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Blog: ..जिंदगी के नशे में.……

Blogger: dayanand arya
मैं नहीं चाहूँगा  की दिल्ली मेरे रग रग में बहे  जरूरत बनकर। मैं चाहूँगा की जैसे  यादों की खुसबू बनकर  मौके बेमौके महकते हैं  देहरादून और नागपुर।  या फिर दोस्तों के निश्चिन्त ठहाकों की तरह जैसे कानों में कभी कभी गूंज जाता है हैदराबाद।  वैसे ही किसी भूले बिसरे गीत की तरह ... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   5:44pm 2 Sep 2015 #जिन्दगी
Blogger: dayanand arya
"क्या दादा आप इस 4G के टाइम में अभी भी 2G गड्डी हाँक रहे हो ।" "देखो दिल के मामले में सहूलियत से काम लेना चाहिए ।  प्यार को धीरे धीरे पनपने दो । धीमे आंच पर पकने दो । हर लम्हे को महसूस करो ।" "अच्छा ! तो पहले आप decide कर लो की प्यार करना इम्पोर्टेन्ट है की महसूस करना । क्योंकि महसूस क... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   7:21am 22 Aug 2015 #दिल
Blogger: dayanand arya
हर कलाकार अपनी कला के माध्यम से जिंदगी को समझने-समझाने की कोशिश करता है । कहीं एक पहलू तो कहीं दूसरे पहलू को विस्तार देता है ताकि उसकि कई बारीकियों तक हमारी निगाह पहुँच सके । कला के ग्राहक वर्ग में हर एक आम इंसान होता है जो उसमें अपनी और अपने आस-पास की जिंदगियों और उसके व... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   5:11am 5 Jul 2015 #जिन्दगी
Blogger: dayanand arya
क्यूँ ठिठक सा गया वक़्त मेरी जिंदगी के कैनवस पे अपनी कूचियों से रंग भरते-भरते। .... दूर आकाश में चमकते सितारों के चकाचौंध सपने मैं  कहाँ मांगता हूँ- धूसर मिटटी का रंग तो भर देते। ....  कहीं-कहीं मौके-बेमौके कुछ बारिश- कुछ हरियाली, सर के ऊपर एक अरूप आकाश और आँखों के सामने कु... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   5:43pm 3 May 2015 #जिन्दगी
Blogger: dayanand arya
           कविता के पाठकों का घटते जाना हाल के समसामयिक गोष्ठियों में चर्चा में बना रहता है। लोग चिंतित दिखते हैं की आज अभिव्यक्ति की बढ़ती सुगमता के साथ कविता के लिखे जाने और और उसके आम जान के दृष्टि फलक तक पहुँच में काफी इजाफा तो  हुआ है परन्तु उनकी गुणवत्ता में काफी ह्रा... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   1:17am 3 May 2015 #
Blogger: dayanand arya
लिखने को तो जी बहुत कुछ चाहता है पर डर लगता है कहीं शब्दों की झाड़ियों में जिंदगी उलझ कर न रह जाए। read this in the context of my previous blog post ... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   7:31am 23 Apr 2015 #कसक
Blogger: dayanand arya
तुम नहीं हो ! गुलदान कोने में सहमा सा पड़ा है। मुझसे पूछना चाहता है - कब आओगे ? कब जाओगे ? पर पूछता नहीं। तरस गया है- जिन्दा फूलों को। ये प्लास्टिक के फूल- न खिलते हैं , न मुरझाते हैं , जैसे के तैसे समय काट रहे हैं। समय ही तो काट रहे हैं- ये गुलदान, ये दरों-दीवार, और मैं भी जैसे क... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   5:57am 10 Apr 2015 #seperation
Blogger: dayanand arya
                        1.  अनसुनी यह कौन सी धुन छिड़ रही है  छेड़ता है कौन मन के तार को फिर  अंकुरण किस भाव का यह हो रहा है  जागता क्यों है हृदय में राग नूतन।              भर रहा है दिल भरे मन प्राण जाते              दर्द सा क्या कुछ सुकोमल हो रहा है              हो रहे गीले नयन के कोर हैं क्यों -    ... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   5:52am 6 Apr 2015 #जीवन
Blogger: dayanand arya
