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बेपरवाह लहरें

वक़्त, जो किसी के लिए नहीं रुकताबस हौसलों का मोहताज होता है, ताकि वो बन-बिगड़ सके कोशिशों के दरम्यान और करवट ले सके ज़िन्दगी उम्र के तमाम पथरीले रास्ते वक़्त ने भी तय किए हैं वक़्त बदलते देर नहीं लगती, ठोकरों पर रुककर वो पीछे नहीं देखता बस आगे बढ़ जाता है हम वक़्त को ...
बेपरवाह लहरें...
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  February 25, 2017, 1:00 pm
मेरी सांसें मेरी धड़कन तू मौसम की रवानी हैरगों में इश्क तेरा है, तू ही अब जिंदगानी है।ये उजली-सी सुबह तू है, तू ही अब शाम है मेरीये तारे, चांद, ये ऋतुएं, तेरी ही बस कहानी हैंजीवन की नदी में एक नाजुक कंकड़ी-सी येमोहब्बत, मेरे ख्वाबों मेरी यादों से पुरानी है।मेरी सांसों का मकसद...
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  September 26, 2014, 12:03 pm
दर्द-ए-दिल हर सुबह हर शाम दे गयावो चंद मुलाकातों में अपना नाम दे गयाहम तो थे बेफिकर मौजों में थी नजरमुस्कुराकर मुहब्बत का इंतकाम ले गयाकल तक हो जो भी चाहत अब वो ही रह गयामेरी हसरतों को इश्क का गुलाम कर गयाबसने लगा है आज धड़कनों की जगह वोजीने की वजह मुझको वो तमाम दे गया...
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  September 5, 2014, 11:54 am
तेरे साथ हमकदम थे, तेरे लिए सनम थेतुझसे थी मेरी हस्ती, तेरे बिना ना हम थेतेरे साथ ही चले हम, तेरे लिए ठहर गएदिल में कसक लिए हम बेसाख्ता बिखर गएकहते थे तेरा जाना जाएगा, जाएगा भूल दिल येतूं दूर हो भले ही, तेरी याद में संवर गएइश्क का गुबार-ए-ख्वाब था, कल था अभी नहीं हैतुम भी कही...
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  August 3, 2014, 2:10 pm
वो बचपन का जमाना थाजो दुनिया से बेगाना थाजहां गुड़िया की शादी थीजहां गुड्डे का गाना थाकभी अंताक्षरी के दिनकभी चौपाल सजती  थीगुलाबी दिन हुआ करतेगुलाबी रात लगती थीजेबों में कुछ आने थेमगर मेले सुहाने थेवो बाइस्कोप अच्छे थे डंडा गिल्ली पे ताने थेचवन्नी की बरफ मिलतीअ...
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  July 23, 2014, 3:50 pm
इस गांव की हवेलियों के पीछेएक चमारों की बस्ती हैरहती हैं जहां मुनिया, राजदेई और जुगुरीअपनी चहक से मिटाती हैं गरीबी का दंशये उन चमारों की बेटियां हैजिनके मजबूत हाथ और बलिष्ठ शरीरजमींदारों के खेत में हरियाली बोते हैंलोगों का पेट भरते हैं अन्नदाता हैं हमारेभयानक ठंड औ...
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  July 20, 2014, 1:32 pm
सुन लो कान्हा मेरे कान्हामैं सखियों संग न जाऊंगीमैं तुम संग दिन भर डोलूंगीदेखो कान्हा मेरे कान्हाजब रास रचाई थी तुमनेमैं तन-मन भूल चुकी थी सचतुम भोले-भाले चंचल सेमोहक चितवन, आमंत्रण सेमुरली मधुर बजा कान्हानित लीला नई दिखाते होमैं हुई प्रेम में दीवानीतुम क्यों ना प्...
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  July 19, 2014, 3:12 pm
स्वाहा तुम्हीं स्वधा तुम होतुम कल्याणी सृष्टि कीबन मोहिनी जग को रचती स्त्री तुम सचमुच अद्भुत होएक बदन एक ही जीवन पर इतने रूपों में जीवित होसबसे पावन प्रेम तुम्हारास्त्री तुम सचमुच अद्भुत होअन्नपूर्णा इस जग ही तुम ही क्षुधा मिटाती होप्रेम भरा हर रूप तुम्हारास...
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  July 15, 2014, 12:28 pm
दुनिया के भगवान कहे जाने वाले सूरज का इस तंग जगह से कोई वास्ता नहीं रहतानहीं डालता कभी रोशनी इन अंधेरी गलियों परकि वो भी शुचिता की परंपरा को तोड़ नहीं सकताहोठों पर लाली, माथे पर बिंदी सजायेकतार में खड़ी ये सुहागिनें नहीं पति नहीं उन्हें तो ‘किसी का भी’ इंतजार हैजो नी...
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  July 7, 2014, 1:48 pm
औरत का नाम जेहन में आते ही एक कोमल आकर्षक काया आंखों के सामने सजीव हो उठती हैजिसका भाग्य ही जैसे उसकी सुंदरता होकवियों ने उसे हिरनी सा बतायातो चित्रकारों ने प्रकृति सा मनोरमगीतों में वह झरने की कल-कल हैतो स्वर में कोयल से भी मीठी किसी का जीवन सार बनकर मन में बसाई ग...
