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न दैन्यं न पलायनम्

मन की उलझी लट सुलझा दो,मेरे प्यारे प्रेम सरोवर ।लुप्त दृष्टि से पथ, दिखला दो,स्वप्नशील दर्शन झिंझोड़कर ।।१।।ढूढ़ा था, वह लुप्त हो गया,जागृत था, वह सुप्त हो गया ।मार्ग विचारों को दिखला दो,मन की उलझी लट सुलझा दो ।।२।।कागज पर कुछ रेखायें थीं,मूर्ति उभरने को उत्सुक थी ।बना ...
न दैन्यं न पलायनम्...
Tag :कविता
  April 12, 2015, 4:00 am
जगता हूँ, मन खो जाता है,तुम्हे ढूढ़ने को जाता है ।सोऊँ, नींद नहीं आ पाती,तेरे स्वप्नों में खो जाती ।ध्यान कहीं भी लग न पाये,रात्रि विरहणा, दिन भरमाये ।।१।।जीवन स्थिर, आते हैं क्षण,बह जाते, कुछ नहीं नियन्त्रण ।जीवन निष्क्रिय, सुप्त चेतना,उठती बारम्बार वेदना ।कहीं कोई आश्...
न दैन्यं न पलायनम्...
Tag :जीवन
  April 5, 2015, 4:00 am
जीवन पथ पर एक सुखद भोर, ले आई पवन मलयज, शीतल,अनुभव की स्मृति छोड़ गयी, एक भाव सहज, मधुमय, चंचल ।निश्चय ही मन के भावों में, सावन के झोंके आये हैं ।अब तक सारे दुख के पतझड़, पर हमने कहाँ बितायें हैं ।।१।।जीवन पाये निश्चिन्त शयन, लोरी गाकर सुख चला गया,उद्विग्न विचारों की ज्वाला, ...
न दैन्यं न पलायनम्...
Tag :जीवन
  March 29, 2015, 4:00 am
दिन तो बीता आपाधापी,यथारूप हर चिंता व्यापी,कार्य कुपोषित, व्यस्त अवस्था,अधिकारों से त्रस्त व्यवस्था,होड़, दौड़ का ओढ़ चढ़ाये,अवसादों का कोढ़ छिपाये,कौन मौन अन्तर्मन साधे,मन के तथ्यों से घबराते,लगे सभी जब जीवन जपने,कुछ पल अपने।१।हमने तो सोचा था जीवन,होगा अपना करने का म...
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Tag :जीवन
  January 11, 2015, 4:00 am
रेतगंगा, श्वेतगंगा,वेगहत, अवशेष गंगा।रिक्त गंगा, तिक्त गंगा,उपेक्षायण, क्षिप्त गंगा।भिन्न गंगा, छिन्न गंगा,अनुत्साहित, खिन्न गंगा।प्राण गंगा, त्राण गंगा,थी कभी, निष्प्राण गंगा।लुप्त गंगा, भुक्त गंगा,प्रीतिबद्धा मुक्त गंगा।महत गंगा, अहत गंगा,शान्त सरके वृहत गंगा।पू...
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Tag :गंगा
  January 4, 2015, 4:00 am
पृथु, जीवन के प्रथम वर्ष पर,नहीं समझ में आता, क्या दूँ ?नहीं रुके, घुटनों के राही,घर के चारों कोनो में ही,तुमने ढूँढ़ लिये जग अपने,जिज्ञासा से पूर्ण हृदय में,जाने कितनी ऊर्जा संचित,कैसे रह जाऊँ फिर वंचित,सुख-वर्षा, मैं भी कुछ पा लूँ,नहीं समझ में आता, क्या दूँ ?भोली मुसकी, मधु...
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Tag :पृथु
  December 27, 2014, 4:00 am
मुश्किल है ढोना कृतघ्नता,चुभते अब समझौते भी हैं ।अर्पण जो तुझको करने हैं,जाने कितने ऋण बाकी हैं ।।रमकर तेरे उपकरणों में,चिन्तन तेरा अनुपस्थित था ।खोकर मैं अपनी दुनिया में,स्वार्थ-अन्ध हो भूल गया था ।।चित...
