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Blog: भावनायें...

Blogger: Reetesh Gupta
आजकल मक्कार लोग बड़े परेशान हैंकमबख़्त सीधे लोग नहीं मिलतेधोखा देने की तलब हैपर धोखा खाने वाले नहीं मिलतेअपने बच्चे की नेकी से परेशान पिता बोलामास्टर जी जमाना बदल गया हैथोड़ा आप भी समझदारी दिखायेंईमानदारी हम मेनेज कर लेगेंआप तो कृपया इसे मक्कारी सिखायेंहर तरफ मक्क... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   5:23am 4 Oct 2014 #
Blogger: Reetesh Gupta
राम मेरा भाई तेरे राम सेइतना यार झगड़ता क्यों हैमेरे राम मुझे तारेंगेंतारें तुझे तेरे रघुवीरसहज-सरल सी बात है लेकिनतू फ़िर भी नहीं समझता क्यूँ हैराम मेरा भाई तेरे राम से....राग-द्वेष अपने अंतर् मेंकहाँ राम को भाते हैंमन को करते दुखीदेह को रोग नया दे जाते हैंइन्हें हराक... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   1:44pm 17 Dec 2009 #
Blogger: Reetesh Gupta
कैसे राम ने जीता रावणकैसे राम बने जगदीशशीश एक क्यूँ जीत ना पायादस सिर लेकर भी दसशीशनिश्छल मन और निर्मल ह्रदयजहाँ राम की ढाल बनेमलिन ह्रदय और कपट वहीं परदशानन का काल बनेबुद्धी-कौशल और राजनीति काजहाँ रावण ने अभिमान कियाभेज अनुज को उसे सीखनेराम ने उसका मान कियाहर बुराई... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   1:59pm 28 Jan 2009 #
Blogger: Reetesh Gupta
पाया नहीं यह ज्ञान सेसमझा नहीं विज्ञान सेयह नहीं कोई कलाजिसको तराशा ध्यान सेसंस्कारों से मिली जोयह तो बस एक भावना हैजिसने दिया विश्वास मुझकोइंसान आता है जगत मेंहाथ में क्षमता लियेकोई शिखर ऎसा नहींजिसे वो पा सकता नहीं----------आदमी कुछ भी नहींउसका पता है वह घड़ीजिसमें है ब... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   8:22pm 8 Jan 2009 #
Blogger: Reetesh Gupta
प्रश्न कुछ ऎसे हैं जिनसेरोज होता रूबरू मैंकौन हूँ क्या चाहता हूँजानने की पीर हूँ मैंइंतहानों को दिये अबसाल बीते हैं बहुतअब भी मगर ये स्वप्न मेंआकर डराते हैं बहुतज्ञान जो निर्भय बनायेपाने को गंभीर हूँ मैंकौन हूँ...राह जैसे सूर्य कीदेती है सबको उष्माचन्द्र जैसे दे रहा... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   1:47am 26 Sep 2008 #
Blogger: Reetesh Gupta
भरा पेट खाली पेट पर आसन जमायेपास रखी रोटी को पाने कीअसफ़ल कोशिश कर रहेखाली पेट से कहता हैरोटी तक पहुँचने काआसान रास्ता न चुनो मित्रभूख पर विजय हीहमारेस्वर्णिम भविष्य...भविष्य शब्द पर अचानक भरा पेट रुकाफ़ुर्ति से रोटी उठाई और बोलाहाँ तो मैं क्या कह रहा था... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   3:44pm 23 Sep 2008 #
Blogger: Reetesh Gupta
कितनी लगन से उसने जी होगी जिंदगीयूँ ही नहीं हँसते हुये यहाँ दम निकलता हैइबादतें, वो बड़ी बेमिसाल होतीं हैंइंसान जब भगवान से आगे निकलता हैजिंदगी में हार को तुम मात न समझोइंसान ही तो यारों गिरकर संभलता हैपहली नज़र के प्यार से हमको परहेज हैकभी-कभी ही साथ यह लंबा निकलता है... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   4:23pm 25 May 2008 #
