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Blog: अमिताभ

Blogger: amitabh shrivastava
पेड़ पर लिपटीये जो लता हैपीड़ा इसकीकौन समझता है ।दिखती सुंदर सजी धजी येपर अंदर गहरीउदासीनता है।【टुकड़ा टुकड़ा डायरी /19 जनवरी 2019】... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   3:25pm 17 Jun 2019 #
Blogger: amitabh shrivastava
दुःख की कविताएं गर दुःख में हुई होती तो कितना सुख मिलता।खैर..सुख में रची गई कविताएंभिन्न भिन्न प्रकार केदुःख देती हैं।तब वे कविता कमरचना ज्यादा हो जाती है।... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   3:15pm 17 Jun 2019 #
Blogger: amitabh shrivastava
छुट्टियां खत्म..खालीपन भी भरा होता हैएक ऐसे अहसास से जो शब्द नहीं पातेजो बस होते हैं।--उनके आने की बाट जोहनेऔर उनके आने के बादजो भरे भरे होने का अहसास होता हैवो उनके लौटने पर राई के माफिक बिखरता है।--सबकुछ आवश्यक हैइस सत्य को धारण कर रहनाजैसे सीने पर सौ मन का पत्थर ढोना।व... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   3:11pm 17 Jun 2019 #
Blogger: amitabh shrivastava
ये वो समय था जबचारों दिशाएं मुट्ठी में थींसारे ग्रह -नक्षत्र नाक की सीध में थेऔर धरा जैसे अपनीकनिष्ठा पर घूम रही थी।यकीन जानोमाता-पिता संगब्रह्माण्ड की समस्त महाशक्तियांएकत्रित होकर वास करती है देह मेंऔर निस्तेज जान पड़ता है इंद्र का सिंहासनअप्रभ होता है उसका फैला ... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   6:01am 21 Jan 2019 #
Blogger: amitabh shrivastava
उस वक्त जबमहानगर दूर हुआ करते थेचाँद की तरह तबमैंने धरती छोड़ी थी।इस तथ्य को नकारते हुए किहर चमकने वाली चीज सोना नहीं होती।---उबड़ खाबड़आक्सीजन रहित उपग्रह के लिएजीवन के एकमात्र ब्रह्माण्डी स्थल को त्यागनाइसरो या नासा का कोई अनुसंधान कार्य नहीं था।वो टिमटिमाते स्वप्न ... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   12:06pm 9 Jan 2019 #
Blogger: amitabh shrivastava
सारे, हाँ सारे के सारेबदमाशों ने पहन ली हैसफेद कमीज़ताकि न दिखे मैली बनियान।सारे, हाँ सारे के सारेबदमाशों की हैं तख्तियांजिस पर लिखे हैंअनेक उच्च पदनाम।सारे, हाँ सारे के सारेबदमाश जुट रहे हैं एक मंच परहाथों में हाथ डाले जिनकेमन में फूट रहे हैं लड्डू ।सारे, हाँ सारे के ... Read more
clicks 9 View   Vote 0 Like   12:05pm 9 Jan 2019 #
Blogger: amitabh shrivastava
मोर से आकर्षकसुनहरी दुम वालेहरे,नीले बैंगनी रंग से लिपे पुतेकिन्तु बड़े मुंह और भूखे पेट वाले होते हैं वर्ष।राख से जन्मे।इनका हाजमा इतना दुरुस्त होता है किजीवन के जीवन लील जाते हैंऔर इतने नकटे कि जरा भी शिकन नहीं।बावजूद खूँटी पर टाँगे जाते हैंफीनिक्स के 365 सिर।【टुकड़... Read more
clicks 12 View   Vote 0 Like   12:03pm 9 Jan 2019 #
Blogger: amitabh shrivastava
रुको,ये जली हुई धरती का उज्जडपनराक्षसी नहींबल्कि ये काला टीका बनबुरी नज़र से बचाता है।और यकीन मानोजंगल नहीं होते जंजालघबराओ मत, आओ,गहरे उतरो ,छाती पर चढ़ बैठो अँधेरे कीकि बस कुछ देर बाद हीसूरज आसमान के सिर पर होगाऔर तुम्हारा घर साफ दिखाई देगा।【टुकड़ा टुकड़ा डायरी/6 जनवरी 20... Read more
