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सरल की डायरी Saral ki Diary

बच्चों की भलाई के लिए काम करनेवाली एक संस्था से आज एक फ़ोन आया। काफ़ी नाम वाली संस्था है। एक भली लड़की बच्चों की किसी योजना का विवरण देने लगी। बच्चों के लिए आर्थिक मदद मांगनेवाले फ़ोन कई बार आते हैं। मैंने भली लड़की से कहा कि मैं आपको बीच में टोक रहा हूं पर आपको बता दूं कि मैं...
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Tag :dishonest
  March 14, 2017, 11:10 pm
‘ऐसा भी होता है’पर क्लिक करें-क्या आपने बाल सीक्रेट एजेंट अमित, असलम और अल्बर्ट के नाम सुने हैं ?चिंता न करें, संभावना यही है कि मैंने भी ये नाम तभी सुने होंगे जब मैंने इस उपन्यास को लिखने की सोची होगी। अंदाज़न क़रीब 35-36 साल पहले की ही बात.......। अजीब दिन थे मगर उनके बारे में सोच...
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Tag :espionage
  November 20, 2016, 11:15 pm
छोटा ही था। उन दिनों स्टील के बर्तन बहुत ज़्यादा प्रचलन में नहीं आए थे। लोग पीतल के बर्तन ज़्यादा रखते थे जिनमें समय-समय बाद कलई करानी पढ़ती थी। गर्मियों की एक ऐसी ही दोपहर में जब कलईवाला हमारे बर्तन कलई कर रहा था, माताजी ने मुझसे वहीं खड़ा होकर ध्यान रखने को कहा। कलईवाला ...
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Tag :feminism
  May 22, 2016, 7:32 pm
(पिछला भाग)क्या लोग आधुनिक हो गए हैं ! ख़ासकर स्त्रियां !?वह किसी काम से लाइन में लगा होता है और कई बार एक घटना घट जाती है। हवा में कोई ऐसी गंध अपनी जगह, थोड़ी देर के लिए ही सही, बना लेती है कि बड़े-बड़े सहनशील अपनी सहनशीलता भूलने लगते हैं। बोलता कोई कुछ नहीं हैं मगर किसीका हाथ अप...
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Tag :partner
  September 24, 2015, 6:35 pm
(पिछला भाग)स्त्रियां आज़ाद हो रहीं हैं, होंगी।मगर उसके लिए न सिर्फ़ उन्हें अपनी पारंपरिक भूमिका को छोड़ना होगा बल्कि पुरुष को भी उसकी पारंपरिक भूमिका से मुक्त करके देखना होगा, जो कि अभी तक कम ही होता दिखाई दिया है।कितनी स्त्रियां हैं जो अपने पतियों, भाईयों, पिताओं से भार...
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Tag :manliness
  August 6, 2015, 3:43 pm
(पिछला भाग)भारतीय एक ही सांस में, एक ही वक़्त में कितनी सारी विरोधाभासी बातें एक साथ सोच और कर सकते हैं, इसका एक और उदाहरण अभी-अभी देखा। ‘तनु वेड्स् मनु रिटर्न्स्’ की शुरुआत में ही नायिका/पत्नी नायक/पति के लिए कहती है-‘यह आदमी अदरक की तरह कहीं से भी बढ़ता जा रहा है‘....। यह डा...
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Tag :honor
  July 8, 2015, 4:32 pm
(पिछला भाग)भारतीय एक ही सांस में, एक ही वक़्त में कितनी सारी विरोधाभासी बातें एक साथ सोच और कर सकते हैं, इसका एक और उदाहरण अभी-अभी देखा। ‘तनु वेड्स् मनु रिटर्न्स्’ की शुरुआत में ही नायिका/पत्नी नायक/पति के लिए कहती है-‘यह आदमी अदरक की तरह कहीं से भी बढ़ता जा रहा है‘....। यह डा...
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Tag :honor
  July 8, 2015, 4:32 pm
(पिछला भाग)आजकल जगह-जगह सुनने को मिलता है कि औरतें तो समझदार हो गईं हैं अब तो बस मर्द को बदलना है।क्या वाक़ई ऐसा है? क्या हम ज़रा-सा सच सुनने या पढ़ने को तैयार हैं ? वे कौन औरतें हैं जो यह सुनकर ख़ुश हो रहीं हैं कि ‘हर औरत का सम्मान करना चाहिए’ या ‘मैं स्त्रियों का बड़ा सम्मान कर...
