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Blog: न दैन्यं न पलायनम्

Blogger: प्रवीण पाण्डेय
मन की उलझी लट सुलझा दो,मेरे प्यारे प्रेम सरोवर ।लुप्त दृष्टि से पथ, दिखला दो,स्वप्नशील दर्शन झिंझोड़कर ।।१।।ढूढ़ा था, वह लुप्त हो गया,जागृत था, वह सुप्त हो गया ।मार्ग विचारों को दिखला दो,मन की उलझी लट सुलझा दो ।।२।।कागज पर कुछ रेखायें थीं,मूर्ति उभरने को उत्सुक थी ।बना ... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   10:30pm 11 Apr 2015 #कविता
Blogger: प्रवीण पाण्डेय
जगता हूँ, मन खो जाता है,तुम्हे ढूढ़ने को जाता है ।सोऊँ, नींद नहीं आ पाती,तेरे स्वप्नों में खो जाती ।ध्यान कहीं भी लग न पाये,रात्रि विरहणा, दिन भरमाये ।।१।।जीवन स्थिर, आते हैं क्षण,बह जाते, कुछ नहीं नियन्त्रण ।जीवन निष्क्रिय, सुप्त चेतना,उठती बारम्बार वेदना ।कहीं कोई आश्... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   10:30pm 4 Apr 2015 #जीवन
Blogger: प्रवीण पाण्डेय
जीवन पथ पर एक सुखद भोर, ले आई पवन मलयज, शीतल,अनुभव की स्मृति छोड़ गयी, एक भाव सहज, मधुमय, चंचल ।निश्चय ही मन के भावों में, सावन के झोंके आये हैं ।अब तक सारे दुख के पतझड़, पर हमने कहाँ बितायें हैं ।।१।।जीवन पाये निश्चिन्त शयन, लोरी गाकर सुख चला गया,उद्विग्न विचारों की ज्वाला, ... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   10:30pm 28 Mar 2015 #जीवन
Blogger: प्रवीण पाण्डेय
दिन तो बीता आपाधापी,यथारूप हर चिंता व्यापी,कार्य कुपोषित, व्यस्त अवस्था,अधिकारों से त्रस्त व्यवस्था,होड़, दौड़ का ओढ़ चढ़ाये,अवसादों का कोढ़ छिपाये,कौन मौन अन्तर्मन साधे,मन के तथ्यों से घबराते,लगे सभी जब जीवन जपने,कुछ पल अपने।१।हमने तो सोचा था जीवन,होगा अपना करने का म... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   10:30pm 10 Jan 2015 #जीवन
Blogger: प्रवीण पाण्डेय
रेतगंगा, श्वेतगंगा,वेगहत, अवशेष गंगा।रिक्त गंगा, तिक्त गंगा,उपेक्षायण, क्षिप्त गंगा।भिन्न गंगा, छिन्न गंगा,अनुत्साहित, खिन्न गंगा।प्राण गंगा, त्राण गंगा,थी कभी, निष्प्राण गंगा।लुप्त गंगा, भुक्त गंगा,प्रीतिबद्धा मुक्त गंगा।महत गंगा, अहत गंगा,शान्त सरके वृहत गंगा।पू... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   10:30pm 3 Jan 2015 #गंगा
Blogger: प्रवीण पाण्डेय
पृथु, जीवन के प्रथम वर्ष पर,नहीं समझ में आता, क्या दूँ ?नहीं रुके, घुटनों के राही,घर के चारों कोनो में ही,तुमने ढूँढ़ लिये जग अपने,जिज्ञासा से पूर्ण हृदय में,जाने कितनी ऊर्जा संचित,कैसे रह जाऊँ फिर वंचित,सुख-वर्षा, मैं भी कुछ पा लूँ,नहीं समझ में आता, क्या दूँ ?भोली मुसकी, मधु... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   10:30pm 26 Dec 2014 #पृथु
Blogger: प्रवीण पाण्डेय
मुश्किल है ढोना कृतघ्नता,चुभते अब समझौते भी हैं ।अर्पण जो तुझको करने हैं,जाने कितने ऋण बाकी हैं ।।रमकर तेरे उपकरणों में,चिन्तन तेरा अनुपस्थित था ।खोकर मैं अपनी दुनिया में,स्वार्थ-अन्ध हो भूल गया था ।।चित... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   10:30pm 7 Nov 2014 #ऋण
Blogger: प्रवीण पाण्डेय
कौन कहता है, ये जीवन दौड़ है,कौन कहता है, समय की होड़ है,हम तो रमते थे स्वयं में,आँख मूँदे तन्द्र मन में,आपका आना औ जाना,याद करने के व्यसन में,तनिक समझो और जानो,नहीं यह कोई कार्य है,काल के हाथों विवशता,मन्दगति स्वीकार्य है। ... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   10:30pm 4 Nov 2014 #जीवन
