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Blog: उलूक टाइम्स

Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
गजब है सारे उसके हिसाब से हिसाब समझा रहे हैं गणित की लिखी पुरानी एक किताब को किसी बेवकूफ के द्वारा लिखा गयाइतिहास बता रहे हैं वो पता नहीं क्यों बना हुआ है अभी तक कागज के नोट पर जिसकी एक सौ पचासवी तेरहवी मनाने के लिये उसकी धोती के हम सब मिल कर उसके परखच्चे उड़ा रहे हैं वहम ह... Read more
clicks 7 View   Vote 0 Like   3:06pm 30 Sep 2019 #गणित
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
साफ कहना है कहने से कोई परहेज होना भी नहीं है बात अपनी खुद की जरा सा भी कहीं करनी भी नहीं है थोड़े से मतभेद से केवल अब कहीं कुछ होता भी नहीं है पूरा  कर लें मनभेद इस से अच्छा माहौल आगे होना भी नहीं है झूठ सारे लिपटे हुऐ हैं परतों में पर्दे में नहाने की जरूरत भी नहीं है ब... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   4:56pm 29 Sep 2019 #जिन्दा
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
कौन सोया हुआ हैकौन जागा हुआ हैअब तोये भी पता नहीं चलतावो कहते हैंतुम सो रहे होहमें वो सोयेहुऐ सेनजर आते हैंचलो इस तरहही सहीउनकी रात होरही होती हैहम उठ करघूमने चलेजाते हैंभूख और रोटीएक पुरानी सी बात लगती हैकुछ नया करते हैंचलोचाँद परघूम करचल... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   3:43pm 23 Sep 2019 #घूमने
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
किसलिये डरता है उसके आईना दिखाने से चेहरा छुपा के रखता है वो अपना जमाने से कुछ पूछते ही पूछ लेना उस से उसी समय तहजीब कहाँ गयी तेरी पूछने चला है हुकमरानो से ना देखना घर में लगी आग को बुझाना भी नहीं दिखाना आशियाँ उसका जलता हुआ चूकना नहीं तालियाँ भी बजाने से हि... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   5:15pm 17 Sep 2019 #घड़ी
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
कुछ हंसते हंसते कुछ रो धो कर अपना घर अपनी दीवार रहने दे सर मत मार अपनी गाय अपनी गाय का अपना गोबरगोबर के कंडे खुद ही बनाये गये अपने ही हाथों से हाथ साफ धोकरअपना ही घर अपने ही घर की दीवारकंडे ही कंडेअपना सूरज अपनी ही धूप अपने कंडेकुरकुरेखुद रहे... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   2:34pm 16 Sep 2019 #कंडे
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
कितने पन्ने और कब तलक आखिर कोई रद्दी में बेचने के लिये जायेगालिखते लिखते कुछ भी कहीं भी कभी किसी दिन कुछ तो सिखायेगाशायद किसी दिन यूँ ही कभी कुछ ऐसा भी लिख लिया जायेगायाद भी रहेगा क्या लिखा है और पूछने पर फिर से कह भी दिय... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   5:03pm 15 Sep 2019 #घबराये
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
ना तो तू शेर है ना ही हाथी है फिर किस लिये इच्छा करता हैदहाड़ने की और चिंघाड़ने की तेरी मर्जी कैसे चल सकती हैहिम्मत है तुझे फर्जी होने की जंगल में होना और शिकार करना नंगे होना साथ में तीर तलवार होनाकोई पाषाण युग थोड़े ना चल रहा है दर्जी है खुद ही खुदगर्जी सिल रहा है... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   1:33pm 13 Sep 2019 #कायदा
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
कहने में क्या है कहता है कि लिखता है बस आग और आग लिखता है दिखने में दिखता है थोड़ा कुछ धुआँ लिखता है थोड़ी कुछ राख लिखता हैआग लिखने से उठता है धुआँ बच जाती है कुछ राख फिर भी नहीं कहते हैं लोग कि खाक लिखता है सोच नापाक होत... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   4:18pm 10 Sep 2019 #खाक
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
