POPULAR ENGLISH+ SIGNUP LOGIN

Blog: मेघवाणी Meghvani

Blogger: Srikant Saurav
मोतिहारी। मजबूरी का नाम भले ही महात्मा गांधी हों या ना हों। लेकिन संघर्ष का दूसरा नाम शर्मा जी जरूर हो सकते हैं। एक रोज रिपोर्टिंग को लेकर घूमते समय इनसे हरसिद्धि के भादा पुल के पास मुलाकात हो गई। औपचारिक बातचीत में इन्होंने जो आपबीती सुनाई, लगा उसकी खबर जरूर बननी चाह... Read more
clicks 42 View   Vote 0 Like   2:59am 1 Jan 2019 #
Blogger: Srikant Saurav
डियर पिरिति,हैपी न्यू ईयर। आज 31 दिसम्बर है। नया साल 19 से ठीक एक दिन पहले सन्देश भेज रहा हूं। तोहरा व्हाट्सअप पर। मामा जी का लावा मोबाइल घर पर छूट गया था। उसी में आइडिया का सिम लगाकर 25 का 2G नेट पैक डाला हूं। हमें मैसेज भेजने का मूड नहीं था। बुझते हैं, तुमको आछा नहीं लगेगा। मन... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   10:37am 31 Dec 2018 #
Blogger: Srikant Saurav
************************* (1.)  'हेल्लो, कवन बोल रहे हैं उधर से? मिस कॉल आया है आपका मेरे नम्बर पर।'मोबाइल पर अंजान नंबर से आए मिस काल को देख फोन लगा प्रीतम ने पूछा।'जी, सॉरी। गलती से लग गया था आप पर। ऊ त हम अपना मौसी के यहां परसा फोन लगाए थे।''त एमे सॉरी के कवन बात है। कबो-कबो गलती से आछा काम हो ज... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   4:33am 28 Feb 2016 #
Blogger: Srikant Saurav
येलड़की सुनो, साहब के साथ जाएगी क्या? उस सुनसान अंधेरी रात में सड़क के किनारे अचानक से एक आभासी छाया को देख ड्राइवर ने गाड़ी धीमे कर दी. और यही शब्द उसकी ओर देखते हुए उसने कहा था. हालांकि उस घुप अंधियारे में कुछ सूझ तो नहीं रहा था. कुछ देर के अंतराल पर गाडियां आतीं भी तो तेज रफ्... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   8:46am 17 Jul 2014 #
Blogger: Srikant Saurav
जानेवह कौन सी घड़ी और... क्या खासियत लगी होगी इस जगह में. जब देवों के देव महादेव ने यहां बसने का फैसला किया होगा. आज दुनिया इसे अरेराज के सोमेश्वर धाम के नाम से जानती है. जहां सालों भर बोल बम की जयकारा से आस्था की बूंदें छलकते रहती हैं. पड़ोसी होने के कारण बचपन से ही यहां आना जा... Read more
clicks 242 View   Vote 0 Like   10:14am 13 Jul 2014 #
Blogger: Srikant Saurav
बिहारके पूर्वी चंपारण जिले के मुख्यालय मोतिहारी से 36 किमी दक्षिण-पश्चिम में बसी है एक छोटी सी पंचायत, पिपरा. गंडक (नारायणी) नदी के बांध से सटे कछार में बसा यह गांव, प्राकृतिक दृश्यों के लिहाज से बिहार के मैदानी इलाके में स्थित किसी भी गांव से ख़ूबसूरत और उसी के अनुरुप पिछ... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   7:13am 24 Mar 2014 #
Blogger: Srikant Saurav
“इतिहासहमें सिखाता है कि किसी देश को बर्बाद करना है तो सबसे पहले वहां की मातृभाषा को नष्ट कर दो. शायद जर्मनी, चीन, फ्रांस व जापान के लोग इस हकीकत से अच्छी तरह वाकिफ थे. इसलिए उन्होंने अपनी मातृभाषा को मरने नहीं दिया. मातृभाषा का मतलब महज कुछ शब्द भर नहीं, यह हमारी पहचान, हम... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   12:39pm 14 Mar 2014 #
Blogger: Srikant Saurav
“इतिहासहमें सिखाता है कि किसी देश को बर्बाद करना है तो सबसे पहले वहां की मातृभाषा को नष्ट कर दो. शायद जर्मनी, चीन, फ्रांस व जापान के लोग इस हकीकत से अच्छी तरह वाकिफ थे. इसलिए उन्होंने अपनी मातृभाषा को मरने नहीं दिया. मातृभाषा का मतलब महज कुछ शब्द भर नहीं, यह हमारी पहचान, हम... Read more
clicks 210 View   Vote 0 Like   12:39pm 14 Mar 2014 #
Blogger: Srikant Saurav