निंदिया के घरौंदों में सपनों को बुला लेना पलकों के किवाड़ों को हौले से सटा लेना । टूटे न देखो ये निंदिया … मोती से नयनों की निंदिया … सपनों-सपनों मचलती ये निंदिया … ।। हिडोले पे मद्धम सुरों के - ख्वाबों की अनगिन कहानी सांसों की तुतली जुबानी - मन ही मन में सुना देना पलकों ... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   1:10pm 21 Mar 2015 #ray of light
Blogger: dayanand arya
            टूटे तार             खंड-खंड स्वर             राग विखंडित             क्षिप्त रागिनी ऐ मृदुले! जीवन के सुर-             संयोजित कर दे ।।            टूटे-फूटे छंद             भाव बिखरे-बिखरे से             रस की सरिता सूखी सी             सब शब्द अनमने             भटका हुआ कहन             कथन ... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   1:10pm 24 Jan 2015 #life
Blogger: dayanand arya
 मैं सुन नहीं पाया  तुम्हारे क़दमों के लय को  पहचान नहीं पाया  तुम्हारे दिल के तरंग को  तुम्हारे कंठ के उमंग को  बस इन्तजार करता रहा  कि तुम मेरे लिए  कोई प्रेम गीत गाओगी  और तुम्हारा जीवन संगीत  मेरे लिये अनसुना रह गया। ... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   2:40pm 13 Jan 2015 #micropoetry
Blogger: dayanand arya
यूँ चांदनी पीते-पीते हम तुम किस नशे में उड़ चले हैं चाँद तक तारों तक तारों के एक गुच्छे से  दूसरे गुच्छे तक कई मन्दाकनियों को पार कर ब्रह्माण्ड के एक छोड़ से दूसरे छोड़ तक.… आओ न !.... यहीं, इस मंदाकनी के किनारे नव-तारों के बागीचे के बीचो-बीच एक प्यारी सी कुटिया बनाते हैं। त... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   2:29pm 4 Jan 2015 #love
Blogger: dayanand arya
आने वाले तेरा स्वागत ! नवल सूर्य की बंकिम किरणे  करती  तेरा फिर-फिर अभिनन्दन।  आने वाले तेरा स्वागत !                        नई कोंपलें, नाजुक डंठल                        नई उमंगें, नव जीवन रस                        पात-पात तेरा अभिरंजित                        अभिसिंचित हो ओस कणों से       ... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   1:48pm 26 Dec 2014 #morning
Blogger: dayanand arya
मुझे समय मत दो... वो खाली समय जब मेरे पास करने को कुछ न हो, सोंचने को कुछ न हो।  जब मेरे इस ऊपरी बाहर से ओढ़े हुए सतह में कोई हलचल न हो।  जब वर्तमान परिस्थितियों, आवश्यकताओं और कर्तव्यों का नशा, उसका खुमार टूटने लगे .… मैं आप ही अपने अंदर उतरने लगता हूँ; वहाँ मुझे मिलता है - एक ... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   1:40pm 13 Dec 2014 #loneliness
Blogger: dayanand arya
 वो जो मुझे नहीं मेरे प्यार को पाना चाहे … मुझे जानने भर में न उलझ कर मुझे समझना चाहे… ... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   12:09pm 16 Oct 2014 #pang
Blogger: dayanand arya
काश कि जिन पन्नों में तुम मेरा अतीत ढूंढते हो उनमें तुमने कभी मुझे ढूंढा होता .... मेरा वर्तमान तो तुम्हारा है  ही फिर मेरे अतीत का भी तुम्ही लक्ष्य बन जाते।  ... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   9:30pm 15 Oct 2014 #micropoetry
Blogger: dayanand arya
एक अहसास तेरे पास होने का सिहरन तेरी सांसों से छूने सा खुशबू सी हवा में यूँ फैल  गयी चटक सा गया हो कोई फूल अधखिला जाने क्या था वो झुकी पलकों सा चाँद के पार चला कोई पंछी मनचला जैसे कुछ कहने सा  वो पलक उठने सा सूरज से, किरणों से रौशन था  सवेरा इधर से उधर - यहाँ से वहां तूँ जै... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   10:52am 12 Oct 2014 #loneliness