Blogger: प्रवीण पाण्डेय
स्वप्न सुनहला देखा मैंने,सुन्दर चेहरा देखा मैंने ।मन में संचित चित्रण को,बन सत्य पिघलते देखा मैंने ।।१।।आनन्दित जागृत आँखों में,सुन्दर तेरा रूप सलोना ।मन की गहरी पर्तों में,निर्द्वन्द उभरते देखा मैंने ।।२।।शब... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   10:30pm 31 Oct 2014 #कविता
Blogger: प्रवीण पाण्डेय
प्रेम की पिपास अन्तर्निहित है जो,घूमते चहुँ ओर उसके कर्म सारे ।दे सके जो हर किसी को प्रेम तृप्ति,बिका उसको कौड़ियों के मूल्य जीवन ।।प्रेम के आनन्द की ही लालसा में,जी रहे हैं और सतत ही तृप्त करते,घर ... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   10:30pm 24 Oct 2014 #सत्य
Blogger: प्रवीण पाण्डेय
वह सुन्दर से भी सुन्दरतम,वह ज्ञान सिन्धु का गर्भ-गहन,वह विस्तृत जग का द्रव्य-सदन,वह यशो-ज्योति का उद्दीपन,वह वन्दनीय, वह आराधन,वह साध्य और वह संसाधन,वह रत, नभ नत सा अभिवादन,वह मुक्त, शेष का मर्यादन,वह महातेज, वह कृपाहस्त,वह ज्योति जगत, अ... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   10:30pm 21 Oct 2014 #कविता
Blogger: प्रवीण पाण्डेय
सहसा मन में घिर आयी, वो रात बिताने बैठा हूँतुमसे पाये हर सुख का अब मूल्य चुकाने बैठा हूँ भावों का उद्गार प्रस्फुटित, आतुर मन के आँगन में,मेघों का उपकार, सरसता नहीं छोड़ती सावन में,जाने क्या ऊर्जा बहती थी, सब कुछ ही अनुकूल रहा,वर्ष दौड़ते निकल गये मधु-स्मृतियों का स्रोत ... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   10:30pm 17 Oct 2014 #जीवन
Blogger: प्रवीण पाण्डेय
उमड़ पड़े अनगिनत प्रश्न,जब कारण का कारण पूछा ।जगा गये सोती जिज्ञासा,जीवन के अनसुलझे उत्तर ।।१।।दर्शन की लम्बी राहों पर,चलता ज्ञान शिथिल हो बैठा ।नहीं किन्तु सन्तुष्टि मिली,किस हेतु जी रहे जीवन हम सब ।।२... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   10:30pm 5 Aug 2014 #जीवन
Blogger: प्रवीण पाण्डेय
अगणित रहस्य के अन्धकूप,इस प्रकृति-तत्व की छाती में ।है अन्तहीन यह ज्ञानस्रोत,मानव तू क्या क्या ढूँढ़ेगा ।।विस्तारों की यह प्रकृति दिशा,आधारों से यह मुक्त शून्य ।लाचारी से विह्वल होकर,जीवन अपना ले डूबेगा ।... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   10:30pm 1 Aug 2014 #प्रकृति
Blogger: प्रवीण पाण्डेय
जीवन-जल को वाष्प बना कर,बादल बन कर छा जाते हो ।रहो कहीं भी छिपे छिपे से,हमको तो तुम भा जाते हो ।।अस्तित्वों के युद्ध कभी, निर्मम होकर हमने जीते थे,हृदय-कक्ष फिर भी जीवन के, आत्म-दग्ध सूने, रीते थे ।सुप... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   10:30pm 29 Jul 2014 #कृतज्ञता
Blogger: प्रवीण पाण्डेय
तेरे जीवन को बहलाने,आखिर रंग कहाँ से लाऊँ ?कैसे तेरा रूप सजाऊँ ?नहीं सूझते विषय लुप्त हैं,जागृत थे जो स्वप्न, सुप्त हैं,कैसे मन के भाव जगाऊँ,आखिर रंग कहाँ से लाऊँ ।।१।।बिखर गये जो सूत्रबद्ध थे,अनुपस्थित ... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   10:30pm 22 Jul 2014 #जीवन
Blogger: प्रवीण पाण्डेय
स्वतः तृप्ति है, प्रेम शब्द में प्यास नहीं है,मात्र कर्म है, फल की कोई आस नहीं है,प्रेम साम्य है, कभी कोई आराध्य नहीं है,सदा मुक्त है, अधिकारों को साध्य नहीं है ।यदि कभी भी प्रेम का विन्यास लभ हो जटि... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   10:30pm 18 Jul 2014 #प्राप्ति
