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Blog: उलूक टाइम्स

Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
उबासी लेता व्यंग अवसादग्रस्त है मगर मानने को तैयार नहीं है उसके खुद अपने चेहरे को खींचते हुऐ दाँत निपोरना जोर लगा कर हैशा कुछ ऐसा अहसास करा रहा है जैसे कलम का लिखा नहीं सामने से कलम का हाथ में लोटा लिये दिशा जाना समझा रहा है कलम वैसे भी अब कहीं होती भी कहाँ है कलम मोक्ष प... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   4:02pm 11 May 2020 #अवसादग्रस्त
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
सालों गुजर गये सोचते हुऐ लिखने की कुछकुछ ऐसा जिसका कुछ मतलब निकले लिखना आने से मतलब निकलने वाला ही लिखा जायेगा बेमतलब की बात है बेमतलब का कई लिख लेते हैं भरी पड़ी हैं किताबें कापियाँ लकीरों से आड़ी तिरछी पर मुझ से नहीं लिखा गया ... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   3:40pm 2 May 2020 #बकवास
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
पंख निकले होते हौले हौले फैल कर ढक लेते सब कुछ आँचल की तरह उड़ने के लिये अनन्त आकाश में दूर दूर तक फैले होते झुंड नहीं होते उड़ना होता हल्के होकर हवा की लहरों से  बनते संगीत के साथ कल्पनाएं होती अल्पनाओं सी रंग भरे होते असीम सम्भावनाएं होती ऊँचाइयों के ऊपर कहीं और ऊँचाइ... Read more
clicks 34 View   Vote 0 Like   4:35pm 25 Mar 2020 #झुँड
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
मन पक्का करना है बस सोच को संक्रमित नहीं होने देना है भीड़ घेरती ही है उसे कौन सा अपनी सोच से कुछ लेना देना है शरीर नश्वर है आज नहीं तो कल मिट्टी होना है तेरा तुझ को अर्पण क्या लागे मेरा की याद आ रही हो सभी को जब नौ दिशाओंसे ऐसे माहौल में कुछ कहना जैसे ना कहना है सिक्का उछालन... Read more
clicks 42 View   Vote 0 Like   5:48pm 24 Mar 2020 #कबाड़
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
समझ में जब खुद के ही नहीं आती है लगाई गयी आग और लगी आग से बनी राख तो किस लिये भटकता है औघड़ ढूँढने के लिये लकड़ियाँ माचिस का डब्बा और गंधक लगी छोटी छोटी तीलियाँ हुँकार कर आँखें लाल रक्त से भर और फूँक दे शँख रक्तबीज अंकुरित हैं हर समय हर दिशा में विषाणु को कोई भी नाम दे दो अच्छ... Read more
clicks 31 View   Vote 0 Like   3:29pm 14 Mar 2020 #आठवाँ आश्चर्य
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
खुलता रोज है एक पन्ना हमेशा खुलता है उसी तरह जैसे खोला जाता है सुबह किसी दुकान का शटर और बन्द कर दिया जाता है शाम को आदतन पिछले कई दिनों से तारीख बदल रही है रोज की रोज मगर कलम है लेट जाती है थकी हुयी सी बगल में ही सफेद पन्ने के सो जाती है आँखे खुली रख कर देखने के लिये कुछ रंग... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   4:42pm 11 Mar 2020 #कागज
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
जरूरी है घिसना चौक काले श्यामपट पर पढ़ाना नहीं है ना ही कुछ लिखना है कुछ लकीरें खींच कर गिनना शुरु कर देना है कोई पूछे अगर क्या गिन रहे हैं शर्माना नहीं है कह देना है  मुँह पर ही लाशें किसकी कोई पूछे तो बता देना है अपने घर के किसी की नहीं है मातम कहीं दिख रहा हो तो पूछने जर... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   4:01pm 25 Feb 2020 #उलूक
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
वैसे भी कौन लिख पाता है पूरा सच कोशिश सच की ओर कुछ कदम लिखने की होती है कोशिश जारी रहती है जारी रहनी चाहिये आप लिख रहे हैं लिखते रहें आपके लिखने ना लिखने से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता है हाँ ज्यादा मुखर होना कुछ समय बाद आपको महसूस होने लगता है आप पर ही भारी पड़ रहा है आप कौन ह... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   3:10pm 4 Feb 2020 #उलूक
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
