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Blog: कतरा सोच का...

Blogger: Neeraj Pandey
बचपन में एक बार बनारस गया था । दसवीं बोर्ड के बाद  CHS की परीक्षा के सिलसिले में BHU का चक्कर लगा था । बनारस उस वक़्त मेरे लिए एक बड़ा शहर था । मेरे दिमाग में ये भी था कि यहाँ के रहने वाले लोग, लड़के, लड़कियाँ  मुझसे काफी फॉरवर्ड होंगे । मुझे यह भी लगता था, यहाँ लड़के गाली नहीं देते ... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   9:10am 27 Jul 2015 #award winning.
Blogger: Neeraj Pandey
कभी गौर किया है तुमने ? रात के कुछ ढलने के बाद कई बार एक तलब चढ़ती है… चाय या कॉफ़ी पीने की । ये वो तलब होती है जब चाय या कॉफ़ी में से कुछ भी मिल जाये तो काम हो जाता है । तुम्हारे पास ऑप्शन ढूंढने के कोई हालात बचते ही नहीं । जो भी सामने आता है वो तुम स्वीकार करते हो, या कहो कि उसमें ... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   9:54am 25 Jun 2015 #
Blogger: Neeraj Pandey
हर गर्मी की कोशिश होती है ज़रा सी ठंढक में घुल जाना, और वैसी ही कोशिशठंढक की गर्मी की तरफ.… रात दिन में घुल जाती है और दिन बढ़ता है धीरे धीरे रात की तरफ.… समंदर का पानी भी घुल रहा है बादलों में,फिर.… बादल भी नदी में बहकर घुल जाते हैं समंदर में जीवन काल में घुल र... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   8:03pm 19 Jun 2015 #
Blogger: Neeraj Pandey
हम पैदा किए जा रहे हैं, ऐसे लगातार...जैसे फोटो स्टेट की मशीनऑटोमोड़ पर डाल रक्खीं हो |वो  जितनी भी औरतें कर रक्खीं हैंपेट से  हमने... हमारी गलती थी ही नहीं,हम कामुक इतने थे कि ये काम तो बकरी या किसी जानवर से  भी ले लेते हम |ये जो रेंग रहे हैं, हमारे आस्  पासहमें अपना 'बाप'... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   6:17am 9 Jun 2015 #
Blogger: Neeraj Pandey
मुझे सफर के दौरान एक गाँव दिखता हैजो मेरा नहीं हैं …मैं थोड़ी देर रुककर देखता हूँ उसे ,गाँव में पसरी चाँदनीऔररुनझुन सन्नाटे के बीचदिखते हैं कई घरनजर आते हैं कुछ लोग |एक छोटा सा मैदान,बच्चों का ,पूरे दिन खेलकर थक गया है |एक हैंड पम्प जिसने उचक-उचक करपिलाया है दिन भर पानीदोन... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   5:27am 5 Jun 2015 #
Blogger: Neeraj Pandey
हम  सब अपनी लाइफ में कुछ नई कहानियों को बनाने के लिए कुछ अधूरी कहानियों को अपने पीछे छोड़ आते हैं । उनमें से कुछ तो वक़्त की मौत मारी  जाती हैं , पर कुछ हिचकियाँ बनकर अलग अलग मौके पर आती रहती हैं, और एहसास दिलाती हैं कि वो कहानी शायद अभी भी कहीं न कहीं ज़िंदा हैं  ।… तो मेरी ... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   7:00am 28 May 2015 #
Blogger: Neeraj Pandey
(A piece written a year ago at write club, from where I got my Theatre thing started in Bangalore, Have a look)Monologue for scene.ज़िंदगी को परत दर परत उधेड़ता, बेचैन, आज इसकी आख़िर परत तक आ पहुँचा हूँ. पर वो शोर आज भी थमा नहीं है.शरीर ने कब का साथ देना छोड़ दिया था पर दिमाग़ की बेचैनी और तलाश रुकने का नाम नहीं लेती |कहीं का कहीं वो शोर सन्नाटा बन कर म... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   6:33am 19 Apr 2015 #
Blogger: Neeraj Pandey
A rap written for one of my Play (Ice Paais) which was part of Short and Sweet Theatre festival, Bangalore 2015. Compositions was provided by the director of the play Sarbajeet Das.  धुन...(धूम पिचक धूम.…  पिचक धूम.…  धूम पिचक धूमपिचक धूम.…  धूम पिचक धूमपिचक धूम.…  धूम पिचक धूम...)ये बेचारा आदत का मारा,डेमोक्रेसी के सपने लेकर फिरता रहता,मारा मारा(धूम पिचक धूम.…  पिचक धूम.... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   4:03am 31 Mar 2015 #
