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कलरव काव्य संग्रह - सुखदेव करुण

          27जुलाई 2015को ’मिसाईल मैन’ और ’जनता के राष्ट्रपति’ के नाम से जाने जाने वाले अंतरिक्ष विज्ञान के सिरमोर एवं युवाओं के महान प्रेरणास्रोत डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के निधन से न केवल भारत को बल्कि सम्पूर्ण विश्व को जो अपूर्व क्षति हुई है, उस गमगीन माहौल में...
कलरव काव्य संग्रह - सुखदेव करु...
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  October 16, 2015, 11:10 am
                  वर्तमान तकनीकी युग में एक ओर हमारा राष्ट्र ‘डिजिटल इंडिया’ बनने जा रहा है वहीं दूसरी ओर इस डिजिटलाईजेशन के दौर में इन्टरनेट पर अपराध की घटनाएं दिन दौगुनी रात चैगुनी बढ़ती जा रही है। क्या है साईबर क्राईम -               साई...
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  October 15, 2015, 3:03 pm
बुलंद होसले राह ए मंजिल को आवाज़ देते हैं,आओ तुम्हें हम, अपने क़दमों से नवाज़ देते हैं|ऐसे मौके बार-बार मिलते नहीं हैं हर किसी को,कम ही होते हैं, जो जिंदिगी को नये आगाज़ देते हैं|बुलंद होसले राह ए मंजिल को आवाज़ देते हैं…हर मुश्किल का सामना अपना सर उठा के कर,ये वो लम्हें है...
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  July 19, 2015, 10:07 am
कुछ इस तरह तेरी पलके मेरी पलकों से मिला दे,आंसू तेरे सारे मेरी पलकों पे सजा दे,तु हर घड़ी हर वक्त मेरे साथ रहा है,हां ये जिस्म कभी दूर कभी पास रहा है,जो भी गम हैं ये तेरे उन्हें तु मेरा पता दे,कुछ इस तरह तेरी पलके मेरी पलकों से मिला दे,आंसू तेरे सारे मेरी पलकों पे सजा दे,मुझको ...
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  July 17, 2015, 11:27 am
तेरी तस्वीर मेरी आंखों में बसी क्यूं है,जहां देखों बस उधर तु ही क्यूं है,तेरी यदों से वाबस्ता मेरी तकद्दीर है,लेकिन तुझे ना पा कर मेरी तकद्दीर रूठी क्यूं है,मुझ को है खबर आसान नहीं तुझे हासिल करना,फिर भी ये इंतजार ये बेकरारी क्यूं है,बरसों गुजर गए मेरे तन्हाइयों में लेक...
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  July 17, 2015, 11:26 am
ये दिल तुझे इतनी शिद्दत से चाहता क्यूं है,हर सांस के साथ तेरा ही नाम आता क्यूं है,तु कितना भी मुझसे सख्त ताल्लुक रख ले,जिक्र फिर भी तेरा मेरी जबान पे आता क्यूं है,यूं तो हैं कई फासलें तेरे मेरे बीच,लगता फिर भी तु मुझको मेरी जान सा क्यूं है,तेरी यादों में तड़पने की हो चुकी है ...
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  July 17, 2015, 11:23 am
युवा कवि एवं साहित्यकार भाई - सुखदेव 'करुण'  द्वारा मुझे अपने ब्लॉग 'सुखदेव करुण ( कलरव काव्य संग्रह )'पर लेखक के रूप में जोड़ने के लिए हार्दिक आभार ....   जंग लड़ेंगे दोनों साथ जिंदगानी मेंदो पल का तुम  बस मुझे साथ दो ||कुछ तुम चलना कुछ मैं चलूँगा,खाइयाँ ये राह-ए-मंजिल क...
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  June 11, 2015, 12:25 pm
नारी नर की जननी है ,इस मातृशक्ति का सम्मान करो |अरे नारी है श्रम का पुतला,सजा कर सिंहासन इसका आह्वान करो |              प्रेम, करुणा और त्याग से,              और ममत्व से क्या यह अछूती है |               अरे यही इस ब्रह्माण्ड में,  &n...
