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Blog: मधुबन

Blogger: Vivek Kumar
       परीक्षा का मौसम सर पर है, इसीलिए पंकज जी काफी शाम गए कोचिंग से नहीं लौटते हैं | पढने में तो बचपन से ही होशियार रहे हैं पंकज जी | उनके घरवाले को उन पर पूरा भरोसा है - "पिंटू एक दिन जरूर कुछ न कुछ करेगा" | घर में उन्हें सब पिंटू ही बुलाता है | पापा के भरोसे को सही ठहराने क... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   3:41pm 22 Mar 2014 #
Blogger: Vivek Kumar
       परीक्षा का मौसम सर पर है, इसीलिए पंकज जी काफी शाम गए कोचिंग से नहीं लौटते हैं | पढने में तो बचपन से ही होशियार रहे हैं पंकज जी | उनके घरवाले को उन पर पूरा भरोसा है - "पिंटू एक दिन जरूर कुछ न कुछ करेगा" | घर में उन्हें सब पिंटू ही बुलाता है | पापा के भरोसे को सही ठहराने क... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   3:41pm 22 Mar 2014 #
Blogger: Vivek Kumar
(कहानी में तारतम्यता बनाए रखने के लिए कृपया सर्वप्रथम "राम-श्याम किरण-1"पढ़े http://vivekmadhuban.blogspot.in/2013/12/1.html       राम-श्याम का घर फिल्ड के बगल में ही था और वहीं किरण का भी घर था, इसीलिए दिन में चार पाँच बार तो दोनों भाई को चंद्रमुख का नियमित दर्शन लाभ मिल ही जाया करता था | किरण किसी ... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   2:02pm 3 Feb 2014 #
Blogger: Vivek Kumar
        हमारी खिड़की के बाहर का जो क्रिकेट मैच हुआ करता था बड़ा ही रोमांचकारी | हरेक उम्र के खिलाड़ी, छोटा सा फिल्ड, नए-नए नियम जो प्रायः प्रतिदिन बदलते रहते और उसके दर्शकगण जोकि खिलाड़ियों के पारिवारिक कुटुंब ही थे, के कारण मैच का रोमांच चरम स्तर का चुम्बन करने लगता |ह... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   6:49am 22 Dec 2013 #
Blogger: Vivek Kumar
        पंकज जी ने फटाक से दरवाजा बंद कर लिया और यहाँ तक कि उस दिन खोला ही नहीं | अगले दिन जब पंकज जी के समक्ष यही प्रसंग पुनः खोदा गया तो वो मुस्कुरा भर दिए | उन्होंने फिर खुद ही बताया कि किरण ने ग्याहरवीं में नवोदय छोड़कर दरभंगा में ही रहने का फैसला किया है - "यहाँ मेडिक... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   3:37pm 9 Dec 2013 #
Blogger: Vivek Kumar
        आजकल पंकज जी का गेट अधिकांशतः बंद ही रहता है, कहते हैं कि पढाई का टेंसन हो गया है इसीलिए वो सीरियस रहते हैं और हमलोग उनके सीरियसपन को देखकर टेंसनाइज हो गए हैं |            मुझे क्या पता कि किरण छुट्टी में भी इतना सीरियस रहने वाली लड़की है | ग्यारहवीं में एडमि... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   2:08pm 24 Nov 2013 #
Blogger: Vivek Kumar
(कहानी में तारतम्यता बनाए रखने के लिए कृपया सर्वप्रथम - "बुद्धिमान के लिए ईशारा काफी (1)"पढ़ें http://vivekmadhuban.blogspot.in/2013/10/1_23.html )                माँ उतर रही है धीरे - धीरे अपने सैंडिल से सीढियों को पुचकारते हुए | चाल और चेहरा दोनों में गर्व झलक रहा है | किरण दीवाल की ओट से नि... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   2:46pm 8 Nov 2013 #
