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Blog: एहसास की लहरों पर ....

Blogger: परी ऍम 'श्लोक'
सितारे  रात   तन्हाई    तुम्हीं  को   गुनगुनाते  हैं अभी तक याद के जुगनू ज़हन में झिलमिलाते हैं नज़र के  सामने गुज़रा  हुआ जब  दौर आता   है कई  झरने  निग़ाहों   में   हमारे   फूट   जाते    हैं उन्हें कह  दो न इतरायें  ज़रा सी  रौशनी  पाकर ये... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   12:44pm 26 Dec 2015 #
Blogger: परी ऍम 'श्लोक'
समंदर है कहीं सूखी नदी हैइसी का नाम शायद जिंदगी है बताओ मुस्कुराए कोई कैसे  ग़मों की गोद में बैठी ख़ुशी है अमन के वास्ते मज़हब बनाये वो होली खून के पर खेलती है गरीबों का लहू पीकर तरक्कीअमाँ हद दर्जे की ये बेहिसी है सितम देखो की हर इक दौर में ही लुटी सीता, अहल्या, ... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   4:25am 22 Dec 2015 #
Blogger: परी ऍम 'श्लोक'
उखड़ती  जा   रही     हूँ    ज़िन्दगी    से न  मर   जाऊं   कहीं   तेरी    कमी     सेगवांचे    आस    के     हैं    चाँद     तारे घिरी   हूँ   हर   तरफ    मैं    तीरगी    से मेरे   दिल  साथ    तुम   दे   दो     हमारा उभरने    दो &nb... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   4:32am 18 Nov 2015 #
Blogger: परी ऍम 'श्लोक'
उठी   मंदिर   से  चिंगारी   शरारे  मस्जिदों   से गए  टकरा  वो  आपस   में  पुराने  दुश्मनों   सेन कोई शख़्स था जिन्दा बचा इस आग से फिर  लहू  यूँ  हो  गयी  इंसानियत  थी  मज़हबों   से सियासत खूब गरमायी किसी की लाश पर थी चिता  ठंडी  हुई  गाँधी &... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   4:27am 13 Oct 2015 #
Blogger: परी ऍम 'श्लोक'
ख़तम  उनसे  ये  फ़ासला  हो   जाएनया  सा  शुरू सिलसिला  हो  जाए लबों  पर  सलामत  रहे  सदियों तक  उठे   हाथ  जब  भी  दुआ  हो   जाएरहेगी   कमी   फिर   ज़माने  में  क्या  जो  महबूब  अपना  ख़ुदा  हो   जाए  इसे   खुश  नसीबी &nb... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   7:08am 2 Sep 2015 #
Blogger: परी ऍम 'श्लोक'
मेरी   पलकों   ने   रह - रह   के  उठाये  हैं तेरी   सूरत   तो   इन   आँखों  के  फाहें  हैं मैं   गुम   हो   गयी   उस  वीरान  बस्ती  में दूर   तक   मौजूद   जहाँ   पर   तेरे  साये  हैं  मौजजा हो कि अगर तुम चले आओ... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   3:51am 21 Aug 2015 #
Blogger: परी ऍम 'श्लोक'
तस्वीर  फाड़ी  होगी  खत भी जलाया होगा यकीं है  फिर भी वो मुझे भूल न पाया  होगामेरे  जाने  के  बाद  इतनी  खबर  है  मुझको दिन में तड़पा होगा रात सो भी न पाया होगा रोज़ मिलते थे छिप-छिप के  जिस बाग़ीचे में  सुबह  उठकर  फिर  वहीं  सैर पर आया होगा मुझ... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   8:58am 19 Aug 2015 #
Blogger: परी ऍम 'श्लोक'
उसने   मुझसे  कहा  एक  बात   कहूँ ?खाओ  क़सम कि इंकार करोगी  नहींमैंने मुस्कुरा के झट से कहा ओ पगलेतेरे  लिए  तो  ये  जान  भी  हाज़िर हैमुझे    ख़बर   क्या  थी   कि   इसबारउसकी  साज़िश में  है एक बड़ी सज़ावो मांगने&... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   8:54am 18 Aug 2015 #
Blogger: परी ऍम 'श्लोक'
उसने मुसलसल कई गुनाह किये और अक्सर कहता रहा मेरी खता क्या हैउसे मालूम नहीं शायद चोरी गुनाह है और देखो उस अनाड़ी ने चुपके से मेरा दिल चुरा लियाआफ़ताब से भी तेज़ था उजाला उसका कि उसने मेरे जिस्म का साया हथिया लिया  उसे मालूम नहीं शायद धोखा-धड़ी गुनाह है उसने ऐ... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   7:09am 17 Aug 2015 #
