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बिड़वा....

मैं चुप था नए वर्ष की सुबहकि इस आगमन को अनुभव करूँगा सूर्य के साथया फिर फूल-पत्तियों के बीच परइन्होंने कोई ब्यौरा नहीं द...
बिड़वा.......
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  January 2, 2019, 9:13 am
रात के अंधेरे में चलता पंखा सुनने नहीं देता दूररेलवे स्टेशन पर आती हॉर्न देती ट्रेन की आवाज,कोई भी चेहरा खिड़कियों सेट्र...
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  January 1, 2019, 9:49 am
धीरे धीरेबच्चों की आंख से विदा हो जाते हैं सपनेसपने वे जो रात को उन्हेंनींद में हंसाते थें ,कल रात नींद मेंमैंने एक स्वप...
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  January 1, 2019, 9:46 am
स्मृति में कोई शक्ल तालाब के जल में पड़ी परछाईं सा झिलमिलाती है,दूर से कोई चुप सी आवाजजंगल में गुम होती सी मेरे कानों में ग&#...
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  January 1, 2019, 9:45 am
मैं इतना तो कह ही सकता हूँकि मैं जो चाहता हूंवह करता नहीं औरजो मैं करता नहींउसे कहता नहीं,वैसे न कहना न करने से कितना अलग ह&...
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  January 1, 2019, 9:43 am
मैं लिखता हूँमैं बोलता हूंऔर कभी कभी गीत भी गाता हूँ,सच तो ये है कि इन्हीं सब के बीचमैं चुप हो जाने कीराह तलाशता हूँ।(अप्र&#...
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  January 1, 2019, 9:42 am
एक मामूली सा हस्तक्षेपकरना चाहता हूंतुम से कुछ न कह कर चुप रहना चाहता हूं, मन्नते न दुआ न ही सलाम तुम्हें देखना बस देखनाच...
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  January 1, 2019, 9:40 am
यहीं पास में, मेरे अंदर एक दिल धड़कता हैयहीं पास में, मेरे अंदरकोई खाब पलता है,यहीं पास में, मेरे अंदरएक रूह पलती हैयहीं पास ...
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  January 1, 2019, 9:39 am
पवित्रता अपवित्रता के कीचड़ से निकलाफूल दिखता है,सत्य झूठ केदल-दल से खिसकाकिनारा दिखता है,आदमी आदमी सा औरजानवर जानवर सा...
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  January 1, 2019, 9:37 am
सपने से जागना होगाऔर पूछना होगा सपने में दिखाया गया सपना क्या तुम्हें भी दिखाया गया?बूढ़ा आदमी मेरी तरफ प्रश्नवाचक सा मु...
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  January 1, 2019, 9:35 am
गली में कुत्तों का एक झुंडसाथ बैठा हुआ हैउनके बिखरे बाल और भूखेथके चेहरों में मुझेमजदूर की शक्ल दिखाई पड़ी,सोचता हूँ मेर...
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  January 1, 2019, 9:33 am
गांव सबको स्वीकार करता हैऔर सबके लिएउसके पास है काम, शहर से दूर गांव मेंमोटरसाइकल पर बकरी लादने का काम होया कउवा भगाने क...
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  January 1, 2019, 9:30 am
दिनभर भटकता जो रहा इधर उधररात ने फिर घेर लिया चारो तरफ।घर है खाली और जेब भी खालीतमाशा बनाया तुमने मेरा चारो तरफ।मिलते नì...
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  January 1, 2019, 9:28 am
एक तड़प जो उठी थी उसे गा दिया जब कभी भी उसे सुना जाएगा प्रेम पथिकों के बीच संवाद हो ही जाएगा,                     एक रूप बिना स्पर्श के गढ़ता जा रहा है अंदर कोई यायावर प्रकट होगा श्वेत कागज सा  जिसपर आँखों की तुलिका अपने भावों से भर देगी उसमें आत्मा ...
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  April 27, 2018, 11:41 am
है अपने शहर की दोस्तों बात ही कुछ औररखो यहां कदम इक शहंशाह की तरह।...
