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Blog: अपना अपना आसमां

Blogger: Sumit Singh
यहकिसी एक व्यक्ति या किसी एक समुदाय से छुटकारा पाने का प्रयास नहीं, बल्कि इंसान के नैतिकता बोध के मर जाने के ख़िलाफ एक आंदोलन है। समाजिक व्यवस्था में भ्रष्टाचार के बहते गंदे पानी की सफाई का यह एक जुनूनी और ईमानदार प्रयास है। किसन बापट बाबूराव हजारे उर्फ अन्ना हजारे जैस... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   6:39am 7 Apr 2011 #
Blogger: Sumit Singh
कॉमन गेम के नाम पर दिल्ली में जो लूट-ख़सोट मची है, उससे तो इस देश के लोगों का मन क्षुब्ध है ही, पिछले दिनों टीवी पर आ रही एक न्यूज़ ने लोगों को और भी दहला दिया। घटना थी पश्चिम बंगाल के किसी स्थान की, जहां एक लड़की को उसके समाज के लोगों ने पूरी तरह से निर्वस्त्र कर कई घंटों तक घुम... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   7:40am 15 Aug 2010 #Journalist
Blogger: Sumit Singh
मचलती बारिश की ठंडी छुअनइंसानों के मुर्झाए एहसास ... दिलों की सूखती नमी फिर लौट आई हो जैसे जैसे मेरा शहर एक बार फिर झील बन गया होमुम्बई के सख्त चेहरे पर और भी बहुत कुछ टांक जाती हैं बरसात... सूखती पपड़ियों वाले सहयाद्री के पहाड़ों पर उग आई है हरियालीउनके सीने पर झुक आए बादलो... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   5:45pm 18 Jun 2010 #
Blogger: Sumit Singh
पिछ्ले दिनों मुम्बई और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में ‘उत्तर भारतीयता’ एक मुद्दे के रूप में उभरा। इस मुद्दे पर कुछ राजनैतिक गिरोहों को अपनी लंपटता और हिंसा प्रदर्शित करने का भरपूर मौका मिला तो बुद्धिजीवियों ने इस बहस को भांति-भांति से विस्तार दिया। यहां पेश है इसी म... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   5:08am 3 Jun 2010 #
Blogger: Sumit Singh
एक ख़ामोशी जो हमारे बीच कई-कई दिनों तक तन जाती है एक अनकही बात जिसे तुम कहते-कहते रुक जाती हो एक टीसभरा लम्हा जो तुम्हें रोज-रोज निचोड़ जाता है दिल पर पड़ा एक खरोंच जब ताजमहल बुन जाता है ...तुम्हारे लौट आने की उम्मीद के सहारे मैं एक सैलाब से बचकर निकल आता हूं मगर कब तक बचता रहू... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   10:22am 7 Mar 2010 #
Blogger: Sumit Singh
तुमसे प्यार करना अच्छा लगता हैअच्छा लगता है तुम्हारा मुझसे नफ़रत करना पास आना और फिर एक झटके में दूर चले जानातुम्हारी खामोशियों में छिपी बेचैनी को सुननातुम्हें सोचनासतानाअच्छा लगता है और तुम पूछ्ती हो क्यों? बड़ा अच्छा लगता है हिचकियां बांध कर रोते हुए किसी छोटे बच्च... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   3:25am 31 Dec 2009 #Linguists
Blogger: Sumit Singh
आकाश में खिला चांद जब झांक आया मेरे कमरे में कल रात तो मुझे उसकी याद हो आई ...मेरे ख़्यालों के दरवाजे पर कब से दस्तक दे रही है वह जो अंदर तो आना चाहती है बहुत पर पांव ठिठक जाते हैं वह..जो कहना तो बहुत कुछ चाहती है मगर लब कांप कर रह जाते हैं। सुमित सिंह, मुम्बई... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   3:13am 24 Dec 2009 #
Blogger: Sumit Singh
इधर दो दिनों से देश के मीडिया और प्रबुद्ध तबकों द्वारा इस बात को लेकर हाय-तौबा मचाई जा रही है कि सीबीआई की अदालत द्वारा हरियाणा के पूर्व डीजीपी एस.पी.एस राठौड़ को सिर्फ 6 महीने की सजा सुनाई गई है। यह शख्स एक गंभीर अपराध का कुसूरवार है...इसलिए इसे सख्त से सख्त सजा होनी चाहिए।... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   7:32am 23 Dec 2009 #
Blogger: Sumit Singh
कब तक दूर रहोगे मुझसे बचकर जाओगे कहां तक मेरी सांसे करेंगी पीछा तुम्हारा ख़्यालों के झौंकों से मेरे बार-बार‘धक-से’ दिल करता रहेगा तुम्हाराबीते लम्हों को भुलाने की कोशिश में वक़्त का हर कतरा तेरी यादों की गली में उमड़ता रहेगा कब तक रूठोगे मुझसे कहां तक जाओगे तुमहर बार तड़प... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   3:36am 13 Dec 2009 #
Blogger: Sumit Singh
बिहार के एक पत्रकार नीरज झा ने कटिहार में मीडिया, प्रशासन और गुंडागर्दी की घिनौनी साजिश को लेकर आवाज उठाई है। उनके मुताबिक इस मुहिम में उनकी जान-माल को भी खतरा हो सकता है। उन्हें हमारी-आपकी जरूरत है। कृपया आप से कुछ बन पाए तो उनकी मुहिम में जरूर भागीदार बनें। उनके द्वार... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   9:18am 12 Dec 2009 #