एक लम्बे अर्से तक टिक कर अघोषित अर्धविक्षिपतत्ता के अंधेरे में की गयी बड़बड़ाहट को सफेद कागज के ऊपर काले अक्षरों को भैंस बराबर देखते समझते जानबूझ कर रायते की तरह फैलाने की कोशिश जरूर कामयाब होती है एक नहीं कई उदाहरण सामने से नजर आयेंगे जरूरत प्रयास करने की है अब कौन विक... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   4:21pm 28 Jan 2020 #अर्धविक्षिपतत्ता
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
Pageviews today4,091Pageviews yesterday5,924Pageviews last month144,743Pageviews all time history4,006,520Followers253हो सकता है यूँ ही घूमने आते होगेंं आप पर मेरे लिये आपका एक कदम इनाम है चालीस लाख कदम के लिये आभार ।ulooktimes.blogspot.com 225,737Alexa Traffic Rank 22,823Traffic Rank in IN84Sites Linking InSearch AnalyticsTop queries drivingtraffic to ulooktimes.blogspot.comWayback MachineSee how ulooktimes.blogspot.comlooked in the pastSimilar Sitesulookti... Read more
clicks 25 View   Vote 0 Like   2:56pm 26 Jan 2020 #चालीस लाख
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
खड़े खड़े किनारे में कहीं पहले से सूखे हुए किसी पेड़ के हरियाली सोचते हुए थोड़े से समझ में थोड़ा थोड़ा करके समय के साथ समझ आ बैठे शब्दों की रेजगारी के साथ मगजमारी करते सामने वाले के मगज की लुगदी बनाने की फिराक में तल्लीन समकालीन दौड़ों से दूरी बनाकर लपेटते हुऐ वाक्यों के स... Read more
clicks 28 View   Vote 0 Like   3:06pm 21 Jan 2020 #बटुवा
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
मक्खियाँ ही मक्खियाँ हो रही हैं हर तरफ से भिन भिन हो रही है बस कहाँ हैं पता नहीं चलने दे रही हैं ठण्ड बहुत हो रही है इस साल शायद सिकुड़ कर छोटी हो रही हैं महसूस भर हो रही हैं हर तरफ उड़ रही हैं मक्ख़ियाँबस दिखाईनहीं... Read more
clicks 42 View   Vote 0 Like   4:13pm 17 Jan 2020 #फिजाँ
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
Your few poems touched me. इस बक बक ️को कुछ लोग समझ जाते हैं । वो *पागल* में कुछ *पा* के *गला* ️हुआ इंसान देख लेते हैं । ऐसे लोगो की कविताओं में गूढ़ इशारे होतें हैं । जो जागे हुए लोगों को दिख जातें हैं । मुझे आपकी कविताओं में कुछ अलग दिखा, जिसके कारण में आने उद्गारों को रोक नही पाया । मैँ आपकी ब... Read more
clicks 35 View   Vote 0 Like   4:15pm 8 Jan 2020 #गुंडों
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
पूरा हुआ खाता बही आज और अभी इस साल की कुछ चुनी हुयी बकवासों का सभी नहीं भी कही गयी कुछ अनछुयी रह ही गयी  फिर भी बन गया खींच तान कर किसी तरह शतक थके थकाये अहसासों का समझे गये कुछ लोग समझाये गये कुछ लोग लिखे लिखाये में दिखा सैलाब उमड़ते जज्बातों का चित हुआ करते थे सिक्के का ज... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   4:29pm 30 Dec 2019 #पाठक
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
मुँह में दबी सिगरेट से जैसे झड़ती रही राख पूरे पूरे दिन पूरी रात फिर एक बार और सारा सब कुछ हवा हो गया एक साल और सामने सामने से मुँह छिपाकर गुजरता हुआ जैसे धुआँ हो गया थोड़ी कुछ चिन्गारियाँ उठी कुछ लगी आग दीवाली हुयी आँखों की... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   3:11pm 28 Dec 2019 #आग
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
उसके पास है एक किताब वो उस किताब को पढ़ता जैसा नजर आता है पढ़ा लिखा है बताना चाहता है उसे पसन्द नहीं हैं पढ़े लिखे लोग जो उसकी उस किताब की बात करने की कोशिश भी करते हैं किताब में सुना है सब कुछ लिखा है उसी लिखे हुऐ से कहा जाता है बहुत कुछ चलेगा या नहीं का पता चलता है ऐसा कु... Read more
clicks 35 View   Vote 0 Like   12:48pm 27 Dec 2019 #खास
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