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Tag :ऋण
  November 8, 2014, 4:00 am
कौन कहता है, ये जीवन दौड़ है,कौन कहता है, समय की होड़ है,हम तो रमते थे स्वयं में,आँख मूँदे तन्द्र मन में,आपका आना औ जाना,याद करने के व्यसन में,तनिक समझो और जानो,नहीं यह कोई कार्य है,काल के हाथों विवशता,मन्दगति स्वीकार्य है। ...
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Tag :जीवन
  November 5, 2014, 4:00 am
स्वप्न सुनहला देखा मैंने,सुन्दर चेहरा देखा मैंने ।मन में संचित चित्रण को,बन सत्य पिघलते देखा मैंने ।।१।।आनन्दित जागृत आँखों में,सुन्दर तेरा रूप सलोना ।मन की गहरी पर्तों में,निर्द्वन्द उभरते देखा मैंने ।।२।।शब...
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Tag :कविता
  November 1, 2014, 4:00 am
प्रेम की पिपास अन्तर्निहित है जो,घूमते चहुँ ओर उसके कर्म सारे ।दे सके जो हर किसी को प्रेम तृप्ति,बिका उसको कौड़ियों के मूल्य जीवन ।।प्रेम के आनन्द की ही लालसा में,जी रहे हैं और सतत ही तृप्त करते,घर ...
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Tag :सत्य
  October 25, 2014, 4:00 am
वह सुन्दर से भी सुन्दरतम,वह ज्ञान सिन्धु का गर्भ-गहन,वह विस्तृत जग का द्रव्य-सदन,वह यशो-ज्योति का उद्दीपन,वह वन्दनीय, वह आराधन,वह साध्य और वह संसाधन,वह रत, नभ नत सा अभिवादन,वह मुक्त, शेष का मर्यादन,वह महातेज, वह कृपाहस्त,वह ज्योति जगत, अ...
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Tag :कविता
  October 22, 2014, 4:00 am
सहसा मन में घिर आयी, वो रात बिताने बैठा हूँतुमसे पाये हर सुख का अब मूल्य चुकाने बैठा हूँ भावों का उद्गार प्रस्फुटित, आतुर मन के आँगन में,मेघों का उपकार, सरसता नहीं छोड़ती सावन में,जाने क्या ऊर्जा बहती थी, सब कुछ ही अनुकूल रहा,वर्ष दौड़ते निकल गये मधु-स्मृतियों का स्रोत ...
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Tag :जीवन
  October 18, 2014, 4:00 am
उमड़ पड़े अनगिनत प्रश्न,जब कारण का कारण पूछा ।जगा गये सोती जिज्ञासा,जीवन के अनसुलझे उत्तर ।।१।।दर्शन की लम्बी राहों पर,चलता ज्ञान शिथिल हो बैठा ।नहीं किन्तु सन्तुष्टि मिली,किस हेतु जी रहे जीवन हम सब ।।२...
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Tag :जीवन
  August 6, 2014, 4:00 am
अगणित रहस्य के अन्धकूप,इस प्रकृति-तत्व की छाती में ।है अन्तहीन यह ज्ञानस्रोत,मानव तू क्या क्या ढूँढ़ेगा ।।विस्तारों की यह प्रकृति दिशा,आधारों से यह मुक्त शून्य ।लाचारी से विह्वल होकर,जीवन अपना ले डूबेगा ।...
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Tag :प्रकृति
  August 2, 2014, 4:00 am
जीवन-जल को वाष्प बना कर,बादल बन कर छा जाते हो ।रहो कहीं भी छिपे छिपे से,हमको तो तुम भा जाते हो ।।अस्तित्वों के युद्ध कभी, निर्मम होकर हमने जीते थे,हृदय-कक्ष फिर भी जीवन के, आत्म-दग्ध सूने, रीते थे ।सुप...
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Tag :कृतज्ञता
  July 30, 2014, 4:00 am
तेरे जीवन को बहलाने,आखिर रंग कहाँ से लाऊँ ?कैसे तेरा रूप सजाऊँ ?नहीं सूझते विषय लुप्त हैं,जागृत थे जो स्वप्न, सुप्त हैं,कैसे मन के भाव जगाऊँ,आखिर रंग कहाँ से लाऊँ ।।१।।बिखर गये जो सूत्रबद्ध थे,अनुपस्थित ...
