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उलूक टाइम्स

कागज पर लिखा जमीन का कुछ भी उसके लिये बेकार होता है चाँद तारों पर जमा जमाया जिसका कारोबार होता है दुनियाँ जहाँ पर नजर रखता है बहुत ज्यादा समझदार होता है घर की मोहल्ले की बातें छोटे लोगों का रोजगार होता है बेमतलब कुछ भी कह डालिये तुरंत पकड़ लेता है कलाकार होता है मतलब की छ...
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Tag :खबरें
  June 13, 2019, 10:53 pm
बहुत कुछ है लिखने के लिये बिखरा हुआ समेटना ठीक नहीं इस समयरहने देते हैंहोना कुछ नहीं है हिसाब का बेतरतीब ला कर और बिखेर देते हैं बहे तो बहने देते हैंदीमकें जमा होने लगी हैं फिर सेनये जोश नयी ताकतों के साथ कतारें कुछ सीधी कुछ टेढ़ी कुछ थम...
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Tag :दीमक
  June 1, 2019, 10:08 pm
पहाड़ी झबरीले कुछ काले कुछ सफेद कुछ काले सफेद कुछ मोटे कुछ भारी कुछ लम्बे कुछ छोटे कुत्तों के द्वारा घेर कर ले जायी जा रही कतारबद्ध अनुशाशित पालतू भेड़ों का रेवड़ गरड़िये की हाँक के साथ पथरीले ऊबड़ खाबड़ ऊँचे नीचे उतरते चढ़ते छिटकते फिर वापस लौटते मिमियाते मेंमनों को दूर स...
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Tag :आवारा
  May 25, 2019, 10:36 pm
नोट: किसी शायर के शेर नहीं हैं ‘उलूक’ के लकड़बग्घे हैं पेशे खिदमतशराफत ओढ़ कर झाँकें आईने में अपने ही घर के और देखें कहीं किनारे से कुछ दिखाई तो नहीं दे रहा है----------------------------पता मुझको है सब कुछ अपने बारे में कहीं से कुछ खुला हुआ थोड़ा सा किसी और को बता ही तो नहीं दे रहा है-----------------------...
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Tag :आग
  May 21, 2019, 9:40 pm
भटकता क्यों है लिख तो रहा है पगडंडियाँ ही सही इसमें बुरा क्या है रास्ते चौड़े बन भी रहे हैं भीड़ के लिये माना अकेले चलने का भी तो कुछ अपना अलग मजा है जरूरी नहीं है भाषा के हिसाब से कठिन शब्दों में रास्ते लिखना रास्ते में ही जरूरी है चलना किस ने कहा है सरल शब्दों में कठिन लिख ...
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Tag :कमल
  May 19, 2019, 8:56 pm
अच्छा है सबसे खुद से बात कर खुद को समझाना मतलब कही गयी अपनी ही बात का सारे अबदुल्ला नाच रहे हों जहाँ दीवाने हो कर बेगानी शादियों में मौका होता है बैण्ड के शोर के बीच खुद से खुद की मुलाकात का कभी नंगे किये जायें सारे शब्द ऐसे ही किसी शोर में उधाड़ कर खोल उनके भी उतार कर निचोड़...
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Tag :नबाब
  May 14, 2019, 9:26 pm
ये लिखना भी कोई लिखना है उल्लू ? कभी आँख बन्द कर के एक आदमी में उग आये भगवान पर भी लिख लिखना सातवें आसमान पहुँच जायेगा लल्लू कभी अवतरित हो चुके हजारों लाखों एक साथ में उसके हनुमान पर भी लिख सतयुग त्रेता द्वापर कहानियाँ हैं पढ़ते पढ़ते सो गया कल्लू ? कभी पतीलों में इतिहास उब...
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Tag :बलवान
  May 9, 2019, 8:35 pm
यार यस यस को समझ और यस यस करने की आदत डाल कुछ बनना है अगर तो बाकी सब पर मिट्टी डाल बुद्धिजीवी होने का प्रमाणपत्र है है तो निकाल नहीं भी है अगर तो भी कोई नहीं है बबाल समझ ले बस यार यस यस करने की आदत डाल यारों का यार होता है नंगा सबसे बेमिसाल होता है चाहिये होता है तो बस एक मिट्...