Blogger: Sumit Singh
दो-तीन साल पहले तक जब टेलीविजन चैनलों पर सास-बहू के शातिराना झगड़े, घरेलू रंजिशों की दास्तां पेश करने वाले धारावाहिकों का दौर चल रहा था तो मैं यही सोचा करता था कि ये टीवी चैनल लोगों के सामने क्या परोस रहे हैं? इनसे हमारे समाज, उसके लोगों की सोच, उनके जीवन में कितना सुधार आ स... Read more
clicks 73 View   Vote 0 Like   4:56am 3 Dec 2009 #
Blogger: Sumit Singh
वे गर्मियों के दिन थे जब पहली बार लड़के ने पूछा- “कैसी दिखती हो तुम?”एक छोटी चुप्पी के बाद उसने कहा- “अच्छी नहीं”इसके बाद उसने फोन रख दियाफिर सावन आयाखूब हुई बारिश शहर का पोर-पोर,कतरा-कतरा भींग उठा उन्हीं दिनों लड़के के दिल में एक नीली झील उतरीपानी के बदलते रंगों के बीच लड़... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   6:33pm 24 Nov 2009 #
Blogger: Sumit Singh
सरसों के महकते फूलों और आम की मंजरियों की खुशबुओं से अल्लसुबह भींगते शहर में रात की पाली के वार्ड-ब्य़ाय, जमादारिनें, नर्स और अस्पताल की मुर्दा-गाड़ी के चालकों तकनहीं पहुंचती कोई खुशबूउनकी आंखें के सामने टूटती हैं इंसानों की सांसेंसुनाई पड़ती हैं अस्पताल से निकलते स्ट... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   2:26am 30 Jul 2009 #
Blogger: Sumit Singh
मां! मैं पराजित नहीं होना चाहता मुझे जीत हासिल न हो पर मैं इन्हीं जंगलों, जानवरों और इस मिट्टी की खुशबू के बीच रहना चाहता हूं हमेशा-हमेशा के लिए... मेरे साइनाइड निगलने के बाद दुनिया भर में यह खबर फैल जाएगी कि मेरा शव बरामद हो गया और 30 साल से चल रहे खूनी संघर्ष पर विराम लग गया... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   7:27pm 19 May 2009 #
Blogger: Sumit Singh
आसमान पर पसर गई गहराती सांझ की सिंदूरी चादरआखिरी उड़ान भर बसेरों को लौट रही हैं चिड़ियाँ पेड़-पत्तियों की कंपकंपाहट थम गईदिन के सरहद को लांगता सूरज शहर के पीछे झुक रहा हैधीरे-धीरे प्रियतम से मिलने का वक्त शहर की स्मृति में कहीं दर्ज नहीं होता...।... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   6:49pm 23 Mar 2009 #
Blogger: Sumit Singh
एक झूठ को सदी के सबसे आसान सच में बदलने की कोशिश करती हैंसिगरेट पीती हुई लड़कियाँ …उंगलियों में हल्के से फंसाकर धुँएं की एक सहमी लकीर बनाना चाहती हैं ताकि वे बेबस किस्म की अपनी खूबसूरती को भाप बना कर उड़ा सकें गर्मियों में गुलमोहर के पेड़ का इंतजार किसे नहीं होता...फूलों क... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   6:35am 25 Nov 2008 #
Blogger: Sumit Singh
एक अंधे सुरंग में चल कर कुछ देर बाद बाहर निकल आती हैमुम्बई की लोकल ट्रेन तब दिखाई पड़ता है दोनों तरफमैंग्रोव का जंगल लहराता रहता है रात के सूनेपन में... नवम्बर की शुरुआत है जंगल के ऊपर आकाश में चिपका चांदसफेद बर्फ के टूटे हुए टुकड़े की तरह खिलखिलाता हैकोई ठहर जाता है हर रात... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   11:15am 7 Nov 2008 #
Blogger: Sumit Singh
महाराष्ट्र की ताजा घटनाओं से केंद्र सरकार को तुरंत कम से कम एक सीख तो जरूर लेनी चाहिए कि केंद्रीय प्रतिष्ठानों में भर्ती की क्षेत्रवाद या राज्यवार प्रक्रिया चलाना कहीं न कहीं भारत की संघीय भावना को कमजोर करने वाला कदम साबित हुआ है। केंद्रीय एजेंसियों में खाली पदों म... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   12:12pm 22 Oct 2008 #
Blogger: Sumit Singh
लोअर परेल का ब्रिज मुम्बई की सड़क पर पसरा एक पिता है पिता इसलिए कि उसकी छांव तले जहाँ सूरज की रोशनी नहीं पहुंचतीअक्टूबर की पीली ठंडी चांदनी को मुट्ठी में भरकर छींट आता है... दिन के उजालों मेंधूल में सने इंसान के कुछ अपरिभाषित परिवारों कोतेज रफ्तार भागते शहर से सुरक्ष... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   12:38pm 20 Oct 2008 #
Blogger: Sumit Singh
पागल होने से पहले आख़िरी बार रोते हुए आदमी को देखकरकिसी की रूह नहीं कांपती कोई नहीं सोचता कि यह आदमी अब कभी अपने घर नहीं लौट पाएगा कभी इसके सपनों में चिड़ियों से भरा आसमान नहीं टंकेगा कभी वह अपनी पहचान नहीं खोल पाएगाशहर के कुत्ते देर तक उसे शक की निगाह से देखकर भौंकते रह... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   5:23am 15 Oct 2008 #
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