Blogger: परी ऍम 'श्लोक'
मुहब्बत इक इत्तिफ़ाक़ है सोची समझी कोई कोशिश नहीं  ये कब, किस वक़्त, किसके लिए  हमारे अंदर पनप जाए मालूम नहीं ये दिल,धड़कन या फिर जिस्म का रिश्ता नहींएक रूहानी रिश्ता है जो जिस्म ढलने के बाद भी कायनात में रोशन रहता है  जिंदगी के पहले दिन से  मुहब्बत हमारे अं... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   10:53am 12 Aug 2015 #
Blogger: परी ऍम 'श्लोक'
उस लम्हें के गुज़र जाने के बादअतराफ़ ये सन्नाटा पसर जाने के बादमेरा मासूम दिल जब सितारों की शब में अपने गिरेबाँ की सीढ़ियाँ उतरा तो बुझा हुआ मुहब्बत का चेहरा देख उसे इस बात का बेहद अफ़सोस हुआ  कि ज़रा सी कहा -सुनी में खफ़ा होकर  वो तुम्हारा दिया तोहफ़ा जो मुझे अपनी जा... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   9:30am 5 Aug 2015 #
Blogger: परी ऍम 'श्लोक'
हिन्दू का खून काला क्यूँ नहीं है मुस्लिम का नीला, सिक्खों का गुलाबी और ऐसे ही जुदा धर्मों के लोगों का लहु इक दूसरे से जुदा क्यूँ नहीं है काश ! हर किसी के माथे पर ख़ुदा ने गहरा के लिख दिया होता कि वो किस मज़हब का हैया फिर चेहरा ही थोड़ा टेढ़ा-मेढ़ा बना दिया होता किसी ... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   6:49am 3 Aug 2015 #
Blogger: परी ऍम 'श्लोक'
रूह जलती है दिल दुःखता है याद बन के वो जब उठता है कितनी बारिश ये सावन ले गुज़री प्यास दिल का मगर न बुझता है आईना हो गया है वज़ूद मेरा लम्हों की ठोकर से जो अब टुटता है किसी के हो नहीं पाये बरसो कि उनका घर तो रोज़ बसता है मुझी में टूट कर ज़मींदोज़ हुए मेरे अरमानों का भी कब्रिस्तां ह... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   9:22am 31 Jul 2015 #
Blogger: परी ऍम 'श्लोक'
हम दो अलग चेहरे दो शख़्स जुदाहमारा रिश्ता मानिंद इक बहता दरिया दो जुदा कश्ती है हम दोनों की तक़दीरकौन जाने किस लम्हा कौन डूबे और कौन पार लगे कौन वीरान रहे पूरे सफ़र में कौन भर जाए इस राह में मुसाफिरों से कौन जाने किसकी तक़दीर के हिस्से क्या आये किसे मिले वफ़ा के ... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   8:20am 30 Jul 2015 #
Blogger: परी ऍम 'श्लोक'
जिंदगी के रेलवे ट्रैक पर हर कदम पर मौजूद हैंदर्द के लावारिस जिन्दा बमजब भी ये धमाके से फटते हैंतो लहु हो जाते हैं आँखों के रेल पर सवार मेरे मासूम निर्दोष से ख़्वाबबेवा हो जाती हैं उम्मीदें धुआँ हो जाता है मन का आलम ए अजनबी मेरे मसीहा तुमसे मदद की गुहार है तुम आओ। क... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   7:15am 28 Jul 2015 #
Blogger: परी ऍम 'श्लोक'
मौत आती नहीं रस्ते मेरे जिंदगी जीने नहीं देती मुझको ऐसे में ए मुहब्बत तुझे ख़ुशी का फ़रिश्ता समझा मैंने  चंद लम्हों का तबस्सुम लब पे और ये शिकवा भी बेचैन दिल में तू आया कि बेहिसाब गम आये डसने लगी ये चुप सी तन्हाईरोज़ नए ख़्वाब नींदों के दर पर आते और फिर यूँ होत... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   10:23am 21 Jul 2015 #
Blogger: परी ऍम 'श्लोक'
ये बारिश ये बेइम्तिहां बारिशजुदाई की गहरी रात और ये तन्हाई है महज़ मेरी धड़कनों का शोर उनकी यादों की बिजलियों से सुलगते जाते हैं ये एहसास डूबता जाता है दिल का शहरतैरती हुई मेरे ख्वाबों की कश्तियाँ चल पड़ी है लिए अरमानों की बस्तियाँ हैं शायद इस सोच में कि कही... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   7:11am 10 Jul 2015 #
