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उलूक टाइम्स

कभी अखबार को देखते हैं कभी अखबार में छपे समाचार को देखते हैं पन्ने कई होते हैं खबरें कई होती हैं  पढ़ने वाले अपने मतलब के छप रहे कारोबार को देखते हैं सीधे चश्मे से सीधी खबरों पर जाती है सीधे साधों की नजर केकड़े कुछ टेढ़े होकर अपने जैसी सोच पर असर डालने वाली टेढ़ी खबर के टेढ़े...
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Tag :खबर
  January 21, 2018, 11:12 pm
कुछ में बहुत कुछ लिख देते हैं बहुत से लोग बहुत से लोग बहुत कुछ लिख देते हैं कुछ नहीं में भी कुछ शराब पर लिख देते हैं बहुत कुछ बिना पिये हुऐ भी कुछ पीते हैं शराब लिखते कुछ नहीं हैं मगर नशे पर कभी भी कुछ दूसरों के लिखे को अपने लिखे में लिख देते हैं पता नहीं चलता हैं पढ़ने वाले क...
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Tag :रोटी
  January 18, 2018, 8:16 pm
तेरह के नाशुक्रे नामुराद अंक पर ना जाइये इतनी तो झेल चुके हैं पुरानी कई आज की ताजी नयी पर इरशाद फरमाइये कहने का बस अन्दाज है एक नासमझ का जनाब अब तो समझ ही जाइये हिन्दी और उर्दू से मिलिये इस गली की इस गली में उस गली की अंगरेजी उस गली में रख कर आइये किसलिये बतानी हैं दिल की...
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Tag :तेरह
  January 16, 2018, 9:20 pm
लकड़ियों से उठ रही लपटें धीरे धीरे एक छोटे से लाल तप्त कोयले में सो जाती हैं रात भर में सुलग कर राख हो चुकी कोयलों से भरी सिगड़ी सुबह बहुत शांत सी नजर आती है बस यादों में रह जाती हैं ठंडी सर्द शामें जाड़ों के मौसम की धीमे धीमे अन्दर कहीं सुलगती हुई आग बाहर की आग से जैसे जान पह...
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Tag :आग
  January 14, 2018, 9:54 pm
वृन्द के दोहे ‘करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान’ के याद आते ही याद आने शुरु हो जाते हैं हिन्दी के मास्टर साहब श्यामपट चौक हिन्दी की कक्षा याद आने लगता है ‘मार मार कर मुसलमान बना दूँगा मगर हिन्दी जरूर सिखा दूँगा’ वाली उनकी कहावत में मुसलमान शब्द का प्रयोग और जब भी याद ...
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Tag :जड़मति
  January 10, 2018, 10:50 pm
मुझे कोई दिलचस्पी नहीं है करने में  मेरा कुत्ता तेरे कुत्ते से सफेद कैसे तेरा कुत्ता सफेद है पॉमेरियन है मेरा कुत्ता ढटुआ है भूरा है ये भी कोई बात है कुत्ते भी कभी नापे जाते हैं कुत्ते कुत्ते होते हैं होते हैं तो होते हैं इसमें कौन सी बुराई है एक कुत्ते को लेकर काहे इत...
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Tag :घर
  January 8, 2018, 10:36 pm
खुली रखें खिड़कियाँ पूरी नहीं तो आधी ही इतने में भी संकोच हो तो बना लें कुछ झिर्रियाँ नजर भर रखने के लिये बाहर चलती हवाओं के रंग ढंग पर बस खयाल रखें इतना हवायें आती जाती रहें खिड़कियों से बना कर गज भर की दूरी चलें सीधे मुँह मुढ़ें नहीं कतई खिड़कियों की ओर देखनेसमझने के लिये र...
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Tag :पर्दे
  January 6, 2018, 11:23 pm
कोई बुरी बात नहीं है ढूँढना लिखे हुवे के चेहरे को कुछ लोग आँखें भी ढूँढते हैं कुछ की नजर लिखे हुवे की कमर पर भी होती है कुछ पाजेब और बिछुओं को देख भर लेने की ललक के साथ शब्दों से ढके हुऐ पैरों की अँगुलियों के दीदार भर के लिये नजरें तक बिछा देते हैं सबके लिये रस्में हैं अपने...
