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बिड़वा....

कितना आतुर हैदर्पण के भीतरतुम सा दिखता हुआ,भूत का रंगऔर वर्तमान की तरलताकैसे बदल देती है छवि,भविष्य में संभावनाएं हैंजो ये बोल देकि दर्पण तो पारा थाजो छिटकता रहाइन तीनों के आर-पार ।(अप्रमेय)...
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  June 1, 2017, 6:08 pm
तुम्हारे होनेऔर तुम्हारे न होने के बीचएक टीस के अतिरिक्त कोई और सेतु नहीं है,मैंने गलती से उस सेतु पे चल करतुम्हे पाना चाहा,नई दुनिया मेंसेतु का अर्थ पार होने के अर्थ मेंनहीं ग्रहण किया जातादलाली से लिया जाता है !(अप्रमेय)...
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  June 1, 2017, 6:07 pm
ये जो पुकारते हुए से सुनाई पड़ जाते हैंगौर से देखो कुछ छुपा कर बस आवाज लगाए जाते हैं,मैंने चुप हो कर बस एक बात पूछ ली थी उनसे सरे जिंदगी वे बस इसकाजवाब दिए जाते हैंदुनिया ने जिनको भगवान् कहावे चुप है सदियों सेये कौन हैं बिचारेजो राम नाम रटे जाते हैं।(अप्रमेय)...
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  June 1, 2017, 6:04 pm
कैलेंडर जीवन से गायब हो जाना चाहिएऔर अगर नहींतो मुझे तारिखों से मुक्त होने का कोई उपाय बताइएआप समझेंगे कि मैं अब समय के पार होने की कोई बात कहूंगाहुजूर मुझे इसके आर का ही रास्ताबता दीजिए।।।(अप्रमेय)...
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  June 1, 2017, 6:03 pm
लकड़ी जल गईक्योंकि वह सूखी थीलाश जल गईक्योंकि उसमें चर्बी थी,जिंदा रहना रोग हुआमौत उसके बरक्स औषधि थी,आँख है तो उठ गईदेख कर झुख पाईयह उसकी फितरत थी,हमको मिली जिंदगी या चाहे जो कुछ भीकुछ हाथ में रही कुछ फिसल गई  यह किस्मत थी ।(अप्रमेय)...
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  June 1, 2017, 6:03 pm
एक शाश्वत अकेलेपन का विस्तार है आदमीअपनी चुप्पी के बरक्स अपनी हत्या के लिए हथियार है आदमीसदियों से अपने ही हमशक्लको देखते-देखते परीशां है आदमी ।(अप्रमेय)...
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  June 1, 2017, 6:00 pm
मैंने कल उससे बात की एक बच्चे की तरह और समझा एक-एक चीज झरती हैं कैसे उसकी आँखों से, वह रो नहीं रहा होतापुकार रहा होता हैअस्तित्व की सबसे प्रबल भाषा मेंपर तुम्हारे लिए यह अवसर नहीं कि तुम समझ सको उसकी भाषा,मैंने कल उसके पास बैठ करधरती की गर्माहट को महसूस कियाऔर...
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  June 1, 2017, 6:00 pm
उन्हें दिखाई दिया कि होली उनके बाप का त्योहार नहीं,वे कहते हैं कोई था मनु जिसने होली को भी लोक से छीन कर अभिजात्य का पर्व घोषित कर दिया,वे कहते थे और कहते-कहतेहमें और तुम्हे अलग कर गए ,पर तुम कहते होअलग होने के बाद !समझ में नहीं आता ।तुम मनु नहींऔर बुद्ध भी नहींतुम्ह...
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  June 1, 2017, 5:59 pm
ये विचार किस क्रान्ति की देन है किजिंदगी का सफर पहिए के ही भरोसे है !कभी एकांत में बेमतलब बजता है शंख और  बिना ढोल के किसने कह दियानहीं गाए जा सकते पद,कविता में कभी-कभीशब्द घुसने को राजी नहीं होतेपर फिर भी बिना अर्थ केतुम ला सकते हो कोई शब्दमैंने कल सपने में पढ़ीसप...
