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उलूक टाइम्स : View Blog Posts
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उलूक टाइम्स

ऊपर वाला भी भेज देता है नीचे सोच कर भेज दिया है उसने एक आदमी नीचे का आदमी चढ़ लेता है उस आदमी के ऊपर से उतरते ही उसकी सोच पर सोचकर समझकर समझाकर सुलझाकर बनाकर उसको अपना आदमी आदमी समझा लेता है आदमी को आदमी खुद समझ कर पहले ये तेरा आदमी ये मेरा आदमी बुराई नहीं है किसी आदमी के कि...
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Tag :उलूक
  November 1, 2017, 10:19 pm
कल का नहीं खाया है पता है आज फिर सेपकाया है वो भी पता है कल भी नहीं खाना था पता था आज भी नहीं खाना है पता है कल भी पकाया था कच्चा था पता था पूरा पक नहीं पाया था वो भी पता था किसी ने कहाँ कुछ बताया था बताना ही नहीं था आज भी पकाया है पक नहीं पाया है कोई नहीं खायेगा जैसा था रह जायेग...
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Tag :घन्टी
  October 25, 2017, 8:38 pm
गरम होता है उबलता है खौलता है कभी किसी दिन अपना ही लहू खुद की मर्दानगी तोलता है अपना ही होता है नजदीक का घर का आईना रोज कब कहाँ कुछ बोलता है तीखे एक तीर को टटोलता है शाम होते ही चढ़ा लेता है प्रत्यंचा सोच के धनुष की सुबह सूरज निकलता है गुनगुनी धूप में ढीला कर पुरानी फटी खूँट...
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Tag :कौआ
  October 24, 2017, 11:58 pm
कुछ दिन अच्छा होता है नहीं देखना कुछ भी अपनी आँखों से दिख रहे सब कुछ में कुछ दिन अच्छा होता है देखनावो सब कुछ जो सब को दिखाई दे रहा होता है उनके अपने चारों ओर उनकी अपनी आँखों से रोज अपने अपने दिखाई दे रहे को दिखाने की होड़ में दौड़ लगा रहे देखे गये बहुत कुछ में आँखें बन्द कर द...
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Tag :कुत्ता
  October 21, 2017, 8:33 pm
सारे शिव डरपोक हलाहल गटके हुऐ गले गले नीले पड़े दिखा रहे हैं साँपों को समझा रहे हैं साँपों को शाँत रहें साँप बने रहें सारे साँप मौज में हैं शिव के गले में माला डाले हुए हैं हर जगह शिव ही शिव हैं हर जगह साँप ही साँप हैं डस कोई किसी को नहीं रहा है साँप साँप के साथ है और रह रहा ह...
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Tag :फार्वर्ड
  October 11, 2017, 9:59 pm
हिदायतें दे रहें हैं चिकित्सक बहुत सारे मुफ्त में ही बेहिसाब और दिन का लिखना अलग बात है बहुत जरूरी है लिखनी आज मन की बात उधर वो बात दिमागी सेहत की बता रहे हैं खाने पीने को ठीक रखना है समझा रहे हैं अकेलेपन से निपटना है भीड़ में घर की ही सही हिल मिल कर कुछ इस तरह से रहना है बच्...
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Tag :विश्व मानसिक स्वास्थ दिवस
  October 10, 2017, 11:06 pm
यूँ हीं देख लिया कर कुछ कभी भी बस देखने के लिये जिंदगी कट जाती है उसकी भी जिसने आँखे ताड़ कर पूरे को पूरा ही घूरा हो अपनी आँखे सेकने के लिये यूँ हीं कह दिया कर कुछ भी कभी भी बस फेंकने के लिये पता कर ही लेता है पता करने वाला अन्दर की बातें सारी सामने वाले की खुद समेटने के लिये ...
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Tag :पंद्रह लाख
  October 9, 2017, 11:42 pm
शेरो शायरी बहुत हो गयी मजा उतनानहीं आ रहा है सुना है फिर से चिट्ठियाँ लिखने का चलन लौट कर वापस आ रहा है कागज कलम दवात टिकट लिफाफे के बारे में पूछ रहा है कोई कई दिनों से इधर और उधर के डाकखानों के चक्कर लगा रहा है चिट्ठियाँ लिखना भेजना डाकिये का पता देख कर किसी का घर ढूँढना क...
