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अपना अपना आसमां

यहकिसी एक व्यक्ति या किसी एक समुदाय से छुटकारा पाने का प्रयास नहीं, बल्कि इंसान के नैतिकता बोध के मर जाने के ख़िलाफ एक आंदोलन है। समाजिक व्यवस्था में भ्रष्टाचार के बहते गंदे पानी की सफाई का यह एक जुनूनी और ईमानदार प्रयास है। किसन बापट बाबूराव हजारे उर्फ अन्ना हजारे जैस...
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  April 7, 2011, 12:09 pm
कॉमन गेम के नाम पर दिल्ली में जो लूट-ख़सोट मची है, उससे तो इस देश के लोगों का मन क्षुब्ध है ही, पिछले दिनों टीवी पर आ रही एक न्यूज़ ने लोगों को और भी दहला दिया। घटना थी पश्चिम बंगाल के किसी स्थान की, जहां एक लड़की को उसके समाज के लोगों ने पूरी तरह से निर्वस्त्र कर कई घंटों तक घुम...
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Tag :Journalist
  August 15, 2010, 1:10 pm
मचलती बारिश की ठंडी छुअनइंसानों के मुर्झाए एहसास ... दिलों की सूखती नमी फिर लौट आई हो जैसे जैसे मेरा शहर एक बार फिर झील बन गया होमुम्बई के सख्त चेहरे पर और भी बहुत कुछ टांक जाती हैं बरसात... सूखती पपड़ियों वाले सहयाद्री के पहाड़ों पर उग आई है हरियालीउनके सीने पर झुक आए बादलो...
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  June 18, 2010, 11:15 pm
पिछ्ले दिनों मुम्बई और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में ‘उत्तर भारतीयता’ एक मुद्दे के रूप में उभरा। इस मुद्दे पर कुछ राजनैतिक गिरोहों को अपनी लंपटता और हिंसा प्रदर्शित करने का भरपूर मौका मिला तो बुद्धिजीवियों ने इस बहस को भांति-भांति से विस्तार दिया। यहां पेश है इसी म...
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  June 3, 2010, 10:38 am
एक ख़ामोशी जो हमारे बीच कई-कई दिनों तक तन जाती है एक अनकही बात जिसे तुम कहते-कहते रुक जाती हो एक टीसभरा लम्हा जो तुम्हें रोज-रोज निचोड़ जाता है दिल पर पड़ा एक खरोंच जब ताजमहल बुन जाता है ...तुम्हारे लौट आने की उम्मीद के सहारे मैं एक सैलाब से बचकर निकल आता हूं मगर कब तक बचता रहू...
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  March 7, 2010, 3:52 pm
तुमसे प्यार करना अच्छा लगता हैअच्छा लगता है तुम्हारा मुझसे नफ़रत करना पास आना और फिर एक झटके में दूर चले जानातुम्हारी खामोशियों में छिपी बेचैनी को सुननातुम्हें सोचनासतानाअच्छा लगता है और तुम पूछ्ती हो क्यों? बड़ा अच्छा लगता है हिचकियां बांध कर रोते हुए किसी छोटे बच्च...
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Tag :Linguists
  December 31, 2009, 8:55 am
आकाश में खिला चांद जब झांक आया मेरे कमरे में कल रात तो मुझे उसकी याद हो आई ...मेरे ख़्यालों के दरवाजे पर कब से दस्तक दे रही है वह जो अंदर तो आना चाहती है बहुत पर पांव ठिठक जाते हैं वह..जो कहना तो बहुत कुछ चाहती है मगर लब कांप कर रह जाते हैं। सुमित सिंह, मुम्बई...
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  December 24, 2009, 8:43 am
इधर दो दिनों से देश के मीडिया और प्रबुद्ध तबकों द्वारा इस बात को लेकर हाय-तौबा मचाई जा रही है कि सीबीआई की अदालत द्वारा हरियाणा के पूर्व डीजीपी एस.पी.एस राठौड़ को सिर्फ 6 महीने की सजा सुनाई गई है। यह शख्स एक गंभीर अपराध का कुसूरवार है...इसलिए इसे सख्त से सख्त सजा होनी चाहिए।...
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  December 23, 2009, 1:02 pm
कब तक दूर रहोगे मुझसे बचकर जाओगे कहां तक मेरी सांसे करेंगी पीछा तुम्हारा ख़्यालों के झौंकों से मेरे बार-बार‘धक-से’ दिल करता रहेगा तुम्हाराबीते लम्हों को भुलाने की कोशिश में वक़्त का हर कतरा तेरी यादों की गली में उमड़ता रहेगा कब तक रूठोगे मुझसे कहां तक जाओगे तुमहर बार तड़प...
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  December 13, 2009, 9:06 am
बिहार के एक पत्रकार नीरज झा ने कटिहार में मीडिया, प्रशासन और गुंडागर्दी की घिनौनी साजिश को लेकर आवाज उठाई है। उनके मुताबिक इस मुहिम में उनकी जान-माल को भी खतरा हो सकता है। उन्हें हमारी-आपकी जरूरत है। कृपया आप से कुछ बन पाए तो उनकी मुहिम में जरूर भागीदार बनें। उनके द्वार...