लिखी लिखायी बकवास को लिखने के बाद ही सही थोड़ा सा नीरमा लेकर क्या धो नहीं सकता है लिखे को धोने में परेशानी है अगर सोच को ही धो लेने का कोई इन्तजाम क्या लिखने से पहले हो नहीं सकता है दिखता है देखने वाले के देखने से थोड़ा सा कुछ लिखने की कोशिश में असली बात इस तरह से हमेशा ही को... Read more
clicks 3 View   Vote 0 Like   5:47pm 9 Sep 2019 #खो
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
भारत एक खोज एक बेवकूफ था पता नहीं क्या खोज पाया क्या खोया क्या पाया चन्द्रयान से भेजा गया एक पार्सल जरूर वही होगा उसी ने होगा गिराया परिपक्व हो चुके हैं हम समझते हैं समझ होनी जरूरी है आस पास बहुत कुछ होता है बताना किसलिये जरूरी है मदारी ने ध्यान भटकाया है उसी भारत एक खोज ... Read more
clicks 3 View   Vote 0 Like   2:34pm 8 Sep 2019 #चन्द्रयान
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
भाटे के  इन्तजार में कई पहर शांत बैठ जाता है पानी उतरता है तुरन्त रेत पर सब कुछ बहुत साफ लिख ले जाता है फिर ज्वार को उकसाने के लिये चाँद को पूरी चाँदनी के साथ आने के लिये गुहार लगाता है बोझ सारा मन का रेत में फैला हुआ पानी चढ़ते ही जैसे उसमें घुल कर अनन्त में फैल जाता है ना ... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   2:39pm 7 Sep 2019 #किताब
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
रात की एक बात और सुबह के दो जज्बात पता नहीं कौन कहाँ से कौन सी कौड़ीढूँढ कर कब ले आये बस पन्ने पर चिपका हुआ कुछ नजर आये नजर छ: बटा छ: हो जरूरी नहीं कौड़ी कौआ या कबूतर हो जाये असम्भव भी नहीं उड़ ही जाये जो भी है कुछ देर ठहर लें गीले जज्बातों को  सुखाने के लियेऔर स... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   5:33pm 6 Sep 2019 #गलती
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
ना खुश है ना उदास है थोड़ी सी बची हुयी है है कुछ आस है बहुत कुछ लिखना है कागज है कलम की है इफरात है ना नींद है ना सपने हैं शाम से जरा सा पहले की है बात है बन्द हैबोतल है खाली हैगिलास है अंधेरा है अमावस की है रात है ना पढ़ना ... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   5:34pm 5 Sep 2019 #इफरात
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
एक भीड़ लिख रही है लिख रही है चेहरे खुद के संजीदा कुछ पढ़ लेने वालेअलग कर लेते हैं सहेजने के लिये खूबसूरती किसी भी कोण से बना लेते हैं त्रिभुज या वर्ग या फिर कोई भी आकृतिसीखने में समय लगता है सीखने वाले को पढ़ने वाले के पढ़ने के क्रमजहाँ क्रम होना उतना जरूरी न... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   4:28pm 2 Sep 2019 #कबाड़
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
कुछ शब्दों को इधर कुछ शब्दों को उधर ही तो लगाना होता है बकवास करने में कौन सा किसी को व्याकरण साथ में समझाना होता है कौमा हलन्त चार विराम अशुद्धि चंद्र बिंदू सीख लेना बोनस बनाना होता है उनके लिये जिन्हें एक ही बात से दो का मतलब निकलवाना होता है रोज का रोज उगल दिया जाना जम... Read more
clicks 3 View   Vote 0 Like   5:05pm 1 Sep 2019 #आना
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
आभार पाठक 'उलूक टाइम्स'पर जुलाई 2016 के अब तक के अधिकतम 217629 हिट्स को अगस्त 2019 के 220621 हिट्स ने पीछे छोड़ा पुन: आभार पाठकसुना गया है अब हर कोई एक खुली हुयी किताब है हर पन्ना जिसका झक्क है सफेद है और साफ है सभी लिखते हैं आज कुछ ना कुछ बहुत बड़ी बात है कलम और कागज ही नहीं रह... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   4:35pm 31 Aug 2019 #किताब
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
कुछ चुटकुले अगर समझ में ना भी आयेंखुल के खिलखिला के अगर हँस ना भी पायेंकोशिश कर लें थोड़ा सा बिना बात भी कभी यूँ ही मुस्कुरा जायें किस लिये समझनी हर बात अपने आस पास की कुछ हट के माहौल भी जरा जरा मरा मरा छोड़ कर बनाने को कहीं चले जायेंकविता कहानी गजल शेर के मज़मूनभरे पड़े है... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   5:37pm 30 Aug 2019 #जी डी पी
