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Blog: मन के वातायन

Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
प्रकृति ने ओढ़ धानी चुनर लीनी,रितु पति के आव भगत की तैयारी कीनी।द्रुम दलों ने नव पल्लव धारे,खेतों में सरसों के पीले फूल खिले न्यारे।स्वस्ति गान की जिम्मेदारी, कोयल ने लीनी....।सुरभित शीतल बयार बहेगी,श्रम हर जन का दूर करेगी।भर देगी उल्हास मनों में फूलों की सुगंध भीनी....।कल... Read more
clicks 34 View   Vote 0 Like   4:26pm 8 Feb 2020 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
राह सुगम सबकी करो,पथ को देउ बुहार।कंकड़ पत्थर बीन कें, कंटक देउ निकार ।।बिगड़ी ताहि बनाइये, यदि सम्भव है जाय ।सुखी होयेगी आत्मा, जो इज्जत रह जाय ।।पिय की छवि ऐसी बसी, और न भावै कोय ।मन रोवै दै हूकरी, जिस दिन दरश न होय ।।प्रेम का पथ है अनन्त, नहि इसका है अंत ।प्रेम बिना है जिंदग... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   3:11am 5 Feb 2020 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
आ गये ऋतुराज बसंत।गत शिशिर हुआ, विगत हेमन्त…………आ गये .....।मौसम हो गया खुशगवार,बहने लगी सुरभित बयार,कोयल कूक रही मतवाली,हुई पल्लवित डाली डाली।गुनगुनी धुप से खिल गये तनमन, हुआ दुखों का अन्त…आ गये...।पीले फूल खिले सरसों के,शस्य श्यामला हो गई धरा।मानो बसंत की आगौनी को,प्रकृत... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   4:20am 30 Jan 2020 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
इधर देखो उधर देखो,हो नहीं जाये हादसा, तुम हर तरफ देखो।देखो पृथ्वी देखो आकाश, हर ओर कीजिए दृष्टि पात। कर दीजिये अबिलम्ब वार,देश का दुश्मन अगर देखो।ओ वीर सैनिक देश के रक्षक, कर न दे घात कोई आस्तीन का तक्षक।कर दो तुरंत नेस्तनाबूद, कुछ संदिग्ध अगर देखो। हो नहीं जा... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   4:09pm 25 Jan 2020 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
मुझे अपने बारे में नहीं कोई भरम,सत्य स्वीकारने में नहीं कोई शरम।सुगठित नहीं हैं मेरे विचार,मैं भावों का पसरट्टा हूँ।मैं करता हूँ सम्मोहित हूँ मोहन,आपकी भावनाओं का करता हूँ दोहन।रगड़ रगड़ कर करता हूँ समरस,मैं पत्थर का सिल बट्टा हूँ।सब रहते हैं मुझसे निराश,पूरी नहीं कर प... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   1:05pm 4 Jan 2020 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
अरे ओ बेरहम जाड़े,उमर से हारों को नहीं सता रे।चलता नहीं तेरा कुछ जोर सेहतमंद पर,वे रखते हैं तुझको मुठ्ठी में बंद कर।नहीं करती उन पर कुछ असर शीतल फ़िज़ा रे।जब हम जवान थे,नहीं सींकिया पहलवान थे।बर्फीली ठंडी हवा,हमें देती थी मज़ा रे।जब हम थे तरुणाई के गुमान में,जाकर शून्य से न... Read more
clicks 8 View   Vote 0 Like   2:12pm 28 Dec 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
जा री बिटिया अपने घर,यहाँ की छोड़ चिंता-फिकर।सूझ बूझ से घर बार चलाना,नहीं समस्याओं से घबराना।सोच विचार करने से दुश्वारी कारस्ता आता है निकर ...........।उलझने नहीं देना रिश्तों की डोर,कस कर पकड़े रहना छोर।नहीं करना कभी जिरह,नहीं पति से व्यर्थ के जिकर..।सास ससुर का करना सम्मान,हम... Read more
clicks 7 View   Vote 0 Like   4:36pm 17 Dec 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
तू एक जरूरी काम कर,आदमियत का तमगा-अपने नाम कर।बेतहाशा पैदा हो रहे इंसान,जनसंख्या में हो रही वृद्धि।होना भीड़ में खरा आदमी,है बड़ी उपलब्धि।तू बन कर दुखियों का मददगार,इंसानियत का एहतराम कर। ,यहाँ होते रहते हैं नाटक,यह दुनियाँ है एक रंग मंच।चलते रहते छल छंद यहाँ, लोग रचते ... Read more
clicks 7 View   Vote 0 Like   2:06pm 3 Dec 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
