Deprecated: mysql_connect(): The mysql extension is deprecated and will be removed in the future: use mysqli or PDO instead in /home/hamariva/public_html/config/conn.php on line 13
Mahendra's Blog (मेरी हिंदी कवितायेँ ) : View Blog Posts
Hamarivani.com

Mahendra's Blog (मेरी हिंदी कवितायेँ )

ग़र देख किसी दुखियारे को ऐसे किस्मत के मारे को कुछ दर्द सा दिल में हुआ नहीं तेरी आँख से आंसू बहे नहीं फिर होकर के भी ये नदियां क्या फर्क पड़ा कि  बही न बही !फिर तेरा होना न होना जैसे होकर भी न होना बस अपनी खातिर ही जीना बस अपनी खातिर ही मरना क्या मोल तेरी इन साँसों का क्या फर्...
Mahendra's Blog (मेरी हिंदी कवितायेँ )...
Mahendra Arya
Tag :
  September 24, 2017, 10:16 am
विश्व से सम्बन्ध अपने , पर पडोसी क्रुद्ध क्यों है देश सब कुटुम्ब हैं, सरहद पे लेकिन युद्ध क्यों है ?भाइयों में बाँट होती , माँ बँटी इस देश में थी दंश माँ के दर्द का ,अब तक गला अवरुद्ध क्यों है ?कुछ गलत हरगिज़ हुआ था , जब लिया ये फैसला था फैसले लेकर ग़लत भी , वो बने प्रबुद्ध क्यों ह...
Mahendra's Blog (मेरी हिंदी कवितायेँ )...
Mahendra Arya
Tag :
  July 18, 2017, 9:21 am
थक गया है आदमी इक खोज से मर रहा क्यूँ ख्वाहिशों के बोझ से तब से भागा फिर रहा हर रोज ये चल पड़ा था पैर से जिस रोज से जिंदगी की मौज  पाने के लिए भिड़  रहा हर सू दुखों की मौज से चाहते हैं अमन की सुकून  की लड़ रहा है नफरतों की फ़ौज से                     &nbs...
Mahendra's Blog (मेरी हिंदी कवितायेँ )...
Mahendra Arya
Tag :
  July 17, 2017, 2:26 pm
राजनैतिक छुआछूत छुआछूत हमारे देश में हमेशा से विध्यमान है कुछ सामाजिक अंधविश्वासों से कुछ धार्मिक रीति रिवाजों से कोई जातिभेद के कारण  परेशान है छुआछूत हमेशा से विध्यमान है !लेकिन एक छुआछूत ऐसा भी है जो पहले नहीं था , लेकिन अब है इसकी खास बात -जो कभी अछूत नहीं थ...
Mahendra's Blog (मेरी हिंदी कवितायेँ )...
Mahendra Arya
Tag :
  July 16, 2017, 11:04 am

अलग थलगमेरे एक मुस्लमान दोस्त ने मुझ से पूछा -आखिर हम भी भारतीय हैं ,यहीं पैदा हुए , यही पढ़े , यहीं बड़े हुए फिर भी हम यहाँ के समाज में अलग थलग पड़  जाते हैं ऐसा क्यों ?मैं सोच में पड़ गया ;फिर मैंनेपूछा -क्या तुम अलग थलग हो ?उसने कहा - मेरी बात नहीं कर रहा मैं बात कर रहा हूँ - हमारी ...
Mahendra's Blog (मेरी हिंदी कवितायेँ )...
Mahendra Arya
Tag :
  May 30, 2017, 9:33 am
हारे , थके , पिटे हुए देश तुम तुम्हे आत्मग्लानि क्यों नहीं होती जिस देश से भीख मांग कर अलग हुए उस देश के साथ लड़ते रहते हो लड़ते भी कहाँ हो , कायर जो ठहरे चूहों की तरह बिल से निकलते , हो कुतरने के लिए बात करते हो मजहब की मारते हो कश्मीरियों को बनते हो उनके रहनुमा पत्थर के खिलोने&...