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  April 4, 2015, 4:11 pm
    व्यक्ति के पास जब खाली समय होता है तो उसके मस्तिष्क में तरह-तरह के विचारों का प्रवाह चलता रहता है। शांत मौसम में एकान्त में रहकर ऐसे ही लोगों का बौद्धिक सृजन इस वैचारिक मंथन के फलस्वरूप – एक कवि, चित्रकार अथवा महान आविष्कारक के रूप में होता है। बहुत से लेखक और आ...
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  January 27, 2014, 11:54 am
कार्तिक अमावश्या (दीपावली) की शाम आठ बज चुके हैं | मनु अपने कमरे में बैठा कुछ पढ़ रहा है, पिता अभी फ़ोन पर बात कर रहे हैं | लक्ष्मी पूजन हो गया था, गली में खूब पटाखे व फुलझड़ियाँ जलाये जा रहे हैं, मनु की माता जी खाना परोस रही है, परन्तु मनु अब भी किताब में एक टक नजर टिकाये बैठा ह...
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  October 31, 2013, 10:00 pm
लो आ गया नूतन वर्ष भोर, ले आओ तुम रोली चन्दनस्नेह प्यार का ले संकल्प , करो नूतन वर्षाभिनंदननया सूरज उग आया देखोनयी किरण है नयी उमंगनयी कलियाँ हैं नए उपवन कीनया फूल है नारंगी रंगचिड़िया चहकी कलियाँ महकी, कैसा कलरव हैं कैसा क्रंदन |राष्ट्र-चेतना का ले संकल्प, करो नूतन वर्ष...
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  October 31, 2013, 12:13 am
         क्या मात्र कल्पना की अपार शक्ति ही कवि का परिचय है? क्या लोक-परलोक के, इस चर-अचर जगत के अच्छे-बुरे लम्हों रुपी मनकोँ को शब्द-माला में पिरोकर हर आम-खास के सामने परोसना मात्र ही कवि का काम है? या फिर इन लम्हों को शब्द रुप देने के अलावा वह इन्हें अपने जीवन में उतार...
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  October 24, 2012, 9:41 am
(I)     मेरे गुरु के लिए ...गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु, गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुर्साक्षात्‌ परमब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवैनमः॥   गुरु, शिक्षक, आचार्य, उस्ताद, अध्यापक या टीचर ये सभी शब्द एक ऐसे व्यक्ति को व्याख्यातित करते है जो हमें सिखाता है, ज्ञान देता है। इसी म...
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  September 5, 2012, 12:14 pm
क्यों तङपाते खग मृग को, हरधर ताक रहा तुम्हारी ओर।ना गुजारो यूं सावन सूखा,क्यों घूम रहे हो मेघा ओर-छोर।।तेरे बिना है मौन तरंगिनी,निःशब्द है कल-कल झरनों की।कूक रही कोयल, पपीहा पीहू-पीहू,कैसी दुर्दशा हो रही है वनों की।।...ना तोलो तुम पाप-पुण्य को,कलियुग में यह बोझा तुम्हें ढ़...
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  July 30, 2012, 7:47 pm
नहीं जाना मुझे खुशियों की महफिल में, आज मुझे बैठने दो तन्हा, यादों में खोने दो। खूब हंसा हूँ बाहरी हंसी गम छुपाकर, आज फूटने दो ज्वालामुखी गमों की, डूबने दो तन्हाई में, जी भर के रोने दो। जिन्दगी के हर कदम साथ उठे थे जिनके, आज उन्हीं यादों को आँसुओँ से धोने दो। क...
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  May 15, 2012, 4:26 pm
दोस्त तुम यादों में हो, वादों में हो, संवादों में हो गीतों में हो, ग़ज़लों में हो, ख़्वाबों में हो चुप्पी में हो, खामोशी में हो, तन्हाई में हो महफिल में हो, कहकहो में हो और बेवफाई में भी हो तुम उन चिट्ठियों में हो जो तुम्हें दे न सका तुम उस टीस में भी हो जो तुम देते रहे और मैं उ...
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  March 29, 2012, 9:50 am
उसे फिर कभी याद आ ना सके, जिसे भुलकर भी भुला ना सके। यू बाते बहुत कि बिना बात की, मगर हाल दिल का बता ना सके। पता उनको घर का बताते भी क्या, कभी एक ठिकाना बना ना सके। वो होगे खुदा कम हम भी नही, यही सोच कर सर झुका न सके।तुफान से निकले तो बचके मगर, साहिल पे किश्ती को ला ना सके। जला डा...
