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Blog: BEST OUT OF YOU

Blogger: ashwani kumar
उस दिन हम  जब अचानक आमने सामने थे ,तुम्हारी खामोश निगाहों मेंएक खामोश शिकवा था न मेरे लिए ? कितनी खूबी से तुमने उसे छिपा लियाअपनी पलकों में ।और यूँ मिली मुझसेजैसे कभी कोई शिकवा न था ।शिकवा न था कोईतो फिर वो दूरियां क्यों थी ?मिलते हैं फिर कभी ,ये कह के तुम चल तो दीं ।मगर क... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   4:42pm 21 Jan 2018 #
Blogger: ashwani kumar
जबकि तुझ बिन नही कोई मौंजूफिर ये हंगामा ए जुदा क्या है....तू है फेसबुक पे और है भी नहींतो फिर ये आखिर हुआ  क्या है ?माना तेरा जन्म दिन है कलपर आज ही मुझे ये हुआ क्या है ?पड़ा हूँ बिस्तर पे औ आ रहे हैं चक्करया इलाही ये माजरा क्या है ?लोग जीते है जी जी के मरते हैमैं मर मर के जी रहा ... Read more
clicks 68 View   Vote 0 Like   2:26pm 28 May 2017 #
Blogger: ashwani kumar
जिस मोड़ पे मुझे छोड़ के -- तुम खो गए इस राह पे मैं खड़ा रहा ठगा हुआ - ठिठका हुआ - सहमा हुआ हैरां था , परेशां था , वीरान सी इस राह पे - अब क्या करूं -- जाऊं किधर - इस राह पर ,सवाल थे जवाब थे - मेरे पास थे - थे नहीं बस तुम मगर -जाऊं किधर ? अब पूछूँ किधर ? इस राह पर ,तू अदीब था या था राहबर या था बेव... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   2:07pm 7 Nov 2016 #
Blogger: ashwani kumar
सर   !सर   !सर   !मुझे लगता है डर ,आपसे नही , अपने आप से, लगता है डर ,क्यूँ कि मैं खोज रही हूँ ,जो  उत्तर ,वो  छिपा है , कंही किसी कोने में ,मेरे ह्रदय के --- पर ,मैं ढूंढ़ रही हूँ उसे ,और प्रयोग कर रही हूँ ,  अपना सर !... Read more
clicks 214 View   Vote 0 Like   4:47pm 9 Oct 2013 #
Blogger: ashwani kumar
               तू मुझे कितना हैरां कर देती है -- अभी ही तो तू आई थी ,                   एक खुशनुमा हवा के झोंके की तरह - और भर दिया था तूने मुझे -               मेरी सांसो को कर दिया था ओतप्रोत - प्राणों से - बाहर से भीतर - भीतर से बाहर,          ... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   6:20am 10 Sep 2013 #
Blogger: ashwani kumar
मैं तो ये सोचकर तेरे पास आया था ,            कि  तू एक प्रेम की झील है--पर अभी एक कदम ही तो बढ़ा था तेरी तरफ ,           कि  चाँदनी अभी बिखरी ही थी - यकायक ,मुझे खुद पे यकीन न रहा ,  इतना नूर था - तेरे आसपास -- तेरे करीब ,जैसे कोहेनूर हो कोई ख़ास --कि जैसे ताज - महल ... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   4:03am 17 Aug 2013 #
Blogger: ashwani kumar
हे देवी ! सौन्दर्य अधिष्ठात्री ,   मम ह्रदयं त्वं , मम ह्रदयं त्वं,त्वं संग वार्तालाप करोमि ,  जीवन प्रफ्फुलित , जीवन प्रफ्फुलित,त्वं संग भ्रमणं गच्छामि ,     ह्रदयं उल्लसित, ह्रदयं उल्लसित ... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   8:37am 14 Aug 2013 #
Blogger: ashwani kumar
नहीं , मुझे बर्दाश्त नही कोई भी - तुम्हारे मेरे दरमियाँ ,-- कोई भी ,    तभी तो भटकता फिर रहा हूँ मैं -- तुम्हारे  और मेरे दरमियाँ-कभी तुम तक - कभी  खुद तक ,     पर क्या करूं - क्या कहूँ तुमसे ,तुम्ही तो ले आती हो इन सब को - तुम्हारे मेरे दरमियाँ,तुम्हारे साथ ये न जाने कौन... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   8:21pm 10 Aug 2013 #
Blogger: ashwani kumar
बहूत खूबसूरत हो तुम, बहुत खूबसूरत हो तुम !कभी मैं जो कह दूं मोहब्बत है तुम से !तो मुझको खुदारा गलत मत समझना !के मेरी जरुरत हो तुम, बहुत खूबसूरत हो तुम !है फ़ुलों की डाली, ये बाहें तुम्हारी !है खामोश जादू निगाहें तुम्हारी !है खामोश जादू निगाहें तुम्हारी !नज़र से जमाने की खुद को... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   3:07pm 31 Jul 2013 #
Blogger: ashwani kumar