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Tag :
  May 5, 2019, 8:35 pm
कुछदिनों सेलगातारहो रहीखुजली के इलाजके बावतकिसीचिकित्सकके पासजाने कामनबनाते बनाते‘उलूक’ एक “चिट्ठा ज्योतिष” के चिट्ठे से टकरा गयानौ ग्रहों काछोड़करअगला एक दसवें ग्रह का बहीखाता साथ में लेकरआ गयाग्रहपूर्वा के नाम सेजाना जाने वालाकुछ लोगों कोलोगों के पीछे ल...
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Tag :ग्रहण
  May 5, 2019, 7:59 pm
मजबूरी है बीच बीच में थोड़ा थोड़ा कुछ लिख देना भी जरूरी है उड़ने लगें पन्ने यूँ ही कहीं खाली हवा में पर कतर देना जरूरी है हजूर समझ ही नहीं पाते हैं बहुत कोशिश करने के बाद भी कि यही जी हजूरी है फितूरों से भरी हुयी है दुनियाँ यहाँ भी और वहाँ भी कलम लिखने वाले की खुद ही फितूरी है ...
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Tag :जरूरी
  April 24, 2019, 7:51 pm
कौन जायज कौन नाजायज प्रश्न जब औलाद किस की पर आ कर खड़ा हो जाये किस तरह खोज कर जायज उत्तर को लाकर इज्जत के साथबैठाया जायेकौन समझायेकिसे समझाये लिखनेलिखाने से कब पता चल पाये कौन जायज नाजायज और कौन नाजायज जायज सिक्का उछालने वाले के सिक्के में हर तरफ तस्वीर जब एक...
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Tag :औलाद
  April 19, 2019, 7:36 pm
गाँव में शरीफों से बच रही है रजिया बात नहीं बताने की इज्जत उतारने वाला शहर में भी एक शरीफ ठेकेदार निकलाशरीफों को आजादी है संस्कृति ओढ़ने की और बिछाने की दिनों से शरीफ साथ में है पता भी ना चला और रोज ही शराफत से एक नया अखबार निकला शरीफों को सिखा दी है शरीफ ने कला शराफत से ग...
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Tag :गुबार
  April 15, 2019, 10:28 pm
गिरोहों से घिरे हुऐ अकेले को घबराना नहीं होता है कुत्तों के पास भौंकने के लिये कोई बहाना नहीं होता है लिखना जरूरी है सच ही बस बताना नहीं होता है झूठ बिकता है घर की बातों को कभी भी कहीं भी सामने से लाना नहीं होता है जैसा घर में होता है और जैसा बताना नहीं होता है नंगई को टाई ...
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Tag :ठेका
  April 14, 2019, 8:45 pm
टिप्पणी में कहीं ताला लगा होता है कहीं कोई खुला छोड़ कर भी चला जाता है टिप्पणी करने खुले में टिप्पणी करने बंद में कब कौन कहाँ और किसलिये आता जाता है समझ में सबके सब आता है दो चार में से एक 'सियार'जरा ज्यादा तेज हो जाता है बिना निविदा पेश किये ठेकेदारी ले लेना ठीक नहीं माना ज...
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Tag :उल्लू का पट्ठा
  April 13, 2019, 9:40 pm
फर्जी सकारात्मकता ओढ़ना सीखना जरूरी होता है जो नहीं सीखता है उसके सामने से खड़ा हर बेवकूफ उसका गुरु होता है सड़क खराब है गड्ढे पड़े हैं कहना नहीं होता है थोड़ी देर के लिये मिट्टी भर के बस घास से घेर देना होता है काफिले निकलने जरूरी होते हैं उसके बाद तमगे बटोरने के लिये किसी न...
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Tag :खून
  April 6, 2019, 10:11 pm
जरा सा भी झूठ नहीं है सच्ची में सच साफ आईने सा यही है जाति धर्म झगड़े फसाद की जड़ रहा होगा कबीर के जमाने में अब तो सारी जमीन कीटाणु नाशक गंगा जल से धुल धुला कर खुद ही साफ हो गयी है नाम कभी पहचान नहीं हुऐ जाति नाम के पीछे लगी हुयी देखी गयी है झगड़ा ही खत्म कर गया ये तो नाम के आगे स...
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Tag :उलूक
  April 2, 2019, 10:32 pm
बकवास करने का अपना मजा और अपना एक नशा होता है किसी की दो चार लोग सुन देते हैं किसी के लिये मजमा लगा होता है नशा करके बकवास करने वाले को उसके हर फायदे का पता होता है नशा करता है एक शराबी मगर पीना पिलाना उसके लिये जरूरी होता है कहीं कुछ नहीं से निकाल कर बातों बातों में सा...
