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Blog: मेरे अर्थ

Blogger: Abhishek Thakur
Books read in 2017 with ratings. Books read 40. 2018's target is 56 books.p.p1 {margin: 0.0px 0.0px 0.0px 0.0px; font: 13.0px Arial; -webkit-text-stroke: #000000} p.p2 {margin: 0.0px 0.0px 0.0px 0.0px; text-align: right; font: 13.0px Arial; -webkit-text-stroke: #000000} span.s1 {font-kerning: none} table.t1 {border-collapse: collapse; table-layout: fixed} td.td1 {width: 274.0px; border-style: solid; border-width: 1.0px 1.0px 1.0px 1.0px; border-color: #cccccc #cccccc #cccccc #cccccc; padding: 2.0px 3.0px 2.0px 3.0px} td.td2 {width: 261.0px; border-style: solid; border-width: 1.0px 1.0px 1.0px 1.0px; border-color: #cccccc #cccccc #cccccc #cccccc; padding: 2.0px 3.0px 2.0px 3.0px} td.td3 {widt... Read more
clicks 61 View   Vote 0 Like   3:55am 1 Jan 2018
Blogger: Abhishek Thakur
कई बार अतीत बीत कर भी नहीं बीतता और वर्तमान आकर भी नहीं आता। आज साल भर बाद भी उस घर के बीते हुए लम्हें सीत के उभरे नक्शों की शक्ल में उसकी दीवारों से चिपके टंगें थे। उन दीवारों के दायरे में क़ैद धुएँ के गुबार, बरसाती मौसम के बदबूदार चिपचिपे कपड़े, दीवान की चादर पर चिपकी चिकत... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   4:54pm 14 Apr 2017
Blogger: Abhishek Thakur
दिलोंकीलकड़ी शायदगीलीहोचुकीधुआँतोखूबहीकरतीहैपरधधकतीनहींअब***एकटुकड़ाबादलतलाशतीहैंआँखेंगुज़रतेघनेबादलोंमेंआजभी***यूंतोरोज़हीमरतेहैंहमसभीएकबित्ताअपनेभीतरहीऔरउसअंशकेनिमित्तदोबूंदनमकीनसीटपकाभीदेतेहैंऔर बढ़जातीहै आगे ज़िंदगी***हरआदमी अपनेभीतर एक&nb... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   4:37pm 27 Mar 2017
Blogger: Abhishek Thakur
देखो! आज मैं जल्दी आ गया। कल रात एक सपने की वजह से नींद ही नहीं आई। बड़ा अजीब सपना था। मैंने देखा कि मैं अकेले खड़े एक दीवार से बातें कर रहा हूँ। तभी अचानक दीवार भी मेरी बातों का जवाब देने लगती है। मैं डर के मारे भागने की कोशिश करता हूँ। तभी दीवार फाड़ के भीतर से ढेर सारे हाथ बा... Read more
clicks 61 View   Vote 0 Like   11:25am 23 Mar 2017
Blogger: Abhishek Thakur
कल पाँच राज्यों में चुनाव के नतीजे आ गए। दिन भर YouTube और Facebook पर ऑनलाइन नतीजे देखते रहे। ये चुनाव भी एक बार फिर डेमोक्रेसी की च्विंगम ही साबित हुए। रस तो कब ही का खत्म हो चुका है बस रबड़ है जब तक चबाते रहो। प्रधानमंत्री एक बार फिर सबसे शक्तिशाली साबित हुए। उनकी जीत के बाद तथाक... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   5:47pm 12 Mar 2017
Blogger: Abhishek Thakur
हमारा समाज दरअसल एक बदलाव के दौर से गुज़र रहा है। कोई भी समाज गुज़रता है। हर दौर में गुज़रता है। दरअसल इतिहास कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो गुज़र चुकी है। हम अपनी-अपनी ज़िंदगियों को जोड़-जोड़ कर जो एक समाज बनाते हैं उसकी अपनी एक ज़िंदगी होती है। और इस समाज की ज़िंदगी की घटनाओं को ही हम इति... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   4:47am 1 Mar 2017
Blogger: Abhishek Thakur
एक बार फिर उसने बाइक की किक पर ताकत आज़माई.  लेकिन एक बार फिर बाइक ने स्टार्ट होने से मना कर दिया. चिपचिपी उमस तिस पर हेलमेट जिसे वो उतार भी नहीं सकता था. वो उस लम्हे को कोस रहा था जब इस मोहल्ले का रुख़ करने का ख़याल आया. यादें उमस मुक्त होतीं हैं और शायद इसलिए अच्छी भी लगती है... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   6:43am 18 Feb 2017
Blogger: Abhishek Thakur
