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Blog: सुबोध- चमकीले पल

Blogger: subodh
ज़िन्दगी का हर लम्हा हमें कुछ न कुछ सीखने का मौका देता है , ये हम पर है कि हम कुछ सीखते है या हमारे साथ या हमारे सामने होने वाली घटनाओं को यूँ ही जाने देते है .मुझे याद है बरसों पहले मैं नैनीताल में घूमने गया था , मैं नौकुचिया ताल देखने गया था , मैं वहां बैठा था और वहां की खू... Read more
clicks 249 View   Vote 0 Like   12:56am 21 Nov 2015 #
Blogger: subodh
ज़िन्दगी हमेशा चुनौतीपूर्ण होती है और चुनौती में बने रहना भी चुनौतीपूर्ण होता है .एक जैसी परिस्थितियाँ किसी के लिए आसान और सहज होती है और किसी के लिए कठिनाइयाँ बन जाती है, समस्या बन जाती है .हर नई परिथिति हर एक के लिए शुरू में कठिनाई ही होती है ,मुश्किल ही होती है , मुसीबत ह... Read more
clicks 242 View   Vote 0 Like   1:16am 4 Nov 2015 #
Blogger: subodh
महत्त्वपूर्ण कहना नहीं , दिखना नहीं , बल्कि करना होता है और करने से भी ज्यादा महत्त्वपूर्ण होना होता है .कहा बहुत कुछ जाता है लेकिन किया नहीं जाता , दिखता बहुत कुछ है कि ये किया जा रहा है लेकिन होता नहीं है ,रिजल्ट जो कहा जाता है वो नहीं आता है .जब करना शुरू करते है तो करने के ... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   1:30am 30 Oct 2015 #
Blogger: subodh
विकास या पतन हमेशा व्यक्तिगत होता है..इसके लिए किसी व्यक्ति,परिवार ,समाज,माहौल,संस्कार या परंपरा को दोष देना अपनी जिम्मेदारी से बचना भर है,जिम्मेदारी नकारना है.एक शराबी बाप के दो बेटों में से एक शहर का गरीब मशहूर शराबी बनता है और दूसरा धनवान मशहूर उद्योगपति बनता है जबक... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   1:22am 28 Oct 2015 #
Blogger: subodh
सच क्या सिर्फ वही है जो तुम देखते हो , महसूस करते हो , छूते हो, गले लगाते हो, जीते हो और ख़ुश होते हो कि तुम सच से रूबरू हो !!!सच का एक दूसरा पहलू भी होता है जिसे तुम सब कुछ जाने के बाद भी नहीं जानते !!! एक अनदेखा ,अन्जाना, अचिन्हित सच !!तुम्हारा आज का सच क्या पता कब सिक्के का दूसरा पहल... Read more
clicks 205 View   Vote 0 Like   7:09am 26 Aug 2015 #
Blogger: subodh
तुम्हारी हार की वजह , असफलता की वजह तुम्हारा अहंकार है कि मैं सब कुछ जानता हूँ - मैं मानता हूँ तुम बहुत कुछ जानते हो , जवान हो , काबिल हो, नई पीढ़ी से हो, टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है, सिस्टम कैसे बनाये जाते है , कैसे चलाये जाते है - सब कुछ जानते हो तुम और इस सब कुछ जानने ने तुम्हे... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   1:04am 5 May 2015 #
Blogger: subodh
क्या करोगे जीत का सेहरा पहन कर ?अपनों को दुखी कर उनके खिलाफ लड़ी हुई जंग में जीत भी गए तो क्या ,ये जंग किसी कौरव की नहीं,किसी पांडव की नहीं उनकी है जो कल भी तुम्हारे थे,आज भी तुम्हारे है और तुम चाहे जीतो या हारो तुम्हारे ही रहेंगे .तुम खेल रहे हो अपने बच्चे के साथ और उसे खेल म... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   5:33pm 17 Apr 2015 #
Blogger: subodh
मुझे याद है बचपन में मैं खुद के बनाये हुए मिटटी के घरोंदे मन भर जाने पर या खेल ख़त्म होने पर बड़ी सहजता और बिना किसी तकलीफ या दर्द के एहसास के तोड़ दिया करता था , आज उतनी सहजता के कुछ भी नहीं कर पाता, यहाँ तक कि खाना खाते वक्त भी ध्यान रखता हूँ मुंह ज्यादा नहीं खोलना है ,कौर छोट... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   5:29pm 17 Apr 2015 #
Blogger: subodh
