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Blog: Acchi Baate

Blogger: Manjeet Singh
राजकुमारी रोजी की खूबसूरती की हर जगह चर्चा थी | सुनहरी आंखें, तीखे नयन-नक्श, दूध-सी गोरी काया, कमर तक लहराते बाल सभी सुंदरता में चार चांद लगाते थे |एक बार की बात है | राजकुमारी रोजी को अचानक खड़े-खड़े चक्कर आ गया और वह बेहोश होकर गिर पड़ी |राजवैद्य ने हर प्रकार से रोज... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   5:30am 19 Nov 2014 #
Blogger: Manjeet Singh
अश्वत्थामा द्रोणाचार्य का पुत्र था| कृपी उसकी माता थी| पैदा होते ही वह अश्व की भांति रोया था| इसलिए अश्व की भांति स्थाम (शब्द) करने के कारण उसका नाम अश्वत्थामा पड़ा था| वह बहुत ही क्रूर और दुष्ट बुद्धि वाला था| तभी पिता का उसके प्रति अधिक स्नेह नहीं था|धर्म और न्याय... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   5:30am 18 Nov 2014 #
Blogger: Manjeet Singh
सूर्य के वर से सुवर्ण के बने हुए सुमेरु में केसरी का राज्य था। उसकी अति सुंदरी अंजना नामक स्त्री थी। एक बार अंजना ने शुचिस्नान करके सुंदर वस्त्राभूषण धारण किए। उस समय पवनदेव ने उसके कर्णरन्ध्र में प्रवेश कर आते समय आश्वासन दिया कि तेरे यहाँ सूर्य, अग्नि एवं सु... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   6:00am 17 Nov 2014 #
Blogger: Manjeet Singh
अभिमन्यु अर्जुन का पुत्र था| श्रीकृष्ण की बहन सुभद्रा इनकी माता थी| यह बालक बड़ा होनहार था| अपने पिता के-से सारे गुण इसमें विद्यमान थे| स्वभाव का बड़ा क्रोधी था और डरना तो किसी से इसने जाना ही नहीं था| इसी निर्भयता और क्रोधी स्वभाव के कारण इसका नाम अभि (निर्भय) मन्यु... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   5:00am 16 Nov 2014 #
Blogger: Manjeet Singh
इसी दिन समुद्र मंथन के समय क्षीर सागर से लक्ष्मी जी प्रकट हुई थीं और भगवान विष्णु को अपना पति स्वीकार किया था। कथा इस प्रकार है-एक बार भगवान शंकर के अंशभूत महर्षि दुर्वासा पृथ्वी पर विचर रहे थे। घूमत-घूमते वे एक मनोहर वन में गए। वहाँ एक विद्याधर सुंदरीहाथ में पा... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   5:00am 15 Nov 2014 #
Blogger: Manjeet Singh
सुकरात को जहर दिए जाने के एक दिन पहले उनके मित्र व शिष्य उनसे मिलने पहुंचे। उनके शिष्य क्रेटो ने कहा कि हम आपको यहां से भगाने आए हैं। पर सुकरात किसी कीमत पर भी भागने को तैयार नहीं हुए।सुकरात को मृत्युदंड दिया जाना था। उन्हें जहर दिए जाने के एक दिन पूर्व उनके कुछ ... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   5:30am 14 Nov 2014 #
Blogger: Manjeet Singh
पुराने जमाने की बात है। एक राजा ने दूसरे राजा के पास एक पत्र और सुरमे की एक छोटी सी डिबिया भेजी। पत्र में लिखा था कि जो सुरमा भिजवा रहा हूं, वह अत्यंत मूल्यवान है। इसे लगाने से अंधापन दूर हो जाता है। राजा सोच में पड़ गया। वह समझ नहीं पा रहा था कि इसे किस-किस को दे। उ... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   9:42am 7 Nov 2014 #
Blogger: Manjeet Singh
एक दिन एक चोर किसी महिला के कमरे में घुस गया| महिला अकेली थी, चोर ने छुरा दिखाकर कहा - "अगर तू शोर मचाएगी तो मैं तुझे मार डालूंगा|"महिला बड़ी भली थी वह बोली - "मैं शोर क्यों मचाऊंगी! तुमको मुझसे ज्यादा चीजों की जरूरत है| आओ, मैं तुम्हारी मदद करूंगी|"उसके बाद उसने अलमारी का ताला ... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   9:25am 7 Nov 2014 #
Blogger: Manjeet Singh
रामायण के सुन्दर-काण्ड में हनुमान जी के साहस और देवाधीन कर्म का वर्णन किया गया है। हनुमानजी की भेंट रामजी से उनके वनवास के समय तब हुई जब रामजी अपने भ्राता लछ्मन के साथ अपनी पत्नी सीता की खोज कर रहे थे। सीता माता को लंकापति रावण छल से हरण करके ले गया था। सीताजी को ... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   8:58am 7 Nov 2014 #
Blogger: Manjeet Singh
एक व्यक्ति के बारे में यह विख्यात था कि उसको कभी क्रोध आता ही नहीं है। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें सिर्फ बुरी बातें ही सूझती हैं। ऐसे ही व्यक्तियों में से एक ने निश्चय किया कि उस अक्रोधी सज्जन को पथच्युत किया जाये और वह लग गया अपने काम में। उसने इस प्रकार के लोगों क... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   9:58am 5 Nov 2014 #