Blogger: परी ऍम 'श्लोक'
उस  हरजाई   का  कोई    पैग़ाम   नहीं  आता  मैं त कती  हूँ  राह मगर  क्यूँ शाम  नहीं  आता  करती है  लाखों   बातें  आँखें  उसकी   मुझसे जाने  क्यूँ  लब  पे   ही  मेरा  नाम नहीं   आता  होगी  कुछ सच्चाई तो  कि ध... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   4:34am 7 Jul 2015 #
Blogger: परी ऍम 'श्लोक'
मैंने सोची थी बात फूलों की , बहारों की, सितारों की, नज़ारों की चाहा था किसी के आँखों में बन के ख़्वाब मैं टिमटिमाती रहूँ कोई  दिल हो जहाँ बस मैं धड़कू कोई ऐसा हो जिसकी ठंडी आहों में मेरे खातिर हो तड़प और बेताबी उंगली पकड़ कर किसी का मैं भी जिंदगी की आख़िरी छोर तक ज... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   4:21am 3 Jul 2015 #
Blogger: परी ऍम 'श्लोक'
मुहब्बतजन्नत की तरह होती हैइससे ज्यादा पाक़क़ायनात में दूजा कुछ नहींहर कोई इसे पाने की आरज़ू रखता हैमगर ये दौलत भी तो सबको नसीब नहीं होती  मेरे महबूब  इसे बिना हासिल कियेये बात आख़िर कौन जान सकता हैइस मख़मली सफ़ेद धुंए के पीछेएक ला-इलाज सा दर्द छिपा बैठा है और ये वो दर... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   12:12pm 1 Jul 2015 #
Blogger: परी ऍम 'श्लोक'
तेरा मेरे हो जाने से ज़्यादा ज़रूरी है हर लम्हा मेरे पास होना किसी भी शक़्ल में , किसी भी सूरत में दिल में धड़को ,सांस में महको,या आफ़ताब की शुआओं से छू लो मुझे बात ये सोचने की है लेकिन फिर रिश्ते का नाम क्या होगा ?मुझे रह-रह ख़्याल आता है इन नामी रिश्तों का ज़माने में&nb... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   4:15am 26 Jun 2015 #
Blogger: परी ऍम 'श्लोक'
ज़िन्दगी  खोयी  खोयी  सी  रहती  है और  मेरे  दोनों  हाथ  खाली  होते हैं साँसे  एक  बोझ  सी  लगती है   मुझे जिस्म कुछ हल्का-हल्का सा होता है रूह   पे   उदासी   की  घटा  छाती है आँख  फिर  जम  के  बरस  जाती  है रात  तेरी  यादों  क... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   11:35am 23 Jun 2015 #
Blogger: परी ऍम 'श्लोक'
आप  जबसे   हमारे   ख़ुदा  हो   गएदिल के अरमां सभी बा-सफ़ा हो गएकरके  हमसे कयामत  के वादें  सनम छोड़  राहों  में   ही  लापता  हो   गएभूलकर   भी   न  लौटेंगे   तेरी   गलीअब बहुत तुम से जां हम खफ़ा हो गएहो  मुबारक़   तुम्हें   ज़श्न  जारी   करोइश्क़ &nb... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   3:58am 22 Jun 2015 #
Blogger: परी ऍम 'श्लोक'
ये ज़रूरी तो नहीं कि मुझपर रोज़ मेहरबां हो ख़ुदा उसके दर पर भी तो लाखों सवाली होंगे ये ज़रूरी तो नहीं किरोज़ मेरे जज़्बातों को मिलते रहे लव्ज़ नए और हर रोज़ ख़्यालों को तेरी गली में आने की इज़ाज़त हो यूँ रोज़ दरीचे का पर्दा हटा मिल जाए चाँद मुझे ऐन चमकता हुआ दिख जाएकभी ... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   7:52am 11 Jun 2015 #
Blogger: परी ऍम 'श्लोक'
ज़ेहन जब भारी तबाही से गुज़रता है मैं आकर ठहर जाती हूँ तुम्हारी नज़्म की गुनगुनी पनाहों में और खुद को महफूज़ कर लेती हूँ तमाम उलझनों से आवाज़ जो हलकी सी मेरे जानिब आई थी कभीउसे रखा है संभाल के कच्ची उम्र से अब तक वक़्त बे-वक़्त पहन लेती हूँ उसे कानों में  तुम्हारे ख़्यालों से उभ... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   6:53am 18 May 2015 #
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