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बिड़वा....

एक तड़प जो उठी थी उसे गा दिया जब कभी भी उसे सुना जाएगा प्रेम पथिकों के बीच संवाद हो ही जाएगा,                     एक रूप बिना स्पर्श के गढ़ता जा रहा है अंदर कोई यायावर प्रकट होगा श्वेत कागज सा  जिसपर आँखों की तुलिका अपने भावों से भर देगी उसमें आत्मा ...
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  April 27, 2018, 11:41 am
है अपने शहर की दोस्तों बात ही कुछ औररखो यहां कदम इक शहंशाह की तरह।...
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  April 23, 2018, 11:14 pm
लोक तंत्र के कुर्ते केऊपर की जेब में पड़ा है गांधी का चश्मालोकतंत्र के कुर्ते के निचले दोनों जेब में पड़ा हैएक तरफ भारत और एक तरफपाकिस्तान का नक्शालोकतंत्र का कुर्ताखेतों की मेड़ों सा सिला जा चुका हैलोक तंत्र का कुर्ताखलियान की तरह गांव से दूरबसा दिया गया हैलोकतंत्...
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  April 23, 2018, 11:13 pm
गुरूर में सर उठा के जो चल दिया था कभीनिगाह खोजती हैं अब के सजदे में सर झुका दे कोई ।(अप्रमेय)...
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  April 23, 2018, 11:12 pm
कुछ कह दूं ऐसा मन कहता हैपर कौन इसे सुनता है,लिखना-पढ़ना सब वाहियात सा हो जाता हैजब प्यार से हमें कोई देख जाता है,कभी न काम आई ये मैंने आजमा के देखा हैदुनिया ने जिसे जद्दो-जहद से खरीदा है,ईश्वर है या नहीं कौन इसे ढूंढता हैपर मैंने उसे बाजार में बिकते हुए देखा है,किस्सा कोता...
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  April 23, 2018, 11:10 pm
मेरी उदासी काश कुछ काम आतीकिसी का दुख मेरी झोली में ला पाती ।(अप्रमेय)...
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  April 23, 2018, 11:09 pm
ये शब्द आंसू नहीं है ये शब्द प्यार नहीं है ये शब्द भूख नहीं है नई दुनिया में ये शब्द दलाल हैंजो आदमी से आदमी कापरिचय कराते हैं |(अप्रमेय)...
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  April 23, 2018, 11:07 pm
रेत पर लकीरें आसमान में टूटते तारेऔर कोई अजनबी सी सूरतरात को अचानक याद आते हैंकोई सिलसिला सिले धागों के बीचउघड़ा सा नजर आता हैरात की अंधेरी रौशनीदिन के स्याह उजाले मेंजुगनुओं सा टिमटिमाते हैंऔर जाने कब वे मेरे दरवाजे केताले की छेद से घुस करमेरे घर की दुछत्ती में बैठ...
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  April 23, 2018, 11:06 pm
रूह कांपती है सहारा नहीं मिलताकोई नास्तिक फिर दुआ बन के टकराता हैऔर मेरी शंका की कब्र खोद डालता है….(अप्रमेय)...
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  April 23, 2018, 11:05 pm
एक कविता घूंघट ओढ़ेरोज आती है सपनों मेंसपनें में वह दिखती हैपर कुछ कहती नहीं,मैं उसके पास नहीं जा पाताऔर न ही पूछ पाता हूँअक्सर उसके आ जाने की वजह,उसका चेहरा भी नहीं दिखताऔर सुबह जब मैंकोशिश करता हूँ उसेयाद करने कीतो न ही उसकी साड़ी कारंग याद आता हैऔर न ही वह जगहजहां वह रो...
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  April 23, 2018, 11:04 pm
पहले उन्होंने ने ध्वनी में भरा शब्द चाशनी सा मीठा और कहा- माँधीरे से बताया चाशनीके पीछे उसे तुम्हारे जबान तक लाने वाले का नाम- पिताबढ़ने लगनी सम्पदा तुम्हारीफूलों से हुआ परिचयजिसके साथ जाना तुमने सुंदरफिर सुंदर शब्द आकृति मेंले आयें तुम्हारे पाससदियों का भंडार...
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  April 23, 2018, 11:03 pm
कुछ भी हो सकता है यहाँतुम देखो तो आकाश उतर कर चला आता रहा सदियों से तालाब के अंदर,तुमने पहचाना नहीं पेड़ों का धीरे-धीरे झूलना उसीतालाब के अंदरउसी तालाब मेंदर्पण की तरहउतर आई कितनी बारतस्वीर तुम्हारीकितनी बार मन तुम्हारातालाब की लहरों मेंआगे और आगे की तरफ बढ़ता हु...
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  April 23, 2018, 11:02 pm
बाऊ जी ने कहा थाकि जब कुछ अच्छा विचार आए तो उसे तुरंत करना और जब कुछ बुरा विचार आएतो उसे थोड़े देर स्थगित कर देना, मैं तबसे लगातरस्थगित करते ही आ रहा हूँसब-कुछमैंने अगले जन्म तक के लिएस्थगित कर रखा है प्रेमलोकतंत्र के इस ढाँचे मेंस्थगित कर रखी है करुणास्थगित कर रखा ...