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Tag :जमूरा
  March 31, 2019, 8:50 pm
मरते मरते उसने कहा "हे राम"उसके बाद भीड़ ने कहा "राम नाम सत्य है"कितनों ने सुना कितनों ने देखा देखा सुना कहा बताया बहुत पुरानी बात हो गयी है जमाना कहाँ से कहाँ पहुँच गया है सत्य अब राम ही नहीं रह गया है जो समझ लिया है उसकी पाँचों उँगलियाँ घी में घुस गयी हैं और सर कहीं  डालने ...
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Tag :पगला
  March 28, 2019, 9:33 pm
आजादी चुनने की एक आजाद सोच पहेली नहीं हो गयी है सोचने की बात है सोच आज क्यों विरुद्ध सामूहिक कर्म/कुकर्म हो गयी है ।बर्फी के ऊपर चढ़ाई गयी चाँदी का सुनहरा वर्क हो गयी हैस्वर्गहो गयी है का विज्ञापन है मगरबेशर्मनर्क हो गयी हैअपोहन की खबर कौन दे किसे सुननी है व्...
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Tag :अपोहन
  March 24, 2019, 8:45 pm
आदमी खुद में ही जब आदमी कुछ कम हो गया है किसलिये कहना है रंग इस बार कहीं गुम हो गया है खुदाओं में से किसी एक का घरती पर जनम हो गया है तो कौन सा किस पर बड़ा भारी जुलम हो गया है मन्दिर जरूरी नहीं अब वो भी तुम और हम हो गया है समझो भगवान तक को इन्सान होने का भ्रम हो गया है झूठ खरपतवा...
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Tag :इन्सान
  March 22, 2019, 8:40 pm
बेमौसम बरसात ठीक भी नहीं होती होली में पठाके की बात ही नहीं होतीरंग बना रहा है कई साल से खुद के चेहरे में अपने घर के आईने से उसकी कभी बात नहीं होतीफिर से निकला है ले कर पिचकारी भरी हुयी अपनी राधा उसके ही खयालात में नहीं होतीबुरा ना मानो होली है कहता नहीं है कभी किसी से साल...
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Tag :गुलाल
  March 20, 2019, 10:56 pm
होली खेल तो सही थोड़ी सी हिम्मत की जरूरत है सात रंग तेरे बस में नहीं तेरी सबसे बड़ी मजबूरी है बातों में तेरे इंद्र भी दिखता है धनुष भी तू किसी तरह भाषण में ले आता है इन्द्र धनुष लेकिन कहीं भी तेरे आस पास दूर दूर तक नजर नहीं आता है रंग ओढ़ना कोई तुझसे सीखे इसमें कोई शक नहीं है ह...
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Tag :कुत्ते
  March 19, 2019, 9:43 pm
तमन्ना है कई जमाने से आग लगाने की आदत पड़ गयी  मगर अब तो झक मारते रद्दी कागज फूँक राख हवा में उड़ाने की लकीरें हैं खींचनी आसमान तक पहुँचाने की कलमें छूट गयी नीचेमगर हड़बड़ी में ऊपर जाने की आदत पड़ गयी भूलने की कहते कहते झोला उठाने की लिखनी हैं कविताएं आदमी के अन्दर के आदम...
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Tag :उलूक
  March 17, 2019, 8:48 pm
अच्छा हुआ भगवान अल्ला ईसा किसी ने देखा नहीं कभी सोचता आदमी आता जाता है आदमी को गली का भगवान बना कर यहाँ कितनी आसानी से सस्ते में बेच दिया जाता है एक आदमी को बना कर भगवान जमीन का पता नहीं उसका आदमी क्या करना चाहता है आदमी एक आदमी के साथ मिल कर खून को आज लाल से सफेद मगर करना च...
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Tag :आदमी
  March 12, 2019, 8:30 pm
एक जूता मार रहा है नहीं देखना है कुछ नहीं कहना है एक जूता खा रहा है नहीं देखना है कुछ नहीं कहना है दूर दर्शन दिखा रहा है दिखा रहा होगा बस देख लेना है अखबार में छप गया है छपा दिया गया होगा बस सोच लेना है उसके साथ खड़े रहना है मजबूती से ...
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Tag :गिरोह
  March 7, 2019, 8:39 pm
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