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Blog: उलूक टाइम्स

Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
बहुत जोर शोर से ही हमेशाबकवास शुरु होती हैकिसे बताया जाये क्या समझाया जायेगीली मिट्टी मेंसोच लिया जाता है दिखती नहीं हैलेकिन आग लगी होती हैदियासलाई भी कोई नई नहीं होती हैरोज के वही पिचके टूटे डब्बे होते हैंरोज की गीली सीली तीलियाँ होती हैंघिसना जरूरी होता हैचिनगार... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   2:40pm 9 Nov 2021 #कबूतर
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
 सब कुछ समेटने के चक्कर में बहुत कुछ बिखर जाता हैजमीन पर बिखरी धूल थोड़ी सी उड़ाता है खुश हो जाता हैआईने पर चढ़ी धूल हटती है कुछ चेहरा साफ नजर आता हैखुशफहमियाँ बनी रहती हैं समय आता है और चला जाता हैदिये की लौ और पतंगे का प्रेम पराकाष्ठाओं में गिना जाता हैदीये जलते हैं पतं... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   10:41am 6 Nov 2021 #खुराफातें
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
 मन होता ही है कुछ लिखा जाये कभी जैसा लेखक साहित्यकार बुद्धिजीवी विद्वान लिख ले जाते हैं कतार दर कतारनकल करने के चक्कर में लेकिन निकल जाती है हवा कलम की उड़ जाता है कागज रह जाते हैं शब्दों के ऊपर चढ़े शब्द एक के ऊपर कई कई हजार शब्दकोष कर रहा हो जैसे उदघोष मूँगफली बेचने ... Read more
clicks 13 View   Vote 0 Like   3:55pm 31 Oct 2021 #बुद्धिजीवी
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
लिखे की गिनती करने के चक्कर मे हमेशा क्या लिखना है भूला जाता हैकूड़े के ऊपर कहीं के कहीं और का कूड़ा आ कर बादलों सा छा जाता हैकूड़ा कोई नहीं लिखता है ना ही किसी को कूड़ा पढ़ लेना ही आता हैकूड़ा फेकने वाला भी नहीं देखता है कभी कूड़ा बस उठाता है और फेंक आता हैसकारात्मकता बेचने खरी... Read more
clicks 33 View   Vote 0 Like   1:31pm 27 Oct 2021 #खरीदने
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
 पता कहाँ चल पाता है कब एक आदमी एक गिरोह हो जाता है  लोग पूछते फिरते हैं पता उस एक आदमी का वो कहीं नहीं मिल पाता है गिरोह होना बुरी बात नहीं होती है सब जानते हैंकाम गिरोह ही आता है  सरदार कौन है इस से क्या फर्क पड़ता है काम हो जाना महत्वपूर्ण माना जाता है घर से लेकर मोहल्... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   2:09pm 19 Oct 2021 #गिरोह. देश. सत्य
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
काले श्यामपट परसफेद चौक से लकीरें खींच करकोशिश कर लेनाखुद पढ़ लेने की तैयारी जैसे किसी को भी कुछ भीपढ़ा ले जाने कीरेत पर बना करयूँ ही कुछ आढ़ा तिरछासोच कर बन गया लो ताजमहलखुश हो लेनाकौन देख रहा हैनूरजहाँ और शाहजहाँ की बातवो भी पुराने किसी फसाने कीइतिहास और भूगोलतराजू ... Read more
clicks 25 View   Vote 0 Like   2:51pm 16 Oct 2021 #जमाने
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
 खाली सफेद पन्ने कासामने से भौंकना मुँह परमुहावरा नहीं है सच है जनाबसमझ में नहीं आया नाआयेगाअगर एक साफ सफेद पन्ने सेकभी रूबरू होंगे आपकुछ शब्द कुछ यादें शब्दों कीबचपन से आज तक कीएक मास्टर और उसकी सौंटी सेबजते हाथ के साथ कान लाजवाबकपड़े हमेशा आये समझ मेंढकने वाली एक ... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   3:03pm 13 Sep 2021 #गद्दी नशीन
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
 मय लिख मयखाना लिखकुछ पीना लिख  कुछ पैमाना लिखदिन हो गये कुछ नहीं लिखेलिख ले किसी दिन सारा जमाना लिखनियम लिखने लिखाने के रहने देबेखौफ लिख लेखक एक दीवाना लिखकिस ने रोकना है लिखने लिखाने कोएक बन्दूक लिख एक बंदर को डराना लिखगलत है बंद हो जाना कोटर मेंमत पहनए... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   3:21pm 9 Sep 2021 #कबूतरखाना
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
