POPULAR ENGLISH+ SIGNUP LOGIN

Blog: अनंत जी की कविताएँ

Blogger: Anant Mishra
अचानक उठ जाता हूँडूबते हुए गोयानिकल आया हूँइस कमरे से उस कमरे जाता हूँखोजता हूँ एक शब्दजो मेरी अकुलाहट को भाषा दे देअचानक खिड़की से दिखता है खुला आसमानआसमान के पास पहुंची पेड़ की डालियाँ और पत्तियाँसुनता हूँ सड़क पर चलती गाड़ियों की आवाजफेरी वालों की पुकारऔर मेरा खोया ह... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   10:51am 1 Jun 2017 #
Blogger: Anant Mishra
जब भी कातर होता हूँतो कविता लिखता हूँखोजता हूँ कलमहड़बड़ी होती है सहसा न मिलने पर बेचैनी कि कलम कहाँ हैव्यवस्थित कभी नही रहा किसब कुछ समय पर मिलेपर शायद इसी अव्यवस्था नेदी है इतनी बेचैनी कि कविता लिखता हूँमन का मजबूत होता तो क्यों लिखता कविताकातर भी क्यों होतामैं भी ... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   10:49am 1 Jun 2017 #
Blogger: Anant Mishra
दिनांत में सूर्य के घोड़े चले गएटापों की आवाज धीमी हो गईपेड़ पौधे कहीं नहीं गएपर चुप हो गएँ सुबह जिन पक्षियों की आवाज आई थीवह कहाँ गईंपता नहींरात आने को हैघर में आए लोगइधर-उधर कही बैठे लेटेबच्चे ऊधम मचातेअभी वक्त हो जाएगाखाना बन जाने काखाने काऔर लोगों के सोने थोड़ा पढ़न... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   10:48am 1 Jun 2017 #
Blogger: Anant Mishra
उखड़ गए मन की जड़ से बने जीवन की त्वचा का स्पर्शरह गए वंचित हँसी के सागर की लहर से अविरलऔ पुरातन देह के यथार्थ मेंकोने में छिपे हरे-हरे कुछ पत्तों का बोधअजब है ,अजब है जंगले से बाहर देखनाऔर अनकनादोपहर की धूप कोजिंदगी की शाम में ,क्या बचा हुआ आदमीइतना दयनीय होता हैवह मर ... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   10:47am 1 Jun 2017 #
Blogger: Anant Mishra
और शाम गहरा जाती हैविदा समय मेंविदा द्वार पर खड़ा पेड़मानो कुछ कहताऔर जैसे वह प्रश्न पूछताफिर कब आओगे,वह अपनी जड़ छोड़ नहीं सकतामैं पर लौट-लौट सकता हूँ ।पेड़ एक भाषा बुनता हैमौन अँधेरा गहरे-गहरेऐसे-ऐसे प्रश्न करता हैजिसके उत्तर दे पानाअत्यंत असंभव ।कभी कहो यदि किसी स्वजन ... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   10:45am 1 Jun 2017 #
Blogger: Anant Mishra
उजले दीप जले किसके सुन्दर अधर कोर परये मुस्कान खिलेनयनों में आई दिवालीस्नेह भरी भाई दिवालीदीपक थाल संभाले आँचलपायल झूम चलेउजले दीप जलेझूम उठी आँगन की तुलसीअंधकार की पाँखें झुलसींप्यारे-प्यारे गीत पिया केरह-रह मचल चलेंउजले दीप जलेद्वार देख साजन परदेसीआँसू उमड़ प... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   10:43am 1 Jun 2017 #
Blogger: Anant Mishra
आप जिस व्यक्ति से संपर्क करना चाहते हैं वे अभी व्यस्त हैंया कवरेज क्षेत्र से बाहर हैं कृपया थोड़ी देर में कॉल करें ,मोबाइल पर इस हिंदी भाषा के इबारत केकई भाषाई अनुवाद दिन मेंकई बार सुनने पड़ते हैं ,आप अभी नहींकृपया प्रतीक्षा करें ,वे प्रतीक्षा करें जिन्हेंअभी रोटी क... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   10:40am 1 Jun 2017 #
Blogger: Anant Mishra
अंततः सभी चले जाएंगेयह मुहावरा बोलने वालों को इतना बोध नहीं रहता कि कि कम जाते हैं ज्यादा लोग रह जाते हैंप्रलय किताबों में पूर्ण होता हैप्रलय भूगोल मेंहमेशा खंड प्रलय रहता हैऔर बचे हुए लोगदुःख, संवेदना, आंसू, श्रद्धाऔर स्मृति के फूल चढ़ातेकैंडिल जलातेदिवंगत आत... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   10:39am 1 Jun 2017 #
Blogger: Anant Mishra
