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Blog: धरती की गोद

Blogger: sanjay kumar garg
जिन्दगी में परेशानी-बाधायें आती रहती है, उनका सामना करने के अनेक उपाय होते हैं, जैसे चोरी होने पर पुलिस व बीमारी में डाक्टर के पास जाकर अपनी समस्याओं से निपटा जा सकता है, परन्तु जब समस्याऐं अस्भाविक रूप से बार-बार होती रहती है और उनका समाधान उपरोक्त प्रकार से नहीं हो पा... Read more
clicks 218 View   Vote 0 Like   4:04am 24 Dec 2014 #navagrahas
Blogger: sanjay kumar garg
  मौत की सजा मिलने के बाद, कुछ लिख-पढ़ पाना ही कठिनतम है। ''मौत''बड़े से बड़े रेपिस्टों, दरिन्दों तथा सब को ''मौत''बांटने वाले ''हत्यारों''तक को भी ''पागल''बना देती है, अधिकतर तो फाँसी से पहले ही मांस के लोथड़े (मृतप्राय:) हो जाते हैं, केवल उन्हें उठाकर फाँसी पर लटकाने भर की प्रक्... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   4:23am 19 Dec 2014 #autobiography
Blogger: sanjay kumar garg
वैराग्य शतकम् में भर्तृहरि आगे कहते हैं कि इस प्रकार का जीवन व्यर्थ है-‘‘निष्कलंक विद्या का अध्ययन नहीं किया, दान एवं भोग के लिये धन का उपार्जन भी नहीं किया, एकाग्रचित होकर प्रसन्न मन से माता-पिता की सेवा भी नहीं की, चंचल एवं विशाल नेत्रों वाली प्रियतमा का स्वप्न में भ... Read more
Blogger: sanjay kumar garg
वैराग्य शतकम् में भर्तृहरि ने कारुण्य और निराकुलता के साथ संसार की नश्वरता और वैराग्य की आवश्यकता पर बल दिया है। संसार एक विचित्र पहेली है-कही वीणा का सुमधुर संगीत है, कही सुन्दर रमणीयाँ दिख पड़ती है तो कहीं कुष्ठ पीडि़त शरीरों के बहते घाव तो, कही प्रिय के खोने पर बिल... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   6:42am 1 Dec 2014 #
Blogger: sanjay kumar garg
सूर्य ग्रह- ऊँ ह्नां ह्नीं ह्नौं सः सूर्याय नमः।। जप समय-सूर्य उदय     जप संख्या-7000       हवन समिधा-अर्क चन्द्र ग्रह- ऊँ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः।। जप समय-संध्या        जप संख्या-11000      हवन समिधा-पलाश मंगल ग्रह- ऊँ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः।। जप समय-2 घटी श... Read more
clicks 205 View   Vote 0 Like   7:46am 22 Nov 2014 #
Blogger: sanjay kumar garg
महाकवि भर्तृहरि की कविताएं जितनी प्रसिद्ध हैं, उनका व्यक्तित्व उतना ही अज्ञात है, जनश्रुति के आधार पर वे महाराजा विक्रमादित्य के बड़े भ्राता थे। चीनी यात्री इत्सिंग ने भर्तृहरि नाम के लेखक की मृत्यु 654 ई0 में लिखी है, उन्होने यह भी लिखा है कि भर्तृहरि सन्यास जीवन के आ... Read more
clicks 385 View   Vote 0 Like   6:49am 7 Nov 2014 #
Blogger: sanjay kumar garg
नवग्रहों का मानव जीवन पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है, इस बात में अब दो मत नहीं हैं, क्योंकि  ग्रहों के प्रभाव को वैज्ञानिक भी स्वीकार करने लगे हैं। प्रस्तुत वैदिक मन्त्रों के जप निष्फल नहीं हो सकते, ऐसा मेरा मानना हैं! व्यक्ति में जिस ग्रह से संबंधित पीड़ा हो उसे उस ग्रह ... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   6:02am 30 Oct 2014 #navagrahas
