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Blog: Journey

Blogger: PAWAN KUMAR
आदरणीय वरिष्ठों एवं प्रिय मित्रों, यह बताते हुए मुझे हर्ष हो रहा है कि JAI3E, Noida के माध्यम से मेरी द्वितीय हिंदी अनुवाद पुस्तक 'कादंबरी - दो प्रेमी-युगलों की महान कथा'दिनांक 4 अगस्त, २०२१ को प्रकाशित हो गई है। यह अमेज़न, फ्लिपकार्ट व किंडल पर उपलब्ध है। यह महाकवि बाणभट्ट की मह... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   4:07pm 6 Aug 2021 #
Blogger: PAWAN KUMAR
संध्या व  योग-विचार --------------------------यह संध्या का समय है, मरीचिमाली शनै प्रतीची के क्षितिज में डूबता सा प्रतीत   उसके वृत्त गिर्द किंचित पीत-रक्तिक आभा, दिशाओं में भास भी हो रहा क्षीण।  प्रातः प्राची-उदय बाद दक्षिण मध्य से सायं प्रतीची-अस्तंगत तक एक अप्रतिम दृ... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   2:45am 26 Jul 2021 #दर्शन
Blogger: PAWAN KUMAR
सफल प्रेरणास्रोत स्कूल ड्रॉपआउट्स          ---------------------------------------------------पढ़े को कढ़ना जरूरी, ज्ञान का प्रयोगात्मक उपयोग ही सफलता-कुँजी विद्या ग्रहण एक सतत आत्म प्रक्रिया है, ज्ञान-कर्म एक दूसरे के पूरक। अनेक सफल व्यक्तित्व पढ़ता, वे मात्र न पुस्तकी-कीड़े अपितु कर्मठ भी ... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   10:31am 28 Apr 2021 #काव्य
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 प्रकृति-रहस्य प्रयत्न-----------------------कालानुसार हम भाव बदलते, विशेष प्रभाव होते हर नव दिनउग्र-व्यग्र, रुष्ट-क्रोधित तो हम कभी सौम्य-विनीत व प्रमुदित। कभी किए एक प्रकार स्थिति, हर परिस्थिति फिर हावी रहती मनुज क्या करे तनु ही तो है, प्राकृतिक कारक प्रभाव छोड़ते। जग में स... Read more
clicks 39 View   Vote 0 Like   12:33pm 14 Apr 2021 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
लॉक डाउन रिक्तता-विमर्श -------------------------------एक घोर रिक्तता मन को संतापित कर रही, चाहकर भी सामान्य न संभवअंतः पूर्णतया शून्य प्रतीत चाहे मुखरित न हो, हृदय में शूल सी चुभती पर। कौन कपाल के ऊपरी मध्य भाग पर पीड़ा जमाता, हृदय में आभास हलचलसब मिलकर सताते मैं नितांत निरीह, कुछ ... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   2:08am 2 Apr 2021 #आत्म-चिंतन
Blogger: PAWAN KUMAR
जीवन-समन्वय -----------------समन्वय अति-सुंदर शब्द, आज सुबह निज चक्षुओं से देखाशुक-कपोत-कोतरी, कई नग में छत पर संग चुग रहे दाना।देखता हूँ कि कोई विरोधाभास ही नहीं, सब अपने में हैं मस्तएक जाति का पक्षी दूजे के पास से बिन विरोध के चला गुजर। तुम खाओ, हमें भी लब्ध, कोई ... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   5:59pm 13 Feb 2021 #आत्म-चिंतन
Blogger: PAWAN KUMAR
मूल जीव-गठन -------------------- क्याआजीवनबदलतेरहते, यायूँहीकिंचितभौतिकपरिवर्तनसा देहवर्धितआकारशिथिलित, यौवन-बल, दीर्घकालसुदृढ़दिखते।  बाह्य-स्थलोंपरअनेकनवीन-संपर्क, स्व-स्थितिअनुसारव्यवहारभी परअंतर्निहितमूलतत्व बाहरहीजाता, निजको करताप्रदर्शितभी।कई  ... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   1:14am 17 Jan 2021 #काव्य
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निर्मल धारा ----------------थोड़ा प्रकाश भी आवश्यक एक आशा हेतु, अंधकार में प्राणी सशंकित ही रहता एक पथ प्राप्त गति हेतु, मन कुछ आशान्वित, चलो अधिक खतरा न अब दिखता।  एक रोशनी-किरण भी अँधेरा चीरने में सक्षम, अतः ... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   3:54am 10 Jan 2021 #
Blogger: PAWAN KUMAR