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
कहीं ‘फॉग’ चल रहा है कहीं ‘डबल क्रॉस’ चल रहा है मौसम बारिश का है मौज में बस भ्रम फैलाने को बदल रहा है सफल है सफलता है सीखने सिखाने को मिल रहा है खाली तरकश है खून खराबे से ही बस उसे बड़ी नफरत है बस तीर को ही छल रहा है बन्दूकें हैं बन्द सन्दूकों में हैं अ... Read more
clicks 3 View   Vote 0 Like   4:13pm 29 Aug 2019 #गहने
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
जो लिखना होता है उसी को छोड़ कर कुछ कुछ लिख रहा होता है नहीं लिखा सारा लिखे लिखाये के पीछे खड़ा छुपा दिख रहा होता है ना सामान होता है ना दुकान होती है मगर थोड़ा रोज बिक रहा होता है आदत से मजबूर बिकने की बाजार में बिना टाँगें भी टिक रहा होता है नसीब होता है उस पढ़ाने वाले ... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   5:13pm 28 Aug 2019 #उपद्रव मूल्य
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
जन्म लेने के साढ़े पाँच दशक से थोड़ा ऊपर जा कर थोड़ा थोड़ा अब समझ में आने लगे हैं मायने कुछ महत्वपूर्ण शब्दों के ना माता पिता सिखा पाये ना शिक्षक ना ही आसपास का परिवेश और ना ही समाज ये भी पता नहीं लग पाया कि ये कुछ शब्द निर्णय करेंगे अस्तित्व का होने या ना होने के बीच की रेखा क... Read more
clicks 3 View   Vote 0 Like   3:03pm 26 Aug 2019 #कतार
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
बरसों लकीर पीटना सीखने के लिये लकीरें समझने के लिये लकीरें कहाँ से शुरु और कहाँ जा कर खतम समझ लेना नहीं समझ पाना बस लकीरें समझते हुऐ शुरु होने और खतम होने का है बस वहम और वहम जो घर में है जो मोहल्ले में है जो शहर में है वही सब हर जगह में है और वही हैं सब के रहम-ओ-करम सबके अपने ... Read more
clicks 8 View   Vote 0 Like   3:44pm 19 Jun 2019 #जमीर
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
कागज पर लिखा जमीन का कुछ भी उसके लिये बेकार होता है चाँद तारों पर जमा जमाया जिसका कारोबार होता है दुनियाँ जहाँ पर नजर रखता है बहुत ज्यादा समझदार होता है घर की मोहल्ले की बातें छोटे लोगों का रोजगार होता है बेमतलब कुछ भी कह डालिये तुरंत पकड़ लेता है कलाकार होता है मतलब की छ... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   5:23pm 13 Jun 2019 #खबरें
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
बहुत कुछ है लिखने के लिये बिखरा हुआ समेटना ठीक नहीं इस समयरहने देते हैंहोना कुछ नहीं है हिसाब का बेतरतीब ला कर और बिखेर देते हैं बहे तो बहने देते हैंदीमकें जमा होने लगी हैं फिर सेनये जोश नयी ताकतों के साथ कतारें कुछ सीधी कुछ टेढ़ी कुछ थम... Read more
clicks 13 View   Vote 0 Like   4:38pm 1 Jun 2019 #दीमक
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
पहाड़ी झबरीले कुछ काले कुछ सफेद कुछ काले सफेद कुछ मोटे कुछ भारी कुछ लम्बे कुछ छोटे कुत्तों के द्वारा घेर कर ले जायी जा रही कतारबद्ध अनुशाशित पालतू भेड़ों का रेवड़ गरड़िये की हाँक के साथ पथरीले ऊबड़ खाबड़ ऊँचे नीचे उतरते चढ़ते छिटकते फिर वापस लौटते मिमियाते मेंमनों को दूर स... Read more
clicks 12 View   Vote 0 Like   5:06pm 25 May 2019 #आवारा
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
नोट: किसी शायर के शेर नहीं हैं ‘उलूक’ के लकड़बग्घे हैं पेशे खिदमतशराफत ओढ़ कर झाँकें आईने में अपने ही घर के और देखें कहीं किनारे से कुछ दिखाई तो नहीं दे रहा है----------------------------पता मुझको है सब कुछ अपने बारे में कहीं से कुछ खुला हुआ थोड़ा सा किसी और को बता ही तो नहीं दे रहा है-----------------------... Read more
clicks 12 View   Vote 0 Like   4:10pm 21 May 2019 #आग
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