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Tag :कागज
  October 5, 2017, 7:19 pm
शुरुआत में आओ मिर्च के कारोबार को अपनायेंआओ मिर्ची सोचें मिर्ची सोचवायें  आओ मिर्ची लगायें मिर्ची लगवायें आओ मिर्ची बोयें मिर्ची उगायें आओ मिर्ची दिखायें मिर्ची बतायें आओ मिर्ची समझें मिर्ची समझायेंबीच में आओ मिर्ची तुलवायें मिर्ची धुलवायें आओ मिर्ची तोड़ें मि...
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Tag :धुआँ
  October 3, 2017, 10:25 pm
कहीं भी नहीं होने का अहसास भी होता है जर्रे जर्रे में होने का भ्रम भी हो जाता है अपने अपने पन्नों की दुनियाँ में अपना अपना कहा जाता है पन्नों के ढेर लग जाते हैं किताब हो जाना नहीं हो पाता है ढूँढने की कोशिश में एक छोर दूसरा हाथ से फिसल जाता है ऐसी आभासी दुनियाँ के आभासों म...
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Tag :जन्मदिन
  October 2, 2017, 8:42 pm
‘दुकान’ एक ‘दीवार’ जहाँ ‘दुकानदार’ सामान लटकाता है दुकानों का बाजार बाजार की दुकाने जहाँ कुछ भी नहीं खरीदा जाता है हर दुकानदार कुछ ना कुछ बेचना जरूर चाहता है कोई अपनी दुकान सजा कर बैठ जाता है बैठा ही रह जाता है कोई अपनी दुकान खुली छोड़ कर किसी दूसरे की दुकान के गिरते शटर...
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Tag :दो अक्टूबर
  October 1, 2017, 10:15 pm
राम समझे हुऐ हैं लोग  राम समझा रहे हैं लोग आज दशहरा है राम के गणित का खुद हिसाब लगा रहे हैं लोग आज दशहरा है अज्ञानियों का ज्ञान बढा‌ रहे हैं लोग आज दशहरा है शुद्ध बुद्धि हैं मंदबुद्धियों की अशुद्धियों को हटा रहे हैं लोग आज दशहरा है दशहरा है दशहरा ही पढ़ा रहे हैं लोग आज दश...
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Tag :बकवास
  September 30, 2017, 10:09 pm
बस मतलब की बातें समझने वालों को कैसे समझाई जायें बेमतलब की बातें कौन दिखाये फकीरों के साथ फकीरी में रमें फकीरों को लकीरें और बताये लकीरों की बातें लेता रहता है समय का ऊँट करवटें खा जातें हैं पचा जाते हैं कुछ भी खाने पचाने वाले उसकी भी लातें ***********तो आईये‘आठ सौव...
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Tag :आठसौवीं
  September 23, 2017, 6:00 pm
ना धूल दिख रही है कहीं ना धुआँ हीदिख रहा हैएक बेवकूफ कह रहा है साँस नहीं ली जाती है और दम घुट रहा है हर कोई खुश है खुशी से लबालब है सरोबार दिख रहा है इतनी खुशी है सम्भलना ही उनका मुश्किल दिख रहा है हर कदम बहक रहा है बस एक दो का नहीं पूरा शहर दिख रहा है देखने वाले की मुसीबत है क...
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Tag :
  September 20, 2017, 7:44 pm
अपना भी चेहरा कभी ले कर के आया करो अपनी भी कोई एक बात कभी आकर बताया करो पहचान चेहरे की चेहरे से होती है हजूरएक जोकर को इतना तो ना दिखाया करो बहुत कुछ कहने को होता है पास में खुशी में भी उतना ही जितना उदास में खूबसूरत हैं आप आप की बातें भी अपने आईने में चिपकी तस्वीर किसी दिन ...
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Tag :खिलौना
  September 17, 2017, 10:21 pm
जब भी तूसमझाने की कोशिश करता है दो और दो चारकोई भाव नहीं देता है सब ही कह देते हैं दूर से ही नमस्कारजमाने की नब्ज में बैठ कर जिस दिन शुरु करता है तू शब्दों के साथ व्यभिचारजयजयकार गूँजती है चारों ओर और समझ में आना शुरु होता है उसी क्षण से व्यवहार।...
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Tag :नमस्कार
  September 15, 2017, 9:28 pm
इससे पहले कोई समझले क्या कह दिया है विषय ही बदल दो समय रुकता नहीं है सब जानते हैं समझते नहीं हैं मौका देखकर समय को ही बदल दो शातिर कभी खून करता नहीं है खून ही बदल देता है सीख लो अगर सीख सको मत करो खून बस खून ही बदल दो समय सिखाता है परिवर्तन भी लाता है सुपारी देने वालेबेवकूफ ...