Blogger: Neeraj Pandey
कसाइयों की दुकानों के बाहर बास मारते दड़बे,पीभ, थूक, खून, लार से मवाद से हैं सने हुए … और उनके अंदर कुक्कड़ चुपचाप अपनी जगह पकड़ कोस रहे नसीब को |सड़क पर चलता आदमी उन्हें देख कर सोचता … गुस्सा इन्हें भी आता होगा,जब पंख नोचे जाते होंगे,जब अपने खूब चिल्लाते होंगे,जब थर थर करती गरद... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   5:43pm 8 Mar 2015 #
Blogger: Neeraj Pandey
तुम्हें अक्सर कहते सुना है        - ज़िंदगी के सफर में बहुत लेट हो गई हूँ मैं।मैं अपनी रेल बचाकर लाया हूँइस शातिर दुनिया की नज़रों से,आओ मेरा हाथ पकड़ चल चलो,एक सफर के लिए। आओ ना ।© Neeraj Pandey... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   12:00pm 17 Jan 2015 #
Blogger: Neeraj Pandey
किताबों को उनके किये की सजा मिल रही है ।बिन बुलाये मेहमान सीहालत है अब इनकी ।किताबें सवाल करती थीं । पूछती, मुझसे मेरे होने का मकसद ।बतलाती, दुनिया में कितनी भूख मरी है। समझती, कि लाल और नीली गोलियों में फर्क होता है। हिलाती, मान्यताएँ और झझकोरती कम्फर्ट जोन को ।पर स्क... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   9:12am 24 Dec 2014 #
Blogger: Neeraj Pandey
बाग़ में खेलते हुए रंगीन बादलों को देख हैरान होता था वो। उडते पंछी आदर्श थे उसके,वो छुना चाहता था आसमान,गढ़ना चाहता था बादल। तरीका?  उसे पता कहाँ था । उसके सपनों से अनजान,जीवन की ज़रूरतों ने बतलाया उसे कि ये पेड़ ऊपर तक जाता है। आसमान पाने की चाहत में, चढ़ता र... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   4:40pm 19 Dec 2014 #
Blogger: Neeraj Pandey
वो मशीन के हर पुर्ज़े को कसता है अक्सर बड़ी तरकीबों से ।  पेंच चढ़ाता है । और एहसास दिलाता है उन्हें कि वो उस मशीन का एक हिस्सा हैं बस । पसंद किसी पुर्जे को नहींइस तरह से कसा जाना । अपना राग खोकर , किसी और की धुन पर गाना । पर कहता है वो बिन कसे पुर्ज़े ठीक से क... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   3:07am 18 Nov 2014 #
Blogger: Neeraj Pandey
तो कहते हो तुम तुम्हारा खुदा है कोई |हाँ...  देखा है मैंने उसे अक्सर अलग अलग अवतारों में,तुम्हारी शक्ल पर दिखता है और आदत बनकर साथ ही रहता है |कभी तुम्हारी ज़रूरतों में,तो कभी तुम्हारे डर मेंउसे पनपते और बढ़ते हुए अक्सर देखा है मैनें |तुम्हारे आँख, नाक, कान तोसही ग़लत ... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   5:36am 15 Nov 2014 #
Blogger: Neeraj Pandey
अपने किये पर शर्मिन्दा है शायद,और आत्मग्लानि से भरा हुआ भी।तभी तो अपना सर झुकाचुपचाप खड़ा हैमैदान के उस कोने में।जिसकी छाती से सारे पेड़ उजाड़खोदा था उसके गर्भ तक इसने बाँझ बनाया था।अब सरिया घुस रहा हैउस धरा के जिस्म में,और कहने को सीमेंट के मसालेभरे जा रहे हैं,किसी मरह... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   12:21pm 16 Oct 2014 #
Blogger: Neeraj Pandey
उस नन्हें से बीज नेअपनी एक पत्ती निकालपास ही के बड़े पेड़ को देखा,हाथ हिलाकर 'हैलो'भी कहाऔर उसने भी जवाब मेंएक फूल गिरालंबी उम्र का आशीर्वाद दिया|सपनों में था इसके अबबिल्कुल ऐसा ही बनना है,घना,बड़ा,शानदार...अपने जिस्म पर घोंसले रखआशियाना देगा कभीकिसी चिड़ीए  के परिवा... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   6:05pm 14 Oct 2014 #
Blogger: Neeraj Pandey
