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तो भईये किस्सा ये है कि दिल्ली के एक लड़के को उसकी मां ने साईकिल चलाने से मना कर दिया क्योंकी उसका पंजा कमजोर था और वो अपने कुर्ते की जेब भी फाड़ लिया करता था. हां उसे साईकिल पे बैठने की इजाजत थी. UP के एक लड़के को उसका बाप सायकिल चलाना सिखा रहा था... पीछे से कैरियर पकड़ के. एक दिन...
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अजय कुमार
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  March 12, 2017, 10:39 am
                                                     (74)वर्षो पहले शायद छठी या सातवीं कक्षा में था ,एक किताब पढ़ी थी -लोहा सिंह | भोजपुरी भाषा में लिखित पुस्तक के लेखक थेश्री रामेश्वर सिंह कश्यप | बहुत दिनो...
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अजय कुमार
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  November 6, 2014, 2:27 pm
                         ( 73 ) कुछ लोग बड़े ---होते हैं ,कुछ लोग बड़े --हो जाते हैं कुछ लोग बड़े --बना दिये जाते हैं ,कुछ लोग बड़े --बताये जाते हैं कुछ लोगों को ---बड़ा दिखने का, होता है मानसिक रोग |अपने आस-पास रखते हैं , छोटे लोग ||अपने से बड़ों को , करते हैं नापसंद |क्षुद्र मानसिकत...
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अजय कुमार
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  July 17, 2014, 7:03 am
                                                         (72)पैरोडी की तर्ज है --फ़िल्म 'गोपी'से"रामचन्द्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग आयेगाहंस चुनेगा दान तिनका ,कौव्वा मोती खायेगा "********************************************फिर चुनाव का मौसम आया ,सब नेता चिल्लायेगा |भोला भाला आम आदमी...
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अजय कुमार
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  April 20, 2014, 12:45 pm
                                           (71 )खेलती थी ,मेरी गोदी में अक्सर |चहकती थी ,जो घर आँगन में दिनभर ||उसकी शादी , विदाई हो गयी है | मेरी बेटी , परायी हो गयी है ||मेरी तितली , मेरी नन्ही सी चिड़िया |टहलती थी , लिए हाथों मे...
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अजय कुमार
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  March 2, 2014, 5:00 pm
                                (70)नाम बदलने से --कोई नया हो जाता है ?करवट बदलने से क्या हो जाता है ?तुम-- दो हजार तेरह से , दो हजार चौदह हो जाओगे तो क्या --भय,भूख,भ्रष्टाचार से मुक्त हो जाओगे ?दल्ले ,देश बेचकर मालामाल हो रहे हैं |योग्य,पलाय...
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अजय कुमार
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  December 31, 2013, 12:43 pm
                   (६९ )सुबह मिलना था पर आपने,आज फिर दोपहर कर दिया |चंद कमरों का था ये मकां,आपने इसको घर कर दिया ||हुस्न से अपने थी बेखबर जब जवानी की आहट हुईखुशबू ऐसी बदन से उठी शहर को बाखबर कर दिया ||उनके गर्दन से लिपटा था जो  एक झोंके से लहरा गया ...
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अजय कुमार
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  December 21, 2013, 1:04 pm
                                                  (६८) मन्ना डे के जाने के बाद संगीत के सुनहरे दौर के महान गायकों की आख़िरी कड़ी भी आज बिखर गयी | प्रबोध चन्द्र डे उर्फ मन्ना डे का जन्म एक मई 1920 को कोलकाता में हुआ था। संशाधन होते हुए भी उसका उपयोग न होना , इसका ज...
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अजय कुमार
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  October 24, 2013, 10:56 am
                 ( ६७  )सोचता हूँ कि तुम्हें ,प्यार इतना न करूं |छुपके देखा न करूं ,फूल से मारा न करूं ||अदाएं हुश्न की , तेरी हैं ,इस कदर कातिलकि मैंने सोच लिया , वक्त को जाया न करूं ||मैंने सोचा कि तुम्हें प्यार से देखूं न कभी |कोई  तस्वीर तेरी , पास में रक्खूं न कभी |अ...
