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यादगार पल

मुझे आज भी ख्याल है कि  २००९-१० में सासाराम रेलवे स्टेशन से एक किलो मिटर दूर उत्तर की ओर जा रही सड़क से एक चौड़ी गली अन्दर की तरफ गई है शायद उस गली वाले इलाके को  वी०आई०पी० मोहल्ला के नाम से जाना जाता है तथा उसी गली के अन्त में एक आधे अधूरे मकान में दो रुम हैं एक रुम अभी भी अ...
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  January 17, 2016, 3:58 pm
हद से ज्यादा खुश हैं---- क्या बात है।चेहरे पर भरपूर मुस्कान, लाजवाब है।किस कारण-- खिलखिला उठा चेहरा,मुझे भी जानने की, हृदय से आस है।।१४-१०-२०१५•••••••••••••••••••जिन्दगी के राह में,अनेकों मोड़ मिलते हैं। सब पर लोग चलकर~ गुजरना चाहतें हैं। हर समय बिताने के बाद~~ आखिरी म...
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  January 8, 2016, 6:24 am
हाँ तुम!!मुझसे प्रेम करो।जैसे मैं तुमसे करता हूँ।जैसे मछलियाँ पानी से करती हैं,उसके बिना एक पल नहीं रह सकती।जैसे  हृदय हवाओं से करती हैहवा बिना हृदय गति रूक जाती हैहाँ  तुम !!मुझसे प्रेम करो।चाहे  मुझको प्यास के पहाड़ों पर लिटा दो।जहाँ एक झरने की तरह तड़पता रहूँ।चा...
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  June 14, 2015, 10:50 am
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~नज़र से नजर मिली तो मुलाकातें बढ गई। हमारे तुम्हारे सफर की कुछ बातें बढ़ गई। हर मोड़ पर खोजने लगी तुम्हें मेरी आँखें,ऐसा हुआ मिलन कि हर ख्यालों में आ गई।@रमेश कुमार सिंह /०७-०६-२०१५...
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  June 13, 2015, 8:02 pm
खूबसूरत,मनमोहक अदा,झुकी नज़र, @रमेश कुमार सिंह...
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  June 13, 2015, 7:48 pm
साथी छूटे भी तो भूला नहीं करते वक्त की नजाकत से छोड़ा नहीं करते जिसकी आवाज में नम्रता और मिठास हो ऐसी तस्वीर को दिल से हटाया नहीं करते।जीने का सहारा मिलता है थोड़ा- थोड़ा,यूँ ही चले जाने वालों का दिल तोड़ा नहीं करते जो सीधे अपनी गति में बढते है उसे बढने दो ऐसे लोग...
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  June 13, 2015, 7:44 pm
मैं जब कभी -कभी कमरे में जाकर,शान्तिः जहां पर होता है,चुपके से अपनी लिखी हुई पुराना कागज पढता हूँ मेरे जीवन का कुछ विवरण अक्षरों में अंकित है वह एक तरह का पुराना प्रेम-पत्र है जो लिखकर, रखे थे देने के लिए किसी को,जिसे पाने वाला काफी दूर चला गया है। मिलने की कोई उम्म...
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  June 13, 2015, 7:38 pm
कहाँ रह रही हो तुम मुझे अकेला छोड़कर दुनिया की महफिल में मुझे तन्हा छोड़कर मुसाफिरों की तरह यहाँ चक्कर काटता हूँ मना लेता मन को,आने की आहट सुनकररह जाता है मेरा दिल देखने को मचलकर झलक न दिखे तो रह जाता है मन तरसकर अगर तुम आखों से ओझल हो जाती हो तो,हृदय के अन्दर रह ...
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  June 13, 2015, 7:17 pm
जिन्दगी मे  रह-रह कर तनहाईया मिलती हैं हर मोड़ पर ठहर कर रूसवाईया मिलती हैंन जाने कब तक ये मंजर चलता रहेगा यारों इस कठिन डगर पर कठिनाइयाँ मिलती हैंसफर में उसकी यादों की पंक्तियां मिलती हैंजिसे पन्नों में बिखेरने की शक्तियां मिलती हैंशब्दों को लिख कर बिताया करता हूँ य...
