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काले अक्षर

काले अक्षर: नवसृजन महोत्सव दिल्ली २०१६ (अखिल भारतीय कवि सम्मले......
काले अक्षर...
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  July 30, 2016, 12:28 pm
एंकर बोली इस चैनल में सच ज्यादा है.कहीं न जाना खबर दिखाने का वादा है.एक खबर पर दो घंटे का हल्ला काटा,बोली फिर विज्ञापन की थोड़ी बाधा है.पांच मिनट में लौट के आई, बैठे रहना.अब तक जो तुमने देखा वो सच आधा है.दो घंटे में ही दिमाग का दही बन गया,मट्ठा बनाके छोड़ेंगे, ये आमादा है.अब भी ट...
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  December 24, 2013, 5:51 pm
फूलों की खुशबू,बारिश की बूंदों का नृत्य,आँगन में चहचहातीचिडियाँ की चूं-चूंकोयल की कूँ-कूँशाखों पर लचकते आमों कीअंगड़ाई को महसूस करना उतना ही जरुरी हैजितना पेट की भूख और प्यास....प्रेम के तमाम एहसासों कोकागजों पर उडेलना उतना ही जरुरी हैजितना घर की दीवारों परसुन्दर तस्व...
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  December 23, 2013, 4:58 pm
यह साल भी खत्म हो गयाजलती हुई सिगरेट की तरहथोड़ी सी आग साँसोँ मेँ घुलीबहुत सारा धुँआ बाहर निकला ठुड्डियाँ बची हुई हैँराख के ढेर मेँओँठोँ पे रखे हुए ठंडे शब्दोँ को जलाने के लिए... (बूँद)...
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  December 23, 2013, 4:48 pm
रातभर ओले पड़ते रहे,टीन की छत-ढोल-नगाडों की तरह,जश्न मनाती रही तबाही का...सुबह हुई तो देख रहा हूँ-पेड़ों की तमाम पत्तियां टूट कर आँगन में बिखरी पड़ी हुई हैं,कल तक जो सब्जी के पौधे क्यारियों में, कतारों में खड़े होकर लहलहाया करते थे-आज रोनी सी सूरत लेकर उदास बैठे हैं....इधर तो बस उ...
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  December 23, 2013, 4:42 pm
लिखो,शब्दों के ताने बाने से समाज का दर्द,लोगों ने तुम्हारे शब्दों में चित्रकारी देखने का हुनर सीख लिया है.लिखोसमाज की कड़वी सच्चाई,पाठकों को अब करेले का स्वाद मीठा लगने लगा है.करो तंज,व्यवस्था पर, कुरीतियों पर,लोग खाने में तीखी मिर्च लेने के आदी हो गए हैं.क्या अब भी कुछ ब...
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  December 23, 2013, 4:38 pm
सुना हैतेरे शहर सेहर रोज गुजरती हैतेरी साँसोँ कीखुशबू से मचलती हैअपनी धुन मेँ गाती हुईथिरकती चली आती हैतेरे शहर मेँहर रोजऔर सुना हैआवाज देती है तुम्हेँऔर तुम्हेँ न पाकरलौट जाती हैकाठगोदाम एक्सप्रेस...!................."बूंद"...
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  December 23, 2013, 4:29 pm
http://youtu.be/iCzCzkd1RQ8 window.fbAsyncInit = function() { // init the FB JS SDK FB.init({ appId : 'YOUR_APP_ID', // App ID from the app dashboard status : true, // Check Facebook Login status xfbml : true // Look for social plugins on the page }); // Additional initialization code such as adding Event Listeners goes here }; // Load the SDK asynchronously (function(){ // If we've already installed the SDK, we're done if (document.getElementById('facebook-jssdk')) {return;} // Get the first script element, which we'll use to find t...
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  April 28, 2013, 7:43 pm
https://www.facebook.com/photo.php?v=595553330464511...
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  April 28, 2013, 7:14 pm
रूसीकविसेर्गेईयेस्येनिनकीएककविताकीपंक्तियोंकाकुमाउनीऔर गढ़वाली मेंअनुवाद.-------------------------------------------हिंदीअनुवाद :--------------कविहोनाऐसाहैजैसेजीवनकेप्रतिनिष्ठारखनाहरमुश्किलमेंमानोखुदअपनीउधेड़करकोमलचमड़ीदेनालहूउड़ेलअन्यलोगोंकेदिलमें....!------------------------कुमाउनीअनुवाद :------------------...
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  April 22, 2013, 2:34 pm
ये अंतहीन बहसकिस मुकाम पर जाकर खत्म होगीवक्त और वस्त्र की रेखाएं खींचकरवजह को छुपाने का खेल बेहद खतरनाक है.और उतना ही खतरनाक है यह कहना कि “समाज में महिलायें महफूज़ नहीं नहीं हैं....” यह गुवाहाटी नहीं है,और न ही मणिपुर,न यह मध्य प्रदेश है, न झारखण्ड, छत्तीसगढ़और न ही दिल्ली.....