वोकूड़ेवालाहररोज़सुबहआकरलेजाताहैहमाराकूड़ा,वोकूड़ाजोहमारीअपनीपैदाइशहै|औरहमभीअपनीनाकसिकोडतेडालआतेहैंइसेउसकेट्रकमेंघरकेबाहर, हरसड़कपर, हरनुक्कड़परमुलाकातहोतीहै इन कूड़ेकेढेरोंसेपरबचबचकेचलतेहैंसभीकिकहींपाँवभीनालगजाए|औरकोईयहबोलनेकोतैयार नह... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   6:23pm 9 Oct 2014 #
Blogger: Neeraj Pandey
कॉरमंगलाकीएकसड़कपरजहाँमहँगीगाड़ियाँदौड़तीहैंपिज़्ज़ाहटकेठीकसामनेएकऔरवैसीहीबिल्डिंगबनरहीहै,शानदार, उँची, चमचमाती|खबरहैइसमेंडोमिनोज़खुलेगाचीज़ब्र्स्टकेसाथएसीकीहवाखानेकाएकऔरठिकानामिलजाएगामुझेऔरमेरेदोस्तोंको|सोशल, एकनॉमिकल, पोलिटिकलचर्चाओंकेबीच... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   8:31am 2 Oct 2014 #
Blogger: Neeraj Pandey
ये इतने सारे घर हैं?... ... या किताबें ?ठीक ठीक कहना मुश्किल है. दोनों में बाहर कवर है और अंदर किरदार बसते हैं और हर दीवार किताब के पन्नों की तरह अपने ही अंदर छुपाए हुए है कई कहानियाँ. ड्रामा, ट्रॅजिडी, रोमॅन्स, कॉमेडी... इनकी तो शॉर्ट स्टोरी भीलाइफ लॉंग चलती है. अलग अलग अध्यायो... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   6:55pm 30 Sep 2014 #
Blogger: Neeraj Pandey
वो चेहरे अब धुंधले से दिखते हैं मानों कोहरे में खड़ा हो कोई .गौर से देखता हूँ पर ठीक से पहचान नहीं पाता| वक़्त ने उन यादों पर भी मानों धूल सी जमा दी हैं. ...अब चाहे अच्छे थे या बुरे बीती रात के सपने किसे याद रहते हैं.© Neeraj Pandey... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   6:45pm 30 Sep 2014 #
Blogger: Neeraj Pandey
कुछ स्वमैथुन के मारे बेचारों को लगता है,कि सूरज उनके लिंग के चक्कर काटता है,क्योंकि वो किसी एक विशेष योनि की पैदाइश हैं.ईश्वर से सीधा नाता है इनका,और स्वर्ग में सीटें आरक्षित हैं इनकी.जिस ईश्वर को इन्होनें कभी जाना ही नहींऔर ना ही जानने की कोशिश कीबस सच से आँखें मुन्दे ... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   6:44pm 1 Sep 2014 #
Blogger: Neeraj Pandey
वो आयीं और लौट कर चली गयींपर मैं ही उस वक़्त कहीं और था.अभी भी कहीं हैं मेरे अंदर हीकुछ नज़मेँ जो अपना आकार नहीं ले पाईं हैं.जब भी थोड़ा इतमीनान से बैठता हूँहिचक़ियों से उनके होने का एहसास होता हैजैसे मेरे अंदर ही कहीं पलने लगी हैं येपर ढंग से बाहर नहीं आतीं.जी में आता है ... Read more
clicks 207 View   Vote 0 Like   4:02pm 19 Aug 2014 #
Blogger: Neeraj Pandey
तब जब सही और ग़लत का मतलब ना होगातब जब दोनों बातों में कोई फ़र्क ना होगा.तब जब यहाँ का सबकुछ ख़तम हो रहा होगातब जब कोई और लोक मुझे बुला रहा होगातब जब मेरे जाने की तैयारी हो रही होगीतब जब मुझे कोई और आरजू ना होगीतब जब सबको लगेगा मुझे बिल्कुल भी होश नहींउस वक़्त मैं वो लम्हे ... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   5:42pm 16 Jul 2014 #
Blogger: Neeraj Pandey
वो दोनों अक्सर दिख जाते हैंएक दूसरे का बोझ उठाते,सड़कों पर भटकतेहमसे अपने हिस्से का कुछ माँगते.वक़्त ने कमर झुका दी है इनकीखुद अपना भार भी नहीं उठा पाते अब.इनके कपड़े और हालात हरदिन एक से होते हैंवो बूढ़ा तो ठीक से बोल भी नहीं पताआँखो मे भी मोतियाबिंद लगता है उसके,पर बु... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   11:34am 13 Jul 2014 #
Blogger: Neeraj Pandey
गर तुम देख पाते उस सही और ग़लत के पारतो तुम्हें दिखता कितना सुकून है वहाँ.इंसान बस इंसान है वहाँभगवान बनने की चाहत में हैवान नहीं.सबसे मोहब्बत कर पाते तुम भी और गर ना भी हो तो नफ़रत की कोई गुंजाइश ना होती.वक़्त को साँचे में ढाल कर उसका मोल नहीं लगातेना ही बहती ज़िंदगी... Read more
clicks 217 View   Vote 0 Like   1:22pm 1 Jul 2014 #
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