Blogger: प्रवीण पाण्डेय
है अभी दिन शेष अर्जुन,लक्ष्य कर संधान अर्जुन ।सूर्य भी डूबा नहीं है,शत्रु भी तेरा यहीं है,शौर्य के दीपक जला दे, विजय की हुंकार भी सुन ।है अभी दिन शेष अर्जुन ।।१।।सही की चाहे गलत की,पार्थ तुमने प्रतिज... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   10:30pm 15 Jul 2014 #आशा
Blogger: प्रवीण पाण्डेय
कहाँ अकेले रहते हैं हम?अपने से ही सब दिखते हैं,जितने गतिमय हम, उतने ही,जितने जड़वत हम, उतने ही,भले न बोलें शब्द एक भी,पर सहता मन रिक्त एक ही,और भरे उत्साह, न थमता,भीतर भारी शब्द धमकता,लगता अपने संग चल रहा,पथ पर प्रेरित दीप जल रहा,लगता जीवन एक नियत क्रम,कहाँँ अकेले रहते हैं हम?... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   10:30pm 9 May 2014 #विश्व
Blogger: प्रवीण पाण्डेय
ढाढ़सी मौसम,बस रसद कम,जी ले लल्ला,बैठ निठल्ला,पानी बरसे,झम झमाझम। ... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   10:30pm 6 May 2014 #चुनाव
Blogger: प्रवीण पाण्डेय
प्रश्न कुछ भी पूछता हूँ,उत्तरों की विविध नदियाँ,ज्ञान का विस्तार तज कर,मात्र तुझमें सिमटती हैं ।नेत्र से कुछ ढूँढ़ता हूँ,दृष्टियों की तीक्ष्ण धारें,अन्य सब आसार तजकर,तुम्हीं पर कब से टिकी हैं ।जब कभी कुछ&nbs... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   10:30pm 2 May 2014 #प्रश्न
Blogger: प्रवीण पाण्डेय
सप्ताहान्त के दो दिन यदि न होते तो संभवतः सृष्टि अब तक विद्रोह कर चुकी होती, या सृष्टि तब तक ही चल पाती, जब तक चलने दी जाती। वे सारे कार्य जो आदेश रूप में आपको मिलते रहते हैं, अपना ठौर ढूढ़ने तब भला कहाँ जाते? अच्छा हुआ कि सप्ताहान्त का स्वरूप बनाया गया, और भी अच्छा हुआ कि उस... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   10:30pm 28 Jun 2013 #दुविधा
Blogger: प्रवीण पाण्डेय
मुझे लगता है कि बोझ का जितना स्तर अपने देश में है, उतना विश्व के किसी देश में नहीं है। कोई ऐसे तथ्य तो नहीं हैं जिनके आधार पर मैं यह सिद्ध कर पाऊँ, पर लगता है कि यह ही सत्य हैं।वैसे कहने को तो सारे तथ्य होने के पश्चात भी लोग सत्य स्थापित नहीं कर पाते हैं, तर्क होने के बाद भी क... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   10:30pm 25 Jun 2013 #भारत
Blogger: प्रवीण पाण्डेय
आदर्शों की छोटी चादर,चलो ढकेंगे,औरों को हम।आंकाक्षा मन पूर्ण उजागर,चलो छलेंगे,औरों को हम।इसकी उससे तुलना करना,चलो नाप लें,औरों को हम।निर्णायक बन व्यस्त विचरना,चलो ताप लें,औरों को हम।हमने ज्ञान निकाला, पेरा,चलो पिलायें,औरों को हम।बिन हम जग में व्याप्त अँधेरा,चलो जलाय... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   10:30pm 21 Jun 2013 #हम
Blogger: प्रवीण पाण्डेय
अपने मित्र आलोक की फेसबुकपर बदले चित्र पर ध्यान गया, उसमें कुछ लिखा हुआ था। आलोक प्रमुखतः चित्रकार हैं और उसके सारे चित्रों में कुछ न कुछ गूढ़ता छिपी होती है, अर्थभरी कलात्मकता छिपी रहती है। आलोक बहुत अच्छे फोटोग्राफर भी हैं और उनकी मूक फोटो बहुत कुछ कहती हैं। आलोक को ... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   10:30pm 18 Jun 2013 #भविष्य
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