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Blog: क्षितिज(horizon)

Blogger: एल एस बिष्ट्
फ़िर एक बार असहमति के स्वर सुनाई देने लगे हैं | यह दीगर बात है कि कोरोना महामारी के चलते मुस्लिम मुल्ला मौलवियों का एक वर्ग जरूर बकरीद पर अपने समाज से सरकार को सहयोग करने की अपील कर रहा है | लेकिन उन लोगों की संख्या कम नही जिन्हें कोरोना या दूसरे समाज की भावनाओं की जरा भी परवाह नही | उन्हें तो बस धर्म के नाम पर एक ... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   8:51am 25 Jul 2020 #Social
Blogger: एल एस बिष्ट्
धरती से विदा हो जाने वाले कभी लौट कर नही आते बस उनकी यादें शेष रह जाती हैं | और अगर बात एक ऐसे सितारे की हो जिसने पूरी एक पीढी को प्यार करना और प्यार मे जीना सिखाया हो , जिसके तरानों मे जिंदगी झूमती, गाती और इठलाती रही हो तो बात एक्दम अलग हो जाती है | राजेश खन्ना के नाम से सिनेमाई दुनिया के क्षितिज मे चमकने वाले इस ... Read more
clicks 74 View   Vote 0 Like   7:06am 18 Jul 2020 #Entertainment
Blogger: एल एस बिष्ट्
पता नही क्यों लगता है कि राजनीति धीरे धीरे हमारी जिंदगी और उससे जुडे सरोकारों को हाशिए पर डाल रही है । वरना और क्या कारण हो सकता है कि प्रिंट मीडिया से लेकर इलेक्ट्रानिक मीडिया व सोशल मीडिया तक राजनीति का ही शोर सुनाई देने लगा है । जिंदगी के अकेलेपन , अवसाद के गहराते अंधेरों, महत्वाकाक्षांओं की बलि चढते रिश... Read more
clicks 53 View   Vote 0 Like   10:00am 14 Jul 2020 #Social
Blogger: एल एस बिष्ट्
फोटोग्राफी की दुनिया अब काफी आगे निकल आई है । वह दिन गए जब किसी फोटो में अपना ही चेहरा तलाशना मुश्किल हो जाया करता था । आज फोटोग्राफी की दुनिया चमकदार ही नहीं तिलिस्मी भी हो गई है । कैमरे ने जो नहीं देखा वह भी फोटो मे दिखाया जा सकता है । लेकिन यह आज के दौर की बातें हैं । कुछ ... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   5:39am 15 May 2020 #
Blogger: एल एस बिष्ट्
           वक्त के साथ हमारे इन त्योहारों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है | सही अर्थों में यह बदलता स्वरूप हमें त्योहार के सच्चे उल्लास से कहीं दूर ले जा रहा है |      अगर थोडा पीछे देखें तो पता चलता है कि कुछ समय पहले तक दीपावली की तैयारियां महीना भर पहले से ही... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   7:26am 26 Oct 2019 #
Blogger: एल एस बिष्ट्
राजनीति की इस शर्मनाक फ़ुहडता के बीच आज याद आ रहा है दिल्ली के एक प्रतिष्ठित दैनिक का वह संपादकीय जो उस समय लिखा गया था कि जब इंदिरा जी की हत्या हुई थी | जब पूरे देश मे सहानुभूति की लहर चल रही हो तब इंदिरा जी की गलत और घटिया राजनीति को उनकी मौत के लिए जिम्मेदार बताना वाकई मे ... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   12:29pm 12 Apr 2019 #
Blogger: एल एस बिष्ट्
  चुनाव का शंखनाद बजते ही शुरू हो गया  है जयकारों का सिलसिला | और इसके साथ ही  शुरू हो गये वादों, दावों व घात- प्रतिघात की चुहा दौड जिसे अभी अपने चरम पर पहुंचना बाकी है | यही नही दिखने लगा है  भारतीयराजनीतिका वह  चेहराजो साल दर साल  कुरूपहोताजारहाहै।अबइसबातकी... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   8:18am 7 Apr 2019 #
Blogger: एल एस बिष्ट्
      जब खेतों में सरसों के रंग बिखरने लगे हों , पीले फूलों पर तितलियां और भौरें मंडराने लगे हों , अमराई बौराई बौराई सी लगने लगी हो , टेसू धहकने लगे हों , हवा के अलमस्त झोके मदहोस करने लगे हों , युवा मन कुलांचे भरने लगे तो समझिये फागुन आ गया ।      फागुन चाहे-अनचा... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   5:01am 20 Mar 2019 #
