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Blog: कलरव काव्य संग्रह - सुखदेव करुण

Blogger: Sukha Ram
          27जुलाई 2015को ’मिसाईल मैन’ और ’जनता के राष्ट्रपति’ के नाम से जाने जाने वाले अंतरिक्ष विज्ञान के सिरमोर एवं युवाओं के महान प्रेरणास्रोत डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के निधन से न केवल भारत को बल्कि सम्पूर्ण विश्व को जो अपूर्व क्षति हुई है, उस गमगीन माहौल में... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   5:40am 16 Oct 2015 #
Blogger: Sukha Ram
                  वर्तमान तकनीकी युग में एक ओर हमारा राष्ट्र ‘डिजिटल इंडिया’ बनने जा रहा है वहीं दूसरी ओर इस डिजिटलाईजेशन के दौर में इन्टरनेट पर अपराध की घटनाएं दिन दौगुनी रात चैगुनी बढ़ती जा रही है। क्या है साईबर क्राईम -               साई... Read more
clicks 226 View   Vote 0 Like   9:33am 15 Oct 2015 #
Blogger: Sukha Ram
बुलंद होसले राह ए मंजिल को आवाज़ देते हैं,आओ तुम्हें हम, अपने क़दमों से नवाज़ देते हैं|ऐसे मौके बार-बार मिलते नहीं हैं हर किसी को,कम ही होते हैं, जो जिंदिगी को नये आगाज़ देते हैं|बुलंद होसले राह ए मंजिल को आवाज़ देते हैं…हर मुश्किल का सामना अपना सर उठा के कर,ये वो लम्हें है... Read more
clicks 203 View   Vote 0 Like   4:37am 19 Jul 2015 #
Blogger: Sukha Ram
कुछ इस तरह तेरी पलके मेरी पलकों से मिला दे,आंसू तेरे सारे मेरी पलकों पे सजा दे,तु हर घड़ी हर वक्त मेरे साथ रहा है,हां ये जिस्म कभी दूर कभी पास रहा है,जो भी गम हैं ये तेरे उन्हें तु मेरा पता दे,कुछ इस तरह तेरी पलके मेरी पलकों से मिला दे,आंसू तेरे सारे मेरी पलकों पे सजा दे,मुझको ... Read more
clicks 299 View   Vote 0 Like   5:57am 17 Jul 2015 #
Blogger: Sukha Ram
तेरी तस्वीर मेरी आंखों में बसी क्यूं है,जहां देखों बस उधर तु ही क्यूं है,तेरी यदों से वाबस्ता मेरी तकद्दीर है,लेकिन तुझे ना पा कर मेरी तकद्दीर रूठी क्यूं है,मुझ को है खबर आसान नहीं तुझे हासिल करना,फिर भी ये इंतजार ये बेकरारी क्यूं है,बरसों गुजर गए मेरे तन्हाइयों में लेक... Read more
clicks 203 View   Vote 0 Like   5:56am 17 Jul 2015 #
Blogger: Sukha Ram
ये दिल तुझे इतनी शिद्दत से चाहता क्यूं है,हर सांस के साथ तेरा ही नाम आता क्यूं है,तु कितना भी मुझसे सख्त ताल्लुक रख ले,जिक्र फिर भी तेरा मेरी जबान पे आता क्यूं है,यूं तो हैं कई फासलें तेरे मेरे बीच,लगता फिर भी तु मुझको मेरी जान सा क्यूं है,तेरी यादों में तड़पने की हो चुकी है ... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   5:53am 17 Jul 2015 #
Blogger: Sukha Ram
युवा कवि एवं साहित्यकार भाई - सुखदेव 'करुण'  द्वारा मुझे अपने ब्लॉग 'सुखदेव करुण ( कलरव काव्य संग्रह )'पर लेखक के रूप में जोड़ने के लिए हार्दिक आभार ....   जंग लड़ेंगे दोनों साथ जिंदगानी मेंदो पल का तुम  बस मुझे साथ दो ||कुछ तुम चलना कुछ मैं चलूँगा,खाइयाँ ये राह-ए-मंजिल क... Read more
clicks 260 View   Vote 0 Like   6:55am 11 Jun 2015 #
Blogger: Sukha Ram
नारी नर की जननी है ,इस मातृशक्ति का सम्मान करो |अरे नारी है श्रम का पुतला,सजा कर सिंहासन इसका आह्वान करो |              प्रेम, करुणा और त्याग से,              और ममत्व से क्या यह अछूती है |               अरे यही इस ब्रह्माण्ड में,  &n... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   10:41am 4 Apr 2015 #
Blogger: Sukha Ram