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  April 23, 2018, 11:01 pm
कोई तार हृदय का इतना ढीला हुआ कि छेड़ना तो दूरपकड़ में ही नहीं आया,एक राग सिलसिले में बज रहा थापर लोगों ने उसको धुन बनायाकोई रास्ता फकीर की दाढ़ी साउजला दिखा पर सब ने उसेपहाड़ों की झाड़ बताया,लोगों ने मुझे समझाअपनी-अपनी समझ सेकिसी ने हैवान तोकिसी ने भगवान बनाया...(अप्रमेय)...
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  April 23, 2018, 10:58 pm
सुबह बिस्तर से उठने का मन नहीं करतापढ़ते-पढ़ते जो किताब रातपड़ी रह गई थी सिरहानेउसके पन्ने कुछ चिमुड़ कुछफट से गयेसुबह बिस्तर की सिलवटें औरबेतरतीब ओढ़नी निद्रा सौन्दर्य काक्या इतिहास पढ़ा रहे होते हैं!मैं सुबह-सुबह ईश्वर कोनहीं याद करना चाहताअच्छा है कि पंडितों और मौलव...
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  April 23, 2018, 10:34 pm
धूप निकल आई हैऔर कौवे अपनी चोच सेडाल पर बैठे अंगड़ाई ले रहे हैंमेरी नजर अटक गई कुछ पक्के कुछ कच्चे इमलियों के बीचमन खट्टा हो गयापर इस खट्टे होने कोमुहावरे में मत समझनाआदमी ने अपनी सुविधा के लिए गढ़ीं हैंसूक्तियां,चुटकुले, और न जाने क्या-क्या,इमलियां लटकी हुई हैंऔर कोई ...
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  April 23, 2018, 10:33 pm
मुझे समझोगेतो खुद को जान जाओगेअपने बारे में बतानातुम्हारी तौहीन होगी।(अप्रमेय)...
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  April 23, 2018, 10:32 pm
राख और आग की नस्ल एक हैतुम्हारे हाथ क्या लगा सवाल इसका हैजिन्हों ने उड़ाई राख वे भीऔर जिन्हों ने लगाई आग वे भीदोनों ही आदमी थेकिस्सा यह है किजिसके ऊपर पड़ी राखवह अघोरी हो गया औरजिसके ऊपर पड़ी आग वहवियोगी हो गयाजिंदगी की पाठशाला मेंएक आग जलती रहीसदियों से पेट के अंदर औरएक ...
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  April 23, 2018, 10:32 pm
उदासी की चिड़ियापंख फड़फड़ाती हैमेरे मन के जंगल मेंघोंसला बनाती है।(अप्रमेय)...
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  April 23, 2018, 10:31 pm
एक बात लब पर अटकी हुई हैसच कहूँ जान अटकी हुई है।(अप्रमेय)...
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  April 23, 2018, 10:30 pm
एक कंकड़ तुमनेंयों ही फेंक दिया तालाब में,तमाम उम्र बीत गई मेरीदरिया की तालाश में,(अप्रमेय)...
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  October 25, 2017, 2:53 pm
वहीं से उठती है कविता जहां से दूब उग आती हैवहीं से निकलता है गानजहां से हवा सरसराती हैवहीं से उड़ती है चिड़िया जहां से सपने फैल जाते हैंवहीं से हम होते हैं विदाजहां से लोग अपने हो जाते हैं ।(अप्रमेय)...
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  October 25, 2017, 2:40 pm
वहां नहीं मिली मुझे प्रेरणा जहाँ पढ़ा था मैंने भूख से गई जानवहां भी नहीं निकली थी आहजहाँ आदमी को पकड़ लिया गया थाजेब काट कर भागते हुएकल शाम सब्जी मंडी मेंदेर रात के बादबंद होती दूकानों के बीचवह सभ्य महिलाबीन रही थीइधर-उधर पड़ी सब्जियांमैंने पूछ ही लिया बहनइसका क्य...
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  October 25, 2017, 2:32 pm
अचानक एक भद्द सी आती है आवाज और खुल जाती है नींद मेरीरात को जैसेगिरा हो पिछवाड़े पेड़ से पक कर कोई आमबिस्तरे पर बाग़ नहीं होताऔर कितना भीकूलर कर ले शोरआँधिया नहीं आतीअक्सर कई दिनों सेऐसे ही अचानकटूट जाती है नींद मेरीऔर धड़कनसीने से खिसक करकानों के पासचली आती है मेरी ...
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  October 25, 2017, 2:31 pm
चन्द्रमा की गोलाई लिए दो नन्ही सी प्यारी आँखों ने अपने गालों पर बना दिए अश्रु चित्र....पेड़ों ने देखाकिन्तु वह केवल खड़े नहीं रहेहिलाया अपना पत्ता-पत्ताजिनके पास फूल थेंउन्होंने झाड़ लीं अपनी-अपनी पंखुड़ी,और धरती इधर पीती रहीआसमान का पसीनाखेल चलता ही रहाऔर हम खेलते ...
बिड़वा.......
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  October 25, 2017, 1:09 pm
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