Blogger: एल एस बिष्ट्
      जब खेतों में सरसों के रंग बिखरने लगे हों , पीले फूलों पर तितलियां और भौरें मंडराने लगे हों , अमराई बौराई बौराई सी लगने लगी हो , टेसू धहकने लगे हों , हवा के अलमस्त झोके मदहोस करने लगे हों , युवा मन कुलांचे भरने लगे तो समझिये फागुन आ गया ।      फागुन चाहे-अनचा... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   5:01am 20 Mar 2019 #
Blogger: एल एस बिष्ट्
      जब खेतों में सरसों के रंग बिखरने लगे हों , पीले फूलों पर तितलियां और भौरें मंडराने लगे हों , अमराई बौराई बौराई सी लगने लगी हो , टेसू धहकने लगे हों , हवा के अलमस्त झोके मदहोस करने लगे हों , युवा मन कुलांचे भरने लगे तो समझिये फागुन आ गया ।      फागुन चाहे-अनचा... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   5:01am 20 Mar 2019 #
Blogger: एल एस बिष्ट्
पुलवामा हमले ने एक बार फ़िर पूरी दुनिया को सोचने के लिये मजबूर कर दिया है | भारतीय सैनिकों की इस शहादत का विश्व बिरादरी पर क्या और कितना प्रभाव पडेगा, यह तो आने वाला समय ही बतायेगा लेकिन इस बात से इंकार नही किया जा सकता कि  आज पूरा विश्व आतंकवाद के जिस चेहरे को देख रहा है व... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   7:01am 18 Feb 2019 #
Blogger: एल एस बिष्ट्
गुजरात चुनावों के बाद से ही ऐसा लगने लगा था कि देश मे अल्पसख्यक राजनीति अब एक नई  करवट ले रही है | मोदी के गृहराज्य व भाजपा के एक मजबूत गढ मे जिस तरह से कांग्रेस ने अच्छा मुकाबला किया उसी को देखते हुये राहुल गांधी को यह एहसास हो चला था कि उदार हिंदु कार्ड खेलना लाभदायक रह... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   4:38am 22 Dec 2018 #
Blogger: एल एस बिष्ट्
                 जब हम हिमालय बेल्ट या क्षेत्र की बात करते हैं तो उसका विस्तार हिमाचल, जम्मू-कश्मीर से लेकर उत्तर पूर्व के उपेक्षित राज्यों तक जाता है । जिसमे उत्तराखंड भी सम्मलित है । मोटे तौर पर भौगोलिक रूप से यह ऊंची-ऊंची पहाडियों, घने जंगलों, वेगवती नदि... Read more
clicks 237 View   Vote 0 Like   5:36am 10 Sep 2018 #
Blogger: एल एस बिष्ट्
देश के किसी शहर मे किसी महिला के साथ  बलात्कार होता है तो मोमबत्तियां लिए एक सैलाब सड़कों पर आ जाता है |नारे,धरना-प्रदर्शनों का सिलसिला ही चल पड़ता है और भारतीय मीडिया तो वहां अपना तम्बू ही गाड़ देता है |टीवी न्यूज चैनलों पर तीखी बहसें शुरू हो जाती हैं |लेकिन जब पूरे समाज क... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   6:19am 11 Jun 2018 #
Blogger: एल एस बिष्ट्
गौर से देखें तो महिला संगठन अपनी नेतागिरी और मध्यमवर्गीय समाज मोमबत्तियां जला कर रोष व शोक व्यक्त कर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं | राजनीतिक दल अवसर का लाभ उठा एक दूसरे की टांग खींचने को ही अपनी भूमिका मानने लगा है | दर-असल देखा जाए तो दुष्कर्म की यह घटनाएं ,कम से कम शहरो व म्हान... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   8:17am 4 Jun 2018 #
Blogger: एल एस बिष्ट्
आज जब दुनिया से हंसी गायब हो रही है बरबस याद आते है चार्ली चैपलिन । दुनिया भर के बच्चे जिस चेहरे को आसानी से पहचान लेते है वह चार्ली चैपलिन का ही है। चैपलिन की फिल्म 'द किड' 1921 में बनी थी उसमे चैपलिन के साथ एक चार साल के बच्चे जैकी कूगन ने अदभुत अभिनय किया था । 'द किड के बाद चै... Read more