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Tag :जीवन
  July 23, 2014, 4:00 am
स्वतः तृप्ति है, प्रेम शब्द में प्यास नहीं है,मात्र कर्म है, फल की कोई आस नहीं है,प्रेम साम्य है, कभी कोई आराध्य नहीं है,सदा मुक्त है, अधिकारों को साध्य नहीं है ।यदि कभी भी प्रेम का विन्यास लभ हो जटि...
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Tag :प्राप्ति
  July 19, 2014, 4:00 am
है अभी दिन शेष अर्जुन,लक्ष्य कर संधान अर्जुन ।सूर्य भी डूबा नहीं है,शत्रु भी तेरा यहीं है,शौर्य के दीपक जला दे, विजय की हुंकार भी सुन ।है अभी दिन शेष अर्जुन ।।१।।सही की चाहे गलत की,पार्थ तुमने प्रतिज...
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Tag :आशा
  July 16, 2014, 4:00 am
कहाँ अकेले रहते हैं हम?अपने से ही सब दिखते हैं,जितने गतिमय हम, उतने ही,जितने जड़वत हम, उतने ही,भले न बोलें शब्द एक भी,पर सहता मन रिक्त एक ही,और भरे उत्साह, न थमता,भीतर भारी शब्द धमकता,लगता अपने संग चल रहा,पथ पर प्रेरित दीप जल रहा,लगता जीवन एक नियत क्रम,कहाँँ अकेले रहते हैं हम?...
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Tag :विश्व
  May 10, 2014, 4:00 am
ढाढ़सी मौसम,बस रसद कम,जी ले लल्ला,बैठ निठल्ला,पानी बरसे,झम झमाझम। ...
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Tag :चुनाव
  May 7, 2014, 4:00 am
प्रश्न कुछ भी पूछता हूँ,उत्तरों की विविध नदियाँ,ज्ञान का विस्तार तज कर,मात्र तुझमें सिमटती हैं ।नेत्र से कुछ ढूँढ़ता हूँ,दृष्टियों की तीक्ष्ण धारें,अन्य सब आसार तजकर,तुम्हीं पर कब से टिकी हैं ।जब कभी कुछ&nbs...
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Tag :प्रश्न
  May 3, 2014, 4:00 am
सप्ताहान्त के दो दिन यदि न होते तो संभवतः सृष्टि अब तक विद्रोह कर चुकी होती, या सृष्टि तब तक ही चल पाती, जब तक चलने दी जाती। वे सारे कार्य जो आदेश रूप में आपको मिलते रहते हैं, अपना ठौर ढूढ़ने तब भला कहाँ जाते? अच्छा हुआ कि सप्ताहान्त का स्वरूप बनाया गया, और भी अच्छा हुआ कि उस...
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Tag :दुविधा
  June 29, 2013, 4:00 am
मुझे लगता है कि बोझ का जितना स्तर अपने देश में है, उतना विश्व के किसी देश में नहीं है। कोई ऐसे तथ्य तो नहीं हैं जिनके आधार पर मैं यह सिद्ध कर पाऊँ, पर लगता है कि यह ही सत्य हैं।वैसे कहने को तो सारे तथ्य होने के पश्चात भी लोग सत्य स्थापित नहीं कर पाते हैं, तर्क होने के बाद भी क...
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Tag :भारत
  June 26, 2013, 4:00 am
आदर्शों की छोटी चादर,चलो ढकेंगे,औरों को हम।आंकाक्षा मन पूर्ण उजागर,चलो छलेंगे,औरों को हम।इसकी उससे तुलना करना,चलो नाप लें,औरों को हम।निर्णायक बन व्यस्त विचरना,चलो ताप लें,औरों को हम।हमने ज्ञान निकाला, पेरा,चलो पिलायें,औरों को हम।बिन हम जग में व्याप्त अँधेरा,चलो जलाय...
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Tag :हम
  June 22, 2013, 4:00 am
अपने मित्र आलोक की फेसबुकपर बदले चित्र पर ध्यान गया, उसमें कुछ लिखा हुआ था। आलोक प्रमुखतः चित्रकार हैं और उसके सारे चित्रों में कुछ न कुछ गूढ़ता छिपी होती है, अर्थभरी कलात्मकता छिपी रहती है। आलोक बहुत अच्छे फोटोग्राफर भी हैं और उनकी मूक फोटो बहुत कुछ कहती हैं। आलोक को ...
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Tag :भविष्य
  June 19, 2013, 4:00 am
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