क्या परेशानी है किसी को अगर कोई अपने हिसाब का सवेरा अपने समय के हिसाब से करवाने का दुस्साहस करता है उनींदे सूरज को गिरेबान खींच ला कर रख देना अपनी सोच की दिशा के छोर पर और थमा देना उसके हाथ में अपने बहुमत से निर्धारित किया गया उसके समय का सरकारी आदेश उसके चमकने का कोण और ... Read more
clicks 32 View   Vote 0 Like   4:27pm 21 Dec 2019 #आदेश
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
हमेशा ढलती शाम के चाँद की बात करना और खो जाना चाँदनी में गुनगुनाते हुऐ लोरियाँ सुनी हुयी पुरानी कभी दादी नानी के पोपले मुँह से ऐसा नहीं होता है कि सूरज नहीं होता है सवेरे का कहीं फिर भी रात के घुप्प अंधेरे में रोशनी से सरोबार हो कर सब कुछ साफ सफेद का कारोबार करने वाले ही ... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   4:55pm 18 Dec 2019 #काल
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
आओ बोयें कल के लिये आज कुछ इतिहास जो सच है बस उसे छोड़कर कुछ भी चलेगा होनी चाहिये मगर कुछ ना कुछ शुद्ध बिना मिलावट की कोई भी आसपास की रद्दी की टोकरी में फेंकी गयी ज्यादा चलेगी ही नहीं बकायदा दौड़ेगी होनी चाहिये एक&n... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   2:49pm 16 Dec 2019 #बोयें
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
किस लिये रोता है तेरे सामने तेरे घर को तोड़ कर एक टुकड़ा देखता क्यों नहीं है फैंका नहीं है गुलाब की कलम है माली नहीं भी है तो क्या हुआ रोपने के लिये सोच ले कोई जरूर होगा मवाली सही कहीं ना कहीं उसके सामने जा कर दीदे फाड़ लेना पूछ लेना क्यों नहीं बोता है घर तेरा टूट गया क्या हुआ ... Read more
clicks 30 View   Vote 0 Like   1:24pm 11 Dec 2019 #कबूतर
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
हो सकता है आवारा नजर आ रहे हों पर सच मानिये हैं नहीं बंधे हुऐ हैं पट्टे गले में और जंजीर भी है खूंटे से बंधी हुई भी नहीं है हाथ में है किसी के यानि आजादी है आने जाने की साथ में जहाँ ले जाने वाला जायेगा वहाँ तक तो कम से कम&nb... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   3:59pm 7 Dec 2019 #इशारे
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
कोई नहीं लिखता है अपना पता अपने लिखे पर शब्द बहुत होते हैं सबके पास अलग बात है शब्दों की गिनती नदी नालों में नहीं होती है लिखना कोई युद्ध नहीं होता है ना ही कोई योजना परियोजना लिखना लिखाना पढ़ना पढा‌ना लिखा लाकर समेटा एक बड़े से परदे पर ला ला कर सजाना लिखना प्रतियोगिता भी ... Read more
clicks 32 View   Vote 0 Like   3:58pm 5 Dec 2019 #उलूक
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
इतने दिन भी नहीं हुऐ हैं कि याद ना आयें खरोंचें लगी हुई सोच पर और भूला जाये रिसता हुआ कुछ जो ना लाल था ना ही उसे रक्त कहना सही होगा अपने आस पास के नंगे नाँचों के बगल से आँख नीची कर के निकल जाने को वैसे याद नहीं आना चाहिये भूल जाना सीखा जाता है यद्यपि वो ना तो बुढ़ापे की निशा... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   4:46pm 2 Dec 2019 #थोड़ा थोड़ा
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
हैं दो चार वो भी कोई इधर कोई उधर कोई कहीं दूर कोई कहीं उस पार सोचते हुऐ होने की आर पार लिये हाथ में लिखने का कुछ सोच कर एक हथियार जैसे हवा को काटती हुई जंक लगी सदियों पुरानी शिवाजीया उसी तरह के किसी जाँबाज की एक तलवार सभी की सोच में तस्वीर सूरज और रोशनी उसकी शरमाती हुई सी ... Read more
clicks 42 View   Vote 0 Like   4:21pm 28 Nov 2019 #कुआँ
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
छोड़ो रहने दो कुछ नहीं लिखो कुछ नहीं ही सब कुछ है कुछ कुछ  लिखते लिखते अब तो समझ लो कुछ नहीं लिखोगे पहरे से दूर रहोगे लिखे का हिसाब भी नहीं देना पड़ेगा कहीं कोई बही खाता ही नहीं बनेगा आई टी सेल नजर ही नहीं रखेगा सब कुछ सामान्य सा दिखेगा कुछ नहीं लिखना एक नेमत होती है समझा कर... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   4:03pm 23 Nov 2019 #कुछ कुछ
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