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Blog: Meri Gajale Mere Geet (मेरी ग़ज़लें मेरे गीत)

Blogger: umesh kumar shrivastava
               चन्द भाव दिल के                                       १होता तो है दर्द उन्हे भी जो दर्दो में ही पलते है   बेदर्द बन किसी को यूँ दर्द दिया ना करो ၊                           २सोचा था दूर होकर मैं भी  करूँगा यादपर क्या कर... Read more
clicks 59 View   Vote 0 Like   2:41am 21 Nov 2020 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
विजयादशमीविजयी हुए थे राम मगर,वह युग त्रेता बीत गया ၊दुर्गुण पर्यायी रावण तोइस युग में आकर जीत गया ၊हर प्राण हुआ है रावण अबजो बचे रहे वे रीते हैं ,सुख बांट रहे हैं रावण अब राम तो रीते रीते हैं ၊खलनायक नाहक रावण  हैहर नायक आज दुर्दान्त यहां ,था चरित्रत्रयी का, वह अधिना... Read more
clicks 52 View   Vote 0 Like   3:00am 10 Oct 2020 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
ग़ज़लचाहते तो थे नही कि आपको यूँ दर्द देंक्या करें ज़ज्बात-ए- दिल हम बयां कर दिएअर्जमन्द आप है नाज़ुक जिगर है आप काअजनबी की बात पर यूँ आप हैं रो दिएहै अजब हाल ये मेरे लिए ऐ नासमझआईना खुद आज अपना अक्स है दिखा दिएऐ हवा थम जा ज़रा आँचल न उसका यूँ उड़ामासूक ने मेरे लिए अश्क है... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   3:14am 7 Sep 2020 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
देखा था बस इक नज़र उस किताब कोअब तलक अटका हुआ पहले हरफ़ पे हूँ .....उमेशदर-दर भटकते रहे ऐसी नज़र के लिए भेद देती दिल को जो चश्म-ए-नज़र से अपनी..उमेश..अब तलक़ ख्वाहिस यही पढ़ सकूँ इश्क-ए-नज़रजिंदगी गुज़री मगर वो नज़र मिलती नहीं...उमेश... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   2:58am 2 Aug 2020 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
हे वसुन्धरे ना अकुला ,देख मनुज की पीड़ा ,दुह-दुह तेरी काया को,ना आई  जिनको व्रीड़ा ၊मातु ह्रदय है तेरा,कारण, लखती ना स्व को,हैं, कृतघ्न मनु के वंशज,जो भक्ष रहे स्व-जन को ၊लख , ह्रदयागार के आंसू,     व , तेरी पीड़ित काया,दुहिता की दुविधा लख ,जनक तेरा अकुलाया ၊बन अहंकार ... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   11:05am 14 May 2020 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
खोजता मैं रहाआदि से ही तुझे,तू बता ऐ खुशीहै छिपी तू कहां ?धर्मों में देखाअधर्मों में देखा,कर्मों में देखाअकर्मों में देखा,दिखी तू नहींहर मर्मों में देखा,खोजता मैं रहातू छिपी है कहां ?रिस्तों में चाहावैर कर के भी ढूढ़ा,तू छिपी ही रहीमुस्कुराती कहीं,नीरवता में गहनउतर कर... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   9:36pm 29 Apr 2020 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
दिल क्या है ?कोशिकाओं का समुच्चय,रक्त प्लाजमा व कणिकाओं भरा चषक,अथवा इक व्योम विवर,आकर्षित करता हर इक कार्य व्यवहार केअहसासों को,कटु मृदु या विभत्स ၊दिल लोथड़ा नहीमांस पेशियों का,जाल नही, धमनियों,शिराओं का,न ही आश्रय स्थल है ,सुचि व कलुषित रुधिर का ၊दिल इक घरौंद... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   5:01pm 12 Feb 2020 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
मैं बयार सा बहना चाहूंप्रमुदित कुसुम दल हिय मेंमकरंद बना बस रहना चाहूंमैं बयार सा बहना चाहूं ၊हर प्रसून का हिय हिलोरताप्रेम सुधा से गागर भरताप्रकृति प्रबन्ध का पालन करतागरल सभी के हरना चाहूं ,मैं बयार सा बहना चाहूं ၊अलकों संग खेलूं, अंको में भर,कपोल चूम लूं ,अधरों को ... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   3:46am 26 Jan 2020 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
मैं शिवनिर्मल जल कणमैं शिवशीतल हिम कणमैं शिवप्रकंपन सरसरमैं शिव अनल प्रखरमैं शिव प्रस्तर गिरवरमैं शिवअवघड़ अंधड़मैं शिवदानी हर हरमैं शिवनिश्चल अविचलमैं शिवयोगी-योगेश्वरमैं शिवविषधर शशिधरमैं शिवविकराल कालमैं शिवकालों का कालमैं शिव गरल  विनाशकमैं शिवअन्तस क... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   2:33am 26 Jan 2020 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
हे अर्धान्शवेदना हुई हर बारमानव समाज को, हे नर अर्धान्श नारी ,जब जब तुझ परनर-पशु नेअमानुशी प्रहार कियाकायिक या मानसिक ၊ना सोच, है पाषाणमानव समाज ၊स्पन्दन जो प्राण में ,तुझसे ही पाया ,चेतना सुचि ज्ञानतूने ही तोहै, बोध कराया ,लाखों योनियों मेंभटके सभी ये तेरी योनि ह... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   9:14am 2 Dec 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