                                                                                        बहुत लिखा है कहते हैं लोग खुद पता नहीं है क्या और कितना लिखालिखने पर आ गई बात इतना ही पता है रोज का रोज कुछ आ लिखाक्या लिखा है पता होता काश होश में लि... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   3:53pm 17 Aug 2021 #कलाम
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
 पहेलियाँ बनायी नहीं जाती हैं पहेलियां बन जाती हैं जरूरी नहीं है बूझना आग लग रही हो तो देखना भी जरूरी नहीं है और जली कभी भी बुझायी भी नहीं जाती हैं जो मैं करता हूँ उसकी बात कहाँ कभी करता हूँ जो तुम करते हो तुमको पता होता है तुम क्या करते हो जो हम करते हैं उसकी बात करनी ही ... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   2:10pm 3 Aug 2021 #कायदा
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
 लिखने की इच्छा है लिखो किसने रोका है थोड़ा सा लिखो कुछ छोटा सा लिखोसमझ ले कोई भी कुछ ऐसा लिखो उस लिखे पर कोई भी कुछ भी लिख ले जाये भटक ना जाये बहक ना जाये फिर से दुबारा ढूँढता हुआ आये कुछ ऐसा लिखो पर कैसे लिखो बिना सोचे समझे कुछ लिखो या कुछ समझे हुऐ पर कुछ समझाक... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   2:33pm 7 Jun 2021 #ब्राँडेड
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
 लिख लिया जाये कहीं किसी कागज में एक खयालबस थोड़ी देर के लिये उसे रोकना चाहता हूँना कागज होता है कहीं ना कलम होती है हाथ मेंयूँ ही सब भूल जाने के लिये भूलना चाहता हूँख्वाहिशें होती हैं बहुत होती हैं इधर से लेकर उधर तक होती हैंउनमें से कुछ समेटना चाहता हूँतरतीब से लगाने ... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   2:20pm 4 Jun 2021 #कविता
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
उड़ रहे हैं काले कौऐ आकाश दर आकाश कबूतर कबूतर चिल्लाओकौन बोल रहा है सच रोको उसे ढूँढ कर एक गाँधी कहीं जा कर के कूट आओइस से पूछो उस से पूछो कहीं से भी पूछ कर कुछ उसके बारे में पता लगाओकैसे आगे हो सकता है कोई उसका अपना उससे कहीं तो जा कर के कुछ आग लगाओ कुछ मर गये कुछ आगे मरेंग... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   2:44pm 29 May 2021 #कौए
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
जो कहीं नहीं है बस वही नजर आये जो सब जगह है उसे बताने की मनाही हैसब को सब समझ में कहाँ आता है आ भी गया तो कह देना दूसरी लहर आई हैमहफिल कहीं नहीं सजती अब अकेले रहा करो इसी में सबकी भलाई हैउठ के यूँ ही चले जा रहे हैं लोग छोड़ कर के आने में ही सुना रुसवाई हैजाना ही होता है सब जायें... Read more
clicks 49 View   Vote 0 Like   2:50pm 15 May 2021 #अफजाई
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
 कितना भी कोशिश करें हम शराफत पोतने कीदिख जाता है कहीं से भी फटा हुआकिसी छेद से झाँकता हुआ हमारा नजरियाहम कब गिरोह हो लेते हैंहमें पता कहाँ चलता हैहम कहा हैउसमें हो सकता हैतुम नहीं आते होगेबुरा मत मानियेगाहम कहा हैहमारी ओरधनुष मत तानियेगाहम कहने का मतलबमैं और ... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   3:12pm 1 Apr 2021 #कविता
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
 सालों हो गये कुछ लिख लेने की चाह में कुछ लिखते लिखते पहुँच गये आज इस राह मेंशेरो शायरी खतो किताबत पता नहीं क्या क्या सुना गया लिखा गया याद कुछ नहीं रहा बस एक मेरे लिखे को तेरे समझ लेने की चाह मेंवो सारे तलवार लिये बैठे हैं हाथ में सालों से कलम छोड़ कर बेवकूफ तू लगता है ... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   3:44pm 3 Mar 2021 #कलम
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
करते करते बकवास निरन्तर सुजान हो चले जड़मति ये भी तो किस्मत है होती अभ्यास समझ रोज का लेखन आभासी कलम पन्ने जोतती खुद ही कुछ बोती जमा होते चले आगे के पीछे पीछे के आगे आँखें मूंद वर्णमाला के मोती पर मोती वाक्य चढ़े वाक्य के ऊपर शब्दों की पहन कहीं अटपटी कहीं फटी एक धोती ... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   4:30pm 28 Feb 2021 #किस्मत
