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Blog: वेद-सार

clicks 57 View   Vote 0 Like   4:19am 11 Nov 2017 #
Blogger: Mahendra Arya
निशा मन्त्र - १ओम्यज्जाग्रतोदूरमुदैतिदैवतंसुप्तस्यतथैवैति।दूरङ्गमंज्योतिषांज्योतिरेकंयन्मेमनःशिवसन्कल्पमस्तु।( य३४/१ - यजुर्वेद )Our mind travels with amazing speed. It takes us to the unbelievable distances when we are awake. It makes us travel far and wide even when we are asleep. The mind is free of restrictions. May this mind of mine be of divine qualities and of noble thoughts!यहमनक्योंइतनाभागरहाइसकीगतिक... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   10:35am 30 Jan 2015 #
Blogger: Mahendra Arya
हिरण्मयेन पात्रेण सत्यस्यापिहितं मुखम I यो सावादित्ये पुरुषः सोसावाहम्  I  औम  खं  ब्रह्म II 17 II  तू है व्याप्त सदा इस जग में सूर्य चन्द्र ग्रह  तारों में तेरा रूप सदा दिखता  है फूलों और बहारों में यह मेरा ही अंधापन है मुझको नहीं दिखाई दे जग की झ... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   3:25am 27 Jun 2014 #
Blogger: Mahendra Arya
अग्ने नये सुपथा राये अस्मान्विश्वानि देव वयुनानि विद्वान् । युयोध्यस्म्ज्जुहुराणमेनो भूयिष्ठां  ते नम उक्तिं विधेम II 16 II हो ज्ञान के भण्डार तुम , हो दिव्य पालनहार तुम तुम कर्म सबके जानते , धन धान्य के आगार तुम हम तुच्छ प्राणी विश्व के , हैं हाथ फैलाये खड़े कर ... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   3:24am 27 Jun 2014 #
Blogger: Mahendra Arya
वायुरनिलम मृतमथेदं भस्मान्तं शरीरम् । औम् ऋतो स्मर । क्लिवे स्मर । कृतं स्मर II 15 II पञ्च महाभूतों से निर्मित तन - जिसमें तल्लीन है पञ्च महाभूतों में इक दिन मिल कर होय विलीन हैं उस क्षण को तू सोच अभी ले प्राण पखेरू जाते जब जीवन को तू उसी सोच से यूँ परिपक्व ब... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   3:22am 27 Jun 2014 #
Blogger: Mahendra Arya
विध्यां चा विध्यां च यस्तद्वेदो भयं सह । अबविध्यया मृत्युं तीर्त्वा विध्यया मृतमश्नुते II 14 II विद्या और अविद्या में बस इतना अंतर होता है मोक्ष हमेशा इस जीवन के तदनंतर ही होता है जीवन की भौतिकता को जो जीवन में ही जान गए ईश्वर  की महती सत्ता को समझो वो पह... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   3:21am 27 Jun 2014 #
Blogger: Mahendra Arya
अन्य देवाहु र्विध्याया अन्यदहुरविध्यायाः । इति शुश्रुम् धीराणां ये नस्त द्विचचक्षिरे II 13 II  कुछ कहते - सब कुछ यह जीवन जीवन को हर पल  जी लो भौतिकता में है सुख सारा भौतिकता का रस पी लो !और कहे कुछ ज्ञानी ऐसे यह जीना बेकार है ईश्वर  के चिंतन में बस सुख मिथ्... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   3:19am 27 Jun 2014 #
Blogger: Mahendra Arya
अन्धन्तमः प्रविशन्ति ये विध्यामुपासते । ततो भूय इव ते तमो य उ विध्यायां रताः   II 12 II भौतिकता का ज्ञान जरूरी किन्तु नहीं यह अंतिम छोर जीवन में आगे बढ़ने को यह तो है बस साधन डोर ज्ञान शास्त्र का भी आवश्यक किन्तु नहीं यह पूरण इष्ट चिंतन बढ़ता स्वाध्याय से चि... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   3:18am 27 Jun 2014 #
Blogger: Mahendra Arya
सम्भूतिं च विनाशं च यस्तद्वेदोभयं सह । विनाशेन मृत्युं तीर्त्वा संभूत्यामृतमश्नुते II 11 II नहीं निरर्थक ये जग जीवन ना ही सृष्टि अपार है नर का तन मन पाया हमने प्रभु का ही उपकार है जीवन के इन भोगों से हम जीवन नैया पार करें मन में इतना ज्ञान भरा हो मृत्यु से ... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   3:17am 27 Jun 2014 #
Blogger: Mahendra Arya
