Hamarivani.com

Poems written by Meenakshi Bhasin a translator, Delhi---seeking a path of creativity

विदेशों से लो सबक देश-प्रेम काऐसे नहीं  है कि मैने अपने देश की प्रगति की दिशा में कोई बहुत बड़ा योगदान दिया हो किन्तु मुझे अपने भारत से कोई नाराजगी भी नहीं है। कई बातें ऐसी हैं जो मुझे पसंद नहीं आती, पर मेरे जहन में मेरे देश की सदैव सकारात्मक छवि ही रहती है। और न ही मैं भा...
Poems written by Meenakshi Bhasin a translator, Delhi---seeking a path of creati...
Tag :
  September 26, 2014, 4:48 pm
सभी को नमस्ते----भई सच कहुं तो मेरे लिए तो हरेक दिन ही मदरस डे होता है क्योंकि अक्सर शादी के बाद मां की जितनी याद, लड़कियों को आती है उतनी शायद ही किसी को आती हो। कहते हैं जब हम किसी के साथ रहते हैं तो हमें उसकी कीमत का अंदाजा नहीं होता। ऐसा नहीं की हम सब अपने माता-पिता को प्या...
Poems written by Meenakshi Bhasin a translator, Delhi---seeking a path of creati...
Tag :
  August 20, 2014, 5:03 pm
पिछले सात वर्षों से सरकारी नौकरी कर रही हूं। कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। मैं यह नहीं कह रही हूं कि सब सरकारी लोग एक जैसे होते हैं। किन्तु कुछ परेशानियां सभी दफतरों में एकसमान रुप से सभी झेल रहे होते हैं और तो और आस-पास भी हर जगह लोग सरकारी दफतरों में अपने कटु अनु...
Poems written by Meenakshi Bhasin a translator, Delhi---seeking a path of creati...
Tag :
  August 13, 2014, 4:58 pm
टेंशन का फैशनबन गया देखो, टेंशन का फैशनतुम संभालो खुद को, आया टेंशन का फैशन------बचपन से ही मां कहती थी, पढ़ना लिखना जरुरी हैकिसी के आगे हाथ न फैलाना, नौकरी पे जाना जरुरी हैपहले थी पैसे बनाने की टेंशनअब है पैसे के खो जाने की टेंशनबन गया देखो टेंशन का फैशनतुम संभालो खुद को आया...
Poems written by Meenakshi Bhasin a translator, Delhi---seeking a path of creati...
Tag :
  August 6, 2014, 5:08 pm
कुछ दिन पहले ही मैने पुरुषों से एक विनम्र आग्रहनामक पोस्ट के द्वारा लड़कियों की व्यथा को प्रकट करने का एक प्रयास किया था। इस पोस्ट के संबंध में मुझे मिलने वाली प्रतिक्रियाओं में मुझे बताया गया कि स्त्री एवं पुरुष दोनों ही समाज के पहिए हैं या यह पुरुष प्रधान समाज है और ...
Poems written by Meenakshi Bhasin a translator, Delhi---seeking a path of creati...
Tag :
  July 16, 2014, 4:23 pm
बहुत अजीब सा है यह समय जब इंसानियत नाम ही स्वार्थ, निर्दयता का पर्यायवाची बन के रह गया है। आजकल तो दुनिया में भगवान का रुप कहे जाने वाले, सबसे मासूम व निर्दोष माने जाने वाले बच्चों को मिड-डे के रुप में विषैला खाना खिलाया जा रहा है । सरकार की सुनें तो अक्सर ये मिड डे मील ऐसे...
Poems written by Meenakshi Bhasin a translator, Delhi---seeking a path of creati...
Tag :
  July 7, 2014, 4:44 pm
चारों तरफ देखें  या हम अपने आपको तलाशें पर बिल्कुल ईमानदारी से तो पाएगें कि हम सोचते कुछ हैं , कहते कुछ हैं और तो और करते कुछ हैं। गिरगिट को भी मात दे दी है हमने रंग बदलने में। छोटी छोटी बात को ही लीजिए अगर आपका कोई कनिष्ठ आपसे आगे बढ़ने लगता है तो आप उसके सामने तो उसकी कि...
