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Blog: अक्षत

Blogger: manish
अंटार्कटिका पर दस फीट मोटी बर्फ में फंसे जहाज एमवी एकेडेमिक शोकालस्की पर एक भारतीय मूल के पत्रकार आलोक झा भी हैं। उनके साथ जहाज पर 73 और लोग फंसे हुए हैं। गार्डियन के पत्रकार आलोक झाआलोक ब्रिटिश अखबार गार्डियन के विज्ञान संवाददाता है। लंदन के इंपिरियल कॉलेज से फिजिक्... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   6:54am 2 Jan 2014 #
Blogger: manish
मिथिलांचल के एक बड़े विद्वान प्रो. राधाकृष्ण चौधरी ने 1970 में प्रकाशित अपनी किताब 'हिस्ट्री ऑफ मुस्लिम रूल इन तिरहूत'में लिखा था "मिथिला शायद एक मात्र ऐसा क्षेत्र है जो आर्यन सभ्यता के समय से अब तक अपनी सांस्कृतिक निरंतरता को बनाये रखा है।"मां सीता की यह धरती सुख, शांति औ... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   3:25am 25 Dec 2013 #
Blogger: manish
गलथेथरई कर अरनब गोस्वामी या रविश कुमार के टीवी शो का डिबेट जीता जा सकता है चुनाव नहीं । राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ और दिल्ली में आए विधानसभा के चुनाव परिणामों ने इसे साबित कर दिया है। यह बीजेपी की जीत है, 'आप'की जीत है ,लेकिन इन सबसे अधिक अधिक यह कांग्रेस की हार है।&nb... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   3:20am 18 Dec 2013 #
Blogger: manish
सुंदरतावो बहुत सुंदर थी, पता नहीं उसे यह,पता था या नही..तभी किसी ने उसे (और) सुंदर होने का उपाय बताया...अब उसके कपड़े घटते जा रहे थेचेहरे पर मेक-अप  बढ़ते जा रहे थे।किसी ने उसे नंगई को सुंदरता समझा दिया था... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   3:01pm 5 Oct 2013 #
Blogger: manish
इधर के वर्षों में बिहार की राजनीति का दो सबसे बड़ा उलटफेर -- नितीश का बीजेपी से सम्बन्ध तोड़ना और लालू यादव के जेल जाने को माना जा सकता है। इन दोनो घटनाओं ने बिहार की राजनीतिक परिस्थितियों को कुछ ऐसा बदला है कि बड़े बड़े विश्लेषक भी कुछ साफ नहीं कह पा रहे हैं। बहरहाल आइए ... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   3:11pm 2 Oct 2013 #
Blogger: manish
बीत गये संभालने के दिन   कुछ दिखता क्यों नहींकुछ पाने के लिए कुछ खिलाना पड़ता हैएक बार चक्र हाथ में आया तो बड़े-बड़े चितपटांग हो गयेमैं ही हू, धोखा मत खानाकभी हम दोस्त थेये हमेशा मेरा कहा मानते थेऔर जब चक्र गया तो लालटेन आ गयामैडम तो बस नाम के लिए मुखिया थीं ग्वाला ह... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   5:03pm 30 Sep 2013 #
Blogger: manish
गीले बादल, पीले रजकण, सूखे पत्ते, रूखे तृण घन लेकर चलता करता 'हरहर'--इसका गान समझ पाओगे? तुम तूफान समझ पाओगे ? गंध-भरा यह मंद पवन था, लहराता इससे मधुवन था, सहसा इसका टूट गया जो स्वप्न महान, समझ पाओगे? तुम तूफान समझ पाओगे ? तोड़-मरोड़ विटप-लतिकाएँ, नोच-खसोट कुसुम-कलिकाएँ, जाता... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   2:22pm 19 Sep 2013 #
Blogger: manish
अगर कुछ बड़ा उलट फेर नहीं हुआ तो प्रणब मुखर्जी का देश का प्रथम नागरिक बनना तकरीबन तय है। पचपन फीसदी से अधिक वोट उनके समर्थन में है। यूपीए गठबंधन के साथ ही कुछ बामपंथी और एनडीए के कुछ घटक दलों ने भी उन्हें समर्थन देने की घोषणा कर दी है। एक टीवी इंटर्व्यू के दौरान रिपोर्ट... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   5:27pm 15 Jul 2012 #
Blogger: manish
केन्द्र की सरकार किरने की चिंता मंत्रियों को बहुत सता रही है। पिछले दिनों बिहार के सांसदों का एक समूह भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन के नेतृत्व में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के मसले पर केन्द्रिय मंत्री जयराम रमेश से दिल्ली में मिला।बैठक के बाद जब सांसदगण जयराम रम... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   5:59pm 20 Mar 2012 #
Blogger: manish
