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Blog: स्वयं शून्य

Blogger: राजीव उपाध्याय
आ गए प्रियंवद! केशकंबली! गुफा-गेह!राजा ने आसन दिया। कहा :'कृतकृत्य हुआ मैं तात! पधारे आप।भरोसा है अब मुझ कोसाध आज मेरे जीवन की पूरी होगी!'लघु संकेत समझ राजा कागण दौड़े। लाये असाध्य वीणा,साधक के आगे रख उस को, हट गए।सभी की उत्सुक आँखेंएक बार वीणा को लख, टिक गईंप्रियंवद के चेह... Read more
Blogger: राजीव उपाध्याय
चार बार मैं गणतंत्र-दिवस का जलसा दिल्ली में देख चुका हूँ। पाँचवीं बार देखने का साहस नहीं। आखिर यह क्या बात है कि हर बार जब मैं गणतंत्र-समारोह देखता, तब मौसम बड़ा क्रूर रहता। छब्बीस जनवरी के पहले ऊपर बर्फ पड़ जाती है। शीत-लहर आती है, बादल छा जाते हैं, बूँदाबाँदी होती है और ... Read more
clicks 32 View   Vote 0 Like   7:00pm 25 Jan 2020 #हरिशंकर परसाई
Blogger: राजीव उपाध्याय
मंत्री थे तब उनके दरवाजे कार बँधी रहती थी। आजकल क्वार्टर में रहते हैं और दरवाजे भैंस बँधी रहती है। मैं जब उनके यहाँ पहुँचा वे अपने लड़के को दूध दुहना सिखा रहे थे और अफसोस कर रहे थे कि कैसी नई पीढ़ी आ गई है जिसे भैंसें दुहना भी नहीं आता।मुझे देखा तो बोले - 'जले पर नमक छिड़कने... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   7:00pm 23 Jan 2020 #व्यंग्य
Blogger: राजीव उपाध्याय
अजगर करै न चाकरी, पंछी करे न काम।दास मलूका कह गए, सबके दाता राम।।प्रिय ठलुआ-वृंद! यद्यपि हमारी सभा समता के पहियों पर चल रही है और देवताओं की भांति हममें कोई छोटा-बड़ा नहीं है, तथापि आप लोगों ने मुझे इस सभा का पति बनाकर मेरे कुंआरेपन के कलंक को दूर किया है। नृपति और सेनापति ... Read more
clicks 44 View   Vote 0 Like   7:00pm 21 Jan 2020 #व्यंग्य
Blogger: राजीव उपाध्याय
शुनिचैव श्‍वापाके च पंडित: समदर्शिन:। (गीता)मेरा नाम 'टाइगर'है, गो शक्‍ल-सूरत और रंग-रूप में मेरा किसी भी शेर या 'सिंह'से कोई साम्‍य नहीं। मैं दानवीर लाला अमुक-अमुक का प्रिय सेवक हूँ; यद्यपि वे मुझे प्रेम से कभी-कभी थपथपाते हुए अपना मित्र और प्रियतम भी कह देते हैं। वैसे मैं... Read more
clicks 48 View   Vote 0 Like   7:00pm 19 Jan 2020 #व्यंग्य
Blogger: राजीव उपाध्याय
संपादक जी,इस सड़ी गर्मी में अपना तो क्‍या अमरीका और ब्रिटेन जैसे बड़े बड़ों का तेल निकल गया, महाराज। बरसात न होने के कारण हमारे अन्‍नमय कोष में महँगाई और चोरबाजारी के पत्‍थर पड़ रहे हैं, हम बड़े चिंताग्रस्‍त और दुखी हैं; पर यदि अपनी उदारता को पसारा देकर सोचें तो हम क्‍य... Read more
clicks 42 View   Vote 0 Like   7:00pm 17 Jan 2020 #व्यंग्य
Blogger: राजीव उपाध्याय
लोमड़ी पेड़ के नीचे पहुँची। उसने देखा ऊपर की डाल पर एक कौवा बैठा है, जिसने मुँह में रोटी दाब रखी है। लोमड़ी ने सोचा कि अगर कौवा गलती से मुँह खोल दे तो रोटी नीचे गिर जाएगी। नीचे गिर जाए तो मैं खा लूँ।लोमड़ी ने कौवे से कहा, ‘भैया कौवे! तुम तो मुक्त प्राणी हो, तुम्हारी बुद्धि, ... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   7:00pm 15 Jan 2020 #व्यंग्य
Blogger: राजीव उपाध्याय
अपने जमाने से जीवनलाल का अनोखा संबंध था। जमाना उनका दोस्‍त और दुश्‍मन एक साथ था। उनका बड़े से बड़ा निंदक एक जगह पर उनकी प्रशंसा करने के लिए बाध्‍य था और दूसरी ओर उन पर अपनी जान निसार करनेवाला उनका बड़े से बड़ा प्रशंसक किसी ने किसी बात के लिए उनकी निंदा करने से बाज नहीं आ... Read more
clicks 45 View   Vote 0 Like   5:03am 14 Jan 2020 #कहानी
Blogger: राजीव उपाध्याय