    व्यक्ति के पास जब खाली समय होता है तो उसके मस्तिष्क में तरह-तरह के विचारों का प्रवाह चलता रहता है। शांत मौसम में एकान्त में रहकर ऐसे ही लोगों का बौद्धिक सृजन इस वैचारिक मंथन के फलस्वरूप – एक कवि, चित्रकार अथवा महान आविष्कारक के रूप में होता है। बहुत से लेखक और आ... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   6:24am 27 Jan 2014 #
Blogger: Sukha Ram
कार्तिक अमावश्या (दीपावली) की शाम आठ बज चुके हैं | मनु अपने कमरे में बैठा कुछ पढ़ रहा है, पिता अभी फ़ोन पर बात कर रहे हैं | लक्ष्मी पूजन हो गया था, गली में खूब पटाखे व फुलझड़ियाँ जलाये जा रहे हैं, मनु की माता जी खाना परोस रही है, परन्तु मनु अब भी किताब में एक टक नजर टिकाये बैठा ह... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   4:30pm 31 Oct 2013 #
Blogger: Sukha Ram
लो आ गया नूतन वर्ष भोर, ले आओ तुम रोली चन्दनस्नेह प्यार का ले संकल्प , करो नूतन वर्षाभिनंदननया सूरज उग आया देखोनयी किरण है नयी उमंगनयी कलियाँ हैं नए उपवन कीनया फूल है नारंगी रंगचिड़िया चहकी कलियाँ महकी, कैसा कलरव हैं कैसा क्रंदन |राष्ट्र-चेतना का ले संकल्प, करो नूतन वर्ष... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   6:43pm 30 Oct 2013 #
Blogger: Sukha Ram
         क्या मात्र कल्पना की अपार शक्ति ही कवि का परिचय है? क्या लोक-परलोक के, इस चर-अचर जगत के अच्छे-बुरे लम्हों रुपी मनकोँ को शब्द-माला में पिरोकर हर आम-खास के सामने परोसना मात्र ही कवि का काम है? या फिर इन लम्हों को शब्द रुप देने के अलावा वह इन्हें अपने जीवन में उतार... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   4:11am 24 Oct 2012 #
Blogger: Sukha Ram
(I)     मेरे गुरु के लिए ...गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु, गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुर्साक्षात्‌ परमब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवैनमः॥   गुरु, शिक्षक, आचार्य, उस्ताद, अध्यापक या टीचर ये सभी शब्द एक ऐसे व्यक्ति को व्याख्यातित करते है जो हमें सिखाता है, ज्ञान देता है। इसी म... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   6:44am 5 Sep 2012 #
Blogger: Sukha Ram
क्यों तङपाते खग मृग को, हरधर ताक रहा तुम्हारी ओर।ना गुजारो यूं सावन सूखा,क्यों घूम रहे हो मेघा ओर-छोर।।तेरे बिना है मौन तरंगिनी,निःशब्द है कल-कल झरनों की।कूक रही कोयल, पपीहा पीहू-पीहू,कैसी दुर्दशा हो रही है वनों की।।...ना तोलो तुम पाप-पुण्य को,कलियुग में यह बोझा तुम्हें ढ़... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   2:17pm 30 Jul 2012 #
Blogger: Sukha Ram
नहीं जाना मुझे खुशियों की महफिल में, आज मुझे बैठने दो तन्हा, यादों में खोने दो। खूब हंसा हूँ बाहरी हंसी गम छुपाकर, आज फूटने दो ज्वालामुखी गमों की, डूबने दो तन्हाई में, जी भर के रोने दो। जिन्दगी के हर कदम साथ उठे थे जिनके, आज उन्हीं यादों को आँसुओँ से धोने दो। क... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   10:56am 15 May 2012 #
Blogger: Sukha Ram
दोस्त तुम यादों में हो, वादों में हो, संवादों में हो गीतों में हो, ग़ज़लों में हो, ख़्वाबों में हो चुप्पी में हो, खामोशी में हो, तन्हाई में हो महफिल में हो, कहकहो में हो और बेवफाई में भी हो तुम उन चिट्ठियों में हो जो तुम्हें दे न सका तुम उस टीस में भी हो जो तुम देते रहे और मैं उ... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   4:20am 29 Mar 2012 #
Blogger: Sukha Ram
उसे फिर कभी याद आ ना सके, जिसे भुलकर भी भुला ना सके। यू बाते बहुत कि बिना बात की, मगर हाल दिल का बता ना सके। पता उनको घर का बताते भी क्या, कभी एक ठिकाना बना ना सके। वो होगे खुदा कम हम भी नही, यही सोच कर सर झुका न सके।तुफान से निकले तो बचके मगर, साहिल पे किश्ती को ला ना सके। जला डा... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   4:17am 29 Mar 2012 #
