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Blog: Mahendra's Blog (मेरी हिंदी कवितायेँ )

Blogger: Mahendra Arya
शहर लग रहें हैं शमशान की तरह मास्क आ गयी है मुस्कान की जगह शहर लग रहें हैं शमशान की तरह व्यापार ठप्प सारा  दुकान बंद है घर से ही काम चल रहा दुकान की तरह जब रूह कांपती  थी , एक मौत को सुन कर फेहरिस्त आ रही अब फरमान की तरह नजदीकियां बुरी है , ये बात चल रही अब दूरियां बनी  है , ... Read more
clicks 59 View   Vote 0 Like   3:55pm 16 May 2020 #
clicks 51 View   Vote 0 Like   3:23am 15 Apr 2020 #
Blogger: Mahendra Arya
कश्मीर भारत का मुकुट सिर दर्द बना क्योंकश्मीर का हर आदमी बेदर्द बना क्यों अंग्रेज हमें दे गए आज़ादी मुल्क की पर कर गए बंटवारे से बरबादी मुल्क की !बिखरे हुए मोती सभी माला में पिरोये सरदार ने मेहनत से दिल के घाव थे धोये कश्मीर को नेहरू अलग ही भाग दे गए इस देश को अलगाव का एक र... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   7:26am 6 Aug 2019 #
Blogger: Mahendra Arya
इस देश की बस आस है मोदी इस देश में बस खास है मोदी युग पुरुष इस विश्व का है  जो इस देश का विश्वास है मोदी नकली नेताओं को नक्कार दिया गाली देने वालों को धिक्कार दिया खुद चोर बताते मोदी जी को चोर चोरों को जनता ने  दुत्कार दिया टुकड़े टुकड़े बिखर गए भू  पर खुद को थोपा था जिन न... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   6:44am 23 May 2019 #
Blogger: Mahendra Arya
पुलठी आवन  जावनआज मन करता है चलो बच्चा बन जाएँ एक दिन के लिए बुजुर्गियत का मुलम्मा उतार  फेंके और अपने आप से सच्चा बन जाएँ !याद है न , गाँव में जोहड़ के किनारे खड़ा वो नीम का पेड़ अब भी खड़ा है , थोड़ा बूढा हुआ है , लेकिन सीधा खड़ा है चलो एक बार फिर से गलबहियां डालें उस बालसखा के ... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   5:29am 19 May 2019 #
Blogger: Mahendra Arya
कुछ मौत के व्यापारी खरीदने आये थे मौत समुद्र की राह से खरीदनी थी मौत ,तबाही ,हाहाकार चीत्कार, आहें कीमत भी थी मौत खुद अपनी पागल कुत्तों जैसी दरअसल वो आदमी नहीं थे वो थे हथियार एक ऐसे जूनून के जो बांटता है सिर्फ नफरत नफरत कभी मजहब के नाम पर कभी मुल्क के नाम पर वो अब भी नहीं र... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   11:34am 26 Nov 2018 #
Blogger: Mahendra Arya
सब कहते हैं की मैं साठ साल का हो गया ,लेकिन ये पूरी तरह सच नहीं है क्यों चौंक  गए ?साठ साल से आप मुझे देख रहें हैं ये सच है लेकिन मेरा अस्तित्व सिर्फ साठ साल से  नहीं है मेरी उम्र है पौने इकसठ साल !ये जो पौना साल है ना ,इसके बारे में सिर्फ मेरी माँ जानती है उस पौना साल में बस ... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   3:57am 15 Sep 2018 #
Blogger: Mahendra Arya
क्या स्पर्श बिन अभिव्यक्ति संभव है ?पूर्ण अभिव्यक्ति असंभव है !नवजात शिशु को माँ हाथों में लेती है सीने से लगाती है उस पर चुम्बनों की बरसात कर देती है क्या इन स्पर्शों  के बिना वात्सल्य अभिव्यक्त हो पाता ?परीक्षा में अव्वल दर्जे में उत्तीर्ण होने के बाद जब एक बेटा अपन... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   4:02am 5 Jul 2018 #
Blogger: Mahendra Arya
