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Blog: यादगार पल

Blogger: Ramesh kumar Singh
मुझे आज भी ख्याल है कि  २००९-१० में सासाराम रेलवे स्टेशन से एक किलो मिटर दूर उत्तर की ओर जा रही सड़क से एक चौड़ी गली अन्दर की तरफ गई है शायद उस गली वाले इलाके को  वी०आई०पी० मोहल्ला के नाम से जाना जाता है तथा उसी गली के अन्त में एक आधे अधूरे मकान में दो रुम हैं एक रुम अभी भी अ... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   10:28am 17 Jan 2016 #
Blogger: Ramesh kumar Singh
हद से ज्यादा खुश हैं---- क्या बात है।चेहरे पर भरपूर मुस्कान, लाजवाब है।किस कारण-- खिलखिला उठा चेहरा,मुझे भी जानने की, हृदय से आस है।।१४-१०-२०१५•••••••••••••••••••जिन्दगी के राह में,अनेकों मोड़ मिलते हैं। सब पर लोग चलकर~ गुजरना चाहतें हैं। हर समय बिताने के बाद~~ आखिरी म... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   12:54am 8 Jan 2016 #
Blogger: Ramesh kumar Singh
हाँ तुम!!मुझसे प्रेम करो।जैसे मैं तुमसे करता हूँ।जैसे मछलियाँ पानी से करती हैं,उसके बिना एक पल नहीं रह सकती।जैसे  हृदय हवाओं से करती हैहवा बिना हृदय गति रूक जाती हैहाँ  तुम !!मुझसे प्रेम करो।चाहे  मुझको प्यास के पहाड़ों पर लिटा दो।जहाँ एक झरने की तरह तड़पता रहूँ।चा... Read more
clicks 205 View   Vote 0 Like   5:20am 14 Jun 2015 #
Blogger: Ramesh kumar Singh
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~नज़र से नजर मिली तो मुलाकातें बढ गई। हमारे तुम्हारे सफर की कुछ बातें बढ़ गई। हर मोड़ पर खोजने लगी तुम्हें मेरी आँखें,ऐसा हुआ मिलन कि हर ख्यालों में आ गई।@रमेश कुमार सिंह /०७-०६-२०१५... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   2:32pm 13 Jun 2015 #
Blogger: Ramesh kumar Singh
खूबसूरत,मनमोहक अदा,झुकी नज़र, @रमेश कुमार सिंह... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   2:18pm 13 Jun 2015 #
Blogger: Ramesh kumar Singh
साथी छूटे भी तो भूला नहीं करते वक्त की नजाकत से छोड़ा नहीं करते जिसकी आवाज में नम्रता और मिठास हो ऐसी तस्वीर को दिल से हटाया नहीं करते।जीने का सहारा मिलता है थोड़ा- थोड़ा,यूँ ही चले जाने वालों का दिल तोड़ा नहीं करते जो सीधे अपनी गति में बढते है उसे बढने दो ऐसे लोग... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   2:14pm 13 Jun 2015 #
Blogger: Ramesh kumar Singh
मैं जब कभी -कभी कमरे में जाकर,शान्तिः जहां पर होता है,चुपके से अपनी लिखी हुई पुराना कागज पढता हूँ मेरे जीवन का कुछ विवरण अक्षरों में अंकित है वह एक तरह का पुराना प्रेम-पत्र है जो लिखकर, रखे थे देने के लिए किसी को,जिसे पाने वाला काफी दूर चला गया है। मिलने की कोई उम्म... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   2:08pm 13 Jun 2015 #
Blogger: Ramesh kumar Singh
कहाँ रह रही हो तुम मुझे अकेला छोड़कर दुनिया की महफिल में मुझे तन्हा छोड़कर मुसाफिरों की तरह यहाँ चक्कर काटता हूँ मना लेता मन को,आने की आहट सुनकररह जाता है मेरा दिल देखने को मचलकर झलक न दिखे तो रह जाता है मन तरसकर अगर तुम आखों से ओझल हो जाती हो तो,हृदय के अन्दर रह ... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   1:47pm 13 Jun 2015 #
Blogger: Ramesh kumar Singh