काजू भुने प्लेट में विस्की गिलास मेंउतरा है रामराज विधायक निवास में।पक्के समाजवादी हैं तस्कर हों या डकैतइतना असर है खादी के उजले लिबास में।आजादी का वो जश्न मनाएँ तो किस तरहजो आ गए फुटपाथ पर घर की तलाश में।पैसे से आप चाहें तो सरकार गिरा देंसंसद बदल गई है यहाँ की नखास म... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   7:00pm 10 Jan 2020 #कविता
Blogger: राजीव उपाध्याय
ये घोडरोज हैं।कभी हिरन का भ्रम पैदा करते हैंकभी घोड़े काकभी गाय काइसीलिए इन्हें नीलगाय कहा जाता है।जब लोग इनकी भोली सूरत पर रीझ करगऊ समझ बैठते हैंतभी ये घुस जाते हैं खेतों मेंचट कर जाते हैं पूरी की पूरी फसलतबाह कर देते हैंमानव श्रम और प्रतिभा की उपज।नीलगाय नाम के ओट म... Read more
clicks 34 View   Vote 0 Like   5:00am 9 Jan 2020 #सदानन्द साही
Blogger: राजीव उपाध्याय
एक दिन नदी ने अरार को उलाहना दी तुमने कभी जाना ही नहीं मेरे भीतर के रस कोसदा से कटे रहे हो मुझसे सूखे और तने रहकर आदर्श पुरुष बनना चाहते हो।अरार ने मुँह खोला मासूमियत चपल हुई मेरी प्रिय नदी मेरे सूखे और कठोर बदन के अंदर तुमने भी कहाँ झाँका ? तुम हमेशा अपन... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   5:22pm 6 Jan 2020 #रामरक्षा मिश्र विमल
Blogger: राजीव उपाध्याय
निर्धन जनता का शोषण है कह कर आप हँसे। लोकतंत्र का अंतिम क्षण है कह कर आप हँसे। सबके सब हैं भ्रष्टाचारी कह कर आप हँसे। चारों ओर बड़ी लाचारी कह कर आप हँसे। कितने आप सुरक्षित होंगे मैं सोचने लगा। सहसा मुझे अकेला पा कर फिर से आप हँसे। ----------------रघुवीर सहाय... Read more
clicks 31 View   Vote 0 Like   5:42pm 4 Jan 2020 #रघुवीर सहाय
Blogger: राजीव उपाध्याय
माँ को अपने बेटे और किसान को अपने लहलहाते खेत देखकर जो आनंद आता है, वही आनंद बाबा भारती को अपना घोड़ा देखकर आता था। भगवद् - भजन से जो समय बचता, वह घोड़े को अर्पण हो जाता। वह घोड़ा बड़ा सुंदर था, बड़ा बलवान। उसके जोड़ का घोड़ा सारे इलाके में न था। बाबा भारती उसे "सुल्तान"कह कर... Read more
clicks 28 View   Vote 0 Like   6:47pm 31 Dec 2019 #सुदर्शन
Blogger: राजीव उपाध्याय
बड़े-बड़े शहरों के इक्के-गाड़ीवालों की जबान के कोड़ों से जिनकी पीठ छिल गई है, और कान पक गए हैं, उनसे हमारी प्रार्थना है कि अमृतसर के बंबूकार्टवालों की बोली का मरहम लगावें। जब बड़े-बड़े शहरों की चौड़ी सड़कों पर घोड़े की पीठ चाबुक से धुनते हुए, इक्केवाले कभी घोड़े की नानी ... Read more
clicks 32 View   Vote 0 Like   7:47am 30 Dec 2019 #चंद्रधर शर्मा गुलेरी
Blogger: राजीव उपाध्याय
जिन्दगी की ये कहानी बहुत ही अजीबोगरीब है। इसे कहना, समझना और इस जिन्दगी में किसका कितना हिस्सा है बताना बहुत ही मुश्किल है। मुश्किल ही नहीं शायद नामुमकिन है! जिन्दगी की इस कहानी में जाने-अनजाने जाने कितने ही किरदार और भाव आते हैं और चले जाते हैं, पता ही नहीं चलता है। कुछ ... Read more
clicks 36 View   Vote 0 Like   7:17pm 24 Dec 2019 #राजीव उपाध्याय
Blogger: राजीव उपाध्याय
कचहरी में बैठकर वह लगभग रो दिया था। ऐसा मामूली कार्य भी वह नहीं कर सकता? छोटे-छोटे आदमियों से असफल सिफारिश की खिन्‍नता लिए वह शाम को स्‍टेशन की ओर टहलता गया।तभी आते-जाते लोगों के बीच दिखायी पड़ा तहसील-स्‍तर का नया ग्राम-नेता - दुबला, लंबा, मूँछें सफाचट, गेहुँआ रंग। ढीला-ढ... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   11:30pm 23 Dec 2019 #विवेकी राय
Blogger: राजीव उपाध्याय
मैं लिख नहीं पाऊँगाभव्य भूमिका मेरे गीत के प्रस्तावाना के रूप में।एक कवि सेकविता की यात्राके बीच ही है साहस कुछ कहने का।फूलों से गिर हुएइन पँखुड़ियों में से हीलगता है उचित एक कोई।प्रेम अनुगूँजित होता रहेगा उसी सेजब तक पँखुड़ी वो बालों में तुम्हारे सुशोभित हो न... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   11:30pm 20 Dec 2019 #ऑस्कर वाइल्ड