clicks 8 View   Vote 0 Like   12:02pm 9 Jan 2019 #
Blogger: amitabh shrivastava
कैसा तो गूंथा है आपस मेंहरा, सूखा सब झाड़ झँखड़जैसे अब कोई रास्ता ही न होउलझे रह जाओ यहीं सुख दुःख की तरहमुक्त हो ही न सको।सुनो प्रिये,मत थको,कि आगे बढ़ो..हरे भरे में खोओ मतकि सूख चुके पत्तों का दुःख ओढो मतपार करो इसे भी क्योंकिउस पार फैला 'आकाश'हैऔर वही सार है।(2 des 2018)... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   6:42am 16 Dec 2018 #
Blogger: amitabh shrivastava
यादें तो आ रही हैं मगर वो नहीं आते ,लौटे नहीं वो क्यूँ जो बिछड़ के चले जाते ;मुद्दत हुई उन्हें नहीं देखा है इसलिए ,रह रह के हमको अब ये उजाले भी सताते ।मआलूम है आएँगें नहीं वो किसी सूरत ,हर वक़्त मगर दिल से उन्हें हम हैं बुलाते ।बढ़ जाएँ न बेचैनियाँ बेहद इस डर से ,दुन्या मे लग लग क... Read more
clicks 15 View   Vote 0 Like   6:39am 16 Dec 2018 #
Blogger: amitabh shrivastava
मैं तुम्हारे लिए प्रेम लिखता हूँतुम नफरत।जिसकी कलम में जो रंग स्याही वो वही लिखता है।(9 nov 2018)... Read more
clicks 17 View   Vote 0 Like   6:38am 16 Dec 2018 #
Blogger: amitabh shrivastava
तुमने कांटो में देखा क्या प्यारपाया क्या सूखे झाड़ झंखाड़ में सौंदर्य ?निर्जन पड़े हिस्से में कभी जाकर पूछा क्याकैसे हो?दिखी क्याअकेले रास्ते, पड़े पत्थरों, खड़ी सूनी बदसूरत सी झाड़ियों में बिखरी मुस्कान?तुम्हारे आने से जिनका एकांतवास पूर्ण हुआलंबी राहत भरी उनकी सांस की आ... Read more
clicks 15 View   Vote 0 Like   6:37am 16 Dec 2018 #
Blogger: amitabh shrivastava
ये पर्वत,पेड़पथ और पत्थरपीर किसे सुनाएं अपनी?पास कौन आता इनकेप्यार करता भला कौन?देख मुझे डबडबा कर आँखेपूछापथिक तू है कौन?तभी अचानक उड़ के आईप्रीत पवन कीकंधो पे अपने लेकर आईगीत एक पुराना-मैं पल दो पल का शायर हूँ ....(19 nov 2018)... Read more
clicks 15 View   Vote 0 Like   6:36am 16 Dec 2018 #
Blogger: amitabh shrivastava
सुबह लिखती है आसमान पर कवितासूरज बिंदी बन छाता है।कोई टिटहरी कंठ खोल गाती हैऔर दिन हो जाता है ।( 22 nov 2018)... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   6:35am 16 Dec 2018 #
Blogger: amitabh shrivastava
पर्वत हो जाना चाहा कभीकभी नदीतो कभी वो पगडंडी जिस पर चल करगुजरते रहे पर्वत, नदी, ताल ।हुआ कुछ नहींबस सफर ही रहाउपर फैला विस्तृत आकाशशून्य का महासागर बनसिर पर तारी रहाऔर बस मन की लहरेंउथलती रही, चढ़ती उतरती रही।मंजिल थी ही नहींघुमावदार रस्ते ,घाट, खाइयांजंगल और फिर लंबी ... Read more
clicks 13 View   Vote 0 Like   6:34am 16 Dec 2018 #
Blogger: amitabh shrivastava
परिंदा है हुनर मेरापंख हैं इसमें ..बंधेंगा तो उड़ेगा नहींये खुली जमीन और खुले आसमान के लिए बना है।जटायू सा वजूद हैबहुत दूर तक नज़र हैइत्मीनान रखोखोज लूँगी लक्ष्य की अशोक वाटिका ।एक बारआकाश में छोड़ दो ..सूरज के पास जाकर भी जलूँगी नहींबल्कि उसकी आग लेकरधरती के सारे चूल्हे ... Read more
clicks 19 View   Vote 0 Like   6:33am 16 Dec 2018 #
Blogger: amitabh shrivastava