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Tag :बकवास
  January 4, 2018, 9:41 pm
दो दिन निकल लिये कौन से कैलेण्डर के निकले पता नहीं है सोमवार मंगलवार की चीर फाड़ कब शुरु होगी कौन करेगा अभी तो किसी ने कुछ कहा नहीं है दो दिन पहले घर पर लटके कैलेण्डर में चढ़ी तारीख उछल रही थी देखा था सपने में सपने देखने पर अभी तक तो कोई पैसा लगा नहीं है पूना में हुई है मारपी...
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Tag :चाँद
  January 2, 2018, 10:48 pm
आईये फिर से शुरु हो जायें गिनती करना उम्मीदों की उम्मीदें किसकी कितनी उम्मीदें कितनी किससे उम्मीदें हर बार की तरह फिर एक बार मुड़ कर देखें कितनी पूरी हो गई कितनी अधूरी खुद ही रास्ते में खुद से ही उलझ कर कहीं खो गई आईये फिर से उलझी उम्मीदों को उनके खुद के जाल से निकाल कर एक...
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Tag :कुर्सी
  December 31, 2017, 7:32 pm
कविता करते करते निकल पड़ा एक कवि  हिमालयों सेहिमालय की कविताओं को बोता हुआ हिमालयी पहाड़ों के बीच से छलछल करती नदियों के साथ लम्बे सफर में दूर मैदानों को साथ चले उसके विशाल देवदार के जंगल उनकी हरियाली साथ चले उसके गाँव के टेढ़े मेढे‌ रास्ते साथ चली उसके गोबर मिट्टी से स...
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Tag :पुण्यतिथी
  December 28, 2017, 10:28 pm
दो सौ के ऊपर से और बीस बीत गये साल कोई दूसरा नहीं गालिब हुआ अब तो समझा भी दे गालिब गालिब हुआ भी तो कोई कैसे गालिब हुआ बहुत शौक है दीवानों को गालिब हो जाने का आज भी जैसे आज ही गालिब हुआ लगता है कभी तो हुआ कुछ देर को ये भी गालिब हुआ और वो भी गालिब हुआ समझ में किसे आता है पता भी कह...
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Tag :गालिब
  December 27, 2017, 8:06 pm
ईसा मसीह को याद कर रही है जहाँ सारी दुनियाँ बहुत सी और भी हैं महान आत्माएं किस किस को याद करें किस किस को भूल जायें पराये अपने होने लगे हैं बहुत अच्छा है आईये कुछ मोमबत्तियाँ प्यार के इजहार की जलायें रोशनी प्रेम और भाईचारे की फैलायें सीमायें तोड़ कर सभी चलो इसी तरह किसी ए...
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Tag :ईसा
  December 25, 2017, 8:25 pm
डूबेगी नहीं पता है डुबाने वाला पानी ही बहुत बेशरम है बैठे हैं डूबती हुई नाव में लोग हर चेहरे पर फिर भी नहीं दिख रही है कोई शरम है पानी नाव में ही भर रहा है नाव वालों के अपने भी करम हैं डुबोने वाले कोतैरने वालों के भी ना जाने क्यों डूब जाने का भरम है अच्छाई से परेशान होता ह...
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Tag :कुकरम
  December 24, 2017, 7:45 pm
लिखना सीख ही रहा है अभी भी कई सालों से लिखने वाला क्या लिख रहा है क्यों लिख रहा है अभी तो पूछना ही नहीं है शेर गजल कविता भी पढ़ रहा है लिखी लिखाई बहुत सी कई शेर सोचने और गजल लिखने की अभी तो हैसियत ही नहीं है मत बाँध लेना उम्मीद भी किसी दिन नया कुछ लिखे देखने की सूरतें सालों सा...
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Tag :खुराफातें
  December 23, 2017, 9:48 pm
लिखे हुऐ को सात बार पढ़ कर जनाब पूछ्ते हैं ओये तू कहना क्या चाहता है साफ साफ असली बात को दो चार सीधे साधे शब्दों में ही बता कर क्यों नहीं जाता है बात को लपेट कर घुमा कर फालतू की जलेबी बना कर किसलिये लिखने को रोज का रोज यहाँ पर आ जाता है सुनिये जनाबजिसकी जितनी समझ होती है वो उ...
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Tag :कबाड़
  December 20, 2017, 9:51 pm
मत नाप बकवास को उसकी लम्बाई चौड़ाई और ऊँचाई से नहीं होती हैं दो बार की गयी बकवासें एक दूसरे की प्रतिलिपियाँ बकवासें जुड़वा भी नहीं होती हैं ये भी एक अन्दाज है हमेशा गलत निशाना लगाने वाले का इसे शर्त मत मान लेना और ना ही शुरू कर देना एक दिन की बकवास को उठाकर दूसरे दिन की बकव...
