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Blog: मन के वातायन

Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
चाँद-चाँदनी की अनुपस्थिति में,तारे खिलखिला रहे हैं।कभी कभी अमावस भी होनी चाहिये।बिलों से निकल कर चूहे-कर रहे हैं धमाचौकड़ी।आज पूसी मौंसी घर पर नहीं है,आओ कुछ देर हँसलें खेल लें।मित्रो, आज बॉस नहीं हैं,चलो रमी खेल लेते हैं।आज अवकाश है।भूल कर चिंता फिकर-पिकनिक पर चलें।इ... Read more
clicks 6 View   Vote 0 Like   1:37am 19 Oct 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
सबको प्यार की प्यास,मुझको भी प्यार की प्यास।दूर दूर सब रहते मुझसे,पड़ा अकेला बातें करता खुद से।रहूँ बुलाता इसको-उसको,कोई नहीं आता पास।लगता है अब जाने की हुई उमर,मैं उपेक्षित हुआ बदली लोगों की नजर।अपनों के बेगानेपन से,टूटी जीवन की आस।मैं चाहता हूँ कोई मुझसे प्यार करे,हँ... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   8:01am 12 Oct 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
बंधु मेरे नवरातों में,जागा करिये रातों में।माँ की भक्ति में रम जाओ,जाया करिये जगरातों में।माँ की महिमा अपरम्पार,करती भक्तों का बेड़ा पार।बिन माँगे सब कुछ पाओगे,जाकर देखो उसके द्वार।माँ का भव्य सजा दरबार,करिये दर्शन, करिये जयकार।माता तुमको बुला रही है,राह तुम्हारी रह... Read more
clicks 8 View   Vote 0 Like   2:19am 6 Oct 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
प्यासी धरती रही पुकार,सावन वेग अइयो रे।वेग अइयो रे,जल के मेघ लइयो रे।सूखे कंठ लगा रहे रटंत-पानी पानी।नन्हीं मुनियाँ सटक न पाये,जल बिन गुड़ धानी।नन्हे हाथ उठा रोकती बदरा,बिन बरसे मत जइयो रे।ढूंढते नगरी-नगरी गाँव -गाँव,नहीं मुठ्ठी भर मिल रही छाँव।बहुतेरौ रोकौ समझायौ,जंग... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   4:02pm 27 Sep 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
बीती रात हुआ सबेरा,दूर हर गम।काली रात के गुनाह समेटे,भाग गया तम।लाल रंग उषा का,प्राची में झलका।हुई निराशा दूर,सूर्य आशा का चमका।मदहोशी हुई दूर,हुआ अलस कम।जाग गई मुन्नी,शौच को भागा मुन्ना।पड़ा द्वार पर कालू कुत्ता,हुआ चौकन्ना।झुनियॉँ की पायल बोली,छम छम।मुर्गा बोला मिम... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   10:10am 14 Sep 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
तुम बुहार न सको किसी का पथ कोई बात नहीं,किसी की राह में कंटक बिखराना नहीं।न कर सको किसी की मदद कोई बात नहीं,किसी की बनती में रोड़े अटकाना नहीं।न निभा सको किन्हीं सम्बन्धों कोई बात नहीं,तुम रिश्तों की डोर उलझाना नहीं।न घोल सको वाणी में मिठास कोई बात नहीं,कड़वे बोलों के नस्... Read more
clicks 8 View   Vote 0 Like   11:38am 6 Sep 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
सबकी बिगड़ी बन जाये,जय श्री राम जय श्री राम।नहीं मौत किसी की असमय आये,जय श्री राम जय श्री राम।पूरण होवे सबके काम, जय श्री राम जय श्री राम।नहीं लालची, सब हों निष्काम,जय श्री राम जय श्री राम ।धन धान्य से भरे रहें भंडार,जय श्री राम जय श्री राम।करते रहें लोग उपकार,जय श्री राम... Read more
clicks 8 View   Vote 0 Like   1:17pm 30 Aug 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
नँद नन्दन कित गये दुराय !ढूँढत घूमी सिगरी बृज भूमी,गये मेरे पायँ पिराय।कान्हां , मैं तुम्हरे प्रेम में बौरि गई,औंधाई गगरी पनघट दौरि गई।देखूँ इत उत उचकि उचकि,कहीं पड़ते नहीं लखाय।भ्रमित भई सुनि भँवरे की गुंजन,ढूंढे सघन करील की कुंजन।रे मनमोहन तेरे दर्शन बिन,नैन रहे अकुल... Read more
clicks 8 View   Vote 0 Like   3:31am 24 Aug 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