Last year I read 43 books. Below are those books. Starred are recommended ones. The target for 2017 is of 60 books. Lets see how the year goes. Here goes the list:1Ba-ByeKrishn Bihari2MadhushalaBachchan*3Mere Manch Ki SargamPiyush Mishra4Gunahon Ka DevtaDharmveer Bharti5Kitne PakistanKamaleshwar*6Kathghare Mein LoktantraArundhati Roy*7Kai Chand The Sar-e-AasmanShamsurrahman Farooqi8Ek Sahityik Ke PrempatraPushpa Bharti9Death Under the DeodarsRuskin Bond10Relativity: The Special and the General TheoryAlbert Einstien11Loser Kahin KaPankan Dubey12The Glass CastleJeanette Walls*13MetamorphosisFranz Kafka14Khushwantnama (Mere Jeevan ke Sabak)Khushwant Singh15CarolPatricia Highsmith16Hum Tum aur w... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   8:18am 1 Jan 2017
Blogger: Abhishek Thakur
सितंबर में 'The Home and the World'के बाद दफ़्तर के काम में दिन कुछ यूं मसरूफ़ हुए कि पढ़ने का वक़्त निकालना मुश्किल होने लगा. फिर इधर फ़ैमिली को भी सिंगापुर शिफ्ट करने की जुगत थी जिसने लम्हों की खुरचन भी समेट डाली. दो महीने बाद दिसंबर में चार किताबों का लक्ष्य अंततः रखा:1. बा-बॉय (कृष्ण बिहा... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   10:39am 24 Dec 2016
Blogger: Abhishek Thakur
सितंबर महीने की पहली किताब थी - रबिन्द्रनाथ टैगोर की लिखी 'द होम एंड द वर्ल्ड'। यूं तो टैगोर का नाम सभी ने सुना है। गीतांजली के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार मिला था। उनका लिखा गीत 'जन गण मन'हमारा राष्ट्रगान बना और उन्हीं का लिखा एक और गीत 'आमार शोनार बांग्ला'पाकिस्तान के विभ... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   5:17am 12 Sep 2016
Blogger: Abhishek Thakur
अगस्त महीने की आखिरी किताब थी जीनेट वॉल्स की लिखी 'द ग्लास कैसल'। जीनेट वॉल्स एक अमरीकी जर्नलिस्ट हैं और ये उनका लिखा संस्मरण है। एक किताब जो उनके और उनके पिता के रिश्ते के बीच कुछ तलाश करती हुई सीधे दिल में उतरती है और कुछ हद तक उसे तोड़ भी देती है।इंसान एक परिस्थितिजन्य ... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   7:37am 4 Sep 2016
Blogger: Abhishek Thakur
अगस्त के लिए चार किताबों का लक्ष्य था और ये किताबें सोचीं थीं:1. Metamorphosis (फ्रैंज काफ्का)2. गुनाहों का देवता (धर्मवीर भारती)3. मेरे मंच की सरगम (पीयूष मिश्रा)4. Home and the World (रबिन्द्रनाथ टैगोर)इनमें से 'मेरे मंच की सरगम'और 'Home and the World'की delivery ही नहीं हो पाई। इसलिए इन दो किताबों की जगह ली ट्विं... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   11:54am 28 Aug 2016
Blogger: Abhishek Thakur
अगस्त महीने की तीसरी किताब थी - गुनाहों का देवता। किताब के लेखक हैं धर्मवीर भारती। बहुत कुछ सुना था इस किताब के बारे में। इस किताब को मेरे जान-पहचान के बहुत लोगों ने recommend भी किया था। ये हिन्दी रोमैंटिक उपन्यासों में सबसे ज़्यादा लोकप्रिय उपन्यासों में एक है। इसके कई भाषा... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   3:46am 21 Aug 2016
Blogger: Abhishek Thakur
अगस्त महीने की दूसरी किताब थी - "मिसेज़ फनीबोन्स"। किताब की लेखिका हैं ट्विंकल खन्ना। ट्विंकल खन्ना, जिन्हें ज़्यादातर लोग कई रूप में जानते हैं - राजेश खन्ना और डिंपल कपाड़िया की बेटी, अक्षय कुमार की बीवी और एक फ्लॉप एक्ट्रेस। लेकिन इनके अलावा इनकी एक शख्सियत और है। ये बात ... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   12:47pm 12 Aug 2016
Blogger: Abhishek Thakur
किसी भी देश के द्वारा चुनी गई आर्थिक नीतियाँ केवल वहाँ के नागरिकों की सामाजिक और आर्थिक ज़िंदगियों पर ही असर नहीं डालतीं बल्कि उन ज़िंदगियों की पारिवारिक और नैतिक बुनियादें भी तय करतीं हैं। ग्रेगोर साम्सा नाम का एक आदमी एक दिन सुबह-सुबह नींद से जागता है और अपने आप को एक ... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   3:27am 9 Aug 2016
Blogger: Abhishek Thakur
पाकिस्तान क्या है? क्या सिर्फ एक देश जिसने भारत से अलग हो कर अपना वजूद तलाशने की कोशिश की? या फिर पाकिस्तान एक सोच है? एक सोच जिसमें कि एक ही देश के लोग अपने बीच एक सेकटेरियन मानसिकता को पहले उपजाते हैं, फिर उसको सींचते हैं और फिर हाथों में हंसिये और कुदाल ले कर उसी फसल को क... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   7:17am 31 Jul 2016
