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Blog: हल्द्वानी लाइव Haldwani Live

Blogger: govind singh
संस्मरण/ गोविन्द सिंह दिसंबर के आख़िरी दिन अर्थात ३१ दिसंबर, २०१३ को बाल मुकुंद नव भारत टाइम्स के वरिष्ठ सम्पादक पद से चुपचाप रिटायर हो गया. और रह रह कर याद आ रहा है उसका लिखा पहला व्यंग्य ‘मुन्ना बाबू के रिटायर होने पर’.तब हम लोग नभाटा,मुंबई में ट्रेनी थे. यह लगभग १९८३ क... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   4:59pm 10 Jan 2014
Blogger: govind singh
विवाद/ गोविन्द सिंहसचिन तेंडुलकर को भारत रत्न से नवाजकर सरकार ने जैसे बर्र के छत्ते में हाथ डाल दिया है. खेल की दुनिया बंट गयी है. राजनेता मुखर होकर कह रहे हैं, क्रिकेट से अरबों रुपये कमाने वाले खिलाड़ी को क्यों भारत रत्न दिया गया? बुद्धिजीवी कह रहे हैं कि जो शख्श उपहार मे... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   1:53pm 13 Dec 2013
Blogger: govind singh
निबंध/ गोविन्द सिंहधान की फसल कट चुकी है. खेतों में जगह-जगह रबी की फसल बोई जा रही है. कहीं-कहीं गेहूं की नन्हीं कोंपलें फूटने लगी हैं. काली-काली मिट्टी पर हरे छींट वाली चादर की तरह. सुबह टहलने जाता हूँ तो नन्हीं कोंपलों पर मोती सरीखी ओस की बूंदों को देख मन खुशी और विस्मय से ... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   6:21am 13 Dec 2013
Blogger: govind singh
शिक्षा/ गोविन्द सिंहजब दुनिया के २५० श्रेष्ठ विश्वविद्यालयों की सूची में पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ का नाम आया तो देश भर के शिक्षाविदों की आँखें फटी रह गयीं. जिस विश्वविद्यालय का नाम देश के अंदरूनी संस्थानों की सूची में ही कहीं न हो, कैसे उसने इतनी ऊंची छलांग लगाई? ... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   5:52am 11 Dec 2013
Blogger: govind singh
किताब/ गोविन्द सिंह अभी तक हम देवेन्द्र मेवाड़ी को एक विज्ञान-लेखक के रूप में ही जानते रहे हैं. हालांकि अपने आरंभिक वर्षों में उन्होंने कुछ कहानियाँ भी लिखी हैं, लेकिन बाद के वर्षों में उन्होंने खुद को विज्ञान गल्प और लोकप्रिय विज्ञान लेखन तक ही सीमित रखा. इस दौर में उ... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   5:39pm 9 Dec 2013
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राजनीति/ गोविन्द सिंहमहाभारत युद्ध के बाद जब कुरुक्षेत्र के आकाश में टंगे बर्बरीक के सिर से पूछा गया कि युद्ध कैसा रहा? उन्होंने आसमान से क्या-क्या देखा? किस योद्धा का प्रदर्शन कैसा रहा? तो बर्बरीक ने कहा कि मुझे तो एक ही व्यक्ति दिखा जो लड़ रहा था, वह था कृष्ण. बाक़ी लोग तो ... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   5:56am 9 Dec 2013
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हिन्दी दिवस/ गोविंद सिंह                 हिन्दी दिवस पर हम हर साल अपने देश में राजभाषा की स्थिति पर आंसू बहाते हैं, लेकिन उसका कभी कोई सकारात्मक असर आज तक नहीं दिखाई दिया है. यदि हिन्दी आगे बढ़ रही है तो वह अपने बाज़ार की वजह से बढ़ रही है. अपने सहज–स्वाभाव... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   8:33am 15 Sep 2013
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घटनाक्रम/ गोविंद सिंह किसी को भी कल्पना नहीं थी कि मौसम की पहली बरसात ही हज़ारों-हज़ार लोगों की जीवन लीला समाप्त कर देने वाली विभीषिका साबित होगी.१५-१६-१७ जून को उत्तराखंड में हुई भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं के कारण मरने वालों की संख्या २०० से बढ़ कर दस हज़ार तक पहुँ... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   5:47pm 3 Jul 2013
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भाषा समस्या/ गोविंद सिंहयह महज एक संयोग ही है कि एक तरफ सुप्रीम कोर्ट ने राजभाषा हिन्दी को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जबकि दूसरी तरफ न्यायपालिका और प्रशासन में भारतीय भाषाओं को लागू करने की मांग को लेकर राजधानी दिल्ली में दो बड़े धरने चल रहे हैं और देश के कोने-को... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   3:34pm 20 May 2013
Blogger: govind singh
 मेरे साले जगत मेहता ने फेसबुक के अपने और मेरे पेज पर दो पुराने फोटो चस्पां कर दिए, जिनमें मैं, मेरी पत्नी द्रौपदी और बेटा पुरु हैं. ये फोटो १९८८ में दार्जीलिंग के हैं. बहुत सारे मित्रों ने कहा यह बहुत अच्छा फोटो है. भाई अतीत हमेशा ही अच्छा लगता है, चाहे वह कितना ही बुरा क... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   5:50pm 9 May 2013
