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Blog: मेघवाणी Meghvani

Blogger: Srikant Saurav
"मित्रो, इस कुम्भकर्णी सरकार की ईट से ईट बजा देंगे हम लोग। वेतनमान भीख नहीं, हमारा अधिकार है। और हम इसे लेकर रहेंगे!", यह कहते हुए जैसे ही टीईटी शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष नेता रामायण ठाकुर ने शिक्षक एकता के नारे लगाए। वहां पर उपस्थित शिक्षकों की तालियों की गड़गड़ाहट तेज हो... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   8:48am 15 Feb 2020 #
Blogger: Srikant Saurav
प्यारी सैंकी ,आज नौ फरवरी है। हिंदी के लास्ट परीक्षा के साथ हमारा आईएससी का एक्जाम बीत गया। अंगरेजी आ केमेस्ट्री तनि कमजोर गया है। मने चिंता की बात नहीं है। प्रैक्टिकल का नंबर बढ़ाने के लिए कॉलेज से मैनेज कर लिए हैं। मम्मी भी गांव के तीन पेड़ियां वाले जीन बाबा की भखौती भा... Read more
clicks 0 View   Vote 0 Like   2:17am 11 Feb 2020 #
Blogger: Srikant Saurav
पत्नी - "ए जी, सुनते हैं पमी के पापा! भेलेन्टाइन डे नियरा गया है। उस दिन फिलिम दिखाने ले चलिएगा न 'सिनेपोलिस'में?"ऑफिस के लिए तैयार होते पति - "तुम भी न एकदमे सठिया गई हो। छव बरिस हो गया बियाह हुए। बाल-बच्चेदार हो गई। मने..!"पत्नी - "त का बूढ़ा गए हैं हमलोग?"पति - "अब अपने बारे में कह स... Read more
clicks 3 View   Vote 0 Like   5:51am 8 Feb 2020 #
Blogger: Srikant Saurav
मोबाइल पर चंदू : "हैलो, चिंकी।"चिंकी : "हां, हैपी रोज डे!चंदू : "अरे वाह, सेम टू यू! विश करने के लिए पहिले हम फोन किए। आ उल्टे तुम्ही..! लेकिन तुम कैसे जानती हो?"चिंकी : तो का हम नहीं जानते हैं? आजु कवन फेस्टिबल है!"चंदू : "फेस्टिबल?"चिंकी : "और क्या? भले आप इंटर करे मोतिहारी चले गए। आ हम ... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   5:46am 8 Feb 2020 #
Blogger: Srikant Saurav
सरेह में दूर-दूर तक फैले खेतों में लहलहाते गेहूं के हरे-पौधे! उनके बीच में उगे पीले-पीले सरसों के फूल! आंखों को ग़ज़ब का सुकून दे रहे हैं। यूं कहें कि प्रेम आंनद बरसते महसूस हो रहा है। दिल को जवां करती फ़फ़नाकर बहती पछुआ ब्यार! तन के साथ मन को भी झुमाते हुए सिहरा रही है! माना कि ... Read more
clicks 0 View   Vote 0 Like   2:06am 6 Feb 2020 #
Blogger: Srikant Saurav
भाग -1राजाराम पहाड़ की घाटियों के बीच बसा एक छोटा सा गांव, छेनीपुर। 'मधुआ'विधानसभा में आता है। शहर की सभ्यता से कोसों दूर। जिधर भी नज़र दौड़ाओ। उंचे, लंबे पहाड़, जिन पर कंटीली झार-झंखाड़ से लेकर छोटे-बड़े पेड़ ही पेड़ दिखते हैं। यहां के निवासियों का आम पेशा है, जंगल से शहद निकालकर, फ... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   9:47am 15 Jan 2020 #
Blogger: Srikant Saurav
चुनाव का दिन क़रीब आ रहा था, जंगल, ज़मीन और रोज़गार के मुद्दे भरपूर उछाले जाने लगे। कई तरह के जुमले प्रचारित कर बाहरी-भीतरी की भावनाओं को जगाया गया जा रहा था। नतीजा सत्ता विरोधी वोट एकजुट होते दिखने लगा। विनायक भी टोले-टोले में घूम-घूमकर नुक्कड़ सभाएं करने लगा। 'टीयू'की पढ़ाई ... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   12:35pm 12 Jan 2020 #
Blogger: Srikant Saurav
राजाराम पहाड़ की घाटियों के बीच बसा एक छोटा सा गांव, छेनीपुर। शहर की सभ्यता से कोसों दूर। जिधर भी नज़र दौड़ाओ। उंचे, लंबे पहाड़, जिन पर कंटीली झार-झंखाड़ से लेकर छोटे-बड़े पेड़ ही पेड़ दिखते हैं। यहां के निवासियों का आम पेशा है, जंगल से शहद निकालकर, फल तोड़कर, मछली पकड़कर नज़दीक के बा... Read more
clicks 19 View   Vote 0 Like   5:03pm 9 Jan 2020 #
Blogger: Srikant Saurav
