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 युग-द्रष्टा------------एक युग-द्रष्टा निमित्त अनुशासन जरूरी, बहु-आयाम साक्षात्कार सर्व मनुजता एकसूत्रीकरण दुरह, सुधैर्य-श्रम व दृढ़ता ही सखा। उच्च-लक्ष्यी ऊर्ध्व-पश्यी, स्वप्न संभावनाओं का मूर्तरूप-परिवर्तन न आत्म-मुग्धता अपितु स्व-स्थित, ज्ञात गंतव्य निम्नता ...
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Tag :आत्म-चिंतन
  August 15, 2019, 11:57 pm
काव्य-उदयन ----------------क्या होंगे अग्रिम पल व गाथा जो इस कलम से फलित मन तो शून्य है पर लेखनी लेकर आती है भाग्य निज। कैसे निर्मित हो वह काव्य-इमारत, मन तो अभी अजान मात्र कलम व कागज हाथ में, शेष सामग्री का है अभाव।फिर कुछ यूहीं तो चलता जाता और भर जाते हैं कई पृष्ठ निरुद...
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Tag :आत्म-अभिव्यक्ति
  August 10, 2019, 9:43 pm
काव्य-उदयन ----------------क्या होंगे अग्रिम पल व गाथा जो इस कलम से फलित मन तो शून्य है पर लेखनी लेकर आती है भाग्य निज। कैसे निर्मित हो वह काव्य-इमारत, मन तो अभी अजान मात्र कलम व कागज हाथ में, शेष सामग्री का है अभाव।फिर कुछ यूहीं तो चलता जाता और भर जाते हैं कई पृष्ठ निरुद...
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Tag :आत्म-अभिव्यक्ति
  August 10, 2019, 9:43 pm
एकाकीपन --------------विशाल विश्व नर अकेला, बाह्य-शरण भी अल्प-अवधि तकतन्हाईयों में खुद ही डूबना, बहुदा प्रश्न कैसे काटें समय। कदाचित बोरियत-सीमा तक यह नितांत एकाकी पाता स्वयंकिसके पास जाकर व्यथा बाँटें, अपने में संसार जी रहें सब। अंतः-स्थिति सबकी एक सी, कुछ कह ल...
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Tag :काव्य
  July 21, 2019, 8:33 pm
एकाकीपन --------------विशाल विश्व नर अकेला, बाह्य-शरण भी अल्प-अवधि तकतन्हाईयों में खुद ही डूबना, बहुदा प्रश्न कैसे काटें समय। कदाचित बोरियत-सीमा तक यह नितांत एकाकी पाता स्वयंकिसके पास जाकर व्यथा बाँटें, अपने में संसार जी रहें सब। अंतः-स्थिति सबकी एक सी, कुछ कह ल...
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Tag :काव्य
  July 21, 2019, 8:33 pm
आत्म-निरूपण ------------------क्या है आत्म-निरूपण जीव का, कालजयी सम संवाद सर्वांग-रोम हर्षोन्मादित हर विधा से सफल साक्षात्कार। पूर्ण-विकास मानस-पटल का, कैसे लघु जीवन में संभवसीमाऐं विजित हों, अश्वमेध-यज्ञ तुरंग सा स्वछंद विचरण। कोई सुबली पकड़ लेगा साहस से, प्रतिकार रा...
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Tag :काव्य
  July 8, 2019, 12:31 am
वहम-भग्न---------अद्भुतमन-प्रणाली, उत्तंगचेष्टा, चित्तिवृहत्कायाकास्वरूपज्ञानसक्षमसंभाव्य, सर्वब्रह्मांड-कणसमाहित, तबक्यूँअल्प-विकास।मन-विचारक्याक्षणोंमें, नरकासुंदररूपहोस्वयंमेंप्रादुर्भावनिम्नसेउच्चसभीइसीचेष्टामें, कैसेनिखरेरूप, होगर्वासक्त।सभीतोभरपू...
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Tag :काव्य
  June 29, 2019, 11:15 pm
परिच्छेद– १३ यहकथासुनानेकेबाद, मुनिजाबालिनेएकतिरस्कार-पूर्णस्मितसंगअपनेपुत्र हरितवअन्यतपस्वियोंसेकहा : 'तुमसबदेखचुकेहोंकिकैसेइसकथामेंहमसबकोऔरहमारेउरोंको इतनादीर्घबाँधनेकीशक्तिहै।औरयहकाम-पीड़ितजीवहैजोअपनेदोषकारणस्वर्ग-पतितहुआ, औरपृथ्वीपरश...
