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Blog: यु(-_-)राज

Blogger: gr dixit
हो गये समंदर भी पराये,नदियों पे उनका डेरा है, मेरा तो रब भी न रहा,बस परछाई का सहारा हैं। फाड़ कर धरती,उगा लाया था सोना, छीन लिया हमसे,उस पर कहाँ हक हमारा हैं। बहती हैं नदियाँ वैसे तो मेरी भी वस्ती से, मगर कहाँ हक मेरा,हमें तो गंदे नालों का सहारा है। दाऊ जी... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   4:24am 10 Aug 2015 #
Blogger: gr dixit
मद भरी तेरी अखियों से, हो गई मुहोब्बत है। तंग तंग तेरे शहर की गलियों से, हो गई हैं चाहत है। तेरे गोरे-गोरे गालों से,हटती नही मेरी नजरें हैं, देखकर तुझको,मुझको मिल जाती राहत है। तेरी रेशमी जुल्फों में झाँका करता सावन हैं, वारिशें हो जाती हैं स्वप्नों की,भींगा करता तनमन हैं... Read more
clicks 219 View   Vote 0 Like   1:20pm 26 May 2015 #
Blogger: gr dixit
जा रहे हो दूर,बस याद आ जाना, आखिरी मुलाकात है जरा सा मुस्कुरा देना। समझूँगा कि जिंदा था,तेरे दिल में प्यार अब भी, अपने लवों पे बस मेरा नाम ला देना। भरे नफरत से ही सही,गालियों में याद कर लेना, जी लूँगा इसी सहारे ,बस कोई ख्याब दे देना। दिन गुजर जायेगें ,रात नही कटेगी कभी स्वप्... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   4:27am 25 May 2015 #
Blogger: gr dixit
जिन्दगी को जिन्दगी जीने का सहारा मिल गया, मुझको फिर से मुस्कुराने का बहाना मिल गया। खो गया था जो चैनो-सुकूं राहों में ही कहीं, आ के दिलों में बसके अपनी मंजिल पा गया। तुम मिली तो दिल खिला,जहाँ मिल गया, मेरा तुझको पाने का ख्याब मुकम्मल हो गया। सोचता हूँ तेरी मुस्कुराहट पे ... Read more
clicks 216 View   Vote 0 Like   4:56pm 20 May 2015 #
Blogger: gr dixit
लिख दिया तुझको चाँद तो चाँद शर्मा गया, छुप गया बादलों की ओट में,अंधेरा छा गया, चाँदनी थी कुछ इतराई बुरा मानकर, एक चातक रात भर राह तकता रह गया, कोई कवि लिए कागज और कलम साथ था, कोई भाव न बना ,खाली कागज रह गया, रात भर ताकता रहा राह मैं नींद आने की, वो न आई,वक्त मालूम नही कहाँ निकल ग... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   11:36pm 18 May 2015 #
Blogger: gr dixit
हुई चाहत कुछ इस तरह तुमको ख्याबों में खोजते हैं, रोज देखते हैं तुम्हारी यादों के सपने, दिन रात बस तुम्हें ही सोचते हैं, हाल मेरा दीवानगी में कुछ यूँ हो गया है, हुई मजनुओं सी शक्ल,देख कुत्ते भी भौंकते हैं देखिए लोग कैसे कैसे सितम ढाने चले आते हैं, मिलते हैं आकर मुझसे,हाल त... Read more
clicks 207 View   Vote 0 Like   2:11am 8 May 2015 #
Blogger: gr dixit
आँखो से बहते पानी का हमको भी मोल बता देना सरिता के शीतल धारा का स्पर्श करो तो बता देना सूरज की किरणों को देखो गर नजरें टिके तो बता देना जीवन की राहों पर चलकर कांटे ना चुभे तो बता देना गायत्री शर्मा... Read more
clicks 220 View   Vote 0 Like   7:34am 19 Apr 2015 #
Blogger: gr dixit
लिख रहा हूँ गज़ल,जिन्दा अहसास सेउठा के कलम चल दिया प्यार से इश्क में दिल से अच्छा कागज मिलता नही भर रहा हूँ उसे मैं जिन्दा अहसास से कुछ ख्वाहिशें हैं जगीं,कुछ ख्याब बुन लिए कुछ अनकहे प्यारे से अल्फाज से वहुत याद आती हैं,यादें सताती हैं दिल तड़प उठता है ,सिर्फ तुम्हारी याद स... Read more
clicks 217 View   Vote 0 Like   3:16am 19 Apr 2015 #