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  June 8, 2015, 3:05 pm
तुम्हारे हर  सवाल मेरे दिल के अन्दर उलफत मचाता रहेगा।न जाने कब तक यादों के झरोखो मे आशियाना बनाता रहेगातुम्हारे हर कायदा को बरकरार तब- तक संजोकर रखूँगा मैं,जब- तक हुस्न  के हर सलीके नजरों के रास्ते  समाता रहेगा।तुम्हारे लबों से निकली लफ्जों के मिठास मन में आता रहे...
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  June 2, 2015, 1:34 pm
मैं भी अन्जान था वो भी अन्जान थीजिन्दगी के सफर में एक पहचान थी दोनों के नयन जब आपस में मिले दिल में हलचल हुई मन सजल हो उठे तब  बातों का सिलसिला शुरू हो गए वो कुछ कहने लगी मैं कुछ कहने लगाबातों के दरमियान प्यार पनपने लगा क्षण-प्रतिक्षण एक दूसरे में घुलने लगे खुशियाँ मिली ...
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  May 21, 2015, 4:51 pm
मैं दुखी हूँ -अपने आप से नहीं, इस समाज से,पुरे समाज से नही,समाज में बिखरी हुई,विसंगतियों से।जो विश्वास के आड़तले,खड़ा होकर पुरा करते हैं,स्वर्थसिद्धि।मैं दुखी हूँ उनसे -जो जनता को धोखे में रखकर,अपने को नतृत्वकर्ता कहते है।सहारा लेते हैं -झूठे वादे, झूठे सपने,झूठे शान-शौकत ...
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  May 19, 2015, 2:34 pm
अपने गाँव से लेकर बनारस तक खुशी पूर्वक शिक्षा लेकर आनन्द पूर्वक जिवन व्यतीत कर रहे थे तभी एक तुफान आया जो  हमारी जीवन के बरबादी का शुरूआत लेकर। एक फूल की तरह हमारी जिन्दगी सवंर ही रही थी कि बारिश के साथ आया तूफान फूल के पंखुड़ियों को झड़ा दिया बस बाकी रह गया वो पत्तियां ...
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  May 18, 2015, 11:16 am
क्या अब मेरे,सुख भरे दिन नहीं लौटेगें।क्या अब मेरे कर्ण ,उस ध्वनि को नहीं सुन पायेगेंक्य अब मेरे हँसीं,उस हँसीं में नहीं मिल पायेगें।क्या अब कोई,मुझसे यह नही कहेगा-ओ प्रिय ! तुम अकेले कहाँ हो,मैं भी तेरे साथ में हूँ।यदि मूझमे यह प्रवृत्ति अनवरत है।तो इसलिए कि-हो सकता है ...
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  April 28, 2015, 9:26 am
सहसा,अचानक बढ़ीं धड़कन,हृदय में नहीं,धरती के गर्भ में।मची हलचल,मस्तिष्क में नहीं,भु- पर्पटी में।सो गये सब,मनुष्य सहित,बड़े-बड़े मकान।सो गये सबपशुओं सहित,बड़े-बड़े वृक्ष।मचा कोहराम,जन- जीवन में।हुआ अस्त-व्यस्त लोगों का जीवन।फट गया कहीं-कहीं,धरती का कपड़ा।टूट गया हर -कहीं,कोई...
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  April 27, 2015, 12:21 am
तुमसे जब होता है, नयनोन्मीलन। मुझे ऐसा एहसास होता है। तुम्हारी अधरों के, मधुर कंगारो ने। तुम्हारी ध्वनि की, गुंजारो ने । तुम्हारी मधुसरिता सी, हँसीं तरल। रजनीगंधा की तरह, कली खिली हो। राग अनंत लिये, अपने अधरों में। हँसीनी सी सुन्दर, पलको को उठाये हुअे। मौन की भाषा में। व...