Blogger: Reetesh Gupta
कर्तव्य से बड़कर जहाँ पद हैयह मान नहीं मान का मद हैजहाँ खुलती नहीं वक्त से गाँठेंघर नहीं वो तो बस छत हैकौन फ़िर लगाये वहाँ मरहमदृड़ जो सबके यहाँ मत हैंदिल दुखाये जो अगर वाणीमान लो झूठ जो अगर सच हैकद पर उसके तुम मत जानाफ़ल नहीं छाया भी रुकसत हैकैसे रहें वहाँ पर खुशियाँदर्द ए... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   1:19am 6 May 2008 #
Blogger: Reetesh Gupta
जीवन कठिन डगर हैजो साँसें नहीं हैं गहरीकैसे प्रभु मिलेगेंमन जो रहेगा लहरी~~~~~~~~~~मैनें धर्म को अधर्म के साथचुपचाप खड़े देखा हैमैं अधर्म की अट्टाहस से नहींधर्म की खामोशी से हैरान हूँ~~~~~~~~~~जहाँ छोड़ रख्खा हो उजालासबने भरोसे सूर्य केवहाँ जलता हुआ एक दीप भीकिसी सूरज से कम नहीं... Read more
clicks 211 View   Vote 0 Like   1:30pm 12 Apr 2008 #
Blogger: Reetesh Gupta
तेरी इस दुनियाँ में प्रभु जीरंग-बिरंगे मौसम इतनेक्यों फ़िर सूखे-फ़ीके लोगथोड़ा खुद हँसने की खातिरकितना रोज रुलाते लोगबोतल पर बोतल खुलती यहाँरहते फ़िर भी प्यासे लोगपर ऎसे ही घोर तिमिर मेंमेधा जैसे भी हैं लोगसत्य, न्याय और धर्म की खातिरलड़ते राह दिखाते लोगएक राम थे जिनने ह... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   5:50pm 6 Apr 2008 #
Blogger: Reetesh Gupta
मैनें देखा है रौशनी कोहाथों में अंधकार लियेअंधकार से लड़ते हुयेनिरंतर चल रहेइस संघर्ष मेंरौशनी को थकते हुएअंत में नहीं रही रौशनीहमारे बीचअंधकार आज भीवैसा ही खड़ा है~~~~~~~~~~~~~~~~~मैनें देखा है रौशनी कोहाथों में रौशनी लियेअंधकार से लड़ते हुयेनिरंतर चल रहेइस संघर्ष मेंअंधकार... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   12:00pm 5 Apr 2008 #
Blogger: Reetesh Gupta
आँसू यह अब झरता नहींकिसी को चुप करता नहींबस गाँठों पर गाँठेंयहाँ कसता है आदमीएक पल में प्राण गयेतो मुर्दा है आदमीकहता है तो रूकता नहींखुद की भी यह सुनता नहींबस छोड़कर यहाँ खुदकोसब जानता है आदमीएक पल में प्राण गयेतो मुर्दा है आदमीदेह तर्पण में लगाक्यूँ मन को यह गुनता न... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   10:36pm 23 Feb 2008 #
Blogger: Reetesh Gupta
अभिव्यक्ति से बढ़कर रखी थीअव्यक्त से आशाइंसानियत को मानकरसही धर्म की परिभाषाउसने पहलेजितना सहा जा सकता थाउतना सहाफ़िरजितना कहा जा सकता थाउतना कहापर धीरे-धीरे उसने जानागर अकेले चल पड़ातो भी मंजिलें मिल जायेंगीपर अकेले व्यक्त इनकोक्या मैं भला कर पाऊँगायह सही यहाँ मैं... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   3:03pm 10 Feb 2008 #
Blogger: Reetesh Gupta