अन्यदेवाहुः सम्भवादन्यदाहुरसम्भवात । इति शुश्रुम् धीराणां ये नस्त्द्विचचक्षिरे II 10 II अध्ययन करे इस सृष्टि का इस धरा का , और वृष्टि का जो खोजते आरोग्य को हर वस्तु  को हर भोग्य को उपदेश देकर ज्ञान का उपकार कर इंसान का अध्यात्म को कुछ मानते ईश्वर को ज... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   3:15am 27 Jun 2014 #
Blogger: Mahendra Arya
अन्धन्तमः प्रविशन्ति ये सम्भूति मुपासते । ततो भूय इव ते तमो य उ सम्भूत्यां रताः II 9 II बस प्रकृति  को ही जानते बस सत्य उसको मानते जो पूजते जड़ प्रकृति कोसच मानते इस प्रवृति को वो डूबते संसार में वो डूबते अंधकार में !जो ढूंढते हैं सृष्टि में अपनी ही कल्पित ... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   3:14am 27 Jun 2014 #
Blogger: Mahendra Arya
स पर्य गाच्छुक्रम्कायमव्रणमस्नाविरं शुद्धमपापविधम । कविर्मनीषि परिभूः स्वयम्भू र्याथातथ्यतोर्थान् व्यदधाच्छाश्वतीभ्यः समाभ्यः  II 8 II                               हर जगह छायाहुआवह, पर हमें दिखता नहीं पहुँच... Read more
clicks 74 View   Vote 0 Like   3:12am 27 Jun 2014 #
Blogger: Mahendra Arya
यस्मिन्सर्वाणि भूतान्यात्मैवाभूद्विजानतः । तत्र को मोहः कः शोकः एकत्वमनुपश्यतः  II 7II One who is in full knowledge and spiritual wisdom – the whole world becomes one and a part of the Supreme Lord; for him there is no illusion or delusion nor is there any sorrow.                                   क्या मोह करूँ क्या शोक करूँ सब कुछ मेरा सब कुछ तेरा जब भेद नहीं मतभेद नहीं फिर रागनह... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   9:01am 19 Jun 2013 #
Blogger: Mahendra Arya
यस्तु सर्वाणि भूतानि आत्मन्ने वानुपश्यति I सर्व भूतेषु चात्मानं ततो न विचिकित्सति  II 6 II One who perceives all living beings in Him, the Supreme Lord, and the Supreme Lord pervading in all living beings- will never drift away from the reality of the world hence will never do any sinful act and will not nurture any hatred for anyone.               सब मुझ में हैं मैं सब में हूँ सब उसमें हैं मैं उसमें हूँ फिर मैं क्या हूँ फ... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   8:59am 18 Jun 2013 #
Blogger: Mahendra Arya
तदेजति तन्नैजति तद्दूरे तदु अन्तिके I तदन्तरस्य सर्वस्य तदु सर्वस्यास्य बाह्यतः  II 5 II  He, the Supreme Lord, moves all without moving himself; is extremely far yet extremely near; he is inside all yet outside everyone.                  वह चल रहा , वो चलायमान वो थमा हुआ है विद्यमान जो चला रहा ब्रह्माण्ड को जो जानता हर कांड को जो है दूर यूँ दिखता  नहीं व... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   8:57am 17 Jun 2013 #
Blogger: Mahendra Arya
अनेजदेकम् मनसो जवीयो नैनद्दवा आप्नुवन् पूर्वमर्षत् । तध्दावतो न्यानतेति  तिष्ठ्त्त स्मन्न्पो मातरिश्वा दधाति II 4 II  He, the Supreme Lord  does not move, yet he is faster than even mind; he can never be felt by human senses because he is way ahead of their capabilities; he remains static yet he overtakes all those sprinters with great speeds; only the soul can get the knowledge of all his actions with their efforts.तीव्र है गति आँधियों की , तीव्रतर ... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   8:54am 16 Jun 2013 #
Blogger: Mahendra Arya
असूर्या नाम ते लोका अन्धेन तम्सवृताः । तान्स्ते प्रेत्यापि गछ्छन्ति ये के चात्महनो जनाः  II 3 II  Those who kill their conscience are destined to go into the blind dark world of Asurya-loka – the region without any sun and its light and energy.मार कर जो व्यक्ति अंतरात्मा भूल जाते देखता परमात्मा जान कर भी कर रहे दुष्कर्म जो असुर नर पिशाच सा अधर्म जो जिनकी कथ... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   8:51am 15 Jun 2013 #