जिन्दगी मे  रह-रह कर तनहाईया मिलती हैं हर मोड़ पर ठहर कर रूसवाईया मिलती हैंन जाने कब तक ये मंजर चलता रहेगा यारों इस कठिन डगर पर कठिनाइयाँ मिलती हैंसफर में उसकी यादों की पंक्तियां मिलती हैंजिसे पन्नों में बिखेरने की शक्तियां मिलती हैंशब्दों को लिख कर बिताया करता हूँ य... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   9:35am 8 Jun 2015 #
Blogger: Ramesh kumar Singh
तुम्हारे हर  सवाल मेरे दिल के अन्दर उलफत मचाता रहेगा।न जाने कब तक यादों के झरोखो मे आशियाना बनाता रहेगातुम्हारे हर कायदा को बरकरार तब- तक संजोकर रखूँगा मैं,जब- तक हुस्न  के हर सलीके नजरों के रास्ते  समाता रहेगा।तुम्हारे लबों से निकली लफ्जों के मिठास मन में आता रहे... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   8:04am 2 Jun 2015 #
Blogger: Ramesh kumar Singh
मैं भी अन्जान था वो भी अन्जान थीजिन्दगी के सफर में एक पहचान थी दोनों के नयन जब आपस में मिले दिल में हलचल हुई मन सजल हो उठे तब  बातों का सिलसिला शुरू हो गए वो कुछ कहने लगी मैं कुछ कहने लगाबातों के दरमियान प्यार पनपने लगा क्षण-प्रतिक्षण एक दूसरे में घुलने लगे खुशियाँ मिली ... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   11:21am 21 May 2015 #
Blogger: Ramesh kumar Singh
मैं दुखी हूँ -अपने आप से नहीं, इस समाज से,पुरे समाज से नही,समाज में बिखरी हुई,विसंगतियों से।जो विश्वास के आड़तले,खड़ा होकर पुरा करते हैं,स्वर्थसिद्धि।मैं दुखी हूँ उनसे -जो जनता को धोखे में रखकर,अपने को नतृत्वकर्ता कहते है।सहारा लेते हैं -झूठे वादे, झूठे सपने,झूठे शान-शौकत ... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   9:04am 19 May 2015 #
Blogger: Ramesh kumar Singh
अपने गाँव से लेकर बनारस तक खुशी पूर्वक शिक्षा लेकर आनन्द पूर्वक जिवन व्यतीत कर रहे थे तभी एक तुफान आया जो  हमारी जीवन के बरबादी का शुरूआत लेकर। एक फूल की तरह हमारी जिन्दगी सवंर ही रही थी कि बारिश के साथ आया तूफान फूल के पंखुड़ियों को झड़ा दिया बस बाकी रह गया वो पत्तियां ... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   5:46am 18 May 2015 #
Blogger: Ramesh kumar Singh
क्या अब मेरे,सुख भरे दिन नहीं लौटेगें।क्या अब मेरे कर्ण ,उस ध्वनि को नहीं सुन पायेगेंक्य अब मेरे हँसीं,उस हँसीं में नहीं मिल पायेगें।क्या अब कोई,मुझसे यह नही कहेगा-ओ प्रिय ! तुम अकेले कहाँ हो,मैं भी तेरे साथ में हूँ।यदि मूझमे यह प्रवृत्ति अनवरत है।तो इसलिए कि-हो सकता है ... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   3:56am 28 Apr 2015 #
Blogger: Ramesh kumar Singh
सहसा,अचानक बढ़ीं धड़कन,हृदय में नहीं,धरती के गर्भ में।मची हलचल,मस्तिष्क में नहीं,भु- पर्पटी में।सो गये सब,मनुष्य सहित,बड़े-बड़े मकान।सो गये सबपशुओं सहित,बड़े-बड़े वृक्ष।मचा कोहराम,जन- जीवन में।हुआ अस्त-व्यस्त लोगों का जीवन।फट गया कहीं-कहीं,धरती का कपड़ा।टूट गया हर -कहीं,कोई... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   6:51pm 26 Apr 2015 #
Blogger: Ramesh kumar Singh
तुमसे जब होता है, नयनोन्मीलन। मुझे ऐसा एहसास होता है। तुम्हारी अधरों के, मधुर कंगारो ने। तुम्हारी ध्वनि की, गुंजारो ने । तुम्हारी मधुसरिता सी, हँसीं तरल। रजनीगंधा की तरह, कली खिली हो। राग अनंत लिये, अपने अधरों में। हँसीनी सी सुन्दर, पलको को उठाये हुअे। मौन की भाषा में। व... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   5:12pm 9 Apr 2015 #
