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Blog: "बनफूल"की कहानियाँ

Blogger: Jaydeep Shekhar
जलरंग: जयचाँद दास उफ्, इतना काम, सॉंस लेने की फुर्सत नहीं।                मशीनों की खिचखिच से खुद ही विरक्त होने लगा हूँ, किन्तु कोई उपाय नहीं है, कल सुबह तक ढाई सौ झण्डे बनाकर देने ही होंगे। इस खिचखिच में आमदनी छुपी हुई है, बस यही एक सान्त्वना है।   ... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   2:33pm 5 Aug 2015 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
जलरंग: जयचाँद दास मन्दिर हालॉंकि जीर्ण-शीर्ण है, चारों तरफ कलमी और मान के पत्तों के जंगल उगे हैं, दिनभर में महादेव के सिर पर एक बूँद भी जल गिरता है कि नहीं सन्देह है, फिर भी, महादेव लेकिन जाग्रत हैं। कौन है, जिसने सनातनपुर के महादेव का नाम न सुना हो? जाग्रत महादेव की नाना ... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   2:46am 23 Jul 2015 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
Watercolour: Jaychand Dasघटनासूत्र इस प्रकार है-                सन्थाल-परगना के एक पर्वतीय अञ्चल में वायु परिवर्तन के उद्देश्य से गया था। प्रातःकाल भ्रमण करता था, नैसर्गिक शोभा देख-देख कर पुलकित होता था, पर्याप्त परिणाम में भोजन कर उसे पचा डालता था, नीन्द इतनी गहरी... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   3:22pm 4 May 2015 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
जलरंग: जयचाँद दास पत्नी मायके गयी हुई है।                चैन की साँस लेने की बात है, मगर ले नहीं पा रहा हूँ। नौकर रास्ता रोके बैठा है। जिस नौकर के संरक्षण में पत्नी मुझे रख गयी है, वह अत्यधिक सतर्क है। हालाँकि उसके कर्तव्य-कर्म में लेशमात्र भी शिथिलत... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   1:11am 26 Apr 2015 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
जलरंग: जयचाँद दास बैठकरगपशप कर रहा था।                 जगमोहन अन्दर आया और आँखों के ईशारे से बोला, ‘बाहर आना जरा।’                बाहर आया।                ‘‘क्या है?’’                ‘‘कुछ न... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   6:18am 2 Apr 2015 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
गहन रात्रि।                मच्छरदानी के अन्दर लेटकर श्रीमती सुनन्दा ने एक मासिक पत्रिका में आत्मसमर्पण कर रखा है। पास ही में श्रीयुक्त तमालकान्ति गाव तकिये से लिपटकर नाक बजा रहे हैं। कहने की आवश्यकता नहीं, फिर भी कहूँगा, दोनों पति-पत्नी हैं। सालभर... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   3:15pm 12 Mar 2015 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
तीसरे दर्जे का डब्बा- भीषण भीड़। इसके बावजूद लेकिन एक कोने में ठस्सम-ठस्स बैठकर परम शाक्त कालीकिंकर वर्मा परम वैष्णव नित्यानन्द गोस्वामी के साथ धर्म विषयक तर्क कर रहे हैं। वर्मा कृष्ण वर्ण के हैं, लाल आँखें, मस्तक पर चमकदार लाल सिन्दूर का टीका। गोस्वामी का वर्ण गौर है, ... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   3:57pm 4 Mar 2015 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
Watercolour: Jaychand Dasउस दिन मेरे सीने पर मुँह छुपाकर फफक-फफक कर रो रही थी वह- इस बात को मैं भूला नहीं हूँ। अनिंद्यसुन्दर अपने चेहरे को मेरे सीने पर भींचकर कितना रोई थी वह! कोई शब्द नहीं- बस रोना। अन्धकार कमरा! सूचीभेद्य अन्धकार! उस अन्धेरी रात में मैं था और वह थी। और कोई नहीं। उसकी अश्... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   6:46am 28 Feb 2015 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
एककौड़ी के प्रपौत्र, दोकौड़ी के पौत्र, तीनकौड़ी के पुत्र, बाबू पाँचकौड़ी पोद्दार स्वकीय पुत्र छहकौड़ी को लेकर जरा विव्रत हो उठे हैं।                हरिणहाटी ग्राम में पाँचकौड़ी पोद्दार की सभी यथेष्ट खातिर करते हैं। वस्तुतः वे उक्त ग्राम में मध्यमणिस्व... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   12:25pm 15 Feb 2015 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
Watercolour: Jaychand Dasशशकगणों के साथ मेषगणों का घोर संघर्ष चल रहा है। दोनों ही पक्षों का आर्यशोणित मस्तिष्क में सवार हो गया है। भीषण कोलाहल से सभी का कर्णपट विदीर्ण हुआ जा रहा है। सत्य ही, इस प्रकार का शब्दझंकार अश्रुतपूर्व है। वह सुनो- शशकगणों की युद्ध-ललकार महिलाओं के क्रन्दन को... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   7:05am 12 Feb 2015 #
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