Poems written by Meenakshi Bhasin a translator, Delhi---seeking a path of creati...
Tag :
  June 26, 2014, 4:44 pm
हर रोज दिन की शुरुआत होते ही मेरे दिमाग में ख्याली प्लाव बनने लगते हैं। अरे भई!कुछ तो हो जाए मेरा---- मतलब जो मुझे अब तक मिला है चाहे मैने उसे पाने के लिए कितने ही पापड़ बेले हों अब मेरे जीवन में उसकी अहमियत कुछ खास नहीं रही है। मेरे मन में तो अब मेला लगता है मेरे अगले टारगेट ...
Poems written by Meenakshi Bhasin a translator, Delhi---seeking a path of creati...
Tag :
  May 29, 2014, 2:29 pm
ईश्वर ने हमें रात का अनमोल उपहार दिया है ।रात का मतलब होता है कि हम आराम करें और हमारी सारी थकावट उतर जाए। मीठी सी नींद आए, नई कल्पनाओं का उदय हो और हम तैयार हो जाए एक नई सुबह के लिए एक नई ताजगी लिए बिल्कुल फ्रेश होकर । पर क्या सचमुच ऐसा होता है आपके साथ?क्या आप सुबह अच्छा सा...
Poems written by Meenakshi Bhasin a translator, Delhi---seeking a path of creati...
Tag :
  May 27, 2014, 12:32 pm
मैं अपनी तारीफ नहीं कर रहीं हूं पर कई बार मेरे साथ ऐसा हुआ कि बस में या कहीं सफर करते हुए जब कभी कभी बातों-बातों में किसी को मैने यह बताया कि मैं एक सरकारी कर्मचारी हूं तो वे हैरान हो गए । मैने पूछा- इसमें हैरान होने वाली कौन सी बात है तो उन्होंने कहा कि सरकारी लोग तो शक्ल से...
Poems written by Meenakshi Bhasin a translator, Delhi---seeking a path of creati...
Tag :
  May 26, 2014, 1:23 pm
घर हो या आफिस या वैसे भी हम बाहर हों तो कितना मजा आता है न दूसरों  की गलतियों के बारे में बात करना या चर्चा करना या उसे हाईलाईट करना। लेकिन जब कोई हमारे काम में कोई गलती निकाले तो जैसे हमारे मन में गुस्से का संचार हो जाता है। भई  मेरे साथ आज कुछ ऐसा ही हुआ। जब मेरे काम की ...
Poems written by Meenakshi Bhasin a translator, Delhi---seeking a path of creati...
Tag :
  May 21, 2014, 4:27 pm
आजकल सब कितना आर्टिफिशल होता जा रहा है। आपक कितने अच्छे दिखते हैं, कितने मार्डन कपड़े पहनते हैं, कैसे अंग्रेजी में बात करते हैं और कितना स्टाईल है आपमें। बस- पर अंदर से कितने खोखले हो चुके हैं, इससे हमें कोई फर्क नहीं पढ़ता। भई मेरे लिए तो मैट्रो का सफर बड़ा दिलचस्प होता ...
Poems written by Meenakshi Bhasin a translator, Delhi---seeking a path of creati...
Tag :
  May 20, 2014, 4:50 pm
कई बार मैं सोचती हूं कि हमारे कहने और सोचने में कितना फर्क होता है । जब हम रोजी रोटी की तलाश में भटकते है या नौकरी के थपेड़ों को सहते हैं तो अक्सर अपने बच्चों को यह कहकर तसल्ली देते रहते हैं कि यह सब हम तुम्हारे लिए कर रहे हैं । यह घर जो मैने अपने खून पसीने से बनाया है वो तुम...
Poems written by Meenakshi Bhasin a translator, Delhi---seeking a path of creati...