बसंत आ गया। दिख रहा है, खेतों में फुलाए पीले-पीले सरसों की पंखुड़ियों में। अंगड़ाई लेते मटर, गेंहूं के हरिहराए पौधों में। महसूस हो रहा, फफनाकर बहती, प्री फगुनहट का अहसास कराती पछुआ ब्यार में। महक रहा है, खिले डहलिया, गेंदा, गुलाब, जूही के फूलों में। आम की डालियों के बीच आस्त... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   6:32am 6 Jan 2020 #
Blogger: Srikant Saurav
मित्रो, अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक साल का पहला दिन था। आज पांच बजे ही नींद टूट गई। आदत के मुताबिक मोबाइल लेकर टीपने लगा। सोचा, दो घण्टे पहले जगा हूं। क्यों नहीं, कोई फिल्म देख ली जाए। नेटफ्लिक्स खोला। बॉलीवुड की पुरानी मूवी खंगलाते हुए 'ताल'पर नजर ठहर गई। सहसा फ्लैश बै... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   6:29am 6 Jan 2020 #
Blogger: Srikant Saurav
मोतिहारी। मजबूरी का नाम भले ही महात्मा गांधी हों या ना हों। लेकिन संघर्ष का दूसरा नाम शर्मा जी जरूर हो सकते हैं। एक रोज रिपोर्टिंग को लेकर घूमते समय इनसे हरसिद्धि के भादा पुल के पास मुलाकात हो गई। औपचारिक बातचीत में इन्होंने जो आपबीती सुनाई, लगा उसकी खबर जरूर बननी चाह... Read more
clicks 59 View   Vote 0 Like   2:59am 1 Jan 2019 #
Blogger: Srikant Saurav
डियर पिरिति,हैपी न्यू ईयर। आज 31 दिसम्बर है। नया साल 19 से ठीक एक दिन पहले सन्देश भेज रहा हूं। तोहरा व्हाट्सअप पर। मामा जी का लावा मोबाइल घर पर छूट गया था। उसी में आइडिया का सिम लगाकर 25 का 2G नेट पैक डाला हूं। हमें मैसेज भेजने का मूड नहीं था। बुझते हैं, तुमको आछा नहीं लगेगा। मन... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   10:37am 31 Dec 2018 #
Blogger: Srikant Saurav
************************* (1.)  'हेल्लो, कवन बोल रहे हैं उधर से? मिस कॉल आया है आपका मेरे नम्बर पर।'मोबाइल पर अंजान नंबर से आए मिस काल को देख फोन लगा प्रीतम ने पूछा।'जी, सॉरी। गलती से लग गया था आप पर। ऊ त हम अपना मौसी के यहां परसा फोन लगाए थे।''त एमे सॉरी के कवन बात है। कबो-कबो गलती से आछा काम हो ज... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   4:33am 28 Feb 2016 #
Blogger: Srikant Saurav
येलड़की सुनो, साहब के साथ जाएगी क्या? उस सुनसान अंधेरी रात में सड़क के किनारे अचानक से एक आभासी छाया को देख ड्राइवर ने गाड़ी धीमे कर दी. और यही शब्द उसकी ओर देखते हुए उसने कहा था. हालांकि उस घुप अंधियारे में कुछ सूझ तो नहीं रहा था. कुछ देर के अंतराल पर गाडियां आतीं भी तो तेज रफ्... Read more
clicks 203 View   Vote 0 Like   8:46am 17 Jul 2014 #
Blogger: Srikant Saurav
जानेवह कौन सी घड़ी और... क्या खासियत लगी होगी इस जगह में. जब देवों के देव महादेव ने यहां बसने का फैसला किया होगा. आज दुनिया इसे अरेराज के सोमेश्वर धाम के नाम से जानती है. जहां सालों भर बोल बम की जयकारा से आस्था की बूंदें छलकते रहती हैं. पड़ोसी होने के कारण बचपन से ही यहां आना जा... Read more
clicks 262 View   Vote 0 Like   10:14am 13 Jul 2014 #
Blogger: Srikant Saurav
बिहारके पूर्वी चंपारण जिले के मुख्यालय मोतिहारी से 36 किमी दक्षिण-पश्चिम में बसी है एक छोटी सी पंचायत, पिपरा. गंडक (नारायणी) नदी के बांध से सटे कछार में बसा यह गांव, प्राकृतिक दृश्यों के लिहाज से बिहार के मैदानी इलाके में स्थित किसी भी गांव से ख़ूबसूरत और उसी के अनुरुप पिछ... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   7:13am 24 Mar 2014 #
Blogger: Srikant Saurav
“इतिहासहमें सिखाता है कि किसी देश को बर्बाद करना है तो सबसे पहले वहां की मातृभाषा को नष्ट कर दो. शायद जर्मनी, चीन, फ्रांस व जापान के लोग इस हकीकत से अच्छी तरह वाकिफ थे. इसलिए उन्होंने अपनी मातृभाषा को मरने नहीं दिया. मातृभाषा का मतलब महज कुछ शब्द भर नहीं, यह हमारी पहचान, हम... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   12:39pm 14 Mar 2014 #