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  June 1, 2017, 5:58 pm
पेड़ खड़े हैं लहलहाते विश्व के आँगन मेंदेखो उनका नृत्य और आँख मिचोली करता हुआ खेल हवाओं के संग,मैं देखता हूँ औरयाद करता हूँ तुम्हेजब बेफिक्री से मेरे ह्रदय के पासजेब में हाथ डालते हुएनिकाल लेते हो निर्द्वन्द्व सब-कुछमैं कुछ कह पाऊं उससे पहलेतुम्हारा यह सवालघेर ल...
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  June 1, 2017, 5:57 pm
उस फौजी ने बताया तोप दागते हुए मुंह खुला रहना चाहिए,बचपन में माँ काऔर बड़ा मुंह खोलो डपटते हुए हाथों में लिएखाने का कौर याद आया किअचानक फौजी ने उन्हीअंतरालों के बीच दुहरायानहीं तो फटेगा कान का परदा,परदा और आदमीअलग-अलग जगह कैसेबदल जाते हैं,सीमा पर फटता है कान का पर...
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  June 1, 2017, 5:56 pm
तुम्हारी गोजी हुई लकीर मेरी डायरी में अचानक दिख पड़ती है रात मे अचानक जग जाने जैसे,रात कभी दिन कभीतुम जब भी दिख पड़ते होमेरे पन्नो मेंछेड़ जाते को कोई प्यारी धुन,सन्नाटे में अचानक कभी-कभीकौंधती है चमकतुम्हारी गोजी हुई लकीर सी।तुमने गोजा नहीं थामेरी डायरी में...
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  June 1, 2017, 5:55 pm
यहाँ बैठ करतुम्हारा खयाल बेसुरे मंगलाचरणऔर पंखों के बीच फड़फड़ाती अब बुझी कि तब मंगलदीप लौ से ज्यादा कुछ और नहीं है,आदमी का होनादूसरे आदमी के लिएबस टपक पड़े तोते केआधा से ज्यादा खाएआम के पकनारी की तरह हैजिसके गिरने की ख़ुशीकेवल उन गरीब बच्चों को हैजो चूहे को भूज करक...
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  June 1, 2017, 5:54 pm
पहले सन्नाटों के बीच सुनाई पड़ती थीझींगुरों की आवाज आज उस आवाज के पीछेसुनाई पड़ा सन्नाटा,सत्रह साल पहलेतुम्हे पा लेने की ललक थीऔर आज तुम्हारी खबरकाफी होती हैजीने भर के लिएमैंने सत्रह साल पहलेपूछना चाहा था सवालचाँद-तारों के बारे मेंआज दिखा अँधेराउनके पिछवाड़े सेकु...
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  June 1, 2017, 5:53 pm
कॉपी किसी की भी हो सकती है जिसपर तुम्हारा स्मरण किसी और का नहीं पर अपने-अपनों को याद करते उनके हिस्से का हो सकता है,स्मृतियाँ अक्षरों में काशला पाती तुम्हारी तस्वीरतो एक-एक शब्दकैसे उभर आतेअपनी-अपनी जगहअपना-अपना रूप लिए,मैं सोचता हूँ ऐसे में तुम्हारे लिएकि इ...
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  June 1, 2017, 5:52 pm
बादल गरजते हैं बच्चा डरता है माँ समझाती है भगवान् ने डांट लगाई होगीबच्चा अर्थ ग्रहण करता है बादल की घटाओं से दूरअपने सदृश्य किसीभगवान् के बच्चे की,कल स्कूल जाना होगासुबह-सुबहबदल हट गएँ होंगेस्कूल की बिल्डिंगचाक-चौबंदयह नहीं बतातीकि उसे किसने बनवायाभगवान् भ...
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  June 1, 2017, 5:51 pm
सोचता हूँ कि कुछ लिखूंकि मन में आ गया पिछवाड़े लगाया हुआ पौधाअभी आयी नहीं है उसमें कलीसोचता हूँकली और फूल मेंसुंदर कौन हैइस परमेरे ह्रदय का कविमौन है ।(अप्रमेय)...