जिस ऊंचाई की बात तुम करते हो डर लगता है उस ऊंचाई के बारे में सोच कर भी लेकिन जब सोचता हूँ , मथता हूँ खुद को तो पाता हूँ सौ मील का फ़ासला भीकदम-कदम चल कर तय होता है ,आज इतना बड़ा मैंएक-एक दिन गुजार कर हुआ हूँ तो हासिल कर लूंगा वो ऊंचाई भी जिसकी बात तुम करते होरफ्ता-रफ्ता ...सुबोध- अ... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   5:24pm 17 Apr 2015 #
Blogger: subodh
ज़िन्दगी में असफल वही लोग है जो गलतियाँ नहीं करते क्योंकि गलती होने के डर से वे कभी भी अपने पूर्ण प्रयास नहीं करते ,ऐसे लोग अपनी स्कूली शिक्षा में अच्छे होते है क्योंकि स्कूली शिक्षा में गलतियों पर दण्डित किया जाता है ,गलतियों से बचा जाता है .ऐसे लोग जब अपने दम पर ज़िन्द... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   5:23pm 17 Apr 2015 #
Blogger: subodh
रोटी की कीमत एक भूखा इंसान ही समझ सकता है , नौकरी की कीमत उससे पूछे जिसकी अभी-अभी नौकरी छूटी हो .पैसे की कीमत उससे पूछे जिसने अपना सब कुछ गवाँ दिया हो !!असफलता , टूटन , हताशा ज़िन्दगी का मकसद नहीं है लेकिन ये भावनाएं हमसे उसी तरह चिपकी हुई है जिस तरह जिस्म से चमड़ी.इंसान की ज़िन... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   3:26pm 12 Apr 2015 #
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कुछ भी करते हो तुम तो ये न समझना कि उसके जिम्मेदार तुम ही हो और अच्छा या बुरा जो भी असर पड़ेगा वो तुम पर ही पड़ेगा. तुम कोई भी गलत काम करते हो तो क्या सिर्फ तुम अकेले ही उसका फल पाते हो ? और कोई अच्छा काम करने पर ?सोचो तुम शराब पीकर घर आये हो बेसुध हो नशे में कुछ उल-जुलूल बक रहे ह... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   3:25pm 12 Apr 2015 #
Blogger: subodh
तुम्हे पता नहीं है क्या होगा जब तुम कुछ करने की कोशिश करोगे हो सकता है तुम असफल हो जाओ या हो सकता है सफलता तुम्हारे कदम चूमे लेकिन अगर तुम कुछ भी कोशिश नहीं करोगे तो ये निश्चित है तुम्हारे साथ कुछ भी नहीं होगा न सफलता और न ही असफलता तुम जैसे हो वैसे ही रहोगे या तुम खुद ही... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   3:24pm 12 Apr 2015 #
Blogger: subodh
कुछ सम्बन्ध ऐसे भी होते है जिन्हे हम दिल और दिमाग से लगाये बैठे होते है जिन पर हमे गुमान होता है ,गौरव होता है उन संबंधों की कलई तब खुलती है जब आप तकलीफ में होते है. हम उस बेवक़ूफ़ बंदरिया से कुछ भी अलग नहीं होते जिसका छाती से चिपका हुआ बच्चा किसी सक्रमण से ग्रसित होकर मरा ह... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   1:39am 11 Apr 2015 #
Blogger: subodh
काम (जिसे ज्यादातर लोग एक बोझ समझते है) की शक्ल में आने वाली उपलब्धियां जब गुजर जाती है और जो काम को इज्जत देता है उसे जब उपलब्धियां इज्जत देती है तब लोगों को समझ में आता है कि हमने गलती कहाँ की ! दरअसल उनकी असफलता की वजह उनकी मानसिकता होती है जो काम को बोझ समझते है . मानसि... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   1:49am 10 Apr 2015 #
Blogger: subodh
अँधेरा नकारा पक्ष नहीं है रोशनी का वो तो सिर्फ ये बताता है कि यहाँ रोशनी नहीं है इसी तरह समस्या ये बताती है कि वर्तमान में आपके पास ऐसा विचार नहीं है जो तथाकथित समस्या का समाधान दे सके . समस्या कभी ये नहीं कहती कि मेरा समाधान नहीं है बल्कि ये तो आप स्वयं है जो किसी तटस्थ ... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   1:15am 9 Apr 2015 #
Blogger: subodh
तुम्हारा सच जड़ हो गया है , वक्त के चक्के में कहीं जाम हो गया है , उम्र तुम्हारी बढ़ी है लेकिन तुम्हारी सोच समय के किसी कालखण्ड में फंसी रह गयी है और उस दौर के तत्कालीन सच में ही अटकी हुई है तभी तो तुम कल जिन आशीर्वादों के कुछ अर्थ हुआ करते थे वही आशीर्वाद दोहराते जा रहे हो, ज... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   2:08pm 7 Apr 2015 #
