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बिड़वा....

मैंने अपने लिए एक सुझाव जिंदगी के पेड़ पर भविष्य के घोंसले में डाल रखा हैविचारों की घासऔर ऋतुओं की गर्माहट उसे सेकेगीआदमी जैसे कौवे के झुण्ड से अगरबच गया मेरे सपने का अंडाएक ऊपरी कवच टूटेगी ।नस्ल तो पता नहींकोई पंछी उसमें से निकलेगाअपने पंख में आकाश कोभर भर कहीं ...
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  April 19, 2016, 10:14 pm
आदमी अपने जीवन में कहीं जाता नहीं,चला आता है माँ की पेट से बेटा बन कर और उससे पहले वे जो आ चुके थेंउसे बुलाने के लिएवे भी चले आएं थेशताब्दियों की यात्रा के बादतुम्हारे लिए मैं देखता हूँ वह चक्रआदमी से पहले पशुओं से पहले जीवों से पहलेपेड़-पौधों से पहलेपानी से...
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  April 19, 2016, 10:11 pm
मैं तो राजी हूँतुम्हे स्वीकार करने के लिएऔर जानता हूँतुमने अब तक सिर्फ जिंदगी कोकिताबों में समझा हैऔर डरने की खुराक तुम्हेजो आध्यात्मिक बनाती हैउसे तुमने मंदिर, गिरजाघरोंया फिर मस्जिद की चौखट पेनाक रगड़ते हुए समझा हैतुमने जिस प्यार मेंकुर्बानियों की कसमे खायीं ह...
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  March 26, 2016, 10:20 am
हम हो रहे हैं धीरे धीरे राजीऔर इसे ही हम अपनी क़िस्मत समझ लेंगे कोई अचानक नहीं कहता है सचधीरे धीरे परखता है वह तुम्हारा तापमानउसे मालूम हैहलुआ बनाने की विधिआदमी को गुलाम बनाने मेंकैसे काम में लायी जा सकती हैआदमी के सपने बहुत पुराने हैंयहाँ तक कि आदमी से भी पुराने...
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  March 26, 2016, 10:20 am
वह प्रार्थना करता है पुकारता है भगवान् को गाता है गीत बजाता है वीणा,वंशी और करताल सदियों से ,अपनी समझ सेरचता है वाक्यकरता है प्राण प्रतिष्ठाजीवन में भाषा की ,किसी ने अब तकनहीं देखा ईश्वर कोसदियों से इसे समझता हैकितना असहाय हैऔर कोई उपाय भी तो नहींयह जानता हैशा...
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  March 26, 2016, 10:19 am
दोपहर के बादशाम होने के बाद वो कहते हैं रात हो गईरात हो गई होती है,जैसे हो जाती है सुबह रात हो जाने के बाद ,तुम्हारे हो जाने के बादवे तुम्हारे सामनेदोहराते हैं बार-बार एक नामतुम हो जाते हो नामहो जाना जरूरी हैये तुम नहीं वे सब कहते हैंजो हो गए हैं एक नाम ,वे कहते हैं गां...
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  March 26, 2016, 10:18 am
मेरे सच में झूठ बस इतना हैतेरे झूठ में सच भर जितना है (अप्रमेय)...
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  January 24, 2016, 1:34 am
गुजरना किसी का याद न रहा कभीपर किसी का आनामेरे लिए जरूर ले आता हैअजुरी भर सवाल,मेट्रो शहर के माफ़िकआकाश से मग्गे मेंपानी सा मिलती है धूपकतरा-कतरा,कि अटकी रहती हैं सांसबारहवीं मंजिल पेखिड़की से किसी गुमनामपेड़ के पत्ते को ताकते ,हमें पता हैसीढ़ियों से चलने की आती आवाजनह...
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  January 24, 2016, 1:33 am
मेरे लिए लिखना न जानते हुए उसेभूल जाना है मेरे लिए भूल जाना उस गुमनाम के सामने प्रार्थना है औरआँख न मिला पानावेदना हैशब्दों मेंफूल साकिसुगंध साकिआह सा...!(अप्रमेय)...
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  January 24, 2016, 1:32 am
छोड़ देना है या छूट जाएगाकोई उपाय है ?तलाशते हुए धीरे-धीरे इन सब के बीचज़िन्दगी को जीनाज़िन्दगी है,तुम भी नहींमैं भी नहींकोई भी तो नहींजो दिलासा दे सकेफिर भीभरोसे की आँख टटोलनाज़िन्दगी है,फ़ेहरिस्त का हिसाबझूठा हैजानते हैं सब यहाँफिर भी ज़ोर सेआवाज़ लगानामिट जाएगी जो ...
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  January 24, 2016, 1:31 am
मैं कुछ लिख दूँक्या !मालूम नहीं लोआ गया ख्याल फूल काकि वह तो मुरझा गया होगाकिताब में रखा हुआ ।(अप्रमेय)...
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  January 24, 2016, 1:30 am
कोई कह दे कि रात तालाश की सी स्लेट नहीं उजाले सा यह चौक अरसे से परीशां करता है रात अपनी जिद में ही डूबे चली जाती हैमेरी आदत में शुमार है इसे चुपचाप देखना जिंदगी का हिसाब नहीं मिलता मुझको कि इक कतरा भर जो देख लिया तुमको कोई मिल गया राह चलते यों ही मंज़िले ख़याल फिर...
