबी हैं। यूं तो समय के दरम्यां सालों साल का है खालीपन ये उम्र की सफेदी तो सादगी इश्क की है। ...
अमिताभ...
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  October 11, 2015, 12:10 pm
हाँ तुम जो भी करते हो इसलिये कि प्रेम है ,प्रेम है इसलिये ही तो सारी चीजे सोचने में आती है /तुम हर वक्त , हर मोड पर सही हो किंतु जितना तुम सही हो उतना ही कोई ओर भी है /क्योंकि प्रेम में गलत कुछ भी नहीं होता /सबकी अपनी अपनी जिंदगी है अपनी अपनी परिस्थितियाअपने अपने जंजा...
अमिताभ...
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  July 25, 2015, 9:51 am
मुझे बुलाता है कैलाश मानसरोवरऔर मैं आमंत्रण को हाथ में धरे खड़ा हूँ ,कहाँ से शुरू करू यात्रा ?रास्तो के तमाम नक़्शे हैंयात्रा वृत्तांतों के टेके हैं लुभाती तस्वीरें हैंऔर सारी सुविधाएं हैंकिन्तु सबकुछ होने के बाद भीजरूरी नहीं होता कि सब कुछ हो जाए।जो होता है , वो होने ...
अमिताभ...
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  June 15, 2015, 8:44 pm
उदासी में बोझिल ही हुआ जाता है ऐसा नहीं है। ऐसा नहीं है कि प्रेमी निर्मोही न हो। निराशाएं तोड़ती हों असफलताएँ धैर्य खो देती हों और आदमी किसी काम का न हो ऐसा नहीं है।बहुत कुछ है जो 'ऐसा नहीं है 'फिर क्यों इल्ज़ामातकि तुम ऐसे हो , वैसे हो , कैसे हो ?जैसा है , वह उसके होने ...
अमिताभ...
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  June 4, 2015, 12:16 am
तुम्हे पता हैजिससे प्रेम होता हैवही दूर हो जाता है ?देखो चाँद भी धरा से कितना दूर हैऔर भी दूर होते जा रहा है।कभी धरा के गले लगा थाआज विरह गीत गुनगुनाता है।कितना अजीब है न ये प्रियेकि प्रेम के दुश्मन अरबो वर्ष पहले भी थेकोई साढें चार अरब पूर्व क्यों आया था थिया?धरती से ...
अमिताभ...
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  May 30, 2015, 7:53 pm
सूरज की सिगड़ी पर रात ने लई बनाई और उससे चाँद को आसमान पर चिपका दिया , कुछ तारें टाँके बड़ा सा पंखा तीन की स्पीड से चला दिया....(कभी कभी बच्चे सी सोच भी उधड़ी हुई नींद की सिलाई कर दिया करती है)...
अमिताभ...
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  May 27, 2015, 8:01 pm
तुम्हारे और मेरे मध्यअंतरिक्ष है।इसीलिये गहरा सन्नाटा है।न कोई वातावरण ,न ही ध्वनि यात्रा का कोई माध्यम। शून्यनिपट सूनेसन्नाटे में डूबेइस अंतरिक्ष मेंरेडियो तरंगे ही होती हैंजो संवाद स्थापित कर सकती हैंइसलिएअपनी आँखे खोलो।(सुबह का आलाप : ध्यानावस्था में आँखे अ...
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  May 27, 2015, 10:58 am
तुमने मेरी असफलताओं कोब्लैक होल की संज्ञा दे दीअच्छा ही किया।जानते हो नकि ब्लैक होल कोई छेद नहीं है।यह तो मरी हुई इच्छाओं के वे अवशेष हैंजो टूट चुके तारों की तरह जमा हैं।और पता है ?किसी सुपरनोवा की तरह चमकते हुए ख़त्म हुआ था मैं।न न ख़त्म हुआ भी कहाँ ?अस्तित्व कब किसीका ...
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  May 26, 2015, 12:10 pm
'बेरोजगार के चेहरे पर मुस्कराहट उसकी लापरवाही नहीं होती बल्कि उसका धैर्य होता है।''''किस धैर्य की बात करते हो ? हाथ-पैर बाँध कर बैठे रहना और ईश्वर से प्रार्थना करते रहना कि कोई नौकरी मिले ?''''इसमे भी क्या बुराई है ?''''बुराई , अरे ये बेवकूफी है , मूर्खता है।''''ये तुम कैसे कह सकते ह...
अमिताभ...
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  May 14, 2015, 11:57 am
''तुम पहाड़ पर चढ़कर आसमान को छूने की बात करती हो और मैं कहता हूँ पहाड़ से भी ऊंचा है आसमान।  हाथ नहीं पहुंचेगा।'' ''पहाड़ पर चढ़ जाने के  सुकून से वंचित तो नहीं होउंगी। और वैसे भी आप कोई भी सफलता हासिल कर लो , और और सफलताएं , ऊपर चढ़ते-बढ़ते रहने की लालसा जाग्रत हो जाती है। बस , प...