जिन्हें देख मंद मंद मुस्कुराते हैं ये क्षण किन्तु कम आते हैं....(25 OCT 2018)... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   6:32am 16 Dec 2018 #
Blogger: amitabh shrivastava
मुसोलिनी या हिटलर नहीं थे तानाशाहमार देना शौक बड़ा नहीं जितना कि तड़पाना।तानाशाह तो वो हैंजो बिना जाल और कांटे केफांस लेते हैं मछलीउस्ताद शिकारी की तरह दोस्ती का लालच देकर।हाँ, देखोन बेचते हैं , न खाते हैंछोड़ देते हैं पानी से बाहर निकाल कर।और तड़पते देखना उन्हेंनृत्य स... Read more
clicks 17 View   Vote 0 Like   6:31am 16 Dec 2018 #
Blogger: amitabh shrivastava
आदमीयत वाला आदमी------------------मैं बहुत पीछे छूटा हुआ आदमी हूँ।बहुत पीछे।जहाँ होशियारी नहीं होती जहाँ वो गंवारपन होता हैजरा सा कोई प्रेम से कह देहृदय खोल के परोस दिया जाता है।मैं नहीं समझ पाता आज भीसमझदारी की वो बातेंकि हर किसी को प्रेम नहीं करना चाहिएहर किसी को दोस्त नही... Read more
clicks 12 View   Vote 0 Like   6:28am 16 Dec 2018 #
Blogger: amitabh shrivastava
देह कोमल धरते हो फिरसख्त हृदय क्यों रखते हो ?कांटे ने फूल से कहा-एक बात तो बताओ भाईकौनसी चक्की का आटा खाते हो ?मैं तो काँटा हूँचुभना काम मेरा , गाली रोज खाता हूँ।किन्तु कितनी सदियां बीत गईरहस्य न जान सका ये अभी तकफूल होकर भी कैसे चुभ लेते हो?दिखता ही नहीं जो वोजहर कहाँ से ल... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   6:27am 16 Dec 2018 #
Blogger: amitabh shrivastava
बेवजह बदनाम करनावजह बना देता है दुश्मनी की।आओ देखें कितना दम तुम्हारे झूठ में हैऔर कितना सच हमारे पास है।जिन सबूतों को लेकर इतरा रहे होउन्ही सबूतों में तुम्हारे भी खिलाफपुख्ता शब्द हैं स्मरण रखना,याद ये भी रखना किशीशे के घर में हो और पत्थर चला रहे हो।खामोशी में डूबे ... Read more
clicks 15 View   Vote 0 Like   6:25am 16 Dec 2018 #
Blogger: amitabh shrivastava
आभासकि तुम होतुम हो..?पूजा,पाठप्रार्थनाएंआस्था,श्रद्धा जगाती है।तुम नहीं जगेसोए होइसलिए आभासी हो।उठोगे?कि प्रेम छटपटा रहा हैकि मन विचलित हैकि दर्द बह रहा हैएक बारकह ही दोकि तुम हो...(8 Oct 2018)... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   6:24am 16 Dec 2018 #
Blogger: amitabh shrivastava
दुविधाओं के मेघों से घिरेआसमान कोकौन समझेगा?अहंकार नहीं ये मेराप्रतीक्षा है बस किप्रेम दुबारा बरसेगा ।【टुकड़ा टुकड़ा डायरी/4अक्टूबर 2018】... Read more
clicks 17 View   Vote 0 Like   6:23am 16 Dec 2018 #
Blogger: amitabh shrivastava
सुनो,तुम सुखी होइसलिए दुःख कोबहुत अच्छे सेएक्सप्लेन कर सकते हो ...प्रेम की बातें इसीलिए तो खूब करते हो।और गर सचमुच होता तो?(2 oct 18)... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   5:52am 3 Nov 2018 #
Blogger: amitabh shrivastava
बीज में बिना फूल पत्तियों के पेड़ थाउगा और बड़ा हुआडूंड सा , लम्बी लम्बी शाखाओं वाली भुजाओं सादैत्याकार।न छाहँ देता हैन सुकूनबस भयावह दिखता है।पानी तो उसने भी पीया हैबोया तो वह भी गया हैजमीन तो उसकी भी यही हैफिर ?(30 sept 18)... Read more
clicks 25 View   Vote 0 Like   5:51am 3 Nov 2018 #
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