Blogger: Abhishek Thakur
खुशवंत सिंह की एक उपन्यास 'ट्रेन टु पाकिस्तान'मैंने अपने कॉलेज के समय पढ़ी थी। वो उपन्यास आज भी मेरे पसंदीदा उपन्यासों में एक है। हाल ही में इंटरनेट सर्फ करते हुए मैं उनकी लिखी खुशवंतनामा तक पहुंच गया। यह किताब आत्मकथा नहीं है, निबंध भी नहीं हैं, न ही कोई दर्शन, लेख या चुट... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   3:54am 16 Jul 2016
Blogger: Abhishek Thakur
अभी हाल में राजदीप सरदेसाई की किताब '2014 दि इलेक्शन दैट चेंज्ड इंडिया'पढ़ी। एक ही शब्द है लाजवाब। 2014 में हुए इलैक्शन का इससे अच्छा ब्यौरा दे पाना मुश्किल है। किताब में 10 चैप्टर हैं और इनके अलावा एक भूमिका और एक एपिलॉग भी है। राजदीप सरदेसाई मीडिया में एक जाना पहचाना नाम हैं... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   3:16pm 13 Jul 2016
Blogger: Abhishek Thakur
अभी हाल ही में जो क़िताब ख़तम की वो है मनु शर्मा की लिखी 'नारद की भविष्यवाणी'। मनु शर्मा ने कृष्ण की कहानी को आत्मकथात्मक रूप में लिखा है। ये क़िताब 'कृष्ण की आत्मकथा'सिरीज़ का पहला भाग है। लिखने का तरीका मौलिक है। कृष्ण की कहानी टीवी सीरियलों में कई बार देख चुके हैं। लेकिन ए... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   11:24pm 28 Jun 2016
Blogger: Abhishek Thakur
धड़! धड़! धड़! धड़!ज़ोर से दरवाज़ा पटकने की आवाज़ हुई. 102 डिग्री बुखार में तपता नीलेश अकेला भीतर कंबल में घुसा लेटा था. रात के कोई साढ़े बारह बज रहे होंगे. बत्ती भी गुल थी. बाहर मॉनसून की झड़ी लगी थी. तीन दिन से बादल थमने का नाम नहीं लेते थे. रूममेट भी घर गया था.धड़! धड़! धड़! धड़!"कौन है?""पंकज! पी... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   3:54pm 4 Jun 2016
Blogger: Abhishek Thakur
ऐ अक्स मेरे! क्यूँ मुझसे मुलाक़ात नहीं करते?रहते हो अनमने से, कोई बात नहीं करते!वक़्त तो ला खड़ा करता है हमें दोराहे पे लेकिनइंतिख़ाब*हमारी राहों का, क्या हालात नहीं करते?हर फैसला मुताहिद* होगा ज़िंदगी में, ये उम्मीद ही बेमानी हैहै सुबूत कोई, मुखौटे सारे तब भी यूं फसादा... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   1:38am 3 Apr 2016
Blogger: Abhishek Thakur
"दवा टाइम पर लेती है कि नहीं?", बुधिया ने डपटकर पूछा. "ले तो रही हूँ.", मुंह से रुमाल हटाते हुए भीमा बोली."तो फिर ये खांसी बहनचोद बंद काहे नहीं होती?", कहते हुए बुधिया दरवाज़े से बाहर बीडी फूंकने चला गया.भीमा चुप रह गयी. क्या कहती? खांसी नहीं टीबी है! जैसे बुधिया जानता न हो! बुधिया ... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   7:15am 31 Mar 2016
Blogger: Abhishek Thakur
"तू जूस लेगी?", जसप्रीत ने जूस काउंटर से खड़े-खड़े चिल्ला कर पूछा."नहीं रे. आज रूम पे ही ठूस ठूस के खा लिया था", तनूजा अपनी कुर्सी से उठकर जसप्रीत की तरफ बढ़ती हुई बोली. "नेहा की मम्मी आयीं है न. सुबह से उठ गयीं. पराठे-शराठे. आलू की सब्जी... दही... तो उसके चक्कर में अपना भी दांव लग गया.""ने... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   8:09am 30 Mar 2016
Blogger: Abhishek Thakur
नाव बनाने वाले पश्चिम में समुन्दर किनारे ही व्यापार करते, जबकि लकड़ी के अन्य कारोबारी जंगल के पास ही अपना काम करते थे। पत्थर के कारोबारी भी समन्दर किनारे ही बैठते। झामी को पानी में नीचे ले जाने के लिए उसके चारों ओर पत्थर बांधने पड़ते थे। सारे पत्थर एक वजन के होते ताकि झ... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   1:09am 23 Nov 2015
Blogger: Abhishek Thakur
नीपल समुदाय का पूरा ताना-बाना नीपों ही से जुड़ा था। हम सागर की गहराइयों में नीप तलाशते, उन्हें तराशते, उन पर तरह तरह की नक्काशियाँ उकेरते, उन्हें रंगते। उनसे मालाएँ, गहने, मूर्तियाँ, खिलौने, गोटियाँ बनाते। उन्हें पीस कर उनसे रंगोली बनाते। रंगोली के लिए लेकिन खंडित नीपो... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   8:02am 22 Nov 2015
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