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Tag :जमीर
  September 15, 2017, 8:25 pm
कुछ रोज के दिखने से परेशान हैं कुछ रोज के लिखने से परेशान हैं गली से शहर तक के सारे आवारा कुत्ते एक दूसरे की जान हैं किस ने लिखनी हैं सारी अजीब बातें दिल खोल कर छोटे दिल की थोड़ा सा लिख देने से बड़े दिल वाले हैरान हैंबकरियाँ कर गयी हैं कल से तौबा घास खाने से खड़ी कर अपनी पिछली ...
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Tag :काम
  September 13, 2017, 11:05 pm
किस लिये चौंकना मक्खियों के मधुमक्खी हो जाने में सीखना जरूरी है बहुत कलाकारी कलाकारों से उन्हीं के पैमानों में किताबें ही किसलिये दिखें हाथ में पढ़ने वालों के जरूरी नहीं है नशा बिकना बस केवल मयखाने में शहर में हो रही गुफ्तगू पर कान देने से क्या फायदा बैठ कर देखा कि...
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Tag :पैमाने
  September 9, 2017, 11:55 pm
बहुत परेशान रहते हैं लोग जो चिट्ठाकारी नहीं समझते हैं लेकिन चिट्ठा लेखन करने वाले पर मिलकर बहस करते हैं पड़ोसी का खरीदा हुआ अखबार माँग कर पढ़ने वाले लोग महीने के सौ दो सो बचा कर बहुत कुछ बाँचने का दावा करते हैं शहर के लोग ना चिट्ठी जानते हैं ना चिट्ठों से ही उनका कोई लेना ...
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Tag :जानवर
  September 6, 2017, 8:38 pm
सूक्ष्म मध्यम महत दिव्य अलौकिक या और भी कई प्रकार के आभास कराते अपने ही आसपास के कार्यकलाप आसानी से जैसे खेल खेल में समझाते सर्वशक्तिमान सर्वज्ञ सर्वव्यापी सर्वभूत दिलाते अहसास सभी ज्यादातर या कुछ मनुष्यों के ही ईश्वर होने का यहीं इति कर देना या इसके बाद लिख देना क्...
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Tag :आसपास
  August 20, 2017, 10:49 pm
किसी से उधार ली गई बैसाखियों पर करतब दिखाना सीख लेना एक दो का नहीं पूरी एक सम्मोहित भीड़ का काबिले तारीफ ही होता है सोच के हाथ पैरों को आराम देकर खेल खेल ही में सही बहुत दूर के आसमान को छू लेने का प्रयास अकेले नहीं मिलजुल कर एक साथ एक मुद्दे चाँद तारे उखाड़ कर जमीन पर बिछा दे...
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Tag :कबूतर
  August 15, 2017, 9:36 pm
कहा था कोढ़ फैला कोढ़ समझ में नहीं आया तेरे मौत फैला आया आक्सीजन से कोढ़ भी हो सकता था तुझे पता नहीं थामौत देने की क्या जरूरत थी आक्सीजन से कोढ़ समझ में नहीं आ रहा होगा होता है कुछ भी सम्भव है किसी चीज से कुछ भी हो सकता है कैसे हो सकता है अखबार वालों से रेडियो वालों से टी वी वाल...
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Tag :कोढ़
  August 12, 2017, 10:20 pm
लहर कब उठेगी पता नहीं होता है जरूरी नहीं उसके उठने के  समय हाथ में किसी के कैमरा होता है शेर शायरी लिखने की बातें हैं शायरों की ऐसा सभी सुनते हैं बहुतों को पता होता है बहकती है सोच जैसे पी कर शराब सोचने वाला पीने पिलाने की बस बातें सोचता रहता है कुछ आ रहा था मौज में लिख द...
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Tag :लहर
  August 4, 2017, 9:35 pm
शतरंज की काली सफेद गोटियाँ अचानक अपने डिब्बे को छोड़ कर सारी की सारी बाहर हो गयी हैं दिखा रही हैं डिब्बे के अन्दर साथ रहते रहते आपस में हिल मिल कर एक दूसरे में खो गयी हैं समझा रही हैं तैयार हैं खुद ही मैदान में जाने के लिये आदेशित नहीं की गयी हैं विनम्र होते होते खुद ही निर...
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Tag :काला
  July 31, 2017, 11:04 pm
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