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  April 9, 2015, 10:42 pm
सुबह में मैं बहुत खुश था लिये मन में सपने सुंदर था अपने घर की ओर जा रहा था खुशियों का लहर मन में था तभी अचानक वो आया था दुखों का लिया पहाड़ था। सबको बाटना चाहता था। बाटा सबको थोड़ा -थोड़ा हिस्सा हमें भी दे रहा था नहीं लेने का कर रहा था उन लोगों से गुजारिश तकाजा नियम का दे र...
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  April 1, 2015, 5:43 pm
पैग - पे - पैग हम तो चढाते रहे।जाम-पे-जाम हम तो लगाते रहे।जैसे जनन्त में हूँ ऐसा हुआ असर,आनंद,कुछ समय गुदगुदाते रहे।पानी को हर पैग में, मिलाते रहे। दोनों मिलकर नशामे भीगाते रहे।बाद में मेरा, मौसम रंगीन हुआ।कि अपने को ख्वाब में डुबाते रहे।••••••रमेश कुमार सिंह ♌ ••• ••••...
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  March 30, 2015, 5:40 pm
आज भी याद है,उसकी हँसीं,मुस्कुराहटअधरों से निकले,वो लब्ज जब,हृदयंगम,होते हैं।तो मैं खो जाता हूँ उसकी यादों में,टटोलने लगता हूँ,बिताये हुए।वो सारे पल-वो स्पर्श,कभी कभी ,नाराजगी को दिखाना ,मुझसे दूर जाकर,बैठ जाना,फिर थोड़ी देर बाद,वापस आना,अपनी गलती को,सहर्ष स्वीकार करना...
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  March 26, 2015, 2:43 pm
हे मन !क्यों उदास है?क्या सोच रहा है?क्यों याद कर रहा है ?उसकोउसका अभी -भी इन्तजार है ,उसने क्या दिया था तुम्हें,खुशहाल भरे ओ पल,आनन्द भरी वो बातें,इजहार के वो दिन,क्या यही याद कर रहा है तुम,वो तो तुम्हारे पास सब छोड़ कर गई है।उसका रूप बदलकर गई है।नाम है जिसका-यादें।उन यादों ...
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  March 24, 2015, 7:27 am
यादें तुम्हारी मेरे पास बहुत है ,किस पल को याद करूँ मैं।सभी पलो में हलचल मची है,किस-किस पर मन दौड़ाऊँ मैं।मन चारों दिशाओं मे जाते हैं,किधर-किधर उसे मोड़ दू मैं ।सब कुछ बातें समझ नहीं पाते,कैसे बिताये लम्हे याद करूँ मैं ।जब -जब याद तुम्हें करते हैं ,उस वक्त सोचने लगता हूँ म...
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  March 22, 2015, 5:36 pm
मन कि चन्चलता, देखने को कहता, तुम्हें ढुढ रही हूँ, जानते हों क्यों? आज प्रेम दिवस है। हृदय व्याकुलता, आने को कहता, राह देख रही हूँ, जानते हों क्यों? आज प्रेम दिवस हैं। फुलो कि बगिया, से फुल गुलाबिया, तोड़ कर लाया हूँ, जानते हो क्यों? आज प्रेम दिवस है। स्नेह भरे फुलो को, तुम्...
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  March 15, 2015, 1:07 pm
ईशीका—— हमारे और तुम्हारे बीच जितनी भी क्रियाएँ हुई वो सब एक मधुर यादों के जरिये इस पन्नों में आकर सिमट गई।जो यह सफेद पन्ना ही बतलाएगा की हमारे दिल में तुम्हारे लिए क्या जगह थी यह पन्ना इतना ही नहीं बल्कि हमारे तुम्हारे बीच के अपनापन को दर्शायगा,कि हमारे और तुम्हारे ब...
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  March 12, 2015, 10:15 am

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  January 1, 1970, 5:30 am
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