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  May 14, 2015, 12:04 am
तुमने सुख और शान्ति को गढ़ा दिया नहीं, दे सकने का भ्रम रखा। क्योंकि कुछ दिया जा ही नहीं सकता जब तक कि लिया न जाए। लेने वालों ने तुम्हारी दी हुई चीज नहीं ली बल्कि वह लिया जिससे तुम दूर भागे।दूर भागनासत्य-शान्ति-स्नेह की तलाश मेंकभी आवश्यक नहीं रहा।फिर भी भागे और ...
अमिताभ...
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  May 4, 2015, 11:50 am
उस घर से कोई पांच घर छोड़ एक गली थी , गली के बाद दो  घर छोड़ उसका घर। घरों की इस कतार को  गली विभाजित करती थी। मगर निगाहें विभाजन की इस रेखा से पार दोनों घरो की चौखट पर बिछी होती थी।  इधर से भी-उधर से भी। दरवाजे खुलने का बेसब्र  इन्तजार  मुस्कुरात...
अमिताभ...
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  April 28, 2015, 9:44 pm
मेरे पाससिर्फ प्रेम थाऔर उन्हेइजहार चाहिये था ....(सूरज की तेज-चिटकती धूप कपाल पर पसीने के साथ चमकती है और वो पौछना चाहते हैं)...
अमिताभ...
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  March 10, 2015, 1:17 pm
उनके लिये किसी दूसरे के इमोशंस अब कोई महत्व नहीं रखते .अच्छा है यह .पहले की बात और थी , हम भी कमाऊ थे और व्यस्त थे ..थोडा बहुत नाम था , प्रतिष्ठा थी ..अब ऐसा कुछ नहीं है तो वे भी अब अपनी तरह की ही जिंदगी जीते हैं . उन्हे फिक्र क्यो रहेगी अब ? बहानो और निजी मुसीबतो से&...
अमिताभ...
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  March 3, 2015, 9:50 am
वो पहले थाक्योंकि समय परिवर्तित है अब भी वैसा ही हो या रहे सम्भव नहीं।इसलिये 'था'से 'है'की तुलना करना और 'है'को 'था'बना देना उचित नहीं ।इसे ही स्वीकारोजो है ।और जब जब'है'को 'था'से जोडते हुयेकिसी काम का न मानना स्मरणीय होता हैआप अपने आप को छल लेते हैंक्योंकि तब आप 'है'के सा...
अमिताभ...
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  January 23, 2015, 10:17 am

अब नही आती कोई चिट्ठी , कोई पत्री ..न मेल, ....आती है तो सिर्फ याद ...कभी स्याही से कागज पर तो कभी आंखो से गालो पर .....
अमिताभ...
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  January 14, 2015, 4:16 pm
वह गर्भ में नहीं सुन पाया कि  चक्रव्यूह को तोड़ते कैसे हैं , इसीलिये द्रोणाचार्य, कर्ण   सहित दुर्योधन  के वीर सैनिकों ने मिलकर उसे मार गिराया। अभिमन्यु मारा गया। ज़िंदा रहे उसके माता-पिता। --------अच्छा बताओ हमारे बच्चे का नाम क्या होगा ?अभिमन्यु। अरे वाह बहु...
अमिताभ...
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  September 12, 2014, 7:27 pm
इश्क़ के बीच जो दीवार खड़ी हुई है उसकी नींव धरने और एक एक ईंटें रखने में कई दिन व्यय हुए थे उसके।  दरअसल उसने ठान लिया था कि जिस इश्क के साथ वो न्याय नहीं कर पा रहा है उसके बीच दीवार खिंच जाना चाहिए। यह उसके लिए बेहतर है जिससे  उसने इश्क किया था।  फैसला यकीनन जानलेवा था। &...
अमिताभ...
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  September 1, 2014, 11:27 pm
दीवारें ही दीवारें है मेरे अंदर/कोइ दरवाजा नहीं /चौखट / भूलभुलैया /पूरी देह अपने मन और आत्मा के साथ बंदी है /बाहर जाने की उत्कंठासंसार देखने की ललकहरी भरी वादियों मेंदौड़ लगाने की इच्छाघंटो गपशप /घंटो बेफिक्रीन कोइ भयन ही कोइ अज्ञात भय /बससोचता हूँचाहता हूँलिखता हूँ...
अमिताभ...
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  December 25, 2013, 8:25 pm
1, तुम्हें जो प्रेम था मुझसे / इतना कि बस्स... / किधर है ? अब मैं ढूँढने लगा हूँ /2, प्रेम विशेष दिन ज्यादा उमड़ता है /विशेष दिन विशेष न रह जाएँ तब ?शायद इसलिए आजकल मुझसे छूती नहीं हवा उनकी /3,सारी बातें,तब ज्यादा खोखली होने लगती है जब जरुरत पर वे काम नहीं आती /...
अमिताभ...
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  October 8, 2013, 11:30 pm
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