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Blog: Meri Gajale Mere Geet (मेरी ग़ज़लें मेरे गीत)

Blogger: umesh kumar shrivastava
दिल क्या है ?कोशिकाओं का समुच्चय,रक्त प्लाजमा व कणिकाओं भरा चषक,अथवा इक व्योम विवर,आकर्षित करता हर इक कार्य व्यवहार केअहसासों को,कटु मृदु या विभत्स ၊दिल लोथड़ा नहीमांस पेशियों का,जाल नही, धमनियों,शिराओं का,न ही आश्रय स्थल है ,सुचि व कलुषित रुधिर का ၊दिल इक घरौंद... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   5:01pm 12 Feb 2020 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
मैं बयार सा बहना चाहूंप्रमुदित कुसुम दल हिय मेंमकरंद बना बस रहना चाहूंमैं बयार सा बहना चाहूं ၊हर प्रसून का हिय हिलोरताप्रेम सुधा से गागर भरताप्रकृति प्रबन्ध का पालन करतागरल सभी के हरना चाहूं ,मैं बयार सा बहना चाहूं ၊अलकों संग खेलूं, अंको में भर,कपोल चूम लूं ,अधरों को ... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   3:46am 26 Jan 2020 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
मैं शिवनिर्मल जल कणमैं शिवशीतल हिम कणमैं शिवप्रकंपन सरसरमैं शिव अनल प्रखरमैं शिव प्रस्तर गिरवरमैं शिवअवघड़ अंधड़मैं शिवदानी हर हरमैं शिवनिश्चल अविचलमैं शिवयोगी-योगेश्वरमैं शिवविषधर शशिधरमैं शिवविकराल कालमैं शिवकालों का कालमैं शिव गरल  विनाशकमैं शिवअन्तस क... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   2:33am 26 Jan 2020 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
हे अर्धान्शवेदना हुई हर बारमानव समाज को, हे नर अर्धान्श नारी ,जब जब तुझ परनर-पशु नेअमानुशी प्रहार कियाकायिक या मानसिक ၊ना सोच, है पाषाणमानव समाज ၊स्पन्दन जो प्राण में ,तुझसे ही पाया ,चेतना सुचि ज्ञानतूने ही तोहै, बोध कराया ,लाखों योनियों मेंभटके सभी ये तेरी योनि ह... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   9:14am 2 Dec 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
दीपावली की सभी को शुभकामनाएँ  नव दीप जलें हर आँगन मेंनव जीवन के स्पंदन केहर मन में उजियारा होजग पे छलकता सारा होमिट जाए अंधेरा इस जग काऐसा इक चमकता तारा होहर आश बँधे विश्वास बँधेइक दूजे के अभिनंदन सेनव दीप जलें हर आँगन मेंनव जीवन के स्पंदन के                 ... Read more
clicks 13 View   Vote 0 Like   5:15pm 3 Nov 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
मै जानना हूं चाहता क्या  तब तुम गलत थी,और अब सही हो ?मैं यह भी चाहता हूं जानना ,क्या  तब मैं सही था,अब हूं गलत ?मैं चाहता हूं जानना ,जब मैं गलत था , तो तुम कैसे सही थीऔर जब तुम सही थीतो मैं कैसे गलत था ,क्यों कि दोनों ही जी रहे थे,इक ही जिन्दगी ၊मैं चाहता हूं जाननाधड़कनों के सं... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   5:22pm 25 Oct 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
न जानें क्योंलोग ,जीते हैं जीवन व रिस्तेनये व पुराने समझ !उम्र न जीवन की होतीन ही रिस्तों की ;ये तो हर क्षण नये रहते हैबस इन्हे जीने या कहें यूं , किमहसूसने काअंदाज अलग होता है ၊लेता हूं जन्म मैंहर क्षण , इक नई काया ले कर ,जीता हूं उसे पूरे उमंगो और उन्मादों से भर ၊जानता हूं ... Read more
clicks 7 View   Vote 0 Like   6:54pm 20 Oct 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
न जानें क्योंलोग ,जीते हैं जीवन व रिस्तेनये व पुराने समझ !उम्र न जीवन की होतीन ही रिस्तों की ;ये तो हर क्षण नये रहते हैबस इन्हे जीने या कहें यूं , किमहसूसने काअंदाज अलग होता है ၊लेता हूं जन्म मैंहर क्षण , इक नई काया ले कर ,जीता हूं उसे पूरे उमंगो और उन्मादों से भर ၊जानता हूं ... Read more
clicks 9 View   Vote 0 Like   6:54pm 20 Oct 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
सभी गणमान्य मित्रों को विजयादशमी की मंगलकामनाएं ၊आओ इक दीप हिए में जलाएंआओ दहन इक स्वरावण करायेंकुछ तो सहेजें स्वयं म&... Read more
clicks 8 View   Vote 0 Like   3:23am 19 Oct 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
स्वीकार ह्रदय से करते कैसे ,कहो जरा आधार है क्या ?हृदय कुंज में गमके बेलाकहो जरा ,  यह प्यार है क्या ?प्रात अरूण की किरण लगे ज... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   8:56am 5 Oct 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
