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उलूक टाइम्स

हर गधे के पास एक कहानी होती है 'उलूक'कल फिर कविता से मुलाकात हो पड़ी बीच रास्ते में पता नहीं रास्ता रोककर ना जाने क्यों हो रही थी खड़ी हमेशा ही कविता से बचना चाहता हूँ फिर भी पता नहीं कहाँ जा कर किस खराब घड़ी में उसी के आगे पीछे अगल बगल कहीं अपने को उलझन में खड़ा पाता हूँ समझाते ...
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Tag :उलूक
  November 13, 2018, 6:02 pm
कुछ रंगीन लिखना ज्यादा ठीक होता है शायद रंगहीन कुछ लिखने से रंग जो होते ही नहीं हैं कहीं भी वो रंग जो बन भीनहीं पाते हैं कुछ रंगों को आपस में मिला देने से किसलिये लिखने ?आभास होना जरूरी है आभासी भी हो तब भी तितलियाँ मधुमक्खियाँ भटक जाती हैं या ऐसा प्रतीत होता है कागज के फ...
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Tag :काला
  November 10, 2018, 10:12 pm
फेसबुक पर की  गयी किसी की एक टिप्पणी “ मन्दिर के स्थान पर अगर कोई अस्पताल की मांग करता है तो वह श्री राम की कृपा से जल्द ही अस्पताल मे भर्ती होकर इसका लाभ ले लेगा”  परकभी कभी जानवरों के स्वभाव से भी बहुत कुछ सीखा जाता हैअच्छा नहीं होता है अपनी सीमा से  बाहर जाकर ज...
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Tag :दूत
  November 8, 2018, 7:57 pm
दिग्विजय जी के 'उलूक'कीपिछली बकबक पर पूछे गये प्रश्न का ‘उलूकोत्तर’आभारी रहता है      हमेशा ‘उलूक’ आप का आप आ ही जाते हैं बकवास है मानते भी हैं फिर भी उकसाने को कवि का तमगा टिप्पणी में चिपका ही जाते हैं खुद ही प्रश्नों में उलझे हुऐ एक प्रश्न के सर पर एक फूल प्रश्न ...
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Tag :उलूक
  November 5, 2018, 8:11 pm
कैसे बनती होगी एक कविता रस छन्द और अलंकार से सराबोर  कैसे सोचता होगा एक कवि क्या देखता होगा और किस दिशा की ओर कौन पढ़ लेता होगा आँखें कवि की खोल मन में अपने हो लेता होगा उतना ही विभोर इन्द्रियाँ बस में होती होंगी किस की इतनी अवशोषित कर लेता होगा जो केवल संगीत छान कर सारे ...
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Tag :कवि
  November 4, 2018, 11:22 pm
सारे शरीफ हैं और एक भीड़ हो गयी है शरीफों की तू नहीं है उसमें और तुझे अफसोस भी नहीं होना चाहिये किसलिये होना है होना हीनहीं चाहिये किसलिये लपेट कर बैठा है कुछ कपड़े ये सोच कर ढक लेंगे सारा सब कुछ नंगों का कुछ नहीं होना है नंगा भगवान होता है होना भी चाहियेएक मन्दिर में मन्द...
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Tag :कबूतर
  November 2, 2018, 9:20 pm
एक बहुत बड़ी सोच रख दी गयी है बहुत ऊँचाई पर ले जाकर बहुत दूर से अब अंधे को भी कुछ कुछ सोचता एक बड़ा सा सिर दिखाई दे रहा है दीवारों में छपवा ही क्यों नहीं दे रहा है खर्चा बहुत हो गया है कह रहे हैं कुछ लोग जिनकी सोच शायद छोटी है हिसाब किताब थोड़े से हजार थोड़े से करोड़ों का अच्छी तर...
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Tag :ऊँची
  October 31, 2018, 8:18 pm
शहीद राजेंद्र सिंह बुंगलाजय हिन्द भारत माता की जय वन्दे मातरम हवाई यात्रा करते हुऐ एक कॉफिन बॉक्स एक पत्थर से कूटी गयी लाश यात्रा से थकी हुयी जैट लैग से कुछ बंदूकें सलामी मंत्री मुख्य मंत्री प्रधान मंत्री संत्री के चित्रो से भरे अखबार के समाचार गर्व करने साझा करने के...
