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Blog: khuch bhikhri yaden --कुछ बिखरी यादें

Blogger: विवेक सचान
प्रिय कुमुदनी,आशा करता हूँ कि ये पत्र तुम तक जरुर पहुँचेगा , तुम इसे मेरी ओर से क्षमा याचना मान लेना | बचपन से लेकर आज तक गलतियों से सीखता आया हूँ , आज भी सीख रहा हूँ , कल भी सीखूंगा | कैसे भूल सकता हूँ , बचपन की अपने गाँव की वो अठखेलियाँ, उन रंग बिरंगी तितलियों के साथ जो मेरे घर ... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   8:58am 24 Sep 2016 #
Blogger: विवेक सचान
 उपसंहारहर एक कहानी उपसंहार पर ही ख़त्म होती है भले ही कहानी का अंत दुखद हो या सुखद | लेकिन जब कहानी तुम से शुरू होकर आप पर ख़त्म हो रही हो तो सिर्फ उस कहानी के लेखक को ही ये अंदाजा हो सकता है कि कहानी का प्रतिफल क्या है ? कहानी की परिणति क्या है ? कहानी के नायक नायिका भी उसका अ... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   5:14pm 12 Jan 2016 #
Blogger: विवेक सचान
हाँ संवेदनाहीन हूँ मैंहाँ संवेदनाहीन हूँ मैंकितनाशायद इतना कि याद नही है मुझकोकब सिसकियों नेमांगी थी पनाहआखिरी बार मुझसे |ना याद है शायदवो रुंधा हुआ गलाना आंख से गुजराया ठहरा हुआकोई आखिरी आंशू |शायद संवेदनाहीन हूँ मैंहाँ सच है ये भीना रोया था तबजब खोया थाकिसी अपन... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   7:17pm 11 Jan 2016 #
Blogger: विवेक सचान
हमारे कालेज के साथ के हमारे एक मित्र है शर्मा जी जाति के ब्राह्मण एक दम टिपिकल ब्राह्मण बस जनेऊ, शिखा और रुद्राक्ष धारण नही करते| प्राइवेट कालेज से पढाई करी इंजीनियरिंग की ,और अभी नौकरी कर रहे है राजस्थान सरकार की| यही राजस्थान के सिरोही जिले में बिजली विभाग में कनिष्ठ ... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   2:23pm 20 Aug 2015 #
Blogger: विवेक सचान
अपनापन“छोटू ये चाकलेट आपके लिए और स्वीटी ये आपके लिए , ये टेनिस किट आप के लिए ” अपने बैग से सारा सामान राज ने निकाल कर बच्चों में बाँट दिया था | “अगर आप जैसे कुछ लोग और हो तो समाज में वास्तव में बदलाव आ सकता है” तभी अपनालय की संरक्षिका मालती  ने  राज को बच्चो के बीच  खेल... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   5:24pm 11 Feb 2014 #
Blogger: विवेक सचान
मैं तेरा हूँ आज भी.....बहुत से ख्वाब मैंनेटूटते बिखरते देखे हैइन आँखों से तुम भी एक हिस्सा हो उसी में से किसी एक कान चाह कर भी ये कड़ी टूट सी गयी थी घडी की सुइयां और रातें भीहमसे रूठ सी गयी थी न बदनीयत था मैं न मेरी ऑंखें न मेरी बातें हाँ बदहवास था मै, मेरे जज्बात म... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   5:57am 30 Jan 2014 #LIFE
Blogger: विवेक सचान
तुम्हारा सवाल कौधता है जेहन में मेरे...तब से जब सेपूछा था तुमने 'क्या तुम कविता करते हो..'तब जवाब नही था पास मेरे निशब्द था मै मौन था मैंअपनी भावनाओ की तरह पर आज कहता हूँ शब्द शब्द को चुनता हूँ...मैं नाम से तेरे................हाँ मै कविता करता हूँ..बस इंतजार में तेरे....हाँ मैं ... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   12:51pm 29 Jan 2014 #
Blogger: विवेक सचान
  मेरी डायरी के अवशेषमेरे ओंठों को खबर नहीदिल में गम हजार रहते है...तुमने देखा है बस हँसतें हुए चेहरे कोआंख तो नाम बेहिसाब रहते है..!!!!कदम लडखडा ही जाते जब आप याद आते है..,हम चलते है खुद को सम्हाल करवो तो बस जब आप साथ रहते थे...!!!मयखाने में गूंजते है अल्फाज सबके मदहोश रहकर भ... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   7:36am 16 Jan 2014 #LIFE
Blogger: विवेक सचान
      लहरवर्ष २०१२ अक्टूबर महीना स्थान जैमपोर बीच दमन | कुछ लोग  आ रहे थे अपना और अपने साथी का नाम लिखते उनका मानना था की पानी की आती  जाती  लहर  के साथ अगर उनका नाम नही मिटता तो उनका रिश्ता स्थायी और LONGLASTING होता है ...मैंने कुछ लिखा था |"मैने रेत पर लिखा था तेरा नामवो ... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   3:49pm 15 Jan 2014 #LOVE
