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Blog: कुछ सोचा कुछ बाकी है

Blogger: Anil pandey
मजबूरियाँ ही है एक को एक से मिलाती हैं मजबूरियाँ ही है , एक को एक दूसरे से दूर ले जाती हैं समझ नहीं आता मजबूरियाँ ये कहाँ से आती हैं हर किसी को स्वयं में  उलझाए इतनी ऊर्जा वह और कहाँ से पाती है संतो के गलियारों से बधिक के हथियारों से गुजरती हुई टकराती ... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   12:01pm 5 Mar 2013 #
Blogger: Anil pandey
प्यारजो पलता रहा ह्रदय मेंदिये सा जलता रहालौ आशा कीसजाती रही स्वप्न भूमिऔरयथार्थ बराबर खलता रहासमयदिन दोपहर  घंटेबदलता रहा बदलता रहाबढ़ता रहा विश्वासबांधती रही आशऔरह्रदय मचलता रहातुम जो तुम रहेमै  जो मै  रहाभेद न सका दीवार यहधीरे धीरे दूर तुम दूर मै एक दूसरे स... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   11:06am 28 Feb 2013 #
Blogger: Anil pandey
(हिंदी साहित्य सम्मलेन , प्रयाग , और हिंदी साहित्य अकादेमी दिल्ली के सयुंक्त प्रयास से बीते दिनों इलाहबाद में ''केदारनाथ अग्रवाल के जन्मशती वर्ष पर'' पर आयोजित दो दिवशीय सम्मलेन पर पठित कविता .)ओ कविएक बार तुम फिर आओहै रो रहा मानव जहां परहै सो रहा मानव जहा परजो खो रहा विश्... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   12:36pm 10 Oct 2012 #
Blogger: Anil pandey
मानव जीवन , एक रहश्यात्मक पहलू होता है . यथार्थता मात्र एक आवरण भर . यही कारन  है कि समझना चाहा है सभी ने इसे . कोई किसी रूप में तो किसी रूप में . पर गति सब की वही . सत्य सबकी वही खड़ा रहता है सबके सामने जीवन एक धुंधले क्षितिज  का सा पर्दा लटकाए . पहनाये हर किसी को एक बुर्का , जिस... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   1:19pm 19 Sep 2012 #
Blogger: Anil pandey
आता नही समझ करें क्या  हिंदी दिवस आज हैहैं पूर्ण ना स्वतंत्र हम  न पूर्णतः स्वराज हैअँधेरे में ही बीता कल  अँधेरे में ही आज हैंकल का कुछ पता नहीं शंकाओं का सरताज हैभाषा वहीं समृद्धि है   जनता जहां प्रबुद्ध हैहै नवीनता वहीं जहां  पुरातनता विशुद्ध हैअवरुद्... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   12:04pm 12 Sep 2012 #
Blogger: Anil pandey
हम सा भला न कोय है , ना हममे कोई दोष  .लक्ष्य एक हिंदी समृद्धि , सबतों बढ संतोष ..यह बसत सब ह्रदय में  सब इसमे ही समायसुगम मृदुल शुभ सरिस यह , सद्रिस न दूजा भाय ..जन-मन-हृदय जे बसतु , जानत यहू संसारसकल समृद्धि सुवासिनी , हिंदी अभिव्यक्ति सार ..देखहु जगत में देखि के , भाषा कै  व्... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   11:47am 12 Sep 2012 #
Blogger: Anil pandey
उठो, बढ़ो , ऐ युवा साथियोंन  समय और बर्बाद करोघिरे हुए किस विचार-कुञ्ज मेंजन जीवन हित कुछ काज करोहै जरूरी आज उठसमय को पहचानकरदे बदल समाज तुमस्वयं को कुछ मानकरसोते रहे , गर जागे नहींपीछे बहुत रह जाओगेबढ़ जाएगा दुनिया जहांमुंह की वहां तुम खाओगेसोच लो फिर क्या मिलेगावह स्... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   11:26am 12 Sep 2012 #
Blogger: Anil pandey
जीवन मानवीय पृष्ठभूमि की एक ऐसी कड़ी  है जिसमें प्रकृति ने जो कुछ भी दिए है मानव को मानवीयता के सन्दर्भ में , आवश्यक हो जाता है . उसमे से किसी एक की कमी या अभाव जहां उस जीवन को नारकीय बना देती है वहीं यह प्रश्न चिन्ह भी लगा देती है , क्या वह मानव कहलानें का अधिकारी है ? क्यो... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   12:02pm 23 Mar 2012 #
Blogger: Anil pandey
सुबह चला सूरज उगा कलियाँ खिलकर छा गयीतेजस्विनी किरणे  दिनकर कीमन मंदिर तक आ गयीउठो प्रिये ! प्रात पुण्य काप्रेमपूर्ण  संवाद  करो पुष्पित हो पल्लवित धरा येन समय और बर्बाद करो ...... . ... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   1:01pm 15 Mar 2012 #
Blogger: Anil pandey
ये दुनिया अजीब हैसब कुछ होता है नयासिवाय पुराने के बगैरबदलती है रोज तस्वीर नगर कीबनती एक दीवाल जब घर कीछत की चाहत ने किया मटियामेटनगरीकरण की अभिलाषा को सिवाय किसी अच्छा के बगैर .....    ... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   12:54pm 15 Mar 2012 #
Blogger: Anil pandey