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Tag :पत्थरबाज
  October 28, 2018, 7:51 pm
कैसे पता करे कोई खुद कि वो होश में है या बेहोश है वहाँ जहाँ बेहोश रहने को होश का पैमाना माना जाता है आँख में चश्में लगे हो भी और नहीं भी हों दिखायी दे जाता है साफ साफ बहुत दूर से नजर भी आ जाता है सोच के चश्में किसी की सोच में शायद कोई दूर वाला बहुत दूर से बैठ कर भी लगा ले जात...
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Tag :घोड़ा ऐनक
  October 27, 2018, 10:14 pm
"चिट्ठे ‘उलूक टाइम्स’ तक पहुँचे 18 लाख कदमों के लिये दर्शकों पाठकों और टिप्पणीकारों को दिल से आभार" किसी को लग रहा है कबड्डी चल रही है जी नहीं ये एक जगह की बात नहीं है जनाब देश में हर गली मोहल्ले में ध्यान से देखिये जनाब कान खोलिये नाक खोलिये आँख खोलिये ...
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Tag :कबड्डी
  October 25, 2018, 10:39 pm
उदघोषणा जैसे ही हुयी बरसात के मौसम के जल्दी ही आने की मेंंढक दीवाने सारे लग गये तैयारी में ढूढना शुरु कर दिये दर्जी अपने अपने होड़ मच चुकी है नजर आने लगी पायजामे बिना इजहार के सिलवाने की टर्र टर्र दिखने लगी हर जगह इधर भी उधर भी आने लगी घर घर से आवाज करने की रियाज टर्राने क...
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Tag :कुएं
  October 23, 2018, 10:06 pm
कहावतें भी समय के साथ बह जाती हैं चिंता चिता के समान होती होंगी कभी अब मगर चितायें भी बहा ले जायी जाती हैं लकड़ियाँ रह भी गयी अगर जलाती नहीं है बस थोड़ा थोड़ा सा सुलगाती हैं इसलिये लगा रह चिंता कर लेकिन कभी कभी बकवास भी पढ़ लिया कर अंगरेजी में कहते हैं फॉर ए चेंज बकवास लिखने...
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Tag :चिंता
  October 22, 2018, 7:25 pm
खीज मत कुछ खींच मुट्ठियाँ भींच मूल्य पढ़ा मौका पा थोड़ा सा बेच भी आ ना कर पाये व्यक्त ना दे सके अभिव्यक्ति ऐसी निकाल कुछ युक्ति मूल्यों के जाल बना जालसाजी मूल्यों कामूल है पढ़ा कर फंसा झूठ पर कपड़ा चढ़ा चमकीला दिखा गाँधी जैसों की सोच पर आग लगा जमाने के साथ चल चाँद तारे पा लेने...
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Tag :कबूतर
  October 20, 2018, 9:34 pm
यूँ ही पूछ बैठा गणित समझते हो जवाब मिला नहीं कभी पढ़ नहीं पायाहिसाब समझते हो जवाब मिला वो भी नहीं गणित में कमजोर रहा हमेशा दिमाग ही नहीं लगायामुझे भी समझ में कहाँ आ पाया गणित भी और हिसाब भी खुद गिनता रहा जिन्दगी भर बच्चों को घर पर सिखाता रहा पढ़ाना शुरु किया वहाँ भी पीछा नह...
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Tag :किताब
  October 16, 2018, 7:00 pm
किसलिये खोलता है खुद ही हमेशा अपनी पोल तेरी सोच में और तुझमें भी हैं ना जाने कितने झोल दुनियाँ पढ़ दुनियाँ लिख कभी बक बक छोड़ दुनियाँ सोच की आँखें खोल पण्डित है सुना है पण्डिताई तक नहीं दिखला पाता है घर के मन्दिर के अन्दर कहीं पूजा करवाता है बाहर किसी मन्दिर को जाता हु...
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Tag :गणपति
  October 13, 2018, 7:58 pm
दिल होता है किसी का भी हो होना भी चाहिये फुरसत से कभी फुरसत लिख लेने का मगर फुरसत है कि मिलती ही नहीं है कभी फुरसत सेफुरसत की फितरत में नहीं होती है फुरसत फितरत मतलब सयानापन फितरत मतलब मक्कारी फितरत मतलब चतुराई भी होता है फुरसत सयानी कहाँ हो पाती है फुरसत चतुर होती तो फु...
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Tag :फितरत
  October 11, 2018, 7:23 pm
अपनी अपने घर की अपने आसपास केढोल की पोल छिपाइये कहीं दूर बहुत दूर से फटे गद्दे रजाई के खोल ढूँढ कर लाइये फोटो खींचिये धूप अगरबत्ती दिखाइये दूर बैठे मुच्छड़ सूबेदार की बन्दूक के गरजने की आवाज सुनाइयेपास में घूम रहे उसके आवारा कुत्तों की लगातार हिल रही पूँछों को फैलाने क...