मुफ्फसिल क्षेत्रों में पत्रकारिता बेहद दुरुह काम है. और यहां तकरीबन 90 प्रतिशत ग्रामीण पत्रकारों को दस टके पर खटना पड़ता है. वह भी सुबह से शाम तक. जबकि यही एक पेशा है जिसमें महज पैसे कमाने के लिए कोई नहीं आता, यदि अपवाद के तौर पर चंद दल्लमचियों को छोड़ दें तो. अभी भी अखबारों क... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   2:36am 26 Feb 2014 #
Blogger: Srikant Saurav
कल एक शादी समारोह में खाना बनाने वाले कैटरर्स को आपस में बंगाली में बतियाते देख नजरें उनपर ठहर गई. स्थानीय हलुवाई टीम का एक भोजपुरी भाषी क्षेत्र में इस कदर दूसरी भाषा में बातें करने को लेकर उनके बारे में जानने की जिज्ञासा हुई. वजह यह भी रही कि वे जितनी सहजता से बांगला बो... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   2:25am 26 Feb 2014 #
Blogger: Srikant Saurav
एकजमाना था जब अखबारों के जिला संस्करण नहीं होकर प्रादेशिक पन्ने छपते थे. जिला कार्यालय में ब्यूरो चीफ की अच्छी खासी धाक रहती थी. अखबार के चर्चित संवाददाताओं की गरिमा निराली थी. उनकी धारदार लेखनी के कायल स्थानीय विधायक, मंत्री से लेकर एसपी व डीएम तक रहते. स्थिति यह थी कि... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   9:46am 18 Feb 2014 #
Blogger: Srikant Saurav
भले ही अन्य निजी संस्थानों में तमाम डिग्रियां होने के बावजूद स्किल टेस्ट लेकर ही भर्ती करने का प्रावधान है. लेकिन मीडिया में दक्षता जांच कर पत्रकार रखने की परिपाटी लगभग खत्म सी हो चुकी है. जबकि 90 के दशक के अंतिम वर्ष तक अखबारी जगत में परीक्षा लेकर रखने का चलन था. वे चाहे ... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   9:43am 18 Feb 2014 #
Blogger: Srikant Saurav
जब भी रक्सौल आता हूं, जाने क्यों नास्टलेजिक हो जाता हूं. इस पार भारत व उस पार नेपाल का वीरगंज शहर. इस बार मां की आंखों के इलाज के लिए परवानीपुर (नेपाल) आया हूं. लकिन रक्सौल में ही एक रिश्तेदार के यहां ठहरना हुआ है. सीमा पर बसा यह अनुमंडलीय शहर दूसरों की नजर में भले ही अंतराष्... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   9:38am 18 Feb 2014 #
Blogger: Srikant Saurav
हमारीज़िंदगी में जो कुछ भी घटित होता है, उनमें अधिकांश पर हमारा नियंत्रण नहीं होता. स्वेच्छा से या जबरिया हम परिस्थिति का दास बन, बस साक्षी भाव से उन लम्हों के झेलते चले जाते हैं. लेकिन यादों के गलियारे में जब कभी गुजरे ज़माने के खुशनुमा पल दस्तक देते हैं. हमारा मन बिना र... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   7:27am 23 Sep 2013 #
Blogger: Srikant Saurav
किसी भी पद के लिए चयन से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है उसकी गरिमा को बचाए रखना. और यह तभी मुमकिन है जब उस पद पर किसी योग्य व्यक्ति को चुना जाए. 'बिहार भोजपुरी अकादमी'भी एक मर्यादित संस्था है. जिसका जुड़ाव या यूं कहें कि सरोकार करीब 20 करोड़ भोजपुरी भाषियों से है. पिछले दिनों अक... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   4:04pm 18 Sep 2013 #
Blogger: Srikant Saurav
'छपास'की बीमारी बेहद ख़राब होती है. जिस किसी को यह रोग एक बार लग जाए. ताउम्र पीछा नहीं छोड़ता. प्रायः यह पत्रकारों व लेखकों में पाया जाता है. एक जमाना था वह भी जब अपना लिखा छपवाने के लिए संपादक की कितनी चिरौरी व तेल मालिश करनी पड़ती थी. विभिन्न अख़बारों या पत्रिकाओं के दफ्त... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   4:15am 18 Sep 2013 #
Blogger: Srikant Saurav
निरालापत्रकारिता तो सभी करते हैं पर इसे जीता कोई-कोई ही है. एक ऐसे ही बिहारी पत्रकार हैं निराला जो कि पत्रिका तहलका,पटना से जुड़े हैं. इनकी खासियत यह है कि ये अच्छा कलमची व खबरची होने के साथ ही भोजपुरी एक्टिविस्ट भी हैं. साथ ही घुमक्कड़ स्वभाव के, अव्वल दर्जे के साहित्यि... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   5:01pm 14 Sep 2013 #
