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Blog: बेपरवाह लहरें

Blogger: smita singh
मेरा मैं खुद ही परिचय हूँ दुनिया जिसकी आभारी है मैं सर्वश्रेष्ठ कृति ईश्वर की, प्रकृति जिस पर बलिहारी है मैं पुरुष की मां के रूप में हूँ, बेटी या बहन स्वरूपा हूँ मैं ही काली मैं ही चंडी, मैं सौम्य रूप में दुर्गा हूँ मैं त्याग की मूरत भी हूँ जो, दुनिया को रक्त से सींचे है मै... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   10:33am 8 Mar 2018 #
Blogger: smita singh
वो मोहब्बतों के पल और वो फिक्र भरी शामें तुम दूर हो गए तो क्या वो याद नहीं आएंगी! जब तुमसे कोई जिद करेगा, जब कोई तुम पे मरेगा हसरत भरी निगाहों से तेरी तरफ देखेगा याद करना न चाहो भले पर याद मेरी आएगी जब शाम ढलेगी और चाय बनेगी कोई प्यार से कॉफ़ी का मग हाथों में थमाएगा तो बि... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   11:28am 28 Dec 2017 #
Blogger: smita singh
अचानक एक साथ विश्व के सारे शब्द शून्य हो गए हैं.. जहां ह्रदय की उम्मीदें गुणा होकर शून्य हुई जा रही हैं सूरज की मद्धम होती किरणें अगली सुबह तक प्रतीक्षा करेंगी स्मृतियों के धागे बिछोह की आग में जलकर ख़ाक होने को सज्ज हैं क्यों हुई थी वो तत्परता, जिसने नदी के आवेग क... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   4:33pm 7 Dec 2017 #
Blogger: smita singh
बारिश तो उस बरस भी हुई थी, जब मेरे हाथों में तूने अंजलि भर-भर कर पानी डाला था, बारिश आज भी हुई है और हर तरफ पानी है, लेकिन मेरी हथेलियां सूखी पड़ी हैं इन बूंदों से खेलना तो तुमने ही सिखाया फिर अकेले कैसे खेलूं, ये क्यों नहीं बताया हवाओं के चलने के साथ ही कॉफ़ी के कप प... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   5:00pm 17 Nov 2017 #
Blogger: smita singh
ज़रूरी नहीं कि रोने को हर बार कोई कन्धा ही हो अपने घुटनों में टूटकर बिखर जाना भी दिल को हल्का करता है कोई हाथ थामकर आपको दिलासा दे, ये हमेशा तो नहीं होगा खुद संभलकर लड़खड़ाते कदम उठाने से भी रास्ता कट ही जाता है वादा किया जो ताउम्र फिक्र करने का उसने, सपना रहा हो शायद&nb... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   4:22pm 17 Nov 2017 #
Blogger: smita singh
किसी को पाकर खोना क्या होता है किसी का होकर न होना क्या होता है हंस-हंसकर रोना क्या होता है... ये तुमको भी पता होगाजी-जीकर मरना क्या होता है न चाहकर कुछ करना क्या होता है दर्द रह-रहकर उभरना क्या होता है ये तुमको भी पता होगाअपने हाथों कोई आग नहीं लगाता पर आग में ... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   4:10pm 17 Nov 2017 #
Blogger: smita singh
मैं जानती हूँ इन रास्तों पर तुम्हारा होना तो दूर निशाँ मिलना भी मुश्किल है पर तकती रहती हूँ एकटक उसी तरफ शायद तुम आ जाओगे इस भ्रम में हूँये खुशफहमी नहीं हो सकती क्योंकि सत्य जानती हूँ मैं तुम किसी अलग राह पर निकल पड़े हो पर ये मेरी इबादत है जो ईश्वर की तरह तुम प... Read more
clicks 68 View   Vote 0 Like   4:03pm 17 Nov 2017 #
Blogger: smita singh
वक़्त, जो किसी के लिए नहीं रुकताबस हौसलों का मोहताज होता है, ताकि वो बन-बिगड़ सके कोशिशों के दरम्यान और करवट ले सके ज़िन्दगी उम्र के तमाम पथरीले रास्ते वक़्त ने भी तय किए हैं वक़्त बदलते देर नहीं लगती, ठोकरों पर रुककर वो पीछे नहीं देखता बस आगे बढ़ जाता है हम वक़्त को ... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   7:30am 25 Feb 2017 #
Blogger: smita singh
