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Blog: Journey

Blogger: PAWAN KUMAR
हमारी लूना---------------- एक  पिल्लीहमारेघरमें आई, और  प्रवेशहुआ आनंदलैब्रेडोरप्रजातिकीवहकृष्णश्वान-कन्या, वयदोमास।  २२अक्टूबर, २०१४सांयजब कार्यक्षेत्र महेंद्रगढ़सेघरपहुँचा,  यहघर थी, बेटा सात्विकवउसकापड़ौसी-मित्र तुषार थे वहाँ। वहअतिप... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   2:53am 29 Aug 2020 #परिचय
Blogger: PAWAN KUMAR
इंद्रधनुषी रंग------------------शाखा का सिहरना, मलय का बहना, पत्ते झड़ना, हिम-नद का सरकनाचिड़िया का गीत, समुद्र का उफान, सूरदास का गायन, बूढ़े का सम्मान।  रक्त-प्रवाह, श्वास का चलन, उर की धड़कन, उत्सर्जन तंत्र, श्रवण-नयनकंचन-चमक, कंगन खनक, रसिक धुन, झूझने की ललक, गौरव-पथ। तप्त हृदय ह... Read more
clicks 8 View   Vote 0 Like   12:56am 17 Aug 2020 #दृश्य
Blogger: PAWAN KUMAR
बरखा -बहार -----------------सुवासित सावन-शीतल समीर से उर है पुलकित, मेरा मन झूमे पर संग में  तो प्रियतमा नहीं है, दिल उमस कर ठहर जाता है। तरु शाखाऐं-पल्लव झूम रहें, कभी ऊपर-नीचे, कभी दाऐं या बाऐं एक अनुपम सी गति-प्रेरणा देते, देखो आओ बाहर स्व जड़त्व से। हम जग-अनिल से रूबरू... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   4:47pm 27 Jul 2020 #गद्य
Blogger: PAWAN KUMAR
मेरी प्रथम प्रकाशित पुस्तक 'महाकवि कालिदास विरचित'प्रिय मित्रों, यह बताते हुए मुझे अत्यधिक हर्ष हो रहा है कि ज़ोरबा बुक्स, गुरुग्राम (हरियाणा) के माध्यम से मेरी प्रथम हिंदी अनुवाद पुस्तक 'महाकवि कालिदास विरचित'दिनांक १० जुलाई, २०२० को प्रकाशित हो गई है। यह पुस्तक ... Read more
clicks 44 View   Vote 0 Like   1:29pm 18 Jul 2020 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
ख़ानाबदोशी-खोज----------------------एक ख़ानाबदोश सी जिंदगी, हर रोज़ नए की खोज निर्वाह हेतु सीमित वन-क्षेत्र, कहाँ दूर तक खोजूँ, शीघ्र वापसी की मज़बूरी। कुदरत ख़ूब अमीर बस नज़र चाहिए, यहीं बड़ा कुछ सकता मिल अति सघन इसके विपुल संसाधन, कितना ले पाते स्वयं पर निर्भर। पर कौन बा... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   12:48pm 29 Jun 2020 #आत्म-चिंतन
Blogger: PAWAN KUMAR
प्यार-प्रेम पथ----------------- हम क्यूँ जल्दी  करते, आपसी रिश्तों का न कोई  ध्यान खुद में ही सुबकते रहते, कई खुंदकें दिल में रखी पाल। अंततः इंसान हैं कौन, क्यों अपनों से मन की न सकते कह परस्पर के सुख-दुःख में सम्मिलन की होनी चाहिए पहल। क्यों सदा अपेक्षाऐं ही, कोई न... Read more
clicks 34 View   Vote 0 Like   6:56pm 14 Jun 2020 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
उत्तम-प्रवेश--------------खुली आँखों से स्वप्न देखना, तंद्रा से किंचित बाहर आनाबस यूँ नेत्र खोलें, मन में कितनी संभावनाऐं हो सकती।  शिकायतें कई तुमसे ओ जिंदगी, न खिलती, न रूप दिखाती कहाँ छुपी बैठी रूबरू न हो, तड़प रहा तुममें रहकर भी।  जल में रहकर भी प्यासा, यह तो&n... Read more
clicks 36 View   Vote 0 Like   11:56am 31 May 2020 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
विपुल परिचय------------------प्रतिदिन अनेकानेक घटित सर्वत्र, नर एक समुद्र-बूंद से भी अल्प हर पल अति महद निर्मित, कायनात के कितने क्षुद्र-कण हैं हम। कुछ पढ़ा-देखा, पृथ्वी व सूर्य की आयु बताई जाती ५ खरब वर्ष  ब्रह्मांड-वय को बिगबैंग से १५ खरब वर्ष हुआ हैं मानते लगभग... Read more
clicks 34 View   Vote 0 Like   4:30am 15 May 2020 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
स्व-उत्थान ---------------स्व-उत्थान लब्ध किस श्रेणी तक, नर मन का चरम विकास क्या अनुपम मार्ग अनुभवों का, स्वतः स्फूर्त परम-उल्लास। भरण-पोषणार्थ तन नित्य-दिवस, माँगता आवश्यक कार्य  ऊर्जा-बल प्राप्त अवयवों से, जग-कार्य संपादन में सहयोग। उससे मन-रक्त संचारित रहता, उचित क... Read more