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  April 23, 2018, 11:14 pm
लोक तंत्र के कुर्ते केऊपर की जेब में पड़ा है गांधी का चश्मालोकतंत्र के कुर्ते के निचले दोनों जेब में पड़ा हैएक तरफ भारत और एक तरफपाकिस्तान का नक्शालोकतंत्र का कुर्ताखेतों की मेड़ों सा सिला जा चुका हैलोक तंत्र का कुर्ताखलियान की तरह गांव से दूरबसा दिया गया हैलोकतंत्...
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  April 23, 2018, 11:13 pm
गुरूर में सर उठा के जो चल दिया था कभीनिगाह खोजती हैं अब के सजदे में सर झुका दे कोई ।(अप्रमेय)...
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  April 23, 2018, 11:12 pm
कुछ कह दूं ऐसा मन कहता हैपर कौन इसे सुनता है,लिखना-पढ़ना सब वाहियात सा हो जाता हैजब प्यार से हमें कोई देख जाता है,कभी न काम आई ये मैंने आजमा के देखा हैदुनिया ने जिसे जद्दो-जहद से खरीदा है,ईश्वर है या नहीं कौन इसे ढूंढता हैपर मैंने उसे बाजार में बिकते हुए देखा है,किस्सा कोता...
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  April 23, 2018, 11:10 pm
मेरी उदासी काश कुछ काम आतीकिसी का दुख मेरी झोली में ला पाती ।(अप्रमेय)...
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  April 23, 2018, 11:09 pm
ये शब्द आंसू नहीं है ये शब्द प्यार नहीं है ये शब्द भूख नहीं है नई दुनिया में ये शब्द दलाल हैंजो आदमी से आदमी कापरिचय कराते हैं |(अप्रमेय)...
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  April 23, 2018, 11:07 pm
रेत पर लकीरें आसमान में टूटते तारेऔर कोई अजनबी सी सूरतरात को अचानक याद आते हैंकोई सिलसिला सिले धागों के बीचउघड़ा सा नजर आता हैरात की अंधेरी रौशनीदिन के स्याह उजाले मेंजुगनुओं सा टिमटिमाते हैंऔर जाने कब वे मेरे दरवाजे केताले की छेद से घुस करमेरे घर की दुछत्ती में बैठ...
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  April 23, 2018, 11:06 pm
रूह कांपती है सहारा नहीं मिलताकोई नास्तिक फिर दुआ बन के टकराता हैऔर मेरी शंका की कब्र खोद डालता है….(अप्रमेय)...
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  April 23, 2018, 11:05 pm
एक कविता घूंघट ओढ़ेरोज आती है सपनों मेंसपनें में वह दिखती हैपर कुछ कहती नहीं,मैं उसके पास नहीं जा पाताऔर न ही पूछ पाता हूँअक्सर उसके आ जाने की वजह,उसका चेहरा भी नहीं दिखताऔर सुबह जब मैंकोशिश करता हूँ उसेयाद करने कीतो न ही उसकी साड़ी कारंग याद आता हैऔर न ही वह जगहजहां वह रो...
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  April 23, 2018, 11:04 pm
पहले उन्होंने ने ध्वनी में भरा शब्द चाशनी सा मीठा और कहा- माँधीरे से बताया चाशनीके पीछे उसे तुम्हारे जबान तक लाने वाले का नाम- पिताबढ़ने लगनी सम्पदा तुम्हारीफूलों से हुआ परिचयजिसके साथ जाना तुमने सुंदरफिर सुंदर शब्द आकृति मेंले आयें तुम्हारे पाससदियों का भंडार...
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  April 23, 2018, 11:03 pm
कुछ भी हो सकता है यहाँतुम देखो तो आकाश उतर कर चला आता रहा सदियों से तालाब के अंदर,तुमने पहचाना नहीं पेड़ों का धीरे-धीरे झूलना उसीतालाब के अंदरउसी तालाब मेंदर्पण की तरहउतर आई कितनी बारतस्वीर तुम्हारीकितनी बार मन तुम्हारातालाब की लहरों मेंआगे और आगे की तरफ बढ़ता हु...
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  April 23, 2018, 11:02 pm
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