Tag :
  May 19, 2014, 4:20 pm

सभी को नमस्ते----भई सच कहुं तो मुझे मदरस डे याद ही नहीं रहा। किंतु मेरे लिए तो हरेक दिन ही मदरस डे होता है क्योंकि अक्सर शादी के बाद मां की जितनी याद, लड़कियों को आती है उतनी शायद ही किसी को आती है कहते हैं जब हम किसी के साथ रहते हैं तो हमें उसकी कीमत का अंदाजा नहीं होता। ऐसा न...
Poems written by Meenakshi Bhasin a translator, Delhi---seeking a path of creati...
Tag :
  May 12, 2014, 5:00 pm
जीवनजीवनएकसफरहैमानोनमानोचलनातोहैदुनियायहएकअजबसरायचाहोनचाहोबसनातोहैमेरातेराकरतेकरतेउर्मबितादीमैनेसारीस्वार्थसेधेमैनेअपनेबहुतदिखाईहोशियारीजोड़जोड़कररखलेंजितनासबकुछयहीपररखनातोहैपैसाबहुंतहै, आरामबहुतहैकमाईसुविधाएंमैनेसारीहैरानीतोअबहैमुझको...
Poems written by Meenakshi Bhasin a translator, Delhi---seeking a path of creati...
Tag :
  May 9, 2014, 4:29 pm
बुलंदियों को पाने की तो सोचते होतारों को छू जाने की तो सोचते होअपने पांव पहले जमीं पे तो टिका के देख लो---शोहरत के झंडे गाढ़ने की सोचते होदुनिया के खजानों की तो सोचते होअपने विचारों में पवित्रता लाकर तो देख लो—हर साल मोटर कार बदलने की तो सोचते होघर में नया फर्नीचर लाने क...
Poems written by Meenakshi Bhasin a translator, Delhi---seeking a path of creati...
Tag :
  May 8, 2014, 3:56 pm
कुछ बात बनेसदियों से मिटता रहा है पुरुष नारी देह परउसके मन रुपी कमल पे मिटे तो कुछ बात बने--------वो कहता है मुझसे झील सी खूबसूरत है तुम्हारी आंखेकाली-काली मतवाली कजरारी हैं तुम्हारी आंखेअफसोस नजर आती नहीं उसे इन आंखों की करुणावों इन आंखों की जुबा समझे तो कुछ बात बने--------वो ...
Poems written by Meenakshi Bhasin a translator, Delhi---seeking a path of creati...
Tag :
  May 7, 2014, 2:38 pm
मेरामनबावलानजानेमेरामनबावलाआखिरक्याचाहेवोभीपालूंयेभीपालूंहरपलमुझेसताएपरीथीमॉंकीतबचाहतथीपढ़ुलिखुबहुतमैंअव्वलआउहरकक्षामेंनामकमाउंबहुतमैंरातदिनमैनेएककरदिएमेहनतकेपंखलगाएहुईयुवातोसोचाअबअच्छीनौकरीमुझेमिलजाएबनुआत्मनिर्भरअबमैं  बिनाकोईसमयगवा...
Poems written by Meenakshi Bhasin a translator, Delhi---seeking a path of creati...
Tag :
  May 6, 2014, 12:58 pm
meenakshipoems: अरे ओ मार्डन संत महान: अरे ओ मार्डन संत महान तुम खुद तो फूलों के रथ पर आते हो चेहरे पर फेशियल करवाकर बालों पर डाई लगवाकर हमें माया से दूर रहने का पाठ प......
Poems written by Meenakshi Bhasin a translator, Delhi---seeking a path of creati...
Tag :
  May 5, 2014, 12:40 pm
अरे ओ मार्डन संत महानतुम खुद तो फूलों के रथ पर आते होचेहरे पर फेशियल करवाकर बालों पर डाई लगवाकरहमें माया से दूर रहने का पाठ पढ़ाते हो-----क्या तुमने लोगो के दुखी जीवन को स्वर्ग बनाने का बीढ़ा उठाया हैकिस्मत के मारे जनों की मेहनत का तुमने कितना हिस्सा खाया हैअपनी अंतरात्...
Poems written by Meenakshi Bhasin a translator, Delhi---seeking a path of creati...
Tag :
  May 5, 2014, 12:29 pm
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3685) कुल पोस्ट (167942)