Below is a joke on Chinese economy that is currently being circulated widely on Chinese social networks:  There is a village that only has one restaurant. Everyone in the village has to eat at that restaurant. ?Villager: Why cant we have more than one restaurant??Waiter: Our village is in a stage of development where more than one restaurant can lead to chaos, so we only have one restaurant. ?Villager: But the food here is really not good!?Waiter: Our restaurant has only been developing for a short time. Even if the food tasted worse than this, at least its our own food! ?Villager: But cant it be a little cheaper??Waiter: That would not suit the conditions of our village; the restaurant... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   2:57am 16 Sep 2011 #
Blogger: manish
This article was published in the Indian Express on April 8, 2011Dodging the DraftsBy Kaushiki Sanyal and C.V. MadhukarSocial activist, Anna Hazares fast unto death for the enactment of a strong Lok Pal Bill has provided an impetus to examine not only the Bill proposed by civil society activists but suggestions made by various experts.The idea of establishing an authority where the citizen can seek redress against administrative acts of the government was first mooted in 1963 during a debate on Demands for Grants for the Law Ministry. Under the existing system, a citizen can either move court or seek other remedies such as petitioning his Member of Parliament. However, these remedies are lim... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   2:16pm 20 Aug 2011 #
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हे श्याम सुंदर हे मुरलीधरकेहन बिगड़ल तकदीर देलउंहम बालापन के मित्र छलहुं खेललहुं-कुदलहुं संगे-संगेहे श्याम सुंदर हे मुरलीधर केहन बिगड़ल तकदीर देलहुंहम बालापन के मित्र छलहुंपढ़लहुं लिखलहुं संगे संगेअपने त्रिलोकीनाथ भेलहुं हमरा बखरा में भिख देलहुं... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   6:14am 7 Aug 2011 #
Blogger: manish
जय-जय भै‍रवि असुर भयाउनिपशुपति भामिनी मायासहज सुमति कर दियउ गोसाउनिअनुगति गति तुअ पायावासर रैनि सबासन शोभितचरण चन्‍द्रमणि चूड़ाकतओक दैत्‍य मारि मुख मेललकतओ उगिलि कएल कूड़ासामर बरन नयन अनुरंजितजलद जोग फुलकोकाकट-कट विकट ओठ पुट पांडरिलिधुर फेन उठ फोंकाघन-घन-घनय घ... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   5:31am 7 Aug 2011 #
Blogger: manish
वो मधुर बातें वो मधुर निंदियानिंदियों में तुमसा वो मधुर सपनासपनो में अपना अपनों मे तुम साअब नहीं हैं....न मधुर रातें न मधुर निंदियान मधुर सपना न मधुर चैना... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   6:57pm 24 Jul 2011 #
Blogger: manish
वह परेशान हैक्यों परेशान है यह किसी को नहीं पताबस परेशान हैअच्छी चीजें उसे अच्छी नहीं लगतींबुरी चीजों से उकताता नहींऐसा लगता है जैसे कुछ मरा हुआ होउसके अंदरया फिर मरता जा रहा होशांत सी लगती उसकी सांसों पर मत जाओवो तो चलती ही हैंटुटुर- टुकुर ताकतीउसकी आंखों पर मत जाओव... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   1:10pm 6 May 2011 #
Blogger: manish
विधायकों की खरीद-बिक्री की कहानी जब भी मैं समाचार पत्रों में पढ़ता हूं या फिर खबरिया चैनलों पर देखता हूं तो कई सवाल ज़हन में कौंधने लगता है....क्या कभी पूरी सरकार खरीदी जा सकती है ? यह मुद्दा यहां इसलिए है क्योंकि कर्नाटक में कुछ ऐसा ही तमाशा चल रहा है। सवाल यह है कि जब एक ... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   6:45am 11 Oct 2010 #
Blogger: manish
खोया-खोया लगता हैकुछ टूटा सा कुछ छूटा सा हर पल दिल में लगता हैक्यों फिर ऐसी हवा चली जब दिल उनको भूलने लगता हैक्या खोया और क्या पाया, ये गुत्थी सुलझ नहीं पायीजब लगता कुछ पाया हूं तब खोया-खोया लगता हैपाने और खोने की कशमकश मे सब कुछ दूर खड़ा पायाहाथ बढ़ाया पाने को, वो और दूर ... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   1:11pm 26 Sep 2010 #
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