नेह जगा हृदय गुहा में ,कौन भला, चुप बैठा है , दुःख के सागरआनन्दमयी सरि ,इन द्धय तीरों पररहता है ၊आश जगेया , प्यास जगे ,श्वांसे ... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   5:20pm 3 Oct 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
जन्म से मृत्यु, यात्रा , प्रत्यक्ष का साक्षात्कार , जन्म से पूर्व मृत्यु के पश्चात अज्ञात का अंधकार , पर्ण पात, है ज्ञात आगम... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   8:22am 17 Sep 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
गम-ए-दिल को गमजदा गमख्वार चाहिए ,गमगीनियों की गली में ग़जरा-ए-गुलनार चाहिए , तकदीर कोई सै नही राहे गमगीनियां , सबा के झोंके स... Read more
clicks 8 View   Vote 0 Like   4:51am 17 Sep 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
उत्कंठामुक्ति के ,अनुभूति कीभटकाती सदा ၊यह प्रकृति है,मायावी ၊रची ब्रम्ह की ၊आलिप्त करती सदा,हर कण के कणों को भी ၊निर्ल... Read more
clicks 15 View   Vote 0 Like   6:16pm 4 Sep 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
रिश्ते कोमल कलियां हैं ,सींच इन्हे न तोड़ इन्हे ।महक बचा ले जीवन की,सर्वस्व लुटा कर जोड़ इन्हे ।...उमेश ०३.०९.१६ जबलपुर... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   12:04pm 3 Sep 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
थकते नहींरेत पर ये कदम , राहें बनाते , येमेरे कदम ၊मिटाती चलीरेत की आंधियांराह, उनको जिन परसदियां चलीं ၊है उन्हे ये पताउन &#... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   12:00pm 22 Aug 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
हर क्षण जैसे कोई मेरेटीस जगाता है, दिल में ,स्पर्शों की आश लगा ,कोई बलखाता, है दिल में ၊दृष्टिपटल से ओझल कोईह्रदयपटल पर छाय&... Read more
clicks 19 View   Vote 0 Like   3:29pm 17 Aug 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
कविता क्या है ?माध्यमदिल की अभिव्यक्ति काबुद्धि जहां काम करना बन्द कर दे ,विवेक के निर्देश कुंद हो ,मौन होंऔर फिर दिल स्व... Read more
clicks 32 View   Vote 0 Like   2:47am 17 Jul 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
व्यथाऐ दामिनी न इतरा यूंपयोधर की बनप्रेयसीगणिकान वारिस तूवारिद कीतू बस अभिसारिकाये नर्तन तेरा व्यर्थन जमा धौंसइन न... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   5:05am 12 Jul 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
आओ चलें मीतसरस हम भी होलेंहौले से खोलें,झरोखे ह्रदय के ,मेघों की बून्दे,कुछ,उनमें संजो लें ၊घिरे तो गगन पेहैं , मानस को घेर&... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   5:43pm 7 Jul 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
आज कहो कुछ ऐसा सखी रेहिय प्रफुलित हो जाये,तन झूमे , मन बावला हो करमाया जाय भुलाय ၊हैं अबूझ ससुराल की गलियांभटक रही अनजानी,&#... Read more
clicks 39 View   Vote 0 Like   3:16am 4 Jun 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
शासकीयआभियांत्रिकी महाविद्यालय जबलपुर परिसर में लगे वटवृक्ष  को देख हुई संवेदना पर एक प्रस्तुति:-ऐ बरगद की छांव घनेर... Read more
clicks 46 View   Vote 0 Like   12:24pm 31 May 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
प्रेमसुधायह प्रेम सुधा की धारा हैइसको हाला मत कहना नयनो के धोखे में आ कर इसको मधुशाला मत कहनाजब अगन लगे तन मन में इसको ना... Read more
clicks 49 View   Vote 0 Like   12:18pm 31 May 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
दर्दे दिल१-सम्मा की नियति यही , रात दिन जलती रहे    रौशनी देती रहे , खुद को अंधेरे में रख२-आहें भरना मेरी फ़ितरत नहीं थी    द... Read more
clicks 49 View   Vote 0 Like   12:16pm 31 May 2019 #
Blogger: umesh kumar shrivastava
१. रिस्तों की महक को बनाये रख ऐ नाखुदा। किस्ती है दरिया है बस जज्बे है बा खुदा ।२. मैं हूं तन्हा तन्हा बस मुंतजरे खबर । हुजूर... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   12:13pm 31 May 2019 #
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