Blogger: Ramesh kumar Singh
सुबह में मैं बहुत खुश था लिये मन में सपने सुंदर था अपने घर की ओर जा रहा था खुशियों का लहर मन में था तभी अचानक वो आया था दुखों का लिया पहाड़ था। सबको बाटना चाहता था। बाटा सबको थोड़ा -थोड़ा हिस्सा हमें भी दे रहा था नहीं लेने का कर रहा था उन लोगों से गुजारिश तकाजा नियम का दे र... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   12:13pm 1 Apr 2015 #
Blogger: Ramesh kumar Singh
पैग - पे - पैग हम तो चढाते रहे।जाम-पे-जाम हम तो लगाते रहे।जैसे जनन्त में हूँ ऐसा हुआ असर,आनंद,कुछ समय गुदगुदाते रहे।पानी को हर पैग में, मिलाते रहे। दोनों मिलकर नशामे भीगाते रहे।बाद में मेरा, मौसम रंगीन हुआ।कि अपने को ख्वाब में डुबाते रहे।••••••रमेश कुमार सिंह ♌ ••• ••••... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   12:10pm 30 Mar 2015 #
Blogger: Ramesh kumar Singh
आज भी याद है,उसकी हँसीं,मुस्कुराहटअधरों से निकले,वो लब्ज जब,हृदयंगम,होते हैं।तो मैं खो जाता हूँ उसकी यादों में,टटोलने लगता हूँ,बिताये हुए।वो सारे पल-वो स्पर्श,कभी कभी ,नाराजगी को दिखाना ,मुझसे दूर जाकर,बैठ जाना,फिर थोड़ी देर बाद,वापस आना,अपनी गलती को,सहर्ष स्वीकार करना... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   9:13am 26 Mar 2015 #
Blogger: Ramesh kumar Singh
हे मन !क्यों उदास है?क्या सोच रहा है?क्यों याद कर रहा है ?उसकोउसका अभी -भी इन्तजार है ,उसने क्या दिया था तुम्हें,खुशहाल भरे ओ पल,आनन्द भरी वो बातें,इजहार के वो दिन,क्या यही याद कर रहा है तुम,वो तो तुम्हारे पास सब छोड़ कर गई है।उसका रूप बदलकर गई है।नाम है जिसका-यादें।उन यादों ... Read more
clicks 263 View   Vote 0 Like   1:57am 24 Mar 2015 #
Blogger: Ramesh kumar Singh
यादें तुम्हारी मेरे पास बहुत है ,किस पल को याद करूँ मैं।सभी पलो में हलचल मची है,किस-किस पर मन दौड़ाऊँ मैं।मन चारों दिशाओं मे जाते हैं,किधर-किधर उसे मोड़ दू मैं ।सब कुछ बातें समझ नहीं पाते,कैसे बिताये लम्हे याद करूँ मैं ।जब -जब याद तुम्हें करते हैं ,उस वक्त सोचने लगता हूँ म... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   12:06pm 22 Mar 2015 #
Blogger: Ramesh kumar Singh
मन कि चन्चलता, देखने को कहता, तुम्हें ढुढ रही हूँ, जानते हों क्यों? आज प्रेम दिवस है। हृदय व्याकुलता, आने को कहता, राह देख रही हूँ, जानते हों क्यों? आज प्रेम दिवस हैं। फुलो कि बगिया, से फुल गुलाबिया, तोड़ कर लाया हूँ, जानते हो क्यों? आज प्रेम दिवस है। स्नेह भरे फुलो को, तुम्... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   7:37am 15 Mar 2015 #
Blogger: Ramesh kumar Singh
ईशीका—— हमारे और तुम्हारे बीच जितनी भी क्रियाएँ हुई वो सब एक मधुर यादों के जरिये इस पन्नों में आकर सिमट गई।जो यह सफेद पन्ना ही बतलाएगा की हमारे दिल में तुम्हारे लिए क्या जगह थी यह पन्ना इतना ही नहीं बल्कि हमारे तुम्हारे बीच के अपनापन को दर्शायगा,कि हमारे और तुम्हारे ब... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   4:45am 12 Mar 2015 #
clicks 209 View   Vote 0 Like   12:00am 1 Jan 1970 #
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