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मन के वातायन : View Blog Posts
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मन के वातायन

दम्भी पुत्र जिसको पिता ने घर से  निकाल दिया था, ने छल-बल से घर में पुनः प्रवेश किया और गर्वोक्ति से पिता से कहा, पापा मैं आ गया हूँ, आप हार गये। पिता ने शान्त स्वर में कहा “ठीक है तुम रहो, मैं जा रहा हूँ"।अगले ही पल स्वाभिमानी पिता का निस्पंद शरीर कुर्सी पर लुढ़क गया।  जयन्...
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  November 25, 2017, 3:30 pm
प्रजा तंत्र का दोष है, तंत्र रहे कमजोर। शाह झांकते है बगल, हावी रहते चोर।।बागी-दागी तंत्र को, कर देते कमजोर।शासन का इन पर नहीं, चल पाता है जोर।। तुष्टिकरण समाज में, पैदा करता भेद। बढ़ जाते हैं भेद से, आपस में मतभेद।। मैं चाहूँ मेरी बने, एक अलग पहचान। इनका उनका सा ...
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  October 28, 2017, 10:45 am
जय हनुमान महाबलवान,रक्षा करो,करों दुखों का शमन दुष्टों का दमन,नहीं किसी आदेश की प्रतीक्षा करो .............जय हनुमान....।                            तुम प्रखर बुद्धि हो,                            स्वयं सिद्ध हो।                            भक्तों क...
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  October 21, 2017, 5:57 pm
आदरणीय प्रवर बन्धुसादर नमस्ते।कुछ अपरिहार्य कारणों और कंप्यूटर की हार्ड डिस्क तथा मदर बोर्ड  के खराब हो जाने के कारण एक लम्बे समय तक आपसे सम्पर्क नहीं हो पाया, जिसका मुझे अत्यंत खेद है। धन्यबाद जहाँ तुम थे वहाँ मैं भी था,किसी पुस्तक सी प्रस्तावना सा।तमाम किन्तु...
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  September 19, 2017, 10:03 pm
समता निश्छलता और वत्सलता,हैं मित्रता क आधार। वे भाई तो नहीं होते, भाई से बढ़कर होता है उनका प्यार।              निश्छल प्रेमी जन ही मित्र बन पाते हैं,              निष्ठावान होकर वे उसे निभाते हैं।              जब सारे रिश्ते हो जाते है बेकार, &n...
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  May 27, 2017, 11:09 am
माँ जीवन का आधार,माँ ममता का भण्डार।नहीं माँ जैसा कोई उदार, कैसा भी हो बच्चा करती प्यार। माँ सुख बच्चों को देती, बलायें उसकी ले लेती। नहीं माँ की ममता का मोल, नहीं उसके स्नेह का तोल।माँ कष्ट में बच्चे को पाती, भूख प्यास उसकी उड़ जाती। नहीं माँ की करुणा का अन्त,...
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  May 13, 2017, 12:47 pm
जिया जाता नहीं मरा जाता नहीं,अफसाना मौत का कहा जाता नहीं। सोचा था मौत तो हमराह है, चाहेंगे जब आ जायेगी। नहीं बनेगी बेवफा,नहीं महबूब सी तड़पायेगी।दिल घबड़ा उठा सांसें लगी डूबने,लगता है अब मौत आयेगी।ले जायेगी हम को साथ अपने,सभी दुश्वारियों से बचायेगी।नाते रिश्ते वा...
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  May 5, 2017, 10:25 pm
वे भ्रष्टाचारी हैं भ्रष्टों से अनुबंधित हैं, भ्रष्टाचार के जितने भी प्रकार हैं सबसे संबंधित हैं। वे राजनीति में थे शक्तिपुंज,बदले हालातों में हो गये हैं लुंज-पुंज। लोकतंत्र के मेले में जनादेश खंडित है। भलों से रखते थे दुराव, बुरों का करते थे बचाव। वे कर पा...
