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kabhee - kabhee ~~~~ कभी - कभी

लहरों से  सजे  सागर का मुख, बदली से  निखरता है सावनचन्दा से सजता नील गगन, कलियों  से  सजे प्यारा उपवनयौवन से निखरती है तरुणी,  चंचल  होती है गति  से पवनदु:खों से मन धरती बनता, वनस्पतियों से 'जय'जल पावनhttp://kadaachit.blogspot.in/ ...
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  May 7, 2018, 10:46 pm
नाहक गर्व स्वयं पर करिये, सबल तो समय-परिंदा हैपरोपकर से बड़ी खुशी नहिं, दुःख वृहद पर - निंदा हैमेरे संग परिवार खड़ा है, जीवन के इस काल-खंड मेंमरा नहीं है अभी भी मित्रों! मत भूलो, 'जय'ज़िंदा हैhttp://kadaachit.blogspot.in/ ...
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  May 2, 2018, 11:01 pm
ज़िन्दगी भर इसे पीते, होता न असर देखोकभी तोला, कभी लोटा, कभी तीनों पहर देखोअगर रुसवा ये हो जाये, जरा सी बूँद से ही 'जय'हमारी जान ले लेता, बड़ा बेदर्द ज़हर देखोhttp://kadaachit.blogspot.in/ ...
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  May 1, 2018, 11:57 am
सपने सुहाने देखो और  आँखों में  बसाओ तुमइन्हें साकार करने का साहस  भी दिखाओ तुमपंजों के बल खड़े होकर हाथों को उठाओ 'जय'गगन से तोड़ के इनको कदमों पर बिछाओ तुमhttp://kadaachit.blogspot.in/ ...
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  May 1, 2018, 11:55 am
मैं   देखता  रहा  उस  जनाजे  को  देर  तकहोने को  जा  रही  थी  नष्ट  वही शख्सियतजिसके नुमाया होने से दुनिया थी मुस्कुरायीकन्धों पे जा रहा है 'जय'चुपचाप  बेहरकतनुमाया होने = प्रकट होने/ सामने आनेhttp://kadaachit.blogspot.in/ ...
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  April 30, 2018, 7:28 pm
(1)अब भी हमारी साँसों में एक साँस घुली हैजैसे कि जन्नतों की कोई खिड़की खुली हैमेरे  नसीब में नहीं 'जय'जिसकी  यारियाँकुदरत उसी से आज मिलाने को तुली है (2)'जय'वो हमारे  जिगरोदिल टटोल रहे हैंजबरन  हमारे  बोल  हमसे  बोल  रहे हैंबेशर्त  हमने  चाहा  था उन्हें टूट ...
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  April 29, 2018, 10:05 pm
जब भी हकीकतों से हुआ दूर है कोईना जाने कैसे  हो  गया मशहूर है कोईफलसफा हमें भी तो समझोगे ये 'जय'नज़दीक हम चले तो चला दूर है कोईhttp://kadaachit.blogspot.in/ ...
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  April 29, 2018, 12:01 pm
पिघली है चाँदनी, चलो कुछ बात करें हममौसम न फागुनी, चलो कुछ बात करें हमजीवन में ऐसे रंग क्यों उभरे न आज तकचन्दा है जामुनी, चलो 'जय'बात करें हमhttp://kadaachit.blogspot.in/ ...
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  April 28, 2018, 10:42 pm
तुम्हारा अपनी बंदिश से निकल पाना बहुत मुश्किलहमारा  खुद  उसूलों  से   उबर   पाना   नहीं   आसां तुम अपने घर से निकलो तो मन्दिर तक हम आएंगेअकेला 'जय'लड़े  जग  से,  इतना  भी  नहीं  नादां http://kadaachit.blogspot.in/ ...
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  April 26, 2018, 11:34 pm
पहाड़ की चोटियों पर फैला सुनहरा उजाला सूरज के ढलने का उदघोष करने लगा है ।पक्षियों ने पंख फैलाये और नीड़ की तरफ उड़ चले हैं। कोयल की कूक में व्यग्रता सी है। बाजारों में चहल पहल बढ़ गयी है । होटल के काउंटर ओर भीड़ बढ़ने लगी हैं। टैक्सी स्टैंड पर जमावड़ा बढ़ गया है। सचमुच में शाम ढल...
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  April 25, 2018, 7:19 pm
सुबह अचानक नींद खुली और दरवाजा खोला तो सूरज की पहली किरण को सुनहरी साड़ी में सामने खड़ा पाया जो मुस्कुरा कर सुबह के दृश्य देखने का संकेत कर रही है। उनींदी आँखों से देखा तो चीड़ की झुकी डाल पर बैठी एक चिड़िया सुमधुर पहाड़ी धुन सुना रही है । ढलानदार शान्त सड़क अँगड़ाई ले रही है। न...
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  April 25, 2018, 7:15 pm
मेरी नैनीताल यात्रावो भूली दास्ताँ लो फिर याद आ गयीये रानीबाग है, कभी एचएमटी घड़ियों का कारखाना होता था यहाँकिन्तु अब शेष हैं कुछ निशानियाँ  बुज़ुर्गों की जुबानी कुछ कहानियाँयहाँ से शुरू होता है इक सर्पिणी सी सड़क का एक छोरयहीं है मचलती, मटकती, बहकती हुई गाड़ियों का&...
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  April 24, 2018, 11:28 pm
मेरी नैनीताल यात्रा - गरीब रथविशाल पुल के नीचे सिकुड़ी, सिमटी, लाजवन्ती सी गंगामटमैले-काले पानी में स्नान-आचमन करते भक्त व पण्डाआँखे बंद कर धीरे धीरे सरकती हुई गरीब रथ ।।कानपुर से ही एक माल गाड़ी के पीछे सरकती हुई सवारी गाड़ियाँसाथ में बैठे ढेरों पुलिस वालों के मुँह से छू...
