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मेरी कविताएँ

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मेरी कविताएँ...
Tag :
  June 20, 2015, 3:35 pm
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मेरी कविताएँ...
Tag :
  May 7, 2015, 2:16 pm
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Tag :
  April 10, 2015, 5:55 pm
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मेरी कविताएँ...
Tag :
  March 28, 2015, 5:47 pm
सुंदर विहार नई दिल्ली में कवि सम्मेलन के दौरान काव्यपाठ करते हुएद्रोपदियों की रक्षा हेतु चीर लाया हूँव्याकुल पांडव की खातिर शमशीर लाया हूँ,कलमवीरों के आज यहां रंगभूमि का आयोजन हैतो मैं भी अपने तरकस में कुछ तीर लाया हूँ                                    ...
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Tag :शिव कुमार पाराशर
  March 4, 2015, 4:43 pm
Just Print Press calendar for 2015 with few lines on my poem....
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Tag :शिव कुमार पाराशर
  January 8, 2015, 3:18 pm
ये साल भी यादों का समंदर थमा चलाआने वाले सालों का मुक्कदर थमा चलाखुद तो हर मुकाम हासिल कर लिया इसनेऔर हम को सदियों का सफर थमा चला                                              --- शिव कुमार पाराशर...
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Tag :शिव कुमार
  January 1, 2015, 1:13 pm
सैंकड़ों सूरज अस्त हो गये पेशावर में अाजखो गई किलकारियाँ और फीके पङ गये साजदीयों में था तेल घना पर जाने ज्योति कहाँ खो गईआज अंधेरा हट नहीं रहा कब की देखो भौर हो गईलुप्त हो गई कल तक गूंजी आंगन में आवाजकितनी आँख के आंसू छूटे कितनी आँख के तारे टूटेकितनी आँखें रो नहीं पायी ...
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Tag :इंसानियत नहीं जानते
  December 17, 2014, 1:34 pm
बेटी समाज का हिस्सा है हर आहट से डर जाती हैंलिंग भेद के कारण कुछ तो पहले ही मर जाती हैंकितना शोषण हो सकता है हत्यारे जब अपने होंभ्रूणों की निर्मम हत्याएें आंखों को भर जाती हैं                                                           --- शिव कुमार पा...
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Tag :इंसानियत नहीं जानते
  December 16, 2014, 5:43 pm
केसर से महकती क्यारी हो गई खून से लालदहशत में हैं शोपियां, सौरा, मोहरा, त्रालइस धरती की पीड़ा का अब तो कोई हल निकलेसोने की चिड़िया निरंतर हो रही कंगाल                                                       --- शिव कुमार पाराशर...
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Tag :शिव कुमार
  December 6, 2014, 6:29 pm
आज शहादत शर्मिंदा है झेल रही अपमानऊंचे आसन वाले शासक फरमाते आरामकफन में लिपटा हुआ तिरंगा करता जिन्हें नमनखून में लथपथ खाकी हमसे मांग रही सम्मान.--- शिव कुमार पाराशर ‪#‎shaheedapmaan‬ ...
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  December 5, 2014, 4:26 pm
कैसे कहूँ कि रास्ते ये क्या हो गयेये मौसम भी धुआं धुआं हो गयेयूं हुआ तेरे लौट आने से मुझकोजख्म हरे और दर्द जवां हो गये...                                                ---शिव कुमार...
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Tag :
  December 4, 2014, 12:18 pm
Just Print Press is going to publish my Poem with it's Yearly Calendar for 2015....Starting lines are here:-मानव ने मानवता का पावन चोला छोड़ दिया हैपथ भ्रष्ट हुआ निकृष्ट हुआ उस राह पे खुद को मोड़ दिया हैAnd you will have to wait for more line as calendar release...
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Tag :
  November 26, 2014, 12:53 pm
मानव ने मानवता का पावन चोला छोड़ दिया हैपथ भ्रष्ट हुआ निकृष्ट हुआ उस राह पे खुद को मोड़ दिया हैदलित समाज की बेटी तो हर आहट से डर जाती हैंलिंग भेद के कारण कुछ तो पहले ही मर जाती हैंहत्यारों ने तो सूची में भ्रूणों को भी जोड़ दिया हैमानव ने मानवता का पावन चोला छोड़ दिया है...
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Tag :बेटी
  November 6, 2014, 2:49 pm
तुम्हारी आँख से टपके गवारा अब नहीं होता,जो पहले रोज होता था हमारा अब नहीं होता,तेरा यूं नाम ले ले कर गुजारे दिन बहुत मैंने,तुम्हारे नाम से लेकिन गुजरा अब नहीं होता......
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Tag :शिव कुमार
  October 27, 2014, 1:47 pm
जब इंसान कन्धों पर उट्ठे दिखते हैं तभी कुछ लोग इकट्ठे दिखते हैं                               ---शिव कुमार...
