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उलूक टाइम्स

सूक्ष्म मध्यम महत दिव्य अलौकिक या और भी कई प्रकार के आभास कराते अपने ही आसपास के कार्यकलाप आसानी से जैसे खेल खेल में समझाते सर्वशक्तिमान सर्वज्ञ सर्वव्यापी सर्वभूत दिलाते अहसास सभी ज्यादातर या कुछ मनुष्यों के ही ईश्वर होने का यहीं इति कर देना या इसके बाद लिख देना क्...
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Tag :आसपास
  August 20, 2017, 10:49 pm
किसी से उधार ली गई बैसाखियों पर करतब दिखाना सीख लेना एक दो का नहीं पूरी एक सम्मोहित भीड़ का काबिले तारीफ ही होता है सोच के हाथ पैरों को आराम देकर खेल खेल ही में सही बहुत दूर के आसमान को छू लेने का प्रयास अकेले नहीं मिलजुल कर एक साथ एक मुद्दे चाँद तारे उखाड़ कर जमीन पर बिछा दे...
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Tag :कबूतर
  August 15, 2017, 9:36 pm
कहा था कोढ़ फैला कोढ़ समझ में नहीं आया तेरे मौत फैला आया आक्सीजन से कोढ़ भी हो सकता था तुझे पता नहीं थामौत देने की क्या जरूरत थी आक्सीजन से कोढ़ समझ में नहीं आ रहा होगा होता है कुछ भी सम्भव है किसी चीज से कुछ भी हो सकता है कैसे हो सकता है अखबार वालों से रेडियो वालों से टी वी वाल...
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Tag :कोढ़
  August 12, 2017, 10:20 pm
लहर कब उठेगी पता नहीं होता है जरूरी नहीं उसके उठने के  समय हाथ में किसी के कैमरा होता है शेर शायरी लिखने की बातें हैं शायरों की ऐसा सभी सुनते हैं बहुतों को पता होता है बहकती है सोच जैसे पी कर शराब सोचने वाला पीने पिलाने की बस बातें सोचता रहता है कुछ आ रहा था मौज में लिख द...
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Tag :लहर
  August 4, 2017, 9:35 pm
शतरंज की काली सफेद गोटियाँ अचानक अपने डिब्बे को छोड़ कर सारी की सारी बाहर हो गयी हैं दिखा रही हैं डिब्बे के अन्दर साथ रहते रहते आपस में हिल मिल कर एक दूसरे में खो गयी हैं समझा रही हैं तैयार हैं खुद ही मैदान में जाने के लिये आदेशित नहीं की गयी हैं विनम्र होते होते खुद ही निर...
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Tag :काला
  July 31, 2017, 11:04 pm
बहुत अच्छा लगता है जब अपने मोहल्ले की अपनी गली में अपने जैसा ही कोई मिलता है अपनी तरह का अपने हाथ खड़े किये हुऐ उसे भी वो सब पता होता है जितना तुम्हें पता होता है ना तुम कुछ कर पाते हो ना वो कुछ कर सकता है हाँ दोनों की बातों की आवृति मिलती है दो सौ प्रतिशत फलाँ चोर है फलाँ बिक...
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Tag :
  July 23, 2017, 8:42 pm
गिरोह गिरोह की बात करें देखें समझें एक दूसरे को आदाब करें किसने रोका है खामखा अकेले चने को भीड़ की खबरें दिखा कर उसकी शामें तो ना बरबाद करें माना कि जमीन से कुछ उठाने के लिये झुकना बहुत जरूरी है मिल कर झुकें हाथ में हाथ डाल कर झुकें उठा लें सारा सब कुछ मिल बाँट कर मिट्टिया...
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Tag :गिरोह
  July 17, 2017, 8:53 pm
तुझे अपनी खींचनी हैं लकीरें मुझे अपनी खींचने दे मैं भी आता हूँ देखने तेरी लकीरें तू भी बिना नागा आता रहा है लकीरें समझने आता है कोई या गिन कर चला जाता है पता नहीं चलता है फिर भी आना जाना लगा रहता है क्या कम है लकीरें खींचने वाला आने जाने वालों की गिनती से अपनी लकीरों को गि...
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Tag :लकीर
  July 11, 2017, 9:26 pm
खासों में आम सहमति से होती हैं कुछ खास बातें कहीं किसी किताब में नहीं होती हैं चलन में होती हैं कुछ पुरानी चवन्नियाँ और अठन्नियाँ अपनी खरीददारियाँ अपनी दुकानेंअपनी ही बाजार होती है होती हैं लिखी बातें पुरानी सभी हर बार फिर से लिख कर सबमें बाँटनी होती हैं पढ़ने के लिये ...