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Tag :hypocrisy
  April 22, 2015, 4:05 pm
(पिछला भाग)इस वीडियो में ज़्यादा आपत्तिजनक तो कुछ नहीं है मगर नया भी कुछ नहीं है। दुनिया-भर में, भारत में भी पत्र-पत्रिकाओं, इंटरनेट की बहसों और टीवी सीरियलों में पिछले कई सालों से ये बातें कही जा रहीं हैं और इस वीडियो से बेहतर ढंग से कही जा रहीं हैं। इस वीडियो का सबसे कमज़...
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Tag :hypocrisy
  April 7, 2015, 2:59 pm
(पिछला भाग)(पिछला भाग)यहां देखिए, नायिका को सीधी बात में मज़ा नहीं आ रहा, वह चाहती है कि नायक कुछ घुमा-फिराकर कहे। यह तो फ़िल्मी सिचुएशन है मगर बाहर की दुनिया में भी घुमाने-फिराने को बड़ी प्रतिष्ठा मिली हुई है। घुमाने-फिराने के सबसे ज़्यादा शौक़ीन हमारे कवि और साहित्यकार हैं...
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Tag :hypocrisy
  April 7, 2015, 12:00 pm
(पिछला भाग)हे देश के पवित्र महात्मागणों, फूफा-फूफिओं, दादा-दादिओं, नाना-नानिओं, जीजा-जीजिओं, पिताओं-माताओं, तुम जो ये झंडे ले-लेके एकाएक क्रांतिकारी हो उठे हो, ये न सोच बैठना कि जो लोग बलात्कार नहीं करते वे बहुत महान हैं। उन्हींमें से बहुत-सारे लोग सरिता-मुक्ता-मेट्रो नाऊ...
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Tag :hypocrisy
  April 4, 2015, 2:39 pm
(पिछला भाग)जब सानिया मिर्ज़ा जीतती हैं, साइना नेहवाल जीतती हैं, सचिन तेंदुलकर रिकॉर्ड बनाते हैं, धोनी वर्ल्ड कप दिलाते हैं तो तुम कहते हो कि ये हमारे आदमी हैं, हमें इनपर गर्व है। तुम्हारे बेटे-बेटी क्लास में सबसे ज़्यादा नंबर लाते हैं, अच्छी नौकरी पाते हैं तो तुम कहते हो क...
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Tag :hypocrisy
  April 2, 2015, 6:18 pm
(पिछला भाग)चंद रोज़ पहले उसने सुना कि एक भीड़ ने क़ानून अपने हाथ में लेकर एक बलात्कारी की हत्या कर दी। सोचने की बात यह है कि हत्या और बलात्कार में फ़र्क़ क्या है ? दोनों ही तरह के लोग बातचीत में या तो यक़ीन नहीं रखते या उनमें इतना धैर्य नहीं होता। कहीं न कहीं उन दोनों में दूसरों क...
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Tag :hypocrisy
  April 2, 2015, 3:27 pm
एन डी टी वी इंडिया अकसर रविवार को मुहिम जैसा कुछ चलाता रहता है।साल-भर हुआ होगा शायद। स्त्रियों की स्थिति को लेकर बातचीत चल रही थी।किसी गांव में मौजूद एक संवाददाता स्टूडियो में मौजूद अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा की बातचीत किसी ख़ाप पंचायत के मुखिया से करा रहा था। मुखिया ...
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Tag :hypocrisy
  April 1, 2015, 2:15 pm
इज़्ज़त के दुपट्टे की छांव के डर और लालच में औरत को क्या-क्या नुकसान सहने पड़े, इसपर बात चल निकली है, आगे भी जाएगी। मगर क्या ऐसा मानना ठीक होगा कि मर्दों को ऐसी किसी समस्या से कभी जूझना नहीं पड़ा!?उसे याद आता है कि बस या ट्रेन में सफ़र करते वक़्त कभी खिड़की बंद करनी हो या खोलनी हो...
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Tag :बलात्कार
  June 15, 2014, 6:48 pm
‘आपका मेल मिला, मैं आपकी हर मुहिम में आपके साथ हूं।’‘चलिए, किसीने तो जवाब दिया।’$                            $                       $‘यह तसवीर कैसी लगा रखी है आपने?’‘क्यों ठीक नहीं है क्या?’‘नहीं, नहीं, बहुत गोरे हो रहे हैं आप तो।$                   &...
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Tag :कहानी
  September 19, 2013, 6:27 pm
वह बिस्तर में पड़ा है, आंखें बंद हैं।आंखें बंद कर लेने से क्या नींद आ जाती है ? रात किस वक्त आंख लगती है, कितना वक्त नींद आती है, कुछ समझ में नहीं आता। बस सुबह मन होता है कि सोया रहे, अभी तो नींद आनी शुरु ही हुई थी और......। यूं भी कोई चुस्ती-फुर्ती उसे अपने बदन में महसूस नहीं होती...