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प्रेस स्वाधीनता दिवस/ गोविंद सिंहज्यों-ज्यों हम आगे बढ़ रहे हैं, सभ्य हो रहे हैं, प्रेस पर जकडबंदी बढ़ती जा रही है. यह जकडबंदी किसी एक कोने से नहीं बल्कि समाज के चारों कोनों से हो रही है. कहते सब हैं कि प्रेस आज़ाद होनी चाहिए, लेकिन जब बात अपने पर आती है तो कोई उसे आजादी नही... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   10:53am 5 May 2013
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अंधेर नगरी/ गोविंद सिंह यदि आपके मन में कभी यह सवाल उठता हो कि नरक कैसा होता होगा तो कृपया एक बार सड़क मार्ग से रामपुर- बिलासपुर होते हुए नैनीताल आइए. बिलासपुर से रुद्रपुर की दूरी महज १८ किलोमीटर है. यदि रेल से आयें तो यह दूरी दस मिनट में कवर होती है और बस के हिसाब से १६ मिनट ... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   5:17pm 19 Apr 2013
Blogger: govind singh
भाषा की राजनीति/ गोविंद सिंहदलीय सरहदों को लांघ कर संसद में भारतीय भाषाओं के पक्ष में विभिन्न राजनेताओं को बोलते देखना सचमुच सुखद आश्चर्य की तरह था. दक्षिण भारत के नेता अब तक हिन्दी के विरोध में तो बोलते थे, पर बदले में वे अकसर अंग्रेजी का समर्थन कर बैठते थे. लेकिन इस बा... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   6:27pm 21 Mar 2013
Blogger: govind singh
विमर्श/ गोविंद सिंह अमेरिकी लेखक मार्क ट्वेन ने लिखा है, ‘भारत मानव जाति का अवलम्ब है, मानवीय आवाज की जन्मभूमि है, इतिहास की जननी है, महान गाथाओं की दादी है, परम्पराओं की परदादी है. भारत सचमुच मानव इतिहास की सबसे मूल्यवान चीजों का खजाना है.’ इतना सब होते हुए भी भारत स्वयं ... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   1:24pm 20 Jan 2013
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शिक्षा/ गोविंद सिंहभारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के बाद भारतीय प्रबंध संस्थानों ने भी अपनी फीस बढाने की घोषणा कर दी है. जहां प्रौद्योगिकी संस्थानों ने वार्षिक फीस 50हज़ार से 90हज़ार कर दी है, वहीं प्रबंध संस्थानों ने भी 2009 की तुलना में तीन गुनी अर्थात 5 लाख से 15 लाख कर द... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   3:44pm 19 Jan 2013
Blogger: govind singh
शिक्षा/ गोविंद सिंहवर्ष 2012 मेंभारतीय शिक्षा का फलक विस्तृत हुआ है, लेकिन उसकी गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं दिखाई देता। देश में विश्वविद्यालयों की संख्या 450 से बढ़ कर 612 हो गई है। कालेजों की संख्या भी 33 हजार को पार कर गई है। लेकिन विश्व स्तर पर हुए सर्वे में इस साल एक भी भारत... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   10:34am 28 Dec 2012
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राजनीति/ गोविंद सिंह अरविंद केजरीवाल और उनके साथियों के राजनीति में उतरने के फैसले को किसी गुनाह की तरह से नहीं, एक जनांदोलन की स्वाभाविक परिणति के रूप में देखा जाना चाहिए। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब भारत की जनता पारंपरिक राजनीति से आजिज आ चुकी है और शिद्दत से विक... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   2:35pm 16 Oct 2012
Blogger: govind singh
ललित निबंध/ गोविंद सिंह                                          घुघूती-बासूती. यानी घुघूती का वसंत गान. चैत का महीना शुरू होते ही घुघूती का गायन शुरू हो जाता है. कभी घुघूघू तो कभी घुर्रर्र- घुर्रर्र! वह जैसे समस्त पहा... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   2:17pm 16 Oct 2012
Blogger: govind singh
हिन्दी दिवस/ गोविंद सिंहइन दिनों पश्चिमी दुनिया में रह रहे भारतीय और पाकिस्तानी मूल के युवाओं में अपनी भाषा को लेकर एक नयी चेतना जाग रही है. वे हिन्दी और उर्दू को मिलाकर ‘हमारी बोली’ नाम से एक नयी भाषा को स्थापित करने के लिए दुनिया भर में आंदोलन छेड़े हुए हैं. वे व्यक्ति... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   8:26am 13 Sep 2012
Blogger: govind singh
बौद्धिक जगत/ गोविंद सिंह  भलेही फरीद ज़कारिया को टाइम पत्रिका ने फिर से स्तंभकार की नौकरी पर रख लिया हो, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर साहित्यिक चोरी की हमारी राष्ट्रीय बीमारी की तरफ ध्यान आकर्षित किया है. इसमें कोई दो राय नहीं कि फरीद ज़कारिया देश के अत्यंत प्रतिभाशाली औ... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   5:08pm 23 Aug 2012
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