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Tag :चलन
  July 8, 2017, 10:46 pm
आप भीशायद नहीं जानते होंगे कमल जोशी को मैं भी नहीं जानता हूँ बस उसकी और उसकी तस्वीरों से कभी कभी मुठभेड़ हुई है कोई खबर ले कर नहीं आया हूँ बस लिख रहा हूँ खबर मिली है वो अब नहीं है क्यों नहीं है पता नहीं है सुना गया है लटके मिले हैंलटके या लटकाया गया पता नहीं है सुना है समाज...
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Tag :लोग
  July 4, 2017, 8:26 pm
चिट्ठा रोज भी लिखा जाता है चिट्ठा रोज नहीं भी लिखा जाता है इतना कुछ होता है आसपास एक के नीचे तीन छुपा ले जाता है मजबूरी है अखबार की भी सब कुछ सुबह लाकर नहीं बता पाता है लिखना लिखाना पढ़नापढ़ाना एक साथ एक जगह होता देखा जाता है चिट्ठाकारी सबसे बड़ी है कलाकारी हर कलाकार के पास ...
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Tag :चिट्ठाकार
  July 1, 2017, 11:08 pm
                          चिट्ठाकार दिवस की शुभकामनाएं ।आधा पूरा हो चुके साल के अंतिम दिन यानि ठीक बीच में ना इधर ना उधर सन्तुलन बनाते हुऐ कोशिश जारी है बात को खींच तान कर लम्बा कर ले जाने की हमेशा की तरह आदतन मानकरअच्छी और संतुलित सोच के लोगों को छेड़ने के लिये ...
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Tag :उलूक
  June 30, 2017, 11:50 pm
लगातार कई बरसों तक सोये हुऐ पन्नों पर नींद लिखते रहने से  शब्दों में उकेरे हुऐ सपने उभर कर नहीं आ जाते हैं ना नींद लिखी जाती है ना पन्ने उठ पाते हैं नींद से खुली आँख से आँखें फाड़ कर देखते देखते आदत पढ़ जाती है नहीं देखने की वो सब जो बहुत साफ साफ दिखाई देता है खेल के नियम खे...
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Tag :पन्ने. आदत
  June 27, 2017, 8:36 pm
हिन्दी में लिखना अलग बात है हिन्दी लिखना अलग बात है हिन्दी पढ़ लेना अलग बात है हिन्दी समझ लेना अलग बात है हिन्दी भाषा का अलग प्रश्न पत्र होता है साहित्यिक हिन्दी अलग बात है हिन्दी क्षेत्र की क्षेत्रीय भाषायें हिन्दी पढ़ने समझने वाले ही समझ सकते हैं समझा सकते हैं ये सबसे ...
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Tag :भाषा
  June 22, 2017, 10:21 pm
सबके पास होती हैं कहानियाँ कुछ पूरी कुछ अधूरी अपंग कहानियाँदबी होती है पूरी कहानियोँ के ढेर के नीचे कलेजा बड़ा होना जरूरी होता है हनुमान जी की तरह चीर कर दिखाने के लिये आँखे सबकी देखती हैं छाँट छाँट कर कतरने कहानियोँ के ढेर में अपने इसके उसके कुछ कहानियाँ पैदा होती हैं ...
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Tag :अपंग
  June 19, 2017, 10:36 pm
सोच कर लिखे गये कुछ को पढ़ कर कोई कुछ भी सोच रहा होता है लिखे हुऐ परलिखने वाला समय नहींलिख रहा होता है किसे पता होता है सोचने से लिखने तक पहुँच लेने में कितना समय लग रहा होता है होने का क्या है हो चुका कुछ आज ही नहीं हो रहा होता है पता हेीनहीं होता है बहुत बार पहले भी ...
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Tag :नया
  June 17, 2017, 9:16 pm
कृष्ण अर्जुन उपदेश और गीता आज भी हैं  बस गीता किताब नहीं रही अखबार हो गई है बुद्धिजीवियों के ऊपर बैठा हुआ कौआ का का करता है कौए को कृष्ण की नस का पता रहता है अखबार गीता है और उसपर छपी खबर श्लोक होती है जिनको नहीं पता है वो समझ लें और हनुमान चालीसा पढ़ना छोड़ कर रोज सुबह का अ...
