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- वीर विनोद छाबड़ाकोई पैंतीस साल पहले की बात है। हम लखनऊ में कुटिया बनवा रहे थे। तब से अब तक इसमें कई बदलाव हुए हैं। कई मिस्त्रियों और मज़दूरों ने पसीना बहाया है। और हमारा तो खून और पसीना दोनों बहा है। दीवारें बोलती होतीं तो ज़रूर बतातीं कि इस मकान की पहली तामीर वली मोहम्मद ...
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  February 20, 2017, 6:29 pm
-वीर विनोद छाबड़ापुत्र जब बड़ा होकर कमाना-धमाना शुरू कर देता है तो माता-पिता को उसकी शादी की फ़िक्र लगनी शुरू होती है। हमारे माता-पिता भी उससे अलग नहीं थे। लेकिन हम एक-दो साल और स्ट्रगल करना चाहते थे। ज़बरदस्ती एक लड़की दिखाई। हमने फिर वही कहा- लड़की अच्छी है। लेकिन हमें दो साल...
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  February 19, 2017, 6:47 pm
- वीर विनोद छाबड़ाप्रेम के मामले में दिलीप कुमार की लाईफ़ रील में ही नहीं रीयल में भी त्रासद रही है। फिल्म में जान डालने के लिए वो अपनी नायिकाओं के इतने करीब चले जाते थे कि कई को सचमुच ही दिल दे बैठे। कामिनी कौशल उनका पहला प्यार था। कामिनी ने चालीस के दशक में लाहोर यूनिवर्स...
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  February 18, 2017, 6:09 pm
-वीर विनोद छाबड़ाबाज़ तलब बड़ी ख़तरनाक होती हैं। अजीब हरकतें करने को मजबूर करती हैं? मैं १९७० की सर्दियों में राजस्थान के बीकानेर शहर में ब्याही अपनी बड़ी बहन से मिलने जा रहा था। मैं बी.ए. में था तब।उस दिन तो बलां की सर्दी थी। ट्रेनों में सन्नाटा था। लखनऊ से दिल्ली और फिर वहा...
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  February 17, 2017, 6:32 pm
-वीर विनोद छाबड़ातात्या टोपे का जन्म १८१४ में नासिक में हुआ था। १८१८ में मराठा पेशवाई का अंत हो गया। पेशवा बाजीराव-दिवित्य को आठ लाख रुपए की पेंशन देकर बिठूर भेज दिया गया। तात्या टोपे के पिता पांडुरंग पंत बाजी राव के  दरबार में महत्वपूर्ण पद पर थे। तात्या टोपे का असली ...
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  February 16, 2017, 6:19 pm
- वीर विनोद छाबड़ा परदे के सामने की कहानी जितनी मज़ेदार होती है, परदे के पीछे कहीं ज्यादा लुत्फ़ मिलता है। ऐसा ही किस्सा है नासिर हुसैन और देवानंद और फिर शम्मी कपूर और नासिर हुसैन की दोस्ती का। यह बात पचास के दशक की है। तब फिल्मिस्तान कंपनी के लिए नासिर हुसैन फ़िल्में लिखा...
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  February 15, 2017, 7:02 pm
-वीर विनोद छाबड़ासुकरात के बारे में तो सबने सुना है। गुरुओं के गुरू - अफ़लातून। ऐसी कोई समस्या नहीं जिसका हल इनके पास नहीं था। सबको संतुष्ट करके ही वापस करते। जानते-बुझते हुए भी ज़हर का प्याला पी गए थे। एक दिन एक शिष्य ने पूछा - गुरू जी आपका भी कोई गुरू होगा। सुकरात ने कहा - हा...
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  February 14, 2017, 10:08 pm
- वीर विनोद छाबड़ाहमारे मित्र ने इकलौते बेटे को बड़े लाड़-दुलार से पाला-पोसा। अच्छी शिक्षा दी। उसे अपने दम पर बढ़िया नौकरी मिली। दुनिया की सबसे अच्छी लड़की तलाश कर उसकी शादी की। लाखों का दहेज़ मिला। बहु क्या आई मानों लक्ष्मी आई। एक पुरानी पड़ी ज़मीन का सौदा हो गया। कौड़ियों के भ...
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  February 13, 2017, 8:19 pm
- वीर विनोद छाबड़ाझाड़ू...झाड़ू...झाड़ू ले लो। द्वार पर झाड़ू बेचने वाले की आवाज़ है। हमारी पहली प्राथमिकता यही रहती है कि इसी से झाड़ू खरीद लें। लेकिन बेचने वाले के दावे के बावजूद इनमें क्वालिटी नहीं होती है। मजबूरन हमें झाड़ू के लिए बाज़ार जाना पड़ता है। लेकिन कुछ मित्रों लोगों क...