Blogger: राजीव उपाध्याय
डाकिए ने थाप दी हौले से आज दरवाजे पर मेरे कि तुम्हारा ख़त मिला। तुमने हाल सबके सुनाए ख़त-ए-मजमून में कुछ हाल तुमने ना मगर अपना सुनाया ना ही पूछा किस हाल में हूँ? कि तुम्हारा ख़त मिला। बता क्या जवाब दूँ मैं तुमको? या घर की ख़बर सुना दूँ? कि मेरे बालों की च... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   12:00am 18 Dec 2019 #राजीव उपाध्याय
Blogger: राजीव उपाध्याय
मुझको भी तरकीब सिखा कोई यार जुलाहे अक्सर तुझको देखा है कि ताना बुनते जब कोई तागा टूट गया या ख़तम हुआ फिर से बाँध के और सिरा कोई जोड़ के उसमें आगे बुनने लगते हो तेरे इस ताने में लेकिन इक भी गाँठ गिरह बुनकर कीदेख नहीं सकता है कोई मैंने तो इक बार बुना था एक ही र... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   7:48pm 14 Dec 2019 #कविता
Blogger: राजीव उपाध्याय
बे-नाम सा ये दर्द ठहर क्यूँ नहीं जाता जो बीत गया है वो गुज़र क्यूँ नहीं जाता॥सब कुछ तो है क्या ढूँढती रहती हैं निगाहें क्या बात है मैं वक़्त पे घर क्यूँ नहीं जाता॥वो एक ही चेहरा तो नहीं सारे जहाँ में जो दूर है वो दिल से उतर क्यूँ नहीं जाता॥मैं अपनी ही उलझी हुई राहों ... Read more
clicks 39 View   Vote 0 Like   12:00am 12 Dec 2019 #गज़ल
Blogger: राजीव उपाध्याय
रोज़ जब धूप पहाड़ों से उतरने लगतीकोई घटता हुआ बढ़ता हुआ बेकल सायाएक दीवार से कहता कि मेरे साथ चलो।और ज़ंजीरे-रफ़ाक़त से गुरेज़ाँ दीवारअपने पिंदार के नश्शे में सदा ऐस्तादाख़्वाहिशे-हमदमे-देरीना प’ हँस देती थी।कौन दीवार किसी साए के हमराह चलीकौन दीवार हमेशा मगर ऐस्त्... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   7:00pm 5 Sep 2019 #कविता
Blogger: राजीव उपाध्याय
माँ है रेशम के कारख़ाने मेंबाप मसरूफ़ सूती मिल में हैकोख से माँ की जब से निकला हैबच्चा खोली के काले दिल में है।जब यहाँ से निकल के जाएगाकारख़ानों के काम आएगाअपने मजबूर पेट की ख़ातिरभूक सरमाये की बढ़ाएगा।हाथ सोने के फूल उगलेंगेजिस्म चान्दी का धन लुटाएगाखिड़कियाँ हों... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   7:00pm 4 Sep 2019 #कविता
Blogger: राजीव उपाध्याय
आज सूरज ने कुछ घबरा कररोशनी की एक खिड़की खोलीबादल की एक खिड़की बंद कीऔर अंधेरे की सीढियां उतर गया…आसमान की भवों परजाने क्यों पसीना आ गयासितारों के बटन खोल करउसने चांद का कुर्ता उतार दिया…मैं दिल के एक कोने में बैठी हूंतुम्हारी याद इस तरह आयीजैसे गीली लकड़ी में सेगहर... Read more
clicks 59 View   Vote 0 Like   4:48am 4 Sep 2019 #कविता
Blogger: राजीव उपाध्याय
टीवी खोला ही था कि धमाका हुआ और धमाका देखकर मेरे बालमन का मयूर नाच उठा। बालमन का मयूर था तो नौसिखिया नर्तक होना तो लाजमी ही था। परन्तु नौसिखिए नर्तक के साथ सबसे बड़ी समस्या ये होती है कि उसे हर काम में ‘साथी हाथ बढ़ाना’ वाले भाव में एक साथी की आवश्यकता महसूस होती है। उसको न... Read more
clicks 49 View   Vote 0 Like   7:00pm 1 Sep 2019 #लघुकथा
Blogger: राजीव उपाध्याय
मैं कब कहता हूँ जग मेरी दुर्धर गति के अनुकूल बने, मैं कब कहता हूँ जीवन-मरू नंदन-कानन का फूल बने? काँटा कठोर है, तीखा है, उसमें उसकी मर्यादा है, मैं कब कहता हूँ वह घटकर प्रांतर का ओछा फूल बने? मैं कब कहता हूँ मुझे युद्ध में कहीं न तीखी चोट मिले? मैं कब कहता हूँ प्यार कर... Read more
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