क्यों चिढ गयेनाराज क्यों हो गये मुझसेपरंपरा को वहन नहीं करना थानहीं किया हमनेलीक से हटकरन सिमटकर बचपना तकयुवापन का मार्ग वरण किया हमनेबुरा क्या किया ?रोज ही तो चला थामाना था अभी तक कहा तुम्हाराआज नहीं चला उस मार्ग परलगा कोई और रास्ता प्याराकाट लिया क्यों दुखी हो मुझ... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   12:51pm 15 Mar 2012 #
Blogger: Anil pandey
इन फूलों की कौन कहेंजो पा मौसम मदमाते हैंअपनी सुन्दर काया सेमानव मन हरसाते हैंलोभ रूप संवरण का ऐसालालच पुष्प की भंवर को जैसाफिर चिंता कैसी डर और कैसापाओ जैसी खींचो वैसारूप रहे न मिलेगी कायायहि जीवन  का नाम ही माया ऐसा ही कुछ नियम सृष्टि काभाग्य सभी आजमाते हैंदेख र... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   11:23am 13 Mar 2012 #
Blogger: Anil pandey
याद आता हैबतलाना उनकाव्यवहार भाव आदर काखाट छोड़ धीरेगोड्वारी से  सिरहाने तकसरक जाना उनकायाद आता हैपूछना हाल चालढंग से मुस्कुराना ,हँसना, नत नयन कर पाय लागी पंडित जी कहनाहलके से सिर को झुकाकर      रूप उनका आ जाता हैसामने पूरा का पूराऔर मैं .....सोचता रह जाता हूँ तबक्... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   11:15am 13 Mar 2012 #
Blogger: Anil pandey
मुबारक , शुभकामनाएंतरुण , वृद्ध , जवानों कोसफल किए अभियान चुनावीउन मेहमान जान अनजानों कोसाफ रखा सब स्वच्छदूर किए जो दानव कोकोटि कोटि धन्यवाद् उसआयोग रुपी मानव कोसमझ बूझ दृढ सत्य संकल्पितशिष्ट क्लिष्ट प्रण पूर्ण समर्पितलोभ मोह लालच कर खंडितभ्रष्ट नष्ट जो अवनीति अवल... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   11:04am 13 Mar 2012 #
Blogger: Anil pandey
हिन्तित मत हो परिवर्तन का दौर हैकल कोई और था आज कोई और  हैहैयही क्रम बराबर हो जीवन में हमारेगया जो और था आया जो और हैरखना जरुर ख्याल इतनी सी बात काकभी सुबह दोपहर तो कभी शाम होगापलटकर देखोगे अपने जीवन के पन्ने कोसबसे पहले दर्ज वहां मेरा नाम होगा ........ Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   11:32am 2 Mar 2012 #
Blogger: Anil pandey
कोई चले मोटर पर कार , ऑटो, स्कूटर किसी को प्यारी है कोई ढोता रिक्शे पर दिन भर सवारी हैबैठ शाम घर कोई कहता युग की मंहगाई ने हमको मारी है कोई बैठ फूटपाथ पर रोता दुनिया में एक बुरी किस्मत हमारी है प्रबुद्ध जन नारे देता मिट गयी असमानता अब,समानता की बरी ह... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   11:07am 2 Mar 2012 #
Blogger: Anil pandey
जिंदगी के उहापोह में सुख के चाहत और दुःख के टोह मेंनिकला हुआ घर से रजिस्टर्ड आवारा हूँ मैं घूमा करता हूँ दिन भर टहला करता हूँ समझे न कोई फ़ालतू मुझे किसी गली में सम्हलकरप्रायः निकला करता हूँ मैं कोई समझे न समझे यहाँ सबका प्यारा हूँ मैं चमकते सितारों क... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   7:04am 29 Sep 2011 #
Blogger: Anil pandey
फिर वही रास्ते मिले मोड़ वही गुजरते थे जहां से कुछ दिनों पहेले भी वही दूबकंकर वही भूमि वही बंजर परीवही रास्ते ईंटो के खडंजे मिट्टियों की बनी दिख रहे हैं वही का वही पर हम बदल गये विचार हमारेव्यवहार हमारेजो रहा करते थे नहीं रहे वही क्या बदल... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   6:50am 29 Sep 2011 #
Blogger: Anil pandey
गम किसे नहीं है दुःख कहाँ नहीं है कौन है सुखी कह नहीं सकता सम्पन्नता आखिर कहाँ है कह नहीं सकता समझ सकता हु पर दुखी सब हैं कोई दुःख को दूर करने के लिए सुख के सुखत्व से परसान होकर कोई दुखी है सब जन सब जगह सब तरीके से इस धरती पर रहने के लिए पाने के लिए कमाने के लिए एक दुनिया बसा... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   11:58am 28 Sep 2011 #
Blogger: Anil pandey
चुप हूँ , मौन हूँ, बेबसी है मेरी इस छोटे से जीवन में विपदा घनेरी घनेपन में निकालूँगा रास्ता एक ऐसा मिट जायेगी एक दिन ये काली  अँधेरी निकलेगा चाँद अभिनव रोशनी को संग ले टिमटिमाते तारों से धरती ये जगमगा जायेगी दौड़ता हुआ आएगा सूरज भी एक दिनबजेगी   संवादों   की... Read more
clicks 217 View   Vote 0 Like   4:15am 31 Jul 2011 #
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