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Tag :गद्य
  June 16, 2019, 11:07 pm
स्वतंत्र-विचरण-----------------स्वतंत्र मन-विचरण की, साइबेरिया हंस से दीर्घ डयन सी  सर्व-दिशा आत्मसात की, विद्युत्तरंगें सर्वत्र विकिरण की। मन-जिजीविषा उत्तंग करने की, सागर सम उछाल भरने की नदी सम लहरने-मटकने की, हिरणी सम कुलाँचे भरने की। कोयल सम नाद करने की, गायक सम राग ...
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Tag :काव्य
  June 2, 2019, 4:59 pm
परिच्छेद– १०इसपरिशेषकथाकेअति-कठिनश्रमहेतुमैंसृष्टि-गुरु (अभिभावक) गिरिसुतापार्वतीवपरमेश्वरदोनोंकीवन्दनाकरताहूँ, जिनकीदोअर्ध-देहोंकीएकवपु रचना बनतेहुएनतोसन्धिनभेदकोलक्षितहोतीहै। मैंविश्वस्रजानारायणकोनमनकरताहूँ, जिनकेद्वारानर्सिंह-रूपहर्षसेआ...
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Tag :गद्य
  May 26, 2019, 2:40 pm
परिच्छेद - ९ (भाग -२)-----------------------------"उसकेकुछदिवसबीतजानेपर, मेघनादपत्रलेखासहितआयाऔरउसकोअंतः-कक्षअंदरलाया; औरजगहदूरसेहीनमस्कारकरचुकी, चंद्रापीड़नेस्मितसेप्रीतिप्रकाशितकी, औरउठकरअतिशयदर्शितआदरसहितपत्रलेखाकोआलिंगन-बद्धकरलिया; क्योंकियद्यपिस्वभावसेप्रिय...
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Tag :गद्य
  May 11, 2019, 5:08 pm
 बाप ------दिखता रूखा-सूखा, सख़्त-डाँटता, कदाचित सुस्त-अनावश्यक भीकभी भोला, विश्व-व्यवहारिकता से परे, अबल-असहाय सा कभी। कभी अन्य उसपर हँसते भी दिखते, उड़ाते लोग सादगी का व्यंग कभी किसी दबंग की खुशामद करता, कभी शेखी भी कमतर पर। कभी अर्धांगिनी से झगड़ता, कभी सं...
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Tag :चाहत
  May 4, 2019, 11:22 pm
परिच्छेद - ९ (भाग -१)----------------------------"गंधर्व-पार्थिवोंकोविदाकहकर, पूर्णहर्ष, उत्सुकतावविस्मय-पूरितउसनेअपनीसेना-मध्यअपनेकक्षमेंप्रवेशकिया; औरशेषराजसदोंकोप्रणामकरके, उसनेवैशम्पायनवपत्रलेखाकेसंगअधिकतरदिवसबिताया, कहतेहुए, 'महाश्वेतानेऐसाकहा, ऐसाकादम्बरीने, ऐसाम...
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Tag :गद्य
  April 20, 2019, 5:30 pm
दौर्बल्य-निवारण -------------------कैसे सिखाऐं-बढ़ाऐं, अधिकार अहसास, सीधा खड़ा होना सीखभाई लोग निपट मूढ़-दमित, कैसे हों दीप्त ओर चरण प्रसारित। प्राणी-स्वरूप किस साँचे में ढ़ला, परिवेश-मिट्टी में पल-बढ़ घड़ा जीने के तरीके, कहना-सुनना, व्यवहार करना वहीं से सीखा। परिष्कृतों क...
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Tag :आत्म-अभिव्यक्ति
  April 14, 2019, 8:02 pm
दौबल्य-निवारण -------------------कैसे सिखाऐं-बढ़ाऐं, अधिकार अहसास, सीधा खड़ा होना सीखभाई लोग निपट मूढ़-दमित, कैसे हों दीप्त ओर चरण प्रसारित। प्राणी-स्वरूप किस साँचे में ढ़ला, परिवेश-मिट्टी में पल-बढ़ घड़ा जीने के तरीके, कहना-सुनना, व्यवहार करना वहीं से सीखा। परिष्कृतों को न...
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Tag :आत्म-अभिव्यक्ति
  April 14, 2019, 8:02 pm
चिरंतन विवेचन-------------------एक स्वाभाविक सा प्रश्न आज मेरे मन में आया  शनै-२ आयु बढ़ रही, जीवन यूँ बीता जा रहा।   क्या जीवन मात्र है प्रातः-अपराह्न-निशा ही मध्यहम जीते इन क्षणों में ,जैसे यही है शाश्वत सत्य। कार्यालय में काम, सहकर्मियों से संवाद-विवाद  कुछ कहना, स...
