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शीराज़ा [Shiraza]

एक के बाद एक फँसते जा रहे हैं हम समस्याओं के, दुर्भेद चक्रव्यूह में चाहते हैं, चक्रव्यूह से बाहर निकल, मुक्त हो जाएँ हम भी रोज प्रत्यंचा चढ़ जाती है, लक्ष्य बेधन के लिए लेकिन असमर्थताएँ परास्त कर जाती हैं हर तरफ से। शायद- हो गये हैं हम भी, अभिमन्यु की तरह। काश, इससे न...
शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :
  October 14, 2018, 2:53 pm
हज़ारों रंग ख़ुशबू से  बना गुलदान है भारत कई तहज़ीब,भाषा,धर्म की पहचान है भारत कहीं गिरजा, कहीं मस्जिद, शिवाला और गुरुद्वाराकभी होली कभी क्रिसमस कभी रमज़ान है भारत कोई नफ़रत भी बोता तो पनपती है मोहब्बत हीअज़ब जादू है माटी में, कोई वरदान है भारत चलो मिलकर बचाएँ हम इसे फ़िरक़...
शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :ग़ज़ल
  August 16, 2018, 10:20 am
वह रहता है हरदम युवाओं के कंधे पर सवार रचता है मन्त्र उन्माद का और फूँक देता है क्षुब्ध नौजवानों के कानों में वह करता है आदमी को उन्मादी भीड़ में तब्दील हाँक कर ले जाता है अपना शिकार बनाता है हथियार वह करता है कातिलों का झुंड तैयार बनाता है भय का माहौल वह करता है ऐसा प्रब...
शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :
  May 24, 2018, 12:03 am
मसरूफ़ आप में हैं, कहाँ फुर्सतों में लोगबस कहने को बचे हैं शनासाइयों में लोग उकता गये हैं रोज के इन हादसों से अब डूबे हुए हैं ख़ौफ़ की गहराइयों में लोग आँखों में ख़्वाब और थे, ताबीर और है सपने बिखरते देख के मायूसियों में लोग तदबीर से नसीब बदल कर नहीं देखे तक़दीर कोसते रहे ...
शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :
  April 24, 2018, 8:58 pm
नाकामी  पर  परदा  कर जनता को भरमाया कर जब  मुद्दों  की  बात  उठे मज़हब में उलझाया कर भूखों  की  तादाद  बढ़ी खुशहाली का दावा कर सीधे  साधे  लोग   यहाँ ख़्वाब सुनहरे बेचा कर लफ़्फ़ाज़ी  का  राजा  तू जुमले  यूँ  ही  फेंका कर जो भी  तुझसे  प्रश्न  करे उसके मुँह पर ताला कर बेबस  चीखें ...
शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :
  December 17, 2017, 6:05 pm
[आज इस 'ब्लॉग' के चार वर्ष पूरे हो गए। इन चार वर्षों में आप लोगों का जो स्नेह और सहयोग मिला, उसके लिए तहे दिल से शुक्रिया और आभार। यूँही आप सभी का स्नेह और मार्गदर्शन मिलता रहे यही चाह है। इस मौक़े पर एक ग़ज़ल आप सब के लिए। सादर,]   ...
शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :
  November 3, 2017, 4:45 pm
सामने   आप   मेरे   रहा   कीजिएमुझको मुझसे न ऐसे जुदा कीजिएहै मुहब्बत अगर तो कहा कीजिएबात दिल की हमेशा सुना कीजिए क्या ख़ता है मेरी आप क्यूँ हैं ख़फ़ागर गिला हो कोई तो कहा कीजिएकब बदल जाए नीयत किसी की यहाँहर किसी से न  हँस के मिला कीजिएमैंने अहसास दिल का बयाँ कर दियायूँ  न  ...
शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :
  October 10, 2017, 3:08 pm
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शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :
  September 9, 2017, 4:14 pm
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शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :ग़ज़ल
  August 16, 2017, 7:33 pm
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शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :ग़ज़ल
  May 14, 2017, 5:13 pm
चंचल मोहक तितलियाँ, रंग-बिरंगे पंखकरती थी अठखेलियाँ, जो फूलों के संगबगिया में रौनक नहीं, उपवन है बेरंगकहाँ तितलियाँ गुम हुईं, लेकर सारा रंग   ...
शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :कविता
  March 14, 2017, 11:01 pm
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शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :इनकार
  February 14, 2017, 4:21 pm
यकीनन नज़र में चमक आरज़ी है  महज़ चार दिन की यहाँ चाँदनी है जिधर  देखिए  हाय तौबा मची है हथेली पे सरसों भला कब उगी है चराग ए मुहब्बत बचायें  तो  कैसे यहाँ नफ़रतों की हवा चल पड़ी है फ़क़त आंकड़ों में नुमायाँ तरक्की यहाँ मुफलिसी दर-बदर फिर रही है कहाँ तितलियाँ हैं, हुए गुम परिंदे फ...
शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :नया साल
  January 2, 2017, 12:00 am
[आज इस 'ब्लॉग' के तीन वर्ष पूरे हो गए। इन तीन वर्षों में आप लोगों का जो स्नेह और सहयोग मिला, उसके लिए तहे दिल से शुक्रिया और आभार। यूँही आप सभी का स्नेह और मार्गदर्शन मिलता रहे यही चाह है। इस मौक़े पर एक ग़ज़ल आप सब के लिए। सादर,]  ज़िंदगी तुझसे निभाना आ गया हौसलों को आज़मा...
शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :
  November 3, 2016, 9:38 pm
शरद पूनो कौमुदी अमी धारा झड़ते परिजात अमानी कृष्ण महारास की बेला   मनमोहक निशा  © हिमकर श्याम (चित्र गूगल से साभार) ...
शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :शरद पूर्णिमा
  October 15, 2016, 11:22 pm
हवाओं में तरन्नुम  है,  चमन गाने लगा  देखो फुहारें  गुनगुनाती  हैं, शज़र भी झूमता देखो घटाएँ झूम कर  बरसीं, छमाछम नाचतीं  बूँदें गुलाबी ये फ़ज़ा देखो, नशा बरसात का देखो बुझाती तिश्नगी धरती, दिखातीं बिजलियाँ जल्वा किसानों  की  ख़ुशी  देखो, मयूरा  नाचता  देखो जमीं लगती नहाई सी...
शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :बरसात
  September 17, 2016, 4:51 pm
वही हालात हैं अब तक पुराने  न कुछ बदला न आए दिन सुहाने  किसे मतलब है ज़ख़्मों से हमारे  कोई आता नहीं मरहम लगाने  हमारी आँख के आँसू न सूखे चले आए नये ग़म फिर रुलाने कोई वादा नहीं उसने निभाया उसे अब याद आते सौ बहाने लिए उम्मीद हम बैठे अभी तक वो लायेंग...
शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :
  August 15, 2016, 7:33 pm
अक्सर ही  ऐसा  होता है सुकरात यहाँ पे मरता है बूढ़ा दरख़्त यह कहता हैदिन  जैसे तैसे  कटता है पाँवों  में  काँटा  चुभता  है लेकिन चलना तो पड़ता है मोल नहीं  है सच का  कोई पर खोटा सिक्का चलता है सपने सारे  बिखरे जब से दिल चुपके चुपके रोता है आया है पतझड़ का मौसम  शाखों  से  पत्ता...
शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :दरख्त़
  July 14, 2016, 1:27 pm
हमसफ़र भी नहीं है न है राहबर चल सको तो चलो साथ मेरे उधर मेरे हालात से तुम रहे बेख़बर हाल कितना बुरा है कभी लो ख़बरसाथ कुछ देर मेरे जरा तो ठहरमान जा बात मेरी ओ जाने ज़िगरयाद तेरी सताती हमें रात भरजागते जागते हो गयी फिर सहरदिल पे करते रहे वार पे वार तुमऔर चलाते रहे अपनी तीरे नज़र...
शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :ग़ज़ल. राहबर
  July 1, 2016, 4:58 pm
हरे जंगल जो कटते जा रहे हैंयहाँ मौसम बदलते जा रहे हैं किधर जाएँ यहाँ से अब परिंदेनशेमन सब उजड़ते जा रहे हैं नयेपन की हवा ऐसी चली हैउसी रंगत में ढ़लते जा रहे हैं नयी तहज़ीब में ढलता ज़मानारिवायत को बदलते जा रहे हैं सिखाते हैं सलीका हमको दीयेहवाओं में जो जलते जा रहे हैं ...
शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :ग़ज़ल
  June 5, 2016, 6:53 pm
दिल की बातें पढ़तीं माएँ दर्द भले हम लाख छुपाएँ रहती हरदम साथ दुआएँ हर लेती सब कष्ट बलाएँ नाम कई एहसास वही है इक जैसी होती सब माएँ फ़ीके लगते चाँद सितारे माँ के जैसा कौन बताएँ सारी पीड़ा हँस के सहती कर देती माँ माफ़ ख़ताएँ माँ का रिश्ता सबसे प्यारा रब  से  ऊपर होतीं माएँ ...
शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :मातृ-दिवस
  May 8, 2016, 8:03 pm
मिटाना हर बुराई चाहता  हूँ  ज़माने की भलाई चाहता हूँ तेरे दर तक रसाई चाहता हूँ मैं  तुझसे आशनाई चाहता हूँ लकीरों से नहीं हारा अभी मैं  मुक़द्दर से लड़ाई  चाहता  हूँ दिलों के दरमियाँ बढ़ती कुदूरत मैं थोड़ी अब  सफाई चाहता हूँ हुआ जाता हूँ मैं मुश्किल पसंदी नहीं  अब  रहनुमा...
शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :बुराई
  April 24, 2016, 6:56 pm
[नव संवत्सर और सरहुल पर दोहे ] नव संवत्, नव चेतना, नूतन नवल उमंग। साल पुराना ले गया, हर दुख अपने संग।। चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा, वासन्तिक नवरात। संवत्सर आया नया, बदलेंगे हालात।। जीवन में उत्कर्ष हो, जन-जन में हो हर्ष। शुभ मंगल सबका करे, भारतीय नव वर्ष।। ढाक-साल सब ख...
शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :नव संवत्सर
  April 8, 2016, 1:43 pm
भुला कर नफ़रतें सारी गले मिल यार होली मेंमिटा दे अब दिलों की रंजिशें, तक़रार होली में मिटे हर रंज दुनिया से, चमन गुलज़ार होली मेंसभी  के  वास्ते  हो  खुशनुमा  संसार होली में खिली सरसों, हँसे टेसू, पलाशी मन हुआ देखोभरा है रंग कुदरत में अजब गुलकार होली में नज़ारा है बड़ा दिल...
शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :तकरार
  March 24, 2016, 12:47 pm
तमाशा जात मज़हब का, खड़ा करना बहाना हैसभी  नाकामियाँ अपनी  उन्हें  यूँ  ही छुपाना है ढ़ले सब एक  साँचे में, नहीं  कोई अलग लगतामुखौटों  में  छुपे  चेहरे,  ज़माने को  दिखाना है है सारा खेल कुरसी का, समझते क्यूँ नहीं लोगोलगा के आग नफ़रत की, उन्हें बस वोट पाना है बदल ज...
शीराज़ा [Shiraza]...
Tag :तमाशा
  March 13, 2016, 10:45 am
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