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Tag :ढपोर शंखों
  October 3, 2018, 7:30 pm
बापू फिर टकराये हम फिर पता चला एक साल और ऐवें ही बीत गया समझ में आ गयी हों जैसे फिर से कुछ और बातें फिर से हुऐ कुछ भ्रम जैसे खुद गोल किया हो अपने गोल पर और महसूस साथ में किया जीत गया बापू छोटी छोटी बातें दुनियाँ की दुनियाँदारी की लगता है धीरे धीरे अब पूरा का पूरा मन भीग गया द...
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Tag :झूठ
  October 2, 2018, 10:06 pm
शेर होते नहीं हैं शायर समझ नहीं पाते हैं कुछ इशारे गूँगों के समझ में नहीं आते हैं नदी होते नहीं हैं समुन्दर पहुँच नहीं पाते हैं कुछ घड़े लबालब भरे प्यास नहीं बुझाते हैं पढ़े होते नहीं हैं पंडित नहीं कहलाते हैं कुछ गधे तगड़े धोबी के हाथ नहीं आते हैं अंधे होते नहीं हैं सच देख...
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Tag :उल्लू
  September 29, 2018, 10:11 pm
पता नहींये मौके फिर कभी औरहाथ में आयें चलो कुछ भटके हुओं को कुछ और भटकायें कुछ शरीफ से इतिहास पन्नों में लिख कर लायें बेशरम सी पुरानी किताबों को गंगा में धो कर के आयेंंकरना कराना बदसूरत सा अपना ना बतायेंखूबसूरत तस्वीरें लाकर गलियों में फेंक आयें अच्छा लिखा अच्छे आदमी ...
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Tag :गंगा
  September 24, 2018, 8:07 pm
1947- 22/09/2018शब्द नहीं होते हैं सब कुछ बताने के लिये किसी के बारे में थोड़ा कम पड़ जाते हैं थोड़े से कुछ लोग भीड़ में होते हुऐ भी भीड़ नहीं हो जाते हैं समुन्दर के पानी में मिल चुकी बूँद होने के बावजूद भी दूर से पहचाने जाते हैं जिंदगी भर जन सरोकारों के लिये संघर्ष करने वालों के चेहरे ह...
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Tag :जन सरोकार
  September 23, 2018, 12:24 pm
होता है निगाहें कहीं और को लगी होती हैं और निशाना कहीं और को लगा होता है इस सब के लिये आँखों का सेढ़ा होना जरूरी नहीं होता है ये भी होता है बकवास को पढ़ना नहीं होता है बढ़ती आवत जावत की घड़ी की सूईं पढ़ने पढ़ाने का पैमाना नहीं होता है ये मजबूरी होता है हरी भरी कविताओं से भरी क्या...
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Tag :चूहों
  September 20, 2018, 11:12 pm
मानना तो पड़ेगा ही इसको उसको ही नहीं पूरे विश्व को तुझे किसलिये परेशानी हो जा री टापू से दूरबीन पकड़े कहीं दूर आसमान में देखते हुऐ एक गुरु को और बाढ़ में बह रहे मुस्कुराते हुऐ उस गुरु के शिष्य को जब शरम नहीं थोड़ा सा भी आ री एक बुद्धिजीवी के भी समझ में नहीं आती हैंं बातें बहुत ...
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Tag :उलूक
  September 18, 2018, 8:32 pm
कितनी शरमा शरमी से यहाँ तक पहुँच ही गयी कितनी बेशरमी से कहीं बीच में ही छूट गयी कुछ कबाड़ सी महसूस हुयी फाड़ कर बेखुदी में फेंक भी दी गयी कुछ पहाड़ सी कही जानी ही थी बहुत भारी हो गयी कही ही नहीं गयी कुछ आधी अधूरी सी रोज की आवारा जिन्दगी सी पिये खायी हुयी सीकिसी कोने में उनींदी...
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Tag :छलक
  September 14, 2018, 11:04 pm
साहित्यकार कथाकार कवि मित्र फरमाते हैं भाई क्या लिखते हो क्या कहना चाहते हो समझ में ही नहीं आता है कई बार तो पूरा का पूरा सर के ऊपर से हवा सा निकल जाता है और दूसरी बला ये ‘उलूक’ लगती है बहुत बार नजर आता है है क्या ये ही पता नहीं चल पाता है हजूर साहित्यकार अगर बकवास समझना शु...
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Tag :उलूक
  September 12, 2018, 7:08 pm
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