Blogger: Sukha Ram
गुरुजी मेरे विद्यालय के सबसे लोकप्रिय और हमारे आदर्श आचार्य थे। उनका इकलोता पुत्र 'अर्पित'मेरा सहपाठी और घनिष्ट मित्र था। अर्पित जब तीन साल का था तब उसके माता जी का देहान्त हो चुका था। उसके बाद अर्पित के पिता जी ने दूसरी शादी की जिसे वह 'चाची'कहकर पुकारता था। दुर्भाग्य... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   5:09pm 21 Jun 2011 #
Blogger: Sukha Ram
बढती भीङ के बावजूद भी आज हर इंसान अपने आप को अकेला महसूश करता हुआ नजर आता है। वास्तव में वो बङे ही दर्दनाक और यादगार के पल होते हैँ जब कोई उन्हें किसी की याद में अथवा किसी के इंतजार में बिताता है। दयनीय स्थिति तो तब होती है जब जाने-अनजाने घङी-दो-घङी दो-चार साथियों की महफिल ... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   4:52pm 7 May 2011 #
Blogger: Sukha Ram
डोर धनुष की टूट चुकी है,तीर पङे हैं सब तरकस में।छायाओं से मत डरो ए हिन्दी हरिणों।शेर घुसे हैं सब सरकस में।एक कहानी सुनो तुम अपनी,कितनी अजीब है यह यकीन।पिता स्वरूप सिंहासन तुम्हारा है विजयी,मगर माता को कैसे गये वो छीन।क्या विचार है तुम्हारा,पूछो जरा विधाता से।क्यों है... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   6:27pm 14 Feb 2011 #
Blogger: Sukha Ram
स्वयं लिख आपना भाग्य, भाल पर अपनी कलम चला कर,सूख मत सूर्यताप से, व्यथाग्नि से मत जला कर |स्वयम अपनी बाँहों पे उठ, जरुरत नहीं सहारों की,पुकार रहा है देश तुम्हारा, भाषा समझ ले इशारों की |फ़ैल गई है पूरब में लाली, सूर्योदय हो रहा है,जगा दे उनको ढोल पीटकर, अब भी जो कोई सो रहा है|हिन... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   6:15pm 14 Feb 2011 #
Blogger: Sukha Ram
एक तरफ आम आदमी ने अपने अर्थ के मोह में अपनी जिन्दगी को सिमेट लिया है तो दूसरी तरफ विभाग के कर्मचारियोँ ने प्राकृतिक सम्पदा की रक्षा के नाम पर अच्छा मादेय प्राप्त करना ही अपनी चाहत बना ली। ऐसे में इन धरोहरों की रक्षा की बात ही चली गई। यह कङवा सच है कि प्रत्येक व्यक्ति पूर... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   2:51am 10 Feb 2011 #
Blogger: Sukha Ram
आपका अनुभव कैसा रहा?यह प्रश्न अक्सर मैं उन लोगों से पूछा करता हूँ जिन्होँने बिना सोचे विचारे अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर समाज के दर्पण मैं सिर झुका कर अपने मुर्झाये चहरे को देखकर आत्मग्लानि से संकुचाते पाया है।मैं उनके चहरे के भावों को सहजता से ही पढ़ लेता हूँ और अधिकतर ... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   9:53am 3 Feb 2011 #
Blogger: Sukha Ram
चढ गया है आज बलिवेदी पर, पुत्र तेरा बलिदानी देकर।।दूर ना होगा माँ तेरे आँचल से, भारत माँ के आँचल में सोकर।।बाँध लिया था जब कफन मैनेँ,माँ की लाज बचाई थी।चढकर बर्फीली चोटियोँ पर,शहीदोँ की मशाल उठाई थी।दुश्मन को ललकारा था माँ, कर में अमर कहानी लेकर।चढ गया है आज बलिवेदी पर, प... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   4:32pm 16 Dec 2010 #
Blogger: Sukha Ram
तीर्थ मेरे हैं अनेक,किन-किन का आभार करुं।देखे हैं सहस्रों स्वप्न,किन-किन को साकार करुं।सोचता हूँ अमर बनूं,या समाज हित समर बनूं।मन चाहता है खिलते फूलों पे,मंडराता भ्रमर बनूं।सहनी हो हर पल पीङा,पर मन-मानस ना घबराए,निष्काम कर्म-रत् रहकर मैं,खत्म करूँ दु:ख के साये।सुख-दु:ख ... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   4:20pm 13 Dec 2010 #
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