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Tag :गुमनाम
  December 16, 2017, 2:39 pm
रहने भी दे हमेशा खुद से ही बहस मत कर लिया कर कुछ औरों का लिखना भी कभी तो देख भी लिया कर अपना अपना भी लिख रहे हैं लिखने वाले  तू भी कभी कुछ अपना ही लिख लिया कर इधर उधर देखना थोड़ी देर के लिये ही सही कभी आँखें हीकुछ देर के लिये सहीबन्द भी कर दिया कर कभी कुछ नहीं तो हो भी सकने वाल...
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Tag :टिक टिक
  December 14, 2017, 8:31 pm
किस लिये इतना बैचेन होता है देखता क्यों नहीं है रात पूरी नींद लेने के बाद भी वो दिन में भी चैन की नींद सोता है उसकी तरह का ही क्यों नहीं हो लेता है सब कुछ पर खुद ही कुछ भी सोच लेना कितनी बार कहा जाता है बिल्कुल भी ठीक नहीं होता है नयी कुछ लिखी गयी हैं किताबें उनमें अब ये सब भ...
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Tag :कानून
  December 10, 2017, 10:17 pm
जब भी कभीसैलाब आता है लिखना भी चाहो अगर कुछनहीं लिखा जाता है लहरों के ऊपर से उठती हैं लहरें सूखी हुई सी कईबस सोचना सारापानी पानी सा हो जाता है इसकी बात से उठती है जरा सोच एक नयी उसकी याद आते ही सब  पुराना पुराना सा हो जाता है अचानक नींद से उठी दिखती है सालों से सोई हुई क...
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Tag :नयी
  December 9, 2017, 7:48 pm
सब कुछ लिख देने की चाह में नकली कुछ लिख दिया जाता है बहुत कुछ असली लिखा जाने वाला कहीं भी नजर नहीं आता है कहीं नहीं लिखा जाता है वो सब जो लिखने के लिये लिखना शुरु करने से पहले तैयार करलिया जाता हैसारा सब कुछ शुरु में ही कहीं छूट जाता है दौड़ने लगता हैउल्टे पाँँवजैसे लिखने ...
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Tag :चाह
  December 8, 2017, 11:16 pm
बकवास का हिसाब रखने वाले को पता होता है उसने कब किस समय कहाँ और कितना कुछ कहा होता है इस जमाने के हिसाब से कुछ भी कहीं भी कभी भी कितना भी कह कर हवा में छोड़ देना अच्छा होता है पकड़ लेते हैं उड़ती हवाओं में से छोड़ी गयी बातों को पकड़ लेने वाले बहुत सारे धन्धों के चलने में इन्ही स...
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Tag :नशा
  December 7, 2017, 10:22 pm
ऐसा नहीं है कि नहीं लिखे गये कभी कुछ शब्द इश्क पर भी ऐसा भी नहीं है कि इश्क अब लिखने का मौजू रहा ही नहीं है इश्क बुढ़ाता है कहा जाना भी ठीक नहीं है हाँ बदल लेता है इश्क नजरिया अपना उम्र ढलने के साथ कमजोर होती जाती है जैसे आँख दिखता नहीं है चाँद भी उतना सुन्दर तारे गिने भी नही...
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Tag :नजर
  December 6, 2017, 10:32 pm
थोड़े से कुछ बेवकूफ भी होते हैं कुछ लोग समझना चाहिये नहीं समझे को दूसरों के समझने के लिये अगर लिख कर छोड़ भी देते देते हैं कुछ लोग सबके घर अलग अलग होते हैं रिवाज अलग होते हैं आदते अलग होती हैंसब को सब दिखाई दे जरूरी नहीं होता है चश्में अलग अलग होते हैं कुछ देखते हैं अपने हिस...
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Tag :कुछ लोग
  December 5, 2017, 9:11 pm
कभी सम्भाल भी लिया कर फुरसतें जरूरी नहीं है लिखना ही शुरु हो जाना खाली पन्नों को खुरच कर इतना भी कुरेदना ठीक नहीं महसूस नहीं होता क्या बहुत हो गया लिखना छोड़ कभी कुछ कर भी लिया जाये पन्ने के ऊपर पन्ना पन्ने के नीचे पन्ना आगे पन्ना पीछे पन्ना कोई नहीं पूछने वाला कितने कित...
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Tag :उत्तर
  December 3, 2017, 4:28 pm
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