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  April 29, 2017, 10:30 pm
मारी नैन कटारी सैंया ने मारी।          नैन कटारी सैंया ने मारी,          सीधे दिल में मेरे उतारी।          ऐसी घात करी जुल्मी ने,          सह नहीं पाई मैं बेचारी।मैं मर गई दरद की मारी......सैंया ने..............।          सैंया ने मोहे दुख दीनों,          नैन...
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  April 14, 2017, 10:39 pm
है जन्म अनिश्चित मृत्यु शाश्वत सत्य है ,नहीं कुछ भी स्थिर सब अनित्य है।जैसा जिसका भोग है रहता है वह साथ।जाने की बेला में चल देता है पैदा कर निर्वात।नहीं आत्मा का कोई होता रिश्ता नहीं कोई नाता,इस संसार के रंगमंच पर शरीर ही हर किरदार निभाता।सब हैं सब कुछ जानते नहीं कोई अन...
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  April 3, 2017, 11:42 am
एक नन्हीं सी चिरैया,छोटी सी प्यारी सी गौरैया।उमर मेरी हो गई है पचपन,याद आता है मुझको बचपन।जब देखता हूँ आँगन में,एक नन्हीं सी चिरैया........................ छोटी सी प्यारी सी..............।चूँ चूँ  करती वह आती थी,रहती थी वह शरमाती सी।डर डर कर चुगती थी दाना,वह नन्हीं सी चिरैया.......................... छोटी सी...
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  March 20, 2017, 12:30 pm
मन में उमंग लिये,सखियन को संग लिये।आई मदमाती नारि,विरज की खोरी में।                पुकारती फिरे नाम,                छोड़ूँगी नहीं आज श्याम।                चटक रंग घोरि लाई,                बौरी कमोरी में..............आई मदमाती............।कजरारे रसीले नैन,मिसरी ...
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  March 12, 2017, 10:56 am
कृष्ण ने ग्वालिन घेरी दगड़े में बहुत कियौ बदनाम मोहि-ब्रज मंडल सिगरे में।           घर घर दीन्हीं नंद दुहाई,        माखन चोर है कृष्ण कन्हाई।        नहीं तोसे कुछ कम है गैंयाँ        ग्वालिन खरिक अपने में............कृष्ण ने...........।ले गई घर मोहि लिवाइ के,माखन म...
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  March 2, 2017, 9:36 pm
दर्पण में देख कर अपना विवर्ण मुख-काँप उठा वह।उसके मन का चोर उसकी आँखों से झांक रहा था।वह मिला न सका अपनी आँखें-अपने प्रतिबिम्ब की आँखों से।घबड़ाकर बन्द कर ली उसने अपनी आँखें।उसे लगा दर्पण कह रहा था-मैं तो स्वभाववश आपका प्रतिबिम्ब दिखाता हूँ,कैसे हैं आप बिना किसी दुराग्...
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  February 18, 2017, 1:10 pm
मन भावन बसंत आयौ। जड़ जड़ात मन है गयौ चेतन- हहर-हहर हहरायौ......................... मन भावन बसंत........।            दूर भई जाड़े की ठिठुरन,            लागे करन नृत्य मयूर बन।             हुई पल्लवित डाली डाली,            खिल गये फूल महक गये उपवन। पंच शर वार कियौ र...
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  February 2, 2017, 10:07 am
बड़ा जुल्म ढाया पड़ गये थे-संकट में प्राण हमारे।      गर्मी से रक्षा करने का,      आभार किया था।      मेवा मिष्ठान आदि से,      सत्कार किया था।तेरे स्वागत को रंग रोगन से-अपने घर द्दार संवारे----------------- जाड़े अब---।      गुन गुनी धूप में हम-      बदन सेका करते थे। ...
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  January 26, 2017, 10:45 pm
दुश्वारियों भरी है रात,पूस की मनहूस रात।           सर्दी यह पूस की बहुत ही सताती है,           रोके नहीं रूकती सरकती ही आती है।           रहते हैं कपड़ों से लदे फदे-          फिर भी गात कँपकपात............ पूस की...........।जाड़े में नहीं कोई आता है,नहीं कोई जाता है।न...