Blogger: विवेक सचान
            उपसंहार हर एक कहानी उपसंहार पर ही ख़त्म होती है भले ही कहानी का अंत दुखद हो या सुखद | लेकिन जब कहानी तुम से शुरू होकर आप पर ख़त्म हो रही हो तो सिर्फ उस कहानी के लेखक को ही ये अंदाजा हो सकता है कि कहानी का प्रतिफल क्या है ? कहानी कि परिणति क्या है ? कहानी के नायक ... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   9:21pm 13 Jan 2014 #LOVE
Blogger: विवेक सचान
इश्क तुमने हर सलीके भूल रखे हैं.....लग रहा है तूने भी सियासत से नाते जोड़ रखे है....!!!!!!!!!!... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   9:24pm 12 Jan 2014 #
Blogger: विवेक सचान
ए खुदा इस महफ़िल को कुछ यु ही गुलजार रखना...न अता कर सको रौशन दुपहरी ,तो समां से रौसन ये रात रखना!!!!!!! अभी देखी है दुनिया ने मेरे कदमो की हलचल................ वक्त आने दो मेरा ख्याल -ए-अजमात रखना !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! ... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   4:22pm 6 Apr 2011 #
Blogger: विवेक सचान
एक दोस्त ने काफ़िर शब्द पर लिखा है उनका कुछ जवाब हैतखल्लुस में क्या रखा है ??????????????कोई तुम्हे काफ़िर कहे या कहे शैतानजब कोई परिंदा मोह्हबत के पर संग उड़ने लगे जन लेना काफ़िर कहता है उसे सारा जहाँ ........................ Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   8:52am 11 Jan 2011 #
Blogger: विवेक सचान
जिंदगी उल्फतो से भरी ,पर हर पल निराश नहीं होतीहम वो है.............जिसे, हर खूबसूरती से प्यार की दरकार नही होतीआप की मासूमियत कुछ खास है ,जो हम अपना दिल हार बैठे वर्ना मोहब्बत के अरमानो संग हर पल तेरी याद नही होती ........................................... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   10:29am 14 Oct 2010 #
Blogger: विवेक सचान
पथरीले पथ पर चलते चलते ,पांवो ने सीख लियाजीवन पथ पर गिरते गिरते, राही ने मंजिल जीत लियासंग्राम ज़माने का था, या युद्ध हमारे दिल काहर विपदा से लडते लडते ,बांहों ने लड़ना सीख लिया... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   12:02pm 12 Oct 2010 #
Blogger: विवेक सचान
हम तो अपने दर्द के फ़साने पढते थे ; शायद ही कभी इश्क की चर्चा करते थे; किसी की मुस्कराहटो का कुछ हुआ असर ऐसा ; कि अब तो सिर्फ परवाने इश्क ही गाते नजर आने लगे............................ Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   11:55am 22 Sep 2010 #
Blogger: विवेक सचान
तुम कहते हो की हम हिन्दू मुस्लिम भेद करते है ;जरा नजर उठाओ धर्म के ठेकेदारों ;हम कुरानवो वेद पढ़ते हैये साम्प्रदायिकता तुम नेताओ के चोचले हैहम तो दीवाली में अली ;रमजान में राम देखते है... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   11:49am 22 Sep 2010 #
Blogger: विवेक सचान
इश्क की गलियों की सर फरमाइए ;वक्त की कमी का मत ख्याल कीजिये;जीने के लिए तो वक्त तो बुत है जनाब ;बस जनाजे से पहले सेहरे का इंतजाम कीजिये .................... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   11:27am 22 Sep 2010 #
Blogger: विवेक सचान
लोग कहते है कि माजी* इतिहास बनता है।लेकिन हम कहते है कि मेरा माजी प्रेरणा और एक आश बनता है॥*माजी का तत्पर्य है बीता हुआ कल... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   9:31pm 11 Nov 2009 #
Blogger: विवेक सचान
"भारत "का शाब्दिक अर्थ होता है भा से रत यानि प्रकाशवान या चमक से परिपूर्ण।किँतु आज चमक विलुप्त हो रही है हम कहाँ जा रहे है ये प्रश्न आज विचारणीय है,आज का युवा ध्रूमपान ,अन्य वस्तुओँ से इस प्रकार लिप्सित है कि वो जब स्वयं के बारे मे नही सोँच पा रहा है तो इस राष्ट्र या समाज क... Read more
clicks 215 View   Vote 0 Like   8:36am 17 Sep 2009 #
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