जहां  से यात्रा शुरू होती है वहीँ जा कर समाप्त होती है किन्तु कुछ रास्ते ऐसे होते हैं जिनका कोई जवाब नहीं होता ।ऐसा ही था तुम्हारा रास्ता तुम्हारे साथ का आदमीथक नहीं , रुका नहीं ,सिर्फ चालता रहा 'चरैवेती  चरैवेति'। वाकई झुकना  ही पड़ता है गोकि आदमी झुकना  नही चाहताक... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   4:55am 6 Sep 2014 #
Blogger: Anant Mishra
मुझे किसी महाकवि ने नहीं लिखासड़कों के किनारेमटमैले बोर्ड परलाल-लाल अक्षरों मेंबल्कि किसी मामूलीपेंटर कर्मचारी नेमजदूरी के बदले यहाँ वहाँलिख दियाजहाँ-जहाँ पुल कमज़ोर थेजहाँ-जहाँ जिंदगी कीभागती सड़कों परअंधा मोड़ थात्वरित घुमाव थाघनी आबादी को चीर करसनसनाती आगे निकल... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   8:42am 17 Jul 2014 #
Blogger: Anant Mishra
मकान :आदमी के ऊपर छत होनी ही चाहिए वह घरेलू महिला हमेशा मिलने पर कहती है उसका बंगला नया है उसके नौकर उसके लान की सोहबत ठीक करते हैं और वह अपने ड्राइंगरूम को हमेशा सजाती रहती है |मैंने नीले आसमान के नीचे खड़े हो कर अनुभव किया कि छत मेरे सिर से शुरू होगी या मे... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   4:26pm 9 Jul 2014 #
Blogger: Anant Mishra
धीरे-धीरे मन भारी हो जाता हैशाम इबारत लिखती है अवसादों की धीरे-धीरे तन भारी हो जाता है |भारी हो जाता है समय भारी और लगते हैं कंधों पर ठहरे जिम्मेदारियों के बोझ लोगों की प्रतिकूल बहुत छोटी-छोटी बातें भी भारी लगाने लगती हैं,समय आदमी को घर में बंद कर बाहर से ताला लगा देता है |... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   4:21am 13 Apr 2014 #
Blogger: Anant Mishra
बूढ़े दिमाग सेमैदान के हिस्से में एक छोटी जगह चुनते हैं और अपनी बेतुकी धुन में ऐसे बैठे रहते हैं गोया हरकतें उनकी दुश्मन हों |बूढ़ा सिर्फ जरुरी हरकत करता है मैं चीख कर बताता हूँ और बूढ़े का व्याकरण बदल जाता है |... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   4:10pm 12 Apr 2014 #
Blogger: Anant Mishra
उसकी मशीनकैची और उसके पास है फीता,वह पैर चलाता है सधे हुए,और डोर लगाने के लिए बड़ी सधी उगलियों का प्रयोग करता है,कपड़े की नाप लेते हुए दर्जी बड़े ध्यान से देखता है,वह आदमी को  उसकी कमर, कलाई, उसके कंधे के आधार पर जानता है |दर्जी सिल रहा है कपड़े और कपड़े लहरा रहे हैं आ-जा रहे हैं ... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   4:01pm 12 Apr 2014 #
Blogger: Anant Mishra
शहर में कई नाले हैं जहाँ शहर का पानी गन्दगी के साथ निकलता है धोबी, नाऊ, भंगी,कूड़े बीनने वाले लोगों की तरह ये गन्दगी से लड़ते हुए पेशा करते हैं | भले कोई पेशा नहीं करते, पड़े रहते हैं, बहते हैं बहाते हैं |शहर हमारा इन्ही नालों की कृपा से साफ़, सुथरा है नाला नाल, माडर्न साफ़-सु... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   3:37pm 6 Apr 2014 #
Blogger: Anant Mishra
हमारे समय मेंक्रांति भी एक फैशन है सत्य, अहिंसा, करुणाऔर दलितोद्धार स्त्रीविमर्श और गाँव के प्रति जिम्मेदारी |हमारे समय में भक्ति भी एक फैशन है सत्संग,ईश्वरऔर सहविचार |प्रेम और मोह सभी फैशन की तरह यहाँ तक कि गांधीवाद यथार्थवाद अंतिम व्यक्ति की चिंता और लाचारी |हमार... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   7:32am 22 Mar 2014 #
Blogger: Anant Mishra
जैसे सब बीतता है वैसे बीत गई एक शब्द उठा रंगीन फ़व्वारो पर रखे बैलून की तरह रात आते-आते मशीन बंद हो गईन रंग है, न फव्वारा न वह बैलून होली मिठाइयाँ और गुजियों के पच गए अवसाद के स्वाद की तरह खत्म हो गई। मिल आए लोग जिनसे मिलना था मिल लिए लोग जो मिलने आए थ... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   2:07pm 19 Mar 2014 #