Blogger: sanjay kumar garg
     छोटे-छोटे पद्य अथवा श्लोक लिखने में भारतीय सबसे आगे हैं। उनका रीति पर अधिकार, उनकी कल्पना की उड़ान, उनकी अनुभूति की गहराई और कोमलता-सभी अत्युत्कृष्ट हैं। जिन व्यक्तियो ने ऐसे पद्य लिखे हैं उनमें भर्तृहरि अग्रणी हैं। ये शब्द पाश्चात्य लेखक आर्थर डब्ल्यू राइडर ने ... Read more
clicks 207 View   Vote 0 Like   7:37am 25 Oct 2014 #
Blogger: sanjay kumar garg
भारतीय संस्कृति एक महान संस्कृति है, इसमें न केवल जन्म से मृत्यु तक बल्कि दिन के प्रारम्भ से लेकर अंत तक की भी, महत्वपूर्ण एवं सुन्दर प्रार्थनाओं का समावेश किया गया है। मैं इनमें से दिन के प्रारम्भ की प्रार्थनों को आपके सम्मुख लेकर आया हूं, इस आशा के साथ कि ये प्रार्थ... Read more
clicks 257 View   Vote 0 Like   5:00am 13 Oct 2014 #
Blogger: sanjay kumar garg
 मेरे शहर की रामलीला आसपास के क्षेत्रों में प्रसिद्ध है। बात काफी पुरानी हैै। उस साल मैं रामलीला कमेटी में ''प्रेस सचिव''था। रामलीला के मन्चन की सारी कवरेज मैं ही विभिन्न समाचार पत्रों में भेजता था।     उस साल की रामलीला की दो विशेषताऐं थी-पहली मथुरा की रामलीला मंडली, द... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   9:30pm 4 Oct 2014 #
Blogger: sanjay kumar garg
सौरभ एक शिक्षक होने के साथ-साथ एक अच्छा लेखक भी था। ज्योतिष, वास्तु, तन्त्र-मन्त्र आदि उसके लेखन के प्रिय विषय थे। रात के दो बजे थे। सौरभ एक जन्मपत्री का अध्ययन कर रहा था। वह संसार की सुध-बुध खोये एक जातक की कुण्डली में खोया था। उसका सूक्ष्म शरीर सुदूर अंतरिक्ष मेें मंड... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   7:28am 24 Sep 2014 #
Blogger: sanjay kumar garg
बात कुछ महीनों पहले की है है, मैं सुबह लगभग 10 बजे निकटवर्ती कस्बे में सिथत अपने विधालय, स्कूटर से जा रहा था। आधा रास्ता तय हो चुका था। तभी मैंने दूर से देखा 3-4 बाइक सड़क के किनारे खड़ी हैं और सड़क के किनारे कुछ लोग जमा हैं। मैं भी जिज्ञासावश रूक गया और उन लोगों से पूछा-भाई... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   5:27am 8 Sep 2014 #
Blogger: sanjay kumar garg
घाघ और भड्डरी में अवश्य ही में कोई दैवीय प्रतिभा थी। क्योंकि उनकी जितनी कहावतें हैं, प्रायः सभी अक्षरशः सत्य उतरती हैं। गांवों में तो इनकी कहावतें किसानों को कंठस्थ हैं। इनकी  कहावतों के अनेक संग्रह मिलते हैं. परन्तु इनमें पाठांतरों की भरमार है। इसी कारण इनकी बहुत-... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   10:20am 20 Aug 2014 #
Blogger: sanjay kumar garg