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  February 12, 2017, 5:57 pm
-वीर विनोद छाबड़ाये उस दौर की कथा है जब पचास का नोट आज के पांच सौ के बराबर था। छुन्नू बाबू मुहं में चांदी का चम्मच रख पैदा हुए थे। इतनी दौलत थी कि सात पुश्तें दोनों हाथ से लुटाएं तब भी कम न हो। खूब उड़ाया-खाया। पढाई-लिखाई में जीरो-जीरो। लेकिन नो फ़िक्र। दौलत आदमी विलासता की और...
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  February 11, 2017, 12:10 am
- वीर विनोद छाबड़ा आज हमें न जाने क्यों दद्दा याद आ रहे हैं। लखनऊ की चारबाग़ मल्टीस्टोरी में हम तिमंजिले पर रहते थे और वो नीचे दुमंजिले पर, अपने पैरेंट्स के साथ। उनके पिताजी रेलवे में गार्ड थे। घर में सबसे बड़ी संतान थे। इसीलिए उन्हें सब दद्दा कहते थे। बल्कि उनका नाम ही द...
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  February 9, 2017, 11:59 pm
- वीर विनोद छाबड़ादो राय नहीं हो सकती कि मीना कुमारी हिंदी सिनेमा की बहुत बड़ी स्टार थीं। ट्रेजेडी क्वीन कहलातीं थीं वो। कल तक वो तो हर एक्ट्रेस के लिए आइकॉन भी हुआ करती थीं। सिर्फ परदे पर ही उन्होंने दुःख नहीं सहे, उनकी निजी ज़िंदगी में भी बहुत उथल-उथल रही। वस्तुतः वो चैन स...
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  February 9, 2017, 1:48 am
- वीर विनोद छाबड़ापड़ोस में रहने वाला बच्चा आज फिर बुरी तरह पिटा। कारण था - नवें दरजे में फेल होना। पढाई में मन ही नहीं लगता उसका। दिन भर क्रिकेट खेलना और इधर-उधर आवारागर्दी करना। स्कूल से भी फ़रार रहता है अक़्सर। तीन साल हो गए हैं फेल होते हुए। स्कूल वाले कहते हैं आपके बच्चे ...
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  February 8, 2017, 1:51 am
-वीर विनोद छाबड़ारेलवे स्टेशन के आस-पास रहने के अपने मज़े हैं और दुःख भी। हम तो २२ साल रहे हैं। बचपन से जवानी तक के बेहतरीन साल। स्टेशन के ठीक सामने रेलवे की मल्टीस्टोरी बिल्डिंग में। हम कुछ एक्स्ट्रा ही खुशकिस्मत रहे। सामने उत्तर रेलवे और दायें बाजू पूर्वोत्तर रेलवे। औ...
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  February 6, 2017, 11:53 pm
- वीर विनोद छाबड़ाबीए तो १९७१ में कर लिया था, लेकिन डिग्री दो साल बाद मिली। फ़ौरन पहुंच गए अपने दोस्त सुरेश विग के स्टूडियो - मेलाराम एंड संस। उस ज़माने में गाऊन हर स्टूडियो में मौजूद रहता था। हो गयी फोटो क्लिक। माता-पिता को बड़े गर्व से कहने का मौका मिला - जी हमारा पुत्तर बीए ...
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  February 6, 2017, 2:11 am
-वीर विनोद छाबड़ा३० से लेकर ८० तक के दशक में सिनेमा हाल ठसाठस भरे रहते थे। ९० के दशक में वीसीआर और पायरेटेड विडियो कैसेट्स ने सिनेमा जगत में भारी उथल-पुथल मचाई थी। सिनेमा देखने वालों की संख्या घटने लगी थी। लेकिन इसके बावज़ूद  मनोरंजन का एक मात्र साधन सिनेमा ही हुआ करता थ...
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  February 4, 2017, 11:47 pm
-वीर विनोद छाबड़ाहमने जब होश संभाला तो बड़ा हैरां हुआ और परेशां भी। यह कैसा नाम है? क्या सोच कर नाम रखा था माता-पिता ने? मां ने बताया था सारे रिश्तेदार भी  हक़ में नहीं थे। यह भी भला नाम है? अरे वीर रखते या विनोद। दोनों को मिला क्यों दिया? एक किवदंती और भी सुनी। पैदा हुआ था गोल-...