Blogger: Vivek Kumar
        "किरण को जो आप देख लो एक बार बिल्कुल्ले बदल गई गई है, शकल - सूरत से लेकर चाल-व्यवहार तक पहचाने में नहीं आती" - बगल वाली शर्मा आंटी अंकल से कह रही थी "नमस्ते भी किया इस बार, पहले तो कैसे अकड़ी रहती थी …लगता है नवोदय में अच्छी पढाई होती है तभी तो, हमारा दुनू में से एक क... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   6:00am 24 Oct 2013 #
Blogger: Vivek Kumar
        किरण को यह पहली बार उसी विद्यालय में पता चला कि लड़की - लड़के भी आपस में दोस्त हो सकते हैं, जैसे लड़की - लड़की या लड़का - लड़का | किरण को यह भी वहीं पता चला कि आँख मारना कभी - कभी ईशारा करना से भी आगे की बात होती है| यह आगे की बात का पता तब चलता है जब किसी खास के आँख का मा... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   5:24am 8 Oct 2013 #
Blogger: Vivek Kumar
         कोई पूछता नाम, नाम क्या है आपका? फ़िल्मी स्टाईल में वो बोलती "किरण, किरण भारद्वाज" | पंकज जी तो एकदम शाहरुख़ बन जाते "क क क किरण, वो है मेरी किरण" |        कान्वेंट स्कूल की छात्रा, फर्राटेदार अंग्रेजी, ग्यारहवीं में बायलोजी, डॉक्टर बनने की चाहत, अपनी से ज्याद... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   3:19pm 3 Oct 2013 #
Blogger: Vivek Kumar
     वो दरभंगा नवोदय विद्यालय की छात्रा थी, जो दरभंगा टाउन में नहीं था और ये सीएम साइंस कॉलेज का छात्र था, जो दरभंगा टाउन में था । उसका दरभंगा टाउन में घर था,  लेकिन वो टाउन से बाहर रहती थी, जबकि इसका घर तो गाँव में था लेकिन पढने दरभंगा आया था । उसने दसवीं की परीक्षा द... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   6:19am 26 Sep 2013 #
Blogger: Vivek Kumar
मौसम में कुछ बदलाव सा आभास हो रहा है| गर्मी का महीना धीरे – धीरे बूढा होता जा रहा है| वातावरण में नमी की कमी महसूस होने लगी है| इस मौसम में शरीर की त्वचा भी वातावरण से सांठ – गांठ करते हुए खुश्क हो जाती है| यह अजीब सा रूखापन शरीर के साथ मन को भी चिड़चिड़ा कर देता है| नमी के ... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   8:45am 20 Sep 2013 #
Blogger: Vivek Kumar
   कुछदिनपीछेहीवैष्णोदेवीकीयात्रासम्पन्नकरकेवापसदिल्लीपहुँचाहूँ।वहाँमैंनेदेखाआस्थाओं काएकऐसासैलाबजोउमड़करदूरनिर्जनपहाड़ोंमेंअपनेविश्वासकीअटूटताकोकायमरखनेकेलिएवैष्णोदेवीकीछोटीसीशिलापिंडकेदर्शनहेतुबड़ी-बड़ीशिलाओंकोपारकरतेहैं।उसआस्थाक... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   6:24am 16 Sep 2013 #
Blogger: Vivek Kumar
फूलों की कोमल पत्ती को तोड़ न ले जाए माली,दिन-रात यहाँ करता रहताहूँ इसीलिए पहरेदारी |विश्राम मैं कभी करू नसहूँ मैं झंझों के झोके,खड़ा हमेशा रहता हूँआहत का क्रंदन उर लेके|यह पौध हमें क्यों पाल रहायह कठिन परीक्षा साल रहा,पांडव जैसा हो गया गतिलुट गयी हजारों द्रौपदी,आते ... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   8:15am 3 Sep 2013 #