आखिरी दिन २०१७ का ,बीत गए बारह महीने जो शुरू हुए थे आशाओं के साथ हर दिन ही तो होता है शुरू -नयी आशाओं के साथ हर शाम देती है फैसले दिन भर की बातों पर हर दिन होता है एक मिश्रण दुःख और सुख का हर दिन होता है आशाओं और निराशाओं का कभी खुशियां मना  लेते हैं कभी दुखों को झेल लेते हैं ... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   6:15am 31 Dec 2017 #
Blogger: Mahendra Arya
कठोपनिषद कहता है -पिता द्वारा क्रोध में शापित होकर निकल पड़ा नचिकेता मृत्यु की खोज में भटकता रहा भटकता रहा किन्तु उसे मृत्यु कहीं नहीं मिली !आश्चर्य है सब जगह ढूँढा -मुंबई क्यों नहीं आया !नचिकेता !यहाँ तुम मृत्यु को नहीं ढूंढते बल्कि मृत्यु तुमको ढूंढती जहाँ जाओ वहां मि... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   3:54am 30 Dec 2017 #
Blogger: Mahendra Arya
ग़र देख किसी दुखियारे को ऐसे किस्मत के मारे को कुछ दर्द सा दिल में हुआ नहीं तेरी आँख से आंसू बहे नहीं फिर होकर के भी ये नदियां क्या फर्क पड़ा कि  बही न बही !फिर तेरा होना न होना जैसे होकर भी न होना बस अपनी खातिर ही जीना बस अपनी खातिर ही मरना क्या मोल तेरी इन साँसों का क्या फर्... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   4:46am 24 Sep 2017 #
Blogger: Mahendra Arya
विश्व से सम्बन्ध अपने , पर पडोसी क्रुद्ध क्यों है देश सब कुटुम्ब हैं, सरहद पे लेकिन युद्ध क्यों है ?भाइयों में बाँट होती , माँ बँटी इस देश में थी दंश माँ के दर्द का ,अब तक गला अवरुद्ध क्यों है ?कुछ गलत हरगिज़ हुआ था , जब लिया ये फैसला था फैसले लेकर ग़लत भी , वो बने प्रबुद्ध क्यों ह... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   3:51am 18 Jul 2017 #
Blogger: Mahendra Arya
थक गया है आदमी इक खोज से मर रहा क्यूँ ख्वाहिशों के बोझ से तब से भागा फिर रहा हर रोज ये चल पड़ा था पैर से जिस रोज से जिंदगी की मौज  पाने के लिए भिड़  रहा हर सू दुखों की मौज से चाहते हैं अमन की सुकून  की लड़ रहा है नफरतों की फ़ौज से                     &nbs... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   8:56am 17 Jul 2017 #
Blogger: Mahendra Arya
राजनैतिक छुआछूत छुआछूत हमारे देश में हमेशा से विध्यमान है कुछ सामाजिक अंधविश्वासों से कुछ धार्मिक रीति रिवाजों से कोई जातिभेद के कारण  परेशान है छुआछूत हमेशा से विध्यमान है !लेकिन एक छुआछूत ऐसा भी है जो पहले नहीं था , लेकिन अब है इसकी खास बात -जो कभी अछूत नहीं थ... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   5:34am 16 Jul 2017 #
Blogger: Mahendra Arya
अलग थलगमेरे एक मुस्लमान दोस्त ने मुझ से पूछा -आखिर हम भी भारतीय हैं ,यहीं पैदा हुए , यही पढ़े , यहीं बड़े हुए फिर भी हम यहाँ के समाज में अलग थलग पड़  जाते हैं ऐसा क्यों ?मैं सोच में पड़ गया ;फिर मैंनेपूछा -क्या तुम अलग थलग हो ?उसने कहा - मेरी बात नहीं कर रहा मैं बात कर रहा हूँ - हमारी ... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   4:03am 30 May 2017 #
Blogger: Mahendra Arya
अलग थलगमेरे एक मुस्लमान दोस्त ने मुझ से पूछा -आखिर हम भी भारतीय हैं ,यहीं पैदा हुए , यही पढ़े , यहीं बड़े हुए फिर भी हम यहाँ के समाज में अलग थलग पड़  जाते हैं ऐसा क्यों ?मैं सोच में पड़ गया ;फिर मैंनेपूछा -क्या तुम अलग थलग हो ?उसने कहा - मेरी बात नहीं कर रहा मैं बात कर रहा हूँ - हमारी ... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   4:03am 30 May 2017 #
Blogger: Mahendra Arya