Blogger: Srikant Saurav
“इतिहासहमें सिखाता है कि किसी देश को बर्बाद करना है तो सबसे पहले वहां की मातृभाषा को नष्ट कर दो. शायद जर्मनी, चीन, फ्रांस व जापान के लोग इस हकीकत से अच्छी तरह वाकिफ थे. इसलिए उन्होंने अपनी मातृभाषा को मरने नहीं दिया. मातृभाषा का मतलब महज कुछ शब्द भर नहीं, यह हमारी पहचान, हम... Read more
clicks 227 View   Vote 0 Like   12:39pm 14 Mar 2014 #
Blogger: Srikant Saurav
मुफ्फसिल क्षेत्रों में पत्रकारिता बेहद दुरुह काम है. और यहां तकरीबन 90 प्रतिशत ग्रामीण पत्रकारों को दस टके पर खटना पड़ता है. वह भी सुबह से शाम तक. जबकि यही एक पेशा है जिसमें महज पैसे कमाने के लिए कोई नहीं आता, यदि अपवाद के तौर पर चंद दल्लमचियों को छोड़ दें तो. अभी भी अखबारों क... Read more
clicks 218 View   Vote 0 Like   2:36am 26 Feb 2014 #
Blogger: Srikant Saurav
कल एक शादी समारोह में खाना बनाने वाले कैटरर्स को आपस में बंगाली में बतियाते देख नजरें उनपर ठहर गई. स्थानीय हलुवाई टीम का एक भोजपुरी भाषी क्षेत्र में इस कदर दूसरी भाषा में बातें करने को लेकर उनके बारे में जानने की जिज्ञासा हुई. वजह यह भी रही कि वे जितनी सहजता से बांगला बो... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   2:25am 26 Feb 2014 #
Blogger: Srikant Saurav
एकजमाना था जब अखबारों के जिला संस्करण नहीं होकर प्रादेशिक पन्ने छपते थे. जिला कार्यालय में ब्यूरो चीफ की अच्छी खासी धाक रहती थी. अखबार के चर्चित संवाददाताओं की गरिमा निराली थी. उनकी धारदार लेखनी के कायल स्थानीय विधायक, मंत्री से लेकर एसपी व डीएम तक रहते. स्थिति यह थी कि... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   9:46am 18 Feb 2014 #
Blogger: Srikant Saurav
भले ही अन्य निजी संस्थानों में तमाम डिग्रियां होने के बावजूद स्किल टेस्ट लेकर ही भर्ती करने का प्रावधान है. लेकिन मीडिया में दक्षता जांच कर पत्रकार रखने की परिपाटी लगभग खत्म सी हो चुकी है. जबकि 90 के दशक के अंतिम वर्ष तक अखबारी जगत में परीक्षा लेकर रखने का चलन था. वे चाहे ... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   9:43am 18 Feb 2014 #
Blogger: Srikant Saurav
जब भी रक्सौल आता हूं, जाने क्यों नास्टलेजिक हो जाता हूं. इस पार भारत व उस पार नेपाल का वीरगंज शहर. इस बार मां की आंखों के इलाज के लिए परवानीपुर (नेपाल) आया हूं. लकिन रक्सौल में ही एक रिश्तेदार के यहां ठहरना हुआ है. सीमा पर बसा यह अनुमंडलीय शहर दूसरों की नजर में भले ही अंतराष्... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   9:38am 18 Feb 2014 #
Blogger: Srikant Saurav
हमारीज़िंदगी में जो कुछ भी घटित होता है, उनमें अधिकांश पर हमारा नियंत्रण नहीं होता. स्वेच्छा से या जबरिया हम परिस्थिति का दास बन, बस साक्षी भाव से उन लम्हों के झेलते चले जाते हैं. लेकिन यादों के गलियारे में जब कभी गुजरे ज़माने के खुशनुमा पल दस्तक देते हैं. हमारा मन बिना र... Read more
clicks 221 View   Vote 0 Like   7:27am 23 Sep 2013 #
Blogger: Srikant Saurav
किसी भी पद के लिए चयन से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है उसकी गरिमा को बचाए रखना. और यह तभी मुमकिन है जब उस पद पर किसी योग्य व्यक्ति को चुना जाए. 'बिहार भोजपुरी अकादमी'भी एक मर्यादित संस्था है. जिसका जुड़ाव या यूं कहें कि सरोकार करीब 20 करोड़ भोजपुरी भाषियों से है. पिछले दिनों अक... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   4:04pm 18 Sep 2013 #
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