मेरी सांसें मेरी धड़कन तू मौसम की रवानी हैरगों में इश्क तेरा है, तू ही अब जिंदगानी है।ये उजली-सी सुबह तू है, तू ही अब शाम है मेरीये तारे, चांद, ये ऋतुएं, तेरी ही बस कहानी हैंजीवन की नदी में एक नाजुक कंकड़ी-सी येमोहब्बत, मेरे ख्वाबों मेरी यादों से पुरानी है।मेरी सांसों का मकसद... Read more
clicks 232 View   Vote 0 Like   6:33am 26 Sep 2014 #
Blogger: smita singh
दर्द-ए-दिल हर सुबह हर शाम दे गयावो चंद मुलाकातों में अपना नाम दे गयाहम तो थे बेफिकर मौजों में थी नजरमुस्कुराकर मुहब्बत का इंतकाम ले गयाकल तक हो जो भी चाहत अब वो ही रह गयामेरी हसरतों को इश्क का गुलाम कर गयाबसने लगा है आज धड़कनों की जगह वोजीने की वजह मुझको वो तमाम दे गया... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   6:24am 5 Sep 2014 #
Blogger: smita singh
तेरे साथ हमकदम थे, तेरे लिए सनम थेतुझसे थी मेरी हस्ती, तेरे बिना ना हम थेतेरे साथ ही चले हम, तेरे लिए ठहर गएदिल में कसक लिए हम बेसाख्ता बिखर गएकहते थे तेरा जाना जाएगा, जाएगा भूल दिल येतूं दूर हो भले ही, तेरी याद में संवर गएइश्क का गुबार-ए-ख्वाब था, कल था अभी नहीं हैतुम भी कही... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   8:40am 3 Aug 2014 #
Blogger: smita singh
वो बचपन का जमाना थाजो दुनिया से बेगाना थाजहां गुड़िया की शादी थीजहां गुड्डे का गाना थाकभी अंताक्षरी के दिनकभी चौपाल सजती  थीगुलाबी दिन हुआ करतेगुलाबी रात लगती थीजेबों में कुछ आने थेमगर मेले सुहाने थेवो बाइस्कोप अच्छे थे डंडा गिल्ली पे ताने थेचवन्नी की बरफ मिलतीअ... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   10:20am 23 Jul 2014 #
Blogger: smita singh
इस गांव की हवेलियों के पीछेएक चमारों की बस्ती हैरहती हैं जहां मुनिया, राजदेई और जुगुरीअपनी चहक से मिटाती हैं गरीबी का दंशये उन चमारों की बेटियां हैजिनके मजबूत हाथ और बलिष्ठ शरीरजमींदारों के खेत में हरियाली बोते हैंलोगों का पेट भरते हैं अन्नदाता हैं हमारेभयानक ठंड औ... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   8:02am 20 Jul 2014 #
Blogger: smita singh
सुन लो कान्हा मेरे कान्हामैं सखियों संग न जाऊंगीमैं तुम संग दिन भर डोलूंगीदेखो कान्हा मेरे कान्हाजब रास रचाई थी तुमनेमैं तन-मन भूल चुकी थी सचतुम भोले-भाले चंचल सेमोहक चितवन, आमंत्रण सेमुरली मधुर बजा कान्हानित लीला नई दिखाते होमैं हुई प्रेम में दीवानीतुम क्यों ना प्... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   9:42am 19 Jul 2014 #
Blogger: smita singh
स्वाहा तुम्हीं स्वधा तुम होतुम कल्याणी सृष्टि कीबन मोहिनी जग को रचती स्त्री तुम सचमुच अद्भुत होएक बदन एक ही जीवन पर इतने रूपों में जीवित होसबसे पावन प्रेम तुम्हारास्त्री तुम सचमुच अद्भुत होअन्नपूर्णा इस जग ही तुम ही क्षुधा मिटाती होप्रेम भरा हर रूप तुम्हारास... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   6:58am 15 Jul 2014 #
Blogger: smita singh
दुनिया के भगवान कहे जाने वाले सूरज का इस तंग जगह से कोई वास्ता नहीं रहतानहीं डालता कभी रोशनी इन अंधेरी गलियों परकि वो भी शुचिता की परंपरा को तोड़ नहीं सकताहोठों पर लाली, माथे पर बिंदी सजायेकतार में खड़ी ये सुहागिनें नहीं पति नहीं उन्हें तो ‘किसी का भी’ इंतजार हैजो नी... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   8:18am 7 Jul 2014 #
Blogger: smita singh
औरत का नाम जेहन में आते ही एक कोमल आकर्षक काया आंखों के सामने सजीव हो उठती हैजिसका भाग्य ही जैसे उसकी सुंदरता होकवियों ने उसे हिरनी सा बतायातो चित्रकारों ने प्रकृति सा मनोरमगीतों में वह झरने की कल-कल हैतो स्वर में कोयल से भी मीठी किसी का जीवन सार बनकर मन में बसाई ग... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   9:56am 17 Jun 2014 #