हे केशव तुमने ज्ञान,कर्म और भक्तियोग समझाकरअर्जुन का विषाद हर लिया थापर इस कलयुग मेंतुम्हारी कोई जरूरत नहींनिज स्वार्थ में डूबे पार्थों कोयहाँ कोई विषाद नहींइस युग में तुम्हारा कर्मयोगअब सैनिक नहीं पैदा करतानाई, पंडित और शिक्षक मेंयह क्यों ओज नहीं भरताभ्रष्ट व्य... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   12:05am 5 Feb 2008 #
Blogger: Reetesh Gupta
रात हो चुकी थीदिन भर के थके पंछीसंतुष्ट एवं आनंदमग्नचहचहा रहे थे अपने घोंसलों मेंपेड़-पोधे भी अपार संतोष लियेसो रहे थे गहरी नींद मेंवहीं दूसरी ओरइंसानों की बस्ती मेंछाई हुई थी गहरी उदासीसब सोच रहे थेएक और दिन चला गया यूँ हीबाकी दिनों की ही तरहभरपूर रोशनी के साथ आया था ... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   1:29am 19 Dec 2007 #
Blogger: Reetesh Gupta
बिन्देश्वरी दुबे शहर के बड़े लोकप्रिय नेता माने जाते थे । उनके कद का कोई दूजा नेता पूरे नगर में ना था । जनता उन्हें गरीबों का मसीहा मानती थी । कालेज में छात्रों के बीच उनकी बड़ी चर्चा हुआ करती थी । राकेश भी उन्हीं छात्रों में एक था । राकेश के दादा स्वर्गीय पन्नालाल जी स्वत... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   12:25am 16 Dec 2007 #
Blogger: Reetesh Gupta
संस्कारों से मिली थीउर्वरा धरती मुझेस्नेह का स्पर्श पाकरबाग पुष्पित हो गयाभावनाओं से पिरोयासूत में हर पुष्प कोमाला ना फ़िर भी बन सकीअर्पण जिसे मैं कर सकूँहे ईश सविनय आज तुमको----प्रयास भगीरथ का यहाँहमसे यही तो कह रहाअसंभव कुछ भी नहींसत्कर्म पर निष्ठा रखेगर आदमी चलता ... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   10:04pm 29 Sep 2007 #
Blogger: Reetesh Gupta
अभी कुछ दिन पहलेकिसी अपने ने मुझसे कहाअरे अब तो आप भी हो गयेरीतेश होशंगाबादीमैं सोचने लगाअब कहाँ होती हैव्यक्ति की पहचान उसकेगाँव या शहर सेउसकी पहचानअब सिर्फ़ इससे हैकी वह आदमी है या औरतऔर हाँ उसकी उम्र क्या हैमेरा शहर जोसमय से पहले हीजवान हो गया हैमुझे बूढ़ा घोषित कर ... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   3:09am 19 Sep 2007 #
Blogger: Reetesh Gupta
कुछ देर पहले ही की तो बात हैहर तरफ़ लगा हुआ था मेलाकोई भी नहीं था मेरे अंदर अकेलामिल रही थी ह्रदय को पर्याप्त वायुमन आश्वस्थ थाऔर कान भूल गये थे सन्नाटे की आवाजफ़िर रूक रूककर आने लगीं गहरी साँसेंरह रहकर आने लगी सन्नाटे की आहटजैसे जा रहा हो कोई दूर मुझसेअचानक यह सिलसिला भ... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   9:33pm 14 Sep 2007 #
Blogger: Reetesh Gupta
मेरी रागिनी मनभावनीमेरी कामिनी गजगामिनीजीवन के पतझड़ में मेरेतू है बनी मेरी सावनीशब्द सब खामोश थेबेरंग थी मन भावनासंगीतमय जीवन बनाजो तू बनी मेरी रागिनीआँखों को जो अच्छा लगेसुंदर कहे दुनियाँ उसेसिर्फ़ सुंदर तुम्हें कैसे कहूँजो तू तो है मनमोहिनीतू है कहीं कोई डगरमैं... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   8:05pm 26 Aug 2007 #
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