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Blog: Best Shayari । Romantic, Love & Sad Shayari

Blogger: Vinay Prajapati
ख़ुर्शीद 'तलब' | Khursheed 'Talab' जो लिखा था मिटा रहे हैं हम अपना लहज़ा बना रहे हैं हम दार पर फिर कोई अकेला है उससे कह दो कि आ रहे हैं हम शायरी से भला हुआ किसका किसलिए ख़ूँ जला रहे हैं हम... [यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें...]... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   5:10pm 12 Sep 2015 #ख़ुर्शीद तलब
Blogger: Vinay Prajapati
ख़ुर्शीद 'तलब' | Khursheed 'Talab' हमने कुछ कह दिया रवानी में ठन गयी लफ़्ज और मआनी में उसने सर्दियों की दास्ताँ कह दी एक लम्हे की बेज़ुबानी में चाहता है गुलाब से कोई जैसी ख़ुश्बू है रातरानी में... [यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें...]... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   4:57pm 12 Sep 2015 #ज़िंदगी शायरी
Blogger: Vinay Prajapati
प्रकाश यादव "निर्भीक" | Prakash Yadav Nirbheek अक्सर ख़यालों में आना आपका अच्छा लगता है कुछ देर ही सही पर साथ आपका अच्छा लगता है वो बातें वो मुलाकातें जो रह गई अधूरी अब तलक ख्वाबों में ही गुफ़्तगू... [यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें...]... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   3:58pm 23 Apr 2015 #प्रकाश यादव निर्भीक
Blogger: Vinay Prajapati
आबिद रिज़्वी अबरत | Abid Rizvi Abarat वो लड़की याद आती है [x3] वो जो ख्वाबोंं मेंं बसती थी मेरे दिल में उतरती थी वो जो मेरी हंसी मेंं अपनी मुस्कुराहट घोल देती थी जो मैंं दिल मेंं रखता था ज़ुबाँ से... [यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें...]... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   3:15pm 15 Apr 2015 #आबिद रिज़्वी अबरत
Blogger: Vinay Prajapati
फ़रहत शहज़ाद | Farhat Shahzad शाम की फ़िक्र में सहर से गया फिर न लौटा कोई जो घर से गया जिसने देखा भी आसमान की तरफ़ आज बस वो ही बाल-ओ-पर से गया ग़म में तल्ख़ी, न आग ज़ख़्मों में ज़ायक़ा शे'र के हुनर से... [यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें...]... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   2:40pm 26 Mar 2015 #ज़िंदगी शायरी
Blogger: Vinay Prajapati
फ़रहत शहज़ाद | Farhat Shahzad हर साँस में हरचंद महकता हुआ तू है धड़कन का बदन हिज्र के काँटों से लहू है दिल, गिरती हुई बर्फ़ में, ढलता हुआ सूरज जिस सिम्त भी उठती है नज़र, आलम-ए-हू है शायद के अभी... [यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें...]... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   7:56pm 28 Feb 2015 #तन्हाई शायरी
Blogger: Vinay Prajapati
फ़रहत शहज़ाद | Farhat Shahzad जब तन्हाई धड़कन में बसे, दिल दुखता है दो आँखों में जब आस ढले, दिल दुखता है जिन राहों पर हमराह मेरे तुम होती थीं जब साथ वहाँ सन्नाटा चले, दिल दुखता है है वक़्त मुक़र्रर,... [यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें...]... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   8:44pm 5 Nov 2014 #sad shayari
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यार को मैंने, मुझे यार ने सोने न दिया रातभर ताला-ए-बेदार ने सोने न दिया एक शब बुलबुल-ए-बेताब के जागे न नसीब पहलू-ए-गुल में कभी ख़ार ने सोने न दिया दर्द-ए-सरशाम से उस ज़ुल्फ़ के सौदे में रहा सुबह तक... [यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें...]... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   5:01pm 19 May 2014 #प्यार मोहब्बत की शायरी
Blogger: Vinay Prajapati
सरफ़राज़ शाकिर सम्ते-कुहसार क्या है देखो तो आसमाँ झुक रहा है देखो तो बन गयी झील आइने जैसी अक्स उठा हुआ है देखो तो दूर तक नक़्शे-पा ही नक़्शे-पा रास्ता हो गया है देखो तो मेरा साया जो साथ था अब तक रात... [यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें.... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   4:30am 15 Aug 2012 #प्रकृति सौंदर्य
Blogger: Vinay Prajapati
सरफ़राज़ शाकिर सिवांची गेट, मंगलियान की गली, जोधपुर, राजस्थान पेड़ पर पानी उगायें और देखें धूप के कपड़े सिलायें और देखें ख़ाली-ख़ाली बादलों को छेड़ें चलकर रेत को पट्टी पढ़ायें और देखें घुप अन्धेरों से... [यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगाय... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   2:30am 14 Aug 2012 #प्रकृति सौंदर्य
Blogger: Vinay Prajapati
अतहर नफ़ीस न मंज़िल हूँ न मंज़िल आशना हूँ मिसाले-बर्ग उड़ता फिर रहा हूँ मेरी आँखों के ख़ुश्को-तर में झाँकों कभी सहरा कभी दरिया नुमा हूँ वह ऐसा कौन है जिससे बिछड़कर ख़ुद अपने शहर में तन्हा हुआ हूँ जो... [यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगाये... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   2:30am 11 Aug 2012 #tanhai shayari