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
अखबार में फोटो आई है सारा घर मगन है मालिक कभी दिखाया नहीं जाता है घर के कुत्ते ने बहुत धूम मचाई है घर में भौंकता नहीं है कभी कटखन्ने होने की मिठाई है किसी को कभी काटा नहीं किसी को कभी भौंका नहीं अपने को बचाने की कीमत मिली है या किसी ने कीमत चुकाई है बजट अभी अभी निकला है जन... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   3:31pm 2 Feb 2021 #कुत्ता
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
सबसे अच्छा है कुछ नहीं लिखना कई कई दिनों तक पन्नों में नहीं दिखना किसी ने पूछना नहीं है क्यों नहीं दिख रहे हो किसे मतलब है कहने से किसलिये बकवास करने से आजकल बच रहे हो लिखने लिखाने वाले सभी कुछ ना कुछ लिख रहे हैं सब अपनी अपनी जगह पर अपने हिसाब से दिख रहे हैं कोई देश लिख र... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   2:50pm 29 Jan 2021 #बेकार
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
 बहुत हो गया है कूड़ा हो ही जाता है कूड़े का डिब्बा गले गले तक भर जाता है होना कुछ नहीं होता है पता होता है फुसफुसाने में सब खो जाता है बड़ी खबर किसने कह दिया आपके सोचने से होगी आदमी देख कर खबर का खाँचा बनाया जाता है प्रश्न प्रश्न होता है क्या होता है अगर किसी को बता दिया जात... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   2:51pm 18 Jan 2021 #चोर
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
मत लिखा कर हर समय गीला सा सुखा लिया कर लिखा अपना सीला सा आग नहीं लगती है लिखा गीला होता है सीलन सुलगती नहीं है रोज लिखना हर समय दिखना इसलिये ठीक नहीं होता है लिखाई भी हर समय बहकती नहीं है लिखा कर कोई नहीं कहता है नहीं लिख बस फूँक लिया कर लिखते लिखते लिखे को स्याही सूखे बिना... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   5:26pm 9 Jan 2021 #ईश्वरीय
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
उबासी लेता व्यंग अवसादग्रस्त है मगर मानने को तैयार नहीं है उसके खुद अपने चेहरे को खींचते हुऐ दाँत निपोरना जोर लगा कर हैशा कुछ ऐसा अहसास करा रहा है जैसे कलम का लिखा नहीं सामने से कलम का हाथ में लोटा लिये दिशा जाना समझा रहा है कलम वैसे भी अब कहीं होती भी कहाँ है कलम मोक्ष प... Read more
clicks 250 View   Vote 0 Like   4:02pm 11 May 2020 #अवसादग्रस्त
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
सालों गुजर गये सोचते हुऐ लिखने की कुछकुछ ऐसा जिसका कुछ मतलब निकले लिखना आने से मतलब निकलने वाला ही लिखा जायेगा बेमतलब की बात है बेमतलब का कई लिख लेते हैं भरी पड़ी हैं किताबें कापियाँ लकीरों से आड़ी तिरछी पर मुझ से नहीं लिखा गया ... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   3:40pm 2 May 2020 #बकवास
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
पंख निकले होते हौले हौले फैल कर ढक लेते सब कुछ आँचल की तरह उड़ने के लिये अनन्त आकाश में दूर दूर तक फैले होते झुंड नहीं होते उड़ना होता हल्के होकर हवा की लहरों से  बनते संगीत के साथ कल्पनाएं होती अल्पनाओं सी रंग भरे होते असीम सम्भावनाएं होती ऊँचाइयों के ऊपर कहीं और ऊँचाइ... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   4:35pm 25 Mar 2020 #झुँड
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
मन पक्का करना है बस सोच को संक्रमित नहीं होने देना है भीड़ घेरती ही है उसे कौन सा अपनी सोच से कुछ लेना देना है शरीर नश्वर है आज नहीं तो कल मिट्टी होना है तेरा तुझ को अर्पण क्या लागे मेरा की याद आ रही हो सभी को जब नौ दिशाओंसे ऐसे माहौल में कुछ कहना जैसे ना कहना है सिक्का उछालन... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   5:48pm 24 Mar 2020 #कबाड़
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