नहीं मैं तन्हा तो नहीं ,       मेरे साथ हैं इस -फेस बुक पे निरंतर होते -स्टेटस अपडेट-       मेरी सबसे अजीज़ गर्ल फ्रेंड ---"जागो - यही एकमात्र कार्य है ,       मित्र 1 - फिल्म पहचानो प्रतियोगिता       मित्र 2 - चलाओ न नैनो के बाण रे       मित्र 3 - संता बंता क... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   6:34am 30 Jul 2013 #
Blogger: ashwani kumar
इक ग़ज़ल उस पे लिखूँ दिल का तकाज़ा है बहुतइन दिनों ख़ुद से बिछड़ जाने का धड़का है बहुतरात हो दिन हो ग़फ़लत हो कि बेदारी हो उसको देखा तो नहीं है उसे सोचा है बहुततश्नगी के भी मुक़ामात हैं क्या क्यायानी कभी दरिया नहीं काफ़ी, कभी क़तरा है बहुतमेरे हाथों की लकीरों के इज़ाफ़े... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   4:38am 28 Jul 2013 #
Blogger: ashwani kumar
आओ - तुम मेरे हृदय में समा जाओतुम खोज रहे हो सत्य को - जो पोशीदा है मेरे सीने में ,और वे तमाम असत्य भी , जिनको नकार कर ,तुमने बेदखल कर दिया है , अपनी अक्ल से ,आओ और जान लो ये भी -कि इस जगत में कुछ भी तो स्थिर नहीं ,तुम्हारे या मेरे - उसके या इसके -,या किसी के भी सत्य - असत्य ,कब मौका देख... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   5:07pm 16 May 2013 #
Blogger: ashwani kumar
                    वेलेंटाइन डे की इस पावन वेला में ,                 कल्पना में ही सही,                                                मुझे अपने आगोश में लेकर सो जाना               और कोई च... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   5:29pm 14 Feb 2013 #
Blogger: ashwani kumar
मैं अक्सर जब लोगों से मिलता हूँ , जंहा कंही जाता हूँमुझे बड़े अच्छे लोग मिलते हैं ,बड़े प्यारे लोग - देश की दशा से परेशान -हैरान , मेरी तरहमेरे देश का आम आदमी कितना सीधा - भोला -शरीफ इंसान है - ठीक मेरी तरह .कभी सफ़र करो , बस या ट्रेन में ,कितना डिस्कशन देश की दशा - भ्रष्टाचार -राजनीत... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   5:22pm 20 Dec 2012 #
Blogger: ashwani kumar
वो हवाओं में गुनगुनाएगा - तुम सुन भी सकते होवो फिजाओं में----महक जायेगा ,फिर उस महक को तुम भर लेना अपनी बांहों मेंवो यूँ भी मिल जायेगाआये न आये तुम्हारे पास - ऐ जिन्दगीवो हवाओं में गुनगुनाएगा---... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   8:26am 23 Nov 2012 #
Blogger: ashwani kumar
२६जनवरी१९५०कोभारतमेंहमारेपूर्वजोंनेसंवैधानिकघोषणाकीकिभारतएकलोकतान्त्रिकगणतंत्रहोगा।१९५०से२०१०इनसाठसालोंकेगुजरजानेकेबाद -वर्ष२०११ -१५अगस्तआजादीकी६४वीसालगिरहकेठीकएकदिनबाद१६अगस्त२०११ ------------------------यकायक ----६४सालसेइसदेशकिव्यवस्थामेंनासूरबनचुकेभ्रष्... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   9:32am 19 Aug 2011 #
Blogger: ashwani kumar
कौनयेजारहामौन --------------होबेटा -ओबैरी - हाजीजीइनतमामकरुणक्रन्दनोकेबीचअसम्प्रकत- वीतरागसाशुभ्रवसनमीत ---कौनयेजारहामौन ,मृत्युकेमहानुष्ठानमेंदेरहाहवि--अचेत ,हरपलहरघड़ीमानवताकिसेवामेंसंलग्न ,यामायामोहमेंनिमग्न ,पारहास्वयंकोनिर्लिप्तयोगीसा -याकर्मनिष्ठ ---कौनये... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   7:32am 13 Aug 2011 #डॉक्टर
Blogger: ashwani kumar
Jai Sivananda: My daughter never learnt yoga from me:)... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   5:00pm 26 Apr 2011 #
Blogger: ashwani kumar
मैं था - मेरा जूनून था - और था - इश्के रूहानी ,तू कंहाँ था - कंहाँ तेरी फ़िक्र - कंहाँ थी तेरी कहानी ,फिर तब - क्यों तेरी तब्बसुम - एक आगोश में बदली ,बस सिर्फ़ तू था -- तेरी फिकर- और बस तेरी कहानी ,मुस्कराहटें - और सरगोश्याँ - खामोशियाँ ये तो पहचानी ,न पहचानी तो मेरी अक्ल- फरके मज़ाजो इ... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   4:38pm 13 Jun 2008 #
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