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  April 24, 2018, 11:22 pm
भानु के शोलों से तपते पत्थरों की छातियों में, बीज हम बोते रहेसागरों की चीख और कहकहे इन आँधियों के, रात भर होते रहेठान ही हमने लिया जब मेघ, सूरज, तारे, चन्दा क्या करें तब ?बिजलियों के बिस्तरे, नम मेघों की चादर तले, 'जय'बेधड़क सोते रहेhttp://kadaachit.blogspot.in/ ...
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  April 23, 2018, 11:07 am
मैं मनुज हूँ, मनुजता को  आज भी सहला रहा  हूँ इस जगत के एक ही सच, मृत्यु को बहला रहा हूँ 'जय'स्वयं  को  दर्पणों के बीच रख कर कह रहा न  डरा  हूँ, न  गिरा  हूँ, ना  ही  मैं  घबरा  रहा  हूँhttp://kadaachit.blogspot.in/ ...
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  April 23, 2018, 11:02 am
है नेकी जो भी ज़माने में, था उन्हीं  का हुक्मरां मैंदोस्तों की  जुबानी में, प्रकृति  का था कहकशां मैंसमय ने  करवटें  बदली, हवा भी रुख बदल बैठी'जय'अपनी उम्मीदों का, रुका सा अब कारवाँ मैंहुक्मरां - शासककहकशां - कहकहाhttp://kadaachit.blogspot.in/ ...
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  April 23, 2018, 11:00 am
मैं पूर्णिमा का चन्द्र बन चमकता रहा रात्रि भर अमावस की रात 'जय'जुगनू भी न मिले मुझेhttp://kadaachit.blogspot.in/ ...
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  April 22, 2018, 2:14 pm
उन्हें होंठों का तिल लगता बहुत प्यारा, बहुत न्याराकिसी का साँवला रंग हो तो उन्हें लगता नहीं प्यारानयन ही हैं जो आकर्षण के जालों  को स्वयं बुनते, स्वयं ही 'जय'उलझते और स्वयं बन  जाते बेचाराhttp://kadaachit.blogspot.in/ ...
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  April 22, 2018, 2:10 pm
तीन छणिकाएँ ( 1 )उखड़ी हुयी हैं साँसे, है जकड़ा हुआ शरीर बदले हालात में 'जय'है अकड़ा हुआ ज़मीर ( 2 )कुछ ख्वाब उड़ चले हैं, साँसों के आसमां परमंज़िल कहाँ, किधर 'जय'तय है दुआ हवा पर( 3 )छेड़छाड़ और बलात्कार के मसले आँखों और ज़ेहन में ही होते हैं वरना वही कपडे और वही अंग खुद की बेटी-बहन ...
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  April 21, 2018, 11:20 pm
पाँच प्रश्न और कक्षोन्नतिहमारे पडोसी गाँव से पंडित राम भरोसे दीक्षित बचपन में हमें प्रारम्भिक शिक्षा देने के लिए आते थे. शाम को पाँच बजे वे आते और बाहर छप्पर के नीचे पड़े तख़्त पर बैठ कर एक हाँक लगाते : चलौ रे . और हम जहाँ भी होते अपना अपना बस्ता पाटी लेकर भागते हुए उनके पास ...
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  April 19, 2018, 5:18 pm
रुधिर जब  मुक्त होता है तो धमनी रोक  ना पाती सहज ही बह निकलते अश्रु, विरहणी रोक ना पाती भले  ही  फेंक  दो  इसको, तले  पत्थर  शिलाओं के अंकुरित  हो  गया 'जय'तो, ये धरणी रोक  ना पाती http://kadaachit.blogspot.in/ ...
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  April 19, 2018, 4:57 pm
वो  देखो  उसकी  मुट्ठी में, एक दाना भुना सा हैलंगोटी उसके तन पर  है, माथा कुछ तना सा हैभले ही काया श्यामल हो, हृदय में गंग - धारा हैन जाने क्यों फिर से 'जय', अनजाना बना सा हैhttp://kadaachit.blogspot.in/ ...
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  April 19, 2018, 4:45 pm
जिन्होंने मुझसे सीखा था ककहरा अपने जीवन का जिन्हे हमने दिखाया था, दर्पण उनके निज-मन का समय  बीता,  दृष्टि रूठी,  हृदय  की  धड़कने बदलीं वो देखो आज आये हैं,  लिए हाथों  में  सिर 'जय'का http://kadaachit.blogspot.in/ ...
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  April 19, 2018, 3:36 pm
एक नन्हा सा पंछी बैठा था एक टहनी पर चुपचाप प्रकृति की गोद में बुन रहा था सपनों का आकाशऊपर ऊँचाई पर उड़ती चीलों को देख स्वयं से बोलाएक दिन मुझे भी स्पर्श करना है यह अनन्त आकाशअन्य रंगीले पक्षियों के साथ मैं भी कलरव करूँगासागर के असीम जल में नहाउँगा, गोते लगाऊँगाविश्व क...
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  April 19, 2018, 12:03 pm
=== मलंग ===पुष्प से सुगंध कोमन से अंतरंग कोमधुप से पराग कोमुझसे मेरी आग कोकैसे  मैं उधार दूँ ?या इन्हे ही मार दूँ !ठिठक गए हैं कदमपूर्ण सजग किन्तु मनबदल रहे हैं  रंग ढंगशशक से बना कुरंग ||1||सिंधु हो, अनंग होशुभ्र हो, बहुरंग होविकटता की छाप होया बदरंग अलाप होचाहे...
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  April 18, 2018, 11:43 pm
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