Blogger: Manjeet Singh
आचार्य द्रोण राजकुमारों को धनुर्विद्या की विधिवत शिक्षा प्रदान करने लगे। उन राजकुमारों में अर्जुन के अत्यन्त प्रतिभावान तथा गुरुभक्त होने के कारण वे द्रोणाचार्य के प्रिय शिष्य थे। द्रोणाचार्य का अपने पुत्र अश्वत्थामा पर भी विशेष अनुराग था इसलिये धनुर्विद्या मे... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   6:02am 29 Oct 2014 #
Blogger: Manjeet Singh
अगस्त्य मुनि ने आगे कहा, "एक दिन हिमालय प्रदेश में भ्रमण करते हुये रावण ने अमित तेजस्वी ब्रह्मर्षि कुशध्वज की कन्या वेदवती को तपस्या करते देखा। उस देखकर वह मुग्ध हो गया और उसके पास आकर उसका परिचय तथा अविवाहित रहने का कारण पूछा। वेदवती ने अपने परिचय देने के पश्‍चात् ब... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   1:30am 24 Oct 2014 #
Blogger: Manjeet Singh
अगस्त्य मुनि ने कहना जारी रखा, "पिता की आज्ञा पाकर कैकसी विश्रवा के पास गई। उस समय भयंकर आँधी चल रही थी। आकाश में मेघ गरज रहे थे। कैकसी का अभिप्राय जानकर विश्रवा ने कहा कि भद्रे! तुम इस कुबेला में आई हो। मैं तुम्हारी इच्छा तो पूरी कर दूँगा परन्तु इससे तुम्हारी सन्तान द... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   1:30am 23 Oct 2014 #
Blogger: Manjeet Singh
जब श्रीराम अयोध्या में राज्य करने लगे तब एक दिन समस्त ऋषि-मुनि श्रीरघुनाथजी का अभिनन्दन करने के लिये अयोध्यापुरी में आये। श्रीरामचन्द्रजी ने उन सबका यथोचित सत्कार किया। वार्तालाप करते हुये अगस्त्य मुनि कहने लगे, "युद्ध में आपने जो रावण का संहार किया, वह कोई बड़ी बा... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   5:11am 22 Oct 2014 #
Blogger: Manjeet Singh
यूं तो भगवान हनुमान जी को अनेक नामों से पुकारा जाता है, जिसमें से उनका एक नाम वायु पुत्र भी है। जिसका शास्त्रों में सबसे ज्यादा उल्लेख मिलता है। शास्त्रों में इन्हें वातात्मज कहा गया है अर्थात् वायु से उत्पन्न होने वाला।पुराणों की कथानुसार हनुमान की माता अंजना संतान... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   10:27am 18 Oct 2014 #
Blogger: Manjeet Singh
कर्ण कुंती का पुत्र था| पाण्डु के साथ कुंती का विवाह होने से पहले ही इसका जन्म हो चुका था| लोक-लज्जा के कारण उसने यह भेद किसी को नहीं बताया और चुपचाप एक पिटारी में रखकर उस शिशु को अश्व नाम की नदी में फेंक दिया था| इसके जन्म की कथा बड़ी विचित्र है|राजा कुंतिभोज ने कुंती को पा... Read more
clicks 203 View   Vote 0 Like   10:04am 18 Oct 2014 #
Blogger: Manjeet Singh
 महाभारत का भयंकर युद्ध चल रहा था। लड़ते-लड़के अर्जुन रणक्षेत्र से दूर चले गए थे। अर्जुन की अनुपस्थिति में पाण्डवों को पराजित करने के लिए द्रोणाचार्य ने चक्रव्यूह की रचना की। अर्जुन-पुत्र अभिमन्यु चक्रव्यूह भेदने के लिए उसमें घुस गया।?उसने कुशलतापूर्वक चक्... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   9:55am 18 Oct 2014 #
Blogger: Manjeet Singh
एक बार भगवान विष्णु जी शेषनाग पर बैठे बैठे बोर हो गये, ओर उन्होने धरती पर घुमने का विचार मन में किया, वेसे भी कई साल बीत गये थे धरती पर आये, और वह अपनी यात्रा की तैयारी मे लग गये, स्वामी को तैयार होता देख कर लक्ष्मी मां ने पुछा ! आज सुबह सुबह कहा जाने कि तैयारी हो रही है?  विष... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   9:12am 18 Oct 2014 #
Blogger: Manjeet Singh
बहुत बरस पहले की बात है, चार ब्राह्मणों ने भारतवर्ष का भ्रमण करते हुए हर तरह का ज्ञान अर्जित किया । चारो एक दूसरे को अपनी सिद्धियाँ ओर गुढ़ विद्याएँ बताना चाहते थे ।   सो चारो ने जंगल मे मिलने का निश्चय किया । वहाँ उन्होंने चीते की जांघ की हड्डी मिली । एक ... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   8:34am 12 Oct 2014 #
Blogger: Manjeet Singh
एक बड़े सेठ थे, जो दिन-रात अपना कामधंधा बढ़ाने में लगे रहते थे। उन्हें तो बस, शहर का सबसे अमीर आदमी बनना था। धीरे-धीरे वे नगर के सबसे धनी सेठ बन ही गए। इस सफलता की खशी में उन्होने एक शानदार घर बनवाया। गृह प्रवेश के दिन, उन्होने एक बहुत शानदार दावत का आयोजन किया। जब सारे मे... Read more
clicks 205 View   Vote 0 Like   6:27am 12 Oct 2014 #
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