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  January 24, 2016, 1:29 am
कभी पूछ लोगे जो हाल मेराकुछ बिगड़ तो न जाएगाइस राह में दीवाने कोकुछ सुकूँ तो मिल जाएगा(अप्रमेय)...
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  January 24, 2016, 1:22 am
ये सफ़र असां नहीं इतना भर जान लीजिएरुक रुक के चलना और कहीं चल के रुक जानाआँखों में उनके देखता हूँ सुकूं मिल जाता हैहै दर्द दबा जो इधर छिपा उधर मिल जाता है(अप्रमेय)...
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  January 24, 2016, 1:17 am
मेरे सच में झूठ बस इतना हैतेरे झूठ में सच भर जितना है (अप्रमेय )...
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  January 24, 2016, 1:14 am
१-एक शाम कोई मेरी ऐसी भी गुजर जाएमैं सच कहूँ और वो इसे मान भी जाए ।।२-सिमटा कि फ़ैल गया है यही मेरा फ़साना,लबे तरन्नुम जो कभी गजल रहीगा रहा उसे अब जमाना ।।३-खुद कह दूँ तो भरोसा हो न पाएगातुम्ही कहो कि फिर कह दूँ कैसे ४-गुजर रहा है वह सरे जिंदगी में ऐसे बरस रहा हो सावन झील ...
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  January 24, 2016, 1:14 am
कबीर ने जिस धरातल पर “उड़ जाएगा हंस अकेला” को अनुभूत कर पदध्वनित किया उसे इधर छह-  सात सौ वर्षों तक लोक ने अपने प्रयोगों में, मुहावरों में कहते-सुनते, गाते-बजाते आया | कंठ-कंठ तक हनुमान चालीसा की तर्ज पर अगर किसी ने इस गीत को पहुँचाया तो वह कुमार गंधर्व ही थे | कुमार जी ने व...
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  January 20, 2016, 1:34 pm
कहीं से लौट कर आना कभी-कभी कहीं चले जाना होता है समय की आंच बहुत धीरे धीरे पकाती है जिंदगी भाप बनते हैं सपनेसततमस्तिष्क की प्लेट के नीचेकोई हटाए ढक्कननहीं तोभात की तरहउबलता ही रह जाएगाजीवन |(अप्रमेय)...
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  December 5, 2015, 1:23 am
क़ाबलियत एक ऐसा हथियार हैजिसे सामूहिकता का आशीर्वाद हैदेखो कैसे मरता है आदमी ज़िन्दा रहते हुए भीपुर्ज़े की तरह,हम जिसे रहनुमा समझते हैंऔर जिससे गुहार लगाते हैंउसने भी क़ाबलियत का सर्टिफिकेटइन्ही व्यवस्थाओं से अर्जित किया है,आदमी का ज़िन्दा रहनाआदमी की तरह गुनाह है ,त...
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  November 16, 2015, 5:29 pm
जो लिख दिया वो मेरा नहीं जो कह दिया वो मेरा नहींजो बात ह्रदय में टीस रही वो भी मेरी नहीं ..मेरी नहीं ।।(अप्रमेय )...
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  November 16, 2015, 5:26 pm
कोई कैसे खोलता है अपने दिल का राज धीरे धीरेजैसे कोई कली अपना ही फूल गुनती हो धीरे धीरेखिलें बाग़ में दिखें और चुभ भी गएँ उनकी आँखों मेंमलाल बस यह रहा रंग छोड़ न पाएँ उनके हाथों में जिंदगी जिंदगी का मतलब कुछ यों बताती है रात रात में जैसे और रात ढल सी जाती है ।अप्रमेय...
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  November 16, 2015, 5:24 pm
हमने जंगल में आग पाईबची राख भी माथे से लगाईहमने देहरी पर दीप जलाएँअपने हाथ जुड़े पाएँहमने ध्वनि में शब्द की चिंगारी पाईशास्त्र के धुएं सुलगाएधीरे धीरे समझा हमनेअपने भीतर की आग कोजिसके ताप सेहो सकती थी दुनियाप्यार सी गुनगुनीपर हमने उसे दबायाजिसके एवज मेंऐसा संसार पा...
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  November 16, 2015, 5:20 pm
दूर मैदानों में जुगनुओं सी चमकती हैं बस्तियांदिल के अंधियारे से जैसे बोलती हो स्मृतियां ।।कुछ बोलिए कि ढल न जाए सूरज रात किसी ठिकाने पर नहीं होती ।।इन आँखों का क्या कहिए कोई भरोसा नहींअपनी आँखों से देख लिया उनकी आँखों से भी ।।ये शाम भी कुछ इस तरह अलग पड़ी पड़ीतुम होते ...
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  November 16, 2015, 5:19 pm
रात जब जब आई ख़ामोशी लाईफाड़ डाला उजालों नेकान का पर्दाजिंदगी ने दिया अपना अर्थ सवालों मेंमैं सुनता रहाबुनता रहाराह पर चलता रहाअपने होने मेंअपने मिटने कोदिन ब दिनगुदड़ी की तरहबुनता रहा ।(अप्रमेय)...
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  November 16, 2015, 5:18 pm
मन का फूलवन के फूल से मिल गयासाथ हुआ सो बिछड़ गया।।(अप्रमेय)...
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  November 16, 2015, 5:17 pm
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