 शाश्वतप्रवाह-----------------कौनशाश्वतता-मननमेंसक्षमहै, हृदयसमस्तब्रह्मांडहेतुखुलसकता  जीवनसनातनएकतकहीनसंकुचितहै, निरंतरतापिरोएरखसकता।  एकसभ्यता अबाधितपूर्णजीवनदेखती, शरीर नश्वरपर सततआत्मा-प्रवाहबसचोलाबदल, पुरानेवस्त्रनकारनव-कायाप्रवेशफिरएकनिश... Read more
clicks 68 View   Vote 0 Like   12:49pm 19 Dec 2020 #आलेख
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युवा होनहार ---------------आजमननकैसेमनुजअनुगामीहोते, अपनेसेकमआयुबंधुओंकेभी कुछहोनहारअल्प-वयमेंहीलोकप्रिय-प्रभावीहैं, प्रजालोहामानलेती।  मैं५०सेऊपर, प्रयाससेकुछसफल, परगतकालसंभावना न अनुरूपमुझसेकमउम्रकेकईलोगअतिचर्चामें, जीवनमें चढ़े अनेकसोपान। ते... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   4:52am 28 Nov 2020 #काव्य
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  नई डायरी-------------फिरएकनईडायरीहाथआई, भाग्यभीनएपड़ावकीतैयारीमें पुनः कहसकतेइससंग नएदिनकीशुरुआतहोरही, सदैव प्रतीक्षा शुभ।  इसडायरीमेंकैलेंडरनहीं, खालीपृष्ठ, ऊपरहासिएमेंमात्रतिथि--- अतःस्वयमेव समयकीमुहरलगाओ, जीवनकोरापुरुषार्थसेभरो। खाली... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   5:01am 15 Nov 2020 #काव्य
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जीवन-रथ ------------- बनकुछव्यवस्थित-अनुशासित-केंद्रित, बिखरीवस्तुऐंसंग्रहितमनुष्यजीवनलघु, कर्मअत्यधिक, प्रमादहेतुसमयहीनहीं।   कैसेखंडित-छितरीऊर्जाओंकोवशमेंकरें, कुछक्षमताजोड़ें  जीवनबड़ीपरियोजना, आधुनिकप्रबंधनआयामस्थापितकरें। एक-२ईंटकोदुरस्तकरना... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   1:40am 4 Nov 2020 #काव्य
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शिव-ध्यान --------------आजमहाशिवरात्रि-अवकाश, पर कार्यालयखोला आवश्यककार्यनिबटानेहेतु कुछपश्चातऑफिसजाना, ५०मिनटघरमेंचलकरकलमपकड़ीबतियातेहेतु। अभीचलते-२शिवकी मुद्रामेंध्यानलगा, श्वासनिरुद्धकरअडिगबैठे रहते स्तंभभाँतिउनकीदेहकसीहुई, परफक्कड़हैं शरीर... Read more
clicks 73 View   Vote 0 Like   11:20am 18 Oct 2020 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
नवीनीकरण मनन -------------------------समय क्या है मात्र घड़ी में देखना, या प्रतिदिन स्वयं को करना पुनरावृत्त ऋतुऐं बदलती पुनः आ जाती, सूर्य-चंद्र चक्र की आज सी ही वेला प्रस्तुत।   अर्थ कि कल का भी यही ८:२६ प्रातः समय,&nb... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   4:06am 4 Oct 2020 #काव्य
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हमारी लूना---------------- एक  पिल्लीहमारेघरमें आई, और  प्रवेशहुआ आनंदलैब्रेडोरप्रजातिकीवहकृष्णश्वान-कन्या, वयदोमास।  २२अक्टूबर, २०१४सांयजब कार्यक्षेत्र महेंद्रगढ़सेघरपहुँचा,  यहघर थी, बेटा सात्विकवउसकापड़ौसी-मित्र तुषार थे वहाँ। वहअतिप... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   2:53am 29 Aug 2020 #परिचय
Blogger: PAWAN KUMAR
इंद्रधनुषी रंग------------------शाखा का सिहरना, मलय का बहना, पत्ते झड़ना, हिम-नद का सरकनाचिड़िया का गीत, समुद्र का उफान, सूरदास का गायन, बूढ़े का सम्मान।  रक्त-प्रवाह, श्वास का चलन, उर की धड़कन, उत्सर्जन तंत्र, श्रवण-नयनकंचन-चमक, कंगन खनक, रसिक धुन, झूझने की ललक, गौरव-पथ। तप्त हृदय ह... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   12:56am 17 Aug 2020 #दृश्य
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बरखा -बहार -----------------सुवासित सावन-शीतल समीर से उर है पुलकित, मेरा मन झूमे पर संग में  तो प्रियतमा नहीं है, दिल उमस कर ठहर जाता है। तरु शाखाऐं-पल्लव झूम रहें, कभी ऊपर-नीचे, कभी दाऐं या बाऐं एक अनुपम सी गति-प्रेरणा देते, देखो आओ बाहर स्व जड़त्व से। हम जग-अनिल से रूबरू... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   4:47pm 27 Jul 2020 #गद्य