सबकी अपनी अपनी ढपली,अपना अपना राग।किसी को सुहाता है सावन,किसी को भाता फाग।जब सब गाते कजरी-टप्पे,वे गीत ओज के गाते हैं।सीमा पर रहते मुस्तैद,नहीं मौसम उन्हें डराते हैं।वे रहते हैं सदा सजग,कोई लगा न दे कभी आग।न कोई उनको गर्मी,न कोई उनको सर्दी।न कोई उनकी इच्छा ,न कोई उनकी मर... Read more
clicks 7 View   Vote 0 Like   6:14am 10 Aug 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
घिर घिर बदरा आबते, बिन बरसें उड़ जांय।नीको जोर दिखावते ,पर बरसत हैं नायँ।पर बरसत हैं नायँ ,दया नहि दिखलाते हैं।गरजत चमकत खूब,नहीं जल बरसाते हैं।रहते चलायमान ,बादल रहते नहीं थिर।नहि होती बरसात, जलद आते हैं घिर घिर।सावन सगुन मनाइये झूला झूलौ जाय, पैंग बढ़ाइ लेउ पकड़ बदरा उ... Read more
clicks 7 View   Vote 0 Like   2:41am 5 Aug 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
ये भी आये, वे भी आये,सभी ही उनके,जनाजे मे आये।आये करीबी, आये रकीबी,रोते थे बिसूरते थे सभी ही।उनमें से कुछ थे,मुखौटे लगाये।कुछ थे देनदार,कुछ थे लेनदार।संग वे अपने,बही खाते भी लाये।कुछ आये थे निभाने को फ़र्ज,नहीं थे उनके रसूखों में दर्ज।वे सिर्फ इंसानियत,दिखाने को आये।कुछ ... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   7:56am 29 Jul 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
घड़ियां इंतज़ार कीलगती हैं पहाड़ सीपलकें होती हैं बोझिलआँखें सुर्खरूजैसे तप्त हों बुखार से।मनहो जाता है व्याकुलऔर तन आकुलहर आहट पर चौंक उठती हैआ गये सनम।आवारा बयार का झौंका होगाअथवा कोई श्वानखड़का गया दरवाजे केकिवाड़।न देख कर प्रिय को हुई मायूसखो गया दिल का चैनबढ़ गई बे... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   4:32pm 20 Jul 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
भोर भई अब जागो लाल!मुँह उठाय रँभाइ रही गैया,बाट देखि रहे ग्वाल।उदय भये रवि किरण पसारीं,अम्बर से उतराईं।चूँ चूँ करती चुगने दाना,चिड़ियाँ आँगन में आईं।काहे लाला अब तक  सोवै,है रहे सब बेहाल।उठो लाल मुँह हाथ पखारो,मैं लोटा भर जल लाई।नित्य कर्म कर बंशीवट जाओ,प्यारे कृष्ण क... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   8:38am 15 Jul 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
लगता है सर्वत्र आग लगी है, दहक रहे नफरत के अंगारे।लाल भभूका हैं सबके मुख,आरक्त हुऐ गुस्से के मारे।सूख गये हैं नेह कूप,जुल्म ढा रही ईर्ष्या की धूप।दिखता नहीं कहीँ सौहार्द,जायँ कहाँ अपनों से हारे।अपनों का चुक गया अपनापन,रहने लगी सम्बन्धों में अनबन।गला काटते अपने ही अ... Read more
clicks 46 View   Vote 0 Like   10:35am 4 Jul 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
बन्धु रे जीवन है संग्राम,निज अस्तित्व बचाने को,लड़ना पड़ता है आठौ याम। कभी समाज से कभी सिद्धांत से,कभी अपने मन की उद्भ्रान्ति से।बीत जाता है जीवन लड़ते लड़ते,मिलता नहीं मुकाम।कुछ स्वस्ति वाचक समाज में,पा जाते हैं शीर्ष ठौर ।लेकर सहारा जाति पाँति का,बन जाते हैं सिर मौर।व... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   1:02am 14 Jun 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
यह तेरी गली यह मेरी गली,सौ बार आएंगे जाएंगे।लाख करेंगे कोशिशें,पर कभी न कभी टकराएंगे।टकराहट में होगी खनक ,पायल की जैसे झनक।हम नहीं करेंगे गौर,सुनी अनसुनी कर जाएंगे।कभी खा जायेंगे  तैश,लाठी डंडों से होएंगे लैस। हम रोक लेंगे रक्त पात,जब लोग हमें समझायेंगे।नहीं होएं... Read more
clicks 30 View   Vote 0 Like   8:50am 7 Apr 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
मौसम सुहाना हो गया है,समाँ आशिकाना हो गया है।जिन रास्तों पर अक्सर आते जाते थे,उन पर चले बिना एक जमाना हो गया है।जो अशआर बिखरे पड़े थे,उनके मिलने पर सुन्दर तराना हो गया है।उजड़ा दयार आपकी इनायत से,खुशियों का खजाना हो गया है।किसी रूंठे को मनाने की कोशिशें,खुद को झिकाना हो ग... Read more