Blogger: Anant Mishra
झुकी हुई औरत गर्दन पर बाल खोलती है दिख गए मर्द को देखती है और अंदर भाग जाती है,औरत जब मर्द देखती है तो अंग छुपाती है मर्द जब औरत को देखता है तो सीना फुलाता है,चिड़िया जब चिड़िया को देखती है चहचहाती है,मैंने पेड़ से पूछा आप क्या करते हैं श्रीमान आदमी को द... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   4:46am 10 Mar 2014 #
Blogger: Anant Mishra
ढकेले रहेंगे हम विपत्तियों को जैसे कूड़े को अपने द्वार से बाहर कर कही दूर कर आते हैं झाड़ू से हम पर फिर वे आ जाते हैं जैसे वैसे आफते आही जाती हैं घर में,  दरवाजे पर दिल में और देह में। आदमी -आदमी के काम आता है इसीलिए कि हर आदमी के घर और बाहर विपत्तियाँ आती ... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   7:48am 7 Mar 2014 #
Blogger: Anant Mishra
बच्चे आते हैं पास और ऐसा कोई प्रश्न करते हैं जो उत्तर के रूप में केवल बच्चे को और अधिक बिम्ब में बदल देते हैं बच्चा प्रश्न करते समय बच्चा नहीं होता पर जब भी आप बच्चे को प्रश्न करते देखते हैं तो वो बच्चा ही रहता है उसके छोटे-छोटे हाथ छोटा सा मुँह और छ... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   7:15am 7 Mar 2014 #
Blogger: Anant Mishra
गैर भरोसे की दुनिया में भी आदमी को भरोसा करना ही पड़ेगा अपने हाथ पर भरोसा कि वह निवाले को मुँह तक ले जायेगा और अपने उत्सर्जन तंत्र का भरोसा कि वह वहिर्गमन करेगा ही अपने सांसों पर भरोसा कि वह चलेंगे और दिल और फेफड़े को मिलता  रहेगा आक्सीजन ,रोटी ,आटे औ... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   7:05am 7 Mar 2014 #
Blogger: Anant Mishra
जीवन की सांध्य वेला में जिंदगी का हिसाब लगाते हुए कुछ याद नहीं आता ऐसा जो दर्ज करने लायक हो,किसी के काम आया कि नहीं आया वे तो वही जानते होंगे पर अपने लिए जुगाड़ने में इज्जत की रोटी पूरी जिंदगी खर्च हो गयी चाहता तो यही था कि सभी को इज्जत की रोटी जिंदगी भर... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   6:52am 5 Mar 2014 #
Blogger: Anant Mishra
कोई नहीं सुनना चाहता सत्य जैसे मौत की खबर सुनकर अपनी मौत के होने के सच को टालते हुए जीवन में शरीक हो जाता है आदमी। अन्याय के प्रतिकार का समर्थन वह तभी तक करता है जबतक उससे होने वाले अन्याय के प्रतिकार की चर्चा न की  जाय। प्रेम,सहानभूति और करुणा सब अ... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   6:31am 5 Mar 2014 #
Blogger: Anant Mishra
इच्छा इतनी नहीं कि किसी से भिक्षा मांगू घमंड भी इतना नहीं कि किसी की महानता के सामने सिर झुका सकूँ अब मेरे जैसे औसत आदमी के लिए कहाँ है दुनिया में गुंजाइश मुझे तो लगने लगा है कि अब कविताओं में भी मेरे जैसों की कोई गुंजाइश नहीं रही। फिर भी आप के लिए नह... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   6:07am 5 Mar 2014 #
Blogger: Anant Mishra
कहने के लिए बहुत कुछ नहीं है हल होगी मूलभूत समस्याएं जबसे चलने के लिए था मेरे सपनों का रास्ता पर वह पूरी न हो सके क्यों कि जुड़े थे दूसरों के साथ वे मेरे नहीं हो सकते थे इसलिए हो गयी चुनौतियों के बीच,बड़ा मुश्किल है जीना और मुकम्मल बने रहनाक्यों कि  ... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   5:49am 5 Mar 2014 #
[ Prev Page ] [ Next Page ]


Members Login

Email ID:
Password:
        New User? SIGN UP
  Forget Password? Click here!
Share:
  • Latest
  • Week
  • Month
  • Year
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3938) कुल पोस्ट (194973)