Blogger: Srikant Saurav
आज 14 सितम्बर है, बोले तो हिंदी दिवस. सुबह में ही अमेरिका के बोस्टन शहर में रहने वाले एनआरआई सुधाकर मिश्रा का फोन आया. बोले, मेरा नंबर उनको इंटरनेट से मिला. भोर के 2 बजे (अमेरिकी समय शाम 4.30 बजे) से ही प्रयास कर रह थे, बात करने के लिए. लेकिन फोन लगा सुबह 8.30 बजे (अमेरिकी समय रात 11 बजे).... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   4:35pm 14 Sep 2013 #
Blogger: Srikant Saurav
-------------बकवास तुकबंदी (2)-------------दिल की रूमानियत जब चाहे जुबां पे आ जाती हैचलते फिरते सरेराह यूं ही कोई अदा लुभा जाती हैकक्षा की तीसरी बेंच हो या सिनेमा की बालकनीपड़ोस की छत पे टटोला तो पार्क में मिली चवन्नीफिल्म के गीतों में मिला शायर की कविताओं मेंनहीं मिला अफसाना जिसे ढूंढ़... Read more
clicks 220 View   Vote 0 Like   3:07am 24 May 2013 #
Blogger: Srikant Saurav
उसकी काली जुल्फें हवा में क्या लहराईमानो भरी दोपहर में शाम ने ली अंगड़ाईफिर जब मेरी नजर से उसकी नजर टकराईउसके गुलाबी गालों पे थोड़ी सुर्खी सी आई हाथ में मोबाइल कंधे को पर्स ने संभाला थामासूम चेहरा, ओठों पर लिपस्टिक डाला थासाढ़े पांच के हाइट पर स्कर्ट थोड़ा टाइट थाघुटने तक... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   2:06am 17 Apr 2013 #
Blogger: Srikant Saurav
रचनात्मक लेखन की कश्ती पर सवार हिंदी के युवा साहित्यकारो, जरा ध्यान दीजिए...  --------------------------------------------------------------------------------------साथियों, चाहे क्षेत्र कला का हो या... साहित्य का, बाजार में बिकता कंटेंट ही है. कुछ नयेपन की तलाश में कब कौन सी रचना खरीदार के दिल को छू जाए, कौन सा कंटेंट हिट हो जा... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   10:06am 16 Apr 2013 #
Blogger: Srikant Saurav
जब मैंने होश संभाला 5 साल की उम्र रही होगी, सन 88 का वर्ष था. वह दौर जब उदारीकरण की सुगबुगाहट में उनींदा भारत ‘इंडिया’ बनने की और अग्रसर था. यानी ‘भारत’ व ‘शाइनिंग इंडिया’ के बीच का वक्त. तब मनोरंजन के तौर पर लोगों के पास सीमित विकल्प थे. भले ही जिला मुख्यालय या बड़े शहरों मे... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   6:20am 14 Apr 2013 #
Blogger: Srikant Saurav
यादाश्तपरजोरदूंतो90 काशुरूआतीदशकथावह. तबमैंदूसरीकक्षामेंपढ़ताथापड़ोसकेहीप्राथमिकविद्दालयमें, नाम- राजकीयकन्याप्राथमिकविद्दालय, बथानीटोला, कनछेदवा. बोलेतो- ईटकीदीवारवखप्पड़ेकीछतवालीदोकमरेकीईमारत, बाहरमेंछोटासाबरामदा, परफर्शपरप्लास्टरनहींथा. इन्हींकमरों... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   9:14am 7 Apr 2013 #
Blogger: Srikant Saurav
अतीत की यादें अक्सर हमारी स्मृति को कुरेदती हैं. और... गुजरी जिंदगी में कुछ पल ऐसे भी होते हैं, जिन्हें हम चाहकर भी नहीं भूल सकते! किसी के भी जीवन में तीन अवस्थाएं बेहद खास होती हैं- बचपन, जवानी व बुढ़ापा. मैंने इनमें दो पड़ाव को, कुछ अपनी मर्जी से और कुछ जबरिया जी ही लिया है. इस... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   9:03am 31 Mar 2013 #
Blogger: Srikant Saurav
"नीक लागे धोती, नीक लागे कुरता, नीक लागे गउवा जवरिया हो, नीक लागे मरद भोजपुरिया सखी, नीक लागे मरद भोजपुरिया..!"इस लोकप्रिय भोजपुरी गीत में खांटी देहाती अंदाज में होली की ठिठोली रची-बसी है. बसंती बयार से आई फागुन की धमक, हर साल कुछ नयेपन का एहसास लेकर आती है. फिर क्या बच्चे, ... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   8:31am 13 Mar 2013 #
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Publish Post