हे ईश्वर, यह क्या हो रहा है !जग धू धू कर जल रहा है,तू बेखबर सो रहा है।देख यहाँ चल रही है,कब से नफरत की आँधी।चढ़ गये इसकी भेंट,मार्टिन लूथर किंग और गाँधी।ईर्ष्या की अग्नि,बढ़ती जा रही है।गैरों को करके ख़ाक,अब अपनों को जला रही है।आज सबसे त्रस्त है नारी,ममता की मारी।उसकी सेवाओं क... Read more
clicks 7 View   Vote 0 Like   9:09am 24 Nov 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
नदिया चंचल,न हो उच्छृंखल।कल-कल करती नाद,धीरे बहो।सँभालो अपना वेग,न दिखे लहरों में उद्वेग।रख नियंत्रण संवेगों पर,तीरे बहो।वेगवती तुम नहीं इतराना,बहुत दूर तक तुमको जाना।करना है तय लम्बा सफर,हद में, सुनीरे रहो।असंयमित हो नहीं तोड़ना कगार,बिगड़ेगा रूप आयेगी बाढ़।बह जायें... Read more
clicks 7 View   Vote 0 Like   2:49pm 16 Nov 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
मन की भटकन से उसका हर बार निशाना ऊक रहा है,स्थिर प्रज्ञ नहीं होने से वह लक्ष्य से चूक रहा है।जानता है उसका थूका उस पर ही गिरेगा,फिर भी मुँह ऊपर कर थूक रहा है।कोई नहीं मनायेगा उसको,फिर भी पगला रूठ रहा है।तोड़ता रहा है वह औरों के घर,अब उसका भी घर टूट रहा है।गाहे बगाहे करता रहा... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   3:27pm 9 Nov 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
लाख रोकने पर भी निकल जाती है आह,जब चुभते हैं तेरी यादों के शूल।तेरी बेवफ़ाई ने करा दिया है अहसास,वह प्यार न था सिर्फ़ शिगूफ़ा था।तेरी याद में रो लेते थे,आँसुओं संग निकल जाता था गुबार।अब दिल में ही घुमड़ता रहता है।तेरी बेरुख़ी से भी मिलता है सुकून,चलो तूने इस क़ाबिल तो समझा।इल... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   11:42am 1 Nov 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
अति पावन माँटी है ब्रज की,तिलक लगाऔ समझि कें चन्दन।श्रद्धा सौं भैंटहु ब्रजवासिन,करत रहे केलि इन सँग नँद नंदन।गैया पूज्य हैं जमुना पूज्य है,पूज्य है सिगरी ब्रज भूमी।यहाँ धेनु चरावत घूमे कान्हा,उन सँग राधा हू घूमी।अति पवित्र है धाम वृन्दावन,यहाँ रास रचाते रहे कन्हैया... Read more
clicks 33 View   Vote 0 Like   8:51am 26 Oct 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
चाँद-चाँदनी की अनुपस्थिति में,तारे खिलखिला रहे हैं।कभी कभी अमावस भी होनी चाहिये।बिलों से निकल कर चूहे-कर रहे हैं धमाचौकड़ी।आज पूसी मौंसी घर पर नहीं है,आओ कुछ देर हँसलें खेल लें।मित्रो, आज बॉस नहीं हैं,चलो रमी खेल लेते हैं।आज अवकाश है।भूल कर चिंता फिकर-पिकनिक पर चलें।इ... Read more
clicks 42 View   Vote 0 Like   1:37am 19 Oct 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
सबको प्यार की प्यास,मुझको भी प्यार की प्यास।दूर दूर सब रहते मुझसे,पड़ा अकेला बातें करता खुद से।रहूँ बुलाता इसको-उसको,कोई नहीं आता पास।लगता है अब जाने की हुई उमर,मैं उपेक्षित हुआ बदली लोगों की नजर।अपनों के बेगानेपन से,टूटी जीवन की आस।मैं चाहता हूँ कोई मुझसे प्यार करे,हँ... Read more
clicks 44 View   Vote 0 Like   8:01am 12 Oct 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
बंधु मेरे नवरातों में,जागा करिये रातों में।माँ की भक्ति में रम जाओ,जाया करिये जगरातों में।माँ की महिमा अपरम्पार,करती भक्तों का बेड़ा पार।बिन माँगे सब कुछ पाओगे,जाकर देखो उसके द्वार।माँ का भव्य सजा दरबार,करिये दर्शन, करिये जयकार।माता तुमको बुला रही है,राह तुम्हारी रह... Read more
clicks 30 View   Vote 0 Like   2:19am 6 Oct 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
प्यासी धरती रही पुकार,सावन वेग अइयो रे।वेग अइयो रे,जल के मेघ लइयो रे।सूखे कंठ लगा रहे रटंत-पानी पानी।नन्हीं मुनियाँ सटक न पाये,जल बिन गुड़ धानी।नन्हे हाथ उठा रोकती बदरा,बिन बरसे मत जइयो रे।ढूंढते नगरी-नगरी गाँव -गाँव,नहीं मुठ्ठी भर मिल रही छाँव।बहुतेरौ रोकौ समझायौ,जंग... Read more