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Tag :शिव कुमार
  October 4, 2014, 5:43 pm
कल हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में बहादुरगढ में आयोजित की गई कवि गोष्ठी प्रत्येक समाचार पत्र में सुर्खियों में रही तथा कवियों के इस आयोजन को सराहा भी गया इसी संदर्भ में कुछ समाचार पत्रों के लिंक प्रस्तुत हैंhttp://epaper.bhaskar.com/detail/?id=472198&boxid=9151545250&ch=cph&map=map&currentTab=tabs-1&pagedate=09/15/2014&editioncode=398&pageno=3&...
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Tag :हिन्दी दिवस
  September 15, 2014, 2:53 pm
तेरे दर से चल कर वोमेरे दर तक आ गएे     मेरी नेकी सुन फरिश्ते      मेरे घर तक आ गऐ...               ---शिव कुमार...
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Tag :शिव कुमार
  September 2, 2014, 1:32 pm
जो हुआ है यहाँ, अकसर नहीँ होता,प्‍यार करने वालोँ का घर नहीँ होता...बंजारोँ की तरह ठिकाना है इनका,नीचे जमीँ, आसमाँ सर पर नहीँ होता...कहने को तो हसीँ मंजिल है इनकी,पर नजरोँ मेँ हसीँ मंजर नहीँ होता...काफी फासला है दर्द और सुकून मेँ,सुकूँ का पल होता है पहर नहीँ होता...पत्‍थर फेँकते...
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Tag :Posted By Shiv Kumar
  August 28, 2014, 4:12 pm
आँधी है, तुफाँ है, जलजला है इश्‍क,यकीनन एक बुरी बला है इश्‍क...परिन्‍दोँ के लिये आसमान सा है तो,गिरने वालोँ के लिये खला है इश्‍क...जीत मेँ भी हार का अहसास सा है,जैसे कि जंग ए करबला है इश्‍क...खार की राहेँ ना मंजिल का ठिकाना,एसे राहगीरोँ का काफिला है इश्‍क...नाकामयाबियोँ का सबब ...
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Tag :Posted By Shiv Kumar
  August 28, 2014, 4:11 pm
जब बेवफाई का ख्‍याल उसको आया करता है,मेरी वफा याद करके वो शर्मा जाया करता है...कभी-कभी रूठता है मुझसे बेवजह तो कभी,मेरे पास आके हाल ए दिल सुनाया करता है...एक तरफ वो है और दूसरी तरफ मैँ कह के,एक रिश्‍ता है दरमियाँ वो ये बताया करता है...कोई नाम नहीँ इस रिश्‍ते का मगर हम दम,इस रिश्...
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Tag :Posted By Shiv Kumar
  August 28, 2014, 4:10 pm
वफा की राहोँ पर चलिये देख-भाल के,फूलोँ की हिफाजत मेँ हैँ काँटे कमाल के...जिसके आने से दिल को सुकून आता है,हम तो कायल हैँ ऎसे हर ख्‍याल के...तेरे कदमोँ की आहट पर जाँ निकले,सर झुके मेरा सजदे मेँ तेरी चाल के...ये जो दौर चला है ये फिर ना आयेगा,इन यादोँ के मोती को रखना संभाल के...मेरी ह...
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Tag :Posted By Shiv Kumar
  August 28, 2014, 4:10 pm
वफा का राहोँ मेँ निशान छोङ आये,आरजू मेँ तेरी मकान छोङ आये,मुझे शिकवा खुदा से है कह के,बेगुनाह तुझे ए जान छोङ आये,तू मासूम है, तू बेकसूर है,तेरे हक मेँ अपना बयान छोङ आये,गैरोँ की बस्‍ती मेँ कैसे जीना है,तेरे लिये ये इम्‍तिहान छोङ आये,ऎसे निकले तेरी गली से हम,लगा के सारा जहान ...
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Tag :Posted By Shiv Kumar
  August 28, 2014, 4:09 pm
कई लहरेँ कई तूफान बाकी हैँ,दिल के कई अरमान बाकी हैँ...अभी तो लौ से सिर्फ ये हाथ जले हैँ,आगे और भी इम्‍तिहान बाकी हैँ...सिर पे कफन इसलिये बाँधा है,कि सीने मेँ दिल ओ जान बाकी हैँ...गैरोँ ने गवाही मेरे हक मेँ दी है,मगर दोस्‍तोँ के बयान बाकी हैँ...वक्‍त ने हर एक जख्‍म भर दिया,मगर जख्...
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Tag :Posted By Shiv Kumar
  August 28, 2014, 4:07 pm
ये कैसा चमत्‍कार हो गया,हर शख्‍स अदाकार हो गया...कूँचा ए यार मैं जो भी गया,वो ही यहाँ कर्जदार हो गया...इश्‍क दरिया का ये उसूल है,जो डूब गया वो पार हो गया...जितनी वफा की उतना हीजुदाई का हकदार हो गया...जो हुश्‍न ए दीदार कर गया,बेबस और लाचार हो गया...अपने बस का नहीँ ये काम,इतना तो एतब...
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Tag :Posted By Shiv Kumar
  August 2, 2014, 1:37 pm
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