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अजय कुमार
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  September 8, 2013, 6:07 pm
                                                   (66)बात होती थी और बस बात ही होकर रह जाती थी ,लेकिन जहां चाह - वहाँ राह की तर्ज पर एक दिन बात बन ही गयी ,और फिर चार  ऊर्जावान मित्रों की टोली , सपत्नीक ,मय बाल-बच्चों के कूच कर गयी --महाबलेश्वर और पंचगनी के ल...
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अजय कुमार
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  August 18, 2013, 5:37 pm
                            (६५)हर शाम हो जैसे गजलों का ,हर रात हो जैसे पूनम की |दिल मेरा तेज धड़कता है , जब झलक दिखे मेरे साजन की ||इक गीत प्यार का होठों परइक जाम प्यार का आँखों में |साँसों में फूलों की खुशबू ,अंदाज प्यार का बातों में ||मिल गया मुझे पूरा सागर ,ख्वाहिश ...
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अजय कुमार
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  July 7, 2013, 1:00 pm
              ( ६४ ) मैंने तुम्हे दिल में क्यों बसाया तुमने --कभी रुलाया तो कई बार , हंसाया अनगिनत बार तुम मेरे सुख -दुःख का कारण बने चाहकर भी मैं तुमसे विमुख नहीं हो सकता क्यों की हे क्रिकेटतुम नहीं हो गंदे -----गंदे हैं तुम्हारे चंद नुमाइन्दे----हम उस दौर में जी रहे हैं जहां --पैसा ,व्...
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अजय कुमार
Tag :अपनी बात
  May 17, 2013, 11:28 am
जब तुम नहीं तो ये शहर, वीरान बहुत है |तुम हो तो इस शहर में भी , जान बहुत है ||मुझको बताओ दिल में मेरे दर्द क्यूं उठासुनते है तुम्हें दर्द की पहचान बहुत है ||करना है आपको ही मेरे दर्द का इलाज |बस मुस्कुराके देखिये , आसान बहुत है ||रहती है इस गली में , कोई शोख हसीना |कमसिन सी , अपने हु...
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अजय कुमार
Tag :जवां दिल
  February 10, 2013, 11:13 am
जब तुम नहीं तो ये शहर, वीरान बहुत है |तुम हो तो इस शहर में भी , जान बहुत है ||मुझको बताओ दिल में मेरे दर्द क्यूं उठासुनते है तुम्हें दर्द की पहचान बहुत है ||करना है आपको ही मेरे दर्द का इलाज |बस मुस्कुराके देखिये , आसान बहुत है ||रहती है इस गली में , कोई शोख हसीना |कमसिन सी , अपने हु...
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अजय कुमार
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  February 10, 2013, 11:13 am
जीवन की आपाधापी में ,कोई मुझसे मिला अनजाना सा |उसकी आँखें , उसकी वो अदा ,उसका चेहरा पहचाना सा ||वो थोड़ा सा शरमाया भीदेखा मुझको ,मुस्काया भीमुस्कान लगा मुझको जैसेकुछ फूलों का खिल जाना सा ||आँखों में उसके राज नयाबातों का इक अंदाज नयाआँखों में अपनापन देखाअंदाज लगा पहचाना सा...
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अजय कुमार
Tag :यादों की गठरी
  January 6, 2013, 10:54 am
जीवन की आपाधापी में ,कोई मुझसे मिला अनजाना सा |उसकी आँखें , उसकी वो अदा ,उसका चेहरा पहचाना सा ||वो थोड़ा सा शरमाया भीदेखा मुझको ,मुस्काया भीमुस्कान लगा मुझको जैसेकुछ फूलों का खिल जाना सा ||आँखों में उसके राज नयाबातों का इक अंदाज नयाआँखों में अपनापन देखाअंदाज लगा पहचाना सा...
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अजय कुमार
Tag :
  January 6, 2013, 10:54 am
किसी की मां , बहन , बेटी ,किसी का प्यार --लड़कीगर्भ में असुरक्षितघर में भेदभाव का शिकार --लड़की ||बेटियों की ह्त्या , गर्भ में की जाती हैभ्रूण-ह्त्या तो अपराध है |ये हत्यारे कोई सजा नहीं पाते ,हे व्यवस्था तुझे साधुवाद है -------एक लड़की इन सबसे बचकर , आगे बढ़ रही थीदो- चार सीढियां च...