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  January 6, 2017, 11:22 am
मेरे दिल की लगी आग को आंचल से हवा दे दी,बीमार विस्मिल यार को मरने की दवा दे दी।             तुम्हारे तंग दिली का नहीं था पता,             हम मर मिटे नजरें मिलाने पर।             सलीव पर लटका दिया दिल अपना,             तुम्हारे मुस्कराने पर।तुम संग ...
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  December 24, 2016, 9:27 am
ऐसे कैसे तुम जाओगे!नहीं हुआ अभी तक कुशल क्षेम,नहीं हुई कोई बात। नहीं कही अपनी नहीं सुनी हमारी,दुख के कैसे झेले झंझावत।बिना कहे मन की पीड़ा को,ऐसे ही ले जाओगे..................ऐसे कैसे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, ।कहते हैं कहने सुनने से,दुख कम हो जाते हैं।जीने का हौसला बढ़ जाता है,गम बेदम हो जाते हैं।अ...
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  December 9, 2016, 6:41 pm
पथिक तुम कौन देश से आये।रहे घूमते यों  ही निष्फल–या कोई मंजिल पाये..........................................पथिक ..... ।           ठहरो पलभर लो विश्राम ,           थकित पगों को दो विराम।           कहो हमें मन्तव्य तुम्हारा ,           बतलाओ गन्तव्य तुम्हारा। भूल गये तुम अपन...
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  November 25, 2016, 11:13 am
सरकारी आदेशानुसार,मुखिया के तौर पर लिखा जायेगा धनियाँ का नाम।अब धनियाँ होगी शीर्ष पर और रामू खिसक कर,नीचे आ जायेगा।मैं नहीं समझता इससे कुछ फर्क पड़ेगा,रामू चाहे ऊपर रहे या नीचे।राशन की लाइन में लगने को रामू तो जाने से रहा, जायेगी धनियाँ ही।चाकू ऊपर रहे या नीचे...
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  November 12, 2016, 12:26 pm
मेरे दिल में बहुत दर्द है!            यह दर्द है लोगों के मानवता भुलाने का,            नहीं दुख में किसी के काम आने का।            अपनी स्वार्थ परता के लिये नहीं लाना खयाल,            किसी के दिल ना दुखाने का। मुझे लगती है ठेस उनसे,जो इंसानियत का भुलाय...
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  November 4, 2016, 12:42 pm
अपनी सघनता और विशालता से इतराये वट वृक्ष नेदेखते हुये नफरत सेउतार दी अपनी कुछ लटें भूमि मेंजानने को जड़ों की औकातवहाँ फैला था उसकी ही जड़ों का जालउसी की सघनता सा विशाल क्षेत्र मेंवे जड़ें तो थीं पर थीं पूर्ण चैतन्यवे जकड़ी हुई थीं भूमि से औरकर रही थीं प्रदान सम...
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  October 23, 2016, 9:16 pm
गंजे को नख मत दे भगवान,खोंटते खोंटते सिर, अपना हो जायेगा लहू लुहान।       उद्दमहीन अनायास जब,       कुछ पा जाते हैं।       नहीं सोच पाते हें सदुपयोग,       सिर अपना खुजलाते हैं।खुजलाते खुजलाते सिर अपना,हो जाते हैं हैरान................... गंजे को............ ।        कर...
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  October 7, 2016, 9:59 pm
याद आता है अफसाना,शेख चिल्ली का। खम्बा नौंचना, खिसियाई बिल्ली का। नतीजा अपनी पिछली, हिमाकत का देख।पूर्व (ना) पाक है अब,सोनार बांग्लादेश। ना डाल नापाक नजर,कश्मीर-जम्मू में। टूटेगा गरूर जलेगा घर, लगेगी आग तम्बू में। देते हैं हिदायत, जा चीन या बिलायत। ले...
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  October 1, 2016, 9:46 am
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