Mahendra's Blog (मेरी हिंदी कवितायेँ )...
Mahendra Arya
Tag :
  May 18, 2017, 9:44 am
विपक्षी दलों की एकता आपने भी पढ़ा होगा की दो दिन पहले नितीश कुमार  श्रीमती सोनिया गाँधी से मिलने गए । मुद्दा था - राष्ट्रपति चुनाव में पूरा विपक्ष एक होकर अपना उम्मीदवार उतारे। सब कुछ तो मीडिया को भी पता नहीं होता। ये रही अंदर की बात -नितीश - सोनिया जी , आज मैं एक खास मुद...
Mahendra's Blog (मेरी हिंदी कवितायेँ )...
Mahendra Arya
Tag :
  April 22, 2017, 9:48 am
सोलह का साल बड़ा बेमिसाल था रोज हो रहा कुछ न कुछ कमाल था !म से जुड़े लोग - बड़े शोर में रहे मोदी , ममता , माया, मुलायम जोर में रहे महबूबा बन सकी न किसी की भी महबूबा इतना उसके दिल में हर पल मलाल था अ से बने नाम थे बस दाल दल रहे अखिलेश, अमित, अमर सिंह चाल चल रहे अरविन्द जंग छेड़ते रहे...
Mahendra's Blog (मेरी हिंदी कवितायेँ )...
Mahendra Arya
Tag :
  January 1, 2017, 10:57 am
मन की बात ये साल यूँ जा रहा हैजैसे की ५०० और हजार के नोट !एक साथ ही दोनों का विसर्जन३१ दिसंबर को !फिर नया साल आएगापता नहीं क्या नया लाएगासांता क्लॉज की तरह टीवी पर आएंगेमोदीजी कुछ बतलायेंगे !दिल थाम कर सुननाखोलेंगेअपना पिटारासबकी सुनेंगे और सुनाएंगेकौन जीताकौन हारा...
Mahendra's Blog (मेरी हिंदी कवितायेँ )...
Mahendra Arya
Tag :
  December 25, 2016, 9:58 am
पाकिस्तानपरजोहुआवोसर्जिकलस्ट्राइककारिहर्सलथा८नवम्बरकोजोहुआवोअसलथा !घरबैठेहीसबकेयहाँरेडपड़  गयीडिनरपरन्यूज़देखनेवालोंकीभूखमरगयीछापाटीवीपरबोलकेहीमारदियादारुवालोंकानशा  उतारदियाउसरातलोगगिनतेरहेहजारऔरपांचसौकेछुपाकरजोबचायेथेमियांबीवीनेएकदुसर...
Mahendra's Blog (मेरी हिंदी कवितायेँ )...
Mahendra Arya
Tag :
  November 27, 2016, 8:07 pm
...
Mahendra's Blog (मेरी हिंदी कवितायेँ )...
Mahendra Arya
Tag :
  November 1, 2016, 11:36 am
नमनरंगोली है वहां , रंगोली है यहाँ कभी होली है वहां , कभी होली है यहाँ बारूद है वहां , बारूद है यहाँ बम फटते  हैं वहां , बम फटते हैं यहाँ जुआ भी है वहां , जुआ भी है यहाँ प्राणों का दांव वहां , पैसो का दांव यहाँ अंतर बस इतना है , अंतर बस इतना है सीमा पर वो खड़े , शहरों में हम पड़े दिवा...
Mahendra's Blog (मेरी हिंदी कवितायेँ )...
Mahendra Arya
Tag :
  October 31, 2016, 1:25 pm
चाहिए प्रमाण ?हम ने लड़ा दिए प्राण तुम्हे चाहिए प्रमाण इस बार नहीं दे सकेंगे क्योंकि इस बार हम में से कोई नहीं मरा उनके जो मरे उन्हें हम ला नहीं पाए। ऐसी अग्नि परीक्षा तो सीता ने भी नहीं दी थी हमसे हमारे जीने का हिसाब मांगते हो जो आज से पहले किसी ने नहीं माँगा तुम तोपों में ...
