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Blog: जूठी थाली

Blogger: जूठी थाली
उन जानी पहचानी सड़कों की तस्वीरों मेंएक अनजान सी भीड़ दिखाई देती है  कुछ जाने पहचाने से चेहरे तलाशने की कोशिश करता हूँऔर मिलते हैं तो महज़ उन अजनबी आँखों से बरसते हुये कुछ आँसूएक छतरी भेज रहा हूँ उस जमीन को छतरी से ढ़ाँप देनाइन आँसुओं के दाग उस पर अच्छे नहीं लगेंगे.  ... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   10:38am 1 Oct 2014 #
Blogger: जूठी थाली
अमावस में चाँद ढ़ूँढ‌ते ढ़ूँढ‌ते एक अजनबी सा मिला आकाश में कुछ अजीब से लिबास में गुनगुनाते अहसास में अपनी ज़मीन के बहुत ही पास में “कौन हो तुम?पहले कभी दिखे नहीं असमान में” बोला वो बड़ी शान से“वही तो हूँ सदियों से तो देखते रहो हो मुझे लाल पोशाक में बस फितरत आज कुछ बदली हैहरक... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   2:00am 26 Sep 2014 #
Blogger: जूठी थाली
पिछली बार जब हम मिले थे और तुम जब आँखें बंद करके खुश्बुओं को गुनगुना रही थी तब तुमसे छुपते छुपाते चोरी से उस वक्त के दो चार लमहे चुरा कर ले आया था आज बड़े सलीके से साँसों में परत दर परत कुछ सलवटें बिछाई हैं उन लमहों को सम्भाल सम्भाल कर उन परतों में छुपा दिया है किसी दिन जब ब... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   5:51am 17 Sep 2014 #
Blogger: जूठी थाली
तुम्हारे खयालों को उंडेल कर अपनी साँसों मेंबिन लफ्ज़ों की एक नज़्म बुनी थी मैं ने एक बारपलकों के तले एक मुंडेर बना कर बड़ी नज़ाकत से उसे रोपा थाआँखों की नमी से कभी सींचातो कभी ज़हन तक उसकी जड़ों को खींचा लगता है अब वो पनपने लगी हैहरी हरी सी लगती है सारी कायनात अबआँखों में चुभन ... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   12:35am 11 Sep 2014 #
Blogger: जूठी थाली
स्याही तो ना जाने कबकी सूख चुकी थी उन भीड़ भरे पन्नों मेंलेकिन पन्नों पर बिखरे अल्फाज़ ना जाने क्योंतुम्हारी नमी में भीगे हुये रेंगते ही रहे धूप दिखाई और आँच दी उनको कि शायद अब सूख जायेंकमज़ोर पन्ने और लंगड़े अल्फाज़ उस आँच में भस्म हो कर राख हो गयेपर नमी तुम्हारी चुपके से भ... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   3:26am 8 Sep 2014 #
Blogger: जूठी थाली
एक खुरदुरन सी पसीजती रहती हैस्याह रातें सासों में घुलती रहती हैं बुझी हुयी माचिस की तीलियों से उठते हुये जाने पहचाने धुयेंअजनबी सी परछाईयाँ कैनवस पर लीपते रहते हैं उन परछाईयों में एक इंद्रधनुष बोया है हथेलियों की नमी से सींचता हूँ हर रोज़ना जाने कब फूल फूटेंगेऔर ना ज... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   10:13am 6 Sep 2014 #
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