clicks 296 View   Vote 0 Like   5:40am 16 Apr 2018 #
Blogger: एल एस बिष्ट्
साहित्य में कामदेव की कल्पना एक अत्यन्त रूपवान युवक के रूप में की गई है और ऋतुराज वसंत को उसका मित्र माना गया है ।कामदेव के पास पांच तरह के बाणों की कल्पना भी की गई है ।य़ह हैं सफेद कमल, अशोक पुष्प, आम्रमंजरी, नवमल्लिका, और नीलकमल । वह तोते में बैठ कर भ्रमण करते हैं । संस्कृ... Read more
clicks 219 View   Vote 0 Like   7:51am 28 Feb 2018 #
Blogger: एल एस बिष्ट्
“ हमे काश तुमसे मुहब्बत न होती,कहानी हमारी हकीकत न होती ......... शायद यह किसी को भी न पता था कि सिनेमा के परदे पर अनारकली बनी मधुबाला पर फिल्माया यह गीत उनकी असल जिंदगी का भी एक दर्दनाक गीत बन  जाएगा  और बेमिसाल हुस्न की मलिका की जिंदगी नाकाम मोहब्बत की एक दर्दनाक  दास्ता... Read more
clicks 233 View   Vote 0 Like   6:20am 23 Feb 2018 #
Blogger: एल एस बिष्ट्
एक लड़की ने आंख क्या मारी पूरा देश मानो उसका दीवाना हो गया |अपने को जिम्मेदार चौथा खंभा कहने वाले भारतीय मीडिया को तो मानो मन मांगी मुराद मिल गई हो |वह आंख मारने के तौर तरीकों,किस्मों और उसके विशेष प्रभावों पर चौपाल लगाने लगा |बड़े बड़े मुद्दे पीछे छूट गए |यहां तक की सीमा पर र... Read more
clicks 253 View   Vote 0 Like   11:09am 20 Feb 2018 #
Blogger: एल एस बिष्ट्
वाकई हम एक भेड़चाल समाज है |एक सुर मे चलने वाले लोग |जब पहला सुर टूटता है तब दूसरे को पकड़ लेते है और इसी तरह तीसरे सुर को |इस तरह ताले बजाने वाले इस सुर से उस सुर मे शिफ्ट हो जाते है |       आजकल महिला सशक्तिकरण का शोर है |शोर ही नही जोश भी है और इस जोश मे कहीं होंश की भी कम... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   8:10am 23 Jan 2018 #
Blogger: एल एस बिष्ट्
       आश्चर्य होता है कभी कभी कि राजनीति से जुडी एक घटिया गोसिप पर मीडिया के सभी माध्यमों से लेकर सोशल मीडिया मे भी कई कई दिन तक बहस हो सकती है लेकिन प्रयोगवादी फिल्म के लबादे मे प्रदर्शित हाल की दो फिल्मों यानी “ बेगम जान “ व लिपिस्टिक अंडर माई बुर्का “ पर कुछ ... Read more
clicks 296 View   Vote 0 Like   7:39am 9 Aug 2017 #
Blogger: एल एस बिष्ट्
      वसंत के बाद अगर किसी के स्वागत के लिए पलकें बिछाई जाती हैं तो वह है सावन । कौन ऐसा अभागा होगा जिसका सावनी फुहारों मे मन मयूर नृत्य करने के लिए मचलने न लगे । तपती हुई दोपहरियों और आग बरसाते सूर्य देवता के ताडंव के बाद् सावन की रिमझिम फुहारें मन को शीतलता प्रदा... Read more
clicks 276 View   Vote 0 Like   8:35am 5 Jul 2017 #
Blogger: एल एस बिष्ट्
नींद की पांखों पर / उडा मैं स्वप्न में / ओस से तरबतर घाटी के उस पार / छ्तों से भी ऊपर / जंगल से भी ऊपर / जंगल के अंदर तक / सांभर पुकारते थे जहां अपने प्रिय को / और मोर जहां उडते थे / और फिर भोर हुई.... ..        पहाडों की रानी मसूरी की खूबसूरत वादी से  हिमालय को बेहद करीब से निह... Read more
clicks 219 View   Vote 0 Like   7:42am 18 May 2017 #
Blogger: एल एस बिष्ट्
हिंदु दर्शन के तहत रिश्तों मे सबसे ऊंचा स्थान हमने मां को दिया है और यही भावना हमारी गंगा, गाय और जमीन से जुडी है । हम इन तीनों को मां से संबोधित करते हैं । गंगा मां का पावन जल, गाय माता का अमृत समान दूध और धरती मां से उपजा अन्न हमारे जीवन का आधार है । लेकिन हम कितने दुर्भाग्... Read more
clicks 232 View   Vote 0 Like   10:43am 12 Apr 2017 #
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