clicks 30 View   Vote 0 Like   2:24am 2 Apr 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
मैं शराब हूँ,लोग कहते हैं मैं खराब हूँ।खराबी मुझमें नहीं,पीने वालों की सोच में है।छक कर पीना,खोना होश में है।मैं अंगूरी आसव,घूँट दो घूँट पीने वालों को देती मज़ा।बे हिसाब पीने वालों को,देती सजा।मैं उसके मन बुद्धि  पर,कर लेती अधिकार।पटक कर उसे किसी नाले में,करती प्रतिका... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   2:37pm 24 Mar 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
होली खेलि रहे नन्दलाल,बिरज की खोरी में।होरी खेलन बरसाने आये, ग्वाल बाल कान्हा लैकें आये।भर लाये लाल गुलाल,पीत पट झोरी में ।                     चंद्र सखी राधा की आयी,भरि कें गगरी जल लै आयी।जानें घोरि लियौ रँग लाल-कमोरी कोरी में।                      &nb... Read more
clicks 31 View   Vote 0 Like   4:52pm 19 Mar 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
मैं हूँ आज ग़म ज़दा,आक्रोशित होता हूँ यदा कदा।दुश्मनों ने गहरी घात की है,आँसुओंकी मुल्क को सौगात दी है।बैरियों का नाश हो,दुखी दिल से निकलती है सदा।होता युद्ध तो करते कुछ बारे न्यारे,छिपी घात से बिना दिखाये शौर्य-मारे गये बेचारे।उनकी शहादतों के गीत गाये जायेंगे सर्वदा।... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   2:59pm 10 Mar 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
श्री शिव शंकर संसार सार,करते थे अपना श्रृंगार।सँभाल कर जटाओं में गंग,धारण कर नाग-चन्द्र।मलने लगे भभूत,महादेव अवधूत। कुछ भभूत उड़ी,नाग की आँख में पड़ी।नाग फुंफकार उठा,फुसकार से चंद्र से टपकी सुधा। अमृत की वह बूंद ब्याध्र चर्म परचढ़ी,जी उठा ब्याध्र जान उसमें पड़ी।जी कर ... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   5:32am 4 Mar 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
नाम मिटा दो दुनियाँ के नक्शे से,पाकिस्तान का।उतार फैंको चाँद सितारा,फहरादो झंडा हिंदुस्तान का।कोई मुल्क था पाकिस्तान,रहे न इसका कोई निशान।आतताइयों को करो ख़त्म,दूर करो दर्द सारे जहान का।शहीदों की मौत का लो प्रतिकार,कर लो पाक पर अधिकार।बनाओ उसको एक प्रान्त, भारत मह... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   4:37pm 28 Feb 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
नापाक पाक को पाक करो,गन्दा है वह साफ करो।आतंकवाद का पोषक है,उसको दण्डित आप करो।करता रहता है छद्म युद्ध,नेतृत्व वहाँ का नहीं प्रबुद्ध।उनकी शुद्ध भावना हो जाये,ऐसा कुछ आप करो।विश्व मंचों पर हुई फजीहत,हर किसी ने दी उसे नसीहत।बन्द करो व्यर्थ का भारत विरोध,युद्ध के कारक हो... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   1:53pm 23 Feb 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
कूट कूट कर भुस भर दो,नापाक निगोड़ों में।बिना पिटे नहीं आएगी अक्ल,इन हराम खोरों में।वर्षों से वे कर रहे छल छइयां,बहुत हो गईं अब गलबहियां।न रहो विनोदी अब मोदी,  लतियाओ लगाओ मार इन डंगर ढोरों में।दिखलादो हिन्दुस्तानी दम खम,बतलादो नहीं कम हम।इतना कूटो दर्द रहे दौड़ता उन... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   6:39am 17 Feb 2019 #
Blogger: जयन्ती प्रसाद शर्मा
तारे न तुम आना ज़मीं पर,यहाँ बहुत दुश्वारियां हैं।कदम कदम पर धोखे हैं,कदम कदम पर मक्कारियां हैं।यह मतलब की दुनियाँ हैं,बिना मतलब कोई नहीं जानता।रोज मिलते हैं मगर,कोई नहीं पहचानता।मतलब के हैं रिश्ते नाते,मतलब की ही यारियां हैं।भाईचारे की यहाँ कमी है,सब आपस में डरे हुए ह... Read more
clicks 45 View   Vote 0 Like   2:49pm 2 Feb 2019 #
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