Blogger: gr dixit
दिया जलाके दरवाजे पर मैं रोज मानता दीवाली कभी तो आएगी वो आस न जाएगी खाली रोज शाम को बैठ मुंडेरे पे आती जाती सुर्ख हवाओं से पूंछा करता हूँ उनसे कहीं मिली थी क्या वो दिल बाली ??कितने सावन गुजर गए कितना पानी बरस गया न जाने कितनी बार लवों से नाम तेरा था फिसल गया खालिपन रहा हर त... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   12:43pm 17 Apr 2015 #
Blogger: gr dixit
मेरा भी नेताओं सा कुछ हाल हो गया कुर्सी पाने सी ललक और नोटों जैसा प्यार हो गया अब तो बस हर वक़्तउसी के बारे में बात करता हूँ दिन रात आने बाला सत्ता सा स्वप्न हो गया है मेरा भी नेताओं सा कुछ हाल हो गया है उसी का बखान सबसे रटा-रटाया भाषणों सा स्टार्ट करता हूँ सर्व विदित एक ही ड... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   11:50am 17 Apr 2015 #
Blogger: gr dixit
हमने इश्क किया रंगत बदल गयी काले करूटे इस चेहरे पे लालिमा आ गयी शक्लो- शूरत में बदलाव भले ही कुछ अजीब हो मगर सच में बदली जब से तुमसे चाहत हो गयी यकीन नही है मेरे यारों को क्या सच हमें चाहत हो गयी ?अब मान भी जाओ हकीकत थोड़ी सी ही सही पर ज्यादा हो गयी खैर मेरा छोडिये आप अब अपनी ह... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   11:42am 17 Apr 2015 #
Blogger: gr dixit
जल रही आग है ,जल रहा है बदन ,उठ रहा है धुयाँ ,लग रही है तपन ,जाने कैसा ये रोग है ,जालिम इश्क का ,खामोशियों में खोता जा रहा है मन ,कहाँ खो गए होश, न रहा जोश दुबला गया ,जो कसरती था बदन ,आज भी गलों पे रहता है हाँथ बर्षों पहले कोई इसका ले गया था चुम्बन तुमसे गले मिलके महीनो नहाये भी नही ... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   11:10am 17 Apr 2015 #
Blogger: gr dixit
इश्क की तंग गलियों से रोज हजारों चाँद निकलते हैं बिखेरते हैं चांदनी वो दिलों में अहसास भरते हैं उन्हें देखे तो लगता है जैसे कारवां-ओ –चाँद निकलता है कुछ ख्याब सजते हैं दिलों में आशिक आंह भरते है इश्क की तंग गलियों से रोज हजारों चाँद निकलते हैं जो जितना हसीं होता है वो उ... Read more
clicks 210 View   Vote 0 Like   9:57am 17 Apr 2015 #
Blogger: gr dixit
मेरी आँखों में उतर आई है तुम्हारे इश्क की रौनक खुद ही चमक उठी हैं ये अब याद आ गयी है चाहत ,बस गया है तुम्हारा अक्श इनमें कुछ इस तरह से खुद ही टपक आता है अश्क मिल जाती है राहत ,मैं रोज आइनों में ताककर ,नयनो से तुमको निहारता  हूँ लगता है जैसे तुम आ गयी हो ,होती है जब भी कोई आहाट,... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   4:03pm 14 Apr 2015 #
Blogger: gr dixit
मैं समन्दर हूँ मगर प्यासा तेरी मुहोब्बत का,लबालब हूँ मगर,बाँकि तुम्हारी चाहतों का,लाख बरसते रहें ये मेघ काले से घनघोर निरंतर मगर नही हैं सकत उनमें मेरा अधूरापन भरने का ,मैं तेरे पास आ जाऊं ,मगर फिर सोचता हूँ मजा ही कुछ और होता है मुहोब्बत में तरसने का ,मेरे खारे पण पे है ए... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   3:28pm 14 Apr 2015 #
Blogger: gr dixit
वो चाँद की मध्यम रोशनी में भी मेरे चेहरे पर आने बाले हर भावों को पहचान गयी थी ... वो मेरे साथ बैठ गयी और बोली – मैं पिताजी को मना नही कर सकती .... तुम खुद को मैनेज कर सकते हो ..हा सही है शायद .....(मेरे ये शव्द बड़े ही दावे हुए स्वर में थे )उसने मुझे गले लगा लिया ... हमारी भावनाएं बह सकती थ... Read more