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Tag :आत्म-चिंतन
  April 7, 2019, 12:05 am
परिच्छेद - ८ (भाग -२)----------------------------"उसकीविदाईपरचन्द्रापीड़किशोरियोंद्वाराअनुसरितहुआचलागया, जोउसकेविनोदहेतुकादम्बरीकेआदेशपरप्रतिहारीद्वाराभेजीगईथी, वीणावबाँसुरी, गायन-निपुण, पाँसेवचित्रकारीकीक्रीड़क, अनुभवीचित्रकारवश्लाघ्यकाव्यकेगवैयी; उसेपूर्व-परिचितकेयूर...
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Tag :गद्य
  March 30, 2019, 5:09 pm
Journey: लेखन-संस्मरण: लेखन-संस्मरण  -------------------- लेखन भी एक विचित्र विधा, बस बलात सा प्रारम्भ करना पड़ता  कलम-कागद लेकर बैठ जाओ, क्या निकलेगा किसी ......
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Tag :
  March 22, 2019, 10:39 pm
Journey: लेखन-संस्मरण: लेखन-संस्मरण  -------------------- लेखन भी एक विचित्र विधा, बस बलात सा प्रारम्भ करना पड़ता  कलम-कागद लेकर बैठ जाओ, क्या निकलेगा किसी ......
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Tag :
  March 22, 2019, 10:39 pm
Journey: लेखन-संस्मरण: लेखन-संस्मरण  -------------------- लेखन भी एक विचित्र विधा, बस बलात सा प्रारम्भ करना पड़ता  कलम-कागद लेकर बैठ जाओ, क्या निकलेगा किसी ......
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Tag :
  March 22, 2019, 10:39 pm
लेखन-संस्मरण --------------------लेखन भी एक विचित्र विधा, बस बलात सा प्रारम्भ करना पड़ता कलम-कागद लेकर बैठ जाओ, क्या निकलेगा किसी को न पता। यह भी मंदता का शिकार होता, स्वतः तो न सक्रिय, करना पड़ता मस्तिष्क को क्रियाशीलता में जोड़ना, एकांत में ही कुछ बन पड़ता। बस हिम्मत करके ...
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Tag :काव्य
  March 22, 2019, 10:38 pm
लेखन-संस्मरण --------------------लेखन भी एक विचित्र विधा, बस बलात सा प्रारम्भ करना पड़ता कलम-कागद लेकर बैठ जाओ, क्या निकलेगा किसी को न पता। यह भी मंदता का शिकार होता, स्वतः तो न सक्रिय, करना पड़ता मस्तिष्क को क्रियाशीलता में जोड़ना, एकांत में ही कुछ बन पड़ता। बस हिम्मत करके ...
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Tag :काव्य
  March 22, 2019, 10:38 pm
लेखन-संस्मरण --------------------लेखन भी एक विचित्र विधा, बस बलात सा प्रारम्भ करना पड़ता कलम-कागद लेकर बैठ जाओ, क्या निकलेगा किसी को न पता। यह भी मंदता का शिकार होता, स्वतः तो न सक्रिय, करना पड़ता मस्तिष्क को क्रियाशीलता में जोड़ना, एकांत में ही कुछ बन पड़ता। बस हिम्मत करके ...
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Tag :काव्य
  March 22, 2019, 10:38 pm
परिच्छेद - ८ (भाग -१)"सीधेसूर्यअस्तहोनाप्रारम्भहोगयाथा, जैसेवहमहाश्वेताकीकथासुननेपरकष्टसेदिवस-कर्त्तव्यत्यागरहाहो।तबदिवसधूमिलहोगया; ज्योतिर्मयलोहितलम्बितदिनकरजैसेपूर्ण-पुष्पणमेंप्रियंगु-कुञ्जकापराग; नभ-दिशाऐंसूर्यास्त-ज्योतिबिखेररहीथी, मृदुजैसेअन...
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Tag :पुरा-साहित्य
  March 9, 2019, 10:07 pm
श्रम-विचार--------------- हम किनके लिए काम कर रहें अपने या अन्यों के, या यूँ ही शरीरों को रहें थका  गधा-बैल-ऊँट-घोड़ा सारी वय मालिक हेतु भार ढ़ोते, बदले में पुण्य लब्ध कितना?क्या श्रम का जग में कुछ आदर है, भवन बनते ही मजदूर-मिस्त्री दिए जाते हटा फैक्ट्री में मजदूर दिन-र...
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Tag :काव्य
  March 3, 2019, 12:21 am
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