Blogger: smita singh
मेरे जीवन ग्रंथ, मेरे कर्मयोगी पिताआपके लिए आज का एक दिन तो क्याजीवन भर जश्न मनाऊं तो कम हैकि आपके रूप में ईश्वर का हाथ मेरे सिर पर हैआप वेदों की पवित्रता हो मेरे लिएजिसमें सजी हैं मेरे पुरखों की परिचय ऋचाएंआपकी आंखों में साक्षात वह ब्रह्म हैजो पीड़ाओं का पहाड़ ढोकर भी उ... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   6:19am 15 Jun 2014 #
Blogger: smita singh
दिन भर की थकान के बादसूरज जब ढलने लगता हैउसकी सुनहरी रश्मियों से टकराकर बनने वालीतुम्हारी परछार्इं को कैद कर लेना चाहती हूंछत की मुंडेर पर खड़ी रहकर अनवरतउस परछार्इं को जाते हर दिन देखती हूंजो तुम्हारे लौटने के साथ-साथमुझसे दूर होती चली जाती हैहर दिन तुम्हें छूकर आने... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   6:30am 12 Jun 2014 #
Blogger: smita singh
मां अतुल्य है जीवन की साक्षी है लेकिन पिता बिना मां की परिभाषा कहां बन पातीमां छांव तो पिता वो बरगद का पेड़ हैंजिसकी छत्रछाया में मां हमें पालती हैमेरे पिता, बचपन में आपकी फटकार के संगमैंने आपका दिल धड़कते महसूस किया हैपर मां की डांट के बाद आपका प्यारमन के कोनों में प्... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   9:06am 2 Jun 2014 #
Blogger: smita singh
मेरे बाबा मुझे ब्याहना चाहते होखुद से दूर भेजना चाहते होअपने आंगन की लाडली को किसी को सौंप देना चाहते होमेरे प्यारे बाबा ऐसा वर ढूंढो जो मेरा हाथ थामकर चलेसात जन्मों के बंधन नहीं मानती मैंपर यह जन्म उसका और मेरा साझा होमेरे हिस्से की धूप-छांवसाथ खड़े रहकर महसूस करे... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   7:01am 27 May 2014 #
Blogger: smita singh
गांव की झोपड़ियों के बीचएक कुएं का पानी हर मौसम मेंसबकी प्यास बुझाता हैतृप्त चेहरे देख, विचित्र संतोष उसमें ‘जीवन’ भर देता है।लगभग न दिखने वाले अस्तित्व में भी अपनी सूखती धमनियों से निचोड़ कर तमाम जलराशिउस गांव की छोटी-छोटी बाल्टियों में भर देता हैकुएं की डाबरों म... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   11:11am 26 May 2014 #
Blogger: smita singh
वह अल्हड सी लड़की अब बहू हो चुकी हैनर्म हाथों से वह रोटियां उठा लेती हैजिसे चिमटे से छूने में भी डरती थीबाबा की राजकुमारीअब पति के इशारों पर चलती हैचावल से कंकड़ों को बीनती सिल-बट्टे पर मसाले पीसती माथे पर आए पसीने को पोंछतीमुस्कुराती है हर आदेश परकिसी का खाना किसी क... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   9:40am 7 May 2014 #
Blogger: smita singh
मेरे बचपन के गीतों मेंतुम लोरी और कहानी मेंतुम मुझमें हर पल हंसती होमैं तेरी जैसी ही दिखती हूंवो दिन जब तुम मुझको ओ मांगलती पर डांटा करती थीफिर चुप जाकर कमरे में उसखुद ही रोया करती थी मांतुम पहला अक्षर जीवन का तुम मेरे जीवन की गति होखुली आंखों का सुंदर स्वप्न दुनिय... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   12:44pm 3 May 2014 #
Blogger: smita singh
आज गांव का बड़ा बरगद का वृक्षसूना है, उदास सा अकेलाकल तक जो उसकी गोद मेंखेला करते थे, वे बच्चेआज बड़े हो गये हैंधूल भरे उलझे बालों की चोटियां गूथती वो गुड़िया जैसी थीऔर उसे मारता, दुलारता वो नन्हा पर शैतान सा बच्चा परदेश गए थे जब दोनों तो यहीं पर अपने दोस्तों से मिलक... Read more
clicks 217 View   Vote 0 Like   10:32am 3 May 2014 #
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