Mahendra's Blog (मेरी हिंदी कवितायेँ )...
Mahendra Arya
Tag :
  October 5, 2016, 5:39 pm
मैंकिसमुंहसेआज़ादीतेरीबातकरूँमैंकैसेमानूँदेशमेराआज़ादहैअब !गोरे  अंग्रेजोंसेतोहमआज़ादहुएकालेअंग्रेजोंसेभी तो  बर्बादहैंअब !जिसमज़हबवालेमुद्देपरथादेशबंटावोहीमज़हबवालाझगड़ाफिरशुरूहुआसंसद  परहमलेकरनेवालाअफ़ज़लवोक्योंकरइकहिस्सेकावोजानेगुरुहुआ?मुम्ब...
Mahendra's Blog (मेरी हिंदी कवितायेँ )...
Mahendra Arya
Tag :
  August 15, 2016, 12:24 pm
रिश्ते वो हैं जो जन्म के कारण बनते हैं दोस्ती वो जो जीवन के कारण  बनती है सरे राह चलते कोई मिल गया दो चार बाते हुयी कुछ मैंने कही उसने सुनी कुछ उसने कही मैंने सुनी और अनजाने ही एक दोस्ती शुरू हो गयी !मैं हिन्दू था , वो मुसलमान निकला पूर्वाग्रह था - मुसलमान अच्छे नहीं होते ...
Mahendra's Blog (मेरी हिंदी कवितायेँ )...
Mahendra Arya
Tag :
  August 7, 2016, 10:41 am
कुछ सीखने के लिए अपने से बेहतर लोगों की तरफ देखो अपने से बड़े लोगों की तरफ नहीं बड़ा होना बेहतर होने की निशानी नहीं भारत बहुत बड़ा देश है सिंगापुर बहुत छोटा शायद भारत के एक शहर जितना बड़ा फिर भी भारत को सिखा सकता है बहुत कुछ !स्वच्छ्ता सुंदरता सुरक्षा देशप्रेम नागरिकता अन...
Mahendra's Blog (मेरी हिंदी कवितायेँ )...
Mahendra Arya
Tag :
  June 28, 2016, 8:15 am
आज फिर एक पुल गिरावर्षों पहले यहाँ जब ये पुल नहीं थाबहुत से लोग आते जाते थे इस चौरस्ते सेगाड़ियां , रिक्शे ,पैदल , झाका  वालेचौरस्ते के एक कोने पर था -एक सिनेमा हालगणेश टॉकीजदूसरी तरफ एक मिठाई की दुकानतीसरी तरफ एक शरबत वालाऔर चौथी तरफ एक रिहायशी मकानसब सुखी थेकिसी को श...
Mahendra's Blog (मेरी हिंदी कवितायेँ )...
Mahendra Arya
Tag :
  April 3, 2016, 11:56 am
जिंदगी कुछ बेमज़ा  सी हो गयी साँस लेना ही वजह सी हो गयी मुझसे कुछ पूछे बिना सब कुछ हुआ मेरी ख़ामोशी रज़ा सी हो गयी मुस्कुराने की वजह मिलती नहीं मुस्कराहट भी सज़ा  सी हो गयी फेफड़ों में जहर सा यूँ भर रहा जैसे ज़हरीली फ़िज़ा सी हो गयी लड़ रहा हर वक़्त कोई जिंदगी से&n...
Mahendra's Blog (मेरी हिंदी कवितायेँ )...
Mahendra Arya
Tag :
  April 3, 2016, 11:01 am
देश मांगता आजादीगद्दारों से -आजादीमक्कारों से -आजादीदेश को गाली देने वालेसब नारों से -आजादी !मुफ्तखोरों से -आजादीछुपे चोरों से -आजादीदेश का खाकर  उल्टा बोलेउन छिछोरों से आजादी !उन नेताओं से आजादीउन श्रोताओं से आजादीजेएनयू में राजनीती केकर्ताओं से -आजादी !अलगाववा...