clicks 44 View   Vote 0 Like   4:02pm 27 Sep 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
बीती रात हुआ सबेरा,दूर हर गम।काली रात के गुनाह समेटे,भाग गया तम।लाल रंग उषा का,प्राची में झलका।हुई निराशा दूर,सूर्य आशा का चमका।मदहोशी हुई दूर,हुआ अलस कम।जाग गई मुन्नी,शौच को भागा मुन्ना।पड़ा द्वार पर कालू कुत्ता,हुआ चौकन्ना।झुनियॉँ की पायल बोली,छम छम।मुर्गा बोला मिम... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   10:10am 14 Sep 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
तुम बुहार न सको किसी का पथ कोई बात नहीं,किसी की राह में कंटक बिखराना नहीं।न कर सको किसी की मदद कोई बात नहीं,किसी की बनती में रोड़े अटकाना नहीं।न निभा सको किन्हीं सम्बन्धों कोई बात नहीं,तुम रिश्तों की डोर उलझाना नहीं।न घोल सको वाणी में मिठास कोई बात नहीं,कड़वे बोलों के नस्... Read more
clicks 30 View   Vote 0 Like   11:38am 6 Sep 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
सबकी बिगड़ी बन जाये,जय श्री राम जय श्री राम।नहीं मौत किसी की असमय आये,जय श्री राम जय श्री राम।पूरण होवे सबके काम, जय श्री राम जय श्री राम।नहीं लालची, सब हों निष्काम,जय श्री राम जय श्री राम ।धन धान्य से भरे रहें भंडार,जय श्री राम जय श्री राम।करते रहें लोग उपकार,जय श्री राम... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   1:17pm 30 Aug 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
नँद नन्दन कित गये दुराय !ढूँढत घूमी सिगरी बृज भूमी,गये मेरे पायँ पिराय।कान्हां , मैं तुम्हरे प्रेम में बौरि गई,औंधाई गगरी पनघट दौरि गई।देखूँ इत उत उचकि उचकि,कहीं पड़ते नहीं लखाय।भ्रमित भई सुनि भँवरे की गुंजन,ढूंढे सघन करील की कुंजन।रे मनमोहन तेरे दर्शन बिन,नैन रहे अकुल... Read more
clicks 28 View   Vote 0 Like   3:31am 24 Aug 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
सबकी अपनी अपनी ढपली,अपना अपना राग।किसी को सुहाता है सावन,किसी को भाता फाग।जब सब गाते कजरी-टप्पे,वे गीत ओज के गाते हैं।सीमा पर रहते मुस्तैद,नहीं मौसम उन्हें डराते हैं।वे रहते हैं सदा सजग,कोई लगा न दे कभी आग।न कोई उनको गर्मी,न कोई उनको सर्दी।न कोई उनकी इच्छा ,न कोई उनकी मर... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   6:14am 10 Aug 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
घिर घिर बदरा आबते, बिन बरसें उड़ जांय।नीको जोर दिखावते ,पर बरसत हैं नायँ।पर बरसत हैं नायँ ,दया नहि दिखलाते हैं।गरजत चमकत खूब,नहीं जल बरसाते हैं।रहते चलायमान ,बादल रहते नहीं थिर।नहि होती बरसात, जलद आते हैं घिर घिर।सावन सगुन मनाइये झूला झूलौ जाय, पैंग बढ़ाइ लेउ पकड़ बदरा उ... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   2:41am 5 Aug 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
ये भी आये, वे भी आये,सभी ही उनके,जनाजे मे आये।आये करीबी, आये रकीबी,रोते थे बिसूरते थे सभी ही।उनमें से कुछ थे,मुखौटे लगाये।कुछ थे देनदार,कुछ थे लेनदार।संग वे अपने,बही खाते भी लाये।कुछ आये थे निभाने को फ़र्ज,नहीं थे उनके रसूखों में दर्ज।वे सिर्फ इंसानियत,दिखाने को आये।कुछ ... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   7:56am 29 Jul 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
घड़ियां इंतज़ार कीलगती हैं पहाड़ सीपलकें होती हैं बोझिलआँखें सुर्खरूजैसे तप्त हों बुखार से।मनहो जाता है व्याकुलऔर तन आकुलहर आहट पर चौंक उठती हैआ गये सनम।आवारा बयार का झौंका होगाअथवा कोई श्वानखड़का गया दरवाजे केकिवाड़।न देख कर प्रिय को हुई मायूसखो गया दिल का चैनबढ़ गई बे... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   4:32pm 20 Jul 2019 #
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