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  December 12, 2009, 2:48 pm
दो-तीन साल पहले तक जब टेलीविजन चैनलों पर सास-बहू के शातिराना झगड़े, घरेलू रंजिशों की दास्तां पेश करने वाले धारावाहिकों का दौर चल रहा था तो मैं यही सोचा करता था कि ये टीवी चैनल लोगों के सामने क्या परोस रहे हैं? इनसे हमारे समाज, उसके लोगों की सोच, उनके जीवन में कितना सुधार आ स...
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  December 3, 2009, 10:26 am
वे गर्मियों के दिन थे जब पहली बार लड़के ने पूछा- “कैसी दिखती हो तुम?”एक छोटी चुप्पी के बाद उसने कहा- “अच्छी नहीं”इसके बाद उसने फोन रख दियाफिर सावन आयाखूब हुई बारिश शहर का पोर-पोर,कतरा-कतरा भींग उठा उन्हीं दिनों लड़के के दिल में एक नीली झील उतरीपानी के बदलते रंगों के बीच लड़...
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  November 25, 2009, 12:03 am
सरसों के महकते फूलों और आम की मंजरियों की खुशबुओं से अल्लसुबह भींगते शहर में रात की पाली के वार्ड-ब्य़ाय, जमादारिनें, नर्स और अस्पताल की मुर्दा-गाड़ी के चालकों तकनहीं पहुंचती कोई खुशबूउनकी आंखें के सामने टूटती हैं इंसानों की सांसेंसुनाई पड़ती हैं अस्पताल से निकलते स्ट...
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  July 30, 2009, 7:56 am
मां! मैं पराजित नहीं होना चाहता मुझे जीत हासिल न हो पर मैं इन्हीं जंगलों, जानवरों और इस मिट्टी की खुशबू के बीच रहना चाहता हूं हमेशा-हमेशा के लिए... मेरे साइनाइड निगलने के बाद दुनिया भर में यह खबर फैल जाएगी कि मेरा शव बरामद हो गया और 30 साल से चल रहे खूनी संघर्ष पर विराम लग गया...
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  May 20, 2009, 12:57 am
आसमान पर पसर गई गहराती सांझ की सिंदूरी चादरआखिरी उड़ान भर बसेरों को लौट रही हैं चिड़ियाँ पेड़-पत्तियों की कंपकंपाहट थम गईदिन के सरहद को लांगता सूरज शहर के पीछे झुक रहा हैधीरे-धीरे प्रियतम से मिलने का वक्त शहर की स्मृति में कहीं दर्ज नहीं होता...।...
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  March 24, 2009, 12:19 am
एक झूठ को सदी के सबसे आसान सच में बदलने की कोशिश करती हैंसिगरेट पीती हुई लड़कियाँ …उंगलियों में हल्के से फंसाकर धुँएं की एक सहमी लकीर बनाना चाहती हैं ताकि वे बेबस किस्म की अपनी खूबसूरती को भाप बना कर उड़ा सकें गर्मियों में गुलमोहर के पेड़ का इंतजार किसे नहीं होता...फूलों क...
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  November 25, 2008, 12:05 pm
एक अंधे सुरंग में चल कर कुछ देर बाद बाहर निकल आती हैमुम्बई की लोकल ट्रेन तब दिखाई पड़ता है दोनों तरफमैंग्रोव का जंगल लहराता रहता है रात के सूनेपन में... नवम्बर की शुरुआत है जंगल के ऊपर आकाश में चिपका चांदसफेद बर्फ के टूटे हुए टुकड़े की तरह खिलखिलाता हैकोई ठहर जाता है हर रात...
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  November 7, 2008, 4:45 pm
महाराष्ट्र की ताजा घटनाओं से केंद्र सरकार को तुरंत कम से कम एक सीख तो जरूर लेनी चाहिए कि केंद्रीय प्रतिष्ठानों में भर्ती की क्षेत्रवाद या राज्यवार प्रक्रिया चलाना कहीं न कहीं भारत की संघीय भावना को कमजोर करने वाला कदम साबित हुआ है। केंद्रीय एजेंसियों में खाली पदों म...
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  October 22, 2008, 5:42 pm
लोअर परेल का ब्रिज मुम्बई की सड़क पर पसरा एक पिता है पिता इसलिए कि उसकी छांव तले जहाँ सूरज की रोशनी नहीं पहुंचतीअक्टूबर की पीली ठंडी चांदनी को मुट्ठी में भरकर छींट आता है... दिन के उजालों मेंधूल में सने इंसान के कुछ अपरिभाषित परिवारों कोतेज रफ्तार भागते शहर से सुरक्ष...
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  October 20, 2008, 6:08 pm
पागल होने से पहले आख़िरी बार रोते हुए आदमी को देखकरकिसी की रूह नहीं कांपती कोई नहीं सोचता कि यह आदमी अब कभी अपने घर नहीं लौट पाएगा कभी इसके सपनों में चिड़ियों से भरा आसमान नहीं टंकेगा कभी वह अपनी पहचान नहीं खोल पाएगाशहर के कुत्ते देर तक उसे शक की निगाह से देखकर भौंकते रह...
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Tag :
  October 15, 2008, 10:53 am
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