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Tag :कौआ
  June 11, 2017, 8:21 pm
बहुत लिखता है आसपास रहता है अलग बात है लिखता हुआ कहीं भी नहीं दिखाई देता है दिखता है तो बस उसका लिखा हुआ ही दिखाई देता है क्या होता है अगर उसके लिखे हुऐ में कहीं भी वो सब नहीं दिखाई देता है जो तुझे भी उतना ही दिखाई देता है जितना सभी को दिखाई देता है आँखे आँखों में देख कर नही...
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Tag :
  June 9, 2017, 10:46 pm
महीना बदलने से किसने कह दिया लिखना बदल जाता है एक महीने में पढ़ लिख कर कहाँ कुछ नया सीखा जाता है खुशफहमी हर बार ही बदलती है गलतफहमी में जब भी एक पुराना जाता है और कोई नया आता है कोई तो बात होती ही होगी फर्जियों में फर्जियों का पुराना खाता बिना आवेदन किये अपने आप नया हो जाता ...
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Tag :चोर चोर
  June 2, 2017, 10:10 pm
सुना है बहुत कुछ बहुत तेजी से बदल रहा है पुराना कुछ भी कहीं भी नहीं चल रहा है जितना भी है जो कुछ भी है सभी कुछ खुद बा खुद नया नया निकल रहा है लिखना नहीं सीख पाया है बेवकूफ तब से अब तक लिखते लिखते अब तक लिखता चल रहा है बेशरम है फिर से लिख रहा है कब तक लिखेगा क्या क्या लिखेगा कित...
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Tag :तेजी
  May 29, 2017, 9:40 pm
कुछ कहने का कुछ लिखने का कुछ दिखने का मन किसका नहीं होता है सब चाहते हैं अपनी बात को कहना सब चाहते हैं अपनी बात को कह कर प्रसिद्धि के शिखर तक पहुँच कर उसे छूना लिखना सब को आता है कहना सब को आता है लिखने के लिये हर कोई आता है अपनी बात हर कोई चाहता है शुरु करने से पहले ही सब कुछ ...
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Tag :कोशिश
  May 24, 2017, 10:23 pm
लोग खुद के बारे में खुद को बता रहे हों कहीं जोर जोर से बोलकर लिखकर बड़े बड़े वाक्यों में बड़े से श्याम पट पर सफेद चौक की बहुत लम्बी लम्बी सीकों से लोग देख रहे हों बड़े लोगों के बड़े बड़े लिखे हुऐ को श्याम पट की लम्बाई चौड़ाई को चौक की सफेदी के उजलेपन को भी बड़ी बात होती है बड़ा हो जान...
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Tag :पन्ने
  May 20, 2017, 11:08 pm
पुराने जमाने की सोच से निकल बहुत हो गया थोड़ा सा कुछ सम्भल खाली सफेद पन्नों को पलटना छोड़ हवा में ऊँचा उछल कर कुछ गोड़ जमीन पर जो जो होना था वो कबका हो चुका बहुत हो चुका चुक गये करने वाले करते करते दिखा करखाया पियारूखा सूखा ऊपर की ओर अब नजर कर ऊपर की ओर देख नीचे जमीन के अन्दर ब...
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Tag :जमीन
  May 10, 2017, 10:14 pm
समय गवाह है पर गवाही उसकी किसी काम की नहीं होती है समय साक्ष्य नहीं हो पाता है बिना बैटरी की रुकी हुयी पुरानी पड़ चुकी घड़ियों की सूईयों का अब इसे शरम कहो या बेशर्मी कबूलने में समय के साथ सीखे हुऐ झूठ को सच्चाई के साथ क्या किया जाये सर फोड़ा जाये या फूटे हुऐ समय के टुकड़े एकत्...
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Tag :जमीन. सलाम.
  May 3, 2017, 8:56 pm
पकड़े गये बेचारे शिक्षा अधिकारी लेते हुऐ रिश्वत मात्र पन्द्रह हजार की खबर छपी है एक जैसी है फोटो के साथ है मुख्य पृष्ठ पर है इनके भी है और उनके भी है अखबार की चर्चा चल रही है जारी रहेगी बैठक समापन की तारीख रखी गयी है अगले किसी रविवार की खलबली मची है गिरोहों गिरोहों बात कही...
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Tag :उबाऊ
  April 30, 2017, 11:01 pm
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