हारे , थके , पिटे हुए देश तुम तुम्हे आत्मग्लानि क्यों नहीं होती जिस देश से भीख मांग कर अलग हुए उस देश के साथ लड़ते रहते हो लड़ते भी कहाँ हो , कायर जो ठहरे चूहों की तरह बिल से निकलते , हो कुतरने के लिए बात करते हो मजहब की मारते हो कश्मीरियों को बनते हो उनके रहनुमा पत्थर के खिलोने&... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   4:14am 18 May 2017 #
Blogger: Mahendra Arya
विपक्षी दलों की एकता आपने भी पढ़ा होगा की दो दिन पहले नितीश कुमार  श्रीमती सोनिया गाँधी से मिलने गए । मुद्दा था - राष्ट्रपति चुनाव में पूरा विपक्ष एक होकर अपना उम्मीदवार उतारे। सब कुछ तो मीडिया को भी पता नहीं होता। ये रही अंदर की बात -नितीश - सोनिया जी , आज मैं एक खास मुद... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   4:18am 22 Apr 2017 #
Blogger: Mahendra Arya
सोलह का साल बड़ा बेमिसाल था रोज हो रहा कुछ न कुछ कमाल था !म से जुड़े लोग - बड़े शोर में रहे मोदी , ममता , माया, मुलायम जोर में रहे महबूबा बन सकी न किसी की भी महबूबा इतना उसके दिल में हर पल मलाल था अ से बने नाम थे बस दाल दल रहे अखिलेश, अमित, अमर सिंह चाल चल रहे अरविन्द जंग छेड़ते रहे... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   5:27am 1 Jan 2017 #
Blogger: Mahendra Arya
मन की बात ये साल यूँ जा रहा हैजैसे की ५०० और हजार के नोट !एक साथ ही दोनों का विसर्जन३१ दिसंबर को !फिर नया साल आएगापता नहीं क्या नया लाएगासांता क्लॉज की तरह टीवी पर आएंगेमोदीजी कुछ बतलायेंगे !दिल थाम कर सुननाखोलेंगेअपना पिटारासबकी सुनेंगे और सुनाएंगेकौन जीताकौन हारा... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   4:28am 25 Dec 2016 #
Blogger: Mahendra Arya
पाकिस्तानपरजोहुआवोसर्जिकलस्ट्राइककारिहर्सलथा८नवम्बरकोजोहुआवोअसलथा !घरबैठेहीसबकेयहाँरेडपड़  गयीडिनरपरन्यूज़देखनेवालोंकीभूखमरगयीछापाटीवीपरबोलकेहीमारदियादारुवालोंकानशा  उतारदियाउसरातलोगगिनतेरहेहजारऔरपांचसौकेछुपाकरजोबचायेथेमियांबीवीनेएकदुसर... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   2:37pm 27 Nov 2016 #
Blogger: Mahendra Arya
नमनरंगोली है वहां , रंगोली है यहाँ कभी होली है वहां , कभी होली है यहाँ बारूद है वहां , बारूद है यहाँ बम फटते  हैं वहां , बम फटते हैं यहाँ जुआ भी है वहां , जुआ भी है यहाँ प्राणों का दांव वहां , पैसो का दांव यहाँ अंतर बस इतना है , अंतर बस इतना है सीमा पर वो खड़े , शहरों में हम पड़े दिवा... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   7:55am 31 Oct 2016 #
Blogger: Mahendra Arya
चाहिए प्रमाण ?हम ने लड़ा दिए प्राण तुम्हे चाहिए प्रमाण इस बार नहीं दे सकेंगे क्योंकि इस बार हम में से कोई नहीं मरा उनके जो मरे उन्हें हम ला नहीं पाए। ऐसी अग्नि परीक्षा तो सीता ने भी नहीं दी थी हमसे हमारे जीने का हिसाब मांगते हो जो आज से पहले किसी ने नहीं माँगा तुम तोपों में ... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   12:09pm 5 Oct 2016 #
Blogger: Mahendra Arya
मैंकिसमुंहसेआज़ादीतेरीबातकरूँमैंकैसेमानूँदेशमेराआज़ादहैअब !गोरे  अंग्रेजोंसेतोहमआज़ादहुएकालेअंग्रेजोंसेभी तो  बर्बादहैंअब !जिसमज़हबवालेमुद्देपरथादेशबंटावोहीमज़हबवालाझगड़ाफिरशुरूहुआसंसद  परहमलेकरनेवालाअफ़ज़लवोक्योंकरइकहिस्सेकावोजानेगुरुहुआ?मुम्ब... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   6:54am 15 Aug 2016 #
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