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  June 1, 2017, 5:49 pm
चाँद को ले लिया उसनेऔर चरखा को तुमने मैंने इधर एक गीत गाया और नोच ली एक पंखुड़ी मेरे ह्रदय में खिले गुलाब के पुष्प सेखुशबू मौजूद है अभीकि दी गईं सलामियाँकलम किए गए सर को देख करएक पंखुड़ी और नोच दी मैंनेकि बन गई एक कविता हमारीमैंने देखें हजारों देश-भक्त औरचखना चाहा स...
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  June 1, 2017, 5:48 pm
"माँ"यह शब्द काल के पृष्ठ पर प्रकृति द्वारा अंकित सुंदरतम चित्र है जिसके चंद्रबिंदु मेंवह तुम्हे ही तोगोद में लिए बैठी हैजब तुम इसे बुलाते होतब यकीं मानों उसी वक्तसात स्वरों केअकाट्य नियम टूटते हैंऔर ढहता है लय का साम्राज्यमाँ तुम्हारा स्मरणकेवल स्मरण नहीं...
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  June 1, 2017, 5:47 pm
एक कहानी हाथ लिएढूंढ रहा हूँ दर बदरकिसको सुनाऊँ किसको बतलाऊँकोई नहीं ख़ामोश इधर।(अप्रमेय)...
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  June 1, 2017, 5:45 pm
मैंने अपने लिए एक सुझाव जिंदगी के पेड़ पर भविष्य के घोंसले में डाल रखा हैविचारों की घासऔर ऋतुओं की गर्माहट उसे सेकेगीआदमी जैसे कौवे के झुण्ड से अगरबच गया मेरे सपने का अंडाएक ऊपरी कवच टूटेगी ।नस्ल तो पता नहींकोई पंछी उसमें से निकलेगाअपने पंख में आकाश कोभर भर कहीं ...
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  April 19, 2016, 10:14 pm
आदमी अपने जीवन में कहीं जाता नहीं,चला आता है माँ की पेट से बेटा बन कर और उससे पहले वे जो आ चुके थेंउसे बुलाने के लिएवे भी चले आएं थेशताब्दियों की यात्रा के बादतुम्हारे लिए मैं देखता हूँ वह चक्रआदमी से पहले पशुओं से पहले जीवों से पहलेपेड़-पौधों से पहलेपानी से...
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  April 19, 2016, 10:11 pm
मैं तो राजी हूँतुम्हे स्वीकार करने के लिएऔर जानता हूँतुमने अब तक सिर्फ जिंदगी कोकिताबों में समझा हैऔर डरने की खुराक तुम्हेजो आध्यात्मिक बनाती हैउसे तुमने मंदिर, गिरजाघरोंया फिर मस्जिद की चौखट पेनाक रगड़ते हुए समझा हैतुमने जिस प्यार मेंकुर्बानियों की कसमे खायीं ह...
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  March 26, 2016, 10:20 am
हम हो रहे हैं धीरे धीरे राजीऔर इसे ही हम अपनी क़िस्मत समझ लेंगे कोई अचानक नहीं कहता है सचधीरे धीरे परखता है वह तुम्हारा तापमानउसे मालूम हैहलुआ बनाने की विधिआदमी को गुलाम बनाने मेंकैसे काम में लायी जा सकती हैआदमी के सपने बहुत पुराने हैंयहाँ तक कि आदमी से भी पुराने...
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  March 26, 2016, 10:20 am
वह प्रार्थना करता है पुकारता है भगवान् को गाता है गीत बजाता है वीणा,वंशी और करताल सदियों से ,अपनी समझ सेरचता है वाक्यकरता है प्राण प्रतिष्ठाजीवन में भाषा की ,किसी ने अब तकनहीं देखा ईश्वर कोसदियों से इसे समझता हैकितना असहाय हैऔर कोई उपाय भी तो नहींयह जानता हैशा...
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  March 26, 2016, 10:19 am
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