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  March 29, 2012, 9:47 am
गुरुजी मेरे विद्यालय के सबसे लोकप्रिय और हमारे आदर्श आचार्य थे। उनका इकलोता पुत्र 'अर्पित'मेरा सहपाठी और घनिष्ट मित्र था। अर्पित जब तीन साल का था तब उसके माता जी का देहान्त हो चुका था। उसके बाद अर्पित के पिता जी ने दूसरी शादी की जिसे वह 'चाची'कहकर पुकारता था। दुर्भाग्य...
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  June 21, 2011, 10:39 pm
बढती भीङ के बावजूद भी आज हर इंसान अपने आप को अकेला महसूश करता हुआ नजर आता है। वास्तव में वो बङे ही दर्दनाक और यादगार के पल होते हैँ जब कोई उन्हें किसी की याद में अथवा किसी के इंतजार में बिताता है। दयनीय स्थिति तो तब होती है जब जाने-अनजाने घङी-दो-घङी दो-चार साथियों की महफिल ...
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  May 7, 2011, 10:22 pm
डोर धनुष की टूट चुकी है,तीर पङे हैं सब तरकस में।छायाओं से मत डरो ए हिन्दी हरिणों।शेर घुसे हैं सब सरकस में।एक कहानी सुनो तुम अपनी,कितनी अजीब है यह यकीन।पिता स्वरूप सिंहासन तुम्हारा है विजयी,मगर माता को कैसे गये वो छीन।क्या विचार है तुम्हारा,पूछो जरा विधाता से।क्यों है...
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  February 14, 2011, 11:57 pm
स्वयं लिख आपना भाग्य, भाल पर अपनी कलम चला कर,सूख मत सूर्यताप से, व्यथाग्नि से मत जला कर |स्वयम अपनी बाँहों पे उठ, जरुरत नहीं सहारों की,पुकार रहा है देश तुम्हारा, भाषा समझ ले इशारों की |फ़ैल गई है पूरब में लाली, सूर्योदय हो रहा है,जगा दे उनको ढोल पीटकर, अब भी जो कोई सो रहा है|हिन...
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  February 14, 2011, 11:45 pm
एक तरफ आम आदमी ने अपने अर्थ के मोह में अपनी जिन्दगी को सिमेट लिया है तो दूसरी तरफ विभाग के कर्मचारियोँ ने प्राकृतिक सम्पदा की रक्षा के नाम पर अच्छा मादेय प्राप्त करना ही अपनी चाहत बना ली। ऐसे में इन धरोहरों की रक्षा की बात ही चली गई। यह कङवा सच है कि प्रत्येक व्यक्ति पूर...
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  February 10, 2011, 8:21 am
आपका अनुभव कैसा रहा?यह प्रश्न अक्सर मैं उन लोगों से पूछा करता हूँ जिन्होँने बिना सोचे विचारे अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर समाज के दर्पण मैं सिर झुका कर अपने मुर्झाये चहरे को देखकर आत्मग्लानि से संकुचाते पाया है।मैं उनके चहरे के भावों को सहजता से ही पढ़ लेता हूँ और अधिकतर ...
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  February 3, 2011, 3:23 pm
चढ गया है आज बलिवेदी पर, पुत्र तेरा बलिदानी देकर।।दूर ना होगा माँ तेरे आँचल से, भारत माँ के आँचल में सोकर।।बाँध लिया था जब कफन मैनेँ,माँ की लाज बचाई थी।चढकर बर्फीली चोटियोँ पर,शहीदोँ की मशाल उठाई थी।दुश्मन को ललकारा था माँ, कर में अमर कहानी लेकर।चढ गया है आज बलिवेदी पर, प...
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  December 16, 2010, 10:02 pm
तीर्थ मेरे हैं अनेक,किन-किन का आभार करुं।देखे हैं सहस्रों स्वप्न,किन-किन को साकार करुं।सोचता हूँ अमर बनूं,या समाज हित समर बनूं।मन चाहता है खिलते फूलों पे,मंडराता भ्रमर बनूं।सहनी हो हर पल पीङा,पर मन-मानस ना घबराए,निष्काम कर्म-रत् रहकर मैं,खत्म करूँ दु:ख के साये।सुख-दु:ख ...
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  December 13, 2010, 9:50 pm
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