Blogger: Mahendra Arya
कुर्वन् एव इह कर्माणि जिजीविषेत् शतं समाः I एवं त्वयि न अन्यथा अस्ति , न कर्म लिप्यते नरे II (यजु. ४०/२)O man ! You wish to live for a hundred years by doing work ; but without attachment. Thus alone , and not otherwise, do your deeds. There is no other better way to live this life .कर्म करता कर चल सदा , सोच मत तू फल सदासौ बरस के यज्ञ में , बन के हविषा जल सदाकर्म के बिन कुछ ... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   8:46am 14 Jun 2013 #
Blogger: Mahendra Arya
ईशा वास्यम् इदम् सर्वम् , यत् किञ्च जग्त्यम् जगत् । तेन् त्यक्तेन् भुञ्जिथा : , मा ग्रुध : कस्य् स्वित् धनम् ।। 1 ।। (यजु. ४०/1) He, the Supreme Lord, is present in all the animate and inanimate of the world and he is providing the energy and movement to this world. One can enjoy the wealth of this world not by coveting to possess it but by being benefitted with a feeling that The Lord is the owner of it all. This conscious awareness will keep one away from worldly grief and will provide purest form of ple... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   8:44am 13 Jun 2013 #
Blogger: Mahendra Arya
औम् सः नः बन्धुः जनित स विधाता धामानि वेद भुवनानि विश्वा !यत्र देवः अमृतं आनशानाः तृतीये धमन्न ध्यैरयन्तः !! यजु - ३२/१० We are a part of him . He is the one who gives birth to us . He knows all the worlds that exist in the universe . This earth is for mortals . Those who are born and die are related to this earth. Those who cross over the cycle of birth and death are liberated and attain 'Moksha' - they become the residents of third loka . बन्धु  है, भ्रात  है, ज... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   5:08am 8 Feb 2012 #ईश्वर और हम veda yajurved
Blogger: Mahendra Arya
औम् उत्तेदानी  भगवन्तः स्याम उत  प्रपित्व उत मध्ये अन्हां !उतोदिता मघवन्त सूर्यस्य वयं देवानां सुमतौ स्याम !!यजु - ३४/३७ May we , now while praying to you, be in the divine blessing ; in the middle of the day also we may be in the divine blessing ; and the next day also when the sun rises your blessings may continue for us . May we be your loved ones and the blessed ones at all times . तेरी कृपा से दिन नया , कैसा उगा कैसा खिला वैस... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   4:25am 6 Feb 2012 #ईश-कृपा yajurved
Blogger: Mahendra Arya
औम् यस्य इमे हिमवन्तः महित्वा यस्य समुद्रं रस्य सः आहुः !यस्य इमाः प्रदिशः यस्य बाहुः कस्मै देवाय हविषा विधेम !!औम् येन धौः उग्राः पृथिवी च दृढा येन स्वः स्तभितं येन नाकः !!औम् यः अन्तरिक्षे रजसः विमानः कस्मै देवाय हविषा विधेम !!ऋग - १०/१२१/४ Whose grandeur - these snow clad mountains proclaim ; whose grandeur is proc... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   4:18am 5 Feb 2012 #ईश्वर की रचना
Blogger: Mahendra Arya
औम् न मृत्युः आसीत् अमृतं न तर्हि , न रात्र्याः अन्हः आसीत् प्रकेतः !आनोत् अवातं स्वधया तत् एकम् , तस्मात ह अन्यत् न परः किन्चन आस !! ऋग्वेद १०/१२९/२   There was neither death nor immortality then ; there was no sign of night nor of day . That one breathed without extraneous breath with his own nature . Other than him there was nothing beyond. There was no concept of time as there was no day or night. He and he alone was present then.कौन... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   10:51am 5 Dec 2011 #सृष्टि - आरम्भ
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