Blogger: subodh
हो सकता है ये छोटा सा नज़र आने वाला अवसर ही बड़ा अवसर हो और आप इस ताक में बैठे हो कि कोई बड़ा अवसर मिले और मेरे वारे- न्यारे हो जाये .अगर गौर करें तो अवसर सिर्फ एक तटस्थता भरी परिस्थिति है वे आपके प्रयास है जो इनमे रंग भरते है या इन्हे बदरंग करते है जिस तरह एग्जामिनेशन हॉल मे... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   9:19am 13 Jan 2015 #
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ज़िन्दगी जब मुश्किल हो जाये ,इतनी मुश्किल कि तुम हौंसला हारने लगो तो गौर करना और देखना डूबते हुए सूरज को कल वो वापिस लौटेगा कुछ सुस्ताने के बाद ,नए सिरे से इस संसार को रोशन करने ; तो गौर करना और महसूस करना जिस्म से छूटती हुई सांस को , वो छोड़ी इसलिए जाती है कि कार्बन डाई ऑक्... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   8:50am 31 Dec 2014 #
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गलतियां हर इंसान करता है - अगर वो ज़िंदा है तो !लेकिन फर्क इससे पड़ता है कि आपने उन गलतियों पर प्रतिक्रिया क्या और कैसे की है ,आपने गलती होने के बाद अपना माथा पीटा है या उन गलतियों से सबक लिया है .आपने आगे से कोई गलती न हो जाए इस डर से चलना ही बंद कर दिया है या बार-बार गलती कर क... Read more
clicks 218 View   Vote 0 Like   2:44am 23 Nov 2014 #
Blogger: subodh
एक दिन तुम्हारे चेहरे की ख़ूबसूरती पुरानी पड़ जाएगी ,तुम्हारा कसा हुआ जिस्म झुर्रियों से भर जायेगा , चमड़ी का कसाव, उसकी चमक अतीत की बात हो जाएगी , घनी लहराती जुल्फे चांदी के तारों में बदल जाएगी ,तुम्हारी रौबीली खनकदार आवाज़ लड़खड़ाने लगेगी ,वो कदम जिनसे धरती हिलती है उठाये... Read more
clicks 234 View   Vote 0 Like   12:16am 20 Nov 2014 #
Blogger: subodh
कल का मेरा सच आज सच नहीं रहा ,जब मैं उस सच को आज झूठ बताता हूँ तो तुम आश्चर्य करते हो !आज जिसे मैं सच मान रहा हूँ हो सकता है कल मैं उसे सच नहीं मानूं हो सकता है तुम मेरी बात नहीं समझ पाओ और फिर आश्चर्य करो. बेहतर है तुम मेरे कल के सच को जो आज झूठ बन गया है , सच और झूठ के शब्दों में ... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   1:50am 19 Nov 2014 #
Blogger: subodh
मुझे याद नहीं कितनी बार गिरा हूँ मैं कितने ज़ख्म बने मेरे जिस्म पर कितनी बार दिल चीरती हँसीहँसी गई मुझ पर मगर रूका नहीं मैंगिर-गिर कर उठा मैं झाड़ी अपनी धूलमुस्कुराया हल्का सा कसी अपनी मुट्ठियाँ और डाल कर आँखों में आँखे कहा ज़िन्दगी से -मैंने हार से बचने का एक तरीका और सीख... Read more
clicks 244 View   Vote 0 Like   12:57am 16 Nov 2014 #
Blogger: subodh
उन्हें मुगालता ये हो गया कि वे कवि हो गए मैं उनको पढता हूँ और हँसता हूँ !अंदर से कोई कहता है तुम कवि नाम के प्राणीसिर्फ दूसरों की टांग खींचते हो अनगढ़ शब्दों को वाक्य विन्यासों को पढ़ते हो ,देखते होव्याकरण की शुद्धि जांचते हो, चर्चा करते हो नाक मुंह सिकोड़ते हो भावों को नही... Read more
clicks 208 View   Vote 0 Like   1:33am 9 Nov 2014 #
Blogger: subodh
वो लफ्ज़ जो तुम्हारी आँखों ने कहे थे मुझसे आज भी सहेज रखे है मैंने वो लफ्ज़ न दिखते है न मिटते है एक फाँस की तरह सीने में चुभते है तब जब आँखों की कोरों से बहते अश्कपोंछती है उंगलियाँ एक दर्द अजीब सा उँगलियों की पोरों में समां जाता है वो लफ्ज़जो कहे तुम्हारी आँखों ने और मैंने... Read more
clicks 261 View   Vote 0 Like   1:21am 17 Oct 2014 #
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