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  February 11, 2013, 9:02 pm
उनके तम्बू, उनका चिंतन, उनके झंडे, उनकी चाल.उनका मोदी, उनका राहुल, उनके पंजे, उनका जाल.न्यूज चैनल उनपे बोलें, उनका पेशा, उनका धंधा,उनका पी.एम., उनका सी.एम., उनका पैसा, उनका माल.तुमको क्यों ये फ़िक्र है मोदी हो या राहुल निजाम,उनकी सत्ता, उनके मंत्री, हम क्यों नोचें अपनी खाल.उनकी च...
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  February 11, 2013, 9:00 pm
ख़्वाब अधूरे, दुनियां पूरी, मायूसी तो खलती है.सुबह उजाला कितना लाये, शाम तो यूँ ही ढलती है.ख़्वाब हैं झूठे, यूटोपिया है, यकीन जिंदा है फिर भी, रोज़ ही नारे लगते हैं और रोज़ मशालें जलती हैं.ख़्वाब बेचकर बहुतों ने तो बंगले-कोठी बना लिए,ख्वाब की उम्मीदों में गरीबी आज भी आँखें मलती ...
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  February 11, 2013, 8:57 pm
राग यमन कल्याण की उठती-गिरती सरगम, लहराती बर्फीली हवाओं की सरगोशी, उबड़-खाबड़ सड़कों के गड्ढे, थकान और सुकून की अनुभूति, अथक जीविका की जिजीविषा, हताशा-निराशा और जीवन की जटिलताओं से सामंजस्य, उम्मीदों और टूटते ख़्वाबों का तिलिस्म ही नहीं, बल्कि सबसे अधिक ऊंचाई पर होने के गौर...
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  February 11, 2013, 8:55 pm
सूरदास लिख रहे हैं अब कबीर चाहिए.खून खत्म हो रहा है अब अबीर चाहिए.आँख, कान, होंठ तो चुपचाप लौट आ गए.घर की दीवारों को कलम और तीर चाहिए.होंठ में ताकत कहाँ जो बात सच्ची कह सके,मूक-बघीरों को तो काली लकीर चाहिए.गली में जलती हुई इक झोपड़ी की आंच में,पकने वाली भावना को शब्द खीर चाहिए...
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  February 11, 2013, 8:51 pm

आओ पहाड़ आओ,अपने कैमरे साथ ले आनाझोड़ा-चांचरी, छोलिया नृत्य,सातूं-आठूं, जागर,सब कैद कर ले जाओ,दो-चार बूढ़ी हड्डियां तुम्हें हर गांव में मिल जाएँगी,जिनके साथ तुम थोड़ी देर हुक्का गुडगुडा सकते हो,दो-चार मडुवे की रोटियां तोड़कर उनके साथ तुम वो सब उगलवा सकते होजो तुम्हें अपनी कि...
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  June 5, 2012, 6:59 pm
आओ,पहाड़ आओ,टूटी-फूटी सड़कों ने अपने ज़ख्म भर लिए हैं,तुम्हारी गाड़ियों के टायरों को अब थकान महसूस नहीं होगी,पहाड़ इतना भी बेशर्म नहीं हैकि तुम्हारा ख्याल न रखेआओ,पहाड़ बेचैन है,तुम्हारी यात्राओं का वर्णन सुनने के लिए,न जाने कितनी बार तुम पहाड़ की छाती पर टहलते हुए निकले,अस्क...
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  May 23, 2012, 8:47 pm
         आओ इस बार काफल खूब पके हैं,हिसालू-किलमोड़े,तुम्हारी राह देखे हैं,मिलम, पोंटिंग, दारमा, व्यास घाटियां,तुम्हारे क़दमों के निशां याद कर रही हैं,बहुत अरसा हो गया,तुम नहीं आये,हिमालय की बर्फ पिघलने लगी हैरोज बच्चे आ जाते हैं,सडकों पर काफल बेचने के लिए,उन्हे...
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  May 23, 2012, 8:43 pm
एक उम्र बीत गयीसापों को गाली देते हुए,गिरगिट घूर रहे हैं,कौवे उड़ रहे हैं सर के ऊपर,सांप हमेशा सभ्य थे,नगर कभी नगर था ही नहीं,जंगल ही था, और है...गिरगिटयों ही रंग नहीं बदलते,ऐसा करना पड़ता है उन्हें,जिंदा रहने के लिए कौवे की कांव-कांव हमें हमेशा ही बुरी लगी,इसमें कौवों का कोई द...
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  May 22, 2012, 9:52 am
नेताओं ले देश मेरो बुकै हैलोभारत माताक शीश झुकै हैलोधर्म, जाति आड़ लिबे, दंग यो करुनीएक भै कैं दूसर भैक दगाड यो लडूनी  मारकाट करी दिल दुखै हैलोभारत माताक शीश झुकै हैलोमहंगाईक मार हैगे, जनता बीमार रैगेपाणी लै बेचाण भैगो, प्यास आब प्यास रैगेजनताक धन क्वाड लुकै हैलोभारत ...
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  May 7, 2012, 1:16 pm
 A whim of the cool air,loves me with great care.Its kiss in a stimulant way,gives me a pleasure of the day.The song of the lovely air,is sweet, cozy & fair.The dance of my loving dear,is snazzy, sexy & queer.The flow of the cool air,is a lovely feeling aye.and whenever it touches me,it seems an erotic play.*****“Boond”Dt. 03.03.05,Pithoragarh...
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  May 7, 2012, 12:47 pm
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