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Tag :diary
  September 14, 2013, 5:56 pm
पापाजी कभी-कभी हंसते हैं। अकसर गंभीर दिखाई देते हैं। दिखाई भी कितना देते हैं ! हमेशा तो बिज़ी रहते हैं।पहले तो सभी कमरों में बल्ब लगे थे जो पीली-पीली रोशनी देते थे। एक-एक करके पापाजी ने सभी कमरों में ट्यूबलाइट लगवा दीं हैं। ट्यूबलाइट, स्विच ऑन करते ही बल्ब की तरह तुरंत न...
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Tag :diary
  September 5, 2013, 5:50 pm
सौ में से निन्यानवें बार ऐसा होता है। वे सब उसके खि़लाफ़ एक हो जाते हैं। जब कभी वह घर से निकलता है, गांडू-गांडू कहकर चिल्लाते हैं, पीछे आते हैं।कस्बा जिसमें उसका जन्म हुआ, अखाड़ेबाज़ी और लौंडेबाज़ी के लिए मशहूर है। अखाड़ेबाज़ी के शौक़ीन लोगों में से कईयों को लौंडेबाज़...
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Tag :डायरी
  September 2, 2013, 2:16 pm
चौखट के बिलकुल ऊपरी कोने में, दीवार के सहारे एक झिरी है जिससे अपनी बायीं आंख किसी तरह सटाकर वह दुनिया को देखता है। बना-बनाया मकान ख़रीदा है पिताजी ने, नया ही है मगर चौखटों में दीमक लग गई है। सरल धीमे से एक कुर्सी घसीटकर झिरी के नीचे लाता है, सावधानी से उसपर चढ़ता है और सांस...
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Tag :डायरी
  August 26, 2013, 3:14 pm
‘गोली मत मारना, मुझे कुछ बात......’ ‘आहा, डरते हो, कुछ नहीं कर पाओगे जिंदग़ी में, डरपोक आदमी, हा हा हा .............’‘हां डरता हूं, मुझे गोलियों में खेलने की आदत नहीं है भाई, पर उससे भी ज़्यादा मैं इसलिए डरता हूं कि तुम मुझसे भी ज़्यादा डरपोक हो। तुम डरके मारे, मुझे गोली मार दोगे और जो ब...
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Tag :ईश्वर
  August 22, 2013, 11:40 am
‘‘राखी बंधवा ले बेटा, बात माना करते हैं, देख बहिनों का कितना मन है, कितनी उदास हो रहीं हैं ; बंधवा ले बेटा।’’ मां कहती है।सरल कसमसा रहा है भीतर ही भीतर मगर बोल कुछ भी नहीं पा रहा। वह समझ नहीं पा रहा कि जो कुलबुलाहट उसके भीतर है, वह सही है या ग़लत, कहे कि न कहे, जैसा वह महसूस करत...
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Tag :चिंतन
  August 15, 2013, 6:34 pm
10/11-07-2013राजधानी आए सरल को शायद साल-भर हुआ होगा, कॉलोनी की एक शांत सड़क पर दोस्त के साथ टहल रहा था कि-‘ओए, ए’एक कड़क और बुलंद आवाज़। पुलिस जैसी कद-काठी वाली एक स्त्री ने एक स्कूटर-सवार को रोका। लड़का-सा ही था। स्त्री तड़ातड़ शुरु हो गई, वह लड़के को तमाचे पर तमाचे मार रही थी, ग़ाल...
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Tag :डायरी
  July 11, 2013, 5:14 pm
‘मेरे ख़्वाबों में जो आए.....’फ़िल्म समझ में नहीं आई सरल को। करवा-चौथ देखकर तो मन बिलकुल ही उचाट हो गया था। लेकिन गाना जब भी देखता, अच्छा लगता। यह कोई-पूछने बताने की बात नहीं लगती सरल को कि गाना किस भाव से/किस मक़सद से फ़िल्माया गया होगा।उसी भाव से देखता भी रहा सरल। मगर तौलि...
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Tag :चिंतन
  February 17, 2013, 9:34 pm
‘हलो! आगे कहां निकले जा रहे हो?’‘कमाल है! जहां मुझे जाना था वहीं जा रहा हूं।’‘हाथ क्यों हिलाया था मुझे देखकर ?’‘किसने हिलाया? चलते वक्त मेरा सारा ध्यान तो अपने शरीर का संतुलन बनाने में ही लगा रहता है! आपको ग़लतफ़हमी हुई है ; मच्छर-वच्छर उड़ाया होगा या अपने बाल ठीक कर रहा हो...
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Tag :डायरी
  February 3, 2013, 8:40 pm
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