'भावना''कुतर्क'के सामने हार गईं थी, क्योंकि वो अपनी ‘ईश्वर'रूपी ‘भावना'को शब्दों में व्यक्त नहीं कर पायीं थीं। 'कुतर्क'जोर-जोर से अटठ्हास कर रहे थे।कहां है तुम्हारा "ईश्वर"बुलाओ? नही तो शर्त के अनुसार अपनी चोटी-जनेऊ काट डालो!ये 'कलिकाल'का शास्तार्थ था। पूरा सभागार ठहाको... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   9:12am 1 Aug 2014 #
Blogger: sanjay kumar garg
पिकनिक मनाने आये कुछ छात्र नदी के बहाव में बह गये थे।  उनमें से कुछ छात्रों के शव मिल गये थे, बाकि छात्रों की खोज चल रही थी। किसी के जीवित रहने की संभावना न्यून थी। शवों को खोेजने के लिए अनेक टीमें लगायी गयी थीं। नदी का जल रोक दिया गया था ताकि शवों को खोजने में परेशानी न ह... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   6:59am 24 Jun 2014 #
Blogger: sanjay kumar garg
हाँ! जी खाना लग गया है! आ जाईये! रोहित की पत्नि ने रोहित को आवाज लगाई!रोहित आकर खाना खाने लगा।तभी उसके दो साल के बेटे ने पोट्टी (लेट्रीन) कर ली। रोहित को पता चलते ही ऊबकाई आने लगी और वह ऊबकाई लेता हुआ तेजी से वाॅशवेसन की ओर दौड़ पड़ा।रोहित की यह एक ‘‘मनोवैज्ञानिक‘‘ समस्या ... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   9:57am 16 Jun 2014 #
Blogger: sanjay kumar garg
अफवाहों से मनुष्य का पुराना रिश्ता रहा है, क्योंकि मनुष्य को कहानी-किस्से सुनने व घढ़ने में आनन्द आता है। संसार का इतिहास एक से एक बढ़कर अफवाहों से भरा पड़ा है, कहा जाता है कि अफवाहों के सिर-पैर नहीं होते परन्तु इनकी गति तीव्रतम होती है। मनोविज्ञान की भाषा में अफवाहो... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   7:14am 2 Jun 2014 #
Blogger: sanjay kumar garg
पाठकजनों!! "जिन्दगी"हमें "र्इश्वर"का दिया हुआ एक सुन्दर पुरस्कार है। हर इन्सान अपनी मानसिक स्थिति के अनुसार "जिन्दगी"को भिन्न-भिन्न रूपों में देखता है। मैंने अपने इस ब्लॉग में आपके ज्ञानार्थ  कवि-शायरों की 'कविताओं'व 'शेरों'का संकलन किया है, जो अपने-अपने अन्दाज में "जिन्... Read more
clicks 271 View   Vote 0 Like   11:08am 26 May 2014 #
Blogger: sanjay kumar garg
वैवाहिक जीवन का पहला पड़ाव- नयी-नयी शादी हुर्इ है, "पतिदेव"प्रात: सेविंग कर रहे हैं तभी उनको ब्लैड लग जाता है। आहs की हल्की आवाज उनके मुंह से निकली, पत्नी किचिन से भागी हुर्इ आयी! 'डार्लिंग'ब्लैड लग गया! पति ने पत्नी से 'नार्मल'होते हुए कहा! (पत्नी जल्दी से 'डिटाल'लाती है।) अरे! ... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   7:46am 13 May 2014 #
Blogger: sanjay kumar garg
"ज्यादा खाये जल्द मरि जाय, सुखी रहे जो थोड़ा खाय। रहे निरोगी जो कम खाये, बिगरे काम न जो गम खाये।"ऐसी अनेक कहावतों से हमें जिन्दगी के विभिन्न पहलुओं का सटीक मार्गदर्शन मिलता है। घर के बुजुर्ग ऐसी अनेक कहावतों से, समय-समय पर हमारा मार्गदर्शन करते रहते हैं। कान्वेन्ट विद... Read more
clicks 277 View   Vote 0 Like   10:45am 25 Apr 2014 #
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