Blogger: dayanand arya
मेरे मन! तूँ किस पिछड़ी हुई सभ्यता का हिस्सा है ? जो चाँद में तुझे अपनी माशूका का चेहरा दिखता है; जो उसे घंटों इस हसरत भरी निगाह से देखता है की - वह छोटा सा चाँद तेरी आँखों में उतर आये ; जो उसकी मध्धम सी चाँदनी में तूँ डूब जाना चाहता है ; जो सहम जाता है तूँ - उसे किसी दैत्या... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   10:14am 21 Jun 2014 #कसक
Blogger: dayanand arya
तुझे मेरे लिये नदी बनाना होगा प्रिये  ! उनका बहाव भी और कल-कल स्वर भी ; फूल भी पत्ते भी डालियाँ भी और पूरा का पूरा पेड़ भी ; घाँस भी उनपर पड़ी ओस की  बूँदें भी और उनमे प्रतिबिम्बित स्वर्ण रश्मियाँ भी; रात भी चाँद भी और चांदनी भी ; धूप  भी  सूरज भी उषा में  उसका आगमन भी और संध्या म... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   12:12pm 10 May 2014 #नदी
Blogger: dayanand arya
सोंचता हूँ बहने दूँ मन को इन मदमस्त हवाओं के साथ के शायद खुद ढूँढ़ सके कि यह क्या चाहता है। के शायद कहीं इसके सवालों का जवाब मिल जाये के शायद कहीं इसके ख्वाबों को पनाह मिल जाये या फिर यह भूल कर उन ख्वाबों  को उन सवालों को रम जाये नए नजारों में। या घूम आए पूरी दुनिया देख आय... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   5:08am 25 Feb 2014 #उड़ान
Blogger: dayanand arya
तुमने ही तो मुझसे कहा था अनु ! माना कि मैं तुम्हारे track में न  पायी पर तुमने ही तो अपना पता लगने न दिया। माना की मैं इधर कुछ महीनों से थोड़ी ज्यादा बिजी हो गयी थी पर तुमने तुमने ही तो कहा था सेवा भाव से पूजा समझ कर अपनी जिम्मेदारियाँ निभाने के लिये ; और इधर तुमने ही ... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   11:50am 13 Feb 2014 #Ocean
Blogger: dayanand arya
तुम भोले हो दर्द से अनजान दिल की भाषा क्या जानो । दिल दर्द में पक कर समझने लगता है दिलों की भाषा- सुन पता है दिलों में स्पंदित दर्द; सम्प्रेषित कर पाता है अपनी विश्रान्त सहानुभूति-               कभी आँखों के माध्यम से               तो कभी एक हलके से स्पर्श के सहारे; कभी उतर ... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   10:44am 20 Dec 2013 #love
Blogger: dayanand arya
ऐसे गुजरे वो दिन जिस दिन मुझे जाना हो - कि तेरी एक मुस्काती सी छवि सारे दिन फंसी रहे मन के किसी कोने में  । कुछ बातें कर लूँ अपनों से; दुआ कर सकूँ उनके खैरियत की। न कोई जल्दी हो यहाँ से जाने  की , और न कोई टीस यहाँ कुछ छूट जाने की । हाँ, उस रोज जरूर देख सकूँ सूरज को उगते ... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   9:42am 2 Nov 2013 #jeevan
Blogger: dayanand arya
हाँ, आज तुम बाहें पसारे आनंद ले लो बारिश की बूंदों में भींगने का; कल जब तुम्हारे सर पे छत नहीं होगी, तो पूछूँगा - कि भीगते बिस्तर पे कैसे मजे में गुजरी रात ! आज देख लो ये रंगीन नजारे ये बागीचे, ये आलीशान शहर; कल जब लौट के आने को कोई ठिकाना नहीं होगा, तो पूछूँगा- चलो कहाँ चलते ह... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   9:30pm 18 Oct 2013 #जीवन
Blogger: dayanand arya
अंधेरों की सनसनाहट संगीत नही, भयानक शोर जो फाड़ डाले कान के परदों को - अचानक थम जाती है ।  …शायद कोई आसन्न ख़तरा घुल रहा है हवाओं में । … के शायद कोई नाग निकल पड़े झाड़ियों से; या और कुछ । … के शायद मुझे भी चुप हो जाना चाहिए ; इस विलाप को बंद करके सतर्क हो जाना चाहिए उस आसन... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   10:17am 16 Oct 2013 #mahanagar
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