दीपावली की सभी को शुभकामनाएँ  नव दीप जलें हर आँगन मेंनव जीवन के स्पंदन केहर मन में उजियारा होजग पे छलकता सारा होमिट जाए अंधेरा इस जग काऐसा इक चमकता तारा होहर आश बँधे विश्वास बँधेइक दूजे के अभिनंदन सेनव दीप जलें हर आँगन मेंनव जीवन के स्पंदन के                 ... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   5:15pm 3 Nov 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
मै जानना हूं चाहता क्या  तब तुम गलत थी,और अब सही हो ?मैं यह भी चाहता हूं जानना ,क्या  तब मैं सही था,अब हूं गलत ?मैं चाहता हूं जानना ,जब मैं गलत था , तो तुम कैसे सही थीऔर जब तुम सही थीतो मैं कैसे गलत था ,क्यों कि दोनों ही जी रहे थे,इक ही जिन्दगी ၊मैं चाहता हूं जाननाधड़कनों के सं... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   5:22pm 25 Oct 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
न जानें क्योंलोग ,जीते हैं जीवन व रिस्तेनये व पुराने समझ !उम्र न जीवन की होतीन ही रिस्तों की ;ये तो हर क्षण नये रहते हैबस इन्हे जीने या कहें यूं , किमहसूसने काअंदाज अलग होता है ၊लेता हूं जन्म मैंहर क्षण , इक नई काया ले कर ,जीता हूं उसे पूरे उमंगो और उन्मादों से भर ၊जानता हूं ... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   6:54pm 20 Oct 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
न जानें क्योंलोग ,जीते हैं जीवन व रिस्तेनये व पुराने समझ !उम्र न जीवन की होतीन ही रिस्तों की ;ये तो हर क्षण नये रहते हैबस इन्हे जीने या कहें यूं , किमहसूसने काअंदाज अलग होता है ၊लेता हूं जन्म मैंहर क्षण , इक नई काया ले कर ,जीता हूं उसे पूरे उमंगो और उन्मादों से भर ၊जानता हूं ... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   6:54pm 20 Oct 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
सभी गणमान्य मित्रों को विजयादशमी की मंगलकामनाएं ၊आओ इक दीप हिए में जलाएंआओ दहन इक स्वरावण करायेंकुछ तो सहेजें स्वयं म&... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   3:23am 19 Oct 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
स्वीकार ह्रदय से करते कैसे ,कहो जरा आधार है क्या ?हृदय कुंज में गमके बेलाकहो जरा ,  यह प्यार है क्या ?प्रात अरूण की किरण लगे ज... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   8:56am 5 Oct 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
नेह जगा हृदय गुहा में ,कौन भला, चुप बैठा है , दुःख के सागरआनन्दमयी सरि ,इन द्धय तीरों पररहता है ၊आश जगेया , प्यास जगे ,श्वांसे ... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   5:20pm 3 Oct 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
जन्म से मृत्यु, यात्रा , प्रत्यक्ष का साक्षात्कार , जन्म से पूर्व मृत्यु के पश्चात अज्ञात का अंधकार , पर्ण पात, है ज्ञात आगम... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   8:22am 17 Sep 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
गम-ए-दिल को गमजदा गमख्वार चाहिए ,गमगीनियों की गली में ग़जरा-ए-गुलनार चाहिए , तकदीर कोई सै नही राहे गमगीनियां , सबा के झोंके स... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   4:51am 17 Sep 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
उत्कंठामुक्ति के ,अनुभूति कीभटकाती सदा ၊यह प्रकृति है,मायावी ၊रची ब्रम्ह की ၊आलिप्त करती सदा,हर कण के कणों को भी ၊निर्ल... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   6:16pm 4 Sep 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
रिश्ते कोमल कलियां हैं ,सींच इन्हे न तोड़ इन्हे ।महक बचा ले जीवन की,सर्वस्व लुटा कर जोड़ इन्हे ।...उमेश ०३.०९.१६ जबलपुर... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   12:04pm 3 Sep 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
थकते नहींरेत पर ये कदम , राहें बनाते , येमेरे कदम ၊मिटाती चलीरेत की आंधियांराह, उनको जिन परसदियां चलीं ၊है उन्हे ये पताउन &#... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   12:00pm 22 Aug 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
हर क्षण जैसे कोई मेरेटीस जगाता है, दिल में ,स्पर्शों की आश लगा ,कोई बलखाता, है दिल में ၊दृष्टिपटल से ओझल कोईह्रदयपटल पर छाय&... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   3:29pm 17 Aug 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
कविता क्या है ?माध्यमदिल की अभिव्यक्ति काबुद्धि जहां काम करना बन्द कर दे ,विवेक के निर्देश कुंद हो ,मौन होंऔर फिर दिल स्व... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   2:47am 17 Jul 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
व्यथाऐ दामिनी न इतरा यूंपयोधर की बनप्रेयसीगणिकान वारिस तूवारिद कीतू बस अभिसारिकाये नर्तन तेरा व्यर्थन जमा धौंसइन न... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   5:05am 12 Jul 2019 #
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