clicks 218 View   Vote 0 Like   3:14am 14 Apr 2015 #
Blogger: gr dixit
वो हताश हो चुकी थी और मुझे देखे जा रही थी वो बार बार मुझसे सोरी बोलती रही मगर मैं तो नौटंकी करने में व्यस्त बना रहा |वो फस्ट-एड बोक्स उठा लायी थी मगर में उसे क्या दिखता ...|उसने मुझे सौरी सौरी बोलते हुए गले लगा लिया ..शायद यहाँ से मेरा काम आसान था |मैं उससे लिपट गया और लिप्त रहक... Read more
clicks 220 View   Vote 0 Like   3:21pm 12 Apr 2015 #
Blogger: gr dixit
शायद यही कोई नियम थे जो हमारे बीच बिना बोले ही बन गए थे और हम उन्हें पूरी सिद्दत के साथ समझ भी रहे थे |और हम उन नियमो का पालन भी कर रहे थे |हमारी आपसी समझ की बदौलत ही हमारी मुहोब्बत आज तक जिन्दा रहने में सफलता प्राप्त कर चुकी थी|शायद मुहोब्बत जिन्दा रहने की दो वजहें और भी थी ... Read more
clicks 218 View   Vote 0 Like   2:07am 3 Apr 2015 #
Blogger: gr dixit
मैं दौड़ कर उसके पास गया उसे उठाया और उसको सही करके वापस उसमें उसके कवर को साजोंने लगा| मगर तभी मेरी नजर उसके पिछले हिस्से में लिखी हुयी पंक्तियों पर गयी जिनको पढ़कर अचानक ही मेरी वो डायरी मेरे लिए कितनी खास बन गयी वो पंक्तियाँ भले ही कोई श्लोक या गीता के किसी संबाद का अर्थ... Read more
clicks 214 View   Vote 0 Like   3:52am 31 Mar 2015 #
Blogger: gr dixit
है हवाओं में आज खास क्या ,जो इतना इतरा रही है ,चल रही है वो मंद मंद ,मुझे यादों में उलझा रही है ||वर्षों बीत चुके हैं कॉलेज लाईफ की सिर्फ यादें ही बची हैं न जाने कभी कभी हवा के कुछ झोंके आकर एक सुखद एहसास दर्ज करा जाते हैं और जेहन में एक सुनहरी सिरहन दौड़ जाती है |आज भी मेरे साथ क... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   7:41am 30 Mar 2015 #
Blogger: gr dixit
जो ये आंखे न होती,तो जहाँ का मजा न होता, मुझको मेरा ही,कभी दीदार न होता।सोचता रहता और सिर्फ सोचता ही रहता, मुझको मेरा अपना अहसास न होता। दुनियाँ जहाँन के बीच रहने को कोई किरदार न मिलता,हर रात गुजरती वीरान सी,हर रोज मेरा किरदार मरता। किसी वीरान से खण्डहर में पडा होत... Read more
clicks 205 View   Vote 0 Like   5:00pm 7 Mar 2015 #
Blogger: gr dixit
ये फूल ये पंखुडिण्यां ये कोमल प्यारी तितलियाँ ये बसंत प्यारा सावन कौन मुझसे रहता जुदा है, ये राखी होली दीवाली ये ईद रमजान कौन सा त्योहार मेरे बिना है, मैं वेटी हूँ चमकती हूँ शक्तिपुंज सी, तुम्हारे घरो में तभी तो उजाली है, हैं अंधेरा वहाँ जहाँ मैं नही, भले सूर्य की कित... Read more
clicks 219 View   Vote 0 Like   1:34pm 7 Mar 2015 #
Blogger: gr dixit
मनवा तेरी शरण में// दिलवा तेरी शरण में,// सिर्फ जान है बाकीं हममें// साँस तलक बसी है तुझमें// डॉट सोनल... Read more
clicks 229 View   Vote 0 Like   6:25am 1 Mar 2015 #
Blogger: gr dixit
कुछ ख्यालात मुहोब्बत के पनपने से लगे थे।वो शायद दिल ही दिल में उसको प्रेम करने लगा था।ईधर ममता को भी बाहरी हवाओं के असर ने बाँध लिया और उसने अपनी आजादी का लाभ लेते हुए स्वच्छ सुन्दर भावनाओं के आकाश में उढान भरने के लिए अपने पंख फैलाने शुरु कर दिए थे। इसी दौरान ममता के बड... Read more
clicks 210 View   Vote 0 Like   11:11am 27 Feb 2015 #
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