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मेरी प्रथम प्रकाशित पुस्तक 'महाकवि कालिदास विरचित'प्रिय मित्रों, यह बताते हुए मुझे अत्यधिक हर्ष हो रहा है कि ज़ोरबा बुक्स, गुरुग्राम (हरियाणा) के माध्यम से मेरी प्रथम हिंदी अनुवाद पुस्तक 'महाकवि कालिदास विरचित'दिनांक १० जुलाई, २०२० को प्रकाशित हो गई है। यह पुस्तक ... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   1:29pm 18 Jul 2020 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
ख़ानाबदोशी-खोज----------------------एक ख़ानाबदोश सी जिंदगी, हर रोज़ नए की खोज निर्वाह हेतु सीमित वन-क्षेत्र, कहाँ दूर तक खोजूँ, शीघ्र वापसी की मज़बूरी। कुदरत ख़ूब अमीर बस नज़र चाहिए, यहीं बड़ा कुछ सकता मिल अति सघन इसके विपुल संसाधन, कितना ले पाते स्वयं पर निर्भर। पर कौन बा... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   12:48pm 29 Jun 2020 #आत्म-चिंतन
Blogger: PAWAN KUMAR
प्यार-प्रेम पथ----------------- हम क्यूँ जल्दी  करते, आपसी रिश्तों का न कोई  ध्यान खुद में ही सुबकते रहते, कई खुंदकें दिल में रखी पाल। अंततः इंसान हैं कौन, क्यों अपनों से मन की न सकते कह परस्पर के सुख-दुःख में सम्मिलन की होनी चाहिए पहल। क्यों सदा अपेक्षाऐं ही, कोई न... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   6:56pm 14 Jun 2020 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
उत्तम-प्रवेश--------------खुली आँखों से स्वप्न देखना, तंद्रा से किंचित बाहर आनाबस यूँ नेत्र खोलें, मन में कितनी संभावनाऐं हो सकती।  शिकायतें कई तुमसे ओ जिंदगी, न खिलती, न रूप दिखाती कहाँ छुपी बैठी रूबरू न हो, तड़प रहा तुममें रहकर भी।  जल में रहकर भी प्यासा, यह तो&n... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   11:56am 31 May 2020 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
विपुल परिचय------------------प्रतिदिन अनेकानेक घटित सर्वत्र, नर एक समुद्र-बूंद से भी अल्प हर पल अति महद निर्मित, कायनात के कितने क्षुद्र-कण हैं हम। कुछ पढ़ा-देखा, पृथ्वी व सूर्य की आयु बताई जाती ५ खरब वर्ष  ब्रह्मांड-वय को बिगबैंग से १५ खरब वर्ष हुआ हैं मानते लगभग... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   4:30am 15 May 2020 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
स्व-उत्थान ---------------स्व-उत्थान लब्ध किस श्रेणी तक, नर मन का चरम विकास क्या अनुपम मार्ग अनुभवों का, स्वतः स्फूर्त परम-उल्लास। भरण-पोषणार्थ तन नित्य-दिवस, माँगता आवश्यक कार्य  ऊर्जा-बल प्राप्त अवयवों से, जग-कार्य संपादन में सहयोग। उससे मन-रक्त संचारित रहता, उचित क... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   6:27pm 26 Apr 2020 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
कवि-उदय --------------कैसे नर-उपजित कलाकार-कवि रूप में, प्रायः तो सामान्य ही देव-दानव वही, एक स्वीकार दूजे से भीत हो कोशिश दूरी की। यह क्या है जो अंतः पिंजर-पाशित, छटपटाता मुक्ति हेतु सतत मुक्ति स्व-घोषित सीमाऐं लाँघन से, कितनी दूर तक दृष्टि संभव? दूरियों से डरे, किनारे ख... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   12:48am 16 Apr 2020 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
नर-प्रगति ------------कर्मठों को व्याज न जँचते, स्वानुरूप काम की वस्तु कर ही लेते अन्वेषण प्रखर-ऋतु से भी न अति प्रभावित, कुछ उपाय ढूँढ़ लेते, निरंतरता न भंग। बाह्य-दृश्य अति-प्रिय, चहुँ ओर घने श्वेत कुहरे की चादर से नभ-भू आवरित  स्पष्ट दृष्टि तो कुछ दूर तक ही, तथापि प... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   1:19pm 15 Mar 2020 #काव्य
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