Mahendra's Blog (मेरी हिंदी कवितायेँ )...
Mahendra Arya
Tag :
  March 24, 2016, 10:12 am
संसद कभी तालियों का जोर है कभी गलियों का जोर है संसद अब कुछ नहीं बस शोर हो शोर है। जब प्रतिपक्ष गरियाता है सत्तापक्ष सुनता है जब सरकार धमकाती है विपक्ष सर धुनता है। हर बकवास का उत्तर देने को एक नयी बकवास तैयार होती है फिर उसके उत्तर के लिए एक और बकवास की मार होती है। जो बो...
Mahendra's Blog (मेरी हिंदी कवितायेँ )...
Mahendra Arya
Tag :
  March 6, 2016, 10:40 am
वो सफ़ेद कब्रिस्तान -सियाचिनजहाँ जीवित रहना एक विजय हैसाँसे ले पाना - एक दिलासावहां !हाँ वहां , पहरा देते हैं कुछ जुझारू जवानघर की सुरक्षा से दूरपरिवार के प्यार से परेशहरों की रंगरेलियों से अनजानझेलते बर्फ के तूफ़ान !ऐसा ही तूफ़ान आया उस दिनदौड़ शुरू हुयी जीवन और मृत्यु के ...
Mahendra's Blog (मेरी हिंदी कवितायेँ )...
Mahendra Arya
Tag :
  February 15, 2016, 10:23 am
हर साल आता है एक नया साल अतीत और भविष्य के बीच एक अर्ध विराम सी ३१ दिसंबर की रात्रि !मनःस्थिति ऐसी होती है - जो बीता वो सामान्य सा था जो आएगा वो विशेष होगा। जो बीत गया वो अनुभूत है जो आएगा वो कल्पना  बस यही अंतर है। हम उस यथार्थ को भूलना चाहते है जो हमने जिया पीछा छुड़ाना चा...
Mahendra's Blog (मेरी हिंदी कवितायेँ )...
Mahendra Arya
Tag :
  January 1, 2016, 10:23 am
गूँज रही चित्कारें पेरिस मेंगलियों में  रोने की आवाजें हैंफुटबॉल जहाँ पर खेला  जाना थाजहाँ जोश दर्शकों में भर आना थाअफरा तफरी है मची वहां पर भीप्राणों को लेकर भाग रही जनतासंगीत प्रेमियों का वो मंदिर थासुर के साधन का साधन अंदर थाकानों में मिश्री घोल रहे सुर स...
Mahendra's Blog (मेरी हिंदी कवितायेँ )...
Mahendra Arya
Tag :
  November 16, 2015, 10:07 am
आइये चर्चा करेँ बिहार कीकिस की जीत कीकिस की हार की !कुछ लोग प्यार करते हैंअपनी बदनसीबी सेअपनी बदहाली सेअपनी गरीबी सेउस प्यार की ये  जीतलेकिन हार बिहार की !जाति के चुम्बक सेखींची आती जातियांमुठ्ठियाँ भिंच जातीफूल जाती छातियाँसंकीर्णता की जीतहार मुक्त विचार की !इत...
Mahendra's Blog (मेरी हिंदी कवितायेँ )...
Mahendra Arya
Tag :
  November 16, 2015, 9:34 am
हे पाकिस्तान !शर्म आती  है ये सोच करकि  तुम कभी मेरा ही हिस्सा थे !चकित होता हूँ ये याद कर केकि तुम भी अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई का हिस्सा थे !आजादी क्या मिलीतुम्हारे तो सुर ही बदल गए थेहजारों वर्षों की दासता में साथ थेआजादी में बाहर निकल गए थे ! तुम्हारा दोष नहींदोष ...
Mahendra's Blog (मेरी हिंदी कवितायेँ )...
Mahendra Arya
Tag :
  August 23, 2015, 11:24 am
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3712) कुल पोस्ट (171560)