Blogger: Vivek Kumar
 जब कभी मैंनेनए रिश्ते बनाए हैंसपनों के महल सजाएं हैं  पूर्णिमा के चाँद की तरह खुशियाँ दमकने लगती है भाग्य बुलबुल की तरह मन की खिड़कियों पर चहकने लगती हैकिन्तु, उसी क्षण चाँद बनता हैकाले बादलों का ग्रास हमारी अपेक्षाएँ बढती है और रिश्तों में आ जा... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   4:36am 3 Apr 2013 #
Blogger: Vivek Kumar
कुछ तुम बोलो कुछ  मैं बोलूँक्यों मध्य पड़ी गहरी गाँठेकर आगे कर मिलकर खोलूँकुछ तुम बोलो कुछ मैं बोलूँ ।क्यों छोटा गड्ढा जन्म लियाधीरे - धीरे यह क्यों पसरायह पता नहीं तुम क्यों बिफरेयह भी न पता मैं क्यों अकड़ा,गड्ढे का कीचड़ चादर परआओ मिलकर उसको धो लूँ ।कुछ तुम बोलो क... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   1:15pm 26 Feb 2013 #
Blogger: Vivek Kumar
राहें सूनी है दूर - दूर सब छोड़  मुसाफिर चले गए,और सज्जनता उपहास बना जब - तब देखो हम छले गए ।अनजान डगर पर निकले थे,थे दिल के  हम भोले - भाले,वह चोर लुटेरा ठग निकला जिस - जिसको समझे रखवाले,सब करते रहे कंदुक - क्रीडा मच्छर की भाँति मले गए ।यह सज्जनता और भोलापन ... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   1:03pm 16 Feb 2013 #
Blogger: Vivek Kumar
अरे हिमालय बता मुझेये क्या होता है?गंगा यमुना बहती है,या तू रोता है?गंगा धार बनी है किसकी याद बता,किसकी यादें रही अभी तक तुझे सता,तुम किस आशा में चिरकालों से हुए खड़े,झंझा - तूफान, गर्जन - तर्जन से लड़े - अड़े,किस विरहा में धीरे - धीरे घुले जा रहे,किसकी यादों में स्वंय भूले ... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   7:04am 5 Feb 2013 #
Blogger: Vivek Kumar
बादल उमड़ा,मुझे किसी ने याद किया क्या?बादल गरजा,विरह की मारी याद किया क्या?बरसा बादल,मुझे लगा वह मीरा बनकर नाच रही है,विह्वलता में प्रेम गहनता जाँच रही है,बूंद बरस कर मिट्टी के तन पोर-पोर में समा गया है,सोंधी खुशबू भूली नेह को जगा गया है,हरी दूब जो झुलस गयी थी हरा हो गया,मी... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   6:45am 9 Aug 2012 #
Blogger: Vivek Kumar
मेरे टूटे कंधो पर अपना मस्तिष्क टिका दो मेरी सूनी अंखियों में तारों सी ज्योति जगा दो,विश्वास नहीं टूटे ये मोरों का नभ के ऊपरबिजली चमकी बरसो हे अम्बर के बादल भू पर|जब हवा चली सन-सन से खन-खनके हुआ मन कंगना संकेत मिला आओगे लीपा खुद से ही अंगना, अंतर की सृष्टि हलचल कर द... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   6:51am 27 Jun 2012 #
Blogger: Vivek Kumar
अंजुली भर-भर जल राशिसूरज को समर्पित क्यों करूँ?मूर्ति के चरण पर भोग भी क्योंकर धरूँ?प्यासों के मुख में जल भर केक्षुधा तृप्ति करूँ भूखे नर के,बादल हे अनंत अम्बर के,जहाँ तुम्हारी नहीं जरूरत तुम ज्यादातर वहीँ पे बरसे|मैं लक्ष्मी पूजन क्यों करूँ?हंसारुढ़ा का वंदन भी क्यों... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   8:22am 12 May 2012 #
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