clicks 45 View   Vote 0 Like   6:27pm 26 Apr 2020 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
कवि-उदय --------------कैसे नर-उपजित कलाकार-कवि रूप में, प्रायः तो सामान्य ही देव-दानव वही, एक स्वीकार दूजे से भीत हो कोशिश दूरी की। यह क्या है जो अंतः पिंजर-पाशित, छटपटाता मुक्ति हेतु सतत मुक्ति स्व-घोषित सीमाऐं लाँघन से, कितनी दूर तक दृष्टि संभव? दूरियों से डरे, किनारे ख... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   12:48am 16 Apr 2020 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
नर-प्रगति ------------कर्मठों को व्याज न जँचते, स्वानुरूप काम की वस्तु कर ही लेते अन्वेषण प्रखर-ऋतु से भी न अति प्रभावित, कुछ उपाय ढूँढ़ लेते, निरंतरता न भंग। बाह्य-दृश्य अति-प्रिय, चहुँ ओर घने श्वेत कुहरे की चादर से नभ-भू आवरित  स्पष्ट दृष्टि तो कुछ दूर तक ही, तथापि प... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   1:19pm 15 Mar 2020 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
कालिदास परिचय ----------------------चलो कालिदास विषय में कुछ चिंतन, स्रोत कुछ पूर्वलिखित से ही संभवउनका समकक्ष तो न कि देखा सुना हो, हाँ अध्ययन से कुछ ज्ञानार्जन। मेरे द्वारा कालिदास परिचय जैसे किसी महानर का मूढ़ द्वारा व्याख्यान या अंधों समक्ष गज खड़ा कर दिया, उनसे विवेचना हे... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   6:29pm 9 Feb 2020 #परिचय
Blogger: PAWAN KUMAR
प्रजा खुशहाल ------------------एक गहन चिंतन वर्ग-उद्भव का, दमित भावना कुछ कर सी गई घर समाज में अन्यों प्रति अविश्वास दर्शित, सत्य में वे परस्पर-सशंकित। व्यक्तिगत स्तर पर नर विकास मननता, कुछ श्रम कर अग्र भी वर्धित सामाजिक तो न एकसम वृद्धि, अनेक विकास के निचले पायदान पर।&nb... Read more
clicks 44 View   Vote 0 Like   6:50am 28 Jan 2020 #चाहत
Blogger: PAWAN KUMAR
खुशहाल प्रजा ------------------एक गहन चिंतन वर्ग-उद्भव का, दमित भावना कुछ कर सी गई घर समाज में अन्यों प्रति अविश्वास दर्शित, सत्य में वे परस्पर-सशंकित। व्यक्तिगत स्तर पर नर विकास मननता, कुछ श्रम कर अग्र भी वर्धित सामाजिक तो न एकसम वृद्धि, अनेक विकास के निचले पायदान पर।&nb... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   6:15pm 27 Jan 2020 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
खुशहाल प्रजा ------------------एक गहन चिंतन वर्ग-उद्भव का, दमित भावना कुछ कर सी गई घर समाज में अन्यों प्रति अविश्वास दर्शित, सत्य में वे परस्पर-सशंकित। व्यक्तिगत स्तर पर नर विकास मननता, कुछ श्रम कर अग्र भी वर्धित सामाजिक तो न एकसम वृद्धि, अनेक विकास के निचले पायदान पर।&nb... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   6:15pm 27 Jan 2020 #काव्य
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जीवन-कोष्टक----------------एक वृहद दृश्यमान समक्ष हो, मन के बंद कपाट सके पूर्ण खुल अनावश्यक बाधाओं से न ऊर्जा-क्षय, निपुणता अंततः जीवन-लक्ष्य। व्यवसायी-मन में अनेक गुत्थी स्थित, एक-२ कर कुरेदती रहती सब  मन तो सदैव चलायमान, पर आवश्यक तो न सब बाधा हों विजित। ... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   7:33pm 4 Jan 2020 #काव्य
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जीवन-कोष्टक----------------एक वृहद दृश्यमान समक्ष हो, मन के बंद कपाट सके पूर्ण खुल अनावश्यक बाधाओं से न ऊर्जा-क्षय, निपुणता अंततः जीवन-लक्ष्य। व्यवसायी-मन में अनेक गुत्थी स्थित, एक-२ कर कुरेदती रहती सब  मन तो सदैव चलायमान, पर आवश्यक तो न सब बाधा हों विजित। ... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   7:33pm 4 Jan 2020 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