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अजय कुमार
Tag :अपनी बात
  December 23, 2012, 3:13 pm
चांदनी का शमां ये सुहाना , जाने किसको बनाये दीवाना ।देखकर मुझको तिरछी नजर से , दिल में सीधे उतरती हो जांनां ॥मैं हूं आशिक तेरा हुश्नवाले , अपनी आंखों में मुझको बसा ले ।ये निगाहें तेरी जादुई हैं , ये निगाहें तेरी कातिलाना ॥आज पीने दे जी भर के साकी , कल से छोड़ुंगा पीना मैं स...
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अजय कुमार
Tag :जवां दिल
  August 26, 2012, 11:04 am
है बहारों का शमां , ऐ सनम आ जाइये ।मुस्कुराना हुश्न का जेवर है , कुछ मुस्काइये ॥आप के बिन महफिलों में , आती नहीं बहार है ,शाम-ए-महफिल में जरा , कुछ देर को आ जाइये ॥आप आती हैं तो रौनक , दिल में मेरे आती है ,दिल का कहना है कि बस , कुछ और ठहर जाइये ॥पास मेरे कुछ नहीं है ,धड़कते दिल के स...
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अजय कुमार
Tag :जवां दिल
  August 5, 2012, 11:25 am
आज समाज में रावणों की संख्या बढ़ रही है , तरह तरह के रावण सामने आ रहे हैं । लगता है जैसे इनके दस नहीं असंख्य सिर हो गये हैं । ऐसे समय में दीपावली की महत्ता और विस्तार से तथा नये अर्थों में परिभाषित करने की जरूरत है ,जिससे आने वाली पीढ़ियां इससे लाभ उठा सकें । आज दीपावली के शुभ...
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अजय कुमार
Tag :विरासत
  October 26, 2011, 11:32 am
तुम बिन तुम्हारी याद में ,पीते हैं सदा गम ।इजहार-ए-इश्क तुमसे ,क्यूं कर न सके हम ॥जब हो न सके मुझको ,दीदार तुम्हारा ।दिन भर तेरी तस्वीर का करते हैं नजारा ।रातों को तेरी याद में , जलते हैं सदा हम ॥आँखों से छलकते हैं तेरे ,जाम के प्याले ।चेहरे की चमक से तेरे , फैले हैं उजाले ।है ...
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अजय कुमार
Tag :जवां दिल
  October 9, 2011, 9:51 am
                                            -५६-आप सब के सहयोग और शुभकामनाओं के साथ आज १९ सितम्बर २०११ को यह ब्लाग तीसरे वर्षमें प्रवेश कर रहा है।आप सबका आभार प्रकट करता हूं तथा विश्वास दिलाता हूं कि  अच्छा लिखने का प्रयास करता रहुंगा ।इस वर्ष हमारे देश से "चवन्नी" खत्म हो ग...
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अजय कुमार
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  September 19, 2011, 1:11 pm
                                            -५६-आप सब के सहयोग और शुभकामनाओं के साथ आज १९ सितम्बर २०११ को यह ब्लाग तीसरे वर्षमें प्रवेश कर रहा है।आप सबका आभार प्रकट करता हूं तथा विश्वास दिलाता हूं कि  अच...
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अजय कुमार
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  September 19, 2011, 1:11 pm
                                 -५५-दिन भर तेरी याद का आलम ,उलझन भी तन्हाई भी ।उस पर ये पूनम की रातें ,सावन की पुरुवाई भी ॥अब तो वक्त कटेगा मेरा ,उन आँखों की चाहत में ।जिनमें है खंजर की ताकत ,झीलों की गहराई भी ॥तुम बतलाओ क्या बोलूं मैं , करूं शुक्रिया या शिकवा ।तुमसे मिलकर चैन भी आत...
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अजय कुमार
Tag :जवां दिल
  August 28, 2011, 12:49 pm
                        -५४-जिसने तेरी ज़ुल्फों , में ये फूल लगाया है।उसने तुम्हें चाहा है , दिल मेरा जलाया है॥जी भर के मैंनें चूमा , जो फूल तुमने भेजा।मैंनें तेरे तोहफे को , सीने से लगाया है॥हर पूछने वाले से , इतना ही कहुंगा मैं।मैंनें तुम्हें चाहा है , इस दिल में बसाया है॥वो कभी ...
गठरी...
अजय कुमार
Tag :पुराने-पन्ने
  July 31, 2011, 12:41 pm
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  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
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