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  February 3, 2017, 11:29 pm
- वीर विनोद छाबड़ाबचपन और किशोर अवस्था की ज्यादातर बातें हम भूल जाते हैं। लेकिन एक-दो यादें यदा-कदा गुदगुदी करती रहती हैं। १९६५ की बात है। हम १४ प्लस थे। भोपाल में हम मामा के घर गर्मी की छुट्टियां मना रहे थे। छोटा ताल और बड़ा ताल हमें बहुत लुभाता था। तक़रीबन रोज़ ही सुबह टहलन...
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  February 3, 2017, 12:31 am
- वीर विनोद छाबड़ाहैप्पी बर्थ डे! कहते हुए बहुत सुंदर ध्वनि निकलती है, ठीक वैसे ही जैसे - आई लव यू। अपने धुर विरोधियों को भी लोग हैप्पी बर्थ डे कहना नहीं भूलते। उस दिन सब एक-दूसरे पर फ़िदा दिखते हैं। फेस बुक पर तो उन लोगों के बीच हैप्पी डे की शुभकामनाओं का आदान-प्रदान होता है ...
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  February 2, 2017, 12:34 am
- वीर विनोद छाबड़ाचिट्ठी के नाम पर हमें एक मज़ेदार किस्सा याद आता है। हमारी बड़ी मामी हिसाब में बहुत तेज़ थीं। मगर पढ़ने-लिखने में तक़रीबन सिफ़र। कोई पढ़ा-लिखा घर आया तो एक साथ दस-पंद्रह पोस्टकार्ड लिखवा लेती थीं। सबमें एक ही इबारत। सिर्फ़ तारीख़ ताज़ा डाल कर वो हफ़्ते-दस दिन पर रिश...
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  February 1, 2017, 1:54 am
-वीर विनोद छाबड़ाहमारे मोहल्ले के सेवक राम एक बड़े वकील के मुंशी थे। इसीलिये उनके अड़ोसी-पड़ोसी, मित्र और तमाम रिश्तेदार भी उन्हें मुंशीजी कहते थे। यों मुंशीजी थे बहुत काबिल। वकील साहब ने उनकी नेक सलाह मान कर कई बार पेचीदा मुक़दमे जीते। अगर उनके पास डिग्री होती तो ज़रूर नाम...
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  January 30, 2017, 11:46 pm
- वीर विनोद छाबड़ामित्र आया - ख़ुशख़बरी है भाई। हमारी शादी तय हो गयी है। इलाहबाद जानी है बारात। तैयार रहना। खूब डांस करना है तुम्हें। हम खुश हुए। कई दिन से नया जूता खरीदने की सोच रहे थे। न मनपसंद सही। लेकिन इतनी रकम तो है ही कि साधारण जूता तो ख़रीदा ही जा सकता है। मौका भी है और ...
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  January 30, 2017, 12:15 am
-वीर विनोद छाबड़ाइस धरती के सबसे बड़े कॉमेडियन चार्ली चैपलिन से बेहद प्रभावित थे राजकपूर। वो अक्सर एक ऐसी फिल्म का सपना देखते थे जिसमें उनकी नाकामियां भी थीं और कामयाबियों भी। साथ ही सुनहरा भविष्य भी। कुल मिला कर आत्मकथ्य। इसका नाम भी उन्होंने प्रचारित कर रखा था - मेरा ...
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  January 28, 2017, 11:50 pm
- वीर विनोद छाबड़ा सुंदर लेखनी का अपना महत्व है। यों हस्तलिपि विशेषज्ञ लिखावट की बनावट देखकर लिखने वाले का मिज़ाज़, भूत, वर्तमान और भविष्य भी बता देते हैं। लेकिन हमारा तो सिंपल सा मंतव्य है कि सुंदर लिखावट पढ़ने वाले का मन मोह लेती है। यदि आपने उनके मन के विरुद्ध भी कुछ लि...
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  January 28, 2017, 12:06 am
-वीर विनोद छाबड़ासरकारी नौकरी में एक अघोषित पद है - जापानी अफ़सर। अक्सर होता है कि अफसर रिटायर हो गया। उसकी जगह किसी अन्य का चयन नहीं हो पाया। तो ऐसी स्थिति में जो सबसे सीनियर होता है उसे अफसर का चार्ज मिल जाता है, और वो तब तक उस सीट पर रहता है जब तक कि चयन समिति योग्य कैंडिडे...
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  January 27, 2017, 12:43 am
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