जीवन-कोष्टक----------------एक वृहद दृश्यमान समक्ष हो, मन के बंद कपाट सके पूर्ण खुल अनावश्यक बाधाओं से न ऊर्जा-क्षय, निपुणता अंततः जीवन-लक्ष्य। व्यवसायी-मन में अनेक गुत्थी स्थित, एक-२ कर कुरेदती रहती सब  मन तो सदैव चलायमान, पर आवश्यक तो न सब बाधा हों विजित। ... Read more
clicks 52 View   Vote 0 Like   7:33pm 4 Jan 2020 #काव्य
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 महद तंतु-------------अवकाश दिन संध्या काल, कुछ मनन प्रयत्न से सुविचार आए आविर्भूत हो मन-देह, सर्वत्र विस्तृत दृष्टिकोण से सुमंगल होए। बहु श्रेष्ठ-मनसा नर जग-आगमित, समय निकाल निर्मल चिंतन  उन कृत्यों समक्ष मैं वामन, अत्यंत क्षुद्र-सतही सा ही निरूपण। कोई तुलना&n... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   5:02pm 7 Dec 2019 #आत्म-अभिव्यक्ति
Blogger: PAWAN KUMAR
 महद तंतु-------------अवकाश दिन संध्या काल, कुछ मनन प्रयत्न से सुविचार आए आविर्भूत हो मन-देह, सर्वत्र विस्तृत दृष्टिकोण से सुमंगल होए। बहु श्रेष्ठ-मनसा नर जग-आगमित, समय निकाल निर्मल चिंतन  उन कृत्यों समक्ष मैं वामन, अत्यंत क्षुद्र-सतही सा ही निरूपण। कोई तुलना&n... Read more
clicks 46 View   Vote 0 Like   5:02pm 7 Dec 2019 #आत्म-अभिव्यक्ति
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 महद तंतु-------------अवकाश दिन संध्या काल, कुछ मनन प्रयत्न से सुविचार आए आविर्भूत हो मन-देह, सर्वत्र विस्तृत दृष्टिकोण से सुमंगल होए। बहु श्रेष्ठ-मनसा नर जग-आगमित, समय निकाल निर्मल चिंतन  उन कृत्यों समक्ष मैं वामन, अत्यंत क्षुद्र-सतही सा ही निरूपण। कोई तुलना&n... Read more
clicks 42 View   Vote 0 Like   5:02pm 7 Dec 2019 #आत्म-अभिव्यक्ति
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संभव उदय--------------कितना ऊर्ध्व शिशु उदय संभव, इस मनुज के अल्प वय-काल चेष्टा से ही संपूर्ण कार्य परिणत, अनुरूप परिस्थिति मात्र सहाय। देश-काल में एक समय अनेक जन्म, आवागमन का ताँता सतत सबका तो निज समय व्यतीत, पर क्या उच्च स्तर से भी संपर्क ?  मानसिक-भौतिक की उच्च श्र... Read more
clicks 46 View   Vote 0 Like   1:03pm 21 Nov 2019 #आत्म-चिंतन
Blogger: PAWAN KUMAR
संभव उदय--------------कितना ऊर्ध्व शिशु उदय संभव, इस मनुज के अल्प वय-काल चेष्टा से ही संपूर्ण कार्य परिणत, अनुरूप परिस्थिति मात्र सहाय। देश-काल में एक समय अनेक जन्म, आवागमन का ताँता सतत सबका तो निज समय व्यतीत, पर क्या उच्च स्तर से भी संपर्क ?  मानसिक-भौतिक की उच्च श्र... Read more
clicks 46 View   Vote 0 Like   1:03pm 21 Nov 2019 #आत्म-चिंतन
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संभव उदय--------------कितना ऊर्ध्व शिशु उदय संभव, इस मनुज के अल्प वय-काल चेष्टा से ही संपूर्ण कार्य परिणत, अनुरूप परिस्थिति मात्र सहाय। देश-काल में एक समय अनेक जन्म, आवागमन का ताँता सतत सबका तो निज समय व्यतीत, पर क्या उच्च स्तर से भी संपर्क ?  मानसिक-भौतिक की उच्च श्र... Read more
clicks 44 View   Vote 0 Like   1:03pm 21 Nov 2019 #आत्म-चिंतन
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ऊर्ध्व-जिजीविषा ------------------अजीब सी हैं ये सुबहें भी, ख़ामोशी से बैठने ही देती न कुछ पढ़ो, प्रेरक लोगों में बाँटो, बैठो जैसा हो दो लिख। यह निज संग सिलसिला पाने-बाँटने का, कुछ करने का अन्य साधु उपयोग थे संभव, पर अभी वैसा जैसा भी बने।बकौल रोबिन शर्मा प्रातः ५ बजे व... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   2:13pm 4 Nov 2019 #आत्म-चिंतन
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