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  June 17, 2014, 3:26 pm
मेरे जीवन ग्रंथ, मेरे कर्मयोगी पिताआपके लिए आज का एक दिन तो क्याजीवन भर जश्न मनाऊं तो कम हैकि आपके रूप में ईश्वर का हाथ मेरे सिर पर हैआप वेदों की पवित्रता हो मेरे लिएजिसमें सजी हैं मेरे पुरखों की परिचय ऋचाएंआपकी आंखों में साक्षात वह ब्रह्म हैजो पीड़ाओं का पहाड़ ढोकर भी उ...
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  June 15, 2014, 11:49 am
दिन भर की थकान के बादसूरज जब ढलने लगता हैउसकी सुनहरी रश्मियों से टकराकर बनने वालीतुम्हारी परछार्इं को कैद कर लेना चाहती हूंछत की मुंडेर पर खड़ी रहकर अनवरतउस परछार्इं को जाते हर दिन देखती हूंजो तुम्हारे लौटने के साथ-साथमुझसे दूर होती चली जाती हैहर दिन तुम्हें छूकर आने...
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  June 12, 2014, 12:00 pm
मां अतुल्य है जीवन की साक्षी है लेकिन पिता बिना मां की परिभाषा कहां बन पातीमां छांव तो पिता वो बरगद का पेड़ हैंजिसकी छत्रछाया में मां हमें पालती हैमेरे पिता, बचपन में आपकी फटकार के संगमैंने आपका दिल धड़कते महसूस किया हैपर मां की डांट के बाद आपका प्यारमन के कोनों में प्...
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  June 2, 2014, 2:36 pm
मेरे बाबा मुझे ब्याहना चाहते होखुद से दूर भेजना चाहते होअपने आंगन की लाडली को किसी को सौंप देना चाहते होमेरे प्यारे बाबा ऐसा वर ढूंढो जो मेरा हाथ थामकर चलेसात जन्मों के बंधन नहीं मानती मैंपर यह जन्म उसका और मेरा साझा होमेरे हिस्से की धूप-छांवसाथ खड़े रहकर महसूस करे...
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  May 27, 2014, 12:31 pm
गांव की झोपड़ियों के बीचएक कुएं का पानी हर मौसम मेंसबकी प्यास बुझाता हैतृप्त चेहरे देख, विचित्र संतोष उसमें ‘जीवन’ भर देता है।लगभग न दिखने वाले अस्तित्व में भी अपनी सूखती धमनियों से निचोड़ कर तमाम जलराशिउस गांव की छोटी-छोटी बाल्टियों में भर देता हैकुएं की डाबरों म...
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  May 26, 2014, 4:41 pm
वह अल्हड सी लड़की अब बहू हो चुकी हैनर्म हाथों से वह रोटियां उठा लेती हैजिसे चिमटे से छूने में भी डरती थीबाबा की राजकुमारीअब पति के इशारों पर चलती हैचावल से कंकड़ों को बीनती सिल-बट्टे पर मसाले पीसती माथे पर आए पसीने को पोंछतीमुस्कुराती है हर आदेश परकिसी का खाना किसी क...
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  May 7, 2014, 3:10 pm
मेरे बचपन के गीतों मेंतुम लोरी और कहानी मेंतुम मुझमें हर पल हंसती होमैं तेरी जैसी ही दिखती हूंवो दिन जब तुम मुझको ओ मांगलती पर डांटा करती थीफिर चुप जाकर कमरे में उसखुद ही रोया करती थी मांतुम पहला अक्षर जीवन का तुम मेरे जीवन की गति होखुली आंखों का सुंदर स्वप्न दुनिय...
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  May 3, 2014, 6:14 pm
आज गांव का बड़ा बरगद का वृक्षसूना है, उदास सा अकेलाकल तक जो उसकी गोद मेंखेला करते थे, वे बच्चेआज बड़े हो गये हैंधूल भरे उलझे बालों की चोटियां गूथती वो गुड़िया जैसी थीऔर उसे मारता, दुलारता वो नन्हा पर शैतान सा बच्चा परदेश गए थे जब दोनों तो यहीं पर अपने दोस्तों से मिलक...
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  May 3, 2014, 4:02 pm

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बेपरवाह लहरें...
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  October 27, 2013, 4:47 pm
मन में आह उपजाती,वेदना का कहरअविरल उच्छवासों मेंसमेट कर छुपाती हूं।अटकती सांसेंआत्मा को चीरकर,आंसुओं के दामन में लुढ़क जाती हैं।पीड़ा की कठोरता मुझमें  टूटकर तब,भावनाओं को लिये आंखों में पिघल जाती है।उलझनों की लहरों कोजीवन के आह्लादों पर,ठोकरें मारने से क...
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  September 26, 2013, 5:52 pm
क्यों चाहकर भी तेरी याद न भुला पाऊं।दिल के जख्मों को ठहाकों में न छुपा पाऊं।आंसू बन के तेरी यादें बरसती जाती हैं,तेरी जैसी संगदिल क्यों न बन पाऊं ।अपना जी भर के बिजलियां तूं गिरा ले मुझ पे,इससे पहले कि मैं लंबे सफर निकल जाऊं।मेरी सांसों ने भी तो मुझसे बेवफाई की,तेरी चाह...
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  September 25, 2013, 4:33 pm
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