Blogger: Vinay Prajapati
मंज़र भोपाली दिल है हीरे की कनी, जिस्म गुलाबों वाला मेरा महबूब है दरअस्ल किताबों वाला हुस्न है - रंग है - शोख़ी है - अदा है उसमें एक ही जाम मगर कितनी शराबों वाला यार आईना हुआ करते है यारों के लिए... [यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें...]... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   2:30am 9 Aug 2012 #love shayari
Blogger: Vinay Prajapati
अक़ील नोमानी मिटा के ख़ुद को तुम्हें पाना चाहता हूँ मैं हमेशा अपने ही काम आना चाहता हूँ मैं अजीब धुन है कि मंज़िल मुझे तलाश करे सो रास्ते से भटक जाना चाहता हूँ मैं ग़ुबार साफ़ करो आईने की आँखों से कि... [यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगाय... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   2:30am 7 Aug 2012 #अक़ील नोमानी
Blogger: Vinay Prajapati
मुनव्वर राना ऐ अहले-सियासत ये क़दम रुक नहीं सकते रुक सकते हैं फ़नकार क़लम रुक नहीं सकते हाँ होश यह कहता है कि महफ़िल में ठहर जा ग़ैरत का तकाज़ा है कि हम रुक नहीं सकते यह क्या कि तेरे हाथ भी अब काँप रहे... [यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगाये... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   2:30am 5 Aug 2012 #मुनव्वर राना
Blogger: Vinay Prajapati
आफ़ताब अजमेरी मुहब्बत में तेरे ग़म की क़सम ऐसा भी होता है ख़ुशी रोती है और हँसता है ग़म ऐसा भी होता है हर इक जानिब से मैं दिल में ख़ुशी महसूस करता हूँ ख़ुदा रखे सलामत तेरा ग़म ऐसा भी होता है मक़ाम ऐसे भी आ... [यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगाये... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   8:49am 3 Aug 2012 #sad love shayari
Blogger: Vinay Prajapati
ए. एफ़. नज़र, सवाई माधोपुर चूल्हा-चौका फाइल बच्चे दिन भर उलझी रहती है वह घर में और दफ़तर में अब आधी-आधी रहती है मिलकर बैठें दुःख सुख बाटें इतना हमको वक़्त कहाँ दिन उगने से रात गये तक आपा-धापी रहती... [यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें...]... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   12:31pm 30 Jul 2012 #औरत शायरी
Blogger: Vinay Prajapati
शायिर: आफ़ताब अजमेरी यह तजरिबा हुआ है दुनिया में हमको आकर काँटों से दिल लगाओ फूलों से ज़ख़्म खाकर हँसिए तो आप लेकिन यह भी नज़र में लाकर सौ बार रोयिएगा इक बार मुस्कुरा कर इस अहद के उजाले ने यूँ... [यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें...]... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   9:47am 25 Jul 2012 #shayari about life
Blogger: Vinay Prajapati
अहमद शहज़ाद तेरे जहान में बेफल शजर नहीं मिलता बस एक अश्क है जिसका समर नहीं मिलता अन्धेरे फैल गये है कुछ ऐसे बस्ती में चराग़ मिल भी अगर जाये घर नहीं मिलता मैं रोज़ कितने ही कंकड़ समेट लेता हूँ... [यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें...]... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   4:33am 20 Jul 2012 #अहमद शहज़ाद
Blogger: Vinay Prajapati
प्रो. ओम 'राज़' / Prof. Om 'Raj' कौन था वह जो मुझे पहचान देकर चल दिया बे-रिदा1 तहरीर2 को उन्वान3 देकर चल दिया भूखे बच्चों की फ़क़त हसरत थी बासी रोटियाँ मैं उन्हें पत्थर का एक भगवान देकर चल... [यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें...]... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   9:12am 8 Sep 2009 #प्रो. ओम राज़
Blogger: Vinay Prajapati
वक़ील ख़ान 'बेदिल' / Vakeel Khan 'Bedil' सम्भल हर किसी को वफ़ा नहीं मिलती दर्दे-दिल को दवा नहीं मिलती कैसा इंसाफ़ है ज़माने का ज़ालिमों को सज़ा नहीं मिलती वो बड़े बद्-नसीब होते हैं जिनको माँ की दुआ नहीं... [यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें...]... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   6:54am 31 Aug 2009 #shayari about life
Blogger: Vinay Prajapati
अमीर अशरफ़ ख़ाँ 'हसरत' / Ameer Asharaf Khan 'Hasrat' खतौली सरमाया-ए-हयात1 मुझे कुछ मिला तो है महफूज़ मुफ़लिसी में भी मेरी अना2 तो है हमदर्द बनके आना अचानक मेरे क़रीब दर पर्दा इस ख़ुलूस3 में कोई दग़ा तो... [यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें...]... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   11:37am 21 Aug 2009 #shayari about life
Blogger: Vinay Prajapati
डॉ. इबरत बहराइची / Dr Ibrat Bahraichi आहे-मज़लूम जब अश्कों को हवा देती है शीश महल के चराग़ों को बुझा देती है जब नदी से कभी मैं पानी तलब करता हूँ तश्नगी को मेरे होंटों से लगा देती है आग रखती ही नहीं... [यह काव्य का सारांश है, पूरा पढ़ने के लिए फ़ीड प्रविष्टी शीर्षक पर चटका लगायें...]... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   7:18am 7 Aug 2009 #डॉ इबरत बहराइची
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